Home Blog Page 47

भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 150 | Indian Contract Act Section 150

भारतीय संविदा अधिनियम Indian Contract Act (ICA Section-150) in Hindi के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 150 के अनुसार उपनिधाता, उपनिहित माल की उन त्रुटियों को उपनिहिती से प्रकट करने के लिए आबद्ध है जिनकी जानकारी उपनिधाता को हो और जो उसके उपयोग में तत्त्वतः विघ्न डालती हो या उपनिहिती को साधारण जोखिम में डालती हो और यदि वह ऐसा प्रकटीकरण नहीं करता है तो वह उपनिहिती को ऐसी त्रुटियों से प्रत्यक्षतः उद्भूत नुकसान के लिए उत्तरदायी है, जिसे IC Act Section-150 के अन्तर्गत परिभाषित किया गया है।

भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 150 (Indian Contract Act Section-150) का विवरण

भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 150 IC Act Section-150 के अनुसार उपनिधाता, उपनिहित माल की उन त्रुटियों को उपनिहिती से प्रकट करने के लिए आबद्ध है जिनकी जानकारी उपनिधाता को हो और जो उसके उपयोग में तत्त्वतः विघ्न डालती हो या उपनिहिती को साधारण जोखिम में डालती हो और यदि वह ऐसा प्रकटीकरण नहीं करता है तो वह उपनिहिती को ऐसी त्रुटियों से प्रत्यक्षतः उद्भूत नुकसान के लिए उत्तरदायी है।

भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 150 (IC Act Section-150 in Hindi)

उपनिहित माल की त्रुटियों को प्रकट करने का उपनिधाता का कर्तव्य-

उपनिधाता, उपनिहित माल की उन त्रुटियों को उपनिहिती से प्रकट करने के लिए आबद्ध है जिनकी जानकारी उपनिधाता को हो और जो उसके उपयोग में तत्त्वतः विघ्न डालती हो या उपनिहिती को साधारण जोखिम में डालती हो और यदि वह ऐसा प्रकटीकरण नहीं करता है तो वह उपनिहिती को ऐसी त्रुटियों से प्रत्यक्षतः उद्भूत नुकसान के लिए उत्तरदायी है।
यदि माल भाड़े पर उपनिहित किया गया है तो उपनिधाता ऐसे नुकसान के लिए उत्तरदायी है चाहे उपनिहित माल की ऐसी त्रुटियों के अस्तित्व से बह परिचित था या नहीं।
दृष्टांत
(क) क एक घोड़ा ख को उधार देता है जिसका दुष्ट होना वह जानता है । वह यह तथ्य प्रकट नहीं करता कि घोड़ा दुष्ट है। घोड़ा भाग खड़ा होता है, ख को गिरा देता है और ख क्षत हो जाता है । हुए नुकसान के लिए ख के प्रति क उत्तरदायी है।
(ख) ख की एक गाड़ी क भाड़े पर लेता है । गाड़ी अक्षेमकर है, यद्यपि ख को यह मालूम नहीं है और क क्षत हो जाता है । क्षति के लिए क के प्रति ख उत्तरदायी है।

Indian Contract Act Section-150 (IC Act Section-150 in English)

Bailor’s duty to disclose faults in goods bailed-

The bailor is bound to disclose to the bailee faults in the goods bailed, of which the bailor is aware, and which materially interfere with the use of them, or expose the bailee to extraordinary risks; and if he does not make such disclosure, he is responsible for damage arising to the bailee directly from such faults.
If the goods are bailed for hire, the bailor is responsible for such damage, whether he was or was not aware of the existence of such faults in the goods bailed.
Illustrations
(a) A lends a horse, which he knows to be vicious, to B. He does not disclose the fact that the horse is vicious. The horse runs away. B is thrown and injured. A is responsible to B for damage sustained.
(b) A hires a carriage of B. The carriage is unsafe, though B is not aware of it, and A is injured. B is responsible to A for the injury.

