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आईपीसी की धारा 171 | कपटपूर्ण आशय से लोक सेवक के उपयोग की पोशाक पहनना या टोकन को धारण करना | IPC Section- 171 in hindi | Wearing garb or carrying token used by public servant with fraudulent intent.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए भारतीय दंड संहिता की धारा 171 के बारे में संपूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है भारतीय दंड संहिता की धारा 171? साथ ही हम आपको IPC की धारा 171 के अंतर्गत कैसे क्या सजा मिलती है और जमानत कैसे मिलती है, और यह अपराध किस श्रेणी में आता है, इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

IPC की धारा 171 का विवरण

भारतीय दण्ड संहिता (IPC) में धारा 171 के अंतर्गत जो कोई कपटपूर्ण आशय से लोक सेवक के उपयोग की पोशाक पहनेगा या टोकन को धारण करेगा तो वह धारा 171 के अंतर्गत दंडित किया जाएगा। जिसके लिए वह दंड व जुर्माने का भागीदार होगा। भारतीय दण्ड संहिता की धारा 171 इसी विषय के बारे में बतलाती है।

आईपीसी की धारा 171 के अनुसार-

कपटपूर्ण आशय से लोक सेवक के उपयोग की पोशाक पहनना या टोकन को धारण करना-

जो कोई लोक सेवकों के किसी खास वर्ग का न होते हुए इस आशय से कि यह विश्वास किया जाए, या इस ज्ञान से कि सम्भाव्य है कि यह विश्वास किया जाए, कि वह लोक सेवकों के उस वर्ग का है, लोक सेवकों के उस वर्ग द्वारा उपयोग में लायी जाने वाली पोशाक के सदृश पोशाक पहनेगा, या टोकन के सदृश कोई टोकन धारण करेगा, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि तीन मास तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, जो दो सौ रुपए तक का हो सकेगा, या दोनों से, दण्डित किया जाएगा।

Wearing garb or carrying token used by public servant with fraudulent intent-

Whoever, not belonging to a certain class of public servants, wears any garb or carries any token resembling any garb or token used by that class of public servants, with the intention that it may be believed, or with the knowledge that it is likely to be believed, that he belongs to that class of public servants, shall be punished with imprisonment of either description for a term which may extend to three months. or with fine which may extend to two hundred rupees, or with both.

लागू अपराध

कपटपूर्ण आशय से लोक सेवक के उपयोग की पोशाक पहनना या टोकन को धारण करना।
सजा- तीन मास के लिए कारावास या दो सौ रुपए का जुर्माना या दोनो।
यह एक जमानतीय, संज्ञेय अपराध है और किसी भी श्रेणी के मजिस्ट्रेट द्वारा विचारणीय है।
यह अपराध समझौता योग्य नही है।

सजा (Punishment) का प्रावधान

भारतीय दंड संहिता की धारा 171 के अंतर्गत जो कोई कपटपूर्वक आशय से लोक सेवक के उपयोग की पोशाक पहनता है या टोकन धारण करता है तो वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि तीन मास तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, जो दो सौ रुपए तक का हो सकेगा, या दोनों से, दण्डित किया जाएगा।

जमानत (Bail) का प्रावधान

भारतीय दंड संहिता की धारा 171 के अंतर्गत ऐसे अपराध कारित करने वाले व्यक्ति जमानत (Bail) कराना आवश्यक है, यह अपराध जमानतीय होने के कारण जमानत आसानी से मिल जाती है।

अपराधसजाअपराध श्रेणीजमानतविचारणीय
कपटपूर्ण आशय से लोक सेवक के उपयोग की पोशाक पहनना या टोकन को धारण करना।तीन मास के लिए कारावास या दो सौ रुपए का जुर्माना या दोनो।संज्ञेयजमानतीयकिसी भी श्रेणी के मजिस्ट्रेट द्वारा

हमारा प्रयास आईपीसी की धारा 171 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन मे कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

