नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए भारतीय दंड संहिता की धारा 293 के बारे में सम्पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है भारतीय दंड संहिता की धारा 293? साथ ही हम आपको IPC की धारा 293 के अंतर्गत कैसे क्या सजा मिलती है और जमानत कैसे मिलती है,और यह अपराध किस श्रेणी में आता है, इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।
धारा 293 का विवरण
भारतीय दण्ड संहिता (IPC) में आज हम बात करेंगे धारा 293 के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। यदि कोई बीस वर्ष से कम आयु के व्यक्ति को किसी अश्लील वस्तु आदि की बिक्री करता है या भाड़े पर देता है, वह इस धारा के अंतर्गत अपराधी होगा। इस लेख के माध्यम से हम आपको दंड, जमानत कैसे मिलेगी और इत्यादि की जानकारी आप को देगें। ।
आईपीसी की धारा 293 के अनुसार-
तरुण व्यक्ति को अश्लील वस्तुओं का विक्रय आदि-
जो कोई बीस वर्ष से कम आयु के किसी व्यक्ति को कोई ऐसी अश्लील वस्तु, जो अन्तिम पूर्वगामी धारा में निर्दिष्ट है, बेचेगा, भाड़े पर देगा, वितरण करेगा, प्रदर्शित करेगा या परिचालित करेगा या ऐसा करने की प्रस्थापना या प्रयत्न करेगा। प्रथम दोषसिद्धि पर दोनों में से किसी भाँति के कारावास से, जिसकी अवधि तीन वर्ष तक की हो सकेगी और जुर्माने से, जो दो हजार रुपये तक का हो सकेगा तथा व्दियीय या पश्चतवर्ती दोषसिद्धि की दशा में दोनों में से किसी भाँति के कारावास से, जिसकी अवधि सात वर्ष तक की हो सकेगी और जुर्माने से भी, जो पाँच हजार रुपये तक का हो सकेगा, दंडित किया जाएगा।
Sale, etc., of obscene objects to young person- Whoever sells, lets to hire distributes, exhibits or circulates to any person under the age of twenty years any such obscene object as is referred to in the last preceding section, or offers or attempts so to do, shall be punished on first conviction with imprisonment of either description for a term which may extend to three years, and with fine which may extend to two thousand rupees, and, in the event of a second or subsequent conviction, with imprisonment of either description for a term which may extend to seven years, and also with fine which may extend to five thousand rupees.
नोट:- कोई भी कार्य या वस्तु अश्लील है या नहीं इसका निर्णय लेने का अधिकार इस धारा में न्यायालय को ही है।
लागू अपराध
तरुण व्यक्तियो को अश्लील वस्तुओं का विक्रय आदि। सजा- प्रथम दोषसिद्ध होने की दशा में तीन वर्ष के लिए कारावास साथ ही दो हजार रूपए का जुर्माना, साथ ही इस तरह का पुनः व्दियीय या पश्चतवर्ती दोषसिद्ध होने की दशा में सात वर्ष के लिए कारावास साथ ही पांच हजार रूपए का जुर्माना अथवा दोनो का भागीदार होगा। इस धारा के अंतर्गत दर्ज मामले को न्यायालय निर्णय करेगी, कि व्यक्ति इस धारा के अंतर्गत दोषी है या नही। यह एक जमानती, संज्ञेय अपराध है और किसी भी श्रेणी के मजिस्ट्रेट द्वारा विचारणीय है। यह अपराध समझौते योग्य नही है।
सजा (Punishment) का प्रावधान
यदि कोई व्यक्ति किसी बीस वर्ष से कम आयु वाले व्यक्ति को अश्लील पुस्तक अथवा किसी अश्लील वस्तु को खरीदने बेचने का कार्य करता है या भाड़े पर देता है, अथवा वितरित करता है या उसको किसी भी प्रकार से परिचालित करता है, जबकि वह जानता है कि इससे व्यक्ति पर दुराचारी प्रभाव पड़ेगा, फिर भी ऐसा कृत्य करता है तो प्रथम बार दोषसिद्ध होने पर वह तीन वर्ष के लिए कारावास और दो हजार रुपए जुर्माना पुनः फिर ऐसा कृत्य करने पर सात वर्ष के लिए कारावास और पांच हजार रुपए जुर्माना अथवा दोनो का भागीदार हो सकता है।
जमानत (Bail) का प्रावधान
यह अपराध एक जमानतीय, संज्ञेय अपराध की श्रेणी में आता है। यह अपराध जमानतीय होने के कारण आसानी से जमानत मिल जाती है। इस धारा के अंतर्गत दोषी न्यायालय ही तथ्यो और आधारों के अनुसार ही दोषी व्यक्ति को इस धारा के अंतर्गत अपराधी ठहराया जाएगा।
अपराध
सजा
अपराध श्रेणी
जमानत
विचारणीय
तरुण व्यक्तियो को अश्लील वस्तुओं का विक्रय आदि।
