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आईपीसी की धारा 382 | चोरी करने के लिए मृत्यु, उपहति या अवरोध कारित करने की तैयारी के पश्चात चोरी | IPC Section- 382 in hindi | Theft after after p made for causing death, hurt or restraint in order to the committing of the theft.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपको आईपीसी की रोचक धारा के बारे में बताएंगे। जो कोई चोरी करने के लिए, या चोरी करने के पश्चात् निकल भागने के लिए, या चोरी की हुई संपत्ति को रखने के लिए किसी व्यक्ति को मृत्यु का भय दिखाकर या चोट पहुंचाकर या भय कारित करके चोरी करने की तैयारी करेगा तो वह भारतीय दण्ड संहिता की धारा 382 के अंतर्गत दंडनीय होगा, साथ ही वह कारावास और जुर्माने अथवा दोनो से दंडित किया जाएगा। आइए जानते है, क्या कहती है ? धारा 382 साथ ही सम्पूर्ण जानकारी आपको इस लेख के माध्यम से देंगे।

धारा 382 का विवरण

भारतीय दण्ड संहिता (IPC) में आज हम बात करेंगे धारा 382 के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। यदि कोई चोरी करने के लिए किसी की मृत्यु का भय दिखाकर या चोट देकर या भय कारित करके चोरी करने की तैयारी करके चोरी करता तो वह व्यक्ति भारतीय दण्ड संहिता की धारा 382 के अंतर्गत अपराधी होगा। इस लेख के माध्यम से हम आपको दंड, जमानत कैसे मिलेगी और इत्यादि की जानकारी आप को देगें। ।

आईपीसी की धारा 382 के अनुसार-

चोरी करने के लिये मृत्यु, उपहति या अवरोध कारित करने की तैयारी के पश्चात् चोरी-

जो कोई चोरी करने के लिये, या चोरी करने के पश्चात् निकल भागने के लिए, या चोरी द्वारा ली गई सम्पत्ति को रखे रखने के लिये, किसी व्यक्ति की मृत्यु या उसे उपहति या उसका अवरोध कारित करने की, या मृत्यु का, उपहति का, या अवरोध का भय कारित करने की तैयारी करके चोरी करेगा, वह कठिन कारावास से, जिसकी अवधि दस वर्ष तक की हो सकेगी, दण्डित किया जाएगा और जुर्माने से भी दण्डनीय होगा।

Theft after preparation made for causing death, hurt or restraint in order to the committing of the theft-
Whoever commits theft, having made preparation for causing death, or hurt, or restraint, or fear of death, or of hurt, or of restraint, to any person, in order to the committing of such theft, or in order to the effecting of his escape after the committing of such theft, or in order to the retaining of property taken by such theft, shall be punished with rigorous imprisonment for a term which may extend to ten years, and shall also be liable to fine.

दृष्टान्त

(क) य के कब्जे में की सम्पत्ति पर क चोरी करता है और यह चोरी करते समय अपने पास अपने वस्त्रों के भीतर एक भरी हुई पिस्तौल रखता है, जिसे उसने य द्वारा प्रतिरोध किए जाने की दशा में यकी उपहति करने के लिए अपने पास रखा था। क ने इस धारा में परिभाषित अपराध किया है।

(ख) क, य की जेब काटता है, और ऐसा करने के लिए अपने कई साक्षियों को अपने पास इसलिए नियुक्त करता है कि यदि य यह समझ जाए कि क्या हो रहा है और प्रतिरोध करे, या क को पकड़ने का प्रयत्न करे, तो वह वे य का अवरोध करें। क ने इस धारा में परिभाषित अपराध किया है।

लागू अपराध

चोरी करने के लिए या उसके करने के या नियोक्ता के कब्जे की सम्पत्ति को रखे रखने के लिए मृत्यु या उपहति कारित करने या अवरोध कारित करने अथवा मृत्यु या उपहति या अवरोध का भय कारित करने की तैयारी के पश्चात्, चोरी।
सजा- दस वर्ष के लिए कठोर कारावास और जुर्माना, अथवा दोनो का भागीदार होगा।
यह एक गैर जमानती, संज्ञेय अपराध है और प्रथम श्रेणी के मजिस्ट्रेट द्वारा विचारणीय है।
यह अपराध समझौते योग्य नही है।

