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अधिवक्ता और जज का अर्थ, सम्बन्ध एवंम् उनकी कार्यप्रणाली, न्यायालय के प्रति कर्तव्य क्या है?

अधिवक्ता का अर्थ

अधिवक्ता उस व्यक्ति, अविभावक या वकील को कहते है जो किसी न्यायालय में किसी अन्य व्यक्ति की ओर से उसके हेतु या वाद का प्रतिपादन करने का अधिकार प्राप्त हो। अधिवक्ता किसी दूसरे व्यक्ति के स्थान पर (या उसके तरफ से) दलील प्रस्तुत करता है। अधिकांश लोगों के पास अपनी बात को प्रभावी ढंग से कहने की क्षमता, ज्ञान, कौशल, या भाषा-शक्ति नहीं होती। अधिवक्ता की जरूरत इसी बात को रेखांकित करती है, कि किस बात को न्यायालय के समक्ष किस रूप मे प्रस्तुत करे, साथ ही अपनी बात को कानूनी एवंम् प्रभावशाली बनाने के लिये दलील प्रस्तुत करे । हम मे से बहुत लोगो ने अधिवक्ता के अनेक अर्थ पढ़े एवंम् सुने होगें जैसा कि हम सभी जानते है कि अधिवक्ता को हम बैरिस्टर, लॉयर, वकील के नाम से भी जानते है, बस फर्क सिर्फ इतना होता है कि हम न्यायालय के आधार पर भी है, जैसे-हाईकोर्ट, सुप्रीम कोर्ट के वकीलो को हम लॉयर, एडवोकेट कहते है । वैसे तो हम सभी ने देखा होगा, कि न्यायालय मे जब भी वकील का वर्णन किया जाता है तो विव्दान अधिवक्ता ही कहा जाता है ।

जज का अर्थ

एक न्यायाधीश वह व्यक्ति होता है जो न्यायालय की कार्यवाही की अध्यक्षता करता है या तो अकेले या न्यायाधीशों के एक पैनल के हिस्से के रूप में न्यायाधीशों की शक्तियां, कार्य, नियुक्ति का तरीका, अनुशासन और प्रशिक्षण विभिन्न न्यायालयों में व्यापक रूप से भिन्न होते हैं। न्यायाधीश को निष्पक्ष अदालत में, आम तौर पर, निष्पक्ष रूप से परीक्षण का संचालन करना होता है साथ ही न्याय के दृष्टिकोण को देखते हुये ही किसी वाद की निष्पक्ष सुनवाई करने का अधिकार होता है । न्यायाधीश किसी व्यक्ति के अपराध के आधार पर ही वाद को न्याय अनुसार ही निष्पक्ष सुनवाई का अधिकारी होता है, जज की शक्तियां न्यायिक कार्यप्रणाली को विधि पूर्वक संचालन करने के लिये ही प्राप्त होती है, जो न्याय पालिका के अनुपालन के आधार पर ही होती है ।

अधिवक्ता और जज मे सम्बन्ध

अधिवक्ता और जज के मध्य न्याययिक दृष्टिकोण का आधारशिला होता है इसलिये एक-दूसरे के पूरक होते है, साथ ही अधिवक्ता किसी वाद को इस प्रकार साक्ष्य स्वरूप सत्यता पूर्वक प्रस्तुत करता है कि न्यायाधीश स्वीकार करे । अधिवक्ता न्याय को न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत करता है साक्ष्य के आधार पर ही न्यायाधीश निर्णय सुनाते है । हम मे से बहुत लोगो ने मूवी मे देखा होगा कि न्यायालय मे जज जब सुनवाई करते है तब (दोनो पक्षो के अधिवक्ता) आपस मे वाद के साक्ष्य को लेकर बहस करते है और वाद को इस रूप मे प्रस्तुत करते है कि न्यायाधीश सत्य को जान सके कि किस पक्ष ने अपराध किया है । न्यायाधीश, अधिवक्ताओ की दलील सुनने और समझने के पश्चात् न्यायहित मे सुनवाई कर सकते है ।