हमारा प्रयास भारतीय संविदा अधिनियम (Indian Contract Act Section) की धारा 150 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 149 | Indian Contract Act Section 149

भारतीय संविदा अधिनियम Indian Contract Act (ICA Section-149) in Hindi के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 149 के अनुसार उपनिहिती को परिदान ऐसा कुछ करने द्वारा किया जा सकेगा जिसका प्रभाव उस माल को आशयित उपनिहिती के या उसकी ओर से उसे धारण करने के लिए प्राधिकृत किसी व्यक्ति के कब्जे में रख देना हो, जिसे IC Act Section-149 के अन्तर्गत परिभाषित किया गया है।

भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 149 (Indian Contract Act Section-149) का विवरण

भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 149 IC Act Section-149 के अनुसार उपनिहिती को परिदान ऐसा कुछ करने द्वारा किया जा सकेगा जिसका प्रभाव उस माल को आशयित उपनिहिती के या उसकी ओर से उसे धारण करने के लिए प्राधिकृत किसी व्यक्ति के कब्जे में रख देना हो।

भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 149 (IC Act Section-149 in Hindi)

उपनिहिती को परिदान किस प्रकार किया जाए-

उपनिहिती को परिदान ऐसा कुछ करने द्वारा किया जा सकेगा जिसका प्रभाव उस माल को आशयित उपनिहिती के या उसकी ओर से उसे धारण करने के लिए प्राधिकृत किसी व्यक्ति के कब्जे में रख देना हो।

Indian Contract Act Section-149 (IC Act Section-149 in English)

Delivery to bailee how made-

The delivery to the bailee may be made by doing anything which has the effect of putting the goods in the possession of the intended bailee or of any person authorized to hold them on his behalf.

हमारा प्रयास भारतीय संविदा अधिनियम (Indian Contract Act Section) की धारा 149 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 148 | Indian Contract Act Section 148

भारतीय संविदा अधिनियम Indian Contract Act (ICA Section-148) in Hindi के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 148 के अनुसार “उपनिधान” एक व्यक्ति द्वारा दूसरे व्यक्ति को किसी प्रयोजन के लिए इस संविदा पर माल का परिदान करना है कि जब वह प्रयोजन पूरा हो जाए तब वह लौटा दिया जाएगा; या उसे परिदान करने वाले व्यक्ति के निदेशों के अनुसार अन्यथा व्ययनित कर दिया जाएगा। माल का परिदान करने वाला व्यक्ति “उपनिधाता” कहलाता है । वह व्यक्ति, जिसको वह परिदत्त किया जाता है “उपनिहिती” कहलाता है, जिसे IC Act Section-148 के अन्तर्गत परिभाषित किया गया है।

भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 148 (Indian Contract Act Section-148) का विवरण

भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 148 IC Act Section-148 के अनुसार “उपनिधान” एक व्यक्ति द्वारा दूसरे व्यक्ति को किसी प्रयोजन के लिए इस संविदा पर माल का परिदान करना है कि जब वह प्रयोजन पूरा हो जाए तब वह लौटा दिया जाएगा; या उसे परिदान करने वाले व्यक्ति के निदेशों के अनुसार अन्यथा व्ययनित कर दिया जाएगा। माल का परिदान करने वाला व्यक्ति “उपनिधाता” कहलाता है । वह व्यक्ति, जिसको वह परिदत्त किया जाता है “उपनिहिती” कहलाता है।

भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 148 (IC Act Section-148 in Hindi)