प्रथम दोषसिद्ध होने की दशा में तीन वर्ष के लिए कारावास साथ ही दो हजार रूपए का जुर्माना। पश्चतवर्ती दोषसिद्ध होने की दशा में सात वर्ष के लिए कारावास साथ ही पांच हजार रूपए का जुर्माना अथवा दोनो
संज्ञेय
जमानतीय
किसी भी श्रेणी के मजिस्ट्रेट द्वारा
हमारा प्रयास आईपीसी की धारा 293 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी , फिर भी अगर आपके पास कोई सवाल हो,तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है ।
नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए भारतीय दंड संहिता की धारा 292 के बारे में सम्पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है भारतीय दंड संहिता की धारा 292? साथ ही हम आपको IPC की धारा 292 के अंतर्गत कैसे क्या सजा मिलती है और जमानत कैसे मिलती है, और यह अपराध किस श्रेणी में आता है, इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।
धारा 292 का विवरण
भारतीय दण्ड संहिता (IPC) में आज हम बात करेंगे धारा 292 के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। यदि कोई व्यक्ति किसी अश्लील पुस्तकें, कागज, रेखाचित्र, रूपण और कोई भी अश्लील वस्तु आदि की बिक्री करता है या भाड़े पर देता है, वह इस धारा के अंतर्गत अपराधी होगा। इस लेख के माध्यम से हम आपको दंड, जमानत कैसे मिलेगी और क्या क्या अश्लील की संज्ञा में आयेगा इत्यादि की जानकारी आप को देगें।
आईपीसी की धारा 292 के अनुसार-
अश्लील पुस्तकों आदि का विक्रय करना-
1) उपधारा, (2) के प्रयोजनार्थ किसी पुस्तक पुस्तिका, कागज, लेख, रेखाचित्र, रंगचित्र, रूपण, आकृति या अन्य वस्तु को अश्लील समझा जायेगा यदि वह कामोद्दीपक है; या कामुक व्यक्तियों के लिए रुचिकर है या उसका या (जहाँ उसमें दो या अधिक सुभिन्न मदें समाविष्ट हैं वहाँ) उसकी किसी मद का प्रभाव, समग्र रूप से विचार करने पर, ऐसा है जो उन व्यक्तियों को दुराचारी तथा भ्रष्ट बनाये जिनके द्वारा उसमें अन्तर्विष्ट या सत्रिविष्ट विषय का पढ़ा जाना, देखा जाना या सुना जाना सभी सुसंगत परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुये सम्भाव्य है। 2) जो कोई- क) किसी अश्लील पुस्तक, पुस्तिका, कागज, रेखाचित्र, रंगचित्र, रूपण या आकृति या किसी भी अन्य अश्लील वस्तु को, चाहे वह कुछ भी हो, बेचेगा, भाड़े पर देगा, वितरित करेगा, लोक प्रदर्शित करेगा. या उसको किसी भी प्रकार परिचालित करेगा, या उसे विक्रय, भाड़े, वितरण, लोक-प्रदर्शन या परिचालन के प्रयोजनों के लिये रचेगा, उत्पादित करेगा या अपने कब्जे में रखेगा, अथवा ख) किसी अश्लील वस्तु का आयात या निर्यात या प्रवहण पूर्वोक्त प्रयोजनों में से किसी प्रयोजन के लिये करेगा या यह जानते हुए, या यह विश्वास करने का कारण रखते हुए करेगा कि ऐसी वस्तु बेची, भाड़े पर दी, वितरित या लोक-प्रदर्शित, या किसी प्रकार से परिचालित की जाएगी, अथवा ग) किसी ऐसे कारोबार में भाग लेगा या उससे लाभ प्राप्त करेगा, जिस कारोबार में वह यह जानता है या यह विश्वास करने का कारण रखता है कि कोई ऐसी अश्लील वस्तुयें पूर्वोक्त प्रयोजनों में से किसी प्रयोजन के लिये रची जाती, उत्पादित की जाती, क्रय को जातीं, रखी जाती, आयात की जाती, निर्यात की जाती, प्रवहण की जातीं, लोक-प्रदर्शित की जाती या किसी भी प्रकार से परिचालित की जाती हैं, अथवा घ) यह विज्ञापित करेगा या किन्हीं साधनों द्वारा चाहे वे कुछ भी हों, यह ज्ञात कराएगा कि कोई व्यक्ति किसी ऐसे कार्य में, जो इस धारा के अधीन अपराध है, लगा हुआ है, या लगने के लिये तैयार है, या यह कि कोई ऐसी अश्लील वस्तु किसी व्यक्ति से या किसी व्यक्ति के द्वारा प्राप्त की जा सकती है, अथवा ङ) किसी ऐसे कार्य को, जो इस धारा के अधीन अपराध है, करने की प्रस्थापना करेगा या करने का प्रयत्न करेगा,प्रथम दोषसिद्धि पर दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि दो वर्ष तक की हो सकेगी और जुर्माने से, जो दो हजार रुपये तक का हो सकेगा, तथा द्वितीय या पश्चात्वत्ती दोषसिद्धि की दशा में दोनों में किसी भाँति के कारावास से, जिसकी अवधि पांच वर्ष तक की हो सकेगी और जुर्माने से भी, जो पांच जार रुपये तक का हो सकेगा दण्डित किया जाएगा। अपवाद-इस धारा का विस्तार निम्नलिखित पर न होगा- क) कोई ऐसी पुस्तक, पुस्तिका, कागज, लेख, रेखाचित्र, रंगचित्र, रूपण या