सजा (Punishment) का प्रावधान

जो कोई किसी की संपत्ति चोरी करने के लिए किसी व्यक्ति को मृत्यु का भय दिखाकर या चोट पहुंचाकर अथवा चोरी करने के लिए भय कारित करके चोरी की योजना बना कर चोरी करता है तो वह व्यक्ति दस वर्ष के लिए कठोर कारावास और जुर्माना अथवा दोनो का भागीदार हो सकता है।

जमानत (Bail) का प्रावधान

यह अपराध एक गैर जमानतीय, संज्ञेय अपराध की श्रेणी में आता है। यह अपराध गैर जमानतीय होने के कारण जमानत आसानी से नही मिल पाएगी। न्यायालय द्वारा ट्रायल के पश्चात् ही दोषी या निर्दोष साबित होगा।

अपराधसजाअपराध श्रेणीजमानतविचारणीय
चोरी करने के लिए या उसके करने के या नियोक्ता के कब्जे की सम्पत्ति को रखे रखने के लिए मृत्यु या उपहति कारित करने या अवरोध कारित करने अथवा मृत्यु या उपहति या अवरोध का भय कारित करने की तैयारी के पश्चात्, चोरी।दस वर्ष के लिए कठोर कारावास और जुर्माना, अथवा दोनो।संज्ञेयगैर-जमानतीयप्रथम श्रेणी के मजिस्ट्रेट द्वारा

हमारा प्रयास आईपीसी की धारा 382 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी , फिर भी अगर आपके पास कोई सवाल हो,तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है ।

आईपीसी की धारा 144 | घातक आयुध से सज्जित होकर विधिविरुद्ध जमाव में सम्मलित होना | IPC Section- 144 in hindi | Joining unlawful assembly armed with deadly weapon.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपको आईपीसी की रोचक धारा के बारे में बताएंगे। जो कोई किसी घातक आयुध के साथ विधिविरुद्ध जमाव में सम्मलित होता है या सदस्य होगा तो वह भारतीय दण्ड संहिता की धारा 144 अप्लाई होती है, जिसके अंतर्गत ही अपराधी को कारावास और जुर्माने अथवा दोनो से दंडित किया जाएगा। आइए जानते है, क्या कहती है ? धारा 144 साथ ही सम्पूर्ण जानकारी आपको इस लेख के माध्यम से देंगे।

धारा 144 का विवरण

भारतीय दण्ड संहिता (IPC) में आज हम बात करेंगे धारा 144 के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। जब कोई व्यक्ति का समूह घातक हथियार के साथ किसी विधिविरुद्ध जमाव में शामिल होता है अथवा उसका सदस्य बनेगा, जबकि उसे ज्ञात है कि इससे किसी की मृत्यु भी हो सकती है, फिर भी घातक हथियार के साथ शामिल होगा तो वह व्यक्ति भारतीय दण्ड संहिता की धारा 144 के अंतर्गत अपराधी होगा। इस लेख के माध्यम से हम आपको दंड, जमानत कैसे मिलेगी और इत्यादि की जानकारी आप को देगें। ।

आईपीसी की धारा 144 के अनुसार-

घातक आयुध से सज्जित होकर विधिविरुद्ध जमाव में सम्मिलित होना-

जो कोई किसी घातक आयुध से, या किसी ऐसी चीज से, जिससे आक्रामक आयुध के रूप में उपयोग किए जाने पर मृत्यु कारित होनी सम्भाव्य है, सज्जित होते हुए किसी विधिविरुद्ध जमाव का सदस्य होगा, वह दोनों में से किसी भाँति के कारावास से, जिसकी अवधि दो वर्ष तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, या दोनों से, दण्डित किया जाएगा।

Joining unlawful assembly armed with deadly weapon-
Whoever, being armed with any deadly weapon, or with anything which, used as a weapon of offence, is likely to cause death, is a member of an unlawful assembly, shall be punished with imprisonment of either description for a term which may extend to two years, or with fine, or with both.

