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आईपीसी की धारा 186 | लोक-सेवक के लोक-कृत्यों के निर्वहन में बाधा डालना | IPC Section- 186 in hindi | Obstructing public servant in discharge of public functions.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए भारतीय दंड संहिता की धारा 186 के बारे में सम्पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है भारतीय दंड संहिता की धारा 186? साथ ही हम आपको IPC की धारा 186 के अंतर्गत कैसे क्या सजा मिलती है और जमानत कैसे मिलती है, और यह अपराध किस श्रेणी में आता है, इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

IPC की धारा 186 का विवरण

भारतीय दण्ड संहिता (IPC) में धारा 186 के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। जो कोई किसी लोक सेवक के लोक-कृत्यों के निर्वहन में स्वेच्छया बाधा डालेगा, तो वह व्यक्ति धारा 186 के अंतर्गत दंड एवं जुर्माने से दण्डित किया जाएगा।

आईपीसी की धारा 186 के अनुसार-

लोक-सेवक के लोक-कृत्यों के निर्वहन में बाधा डालना-

जो कोई किसी लोक सेवक के लोक-कृत्यों के निर्वहन में स्वेच्छया बाधा डालेगा, वह दोनों में से किसी भाँति के कारावास से, जिसकी अवधि तीन मास तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, जो पाँच सौ रुपये तक का हो सकेगा, या दोनों से, दण्डित किया जाएगा।

Obstructing public servant in discharge of public functions-
Whoever voluntarily obstructs any public servant in the discharge of his public functions, shall be punished with imprisonment of either description for a term which may extend to three months, or with fine which may extend to five hundred rupees, or with both.

लागू अपराध

लोक सेवक के लोक कृत्यों के निर्वहन में बाधा डालना।
सजा- तीन मास के लिए कारावास या पांच सौ रुपए का जुर्माना।
यह एक जमानतीय, गैर-संज्ञेय अपराध है और किसी भी श्रेणी के मजिस्ट्रेट द्वारा विचारणीय है।
यह अपराध समझौते योग्य नहीं है।

जुर्माना/सजा (Fine/Punishment) का प्रावधान

भारतीय दंड संहिता की धारा 186 के अंतर्गत जो कोई किसी लोक सेवक के लोक-कृत्यों के निर्वहन में स्वेच्छया से बाधा डालेगा, तो वह तीन मास के लिए कारावास और जुर्माने से दण्डित किया जाएगा।

जमानत (Bail) का प्रावधान

भारतीय दंड संहिता की धारा 186 के अंतर्गत जो अपराध कारित किए जाते है वह अपराध दंड प्रक्रिया संहिता में जमानतीय (Baileble) है, इसलिए इस धारा के अंतर्गत किया गया अपराध जमानतीय होने के कारण जमानत आसानी से मिल जाती है।

अपराधसजाअपराध श्रेणीजमानतविचारणीय
लोक सेवक के लोक कृत्यों के निर्वहन में बाधा डालना।तीन मास के लिए कारावास या पांच सौ रुपए का जुर्माना।गैर-संज्ञेयजमानतीयकिसी भी वर्ग के मजिस्ट्रेट

हमारा प्रयास आईपीसी की धारा 186 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आप के पास कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

आईपीसी की धारा 187 | लोक सेवक की सहायता करने का लोप, जबकि सहायता देने के लिये विधि द्वारा आबद्ध हो | IPC Section- 187 in hindi | Omission to assist public servant when bound by law to give assistance.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए भारतीय दंड संहिता की धारा 187 के बारे में सम्पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है भारतीय दंड संहिता की धारा 187? साथ ही हम आपको IPC की धारा 187 के अंतर्गत कैसे क्या सजा मिलती है और जमानत कैसे मिलती है, और यह अपराध किस श्रेणी में आता है, इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

IPC की धारा 187 का विवरण

भारतीय दण्ड संहिता (IPC) में धारा 187 के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। जो कोई किसी लोक-सेवक को, उसके लोक-कर्तव्य के निष्पादन में सहायता देने या पहुँचाने के लिए विधि द्वारा आबद्ध होते हुये, ऐसी सहायता देने का साशय लोप करेगा, तो वह व्यक्ति धारा 187 के अंतर्गत दंड एवं जुर्माने से दण्डित किया जाएगा।