आकृति- (i) जिसका प्रकाशन लोकहित में होने के कारण इस आधार पर न्यायोचित साबित हो गया है कि ऐसी पुस्तक, पुस्तिका, कागज, लेख, रेखाचित्र, रंगचित्र, रूपण या आकृति विज्ञान, साहित्य, कला या विद्या या सर्वजन सम्बन्धी अन्य उद्देश्यों के हित में है, अथवा (ii) जो सद्भावपूर्वक धार्मिक प्रयोजनों के लिये रखी या उपयोग में लायी जाती है। ख) कोई ऐसा रूपण जो- i) प्राचीन संस्मारक तथा पुरातत्वीय स्थल और अवशेष अधिनियम, 1958 (1958 का 24) के अर्थ में प्राचीन संस्मारक पर या उसमें, अथवा (ii) किसी मन्दिर पर या उसमें या मूर्तियों के प्रवहण के उपयोग में लाये जाने वाले या किसी धार्मिक प्रयोजन के लिये रखे या उपयोग में लाये जाने वाले किसी रथ पर, तक्षित, उत्कीर्ण, रंगचित्रित या अन्यथा रूपित हों।
Sale, etc. of obscene books, etc- 1) For the purposes of sub-section (2), a book, pamphlet, paper, writing, drawing, painting, representation figure or any other object shall be deemed to be obscene if it is lascivious or appeals to the prune interest or if its effect, or (where it comprises two or more distinct items) the effect of any one of its items, is, if taken as a whole, such as to tend to deprave and corrupt persons who are likely, having regard to all relevant circumstances, to read, see ur hear the matter contained or embodied in it. 2) Whoever- a) sells, lets to hire, distributes, publicly exhibits or in any manner pun circulation, or for purposes of sale, hire, distribution, public exam circulation, makes produces or has in his possession any obscene ho pamphlet, paper, drawing, painting, representation or ligure or any obscene object whatever, or b) imports, exports or conveys any obscene object for any of the purposes aforesaid, or knowing or having reason to believe that such object will sold let to hire, distributed or publicly exhibited or in any manner put into circulation, or c) takes part in or receives profits from any business in the course of which he knows or has reason to believe that any such obscene objects are, for any of the purposes aforesaid, made, produced, purchased, kept, imported, exported, conveyed, publicly exhibited or in any manner put into circulation, or d) advertises or makes known by any means whatsoever that any peron is engaged or is ready to engage in any act which is an offence under this section, or that any such obscene object can be procured from or through any person, or (e) offers or attempts to do any act which is an offence under this section, shall be punished on first conviction with imprisonment of either description for a term which may extend to two years, and with fine which may extend to two thousand rupees, and in the event of a second or subsequent conviction, with imprisonment of either description for a term which may extend to five years, and also with fine which may extend to five thousand rupees. Exception- This section does not extend to- a) any book, pamphlet, paper, writing drawing, painting, representation or figure i) the publication of which is proved to be justified as being for the public good on the ground that such book, pamphlet, paper, writing, drawing, painting, representation or figure is in the interest of science literature, art or learning or other objects of general concern, or ii) which is kept or used bona fide for religious purposes; b) any representation, sculptured, engraved, painted, or otherwise represented on or in- i) any ancient monument within the meaning of the Ancient Monuments and Archaeological Sites and Remains Act, 1958 (24 of 1958), or ii) any temple, or any car used for the conveyance of idols, or kept or used for any religious purpose.