आईपीसी की धारा 170 | लोक सेवक का प्रतिरूपण | IPC Section- 170 in hindi | Personating a public servant.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए भारतीय दंड संहिता की धारा 170 के बारे में संपूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है भारतीय दंड संहिता की धारा 170? साथ ही हम आपको IPC की धारा 170 के अंतर्गत कैसे क्या सजा मिलती है और जमानत कैसे मिलती है, और यह अपराध किस श्रेणी में आता है, इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

IPC की धारा 170 का विवरण

भारतीय दण्ड संहिता (IPC) में धारा 170 के अंतर्गत जो कोई किसी विशिष्ट पद को लोक सेवक के नाते धारण करने का अपदेश यह जानते हुए करेगा कि वह ऐसा पद धारण नहीं करता है या ऐसा पद धारण करने वाले किसी अन्य व्यक्ति का छद्म प्रतिरूपण करेगा और ऐसे बनावटी रूप में ऐसे पदाभास से कोई कार्य करेगा या करने का प्रयत्न करेगा तो यह धारा 170 के अंतर्गत दंडित किया जाएगा। जिसके लिए वह दंड व जुर्माने का भागीदार होगा। भारतीय दण्ड संहिता की धारा 170 इसी विषय के बारे में बतलाती है।

आईपीसी की धारा 170 के अनुसार-

लोक सेवक का प्रतिरूपण-

जो कोई किसी विशिष्ट पद को लोक सेवक के नाते धारण करने का अपदेश यह जानते हुए करेगा कि वह ऐसा पद धारण नहीं करता है या ऐसा पद धारण करने वाले किसी अन्य व्यक्ति का छद्म प्रतिरूपण करेगा और ऐसे बनावटी रूप में ऐसे पदाभास से कोई कार्य करेगा या करने का प्रयत्न करेगा, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि दो वर्ष तक की हो सकेगी या जुर्माने से, या दोनों से, दण्डित किया जाएगा।

Personating a public servant-

Whoever pretends to hold any particular office as a public servant, knowing that he does not hold such office or falsely personates any other person holding such office, and in such assumed character dies or attempts to do any act under colour of such office, shall be punished with imprisonment of either description for a term, which may extend to two years, or with fine, or with both.

लागू अपराध

लोक सेवक का प्रतिरूपण।
सजा- दो वर्ष के लिए कारावास या जुर्माना या दोनो।
यह एक गैर-जमानतीय, संज्ञेय अपराध है और किसी भी श्रेणी के मजिस्ट्रेट द्वारा विचारणीय है।
यह अपराध समझौता योग्य नही है।

सजा (Punishment) का प्रावधान

भारतीय दंड संहिता की धारा 170 के अंतर्गत जो कोई लोकसेवक के पद धारण करता है जबकि वास्तव में वह व्यक्ति उस वर्ग का नही है, ऐसे बनावटी रूप से लोक सेवक पद का कार्य करता है या करने का प्रयास करता है  तो वह कारावास से, जिसकी अवधि दो वर्ष तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, या दोनों से, दण्डित किया जाएगा।

जमानत (Bail) का प्रावधान

भारतीय दंड संहिता की धारा 170 के अंतर्गत ऐसे अपराध कारित करने वाले व्यक्ति जमानत (Bail) कराना आवश्यक है, यह अपराध गैर-जमानतीय होने के कारण जमानत आसानी से नहीं मिल सकेगी।

अपराधसजाअपराध श्रेणीजमानतविचारणीय
लोक सेवक का प्रतिरूपण।दो वर्ष के लिए कारावास या जुर्माना या दोनो।संज्ञेयगैर-जमानतीयकिसी भी श्रेणी के मजिस्ट्रेट द्वारा

हमारा प्रयास आईपीसी की धारा 170 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