आईपीसी की धारा 187 के अनुसार-

लोक सेवक की सहायता करने का लोप, जबकि सहायता देने के लिये विधि द्वारा आबद्ध हो-

जो कोई किसी लोक-सेवक को, उसके लोक-कर्तव्य के निष्पादन में सहायता देने या पहुँचाने के लिए विधि द्वारा आबद्ध होते हुये, ऐसी सहायता देने का साशय लोप करेगा, वह सादा कारावास से, जिसकी अवधि एक माह तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, जो दो सौ रुपये तक का हो सकेगा, या दोनों से, दण्डित किया जायेगा;
और यदि ऐसी सहायता की मांग उससे ऐसे लोक सेवक द्वारा, जो ऐसी मांग करने के लिये वैध रूप से सक्षम हो, न्यायालय द्वारा वैध रूप से निकाली गयी किसी आदेशिका के निष्पादन के, या अपराध के किये जाने का निवारण करने के, या बल्वे या दंगे को दबाने के, या ऐसे व्यक्ति को, जिस पर अपराध का आरोप है या जो अपराध का या विधिपूर्ण अभिरक्षा से निकल भागने का दोषी है, पकड़ने के प्रयोजनों से की जाये, तो वह सादा कारावास से, जिसकी अवधि छह मास तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, जो पाँच सौ रुपये तक का हो सकेगा, या दोनों से, दंडित किया जायेगा।

Omission to assist public servant when bound by law to give assistance-
Whoever, being bound by law to render or furnish assistance to any public servant in the execution of his public duty, intentionally omits to give such assistance, shall be punished with simple imprisonment for a term which may extend to one month, or with fine which may extend to two hundred rupees, or with both;
and if such assistance be demanded of him by a public servant legally competent to make such demand for the purposes of executing any process lawfully issued by a Court of Justice, or of preventing the commission of an offence, or of suppressing a riot, or affray, or of apprehending a person charged with or guilty of an offence, or of having escaped from lawful custody, shall be punished with simple imprisonment for a term which may extend to six months, or with fine which may extend to five hundred rupees, or with both.

लागू अपराध

लोक सेवक की सहायता करने का लोप, जब ऐसी सहायता देने के लिये विधि द्वारा आबद्ध हो।
सजा- एक मास के लिए कारावास या पांच सौ रुपए का जुर्माना या दोनो।
ऐसे लोक सेवक की, जो आदेशिका के निष्पादन, अपराधो के निवारण आदि के लिए सहायता मांगता है, सहायता देने में जानबूझकर उपेक्षा करना।
सजा- छह मास के लिए सादा कारावास या पांच सौ रुपए का जुर्माना या दोनो।
यह एक जमानतीय, गैर-संज्ञेय अपराध है और किसी भी श्रेणी के मजिस्ट्रेट द्वारा विचारणीय है।
यह अपराध समझौते योग्य नहीं है।

जुर्माना/सजा (Fine/Punishment) का प्रावधान

भारतीय दंड संहिता की धारा 187 के अंतर्गत जो कोई किसी लोक-सेवक को, उसके लोक-कर्तव्य के निष्पादन में सहायता देने या पहुँचाने के लिए विधि द्वारा आबद्ध होते हुये, ऐसी सहायता देने का साशय लोप करेगा, तो वह एक मास के लिए कारावास या जुर्माने से, या दोनो से दण्डित किया जाएगा। इसी तरह से जो कोई ऐसे लोक सेवक की, जो आदेशिका के निष्पादन, अपराधो के निवारण आदि के लिए सहायता मांगता है, सहायता देने में जानबूझकर उपेक्षा करेगा, तो वह छह मास के लिए सादा कारावास या जुर्माने से, या दोनो से दंड का भागीदार होगा।

जमानत (Bail) का प्रावधान

भारतीय दंड संहिता की धारा 187 के अंतर्गत जो अपराध कारित किए जाते है वह अपराध दंड प्रक्रिया संहिता में जमानतीय (Baileble) है, इसलिए इस धारा के अंतर्गत किए गए अपराध जमानतीय होने के कारण जमानत आसानी से मिल जाती है।

