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आईपीसी की धारा 166A | लोक सेवक, जो विधि के अधीन निदेश की अवज्ञा करता है | IPC Section- 166A in hindi | Public servant disobeying direction under law.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए भारतीय दंड संहिता की धारा 166A के बारे में संपूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है भारतीय दंड संहिता की धारा 166A? साथ ही हम आपको IPC की धारा 166A के अंतर्गत कैसे क्या सजा मिलती है और जमानत कैसे मिलती है, और यह अपराध किस श्रेणी में आता है, इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

धारा 166A का विवरण

भारतीय दण्ड संहिता (IPC) में धारा 166A के अंतर्गत जो कोई लोक सेवक होते हुए, विधि के किसी ऐसे निदेश की, जो किसी अपराध में अन्वेषण (जांच) के प्रयोजन या किसी अन्य मामले के लिए किसी व्यक्ति की किसी स्थान पर उपस्थिति की अपेक्षा करने से उसे प्रतिषिद्ध करता जानते हुए अवज्ञा करेगा अथवा अन्वेषण को गलत ढंग से संचालित करेगा। ऐसा करने से किसी व्यक्ति पर प्रतिकूल पड़ेगा, यह जानते हुए अवज्ञा करेगा तो वह लोक सेवक व्यक्ति इस धारा 166A के अंतर्गत दंड का भागीदार होगा। भारतीय दण्ड संहिता की धारा 166A इसी विषय के बारे में बतलाती है।

आईपीसी की धारा 166A के अनुसार-

लोक सेवक, जो विधि के अधीन निदेश की अवज्ञा करता है-

जो कोई लोक सेवक होते हुए –
(क) विधि के किसी ऐसे निदेश की, जो किसी अपराध में अन्वेषण के प्रयोजन या किसी अन्य मामले के लिए किसी व्यक्ति की किसी स्थान पर उपस्थिति की अपेक्षा करने से उसे प्रतिषिद्ध करता जानते हुए अवज्ञा करेगा; या
(ख) उस ढंग को, जिस ढंग में वह ऐसे अन्वेषण को संचालित करेगा, विनियमित करने वाली विधि के किसी अन्य निदेश का किसी व्यक्ति पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ना जानते हुए अवज्ञा करेगा, या
(ग) दण्ड प्रक्रिया संहिता, 1973 (1974 का 2) की धारा 154 की उपधारा (1) के अधीन और विशिष्ट रूप से धारा 326-क, धारा 326-ख, धारा 354, धारा 354ख, धारा 370, धारा 370क, धारा 376, धारा 376क, [ धारा 376कख, धारा 376ख, धारा 376ग, धारा 376घ, धारा 376घक, धारा 376घख] या धारा 376ङ या धारा 509 के अधीन दण्डनीय संज्ञेय अपराध के सम्बन्ध में उसको दी गयी किसी इत्तिला को अभिलिखित करने में असफल रहेगा, वह कठोर कारावास से, जिसकी आवधि छः मास से कम नहीं होगी किन्तु जो दो वर्ष तक की हो सकेगी, दण्डित किया जायेगा और जुर्माने से भी दण्डनीय होगा।

Public servant disobeying direction under law-

Whoever, being a public servant-
(a) knowingly disobeys any direction of the law which prohibits him from requiring the attendance at any place of any person for the purpose of investigation into an offence or any other matter, or
(b) knowingly disobeys, to the prejudice of any person, any other direction of the law regulating the manner in which he shall conduct such investigation, or
(c) fails to record any information given to him under sub-section (1) of Section 154 of the Code of Criminal Procedure, 1973 (2 of 1974), in relation to cognizable offence punishable under Section 326-A, Section 326-B, Section 354, Section 354-B, Section 370, Section 370-A, Section 376, Section 376-A, [Section 376AB, Section 376B, Section 376C Section 376D, Section 376DA, Section 376DB], Section 376-E or Section 509, shall be punished with rigorous imprisonment for a term which shall not be less than six months but which may extend to two years, and shall also be liable to fine.