अधिवक्ता का न्यायालय के प्रति कर्तव्य

  • एक अधिवक्ता ऐसे औपचारिक अवसरों को छोड़कर और बार काउंसिल ऑफ इंडिया या कोर्ट में निर्धारित किए गए ऐसे स्थानों को छोड़कर अन्य स्थान पर सार्वजनिक रूप से बैंड या गाउन नहीं पहन सकता है।
  • किसी भी गैरकानूनी या अनुचित साधनों से अदालत के फैसले को प्रभावित न करना और अदालत के फैसले को प्रभाव से मुक्त करने का कर्तव्य है।
  • एक अधिवक्ता किसी भी कानूनी कार्यवाही के उद्देश्य के लिए अपने ग्राहक के लिए किसी भी जमानत या जमानत के रूप में प्रमाणित नहीं होगा।
  • अदालतों और कानूनी व्यवस्था के प्रति सम्मानजनक रवैया बनाए रखना।
  • एक वकील स्वयं का सम्मान और स्वाभिमान के साथ आचरण करेगा।
  • अदालत में पेश होने से पहले एक वकील को एक निर्धारित रूप में कपड़े पहनने चाहिए।
  • अधिवक्ता न्यायालय मे न्याय के लिये ही लड़ेगा, यदि अधिवक्ता को ज्ञात हो जाता है कि वादी झूठ बोल रहा है तो वादी का वाद नही लेंगे ।

जज का न्यायालय के प्रति कर्तव्य

  • न्यायाधीश, न्याय के प्रति कानून का सम्मान करेगा और अदालत मे पेश होने से पहले निर्धारित रूप मे कपड़े पहनने चाहिये ।
  • गुणवत्तायुक्त न्याय देना जज का पहला कर्तव्य है। जज का कार्य संविधान और कानून के नियम के तहत काम करना है। उन्हें संविधान में निहित बातों को ध्यान में रखकर काम करना चाहिए। फैसला ऐसा होना चाहिए कि न्याय पर समाज को गर्व हो।
  • न्यायाधीश, न्यायालय की अध्यक्षता करता है और उनकी अध्यक्षता की कार्यप्रणाली के अन्तर्गत न्याय पालिका को निष्पक्ष बनाये ।
  • न्यायाधीश का मुख्य कार्य न्यायालय मे शान्ति एवंम् न्यायसंगत बनाये रखे, जिससे न्यायालय की गरिमा बढ़ेगी।
  • न्यायाधीश कर्तव्यनिष्ठा और न्यायप्रिय होना आवश्यक है, तभी सही न्याय कर सकेंगे ।

न्यायालय मे अधिवक्ता और जज की कार्यप्रणाली

  • न्यायालय मे अधिवक्ता और जज की कार्यप्रणाली एक-दूसरे के पूरक होती है, क्योकि वकील ही अपराधी के अपराध को न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत करता है जिससे कि न्यायाधीश जान पाते है ।
  • न्यायालय मे अधिवक्ता और जज दोनो ही न्याय दिलाने के लिये ही जाने जाते है, इसलिये हम दोनो को न्यायमूर्ति कह सकते है ।
  • न्यायालय मे जब कोई अपराधी कोई अपराध करके आता है तो सबसे पहले वकील ही सिद्ध करता है कि वह दोषी है या नही इसके पश्चात् ही न्यायाधीश अपना निर्णय सुनाते है ।
  • सही निर्णय लेने और सही निर्णय प्रदान करने के लिये दोनो दायित्व होगें ।
  • कोर्ट परिसर मे दोनो ही आपसी व्यवहार एवंम् व्यवसाय का प्रवधान नही होगा ।
  • जज ही अपने न्यायिक निर्णयों के आधार पर आगे की कार्यवाही वकील के पूरक ही कार्यप्रणाली पर निर्भर करता है। इसलिये ही न्याय दोनो के न्यायविवेक के आधार पर मिलता है ।
  • कोर्ट परिसर मे अधिवक्ता एवंम् जज मे न्यायसंगत होना आवश्यक होगा । तभी न्यायिक प्रकृिया संविधना के अनुसार ही लागू होगा ।

और पढ़े

जानिये अपने कानूनी अधिकार-

आईये जानते है भारतीय दण्ड संहिता (IPC) 1860 के बारे मे –

RTI (Right to Information) सूचना का अधिकार

दण्ड प्रकिया संहिता मे गिरफ्तार व्यक्ति के अधिकार (Right of an arrested person)-

How are penalties and fines being added to the GST to prevent tax evasion?