आईपीसी की धारा 169 | लोक सेवक, जो विधिविरुद्ध रूप से व्यापार में लगता है | IPC Section- 169 in hindi | Public servant unlawfully engaging in trade.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए भारतीय दंड संहिता की धारा 169 के बारे में संपूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है भारतीय दंड संहिता की धारा 169? साथ ही हम आपको IPC की धारा 169 के अंतर्गत कैसे क्या सजा मिलती है और जमानत कैसे मिलती है, और यह अपराध किस श्रेणी में आता है, इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

IPC की धारा 169 का विवरण

भारतीय दण्ड संहिता (IPC) में धारा 169 के अंतर्गत जो कोई लोक सेवक होते हुए और ऐसे लोक सेवक के नाते इस बात के लिए वैध रूप से आबद्ध होते हुए कि वह अमुक सम्पत्ति को न तो क्रय करे और न उसके लिए बोली लगाए, या तो अपने निज के नाम में या किसी दूसरे के नाम में, अथवा दूसरों के साथ संयुक्त रूप से, या अंशों में, उस सम्पत्ति को क्रय करेगा, या उसके लिये बोली लगायेगा तो यह धारा 169 के अंतर्गत दंडित किया जाएगा। जिसके लिए वह दंड व जुर्माने का भागीदार होगा। भारतीय दण्ड संहिता की धारा 169 इसी विषय के बारे में बतलाती है।

आईपीसी की धारा 169 के अनुसार-

लोक सेवक, जो विधिरुद्ध रूप से सम्पत्ति क्रय करता है या उसके लिए बोली लगाता है-

जो कोई लोक सेवक होते हुए और ऐसे लोक सेवक के नाते इस बात के लिए वैध रूप से आबद्ध होते हुए कि वह अमुक सम्पत्ति को न तो क्रय करे और न उसके लिए बोली लगाए, या तो अपने निज के नाम में या किसी दूसरे के नाम में, अथवा दूसरों के साथ संयुक्त रूप से, या अंशों में, उस सम्पत्ति को क्रय करेगा, या उसके लिये बोली लगायेगा, वह सादा कारावास से, जिसकी अवधि दो वर्ष तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, या दोनों से, दण्डित किया जाएगा, और यदि वह सम्पत्ति क्रय कर ली गयी है, तो वह अधिद्धत कर ली जाएगी।

Public servant unlawfully buying or bidding for property-

Whoever, being a public servant, and being legally bound as such public servant, not to purchase or bid for certain property, purchases or bids for that property, either in his own name or in the name of another, or jointly, or in shares with others, shall be punished with simple imprisonment for a term which may extend to two years, or with fine, or with both; and the property, if purchased, shall be confiscated.

लागू अपराध

लोक सेवक, जो विधिरुद्ध रूप से सम्पत्ति क्रय करता है या उसके लिए बोली लगाता है।
सजा- दो वर्ष के लिए सदा कारावास या जुर्माना या दोनो।
यह एक जमानतीय, गैर-संज्ञेय अपराध है और प्रथम श्रेणी के मजिस्ट्रेट द्वारा विचारणीय है।
यह अपराध समझौता योग्य नही है।

सजा (Punishment) का प्रावधान

भारतीय दंड संहिता की धारा 169 के अंतर्गत जो कोई लोकसेवक होते हुए, विधिविरुद्ध रूप से संपत्ति खरीदता है, या बोली लगाता है अथवा अपने या किसी संयुक्त रूप से भागीदारी करता है तो वह सादा कारावास से, जिसकी अवधि दो वर्ष तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, या दोनों से, दण्डित किया जाएगा।

जमानत (Bail) का प्रावधान

भारतीय दंड संहिता की धारा 169 के अंतर्गत ऐसे अपराध कारित करने वाले व्यक्ति जमानत (Bail) कराना आवश्यक है, यह अपराध जमानतीय होने के कारण जमानत आसानी से मिल जाती है।