लागू अपराध

लोक सेवक, जो विधि के अधीन निदेश की अवज्ञा करता है।
सजा- न्यूनतम् 6 मास का कारावास, जो दो वर्ष तक का  हो सकेगा और जुर्माना।
यह एक जमानतीय, संज्ञेय अपराध है और प्रथम श्रेणी के मजिस्ट्रेट द्वारा विचारणीय है।
यह अपराध समझौता योग्य नही है।

सजा (Punishment) का प्रावधान

भारतीय दंड संहिता की धारा 166A के अंतर्गत जो कोई लोकसेवक किसी मामले की जांच करता है अथवा अन्य किसी मामले किसी व्यक्ति की किसी स्थान पर उपस्थिति की अपेक्षा करने से उसे परिसिद्ध करता है अथवा इस गलत जांच से व्यक्ति को क्या प्रभाव पड़ेगा यह जानते हुए अवज्ञा करता है तो वह लोकसेवक न्यूनतम् 6 मास का कारावास, जो दो वर्ष तक का हो सकेगा और जुर्माने से, दण्डित किया जाएगा।

जमानत (Bail) का प्रावधान

भारतीय दंड संहिता की धारा 166A के अंतर्गत ऐसे अपराध कारित करने वाले व्यक्ति जमानत (Bail) कराना आवश्यक है, यह अपराध जमानतीय होने के कारण जमानत आसानी से मिल जाती है।

अपराधसजाअपराध श्रेणीजमानतविचारणीय
लोक सेवक, जो विधि के अधीन निदेश की अवज्ञा करता है।न्यूनतम् 6 मास का कारावास, जो दो वर्ष तक का हो सकेगा और जुर्माना।संज्ञेयजमानतीयप्रथम श्रेणी के मजिस्ट्रेट द्वारा

हमारा प्रयास आईपीसी की धारा 166A की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

आईपीसी की धारा 166 | लोक सेवक, जो किसी व्यक्ति को क्षति कारित करने के आशय से विधि की अवज्ञा करता है | IPC Section- 166 in hindi | Public servant disobeying law, with intent to cause injury to any person.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए भारतीय दंड संहिता की धारा 166 के बारे में संपूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है भारतीय दंड संहिता की धारा 166? साथ ही हम आपको IPC की धारा 166 के अंतर्गत कैसे क्या सजा मिलती है और जमानत कैसे मिलती है, और यह अपराध किस श्रेणी में आता है, इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

धारा 166 का विवरण

भारतीय दण्ड संहिता (IPC) में धारा 166 के अंतर्गत जो कोई लोक सेवक होते हुए, किसी व्यक्ति को क्षति करने के आशय से कानून का अवज्ञा या उलंघन करता है, जबकि उसका कर्तव्य एवम आचरण कानून व्यवस्था बनाए रखने का है, फिर भी वह कानून का गलत उपयोग अपने फायदे के लिए करता है तो यह धारा 166 दंडित करने के लिए अप्लाई होगी। जिसके लिए वह दंड का भागीदार होगा। भारतीय दण्ड संहिता की धारा 166 इसी विषय के बारे में बतलाती है।

आईपीसी की धारा 166 के अनुसार-

लोक सेवक, जो किसी व्यक्ति को क्षति कारित करने के आशय से विधि की अवज्ञा करता है-

जो कोई लोक सेवक होते हुए विधि के किसी ऐसे निदेश की जो उस ढंग के बारे में हो जिस ढंग से लोक सेवक के नाते उसे आचरण करना है, जानते हुए अवज्ञा इस आशय से, या यह सम्भाव्य जानते हुए करेगा कि ऐसी अवज्ञा से वह किसी व्यक्ति को क्षति कारित करेगा, वह सादा कारावास से, जिसकी अवधि एक वर्ष तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, या दोनों से, दण्डित किया जाएगा।
दृष्टांत-
क, जो एक आफिसर है, और न्यायालय द्वारा य के पक्ष में दी गयी डिक्री की तुष्टि के लिए निष्पादन में सम्पत्ति लेने के लिए विधि द्वारा निर्देशित है, यह ज्ञान रखते हुए कि यह सम्भाव्य है कि तद्द्वारा वह य को क्षति कारित करेगा, जानते हुए विधि के उस निदेश की अवज्ञा करता है। कने इस धारा में परिभाषित अपराध किया है।

Public servant disobeying law, with intent to cause injury to any person-

Whoever, being a public servant, knowingly disobeys any direction of the law as to the way in which he is to conduct himself as such public servant, intending to cause, or knowing it to be likely that he will, by such disobedience, cause injury to any person, shall be punished with simple imprisonment for a term which may extend to one year, or with fine, or with both.
Illustration-
A, being an officer directed by law to take property in execution, in order to satisfy a decree pronounced in Zs favour by a Court of Justice, knowingly disobeys that direction of law, with the knowledge that he is likely thereby to cause injury to Z. A has committed the offence defined in this section.