अपराधसजाअपराध श्रेणीजमानतविचारणीय
लोक सेवक की सहायता करने का लोप, जब ऐसी सहायता देने के लिये विधि द्वारा आबद्ध हो।एक मास के लिए कारावास या पांच सौ रुपए का जुर्माना या दोनो।गैर-संज्ञेयजमानतीयकिसी भी वर्ग के मजिस्ट्रेट
ऐसे लोक सेवक की, जो आदेशिका के निष्पादन, अपराधो के निवारण आदि के लिए सहायता मांगता है, सहायता देने में जानबूझकर उपेक्षा करना।छह मास के लिए सादा कारावास या पांच सौ रुपए का जुर्माना या दोनो।गैर-संज्ञेयजमानतीयकिसी भी वर्ग के मजिस्ट्रेट

हमारा प्रयास आईपीसी की धारा 187 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आप के पास कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

आईपीसी की धारा 188 | लोक-सेवक द्वारा सम्यक् रूप से प्रख्यापित आदेश की अवज्ञा | IPC Section- 188 in hindi | Disobedience to order duly promulgated by public servant.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए भारतीय दंड संहिता की धारा 188 के बारे में सम्पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है भारतीय दंड संहिता की धारा 188? साथ ही हम आपको IPC की धारा 188 के अंतर्गत कैसे क्या सजा मिलती है और जमानत कैसे मिलती है, और यह अपराध किस श्रेणी में आता है, इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

IPC की धारा 188 का विवरण

भारतीय दण्ड संहिता (IPC) में धारा 188 के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। जो कोई किसी लोक-सेवक द्वारा सम्यक् रूप से प्रख्यापित आदेश की अवज्ञा करता है जैसे विधिपूर्वक नियोजित व्यक्तियों को बाधा, क्षोभ या क्षति करना अथवा ऐसी अवज्ञा जिससे मानव जीवन, स्वास्थ्य, क्षेम आदि के लिए संकट कारित करेगा तो वह व्यक्ति धारा 188 के अंतर्गत दंड एवं जुर्माने से दण्डित किया जाएगा।

आईपीसी की धारा 188 के अनुसार-

लोक-सेवक द्वारा सम्यक् रूप से प्रख्यापित आदेश की अवज्ञा-

जो कोई यह जानते हुए कि वह ऐसे लोक-सेवक द्वारा प्रख्यापित किसी आदेश से, जो ऐसे आदेश को प्रख्यापित करने के लिये विधिपूर्वक सशक्त है, कोई कार्य करने से विरत रहने के लिये या अपने कब्जे में की, या अपने प्रबन्धाधीन, किसी सम्पत्ति के बारे में कोई विशेष व्यवस्था करने के लिए निर्दिष्ट किया गया है, ऐसे निदेश की अवज्ञा करेगा;
यदि ऐसी अवज्ञा विधिपूर्वक नियोजित किन्हीं व्यक्तियों को बाधा, क्षोभ या क्षति, अथवा बाधा, क्षोभ या क्षति की जोखिम कारित करे, या कारित करने की प्रवृत्ति रखती हो, तो वह सादा कारावास से, जिसकी अवधि एक मास तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, जो दो सौ रुपये तक का हो सकेगा, या दोनों से, दण्डित किया जाएगा; और यदि ऐसी अवज्ञा मानव-जीवन, स्वास्थ्य या क्षेम को संकट कारित करे, या कारित करने की प्रवृत्ति रखती हो, या बल्वा या दंगा कारित करती हो, या कारित करने की प्रवृत्ति रखती हो, तो वह दोनों में से किसी भाँति के कारावास से, जिसकी अवधि छह मास तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, जो एक हजार रुपये तक का हो सकेगा, या दोनों से दण्डित किया जायेगा।
स्पष्टीकरण- यह आवश्यक नहीं है कि अपराधी का आशय अपहानि उत्पन्न करने का हो या उसके ध्यान में यह हो कि उसकी अवज्ञा करने से अपहानि होना सम्भाव्य है। यह पर्याप्त है कि जिस आदेश की वह अवज्ञा करता है, उस आदेश का उसे ज्ञान है, और यह भी ज्ञान है कि उसके अवज्ञा करने से अपहानि उत्पन्न होती या होनी सम्भाव्य है।
दृष्टांत
एक आदेश, जिसमें यह निदेश है कि अमुक धार्मिक जुलूस अमुक सड़क से होकर न निकले, ऐसे लोक सेवकों द्वारा प्रख्यापित किया जाता है, जो ऐसा आदेश प्रख्यापित करने के लिए विधिपूर्वक सशक्त है। क जानते हुये उस आदेश की अवज्ञा करता है, और तद्वारा बल्वे का संकट कारित करता है कने इस धारा में परिभाषित अपराध किया है।