In GST, the government is making strict rules about tax evasion, due to which many traders who do not actually tax evasion are also stuck in these laws, while in fact, they have nothing to do with anything. is. Under GST, all those taxpayers who neither file timely returns nor deposit tax on time and commit tax evasion by exchanging fake bills, therefore, the government is tightening the GST law.

GST Tax Evasion

Offences liable for prosecution

  • Collects any GST (even if in contravention of provisions) but does not submit it to the government within 3 months.
  • Obtains refund of any CGST/SGST by fraud.
  • Submits fake financial records/documents or files fake returns to evade tax
  • Obstructs the proper officer during his duty (for example, he hinders the officer during the audit by tax authorities)
  • Acquires/receives any goods/services with full knowledge that it is in violation of GST rules and is liable for confiscation
  • Destroys any evidence
  • Does not provide information/gives false information during proceedings
  • Helps any person to commit fraud under GST 

Punishment

Tax amount involvedBailable or Non-BailableJail term
100-200 lakhsBailableUpto 1 year
200-500 lakhsBailableUpto 3 year
Above 500 lakhsBailableUpto 5 year

 What are the offences under GST?

The offenses under GST are the following types of offenses under GST for breaking GST law, evasion of tax and the payment of fake bills.

Tax evasion

1) He will deposit any GST but does not submit it to the government within 3 months, even then he will be a partner of crime.2) He takes and/or utilizes input tax credit without actual receipt of goods and/or services.3) He deliberately suppresses his sales to evade tax.4) He obtains a refund of any CGST/SGST by fraud.

Supply/transport of goods

5) He transports goods without proper documents.6) Supplies/transports goods which he knows will be confiscated.

Fraud

7) If he files fake financial records/documents or fake returns for tax avoidance then it is also a crime.8) Does not provide information / gives false information during proceedings.

Fake/wrong invoices

9) He issues any invoice or bill without supply of goods/services in violation of the provisions of GST.10) A taxable person supplies any goods/services without any invoice or issues a false invoice.11) He issues invoices using the identification number of another bonafide taxable person.

Other Problems

12) He does not deduct TDS or deducts less amount where applicable.13) He does not maintain all the books that he is required to maintain by law.14) He obstructs the proper officer during his duty (for example, he hinders the officer during the audit by tax authorities).15) He does not collect TCS or collects less amount where applicable.

above, for fraud cases, penalty will be 100% (minimum Rs. 10,000)

What happens if you don’t pay GST?

In order to prevent tax evasion and corruption, various provisions have been implemented to deal effectively with offenders with respect to penalties, prosecution, and arrest. There are certain offenses specified under section – 132 of the CGST Act, 2017 which if committed by any business, person or if any other person approbations him in committing such offenses then he/she/they all shall be liable to such punishment including imprisonment. Under the GST law, the filing of return without payment of taxes shall not be considered as a valid return. Section 2(117) defines a valid return. It means, a return furnished under sub-section (1) of Section 39 on which self-assessed tax has been paid in full. It is only the valid return that would be used for allowing input tax credit (ITC) to the recipient. In other words, unless the supplier has paid the entire self-assessed tax and filed his return and the recipient has filed his return, the ITC of the recipient would not be confirmed.

Can GST penalty be waived?

100/- per day of delay in filing statements u/s 37 or returns u/s 39 of the CGST Act, subject to a maximum amount of Rs. Waive Late Fees for Delayed Filing of GST Returns.
We draw to your kind attention to section 47 of the CGST Act, 2017, which levies a late fee of Rs. 100/- per day of delay in filing statements u/s 37 or returns u/s 39 of the CGST Act, subject to a maximum amount of Rs. 5,000/-. This levy is a common fee on all taxpayers, irrespective of their turnover, which means that registered persons filing Nil Return also have to bear late fees of up to Rs.10,000 (CGST + SGST).

Return TypeRelaxationReturn filing deadline to avail benefit
NIL ReturnFull Waiver of Late FeesFile returns for May – July 2020 latest by 30th September 20

What if GST returns not filed for 6 months?