नोट:- कोई भी कार्य या वस्तु अश्लील है या नहीं इसका निर्णय लेने का अधिकार इस धारा में न्यायालय को ही है।
वह कार्य जो अश्लीलता के अपराध के अंतर्गत नहीं आते:-
किसी प्राचीन संस्मारक या पुरातात्विक अवशेष पर रेखांकित, सहित्य कलाकृति, रंगचित्र, मूर्ति,कोई भी कलाकृति आदि जिनका उद्देश्य हित मे हो वह कृत्य अश्लीलता का अपराध नहीं है। किसी रचना जिसमें विवाहितों को अपने यौन संबंधों को विनियमित करने की गम्भीर शिक्षा दी गई हो, चाहे उसमे लैगिक संभोग की क्रिया का विस्तार का वर्णन ही क्यों न हो वह कार्य इस धारा का अपराध नहीं माना जायेगा।
लागू अपराध
अश्लील पुस्तकों आदि का विक्रय करना सजा- प्रथम दोषसिद्ध होने की दशा में दो वर्ष के लिए कारावास साथ ही दो हजार रूपए का जुर्माना, साथ ही इस तरह का पुनः दोषसिद्ध होने की दशा में पांच वर्ष के लिए कारावास साथ ही पांच हजार रूपए का जुर्माना अथवा दोनो का भागीदार होगा। इस धारा के अंतर्गत दर्ज मामले को न्यायालय निर्णय करेगी, कि व्यक्ति इस धारा के अंतर्गत दोषी है या नही। यह एक जमानती, संज्ञेय अपराध है और किसी भी श्रेणी के मजिस्ट्रेट द्वारा विचारणीय है। यह अपराध समझौते योग्य नही है।
सजा (Punishment) का प्रावधान
यदि कोई व्यक्ति किसी अश्लील पुस्तक अथवा किसी अश्लील वस्तु को खरीदने बेचने का कार्य करता है या भाड़े पर देता है, अथवा वितरित करता है या उसको किसी भी प्रकार से परिचालित करता है, जबकि वह जानता है कि इससे व्यक्ति दुराचारी और भ्रष्ट बनेंगे, फिर भी ऐसा कृत्य करता है तो प्रथम बार दोषसिद्ध होने पर वह दो वर्ष के लिए कारावास और दो हजार रुपए जुर्माना पुनः फिर ऐसा कृत्य करने पर पांच वर्ष के लिए कारावास और पांच हजार रुपए जुर्माना अथवा दोनो का भागीदार हो सकता है।
जमानत (Bail) का प्रावधान
यह अपराध एक जमानतीय, संज्ञेय अपराध की श्रेणी में आता है। यह अपराध जमानतीय होने के कारण आसानी से जमानत मिल जाती है। इस धारा के अंतर्गत दोषी न्यायालय ही तथ्यो और आधारों के अनुसार ही दोषी व्यक्ति को इस धारा के अंतर्गत अपराधी ठहराया जाएगा।
अपराध
सजा
अपराध श्रेणी
जमानत
विचारणीय
अश्लील पुस्तकों आदि का विक्रय करना।
प्रथम दोषसिद्ध होने की दशा में दो वर्ष के लिए कारावास साथ ही दो हजार रूपए का जुर्माना, साथ ही इस तरह का पुनः दोषसिद्ध होने की दशा में पांच वर्ष के लिए कारावास साथ ही पांच हजार रूपए का जुर्माना अथवा दोनो
संज्ञेय
जमानतीय
किसी भी श्रेणी के मजिस्ट्रेट द्वारा
हमारा प्रयास आईपीसी की धारा 292 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी , फिर भी अगर आपके पास कोई सवाल हो,तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है ।
नमस्कार दोस्तों, आज हम आपको आईपीसी की रोचक धारा के बारे में बताएंगे। जो कोई व्यक्ति जरा सी बात को लेकर तेजाब फेंक देते है, जी हां आज हम बात करने जा रहे जो व्यक्ति ऐसी किसी व्यक्ति पर तेजाब फेंकने का प्रयास करते है या सेवन कराने का प्रयास करता हैं तो वह भारतीय दण्ड संहिता की धारा 326B अप्लाई होती है, जिसके अंतर्गत ही अपराधी को कारावास और जुर्माने अथवा दोनो से दंडित किया जाएगा। आइए जानते है, क्या कहती है ? धारा 326B साथ ही सम्पूर्ण जानकारी आपको इस लेख के माध्यम से देंगे।
धारा 326B का विवरण
भारतीय दण्ड संहिता (IPC) में आज हम बात करेंगे धारा 326B के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। जब कोई व्यक्ति किसी पर तेजाब द्वारा चोट पहुंचाने के उद्देश्य से हमला करता है, या हमला करने का प्रयास करता है तो वह व्यक्ति भारतीय दण्ड संहिता की धारा 326B के अंतर्गत अपराधी होगा। इस लेख के माध्यम से हम आपको दंड, जमानत कैसे मिलेगी और इत्यादि की जानकारी आप को देगें। ।
आईपीसी की धारा 326B के अनुसार-
स्वेच्छया तेजाब फेंकना या फेंकने का प्रयास करना-
जो कोई किसी व्यक्ति पर तेजाब फेंकेगा या फेंकने का प्रयास करेगा या किसी व्यक्ति को तेजाब का सेवन कराने का प्रयत्न करेगा या उस व्यक्ति को स्थायी या आंशिक नुकसान या विद्रूपता या दाह कारित करने या विकलांग बनाने या विद्रूपता या निःशक्त या घोर उपहति कारित करने के आशय से किन्हीं अन्य उपायों का प्रयोग करने का प्रयास करेगा, वह दोनों से ऐसे किसी भाँति के कारावास से, जिसकी अवधि पाँच वर्ष से न्यून नहीं होगी, किन्तु जो सात वर्ष तक की हो सकेगी, दण्डित किया जायेगा और जुर्माने से भी दण्डनीय होगा।
Voluntarily throwing or attempting to throw acid- Whoever throws or attempts to throw acid on any person or attempts to administer acid to any person, or attempts to use any other means, with the intention of causing permanent or partial damage or deformity or burns or maiming or disfigurement or disability or grievous hut to that person, shall be punished with imprisonment of either description for a term which shall not be less than five years but which may extend to seven years, and shall also be liable to fine.