लागू अपराध

किसी घातक आयुध से सज्जित होकर विधिविरुद्ध जमाव में सम्मिलित होना।
सजा- दो वर्ष का कारावास या जुर्माना अथवा दोनो।
यह एक जमानती, संज्ञेय अपराध है और सेशन न्यायालय द्वारा विचारणीय है।
यह अपराध समझौते योग्य नही है।

सजा (Punishment) का प्रावधान

जब कोई व्यक्ति किसी घातक हथियार साथ लेकर किसी गैर कानूनी सभा में भाग लेता है या उपस्थित होता है, जबकि उसे ज्ञात है, कि इससे किसी की जान भी जा सकती है, फिर भी घातक हथियार लेकर शामिल होता है तो वह व्यक्ति दो वर्ष के लिए कारावास या जुर्माने से, या दोनों दंडनीय होगा।

जमानत (Bail) का प्रावधान

जब कोई व्यक्ति ऐसे किसी गैर कानूनी सभा में घातक हथियार सहित शामिल होता है, जबकि उसे ज्ञात है कि ऐसे में कुछ भी हो सकता है फिर भी शामिल होता है तो इस तरह के मामले में पुलिस द्वारा धारा 144 के अंतर्गत FIR दर्ज करके अपराधी व्यक्ति को अरेस्ट करती हैं और मामले की पूर्ण जांच करके न्यायालय को चार्जशीट पेश करती है, इसलिए अच्छे वकील से सलाह लेकर जमानत करानी पड़ेगी और साथ ही यह अपराध एक जमानतीय, संज्ञेय अपराध की श्रेणी में आता है। यह अपराध जमानतीय होने के कारण जमानत आसानी से मिल जाएगी।

अपराधसजाअपराध श्रेणीजमानतविचारणीय
किसी घातक आयुध से सज्जित होकर विधिविरुद्ध जमाव में सम्मिलित होना।दो वर्ष का कारावास या जुर्माना अथवा दोनो।संज्ञेयजमानतीयसेशन न्यायालय द्वारा

हमारा प्रयास आईपीसी की धारा 144 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी , फिर भी अगर आप के पास कोई सवाल हो,तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है ।

आईपीसी की धारा 145 | किसी विधिविरुद्ध जमाव में यह जानते हुए कि उसके बिखर जाने का समादेश दे दिया गया है, सम्मिलित होना या उसमे बने रहना | IPC Section- 145 in hindi | Joining or continuing in unlawful assembly, knowing it has been commanded to disperse.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपको आईपीसी की रोचक धारा के बारे में बताएंगे। जो कोई किसी विधिविरुद्ध जमाव में सम्मलित है, जबकि गैरकानूनी सभा को समाप्त करने का आदेश पहले ही हो चुका है, फिर भी वह सम्मिलित होता है अथवा उसमे बना रहता है तो वह भारतीय दण्ड संहिता की धारा 145 अप्लाई होती है, जिसके अंतर्गत ही अपराधी को कारावास और जुर्माने अथवा दोनो से दंडित किया जाएगा। आइए जानते है, क्या कहती है ? धारा 145 साथ ही सम्पूर्ण जानकारी आपको इस लेख के माध्यम से देंगे।

धारा 145 का विवरण

भारतीय दण्ड संहिता (IPC) में आज हम बात करेंगे धारा 145 के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। जब कोई व्यक्ति किसी गैरकानूनी समूह या किसी विधिविरुद्ध जमाव में शामिल होता है, जबकि उस सभा या समूह को पहले ही गैर कानूनी होने के कारण बंद के आदेश दिए जा चुके फिर भी उस सभा में बना रहता है या सम्मिलित होता है तो वह व्यक्ति भारतीय दण्ड संहिता की धारा 145 के अंतर्गत अपराधी होगा। इस लेख के माध्यम से हम आपको दंड, जमानत कैसे मिलेगी और इत्यादि की जानकारी आप को देगें। ।

आईपीसी की धारा 145 के अनुसार-

किसी विधिविरुद्ध जमाव में यह जानते हुए कि उसके बिखर जाने का समादेश दे दिया गया है, सम्मिलित होना या उसमें बने रहना-

जो कोई किसी विधिविरुद्ध जमाव में यह जानते हुए कि ऐसे विधिविरुद्ध जमाव को बिखर जाने का समादेश विधि द्वारा विहित प्रकार से दे दिया गया है, सम्मिलित होगा, या बना रहेगा, वह दोनों में से किसी भाँति के कारावास से, जिसकी अवधि दो वर्ष तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, या दोनों से, दण्डित किया जाएगा।

Joining or continuing in unlawful assembly, knowing it has been commanded to disperse-
Whoever joins or continues in an unlawful assembly, knowing that such unlawful assembly has been commanded in the manner prescribed by law to disperse, shall be punished with imprisonment of either description for a term which may extend to two years, or with fine, or with both.