लागू अपराध

लोक सेवक, जो किसी व्यक्ति को क्षति कारित करने के आशय से विधि की अवज्ञा करता है।
सजा- एक वर्ष के लिए सदा कारावास, या जुर्माना या दोनो।
यह एक जमानतीय, गैर-संज्ञेय अपराध है और प्रथम श्रेणी के मजिस्ट्रेट द्वारा विचारणीय है।
यह अपराध समझौता योग्य नही है।

सजा (Punishment) का प्रावधान

भारतीय दंड संहिता की धारा 166 के अंतर्गत जो कोई लोकसेवक द्वारा किसी व्यक्ति को क्षति करने के उद्देश्य से कानून का अवज्ञा या उलंघन करता है तो वह लोकसेवक  वह सादा कारावास से, जिसकी अवधि एक वर्ष तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, या दोनों से, दण्डित किया जाएगा।

जमानत (Bail) का प्रावधान

भारतीय दंड संहिता की धारा 166 अंतर्गत जो अपराध कारित किए जाते है वह अपराध दंड प्रक्रिया संहिता में जमानतीय (Baileble) है, इसलिए इस धारा के अंतर्गत किए गए अपराध जमानतीय होने के कारण जमानत आसानी से मिल जाती है।

अपराधसजाअपराध श्रेणीजमानतविचारणीय
लोक सेवक, जो किसी व्यक्ति को क्षति कारित करने के आशय से विधि की अवज्ञा करता है।एक वर्ष के लिए सदा कारावास, या जुर्माना या दोनो।गैर-संज्ञेयजमानतीयप्रथम श्रेणी के मजिस्ट्रेट द्वारा

हमारा प्रयास आईपीसी की धारा 166 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

आईपीसी की धारा 160 | दंगा करने के लिए दंड | IPC Section- 160 in hindi | Punishment for committing affray.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए भारतीय दंड संहिता की धारा 160 के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है भारतीय दंड संहिता की धारा 160? साथ ही हम आपको IPC की धारा 160 सम्पूर्ण जानकारी कैसे क्या सजा मिलती है और जमानत कैसे मिलेगी, और यह अपराध किस श्रेणी में आता है, इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

धारा 160 का विवरण

भारतीय दण्ड संहिता (IPC) में धारा 160 के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। जब दो या दो से अधिक व्यक्ति पब्लिक प्लेस पर आपस में इस प्रकार लड़ते झगड़ते है कि समाज की लोक शांति भंग होती है, तब उसे हम सभी ‘दंगा करना’ कहते है। यह धारा 160 दंगा करने वाले व्यक्तियों को दंडित करने के लिए अप्लाई होगी। जिसके लिए वह दंड का भागीदार होगा। भारतीय दण्ड संहिता की धारा 160 इसी विषय के बारे में बतलाती है।

आईपीसी की धारा 160 के अनुसार-

दंगा करने के लिए दण्ड-

जो कोई दंगा करेगा, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि एक मास तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, जो एक सौ रुपये तक का हो सकेगा, या दोनों से, दण्डित किया जाएगा।

Punishment for committing affray

Whoever commits an affray, shall be punished with imprisonment of either description for a term which may extend to one month, or with fine which may extend to one hundred rupees, or with both.