“उपनिधान”, “उपनिधाता” और “उपनिहिती की परिभाषा-

“उपनिधान” एक व्यक्ति द्वारा दूसरे व्यक्ति को किसी प्रयोजन के लिए इस संविदा पर माल का परिदान करना है कि जब वह प्रयोजन पूरा हो जाए तब वह लौटा दिया जाएगा; या उसे परिदान करने वाले व्यक्ति के निदेशों के अनुसार अन्यथा व्ययनित कर दिया जाएगा। माल का परिदान करने वाला व्यक्ति “उपनिधाता” कहलाता है । वह व्यक्ति, जिसको वह परिदत्त किया जाता है “उपनिहिती” कहलाता है।
स्पष्टीकरण–यदि वह व्यक्ति, जो किसी अन्य के माल पर पहले से ही कब्जा रखता है, उसका धारण उपनिहिती के रूप में करने की संविदा करता है तो वह् तद्द्वारा उपनिहिती हो जाता है और माल का स्वामी उसका उपनिधाता हो जाता है यद्यपि वह माल उपनिधान के तौर पर परिदत्त न किया गया हो।

Indian Contract Act Section-148 (IC Act Section-148 in English)

“Bailment” “bailor” and “bailee” defined”-

A “bailment” is the delivery of goods by one person to another for some purpose, upon a contract that they shall, when the purpose is accomplished, be returned or otherwise disposed of according to the directions of the person delivering them. The person delivering the goods is called the “bailor”. The person to whom they are delivered is called, the “bailee”.
Explanation.—If a person already in possession of the goods of another contracts to hold them as a bailee, he thereby becomes the bailee, and the owner becomes the bailor of such goods, although they may not have been delivered by way of bailment.

हमारा प्रयास भारतीय संविदा अधिनियम (Indian Contract Act Section) की धारा 148 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 147 | Indian Contract Act Section 147

भारतीय संविदा अधिनियम Indian Contract Act (ICA Section-147) in Hindi के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 147 के अनुसार सह-प्रतिभू, जो विभिन्न राशियों के लिए आबद्ध है, अपनीअपनी बाध्यताओं की परिसीमाओं तक समानतः संदाय करने के दायी है, जिसे IC Act Section-147 के अन्तर्गत परिभाषित किया गया है।

भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 147 (Indian Contract Act Section-147) का विवरण

भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 147 IC Act Section-147 के अनुसार सह-प्रतिभू, जो विभिन्न राशियों के लिए आबद्ध है, अपनीअपनी बाध्यताओं की परिसीमाओं तक समानतः संदाय करने के दायी है।

भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 147 (IC Act Section-147 in Hindi)

विभिन्न राशियों के लिए आबद्ध सह-प्रतिभुओं का दायित्व-

सह-प्रतिभू, जो विभिन्न राशियों के लिए आबद्ध है, अपनीअपनी बाध्यताओं की परिसीमाओं तक समानतः संदाय करने के दायी है।
दृष्टांत
(क) घ के प्रतिभूओं के रूप में क, ख और ग इस शर्त पर आश्रित कि ङ को घ सम्यक् रूप से लेखा देगा, पृथक्-पृथक् तीन बन्धपत्र लिख देते हैं, जिनमें से हर एक भिन्न शास्ति वाला है अर्थात् क का 10,000 रुपए की, ख का 20,000 रुपए की, ग का 40,000 रुपए की शास्ति वाला है। ग 30,000 रुपए का लेखा नहीं देता। क, ख और ग हर एक 10,000 रुपए संदाय करने के दायी हैं।
(ख) घ के प्रतिभुओं की हैसियत में क, ख और ग, इस शर्त पर आश्रित कि ङ को घ सम्यक् रूप से लेखा देगा, पृथक्-पृथक् तीन बन्धपत्र लिख देते हैं जिनमें से हर एक भिन्न शास्ति वाला है, अर्थात् क का 10,000 रुपए की, ख का 20,000 रुपए की, ग का 40,000 रुपए की शास्ति वाला है । घ 40,000 रुपए का लेखा नहीं देता। क 10,000 रुपए का और ख और ग हर एक 15,000 रुपए का संदाय करने के दायी हैं।
(ग) घ के प्रतिभुओं के रूप में, क, ख और ग इस शर्त पर आश्रित कि ङ को घ सम्यक रूप से लेखा देगा, पृथक-पृथक तीन बन्धपत्र लिख देते हैं जिनमें से हर एक भिन्न शास्ति वाला है, अर्थात् क का 10,000 रुपए की, ख का 20,000 रुपए की, और घ का 40,000 रुपए की शास्ति वाला है । घ 70,000 रुपए का लेखा नहीं देता। क, ख और ग हर एक को अपने बन्धपत्र की पूरी शास्ति देनी होगी।