स्पष्टीकरण 1– धारा 326क एवं इस धारा के प्रयोजनों के लिए “तेजाब” के अन्तर्गत ऐसा कोई पदार्थ भी शामिल है, जिसका अम्लीय या संक्षारक स्वभाव है या दाह करने की प्रकृति है, जो ऐसी शारीरिक क्षति कारित करने के योग्य है, जिसका परिणाम क्षतचिन्ह बनने या विद्रूपता या अस्थायी अथवा स्थायी निर्योग्यता में होगा।
स्पष्टीकरण 2– धारा 326क एवं इस धारा के प्रयोजनों के लिए, स्थायी या आंशिक नुकसान या अंगविकार का अपरिवर्तनीय होना आवश्यक नहीं होगा।]
लागू अपराध
स्वेच्छया तेजाब फेंकना या फेंकने का प्रयत्न करना। सजा- पांच वर्ष का कारावास, किंतु जो सात वर्ष तक का हो सकेगा और जुर्माना। यह एक गैर जमानती, संज्ञेय अपराध है और सेशन न्यायालय द्वारा विचारणीय है। यह अपराध समझौते योग्य नही है।
सजा (Punishment) का प्रावधान
जब कोई व्यक्ति किसी व्यक्ति पर तेजाब अथवा कोई विषेला केमिकल, पीड़ित व्यक्ति के अंग पर फेकता है या फेंकने का प्रयास करता है या सेवन कराता है या सेवन करने का प्रयास कराता है जबकि उसे ज्ञात है कि वह पीड़ित व्यक्ति को इससे गम्भीर चोट आएंगी और उसकी जान भी जा सकती है। ऐसा कृत्य करता है तो वह व्यक्ति पांच वर्ष के लिए कारावास, किंतु जो सात वर्ष तक की सकेगा और जुर्माने से भी दंडनीय होगा।
जमानत (Bail) का प्रावधान
जब कोई व्यक्ति तेजाब हमला करता है या हमला करने का प्रयास करता है अथवा सेवन कराता है या सेवन करने का प्रयास कराता है तो इस तरह के मामले में पुलिस द्वारा धारा 326B के अंतर्गत FIR दर्ज करके अपराधी को पकड़कर कारावास में बंद कर देती है और मामले की पूर्ण जांच करके न्यायालय को चार्जशीट पेश करती है, इसलिए जमानत नहीं मिल पाएगी। यह अपराध एक गैर जमानतीय, संज्ञेय अपराध की श्रेणी में आता है। यह अपराध गैर जमानतीय होने के कारण जमानत नही मिल पाएगी। न्यायालय द्वारा ट्रायल के पश्चात् ही दोषी या निर्दोष साबित होगा।
अपराध
सजा
अपराध श्रेणी
जमानत
विचारणीय
स्वेच्छया तेजाब फेंकना या फेंकने का प्रयत्न करना।
पांच वर्ष का कारावास, किंतु जो सात वर्ष तक का हो सकेगा और जुर्माना।
संज्ञेय
जमानतीय
सेशन न्यायालय द्वारा
हमारा प्रयास आईपीसी की धारा 326B की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी , फिर भी अगर आपके पास कोई सवाल हो,तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है ।
नमस्कार दोस्तों, आज हम आपको आईपीसी की रोचक धारा के बारे में बताएंगे। हम सभी आज के समय टीवी एवम् अखबार में देखने को मिलता है, जो कोई व्यक्ति जरा सी बात को लेकर तेजाब इत्यादि का प्रयोग करके गंभीर चोटे पहुंचाने के उद्देश्य से उस पर फेकता है या उसका सेवन कराता है तो वह भारतीय दण्ड संहिता की धारा 326A अप्लाई होती है, जिसके अंतर्गत ही अपराधी को कारावास और जुर्माने अथवा दोनो से दंडित किया जाएगा। आइए जानते है, क्या कहती है ? धारा 326A साथ ही सम्पूर्ण जानकारी आपको इस लेख के माध्यम से देंगे।
धारा 326A का विवरण
भारतीय दण्ड संहिता (IPC) में आज हम बात करेंगे धारा 326A के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। जब कोई व्यक्ति किसी पर तेजाब द्वारा चोट पहुंचाने के उद्देश्य से हमला करता है, जिससे उस व्यक्ति को गंभीर चोटे भी आती है और उस व्यक्ति की जान भी जा सकती है तो वह व्यक्ति भारतीय दण्ड संहिता की धारा 326A के अंतर्गत अपराधी होगा। इस लेख के माध्यम से हम आपको दंड, जमानत कैसे मिलेगी और इत्यादि की जानकारी आप को देगें।
आईपीसी की धारा 326A के अनुसार-
तेजाब, इत्यादि के प्रयोग से स्वेच्छया घोर उपहति कारित करना-
जो कोई किसी व्यक्ति के शरीर के किसी अंग या अंगों को उस व्यक्ति पर तेजाब फेंककर या उसे तेजाब का सेवन कराकर या किन्हीं अन्य साधनों का प्रयोग करके स्थायी या आंशिक नुकसान या विद्रूपता कारित करेगा या दाह कारित करेगा या विकलांग बनायेगा या विदूषित करेगा या निःशक्त बनायेगा या वैसा कारित करने के आशय से या इस ज्ञान के साथ, कि उसे ऐसी क्षति या उपहति कारित होना सम्भाव्य है, घोर उपहति कारित करेगा, वह दोनों में से ऐसे किसी भाँति के कारावास से, जिसकी अवधि दस वर्ष से न्यून नहीं होगी, किन्तु जो आजीवन कारावास तक की हो सकेगी और जुर्माने से दण्डित किया जायेगा।
Voluntarily causing grievous hurt by use of acid, etc- Whoever causes permanent or partial damage or deformity to, or burns or maims or disfigures or disables, any part or parts of the body of a person or causes grievous hurt by throwing acid on or by administering acid to that person, or by using any other means with the intention of causing or with the knowledge that he is likely to cause such injury or hurt, shall be punished with imprisonment of either description for a term which shall not be less than ten years but which may extend to imprisonment for life, and with fine.
