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भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 48 | Indian Contract Act Section 48

 भारतीय संविदा अधिनियम Indian Contract Act (ICA Section-48) in Hindi के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 48 के अनुसार जबकि किसी वचन का पालन अमुक दिन किया जाना हो और वचनदाता ने यह भार अपने ऊपर न ले लिया हो कि वह वचनग्रहीता के आवेदन के बिना उसका पालन करेगा तब वचनग्रहीता का यह कर्तव्य है कि पालन के लिए आवेदन उचित स्थान पर और कारबार के प्रायिक घण्टों के भीतर करे, जिसे IC Act Section-48 के अन्तर्गत परिभाषित किया गया है।

भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 48 (Indian Contract Act Section-48) का विवरण

भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 48 IC Act Section-48 के अनुसार जबकि किसी वचन का पालन अमुक दिन किया जाना हो और वचनदाता ने यह भार अपने ऊपर न ले लिया हो कि वह वचनग्रहीता के आवेदन के बिना उसका पालन करेगा तब वचनग्रहीता का यह कर्तव्य है कि पालन के लिए आवेदन उचित स्थान पर और कारबार के प्रायिक घण्टों के भीतर करे।

भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 48 (IC Act Section-48 in Hindi)

अमुक दिन पर पालन के लिए आवेदन उचित समय और स्थान पर किया जाएगा

जबकि किसी वचन का पालन अमुक दिन किया जाना हो और वचनदाता ने यह भार अपने ऊपर न ले लिया हो कि वह वचनग्रहीता के आवेदन के बिना उसका पालन करेगा तब वचनग्रहीता का यह कर्तव्य है कि पालन के लिए आवेदन उचित स्थान पर और कारबार के प्रायिक घण्टों के भीतर करे।
स्पष्टीकरण — “उचित समय और स्थान क्या है”, यह प्रश्न हर एक विशिष्ट मामले में तथ्य का प्रश्न है।

Indian Contract Act Section-48 (IC Act Section-48 in English)

Application for performance on certain day to be at proper time and place-

When a promise is to be performed on a certain day, and the promisor has not undertaken to perform it without application by the promisee, it is the duty of the promisee to apply for performance at a proper place and within the usual hours of business.
Explanation – The question “what is a proper time and place” is, in each particular case, a question of fact.

हमारा प्रयास भारतीय संविदा अधिनियम (Indian Contract Act Section) की धारा 48 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 47 | Indian Contract Act Section 47

 भारतीय संविदा अधिनियम Indian Contract Act (ICA Section-47) in Hindi के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 47 के अनुसार जबकि किसी वचन का पालन अमुक दिन किया जाना हो और वचनदाता ने वचनग्रहीता द्वारा आवेदन किए जाने के बिना उसका पालन करने का वचन दिया हो तब कारबार के प्रायिक घण्टों के दौरान किसी भी समय ऐसे दिन और स्थान पर, जिस पर उस वचन का पालन किया जाना चाहिये, वचनदाता उसका पालन कर सकेगा, जिसे IC Act Section-47 के अन्तर्गत परिभाषित किया गया है।

भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 47 (Indian Contract Act Section-47) का विवरण

भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 47 IC Act Section-47 के अनुसार जबकि किसी वचन का पालन अमुक दिन किया जाना हो और वचनदाता ने वचनग्रहीता द्वारा आवेदन किए जाने के बिना उसका पालन करने का वचन दिया हो तब कारबार के प्रायिक घण्टों के दौरान किसी भी समय ऐसे दिन और स्थान पर, जिस पर उस वचन का पालन किया जाना चाहिये, वचनदाता उसका पालन कर सकेगा।

भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 47 (IC Act Section-47 in Hindi)

वचन पालन के लिए समय और स्थान जहाँ कि पालन के लिए समय विनिर्दिष्ट हो और आवेदन न किया जाना हो-