Indian Contract Act Section-147 (IC Act Section-147 in English)

Liability of co-sureties bound in different sums-

Co-sureties who are bound in different sums are liable to pay equally as far as the limits of their respective obligations permit.
Illustrations
(a) A, B and C, as sureties for D, enter into three several bonds, each in a different penalty, namely, A in the penalty of each 10,000 rupees, B in that of 20,000 rupees, C in that of 40,000 rupees, conditioned for D‟s duly accounting to E. D makes default to the extent of 30,000 rupees. A, B and C are each liable to pay 10,000 rupees.
(b) A, B and C, as sureties for D, enter into three several bonds, each in a different penalty, namely, A in the penalty of 10,000 rupees, B in that of 20,000 rupees, C in that of 40,000 rupees, conditioned for D‟s duly accounting to E. D makes default to the extent of 40,000 rupees. A is liable to pay 10,000 rupees, and B and C 15,000 rupees each.
(c) A, B and C, as sureties for D, enter into three several bonds, each in a different penalty, namely, A in the penalty of 10,000 rupees, B in that of 20,000 rupees, C in that of 40,000 rupees, conditioned for D ‟s duly accounting to E. D makes default to the extent of 70,000 rupees. A, B and C have to pay each the full penalty of his bond.

हमारा प्रयास भारतीय संविदा अधिनियम (Indian Contract Act Section) की धारा 147 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 146 | Indian Contract Act Section 146

भारतीय संविदा अधिनियम Indian Contract Act (ICA Section-146) in Hindi के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 146 के अनुसार जहां कि दो या अधिक व्यक्ति उसी ऋण या कर्तव्य के लिए, या तो संयुक्ततः या पृथक्तः और चाहे एक हो या चाहे विभिन्न संविदाओं के अधीन, और चाहे एक दूसरे के ज्ञान में चाहे ज्ञान के बिना, सह-प्रतिभू हों, वहीं उन सह-प्रतिभूओं में से हर एक, तत्प्रतिकूल संविदा के अभाव में वहां तक, जहां तक उनके बीच का सम्बन्ध है, सम्पूर्ण ऋण का या उसके उस भाग का, जो मूल ऋणी द्वारा असंदत्त रह गया हो, समान अंश समानतः देने के दायी हैं, जिसे IC Act Section-146 के अन्तर्गत परिभाषित किया गया है।

भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 146 (Indian Contract Act Section-146) का विवरण

भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 146 IC Act Section-146 के अनुसार जहां कि दो या अधिक व्यक्ति उसी ऋण या कर्तव्य के लिए, या तो संयुक्ततः या पृथक्तः और चाहे एक हो या चाहे विभिन्न संविदाओं के अधीन, और चाहे एक दूसरे के ज्ञान में चाहे ज्ञान के बिना, सह-प्रतिभू हों, वहीं उन सह-प्रतिभूओं में से हर एक, तत्प्रतिकूल संविदा के अभाव में वहां तक, जहां तक उनके बीच का सम्बन्ध है, सम्पूर्ण ऋण का या उसके उस भाग का, जो मूल ऋणी द्वारा असंदत्त रह गया हो, समान अंश समानतः देने के दायी हैं।

भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 146 (IC Act Section-146 in Hindi)