परन्तु ऐसा जुर्माना पीड़ित के उपचार के चिकित्सीय व्यय को पूरा करने के लिए न्यायोचित और युक्तियुक्त होगा।परन्तु यह और कि इस धारा के अधीन अधिरोपित किसी जुर्माना का भुगतान पीड़ित को किया जायेगा।
लागू अपराध
स्वेच्छया तेजाब, इत्यादि के प्रयोग से घोर उपहति कारित करना। सजा- कारावास जो दस वर्ष से कम नहीं, किंतु जो आजीवन कारावास तक का हो सकेगा और जुर्माना, जिसका भुगतान पीड़िता को किया जाएगा। यह एक गैर जमानती, संज्ञेय अपराध है और सेशन न्यायालय द्वारा विचारणीय है। यह अपराध समझौते योग्य नही है।
सजा (Punishment) का प्रावधान
जब कोई व्यक्ति किसी व्यक्ति पर तेजाब फेकता है या सेवन कराता है जबकि उसे ज्ञात है कि वह पीड़ित व्यक्ति को इससे गम्भीर चोट देगा और उसकी जान भी जा सकती है। ऐसा कृत्य करता है तो वह व्यक्ति कारावास जो दस वर्ष से कम नहीं, किंतु जो आजीवन कारावास तक का हो सकेगा और जुर्माना, जिसका भुगतान पीड़िता को किया जाएगा।।
जमानत (Bail) का प्रावधान
जब कोई व्यक्ति तेजाब हमला करता है, और पीड़ित व्यक्ति उसे गंभीर चोटे भी प्राप्त हुई है और उसकी जान भी जाने का खतरा हैं इस तरह के मामले में पुलिस द्वारा धारा 326A के अंतर्गत FIR दर्ज करके अपराधी को पकड़कर कारावास में बंद कर देती है और मामले की पूर्ण जांच करके न्यायालय को चार्जशीट पेश करती है, इसलिए जमानत नहीं मिल पाएगी। यह अपराध एक गैर जमानतीय, संज्ञेय अपराध की श्रेणी में आता है। यह अपराध गैर जमानतीय होने के कारण जमानत नही मिल पाएगी। न्यायालय द्वारा ट्रायल के पश्चात् ही दोषी या निर्दोष साबित होगा।
अपराध
सजा
अपराध श्रेणी
जमानत
विचारणीय
स्वेच्छया तेजाब, इत्यादि के प्रयोग से घोर उपहति कारित करना।
कारावास जो दस वर्ष से कम नहीं, किंतु जो आजीवन कारावास तक का हो सकेगा और जुर्माना।
संज्ञेय
गैर-जमानतीय
सेशन न्यायालय द्वारा
हमारा प्रयास आईपीसी की धारा 326A की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी , फिर भी अगर आपके पास कोई सवाल हो,तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है ।
नमस्कार दोस्तों, आज हम आपको आईपीसी की रोचक धारा के बारे में बताएंगे। हम सभी साधारण मारपीट तो देखे ही होंगे, लेकिन जब कोई व्यक्ति किसी को मारपीट के दौरान खतरनाक आयुधों या साधनों द्वारा व्यक्ति को गंभीर चोट पहुंचाता है तो वह भारतीय दण्ड संहिता की धारा 326 अप्लाई होती है, जिसके अंतर्गत ही अपराधी को कारावास और जुर्माने अथवा दोनो से दंडित किया जाएगा। आइए जानते है, क्या कहती है ? धारा 326 साथ ही सम्पूर्ण जानकारी आपको इस लेख के माध्यम से देंगे।
धारा 326 का विवरण
भारतीय दण्ड संहिता (IPC) में आज हम बात करेंगे धारा 326 के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। जब किसी मारपीट में किसी व्यक्ति ने किसी पर किसी धारदार हथियार अथवा आयुध साधनों द्वारा चोट पहुंचाने के उद्देश्य से हमला किया है, जिससे उस व्यक्ति को गंभीर चोटे आई है और उस व्यक्ति की जान भी जा सकती है तो वह व्यक्ति भारतीय दण्ड संहिता की धारा 326 के अंतर्गत अपराधी होगा। इस लेख के माध्यम से हम आपको दंड, जमानत कैसे मिलेगी और इत्यादि की जानकारी आप को देगें। ।
आईपीसी की धारा 326 के अनुसार-
खतरनाक आयुधों या साधनों द्वारा स्वेच्छया घोर उपहति कारित करना-
उस दशा के सिवाय, जिसके लिये धारा 335 में उपबन्ध है जो कोई असन, वेधन या काटने के किसी उपकरण द्वारा या किसी ऐसे उपकरण द्वारा, जो यदि आक्रामक आयुध के तौर पर उपयोग में लाया जाए, तो उससे मृत्यु कारित होना सम्भाव्य है, या अग्नि या किसी तप्त पदार्थ द्वारा, या किसी विष या संक्षारक पदार्थ द्वारा, या किसी विस्फोटक पदार्थ द्वारा, या किसी ऐसे पदार्थ द्वारा जिसका श्वास में जाना या निगलना या रक्त में पहुंचना मानव-शरीर के लिये हानिकारक है, या किसी जीव-जन्तु द्वारा स्वेच्छया घोर उपहति कारित करेगा, वह आजीवन कारावास से, या दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि दस वर्ष तक की हो सकेगी दण्डित किया जाएगा और जुर्माने से भी दण्डनीय होगा।