जबकि किसी वचन का पालन अमुक दिन किया जाना हो और वचनदाता ने वचनग्रहीता द्वारा आवेदन किए जाने के बिना उसका पालन करने का वचन दिया हो तब कारबार के प्रायिक घण्टों के दौरान किसी भी समय ऐसे दिन और स्थान पर, जिस पर उस वचन का पालन किया जाना चाहिये, वचनदाता उसका पालन कर सकेगा।
 दृष्टान्त
‘क’ वचन देता है कि वह पहली जनवरी को ‘ख’ के भाण्डागार में माल परिदत्त करेगा। उस दिन ‘क’ माल को ‘ख’ के भाण्डागार में लाता है, किन्तु उसके बन्द होने के प्रायिक घण्टे के पश्चात् और माल नहीं लिया जाता। ‘के’ ने अपने वचन का पालन नहीं किया।

Indian Contract Act Section-47 (IC Act Section-47 in English)

Time and place for performance of promise, where time is specified and no application to be made-

When a promise is to be performed on a certain day, and the promisor has undertaken to perform it without application by the promisee, the promisor may perform it at any time during the usual hours of business on such day and at the place at which the promise ought to be performed.
Illustration
A promises to deliver goods at B’s warehouse on the first January. On the day A brings the goods to B’s warehouse, but after the usual hour closing it, and they are not received. A has not performed his promise.

हमारा प्रयास भारतीय संविदा अधिनियम (Indian Contract Act Section) की धारा 47 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 46 | Indian Contract Act Section 46

 भारतीय संविदा अधिनियम Indian Contract Act (ICA Section-46) in Hindi के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 46 के अनुसार जहाँ कि संविदा के अनुसार वचनदाता को अपने वचन का पालन वचनग्रहीता द्वारा आवेदन किए जाने के बिना करना हो और पालन के लिए कोई समय विनिर्दिष्ट न हो वहाँ वचनबन्ध का पालन युक्तियुक्त समय के भीतर करना होगा, जिसे IC Act Section-46 के अन्तर्गत परिभाषित किया गया है।

भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 46 (Indian Contract Act Section-46) का विवरण

भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 46 IC Act Section-46 के अनुसार जहाँ कि संविदा के अनुसार वचनदाता को अपने वचन का पालन वचनग्रहीता द्वारा आवेदन किए जाने के बिना करना हो और पालन के लिए कोई समय विनिर्दिष्ट न हो वहाँ वचनबन्ध का पालन युक्तियुक्त समय के भीतर करना होगा।

भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 46 (IC Act Section-46 in Hindi)

वचन पालन के लिए समय, जहाँ कि पालन के लिए आवेदन न किया जाना हो और कोई समय विनिर्दिष्ट न हो-

जहाँ कि संविदा के अनुसार वचनदाता को अपने वचन का पालन वचनग्रहीता द्वारा आवेदन किए जाने के बिना करना हो और पालन के लिए कोई समय विनिर्दिष्ट न हो वहाँ वचनबन्ध का पालन युक्तियुक्त समय के भीतर करना होगा।
स्पष्टीकरण — “युक्तियुक्त समय क्या है’ यह प्रश्न हर एक विशिष्ट मामले में तथ्य का प्रश्न है।

Indian Contract Act Section-46 (IC Act Section-46 in English)

Time for performance of promise, where no application is to be made and no time is specified-

Where, by the contract, a promisor is to perform his promise without application by the promisee, and no time for performance is specified, the engagement must be performed within a reasonable time.
Explanation – The question “what is a reasonable time” is, in each particular case, a question of fact.

हमारा प्रयास भारतीय संविदा अधिनियम (Indian Contract Act Section) की धारा 46 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 45 | Indian Contract Act Section 45

 भारतीय संविदा अधिनियम Indian Contract Act (ICA Section-45) in Hindi के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 45 के अनुसार जबकि किसी व्यक्ति ने दो या अधिक व्यक्तियों को संयुक्तत: वचन दिया हो, तब यदि संविदा से तत्प्रतिकूल आशय प्रतीत न हो तो उसके पालन के लिए दावा करने का अधिकार, जहाँ तक कि उसका और उनका सम्बन्ध है, उनके संयुक्त जीवनों के दौरान उनकी, और उनमें से किसी की मृत्यु के पश्चात् ऐसे मृत व्यक्ति के प्रतिनिधि को उत्तरजीवी या उत्तरजीवियों के साथ संयुक्तत: और अन्तिम उत्तरजीवी की मृत्यु के पश्चात् उन सबके प्रतिनिधियों को संयुक्तत: होता है, जिसे IC Act Section-45 के अन्तर्गत परिभाषित किया गया है।

भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 45 (Indian Contract Act Section-45) का विवरण

भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 45 IC Act Section-45 के अनुसार जबकि किसी व्यक्ति ने दो या अधिक व्यक्तियों को संयुक्तत: वचन दिया हो, तब यदि संविदा से तत्प्रतिकूल आशय प्रतीत न हो तो उसके पालन के लिए दावा करने का अधिकार, जहाँ तक कि उसका और उनका सम्बन्ध है, उनके संयुक्त जीवनों के दौरान उनकी, और उनमें से किसी की मृत्यु के पश्चात् ऐसे मृत व्यक्ति के प्रतिनिधि को उत्तरजीवी या उत्तरजीवियों के साथ संयुक्तत: और अन्तिम उत्तरजीवी की मृत्यु के पश्चात् उन सबके प्रतिनिधियों को संयुक्तत: होता है।

भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 45 (IC Act Section-45 in Hindi)

संयुक्त अधिकारों का न्यागमन-

जबकि किसी व्यक्ति ने दो या अधिक व्यक्तियों को संयुक्तत: वचन दिया हो, तब यदि संविदा से तत्प्रतिकूल आशय प्रतीत न हो तो उसके पालन के लिए दावा करने का अधिकार, जहाँ तक कि उसका और उनका सम्बन्ध है, उनके संयुक्त जीवनों के दौरान उनकी, और उनमें से किसी की मृत्यु के पश्चात् ऐसे मृत व्यक्ति के प्रतिनिधि को उत्तरजीवी या उत्तरजीवियों के साथ संयुक्तत: और अन्तिम उत्तरजीवी की मृत्यु के पश्चात् उन सबके प्रतिनिधियों को संयुक्तत: होता है।
दृष्टान्त
‘क’ अपने को ‘ख’ और ‘ग’ द्वारा उधार दिये गए, 5,000 रुपयों के प्रतिफल में संयुक्तत: ‘ख’ और ‘ग’ को वह राशि ब्याज समेत विनिर्दिष्ट दिन प्रतिसंदत करने का वचन देता है। ‘ख’ मर जाता है। पालन का दावा करने का अधिकार ‘ग’ के जीवन के दौरान ‘ख’ के प्रतिनिधियों को ‘ग’ के साथ संयुक्तत: और ‘ग’ की मृत्यु के पश्चात् ‘ख’ और ‘ग’ के प्रतिनिधियों को संयुक्ततः होता है।

Indian Contract Act Section-45 (IC Act Section-45 in English)

Devolution of joint rights-

When a person has made a promise to two or more persons jointly, then, unless a contrary intention appears from the contract, the right to claim performance rests, as between him and them, with them during their joint lives, and, after the death of any of them, with the representative of such deceased person jointly with the survivor or survivors, and, after the death of the last survivor, with the representatives of all jointly.
Illustration
A, in consideration of 5,000 rupees lent to him by B and C, promises B and C jointly to repay them that sum with interest on a day specified. B dies. The right to claim performance rests with B’s representative jointly with C during C’s life, and after the death of C, with the representatives of B and C jointly.

हमारा प्रयास भारतीय संविदा अधिनियम (Indian Contract Act Section) की धारा 45 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 44 | Indian Contract Act Section 44

 भारतीय संविदा अधिनियम Indian Contract Act (ICA Section-44) in Hindi के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 44 के अनुसार जहाँ कि दो या अधिक व्यक्तियों ने एक संयुक्त वचन दिया हो, वहाँ वचनग्रहीता द्वारा ऐसे संयुक्त वचनदाताओं में से एक की निर्मुक्ति अन्य संयुक्त वचनदाता या संयुक्त वचनदाताओं को उन्मोचित नहीं करती, और न वह ऐसे निर्मुक्त संयुक्त वचनदाता को अन्य संयुक्त वचनदाता या संयुक्त वचनदाताओं के प्रति उत्तरदायित्व से ही निर्मुक्त करती है, जिसे IC Act Section-44 के अन्तर्गत परिभाषित किया गया है।

भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 44 (Indian Contract Act Section-44) का विवरण

भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 44 IC Act Section-44 के अनुसार जहाँ कि दो या अधिक व्यक्तियों ने एक संयुक्त वचन दिया हो, वहाँ वचनग्रहीता द्वारा ऐसे संयुक्त वचनदाताओं में से एक की निर्मुक्ति अन्य संयुक्त वचनदाता या संयुक्त वचनदाताओं को उन्मोचित नहीं करती, और न वह ऐसे निर्मुक्त संयुक्त वचनदाता को अन्य संयुक्त वचनदाता या संयुक्त वचनदाताओं के प्रति उत्तरदायित्व से ही निर्मुक्त करती है।

भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 44 (IC Act Section-44 in Hindi)

संयुक्त वचनदाताओं में से एक की निर्मुक्ति का प्रभाव-

जहाँ कि दो या अधिक व्यक्तियों ने एक संयुक्त वचन दिया हो, वहाँ वचनग्रहीता द्वारा ऐसे संयुक्त वचनदाताओं में से एक की निर्मुक्ति अन्य संयुक्त वचनदाता या संयुक्त वचनदाताओं को उन्मोचित नहीं करती, और न वह ऐसे निर्मुक्त संयुक्त वचनदाता को अन्य संयुक्त वचनदाता या संयुक्त वचनदाताओं के प्रति उत्तरदायित्व से ही निर्मुक्त करती है।

Indian Contract Act Section-44 (IC Act Section-44 in English)

Effect of release of one joint promisor-

Where two or more persons have made a joint promise, a release of one of such joint promisors by the promisee does not discharge the other joint promisor or joint promisors, neither does it free the joint promisors so released from responsibility to the other joint promisor or joint promisors.

हमारा प्रयास भारतीय संविदा अधिनियम (Indian Contract Act Section) की धारा 44 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 43 | Indian Contract Act Section 43

 भारतीय संविदा अधिनियम Indian Contract Act (ICA Section-43) in Hindi के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 43 के अनुसार जबकि दो या अधिक व्यक्ति कोई संयुक्त वचन दें तब तत्प्रतिकूल अभिव्यक्त करार के अभाव में वचनग्रहीता, ऐसे संयुक्त वचनदाताओं में से किसी एक या अधिक को समग्र वचन के पालन के लिए विवश कर सकेगा, जिसे IC Act Section-43 के अन्तर्गत परिभाषित किया गया है।

भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 43 (Indian Contract Act Section-43) का विवरण

भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 43 IC Act Section-43 के अनुसार जबकि दो या अधिक व्यक्ति कोई संयुक्त वचन दें तब तत्प्रतिकूल अभिव्यक्त करार के अभाव में वचनग्रहीता, ऐसे संयुक्त वचनदाताओं में से किसी एक या अधिक को समग्र वचन के पालन के लिए विवश कर सकेगा।

भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 43 (IC Act Section-43 in Hindi)