अपराधसजाअपराध श्रेणीजमानतविचारणीय
लोक सेवक, जो विधिरुद्ध रूप से सम्पत्ति क्रय करता है या उसके लिए बोली लगाता है।दो वर्ष के लिए सदा कारावास या जुर्माना या दोनो।गैर-संज्ञेयजमानतीयप्रथम श्रेणी के मजिस्ट्रेट द्वारा

हमारा प्रयास आईपीसी की धारा 169 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

आईपीसी की धारा 168 | लोक सेवक, जो विधिविरुद्ध रूप से व्यापार में लगता है | IPC Section- 168 in hindi | Public servant unlawfully engaging in trade.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए भारतीय दंड संहिता की धारा 168 के बारे में संपूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है भारतीय दंड संहिता की धारा 168? साथ ही हम आपको IPC की धारा 168 के अंतर्गत कैसे क्या सजा मिलती है और जमानत कैसे मिलती है, और यह अपराध किस श्रेणी में आता है, इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

धारा 168 का विवरण

भारतीय दण्ड संहिता (IPC) में धारा 168 के अंतर्गत जो कोई लोक सेवक होते हुए,ऐसे लोक सेवक के नाते इस बात के लिए वैध रूप से आबद्ध होते हुए कि वह व्यापार में न लगे, व्यापार में लगेगा तो यह धारा 168 के अंतर्गत दंडित किया जाएगा। जिसके लिए वह दंड व जुर्माने का भागीदार होगा। भारतीय दण्ड संहिता की धारा 168 इसी विषय के बारे में बतलाती है।

आईपीसी की धारा 168 के अनुसार-

लोक सेवक, जो विधिविरुद्ध रूप से व्यापार में लगता है-

जो कोई लोक सेवक होते हुए और ऐसे लोक सेवक के नाते इस बात के लिए वैध रूप से आबद्ध होते हुए कि वह व्यापार में न लगे, व्यापार में लगेगा, वह सादा कारावास से, जिसकी अवधि एक वर्ष तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, या दोनों से, दण्डित किया जाएगा।

Public servant unlawfully engaging in trade-

Whoever, being a public servant, and being legally bound as such public servant not to engage in trade, engages in trade, shall be punished with simple imprisonment for a term which may extend to one year, or with fine, or with both.

लागू अपराध

लोक सेवक, जो विधिविरुद्ध रूप से व्यापार में लगता है।
सजा- एक वर्ष के लिए सदा कारावास या जुर्माना या दोनो।
यह एक जमानतीय, गैर-संज्ञेय अपराध है और प्रथम श्रेणी के मजिस्ट्रेट द्वारा विचारणीय है।
यह अपराध समझौता योग्य नही है।

सजा (Punishment) का प्रावधान

भारतीय दंड संहिता की धारा 168 के अंतर्गत जो कोई लोकसेवक होते हुए, ऐसे लोक सेवक के नाते विधिविरुद्ध रूप से व्यापार में लगता है तो वह सादा कारावास से, जिसकी अवधि एक वर्ष तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, या दोनों से, दण्डित किया जाएगा।

जमानत (Bail) का प्रावधान

भारतीय दंड संहिता की धारा 168 के अंतर्गत ऐसे अपराध कारित करने वाले व्यक्ति जमानत (Bail) कराना आवश्यक है, यह अपराध जमानतीय होने के कारण जमानत आसानी से मिल जाती है।

अपराधसजाअपराध श्रेणीजमानतविचारणीय
लोक सेवक, जो विधिविरुद्ध रूप से व्यापार में लगता है।एक वर्ष के लिए सदा कारावास या जुर्माना या दोनो।गैर-संज्ञेयजमानतीयप्रथम श्रेणी के मजिस्ट्रेट द्वारा

हमारा प्रयास आईपीसी की धारा 168 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