लागू अपराध

किसी विधिविरुद्ध जमाव में यह जानते हुए कि उसके बिखर जाने का समादेश दे दिया गया है, सम्मिलित होना या उसमें बने रहना।
सजा- दो वर्ष का कारावास या जुर्माना अथवा दोनो।
यह एक जमानती, संज्ञेय अपराध है और किसी भी वर्ग के मजिस्ट्रेट द्वारा विचारणीय है।
यह अपराध समझौते योग्य नही है।

सजा (Punishment) का प्रावधान

जब कोई व्यक्ति गैर कानूनी सभा में भाग लेता है या उपस्थित होता है, जबकि उस सभा को पहले ही सभा को कानूनी रूप से बंद करने का आदेश भी दे दिया है, फिर भी कोई शामिल होता है या सभा में बना रहता है तो वह व्यक्ति दो वर्ष के लिए कारावास या जुर्माने से, या दोनों दंडनीय होगा।

जमानत (Bail) का प्रावधान

जब कोई व्यक्ति ऐसे किसी गैर कानूनी सभा शामिल होता है, जबकि उस सभा को पहले ही निरस्त किया जा चुका है, फिर भी शामिल होता है या सभा में बना रहता है तो इस तरह के मामले में पुलिस द्वारा धारा 145 के अंतर्गत FIR दर्ज करके अपराधी व्यक्ति को अरेस्ट करती हैं और मामले की पूर्ण जांच करके न्यायालय को चार्जशीट पेश करती है, इसलिए अच्छे वकील से सलाह लेकर जमानत करानी पड़ेगी और साथ ही यह अपराध एक जमानतीय, संज्ञेय अपराध की श्रेणी में आता है। यह अपराध जमानतीय होने के कारण जमानत आसानी से मिल जाएगी।

अपराधसजाअपराध श्रेणीजमानतविचारणीय
किसी विधिविरुद्ध जमाव में यह जानते हुए कि उसके बिखर जाने का समादेश दे दिया गया है, सम्मिलित होना या उसमें बने रहना।दो वर्ष का कारावास या जुर्माना अथवा दोनो।संज्ञेयजमानतीयकिसी भी वर्ग के मजिस्ट्रेट द्वारा

हमारा प्रयास आईपीसी की धारा 145 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी , फिर भी अगर आपके पास कोई सवाल हो,तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है ।

आईपीसी की धारा 380 | निवास-गृह आदि में चोरी |IPC Section- 380 in hindi | Theft in dwelling-house, etc.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपको आईपीसी की रोचक धारा के बारे में बताएंगे। भारतीय दंड संहिता में चोरी भी अलग अलग से साधारण भाषा में परिभाषित किया गया है। इसी तरह से धारा- 380 के अंतर्गत जो कोई किसी व्यक्ति के निवास या ऐसे किसी निर्माण जैसे तंबू या जलयान मानव विकास के रूप में, या संपत्ति की अभिरक्षा के लिए उपयोग में आता हो, चोरी करता है जिसके लिए वह भारतीय दण्ड संहिता की धारा 380 के अंतर्गत दंडनीय होगा, साथ ही वह कारावास और जुर्माने अथवा दोनो से दंडित किया जाएगा। आइए जानते है, क्या कहती है ? धारा 380 साथ ही सम्पूर्ण जानकारी आपको इस लेख के माध्यम से देंगे।

धारा 380 का विवरण

भारतीय दण्ड संहिता (IPC) में आज हम बात करेंगे धारा 380 के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। यदि कोई व्यक्ति किसी के निवास स्थल, दुकान और प्रतिष्ठान जैसे मानव विकास के रूप में संपत्ति की रक्षा का उपयोग में लाता हो, चोरी करेगा तो वह व्यक्ति भारतीय दण्ड संहिता की धारा 380 के अंतर्गत अपराधी होगा। इस लेख के माध्यम से हम आपको दंड, जमानत कैसे मिलेगी और इत्यादि की जानकारी आप को देगें।