लागू अपराध

दंगा करना।
सजा- एक मास के लिए कारावास, या सौ रुपए का जुर्माना या दोनो।
यह एक जमानतीय, संज्ञेय अपराध है और किसी भी श्रेणी के मजिस्ट्रेट द्वारा विचारणीय है।
यह अपराध समझौता योग्य नही है।

सजा (Punishment) का प्रावधान

भारतीय दंड संहिता की धारा 160 के अंतर्गत जो कोई दो या अधिक व्यक्तियो द्वारा समाज में दंगा करके सामाजिक शांति भंग करते है तो वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि एक मास तक की हो सकेगी, या एक सौ रुपए का जुर्माने से, या दोनों से, दण्डित किया जाएगा।

जमानत (Bail) का प्रावधान

जो कोई समाज में दंगा करते हैं, जिससे समाज की शांति भंग होती है तो वह व्यक्ति भारतीय दंड संहिता की धारा 160 के अंतर्गत ऐसे अपराध कारित करने वाले व्यक्ति अपराध के अनुसार जमानत (Bail) का प्रावधानसार ही मामले में पुलिस द्वारा FIR दर्ज करती है यह अपराध जमानतीय होने के कारण जमानत आसानी से नही मिल जाती है।

अपराधसजाअपराध श्रेणीजमानतविचारणीय
दंगा करना।एक मास के लिए कारावास, या सौ रुपए का जुर्माना या दोनो।संज्ञेयजमानतीयकिसी भी श्रेणी के मजिस्ट्रेट द्वारा

हमारा प्रयास आईपीसी की धारा 160 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आप के पास कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

आईपीसी की धारा 159 | दंगा | IPC Section- 159 in hindi | Affray.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए भारतीय दंड संहिता की धारा 159 के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है भारतीय दंड संहिता की धारा 159? साथ ही हम आपको IPC की धारा 159 के अंतर्गत परिभाषा इत्यादि की जानकारी इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

धारा 159 का विवरण

भारतीय दण्ड संहिता (IPC) में धारा 159 के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। वैसे तो हम सभी जानते हैं दंगा किसे कहते है, फिर भी हम मुख्य बाते समझते है जब दो या दो से अधिक व्यक्ति पब्लिक प्लेस पर आपस में इस प्रकार लड़ते झगड़ते है कि समाज की लोक शांति भंग होती है, तब उसे हम सभी ‘दंगा करना’ कहते है। यह धारा 159 दंगा को परिभाषित करती है। दंगा करने वाले व्यक्तियों को धारा 160 के अंतर्गत दंड का प्रावधान है। भारतीय दण्ड संहिता की धारा 159 इसी विषय के बारे में बतलाती है।

आईपीसी की धारा 159 के अनुसार-

दंगा-

जब कि दो या अधिक व्यक्ति लोकस्थान में लड़कर लोक शान्ति में विघ्न डालते हैं, तब यह कहा जाता है कि वे “दंगा करते हैं”।

Affray-

When two or more persons, by fighting in a public place, disturb the public peace, they are said to “commit an affray”.

दंगा क्या होता है?

वैसे जब दो या दो से अधिक व्यक्तियों का समूह मिलकर सामाजिक हिंसा और लड़ते झगड़ते है, तो उसे हम दंगा करना कहते है । जिसमें सामान्यतः एक हिंसक समूह प्रशासन, संपत्ति या लोगों के खिलाफ सार्वजनिक अशांति का माहौल पैदा करता है। दंगों में आम तौर पर बर्बरता और सार्वजानिक या निजी संपत्ति का विनाश देखने को मिलता है। संपत्ति का प्रकार इसमें शामिल लोगों के हठ पर निर्भर करता है। लक्ष्य में दुकानें, कारें, रेस्तरां, राज्य के स्वामित्व वाली संस्थाओं और धार्मिक इमारतों भी शामिल हो सकतीं हैं।

हमारा प्रयास आईपीसी की धारा 159 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन मे कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

आईपीसी की धारा 297| कब्रिस्तानो आदि में अतिचार करना |IPC Section- 297 in hindi | Trespassing on burial places, etc.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए भारतीय दंड संहिता की धारा 297 के बारे में सम्पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है भारतीय दंड संहिता की धारा 297? साथ ही हम आपको IPC की धारा 297 के अंतर्गत कैसे क्या सजा मिलती है और जमानत कैसे मिलती है, और यह अपराध किस श्रेणी में आता है, इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