Disobedience to order duly promulgated by public servant-
Whoever, knowing that, by an order promulgated by a public servant lawfully empowered to promulgate such order, he is directed to abstain from a certain act, or to take certain order with certain property in his possession or under his management, disobeys such direction.
shall, if such disobedience causes or tends to cause obstruction, annoyance, or injury, or risk of obstruction, annoyance or injury, to any person lawfully employed, be punished with simple imprisonment for a term which may extend to one month, or with fine which may extend to two hundred rupees, or with both;
and if such disobedience causes or tends to cause danger to human life, health or safety, or causes or tends to cause a riot or affray, shall be punished with imprisonment of either description for a term which may extend to six months, or with fine which may extend to one thousand rupees, or with both.
Explanation- It is not necessary that the offender should intend to produce harm. or contemplate his disobedience as is likely to produce harm. It is sufficient that he knows of the order which he disobeys, and that his disobedience produces, or is likely to produce, harm.
Illustration
An order is promulgated by a public servant lawfully empowered to promulgate such order, directing that a religious procession shall not pass down a certain street. A knowingly disobeys the order, and thereby causes danger of riot. A has committed the offence defined in this section.

लागू अपराध

लोक-सेवक द्वारा सम्यक् रूप से प्रख्यापित आदेश की अवज्ञा, यदि ऐसी अवज्ञा विधिपूर्वक नियोजित व्यक्तियों को बाधा, क्षोभ या क्षति कारित करे।
सजा- एक मास के लिए सादा कारावास या दो सौ रुपए का जुर्माना या दोनो।
यदि ऐसी अवज्ञा जिससे मानव जीवन, स्वास्थ्य, क्षेम आदि के लिए संकट कारित करे।
सजा- छह मास के लिए कारावास या एक हजार रुपए का जुर्माना या दोनो।
यह एक जमानतीय, संज्ञेय अपराध है और किसी भी श्रेणी के मजिस्ट्रेट द्वारा विचारणीय है।
यह अपराध समझौते योग्य नहीं है।

जुर्माना/सजा (Fine/Punishment) का प्रावधान

भारतीय दंड संहिता की धारा 188 के अंतर्गत जो कोई किसी लोक-सेवक द्वारा सम्यक् रूप से प्रख्यापित आदेश की अवज्ञा करता है जैसे विधिपूर्वक नियोजित व्यक्तियों को बाधा, क्षोभ या क्षति करेगा, तो वह एक मास के लिए सादा कारावास या दो सौ रुपए जुर्माने से, या दोनो से दण्डित किया जाएगा। इसी तरह से जो कोई ऐसे ऐसी अवज्ञा जिससे मानव जीवन, स्वास्थ्य, क्षेम आदि के लिए संकट कारित करेगा, तो वह छह मास के लिए कारावास या एक हजार रुपए जुर्माने से, या दोनो से दंड का भागीदार होगा।

जमानत (Bail) का प्रावधान

भारतीय दंड संहिता की धारा 188 के अंतर्गत जो अपराध कारित किए जाते है वह अपराध दंड प्रक्रिया संहिता में जमानतीय (Baileble) है, इसलिए इस धारा के अंतर्गत किया गया अपराध जमानतीय होने के कारण जमानत आसानी से मिल जाती है।

अपराधसजाअपराध श्रेणीजमानतविचारणीय
लोक-सेवक द्वारा सम्यक् रूप से प्रख्यापित आदेश की अवज्ञा, यदि ऐसी अवज्ञा विधिपूर्वक नियोजित व्यक्तियों को बाधा, क्षोभ या क्षति कारित करे।एक मास के लिए सादा कारावास या दो सौ रुपए का जुर्माना या दोनो।संज्ञेयजमानतीयकिसी भी वर्ग के मजिस्ट्रेट
यदि ऐसी अवज्ञा जिससे मानव जीवन, स्वास्थ्य, क्षेम आदि के लिए संकट कारित करे।छह मास के लिए कारावास या एक हजार रुपए का जुर्माना या दोनो।संज्ञेयजमानतीयकिसी भी वर्ग के मजिस्ट्रेट