आईपीसी की धारा 167 | लोक सेवक, जो क्षति कारित करने के आशय से अशुद्ध दस्तावेज रचता है | IPC Section- 167 in hindi | Public servant framing an incorrect document with intent to cause injury.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए भारतीय दंड संहिता की धारा 167 के बारे में संपूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है भारतीय दंड संहिता की धारा 167? साथ ही हम आपको IPC की धारा 167 के अंतर्गत कैसे क्या सजा मिलती है और जमानत कैसे मिलती है, और यह अपराध किस श्रेणी में आता है, इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

धारा 167 का विवरण

भारतीय दण्ड संहिता (IPC) में धारा 167 के अंतर्गत जो कोई लोक सेवक होते हुए, (ऐसे लोक सेवक के नाते किसी दस्तावेज या इलेक्ट्रानिक अभिलेख की रचना या अनुवाद का भार वहन करते हुए उस दस्तावेज या इलेक्ट्रानिक अभिलेख का विनिर्माण, रचना या अनुवाद) इस प्रकार से जिसे वह जानता हो या विश्वास करता हो कि अशुद्ध है, इस आशय से, या सम्भाव्य जानते हुए करेगा तो यह धारा 167 दंडित किया जाएगा। जिसके लिए वह दंड व जुर्माने का भागीदार होगा। भारतीय दण्ड संहिता की धारा 167 इसी विषय के बारे में बतलाती है।

आईपीसी की धारा 167 के अनुसार-

लोक सेवक, जो क्षति कारित करने के आशय से अशुद्ध दस्तावेज रचता है-

जो कोई लोक सेवक होते हुए और [ऐसे लोक सेवक के नाते किसी दस्तावेज या इलेक्ट्रानिक अभिलेख की रचना या अनुवाद का भार वहन करते हुए उस दस्तावेज या इलेक्ट्रानिक अभिलेख का विनिर्माण, रचना या अनुवाद] ऐसे प्रकार से जिसे वह जानता हो या विश्वास करता हो कि अशुद्ध है, इस आशय से, या सम्भाव्य जानते हुए करेगा कि तद्द्वारा वह किसी व्यक्ति को क्षति कारित करे, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि तीन वर्ष तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, या दोनों से, दण्डित किया जाएगा।

Public servant framing an incorrect document with intent to cause injury-

Whoever, being a public servant, and being, as [such public servant, charged with the preparation or translation of any document or electronic record, frames, prepares or translates that document or electronic record] in a manner which he knows or believes to be incorrect, intending thereby to cause or knowing it to be likely that he may thereby cause injury to any person, shall be punished with imprisonment of either description for a term which may extend to three years, or with fine, or with both.

लागू अपराध

लोक सेवक, जो क्षति कारित करने के आशय से अशुद्ध दस्तावेज रचता है।
सजा- तीन वर्ष के लिए कारावास या जुर्माना या दोनो।
यह एक जमानतीय, संज्ञेय अपराध है और प्रथम श्रेणी के मजिस्ट्रेट द्वारा विचारणीय है।
यह अपराध समझौता योग्य नही है।

सजा (Punishment) का प्रावधान

भारतीय दंड संहिता की धारा 167 के अंतर्गत जो कोई लोकसेवक होते हुए, क्षति कारित करने के आशय से अशुद्ध दस्तावेज रचता है तो वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि तीन वर्ष तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, या दोनों से, दण्डित किया जाएगा।

जमानत (Bail) का प्रावधान

भारतीय दंड संहिता की धारा 167 के अंतर्गत ऐसे अपराध कारित करने वाले व्यक्ति जमानत (Bail) कराना आवश्यक है, यह अपराध जमानतीय होने के कारण जमानत आसानी से मिल जाती है।

अपराधसजाअपराध श्रेणीजमानतविचारणीय
लोक सेवक, जो क्षति कारित करने के आशय से अशुद्ध दस्तावेज रचता है।तीन वर्ष के लिए कारावास या जुर्माना या दोनो।संज्ञेयजमानतीयप्रथम श्रेणी के मजिस्ट्रेट द्वारा

हमारा प्रयास आईपीसी की धारा 167 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