आईपीसी की धारा 380 के अनुसार-

निवास-गृह आदि में चोरी-

जो कोई ऐसे किसी निर्माण, तम्बू या जलयान में चोरी करेगा, जो निर्माण, तम्बू या जलयान मानव-निवास के रूप में, या सम्पत्ति की अभिरक्षा के लिये उपयोग में आता हो, वह दोनों में से किसी भाँति के कारावास से, जिसकी अवधि सात वर्ष तक की हो सकेगी, दण्डित किया जाएगा, और जुर्माने से भी दण्डनीय होगा।

Theft in dwelling-house, etc-
Whoever commits theft in any building, tem or vessel, which building, tent or vessel is used as a human dwelling, or used for the custody of property, shall be punished with imprisonment of either description for a term which may extend to seven years, and shall also be liable to fine.

लागू अपराध

निर्माण, तंबू या जलयान में चोरी।
सजा- सात वर्ष के लिए कारावास या जुर्माना, अथवा दोनो का भागीदार होगा।
यह एक गैर जमानती, संज्ञेय अपराध है और किसी भी श्रेणी के मजिस्ट्रेट द्वारा विचारणीय है।
यह अपराध समझौते योग्य नही है।

सजा (Punishment) का प्रावधान

जो कोई व्यक्ति किसी के घर, दुकान जैसे मानव-निवास के रूप में, या सम्पत्ति की अभिरक्षा के लिये उपयोग में लाए जाते है, चोरी करेगा तो वह व्यक्ति सात वर्ष के लिए कारावास या जुर्माना अथवा दोनो का भागीदार हो सकता है।

जमानत (Bail) का प्रावधान

यह अपराध एक गैर जमानतीय, संज्ञेय अपराध की श्रेणी में आता है। यह अपराध गैर जमानतीय होने के कारण जमानत आसानी से नही मिल पाएगी।

अपराधसजाअपराध श्रेणीजमानतविचारणीय
निर्माण, तंबू या जलयान में चोरी।सात वर्ष के लिए कारावास या जुर्माना, अथवा दोनोसंज्ञेयगैर-जमानतीयकिसी भी श्रेणी के मजिस्ट्रेट व्दारा

हमारा प्रयास आईपीसी की धारा 380 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी , फिर भी अगर आपके पास कोई सवाल हो,तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है ।

आईपीसी की धारा 149 | विधिविरुद्ध जमाव का हर सदस्य, सामान्य उद्देश्य को अग्रसर करने के लिए किए गए अपराध का दोषी | IPC Section- 149 in hindi| every member of unlawful assembly guilty of offence committed in prosecution of common object.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपको आईपीसी की रोचक धारा के बारे में बताएंगे। आज हम बात करेंगे, जो लोग किसी गैरकानूनी सभा या समूह में हिंसा सामान्य उद्देश्य को मानने के लिए जो अपराध करते है, अर्थात् किसी उद्देश्य को पूर्ण करने के लिए गैरकानूनी रूप से दंगा करते हैं वह भारतीय दण्ड संहिता की धारा 149 अप्लाई होगी है, जिसके अंतर्गत अपराधी को कारावास और जुर्माने अथवा दोनो से दंडित किया जाएगा। आइए जानते है, क्या कहती है ? धारा 149 साथ ही सम्पूर्ण जानकारी आपको इस लेख के माध्यम से देंगे।

धारा 149 का विवरण

भारतीय दण्ड संहिता (IPC) में आज हम बात करेंगे धारा 149 के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। विधिविरुद्ध जमाव का हर सदस्य, सामान्य उद्देश्य को अग्रसर करने के लिए किए गए अपराध का दोषी, किसी गैरकानूनी समूह या किसी विधिविरुद्ध जमाव में दंगा, किसी उद्देश्य को पूरा करने के लिए जो अपराध कारित करते है तो वह व्यक्ति भारतीय दण्ड संहिता की धारा 149 के अंतर्गत अपराधी होगा। इस लेख के माध्यम से हम आपको दंड, जमानत कैसे मिलेगी और इत्यादि की जानकारी आप को देगें। ।

आईपीसी की धारा 149 के अनुसार-

विधिविरुद्ध जमाव का हर सदस्य, सामान्य उद्देश्य को अग्रसर करने के लिए किये गये अपराध का दोषी-