Voluntarily causing grievous hurt by dangerous weapons or means- Whoever, except in the case provided for by Section 335, voluntarily, causes grievous hurt by means of any instrument for shooting, stabbing or cutting, or any instrument which, used as a weapon of offence, is likely to cause death, or by means of fire or any heated substance, or by means of any poison or any corrosive substance, or by means of any explosive substance, or by means of any substance which it is deleterious to the human body to inhale, to swallow, or to recieve into blood, or by means of any animal, shall be punished with imprisonment for life, or with imprisonment of either description for a term which may extend to ten years, and shall also be liable to fine.
लागू अपराध
खतरनाक आयुधों या साधनों द्वारा स्वेच्छया घोर उपहति कारित करना। सजा- आजीवन कारावास या दस वर्ष के लिए कारावास और जुर्माना, अथवा दोनो का भागीदार होगा। यह एक गैर जमानती, संज्ञेय अपराध है और प्रथम श्रेणी के मजिस्ट्रेट द्वारा विचारणीय है। यह अपराध समझौते योग्य नही है।
सजा (Punishment) का प्रावधान
जब कोई व्यक्ति किसी व्यक्ति के मारपीट या झगड़ा करता है, तो कभी कभी किसी पक्ष द्वारा किसी को धारदार हथियार या किसी आयुध शस्त्र द्वारा हमला कर देता है, जब कोई व्यक्ति इस तरह से गंभीर रूप से चोटिल हो जाता है और उसकी जान भी जा सकती हैं तो वह व्यक्ति आजीवन कारावास या दस वर्ष के लिए कारावास और जुर्माना अथवा दोनो का भागीदार हो सकता है।
जमानत (Bail) का प्रावधान
जब कोई व्यक्ति झगड़ा करते है और किसी पक्ष द्वारा किसी को धारदार हथियार या किसी आयुध शस्त्र द्वारा हमला कर देता है, जिससे उसे गंभीर चोटे प्राप्त हुई है और उसकी जान भी जाने का खतरा हैं इस तरह के मामले में पुलिस द्वारा धारा 326 के अंतर्गत FIR दर्ज करके, अपराधी को अरेस्ट करती है और मामले की जांच करके न्यायालय को चार्जशीट पेश करती है, इसलिए जमानत मिलना इतना आसान नहीं है। यह अपराध एक गैर जमानतीय, संज्ञेय अपराध की श्रेणी में आता है। यह अपराध गैर जमानतीय होने के कारण जमानत आसानी से नही मिल पाएगी। न्यायालय द्वारा ट्रायल के पश्चात् ही दोषी या निर्दोष साबित होगा।
अपराध
सजा
अपराध श्रेणी
जमानत
विचारणीय
खतरनाक आयुधों या साधनों द्वारा स्वेच्छया घोर उपहति कारित करना।
आजीवन कारावास या दस वर्ष के लिए कारावास और जुर्माना अथवा दोनो।
संज्ञेय
गैर-जमानतीय
प्रथम श्रेणी के मजिस्ट्रेट द्वारा
हमारा प्रयास आईपीसी की धारा 326 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी , फिर भी अगर आपके पास कोई सवाल हो,तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है ।
नमस्कार दोस्तों, आज हम आपको आईपीसी की रोचक धारा के बारे में बताएंगे। हम सभी साधारण मारपीट तो देखे ही होंगे, लेकिन जब कोई व्यक्ति किसी को मारपीट के दौरान खतरनाक आयुधों या साधनों द्वारा व्यक्ति को चोट पहुंचाता है तो वह भारतीय दण्ड संहिता की धारा 324 अप्लाई होती है, जिसके अंतर्गत ही अपराधी को कारावास और जुर्माने अथवा दोनो से दंडित किया जाएगा। आइए जानते है, क्या कहती है ? धारा 324 साथ ही सम्पूर्ण जानकारी आपको इस लेख के माध्यम से देंगे।
धारा 324 का विवरण