संयुक्त वचनदाताओं में से कोई भी पालन के लिए विवश किया जा सकेगा-

जबकि दो या अधिक व्यक्ति कोई संयुक्त वचन दें तब तत्प्रतिकूल अभिव्यक्त करार के अभाव में वचनग्रहीता, ऐसे संयुक्त वचनदाताओं में से किसी एक या अधिक को समग्र वचन के पालन के लिए विवश कर सकेगा।
हर एक वचनदाता अभिदाय करने के लिए विवश कर सकेगा — दो या अधिक संयुक्त वचनदाताओं में से हर एक अन्य संयुक्त वचनदाता को वचन के पालन में अपने समान अभिदाय करने के लिए विवश कर सकेगा, जब तक कि तत्प्रतिकूल आशय संविदा से प्रतीत न हो।
अभिदाय में व्यतिक्रम से हुई हानि में अंश बटाना –– यदि दो या अधिक संयुक्त वचनदाताओं में से कोई एक ऐसा अभिदाय करने में व्यतिक्रम करे तो शेष संयुक्त वचनदाताओं को ऐसे व्यतिक्रम से उद्भूत हानि को समान अंशों में सहन करना होगा।
स्पष्टीकरण — इस धारा की कोई भी बात किसी प्रतिभू द्वारा मूल ऋणी की ओर से किए गए संदायों को अपने मूल ऋणी से उस प्रतिभू को वसूल करने से निवारित नहीं करेगी और न मूल ऋणी द्वारा किए गए संदायों के कारण उसे उस प्रतिभू से कुछ भी वसूल करने का हकदार बनाएगी।
दृष्टान्त
(क) ‘क’, ‘ख’ और ‘ग’ 3,000 रुपये ‘घ’ को देने का संयुक्तत: वचन देते हैं। ‘च’ चाहे ‘क’ या ‘ख’ या ‘ग’ को विवश कर सकेगा कि वह उसे 3,000 रुपये दे।
(ख) “क’, ‘ख’ और ‘ग’ 3,000 रुपये ‘घ’ को देने का संयुक्तत: वचन देते हैं। ‘ग’ पूर्ण राशि देने के लिए विवश किया जाता है। ‘क’ दिवालिया है, किन्तु उसकी आस्तियाँ उसके ऋणों के अर्द्धांग के चुकाने के लिए पर्याप्त हैं। ‘क’ की सम्पदा से 500 रुपये और ‘ख’ से 1,250 रुपये पाने का ‘ग’ हकदार है।
(ग) ‘घ’ को 3,000 रुपये देने का संयुक्तत: वचन ‘क’, ‘ख’ और ‘ग’ ने दिया है। ‘ग’ कुछ भी देने के लिए असमर्थ है, और ‘क’ पूर्ण राशि देने के लिए विवश किया जाता है। ‘ख’ से ‘क’ 1,500 रुपये पाने का हकदार है।
(घ) ‘घ’ को 3,000 रुपये देने का संयुक्त वचन ‘क’, ‘ख’ और ‘ग’ ने दिया है। ‘ग’ के लिए ‘क’ और ‘ख’ प्रतिभू मात्र हैं। ‘ग’ रुपयों के संदाय में असफल रहता है। ‘क’ और ‘ख’ पूर्ण राशि देने के लिए विवश किए जाते हैं। वे उसे ‘ग’ से वसूल करने के हकदार हैं।

Indian Contract Act Section-43 (IC Act Section-43 in English)

Any one of joint promisors may be compelled to perform-

When two or more persons make a joint promise, the promisee may, in the absence of express agreement to the contrary, compel any one or more of such joint promisors to perform the whole of the promise.
Each promisor may compel contribution – Each of two or more joint promisors may compel every other joint promisor to contribute equally with himself to the performance of the promise, unless a contrary intention appears from the contract.
Sharing of loss by default in contribution – If any one of two or more joint promisors makes default in such contribution, the remaining joint promisors must bear the loss arising from such default in equal shares.
Explanation – Nothing in this section shall prevent a surety from recovering, from his principal, payments made by the surety on behalf of the principal, or entitle the principal to recover anything from the surety on account of payment made by the principal.
Illustrations
(a) A, B and C jointly promise to pay D 3,000 rupees. D may compel either A or B or C to pay him 3,000 rupees.
(b) A, B and C jointly promise to pay D the sum of 3,000 rupees. C is compelled to pay the whole. A is insolvent, but his assets are sufficient to pay one-half of his debts. C is entitled to receive 500 rupees from A’s estate, and 1,250 rupees from B.
(c) A, B and C are under a joint promise to pay D 3,000 rupees. C is unable to pay anything, and A is compelled to pay the whole. A is entitled to receive 1,500 rupees from B.
(d) A, B and C are under a joint promise to pay D 3,000 rupees. A and B being only sureties for C. C fails to pay. A and B are compelled to pay the whole sum. They are entitled to recover it from C.

हमारा प्रयास भारतीय संविदा अधिनियम (Indian Contract Act Section) की धारा 43 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।