यदि विधिविरुद्ध जमाव के किसी सदस्य द्वारा उस जमाव के सामान्य उद्देश्य को अग्रसर करने में अपराध किया जाता है, या कोई ऐसा अपराध किया जाता है, जिसका किया जाना उस जमाव के सदस्य उस उद्देश्य को अग्रसर करने में सम्भाव्य जानते थे, तो हर व्यक्ति, जो उस अपराध के किये जाने के समय उस जमाव का सदस्य है, उस अपराध का दोषी होगा।

Every member of unlawful assembly guilty of offence committed in prosecution of common object-
If an offence is committed by any member of an unlawful assembly in prosecution of the common object of that assembly, or such as the members of that assembly knew to be likely to be committed in prosecution of that object, every person who, at the time of the committing of that offence, is a member of the same assembly, is guilty of that offence.

लागू अपराध

यदि विधिविरुद्ध जमाव में किसी सदस्य द्वारा अपराध किया जाता है तो ऐसे जमाव का हर अन्य सदस्य उस अपराध का दोषी होगा।
सजा- अपराध अनुसार यदि अपराध गंभीर है, जमानत योग्य नही है जमानत नहीं हो सकेगी एवम यदि अपराध गैर  संज्ञेय, जमानती है, तो जमानत मिलेगी। जिस न्यायालय में  है।
यह अपराध समझौते योग्य नही है।

सजा (Punishment) का प्रावधान

जो कोई किसी सभा या समूह में दंगा जैसा कृत्य किसी सामान्य उद्देश्य से जो भी अपराध कारित करता है, तो समूह या सभा के प्रत्येक व्यक्ति पर जिस धारा में अपराध हुआ है, सभी दोषी होंगे साथ ही वह धारा 149 के अंतर्गत अपराधी होगा। जिसके लिए प्रत्येक व्यक्ति अपराध अनुसार सजा वा दंड का बराबर भागीदार होगा।

जमानत (Bail) का प्रावधान

भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 149 में जो कोई व्यक्ति किसी समूह या सभा में उपस्थित होकर जिस अपराध को कारित किया है, तो समूह का प्रत्येक सदस्य उस अपराध का दोषी होगा, साथ ही अपराधानुसार ही जमानत न्यायालय जमानत याचिका स्वीकार अथवा अस्वीकार करेगी | यदि समूह द्वारा गैर जमानती अपराध किया गया है, तो जमानत नही मिलेगी। इसी तरह से यदि जमानती अपराध हुआ है, तो जमानत याचिका दायर करके जमानत ली जा सकती है।

अपराधसजाअपराध श्रेणीजमानतविचारणीय
यदि विधिविरुद्ध जमाव में किसी सदस्य द्वारा अपराध किया जाता है तो ऐसे जमाव का हर अन्य सदस्य उस अपराध का दोषी होगा।अपराधनुसारअपराधनुसारअपराधनुसारकिसी भी श्रेणी के मजिस्ट्रेट व्दारा

हमारा प्रयास आईपीसी की धारा 149 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी , फिर भी अगर आपके पास कोई सवाल हो,तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है ।

आईपीसी की धारा 82 | सात वर्ष से कम आयु के शिशु का कार्य | IPC Section- 82 in hindi| Act of a child under seven years of age.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए भारतीय दंड संहिता की धारा 82 के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है भारतीय दंड संहिता की धारा 82 साथ ही हम आपको IPC की धारा 82 सम्पूर्ण जानकारी एवम् परिभाषा इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

धारा 82 का विवरण

भारतीय दण्ड संहिता (IPC) में धारा 82 के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। जो कोई जिसकी आयु सात वर्ष से कम की होगी, उसके द्वारा किया गया कोई कार्य अपराध की श्रेणी में नहीं आएगी। भारतीय दण्ड संहिता की धारा 82 इसी विषय के बारे में बतलाती है।

आईपीसी की धारा 82 के अनुसार-

सात वर्ष से कम आयु के शिशु का कार्य-

कोई बात अपराध नही है, जो सात वर्ष से कम आयु के शिशु द्वारा की जाती है।

Act of a child under seven years age-
Nothing is an offence which is done by a child under seven years of age.

हमारा प्रयास आईपीसी की धारा 82 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके पास कोई सवाल हो,तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है ।