भारतीय दण्ड संहिता (IPC) में आज हम बात करेंगे धारा 324 के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। जब किसी मारपीट में किसी व्यक्ति ने किसी पर किसी धारदार हथियार अथवा आयुध साधनों द्वारा चोट पहुंचाने के उद्देश्य से हमला किया है, जिससे उस व्यक्ति की जान भी जा सकती है तो वह व्यक्ति भारतीय दण्ड संहिता की धारा 324 के अंतर्गत अपराधी होगा। इस लेख के माध्यम से हम आपको दंड, जमानत कैसे मिलेगी और इत्यादि की जानकारी आप को देगें। ।
आईपीसी की धारा 324 के अनुसार-
खतरनाक आयुधों या साधनों द्वारा स्वेच्छया उपहति कारित करना-
उस दशा के सिवाय, जिसके लिये धारा 334 में उपबन्ध है, जो कोई असन, वेधन या काटने के किसी उपकरण द्वारा या किसी ऐसे उपकरण द्वारा जो यदि आक्रामक आयुध के तौर पर उपयोग में लाया जाए तो उससे मृत्यु कारित होना सम्भाव्य है, या अग्नि या किसी तप्त पदार्थ द्वारा या किसी विष या किसी संक्षारक पदार्थ द्वारा या किसी विस्फोटक पदार्थ द्वारा या किसी ऐसे पदार्थ द्वारा, जिसका श्वास में जाना या निगलना या रक्त में पहुंचना मानव शरीर के लिये हानिकारक है, या किसी जीव-जन्तु द्वारा स्वेच्छया उपहति कारित करेगा, वह दोनों में से किसी भाँति के कारावास से, जिसकी अवधि तीन वर्ष तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, या दोनों से दण्डित किया जाएगा।
Voluntarily causing hurt by dangerous weapons or means- Whoever, except in the case provided for by Section 334, voluntarily causes hurt by means of any instrument for shooting, stabbing or cutting, or any instrument which, used as a weapon of offence, is likely to cause death, or by means of fire or any heated substance, or by means of any poison or any corrosive substance, or by means of any explosive substance, or by means of substance, which it is deleterious to the human body to inhale, to swallow, or to receive into the blood, or by means of any animal, shall be punished with imprisonment of either description for a term which may extend to three years, or with fine, or with both.
लागू अपराध
खतरनाक आयुधों या साधनों द्वारा स्वेच्छया उपहति कारित करना। सजा- तीन वर्ष के लिए कारावास या जुर्माना, अथवा दोनो का भागीदार होगा। यह एक गैर जमानती, संज्ञेय अपराध है और किसी भी श्रेणी के मजिस्ट्रेट द्वारा विचारणीय है। यह अपराध समझौते योग्य नही है।
सजा (Punishment) का प्रावधान
जब कोई व्यक्ति किसी व्यक्ति के मारपीट या झगड़ा करता है, तो कभी कभी किसी पक्ष द्वारा किसी को धारदार हथियार या किसी आयुध शस्त्र द्वारा हमला कर देता है, जिससे उसकी जान भी जा सकती हैं तो वह व्यक्ति तीन वर्ष के लिए कारावास या जुर्माना अथवा दोनो का भागीदार हो सकता है।
जमानत (Bail) का प्रावधान
जब कोई व्यक्ति झगड़ा करते है और किसी पक्ष द्वारा किसी को धारदार हथियार या किसी आयुध शस्त्र द्वारा हमला कर देता है, जिससे उसकी जान भी जा सकती हैं इस तरह के मामले में पुलिस द्वारा धारा 324 के अंतर्गत FIR दर्ज करके अपराधी को अरेस्ट करती है और मामले की जांच करके न्यायालय को चार्जशीट पेश करती है, इसलिए जमानत मिलना इतना आसान नहीं है। यह अपराध एक गैर जमानतीय, संज्ञेय अपराध की श्रेणी में आता है। यह अपराध गैर जमानतीय होने के कारण जमानत आसानी से नही मिल पाएगी। न्यायालय द्वारा ट्रायल के पश्चात् ही दोषी या निर्दोष साबित होगा।
अपराध
सजा
अपराध श्रेणी
जमानत
विचारणीय
खतरनाक आयुधों या साधनों द्वारा स्वेच्छया उपहति कारित करना।
तीन वर्ष के लिए कारावास या जुर्माना अथवा दोनो
संज्ञेय
गैर-जमानतीय
किसी भी श्रेणी के मजिस्ट्रेट द्वारा
हमारा प्रयास आईपीसी की धारा 324 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी , फिर भी अगर आपके पास कोई सवाल हो,तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है ।