धारा 297 का विवरण

भारतीय दण्ड संहिता (IPC) में आज हम बात करेंगे धारा 297 के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। यदि कोई व्यक्ति उपासना स्थान, समाधि स्थल अथवा शमशान घाट को क्षति या नुकसान पहुंचाता है अथवा किसी शमशान घाट जा रही मृत शरीर का अपमान या बाधा डालता है तो वह व्यक्ति भारतीय दण्ड संहिता की धारा 297 के अंतर्गत अपराधी होगा। यह धारा ऐसे अपराधो को परिभाषित करती है, साथ ही दंड एवम् जुर्माने के प्रावधान को भी बतलाती है

आईपीसी की धारा 297 के अनुसार-

कब्रिस्तानो आदि में अतिचार करना-

जो कोई किसी उपासना-स्थान में, या किसी कब्रिस्तान पर या अन्त्येष्टि क्रियाओं के लिए या मृतकों के अवशेषों के लिये निक्षेप स्थान के रूप में पृथक् रखे गये किसी स्थान में अतिचार या किसी मानव-शव की अवहेलना या अन्त्येष्टि संस्कारों के लिये एकत्रित किन्हों व्यक्तियों को विघ्न कारित, इस आशय से करेगा कि किसी व्यक्ति की भावनाओं को ठेस पहुँचाए या किसी व्यक्ति के धर्म का अपमान करे, या यह सम्भाव्य जानते हुए करेगा कि तद्वारा किसी व्यक्ति की भावनाओं को ठेस पहुंचेगी या किसी व्यक्ति के धर्म का अपमान होगा, वह दोनों में से किसी भाँति के कारावास से, जिसकी अवधि एक वर्ष तक की हो सकेगी, या जुमाने या दोनों से, दण्डित किया जाएगा।

Trespassing on burial places, etc-

Whoever, with the intention of wounding the feelings of any person, or of insulting the religion of any person, or with the knowledge that the feelings of any person are likely to be wounded, or that the religion of any person is likely to be insulied thereby, commits any trespass in any place of worship or on any place of sepulchre, or any place set apart for the performance of funeral rites or as a depository for the remains of the dead, or offers any indignity to any human corpse, or causes disturbance to any persons assembled for the performance of funeral ceremonies.
shall be punished with imprisonment of either description for a term which may extend to one year, or with fine, or with both.

लागू अपराध

किसी व्यक्ति की भावनाओं को ठेस पहुंचाने के या किसी व्यक्ति के धर्म का अपमान करने के आशय से उपासना स्थान या कब्रिस्तान में अतिचार करना या अंत्येष्टि में विघ्न कारित करना या मानव शव की अवहेलना करना।
सजा- एक वर्ष के लिए कारावास या जुर्माना, अथवा दोनो का भागीदार होगा।
यह एक जमानती, संज्ञेय अपराध है और किसी भी श्रेणी के मजिस्ट्रेट द्वारा विचारणीय है।
यह अपराध समझौते योग्य नही है।

सजा (Punishment) का प्रावधान

किसी व्यक्ति की भावनाओं को ठेस पहुंचाने के या किसी व्यक्ति के धर्म का अपमान करने के आशय से उपासना स्थान या कब्रिस्तान में अतिचार करना या अंत्येष्टि में विघ्न कारित करना या मानव शव की अवहेलना करता है तो वह व्यक्ति एक वर्ष के लिए कारावास या जुर्माना अथवा दोनो का भागीदार हो सकता है।

जमानत (Bail) का प्रावधान

भारतीय दंड संहिता की धारा 297 अंतर्गत जो अपराध कारित किए जाते है वह अपराध दंड प्रक्रिया संहिता में जमानतीय (Baileble) है, इसलिए इस धारा के अंतर्गत किए गए अपराध जमानतीय होने के कारण जमानत आसानी से मिल जाती है।

अपराधसजाअपराध श्रेणीजमानतविचारणीय
किसी व्यक्ति की भावनाओं को ठेस पहुंचाने के या किसी व्यक्ति के धर्म का अपमान करने के आशय से उपासना स्थान या कब्रिस्तान में अतिचार करना या अंत्येष्टि में विघ्न कारित करना या मानव शव की अवहेलना करना।एक वर्ष के लिए कारावास या जुर्माना, अथवा दोनो का भागीदार होगा।संज्ञेयजमानतीयकिसी भी श्रेणी के मजिस्ट्रेट द्वारा