हमारा प्रयास आईपीसी की धारा 188 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आप के पास कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

आईपीसी की धारा 189 | लोक-सेवक को क्षति करने की धमकी | IPC Section- 189 in hindi | Threat of injury to public servant.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए भारतीय दंड संहिता की धारा 189 के बारे में सम्पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है भारतीय दंड संहिता की धारा 189? साथ ही हम आपको IPC की धारा 189 के अंतर्गत कैसे क्या सजा मिलती है और जमानत कैसे मिलती है, और यह अपराध किस श्रेणी में आता है, इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

IPC की धारा 189 का विवरण

भारतीय दण्ड संहिता (IPC) में धारा 189 के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। जो कोई किसी लोक-सेवक को या ऐसे किसी व्यक्ति को, जिससे उस लोक-सेवक के हितबद्ध होने का उसे विश्वास हो, इस प्रयोजन से क्षति की कोई धमकी देगा, तो वह व्यक्ति धारा 189 के अंतर्गत दंड एवं जुर्माने से दण्डित किया जाएगा।

आईपीसी की धारा 189 के अनुसार-

लोक-सेवक को क्षति करने की धमकी-

जो कोई किसी लोक-सेवक को या ऐसे किसी व्यक्ति को, जिससे उस लोक-सेवक के हितबद्ध होने का उसे विश्वास हो, इस प्रयोजन से क्षति की कोई धमकी देगा कि उस लोक-सेवक को उत्प्रेरित किया जाये कि वह ऐसे लोक-सेवक के कृत्यों के प्रयोग से संसक्त कोई कार्य करे, या करने से प्रविरत रहे, या करने में विलम्ब करे, वह दोनों में से किसी भाँति के कारावास से, जिसकी अवधि दो वर्ष तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, या दोनों से, दण्डित किया जाएगा।

Threat of injury to public servant-
Whoever holds out any threat of injury to any public servant, or to any person in whom he believes that public servant to be interested for the purpose of inducing that public servant to do any act, or to forbear or delay to do any act, connected with the exercise of the public functions of such public servant, shall be punished with imprisonment of either description for a term which may extend to two years, or with fine, or with both.

लागू अपराध

लोक-सेवक को क्षति करने की धमकी।
सजा- दो वर्ष के लिए कारावास या जुर्माना या दोनो।
यह एक जमानतीय, गैर-संज्ञेय अपराध है और किसी भी श्रेणी के मजिस्ट्रेट द्वारा विचारणीय है।
यह अपराध समझौते योग्य नहीं है।

जुर्माना/सजा (Fine/Punishment) का प्रावधान

भारतीय दंड संहिता की धारा 189 के अंतर्गत जो कोई किसी लोक-सेवक को या ऐसे किसी व्यक्ति को, जिससे उस लोक-सेवक के हितबद्ध होने का उसे विश्वास हो, इस प्रयोजन से क्षति की कोई धमकी देगा, तो दो वर्ष के लिए कारावास या जुर्माने से, या दोनो से दण्डित किया जाएगा।

जमानत (Bail) का प्रावधान

भारतीय दंड संहिता की धारा 189 के अंतर्गत जो अपराध कारित किए जाते है वह अपराध दंड प्रक्रिया संहिता में जमानतीय (Baileble) है, इसलिए इस धारा के अंतर्गत किया गया अपराध जमानतीय होने के कारण जमानत आसानी से मिल जाती है।

अपराधसजाअपराध श्रेणीजमानतविचारणीय
लोक-सेवक को क्षति करने की धमकी।दो वर्ष के लिए कारावास या जुर्माना या दोनो।गैर-संज्ञेयजमानतीयकिसी भी वर्ग के मजिस्ट्रेट

हमारा प्रयास आईपीसी की धारा 189 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आप के पास कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

आईपीसी की धारा 190 | लोक-सेवक से संरक्षा के लिये आवेदन करने से विरत रहने के लिये किसी व्यक्ति को उत्प्रेरित करने के लिये क्षति की धमकी | IPC Section- 190 in hindi | Threat of injury to induce person to refrain from applying for protection to public servant.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए भारतीय दंड संहिता की धारा 190 के बारे में सम्पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है भारतीय दंड संहिता की धारा 190? साथ ही हम आपको IPC की धारा 190 के अंतर्गत कैसे क्या सजा मिलती है और जमानत कैसे मिलती है, और यह अपराध किस श्रेणी में आता है, इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

IPC की धारा 190 का विवरण

भारतीय दण्ड संहिता (IPC) में धारा 190 के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। जो कोई किसी व्यक्ति को इस प्रयोजन से क्षति की कोई धमकी देगा कि वह उस व्यक्ति को उत्प्रेरित करे कि वह किसी क्षति से संरक्षा के लिये कोई वैध आवेदन किसी ऐसे लोक-सेवक से करने से विरत रहे, या प्रतिविरत रहे, जो ऐसे लोक-सेवक के नाते ऐसी संरक्षा करने या कराने के लिये वैध रूप से सशक्त हो, तो वह व्यक्ति धारा 190 के अंतर्गत दंड एवं जुर्माने से दण्डित किया जाएगा।

आईपीसी की धारा 190 के अनुसार-

लोक-सेवक से संरक्षा के लिये आवेदन करने से विरत रहने के लिये किसी व्यक्ति को उत्प्रेरित करने के लिये क्षति की धमकी-

जो कोई किसी व्यक्ति को इस प्रयोजन से क्षति की कोई धमकी देगा कि वह उस व्यक्ति को उत्प्रेरित करे कि वह किसी क्षति से संरक्षा के लिये कोई वैध आवेदन किसी ऐसे लोक-सेवक से करने से विरत रहे, या प्रतिविरत रहे, जो ऐसे लोक-सेवक के नाते ऐसी संरक्षा करने या कराने के लिये वैध रूप से सशक्त हो, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि एक वर्ष तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, या दोनों से दण्डित किया जाएगा।

Threat of injury to induce person to refrain from applying for protection to public servant-
Whoever holds out any threat of injury to any person for the person to refrain or desist from making a legal application purpose of inducing that for protection against any injury to any public servant legally empowered as such to give such protection, or to cause such protection to be given, shall be punished with imprisonment of either description for a term which may extend to one year, or with fine or with both.

लागू अपराध

क्षति से संरक्षण के लिए वैध आवेदन देने से विरत रहने के लिए किसी व्यक्ति को उत्प्रेरित करने के लिए उसे धमकी देना।
सजा- एक वर्ष के लिए कारावास जुर्माना या दोनो।
यह एक जमानतीय, गैर-संज्ञेय अपराध है और किसी भी श्रेणी के मजिस्ट्रेट द्वारा विचारणीय है।
यह अपराध समझौते योग्य नहीं है।

जुर्माना/सजा (Fine/Punishment) का प्रावधान

भारतीय दंड संहिता की धारा 190 के अंतर्गत जो कोई व्यक्ति किसी क्षति से संरक्षण के लिए वैध आवेदन देने से विरत रहने के लिए किसी व्यक्ति को उत्प्रेरित करने के लिए उसे धमकी देगा, तो वह एक वर्ष के लिए कारावास या जुर्माने से, या दोनो से दण्डित किया जाएगा।

जमानत (Bail) का प्रावधान

भारतीय दंड संहिता की धारा 190 के अंतर्गत जो अपराध कारित किए जाते है वह अपराध दंड प्रक्रिया संहिता में जमानतीय (Baileble) है, इसलिए इस धारा के अंतर्गत किए गया अपराध जमानतीय होने के कारण जमानत आसानी से मिल जाती है।

अपराधसजाअपराध श्रेणीजमानतविचारणीय
क्षति से संरक्षण के लिए वैध आवेदन देने से विरत रहने के लिए किसी व्यक्ति को उत्प्रेरित करने के लिए उसे धमकी देना।एक वर्ष के लिए कारावास जुर्माना या दोनो।गैर-संज्ञेयजमानतीयकिसी भी वर्ग के मजिस्ट्रेट

हमारा प्रयास आईपीसी की धारा 190 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आप के पास कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

आईपीसी की धारा 378, 379, चोरी करना, चोरी के लिए दण्ड | IPC Section-378 in hindi | IPC Section-379 in hindi | Theft | Punishment for theft.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए भारतीय दंड संहिता की धारा 378 एवम् 379 के बारे में सम्पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है आईपीसी की धारा 378 एवम् आईपीसी की धारा 379? साथ ही हम आपको IPC की धारा 379 के अंतर्गत कैसे क्या सजा मिलती है और जमानत कैसे मिलती है, और यह अपराध किस श्रेणी में आता है, इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

धारा 378 (Theft) का विवरण

भारतीय दण्ड संहिता (IPC) में आज हम आपको महत्वपूर्ण धारा के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। साथ ही बचाव और क्या जुर्माना भी देना भी पड़ सकता है। आइए जानते हैं कि यदि कोई व्यक्ति किसी की मूल्यवान वस्तु, संपत्ति अथवा किसी वस्तु को, बिना उसकी सम्मति के लेना या उठाना, चोरी कहलाती हैं । तब यह धारा 378 किसी व्यक्ति पर लागू होगी । दण्ड के लिये IPC की धारा 379 लागू होगी।

साधारण भाषा आईपीसी की धारा 378 का अर्थ- जो कोई व्यक्ति, किसी व्यक्ति के कब्जे से, उसकी स्वीकृति के बिना,उसकी कोई चल सम्पत्ति बेईमानी से ले लेने का आशय रखते हुए उस सम्पत्ति को हटाता है, उसे चोरी करना कहा जाता है।

स्पष्टीकरण: जब तक कोई वस्तु भूबद्ध रहती है, भूमि चल सम्पत्ति न होने के कारण चोरी का विषय नहीं होती; किन्तु ज्यों ही वह भूमि से अलग की जाती है वह चोरी का विषय होने योग्य हो जाती है। हटाना, बदलाव करना, चोरी कहा जाता है।

आईपीसी की धारा 379 के अनुसार-

चोरी के लिए दंड-

जो कोई चोरी करेगा, वह दोनों में से, किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि 3 वर्ष तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, या दोनों से, दंडित किया जाएगा।
Punishment for theft-
Whoever commit theft shall be punished with imprisonment of either description for a terms which may extend to three years, or with fine, or with both.

लागू अपराध

चोरी करना।
सजा– तीन वर्ष के लिए कारावास या जुर्माना भी या दोनों हो सकते है ।
यह एक अजमानती, संज्ञेय अपराध है और किसी भी मजिस्ट्रेट द्वारा विचारणीय है।
यह अपराध पीड़ित व्यक्ति/मालिक (किसी वस्तु या संपत्ति के मालिक) द्वारा समझौते योग्य है ।

सजा (Punishment) का प्रावधान

जो कोई किसी की संपत्ति अथवा किसी मूल्यवान वस्तु को चोरी करता है, तो आईपीसी धारा 378 के अंतर्गत अपराधी होगा, आईपीसी की धारा 379 के अंर्तगत सजा का प्रावधान दिया गया है । जिसमें तीन वर्ष के लिए कारावास या  जुर्माना या फिर दोनों भी हो सकते हैं ।

जमानत (Bail) का प्रावधान

जो कोई किसी की संपत्ति अथवा किसी मूल्यवान वस्तु को चोरी करता है, वह भी दंडनीय होगा।  यह एक संज्ञेय अपराध है, और साथ ही इस अपराध की जमानती नहीं है। यह अपराध पीड़ित व्यक्ति/मालिक (किसी वस्तु या संपत्ति के मालिक) द्वारा समझौते योग्य है ।

अपराधसजाअपराध श्रेणीजमानतविचारणीय
चोरी करना।तीन वर्ष के लिए कारावास या जुर्माना भी या दोनों।संज्ञेयगैर-जमानतीयकिसी भी मजिस्ट्रेट

हमारा प्रयास धारा 378 एवंम् 379 पूर्ण जानकारी प्राप्त कराने का है। अगर आपके मन में कोई सवाल हो,तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है ।