सह-प्रतिभू समानतः अभिदाय करने के दायी होते हैं-

जहां कि दो या अधिक व्यक्ति उसी ऋण या कर्तव्य के लिए, या तो संयुक्ततः या पृथक्तः और चाहे एक हो या चाहे विभिन्न संविदाओं के अधीन, और चाहे एक दूसरे के ज्ञान में चाहे ज्ञान के बिना, सह-प्रतिभू हों, वहीं उन सह-प्रतिभूओं में से हर एक, तत्प्रतिकूल संविदा के अभाव में वहां तक, जहां तक उनके बीच का सम्बन्ध है, सम्पूर्ण ऋण का या उसके उस भाग का, जो मूल ऋणी द्वारा असंदत्त रह गया हो, समान अंश समानतः देने के दायी हैं।
दृष्टांत
(क) ङ को उधार दिए गए 3,000 रुपए के लिए घ के क, ख और ग प्रतिभू हैं । ङ संदाय में व्यतिक्रम करता है। क, ख और ग, जहाँ तक उनके बीच का सम्बन्ध है. हर एक 1,000 रुपए संदाय करने का दायी है।
(ख) ङ को उधार दिए गए 1,000 रुपए के लिए घ के क, ख और ग प्रतिभू हैं, और क, ख और ग के बीच यह संविदा है कि क एक चौथाई तक के लिए, ख एक चौथाई तक के लिए और ग आधे तक के लिए उत्तरदायी हैं। ङ संदाय में व्यतिक्रम करता है। जहां तक कि प्रतिभूओं के बीच का सम्बन्ध है, क 250 रुपए, ख 250 रुपए और ग 500 रुपए संदाय करने का दायी है।

Indian Contract Act Section-146 (IC Act Section-146 in English)

Co-sureties liable to contribute equally-

Where two or more persons are co-sureties for the same debt or duty, either jointly or severally, and whether under the same or different contracts, and whether with or without the knowledge of each other, the co-sureties, in the absence of any contract to the contrary, are liable, as between themselves, to pay each an equal share of the whole debt, or of that part of it which remains unpaid by the principal debtor.
Illustrations
(a) A, B and C are sureties to D for the sum of 3,000 rupees lent to E. E makes default in payment. A, B and C are liable, as between themselves, to pay 1,000 rupees each.
(b) A, B and C are sureties to D for the sum of 1,000 rupees lent to E, and there is a contract between A, B and C that A is to be responsible to the extent of one-quarter, B to the extent of one- quarter, and C to the extent of one-half. E makes default in payment. As between the sureties, A is liable to pay 250 rupees, B 250 rupees, and C 500 rupees.

हमारा प्रयास भारतीय संविदा अधिनियम (Indian Contract Act Section) की धारा 146 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 145 | Indian Contract Act Section 145

भारतीय संविदा अधिनियम Indian Contract Act (ICA Section-145) in Hindi के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 145 के अनुसार प्रत्याभूति की हर संविदा में प्रतिभू की क्षतिपूर्ति किए जाने का मूलऋणी का विवक्षित वचन रहता है, और प्रतिभू किसी भी धनराशि को जो उसने प्रत्याभूति के अधीन अधिकारपूर्वक दी हो, मूलऋणी से वसूल करने का हकदार है, किन्तु उन धनराशियों को नहीं जो उसने अनधिकारपूर्वक दी हों, जिसे IC Act Section-145 के अन्तर्गत परिभाषित किया गया है।

भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 145 (Indian Contract Act Section-145) का विवरण

भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 145 IC Act Section-145 के अनुसार प्रत्याभूति की हर संविदा में प्रतिभू की क्षतिपूर्ति किए जाने का मूलऋणी का विवक्षित वचन रहता है, और प्रतिभू किसी भी धनराशि को जो उसने प्रत्याभूति के अधीन अधिकारपूर्वक दी हो, मूलऋणी से वसूल करने का हकदार है, किन्तु उन धनराशियों को नहीं जो उसने अनधिकारपूर्वक दी हों।

भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 145 (IC Act Section-145 in Hindi)