हमारा प्रयास आईपीसी की धारा 297 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी , फिर भी अगर आप के पास कोई सवाल हो,तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है ।

आईपीसी की धारा 132 | विद्रोह का दुष्प्रेरण, यदि उसके परिणामस्वरूप विद्रोह किया जाए | IPC Section- 132 in hindi | Abetment of mutiny if mutiny, is committed in consequence thereof.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए भारतीय दंड संहिता की धारा 132 के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है भारतीय दंड संहिता की धारा 132? साथ ही हम आपको IPC की धारा 132 सम्पूर्ण जानकारी एवम् क्या सजा मिलेगी और कैसे क्या जमानत मिलेगी। इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

धारा 132 का विवरण

भारतीय दण्ड संहिता (IPC) में धारा 132 के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। जो कोई भारत सरकार की सेना, नौसेना, या वायुसेना द्वारा विद्रोह किए जाने का दुष्प्रेरण करेगा, यदि उस दुष्प्रेरण के परिणामस्वरूप विद्रोह हो जाता है तो भारतीय दंड संहिता की धारा 132 अप्लाई होगी। भारतीय दण्ड संहिता की धारा 132 इसी विषय के बारे में बतलाती है।

आईपीसी की धारा 132 के अनुसार-

विद्रोह का दुष्प्रेरण, यदि उसके परिणामस्वरूप विद्रोह किया जाए-

जो कोई भारत सरकार की सेना, नौसेना या वायुसेना के किसी ऑफिसर, सैनिक, नौसैनिक या वायुसैनिक द्वारा किए जाने का दुष्प्रेरण करेगा, यदि उस दुष्प्रेरण के परिणामस्वरूप विद्रोह हो जाए तो वह मृत्यु से या कारावास से, या दोनों में से किसी भाँति के कारावास से, जिसकी अवधि दस वर्ष तक की हो सकेगी, दण्डित किया जाएगा और जुर्माने से भी दण्डनीय होगा।

Abetment of mutiny if mutiny, is committed in consequence thereof-

Whoever abets the committing of mutiny by an officer, soldier, sailor or airman, in the Army, Navy or Air Force of the Government of India, shall, if mutiny be committed in consequence of that abetment, be punished with death or with imprisonment for life, or imprisonment of either description for a term which may extend to ten years, and shall also be liable to fine.

लागू अपराध

विद्रोह का दुष्प्रेरण, यदि उसके परिणामस्वरूप विद्रोह किया जाए।
सजा- मृत्यु, या आजीवन कारावास, या दस वर्ष के लिए कारावास और जुर्माना।
यह एक गैर-जमानतीय, संज्ञेय अपराध है और सेशन न्यायालय द्वारा विचारणीय है।
यह अपराध समझौता योग्य नही है।

सजा (Punishment) का प्रावधान

भारतीय दंड संहिता की धारा 132 के अंतर्गत जो कोई  भारत सरकार की सेना, नौसेना, या वायुसेना द्वारा विद्रोह किए जाने का दुष्प्रेरण करेगा, यदि उस दुष्प्रेरण के परिणामस्वरूप विद्रोह हो जाता है वह मृत्यु, या आजीवन कारावास, या दोनों में से किसी भाँति के कारावास से, जिसकी अवधि दस वर्ष तक की हो सकेगी, दण्डित किया जाएगा और जुर्माने से भी, दण्डनीय होगा।

जमानत (Bail) का प्रावधान

भारतीय दंड संहिता की धारा 132 अंतर्गत जो अपराध कारित किए जाते है वह अपराध दंड प्रक्रिया संहिता में गैर-जमानतीय (Non-Baileble) है, इसलिए इस धारा के अंतर्गत किए गए अपराध जमानत आसानी से नहीं मिल सकेगी।

अपराधसजाअपराध श्रेणीजमानतविचारणीय
विद्रोह का दुष्प्रेरण, यदि उसके परिणामस्वरूप विद्रोह किया जाए।मृत्यु, या आजीवन कारावास, या दस वर्ष के लिए कारावास और जुर्माना।संज्ञेयगैर-जमानतीयसेशन न्यायालय द्वारा

हमारा प्रयास आईपीसी की धारा 132 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।