The GST administration plans to take strict action with the return of non-filers and cancel their registration. filing of returns helps tax authorities to estimate the tax liability and find out how much tax has been paid. The problem here is that nearly 20 percent of assessees do not file their returns, which affects GST collections. Section 29 of the Central Goods & Services Tax (CGST) Act prescribes conditions for cancellation of registration and fulfillment of any of these will invite action. These include contravention of the provisions of the Act, a composition scheme assessee not filing returns for three consecutive tax periods, any non-composition assessee not furnished returns for a continuous period of six months, not commencing business within six months from the voluntary registration, and registration obtained by means of fraud, wilful misstatement or suppression of facts. The Act clearly provides that registration will not be canceled without giving the person an opportunity of being heard.

Can I cancel my GST without filing returns?

In GST, a taxpayer wants to close his GST registration without filing a return, then he cannot close it, till he completes all the liabilities of and if he does not pay late fee. He also cannot file returns. If the taxpayer does not file a 6-month return in the past, the GST officers themselves can close the taxpayer’s firm. If your GST registration has been Suo-Motto canceled by GST Officer, then you have the option to request for cancellation of GST within 30 days from the date of cancellation but the taxpayer can do so only after paying late fees and all liabilities.

धारा- 123, युद्ध करने की परिकल्पना को सुगम बनाने के आशय से छिपाना, (IPC Section 123. Concealing with intent to facilitate design to wage war)

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए भारतीय दंड संहिता की धारा 123 के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है भारतीय दंड संहिता की धारा 123 के अंतर्गत कैसे क्या सजा मिलती है और जमानत कैसे मिलती है, और यह अपराध किस श्रेणी में आता है, इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

धारा 123 का विवरण

भारतीय दण्ड संहिता (IPC) में धारा 123 के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। जो कोई भारत सरकार के विरुद्ध युद्ध करने की परिकल्पना के अस्तित्वों को, जो ऐसे युद्ध करने को सुगम बनाने के आशय से इस प्रकार छिपाए, या यह सम्भाव्य जानते हुए कि इस प्रकार छिपाकर ऐसे युद्ध करने को सुगम बनाए, किसी कार्य, या किसी अवैध लोप व्दारा छिपाएगा, तो वह धारा 123 के अंतर्गत दंड एवं जुर्माने से दण्डित किया जाएगा।

भारतीय दंड संहिता की धारा 123 के अनुसार-

युद्ध करने की परिकल्पना को सुकर बनाने के आशय से छिपाना-

जो कोई भारत सरकार के विरुद्ध युद्ध करने की परिकल्पना के अस्तित्वों को किसी कार्य द्वारा, या किसी अवैध लोप द्वारा, इस आशय से कि इस प्रकार छिपाने के द्वारा ऐसे युद्ध करने को सुकर बनाए, या यह सम्भाव्य जानते हुए कि इस प्रकार छिपाने के द्वारा ऐसे युद्ध करने को सुकर बनायेगा, छिपाएगा, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि दस वर्ष तक की हो सकेगी, दण्डित किया जाएगा और जुर्माने से भी, दण्डनीय होगा।

Concealing with intent to facilitate design to wage war-
Whoever, by any act, or by any illegal omission, conceals the existence of a design to wage war against the Government of India, intending by such concealment to facilitate, or knowing it to be likely that such concealment will facilitate, the waging of such war, shall be punished with imprisonment of either description for a term which may extend to ten years, and shall also be liable to fine.

लागू अपराध

युद्ध करने की परिकल्पना को सुकर बनाने के आशय से छिपाना।
सजा- 10 वर्ष के लिये कारावास और जुर्माना ।
यह अपराध एक गैर-जमानतीय और संज्ञेय अपराध की श्रेणी में आता है।
यह अपराध सेशन न्यायालय व्दारा विचारणीय है।

जुर्माना/सजा (Fine/Punishment) का प्रावधान

भारतीय दंड संहिता की धारा 123 के अंतर्गत जो कोई भारत सरकार के विरुद्ध युद्ध करने की परिकल्पना के अस्तित्वों को, जो ऐसे युद्ध करने को सुगम बनाने के आशय से इस प्रकार छिपाए, या यह सम्भाव्य जानते हुए कि इस प्रकार छिपाकर ऐसे युद्ध करने को सुगम बनाए, किसी कार्य, या किसी अवैध लोप व्दारा छिपाएगा, तो वह दस वर्ष के लिये कारावास और जुर्माने से भी दण्डनीय होगा।