प्रतिभू की क्षतिपूर्ति करने का विवक्षित वचन-

प्रत्याभूति की हर संविदा में प्रतिभू की क्षतिपूर्ति किए जाने का मूलऋणी का विवक्षित वचन रहता है, और प्रतिभू किसी भी धनराशि को जो उसने प्रत्याभूति के अधीन अधिकारपूर्वक दी हो, मूलऋणी से वसूल करने का हकदार है, किन्तु उन धनराशियों को नहीं जो उसने अनधिकारपूर्वक दी हों।
दृष्टांत
(क) ग का ख ऋणी है और क उस ऋण के लिए प्रतिभू है । ग संदाय की मांग क से करता है और उसके इन्कार करने पर उस रकम के लिए उस पर वाद लाता है। प्रतिरक्षा के लिए युक्तियुक्त आधार होने से क बाद में प्रतिरक्षा करता है, किन्तु वह ऋण की रकम को खर्च समेत संदत्त करने के लिए विवश किया जाता है। वह मूल ऋण तथा अपने द्वारा दी गई बर्चे की रकम को भीख से वसूल कर सकता है।
(ख) ख को ग कुछ धन उधार देता है, और ख की प्रार्थना पर क, उस रकम को प्रतिभूत करने के लिए ख द्वारा क के ऊपर लिखे गए विनिमय-पत्र को प्रतिगृहीत करता है। विनिमय-पत्र का धारक ग उसके संदाय की मांग क से करता है और क के इन्कार करने पर उसके विरुद्ध उस विनिमय-पत्र पर वाद लाता है । क प्रतिरक्षा करने के लिए युक्तियुक्त आधार न रखते हुए बाद में प्रतिरक्षा करता है. और उसे उस विनिमय-पत्र की रकम और खर्चा देना पड़ता है। वह विनिमय-पत्र की रकम ख से वसूल कर सकता है किन्तु खर्च के लिए दी गई राशि वसूल नहीं कर सकता, क्योंकि उस अनुयोग में प्रतिरक्षा करने के लिए कोई वास्तविक आधार नहीं था।
(ग) ग द्वारा ख को प्रदाय किए जाने वाले चावल के लिए, क 2,000 रुपए तक का संदाय प्रत्याभूत करता है । ख को ग 2,000 रुपए से कम की रकम का चावल प्रदाय करता है, किन्तु प्रदाय किए गए चावल के लिए क से 2,000 रुपए की राशि का संदाय अभिप्राप्त कर लेता है । क वास्तव में प्रदाय किए गए चावल की कीमत से अधिक ख से वसूल नहीं कर सकता।

Indian Contract Act Section-145 (IC Act Section-145 in English)

Implied promise to indemnify surety-

In every contract of guarantee there is an implied promise by the principal debtor to indemnify the surety, and the surety is entitled to recover from the principal debtor whatever sum he has rightfully paid under the guarantee, but, no sums which he has paid wrongfully.
Illustrations
(a) B is indebted to C, and A is surety for the debt. C demands payment from A, and on his refusal sues him for the amount. A defends the suit, having reasonable grounds for doing so, but is compelled to pay the amount of the debt with costs. He can recover from B the amount paid by him for costs, as well as the principal debt.
(b) C lends B a sum of money, and A, at the request of B, accepts a bill of exchange drawn by B upon A to secure the amount. C, the holder of the bill, demands payment of it from A, and, on A‟s refusal to pay, sues him upon the bill. A, not having reasonable grounds for so doing, defends the suit, and has to pay the amount of the bill and costs. He can recover from B the amount of the bill, but not the sum paid for costs, as there was no real ground for defending the action.
(c) A guarantees to C, to the extent of 2,000 rupees, payment for rice to be supplied by C to B. C supplies to B rice to a less amount than 2,000 rupees, but obtains from A payment of the sum of 2,000 rupees in respect of the rice supplied. A cannot recover from B more than the price of the rice actually supplied.

हमारा प्रयास भारतीय संविदा अधिनियम (Indian Contract Act Section) की धारा 145 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।