आईपीसी की धारा 166B | पीड़ित का उपचार न करने के लिए दण्ड | IPC Section- 166B in hindi | Punishment for non-treatment of victim.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए भारतीय दंड संहिता की धारा 166B के बारे में संपूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है भारतीय दंड संहिता की धारा 166B? साथ ही हम आपको IPC की धारा 166B के अंतर्गत कैसे क्या सजा मिलती है और जमानत कैसे मिलती है, और यह अपराध किस श्रेणी में आता है, इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

धारा 166B का विवरण

भारतीय दण्ड संहिता (IPC) में धारा 166B के अंतर्गत जो कोई अस्पताल, सार्वजनिक या व्यक्तिगत, चाहे केन्द्रीय सरकार, राज्य सरकार, स्थानीय निकाय या किसी अन्य व्यक्ति द्वारा संचालित हो, यदि वह किसी पीड़ित व्यक्ति का उपचार करने मना करता है तो वह धारा 166B के अंतर्गत दंडित किया जाएगा। जिसके लिए वह दंड व जुर्माना अथवा दोनो का भागीदार होगा। भारतीय दण्ड संहिता की धारा 166B इसी विषय के बारे में बतलाती है।

आईपीसी की धारा 166B के अनुसार-

पीड़ित का उपचार न करने के लिए दण्ड-

जो कोई अस्पताल, सार्वजनिक या व्यक्तिगत, चाहे केन्द्रीय सरकार, राज्य सरकार, स्थानीय निकाय या किसी अन्य व्यक्ति द्वारा संचालित हो, का भारसाधक होते हुए दण्ड प्रक्रिया संहिता (1974 का 2) की धारा 357-ग के प्रावधानों का उल्लंघन करेगा, वह कारावास से, जिसकी अवधि एक वर्ष तक हो सकेगी या जुर्माने से या दोनों से दण्डित किया जाएगा।

Punishment for non-treatment of victim-

Whoever, being in charge of a hospital, public or private, whether run by the Central Government, the State Government, local bodies or any other person, contravenes the provisions of Section 357-C of the Code of Criminal Procedure, 1973 (2 of 1974) shall be punished with imprisonment for a term which may extend to one year or with fine or with both.

लागू अपराध

अस्पताल द्वारा पीड़ित का उपचार न किया जाना।
सजा- न्यूनतम् 6 मास का कारावास, जो दो वर्ष तक का  हो सकेगा और जुर्माना।
यह एक जमानतीय, गैर-संज्ञेय अपराध है और प्रथम श्रेणी के मजिस्ट्रेट द्वारा विचारणीय है।
यह अपराध समझौता योग्य नही है।

सजा (Punishment) का प्रावधान

भारतीय दंड संहिता की धारा 166B के अंतर्गत जो कोई अस्पताल, सार्वजनिक या व्यक्तिगत, चाहे केन्द्रीय सरकार का हो अथवा राज्य सरकार का या किसी अन्य व्यक्ति द्वारा संचालित हो, पीड़ित का उपचार करने से मना करता है तो वह न्यूनतम् 6 मास का कारावास, जो दो वर्ष तक का हो सकेगा और जुर्माने से भी दण्डित किया जाएगा।

जमानत (Bail) का प्रावधान

भारतीय दंड संहिता की धारा 166B के अंतर्गत ऐसे अपराध कारित करने वाले व्यक्ति जमानत (Bail) कराना आवश्यक है, यह अपराध जमानतीय होने के कारण जमानत आसानी से मिल जाती है।

अपराधसजाअपराध श्रेणीजमानतविचारणीय
अस्पताल द्वारा पीड़ित का उपचार न किया जाना।न्यूनतम् 6 मास का कारावास, जो दो वर्ष तक का हो सकेगा और जुर्माना।गैर-संज्ञेयजमानतीयप्रथम श्रेणी के मजिस्ट्रेट द्वारा

हमारा प्रयास आईपीसी की धारा 166B की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आप के पास कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।