जमानत (Bail) का प्रावधान

भारतीय दंड संहिता की धारा 123 अंतर्गत जो अपराध कारित किए जाते है वह अपराध दंड प्रक्रिया संहिता में गैर-जमानतीय (Non-Baileble) अपराध की श्रेणी में आते है, इसलिए इस धारा के अंतर्गत किए गए अपराध में जमानत नहीं मिल सकेगी।

अपराधसजाअपराध श्रेणीजमानतविचारणीय
युद्ध छेड़ने के लिए एक षडयंत्र के माध्यम से इरादे को छिपाना।10 साल + जुर्मानासंज्ञेयगैर जमानतीयसेशन न्यायालय

हमारा प्रयास भारतीय दंड संहिता की धारा 123 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

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धारा- 122 भारत सरकार के विरुद्ध युद्ध करने के आशय से हथियार आदि संग्रहित करना,(IPC Section 122 Collecting arms, etc, with intention of waging war against the Government of India)

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए भारतीय दंड संहिता की धारा 122 के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है भारतीय दंड संहिता की धारा 122 के अंतर्गत कैसे क्या सजा मिलती है और जमानत कैसे मिलती है, और यह अपराध किस श्रेणी में आता है, इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

धारा 122 का विवरण

भारतीय दण्ड संहिता (IPC) में धारा 122 के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। साधारण भाषा मे कोई इंसान यदि षड्यंत्र करके भारत सरकार के विरूद्ध युद्ध करने के आशय से हथियार संग्रहित करता है अथवा देश के खिलाफ युद्ध छेड़ने की मंशा से कोई हथियार या गोला-बारूद जमा करता है या फिर ऐसी कोशिश करता है, तो वह धारा 122 के अंतर्गत दंड एवं जुर्माने से दण्डित किया जाएगा।

भारतीय दंड संहिता की धारा 122 के अनुसार-

भारत सरकार के विरूद्ध युद्ध करने के आशय से आयुध आदि संग्रह करना-

जो भी कोई भारत सरकार के विरुद्ध युद्ध करने, या युद्ध करने की तैयारी करने के आशय से सैनिक, आयुध या गोलाबारूद संग्रहित करेगा, या अन्यथा युद्ध करने की तैयारी करेगा, तो उसे आजीवन कारावास, या किसी एक अवधि के लिए कारावास की सजा जिसे अधिकतम दस वर्ष तक बढ़ाया जा सकता है से दण्डित किया जाएगा, और साथ ही वह आर्थिक दण्ड के लिए भी उत्तरदायी होगा।

Collecting arms, etc. with intention of waging war against the Government of India-
Whoever collects men, arms or ammunition or otherwise prepares to wage war with the intention of either waging or being prepared to wage war against the Government of India, shall be punished with imprisonment for life or imprisonment of either description for a term not exceeding ten years, and shall also be liable to fine.

लागू अपराध

भारत सरकार के खिलाफ युद्ध छेड़ने के इरादे से हथियार आदि इकट्ठा करना।
सजा- आजीवन कारावास या 10 साल के लिये कारावास और जुर्माना ।
यह अपराध एक गैर-जमानतीय और संज्ञेय अपराध की श्रेणी में आता है।
यह अपराध सेशन न्यायालय व्दारा विचारणीय है।

जुर्माना/सजा (Fine/Punishment) का प्रावधान

भारतीय दंड संहिता की धारा 122 के अंतर्गत जो कोई व्यक्ति भारत सरकार के खिलाफ युद्ध छेडने के इरादे से हथियार आदि इकट्ठा करेगा या देश के खिलाफ युद्ध छेड़ने की मंशा से कोई हथियार या गोला-बारूद जमा करता है या फिर ऐसी कोशिश करता है, तो वह आजीवन कारावास या दस वर्ष के लिये कारावास और जुर्माने से भी दण्डनीय होगा।

जमानत (Bail) का प्रावधान

भारतीय दंड संहिता की धारा 122 अंतर्गत जो अपराध कारित किए जाते है वह अपराध दंड प्रक्रिया संहिता में गैर-जमानतीय (Non-Baileble) अपराध की श्रेणी में आते है, इसलिए इस धारा के अंतर्गत किए गए अपराध में जमानत नहीं मिल सकेगी।

अपराधसजासंज्ञेयजमानतविचारणीय
भारत सरकार के खिलाफ युद्ध छेड़ने के इरादे से हथियार आदि इकट्ठा करना।आजीवन कारावास या 10 साल + जुर्मानासंज्ञेयगैर जमानतीयसेशन न्यायालय

हमारा प्रयास भारतीय दंड संहिता की धारा 122 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

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धारा- 121क, धारा-121 व्दारा दंडनीय अपराधों को करने का षड्यंत्र, (IPC Section 121A, Conspiracy to commit offences punishable by section 121)

धारा-121क क्या है?

कोई इंसान किसी अपराध को करने के लिये दो अथवा दो से अधिक व्यक्तियों के साथ मिलकर साजिश रच कर देश के खिलाफ किसी अपराध को अंजाम देता है तो वह, 

भारतीय दंड संहिता की धारा-121क के तहत ऐसे किसी अपराध के लिए साजिश रचने के लिए 10 साल कैद या फिर उम्रकैद की सजा का प्रावधान किया गया है। देश के खिलाफ युद्ध की साजिश रचने वालों के खिलाफ या फिर ऐसे लोगों से सांठगांठ रखने वालों के खिलाफ मामला बनता है।

भारतीय दंड संहिता की धारा 121क के अनुसार-

जो कोई धारा 121 व्दारा दंडनीय अपराधों में से कोई अपराध करने के लिए 8[भारत] के भीतर 9।।। या बाहर षड्यंत्र करेगा, या 10[केंद्रीय सरकार को या किसी 11[राज्य] की सरकार को 12।।।ट आपराधिक बल व्दारा या आपराधिक बल के प्रदर्शन व्दारा आतंकित करने का षड्यंत्र करेगा, वह 13[आजीवन कारावास] से, या दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि दस वर्ष तक की हो सकेगी, दंडित किया जाएगा 14[और जुर्माने से भी दंडनीय होगा] ।

स्पष्टीकरण–इस धारा के अधीन षड्यंत्र गठित होने के लिए यह आवश्यक नहीं है कि उसके अनुसरण में कोई कार्य या अवैध लोप गठित हुआ हो ।

धारा- 121, (IPC Section-121), भारत सरकार के विरुद्ध युद्ध करना या युद्ध करने का प्रयत्न करना या युद्ध करने का दुष्प्रेरण करना ।

धारा 121 क्या है?

हम मे से बहुत से लोगो ने देखा होगा कि भारत सरकार के विरूद्ध लड़ने अथवा युद्ध कराने का षडयंत्र करता है और साथ सरकार से युद्ध कराने का दुष्प्रेरण कराता है तो भारत सरकार ने संविधान मे ऐसे दुष्प्रेरण के लिये भारतीय दंड संहिता की धारा-121 के अन्तर्गत, वह दंड का भागीदार होगा ।

भारतीय दंड संहिता की धारा 121 के अनुसार-

जो कोई भारत सरकार के विरुद्ध युद्ध करेगा, या ऐसा युद्ध करने का प्रयत्न करेगा या ऐसा युद्ध करने का दुष्प्रेरण करेगा, तो उसे मृत्युदण्ड या आजीवन कारावास से दण्डित किया जाएगा और साथ ही वह आर्थिक दण्ड के लिए भी उत्तरदायी होगा।

लागू अपराध

कोई इंसान भारत सरकार के विरुद्ध युद्ध करना या करने का प्रयत्न या दुष्प्रेरण करना तो मृत्यु दण्ड या आजीवन कारावास अथवा आर्थिक दण्ड का भागीदार होगा । यह एक गैर-जमानती, संज्ञेय अपराध है और सत्र न्यायालय व्दारा विचारणीय है। यह अपराध समझौता करने योग्य नहीं है।

अपराध

अपराध करने की आपराधिक साजिश, मौत से दंडनीय, आजीवन कारावास या 2 साल या ऊपर की अवधि के लिए कठोर कारावास
किसी भी अन्य आपराधिक साजिश

सजा

जिस अपराध को करने या उकसाने के लिए जो भी दंड अपराध अनुसार
6 महीने कारावास या जुर्माना अथवा दोनों

प्रकृति संज्ञेय

अपराध के अनुसार ही संज्ञेय अथवा असंज्ञेय अपराध को परिभाषित हो पायेगा ।
असंज्ञेय

जमानत

अपराध के अनुसार ही संज्ञेय अथवा असंज्ञेय अपराध को परिभाषित हो पायेगा ।
जमानती

विचारणीय

अपराध के स्तर पर ही
मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी