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भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 54 | Indian Contract Act Section 54

 भारतीय संविदा अधिनियम Indian Contract Act (ICA Section-54) in Hindi के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 54 के अनुसार जबकि कोई संविदा ऐसे व्यतिकारी वचनों से गठित हो जिनमें से एक का पालन या पालन का दावा तब तक नहीं किया जा सके जब तक दूसरे का पालन न कर दिया जाए और अन्तिम-वर्णित वचन का वचनदाता उसका पालन करने में असफल रहे तब ऐसा वचनदाता व्यतिकारी वचन के पालन का दावा नहीं कर सकता और उसे संविदा के दूसरे पक्षकार को, किसी भी हानि के लिए, जो ऐसा दूसरा पक्षकार संविदा के अपालन से उठाए, प्रतिकर देना होगा, जिसे IC Act Section-54 के अन्तर्गत परिभाषित किया गया है।

भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 54 (Indian Contract Act Section-54) का विवरण

भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 54 IC Act Section-54 के अनुसार जबकि कोई संविदा ऐसे व्यतिकारी वचनों से गठित हो जिनमें से एक का पालन या पालन का दावा तब तक नहीं किया जा सके जब तक दूसरे का पालन न कर दिया जाए और अन्तिम-वर्णित वचन का वचनदाता उसका पालन करने में असफल रहे तब ऐसा वचनदाता व्यतिकारी वचन के पालन का दावा नहीं कर सकता और उसे संविदा के दूसरे पक्षकार को, किसी भी हानि के लिए, जो ऐसा दूसरा पक्षकार संविदा के अपालन से उठाए, प्रतिकर देना होगा।

भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 54 (IC Act Section-54 in Hindi)

व्यतिकारी वचनों से गठित संविदा में, उस वचन के व्यतिक्रम का प्रभाव जिसका पालन पहले किया जाना चाहिये-

जबकि कोई संविदा ऐसे व्यतिकारी वचनों से गठित हो जिनमें से एक का पालन या पालन का दावा तब तक नहीं किया जा सके जब तक दूसरे का पालन न कर दिया जाए और अन्तिम-वर्णित वचन का वचनदाता उसका पालन करने में असफल रहे तब ऐसा वचनदाता व्यतिकारी वचन के पालन का दावा नहीं कर सकता और उसे संविदा के दूसरे पक्षकार को, किसी भी हानि के लिए, जो ऐसा दूसरा पक्षकार संविदा के अपालन से उठाए, प्रतिकर देना होगा।
 दृष्टान्त
(क) ‘ख’ के पोत को ‘क’ अपने द्वारा दिये जाने वाले स्थोरा को भरने और कलकत्ते से मॉरीशस तक प्रवहण करने के लिए भाड़े पर लेता है। उसके प्रवहण के लिए ‘ख’ को अमुक ढुलाई मिलनी है। ‘क’ पोत के लिए कोई स्थोरा नहीं देता। ‘ख’ के वचन के पालन का दावा ‘क’ नहीं कर सकता और ‘ख’ को, उस हानि के लिए, जो ‘ख’ उस संविदा के अपालन से उठाए, प्रतिकर देना होगा।
(ख) ‘क’ एक नियत कीमत पर कोई निर्माण कर्म निष्पादित करने के लिए ‘ख’ से संविदा करता है। उस कर्म के लिए आवश्यक पाड़ और काष्ठ ‘ख’ द्वारा दिया जाना है। ‘ख’ पाड़ या काष्ठ देने से इन्कार करता है और कर्म निष्पादित नहीं किया जा सकता। कर्म का निष्पादन करना ‘क’ के लिए आवश्यक नहीं है, और ‘क’ को, किसी भी हानि के लिए जो उस संविदा के अपालन से कारित हो, प्रतिकर देने के लिए ‘ख’ आबद्ध है।
(ग्) ‘ख’ से ‘क’ संविदा करता है कि वह उस वाणिज्या को, जो ऐसे पोत पर है, जो एक मास तक नहीं पहुँच सकता, विनिर्दिष्ट कीमत पर उसे परिदत्त करेगा, और ‘ख’ की तारीख से एक माह के भीतर उस वाणिज्या के लिए संदाय करने का वचनबन्ध करता है। ‘ख’ उस सप्ताह के भीतर संदाय नहीं करता। परिदान करने के ‘क’ के वचन का पालन आवश्यक नहीं है और ‘ख’ को प्रतिकर देना होगा।
(घ) ‘ख’ को ‘क’ वाजिण्या की सौ गांठे बेचने का वचन देता है जिनका परिदान अगले दिन किया जाने वाला है और उनके लिए एक मास के भीतर संदाय करने का वचन ‘क’ को ‘ख’ देता है। ‘क’ अपने वचन के अनुसार परिदान नहीं करता। संदाय करने के ‘क’ के वचन का पालन आवश्यक नहीं है और ‘ख’ को प्रतिकर देना होगा।

Indian Contract Act Section-54 (IC Act Section-54 in English)

 Effect of default as to that promise which should be performed, in contract consisting of reciprocal promises-

When a contract consists of reciprocal promises, such that one of them cannot be performed, or that its performance cannot be claimed till the other has been performed, and the promisor of the promise last mentioned fails to perform it, such promisor cannot claim the performance of the reciprocal promise, and must make compensation to the other party to the contract for any loss which such other party may sustain by the nonperformance of the contract.
Illustrations
(a) A hires B’s ship to take in and convey, from Calcutta to the Mauritius, a cargo to be provided by A, B receiving a certain freight for its conveyance. A does not provide any cargo for the ship. A cannot claim the performance of B’s promise, and must take compensation to B for the loss which B sustains by the non performance of the contract.
(b) A contracts with B to execute certain builder’s work for a fixed price, B supplying the scaffolding and timber necessary for the work. B refuses to furnish any scaffolding or timber, and the work cannot be executed. A need not execute the work, and B is bound to make compensation to A for any loss caused to him by the non-performance of the contract.
(c) A contracts with B to deliver to him, at a specified price, certain merchandise on board a ship which cannot arrive for a month, and B engages to pay for the merchandise within a week from the date of the contract. B does not pay within the week. As the promise to deliver need not be performed, and B must make compensation.
(d) A promises B to sell him one hundred bales of merchandise, to be delivered next day, and B promises A to pay for them within a month. A does not deliver according to his promise. B’s promise to pay need not be performed, and A must make compensation.

हमारा प्रयास भारतीय संविदा अधिनियम (Indian Contract Act Section) की धारा 54 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 53 | Indian Contract Act Section 53

 भारतीय संविदा अधिनियम Indian Contract Act (ICA Section-53) in Hindi के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 53 के अनुसार जबकि किसी संविदा में व्यतिकारी वचन अन्तर्विष्ट हो और संविदा का एक पक्षकार दूसरे को उसके वचन का पालन करने से निवारित करे तब वह संविदा इस प्रकार निवारित किए गए पक्षकार के विकल्प पर शून्यकरणीय हो जाती है, और वह किसी भी हानि के लिए, जो संविदा के अपालन के परिणामस्वरूप उसे उठानी पड़े; दूसरे पक्षकार से प्रतिकर पाने का हकदार है, जिसे IC Act Section-53 के अन्तर्गत परिभाषित किया गया है।

भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 53 (Indian Contract Act Section-53) का विवरण

भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 53 IC Act Section-53 के अनुसार जबकि किसी संविदा में व्यतिकारी वचन अन्तर्विष्ट हो और संविदा का एक पक्षकार दूसरे को उसके वचन का पालन करने से निवारित करे तब वह संविदा इस प्रकार निवारित किए गए पक्षकार के विकल्प पर शून्यकरणीय हो जाती है, और वह किसी भी हानि के लिए, जो संविदा के अपालन के परिणामस्वरूप उसे उठानी पड़े; दूसरे पक्षकार से प्रतिकर पाने का हकदार है।

भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 53 (IC Act Section-53 in Hindi)

जिस घटना के घटित होने पर संविदा प्रभावशील होनी है उसका निवारण करने वाले पक्षकार का दायित्व-

जबकि किसी संविदा में व्यतिकारी वचन अन्तर्विष्ट हो और संविदा का एक पक्षकार दूसरे को उसके वचन का पालन करने से निवारित करे तब वह संविदा इस प्रकार निवारित किए गए पक्षकार के विकल्प पर शून्यकरणीय हो जाती है, और वह किसी भी हानि के लिए, जो संविदा के अपालन के परिणामस्वरूप उसे उठानी पड़े; दूसरे पक्षकार से प्रतिकर पाने का हकदार है।
दृष्टान्त
(क्) ‘क’ और ‘ख’ संविदा करते हैं कि ‘ख’ एक हजार रुपये के बदले ‘क’ के लिए अमुक काम निष्पादित करेगा। ‘ख’ उस काम को तदनुसार निष्पादित करने के लिए तैयार और रजामन्द है, किन्तु ‘क’ उसे वैसा करने से निवारित करता है। संविदा ‘ख’ के विकल्प पर शून्यकरणीय है, और यदि वह उसे विखंडित करने का निर्वाचन करे तो वह किसी भी हानि के लिए, जो उसने उसके अपालन से उठाई हो, ‘क’ से प्रतिकर वसूल करने का हकदार है।

Indian Contract Act Section-53 (IC Act Section-53 in English)

Liability of party preventing event on which the contract is to take effect-

When a contract contains reciprocal promises, and one party to the contract prevents the other from performing his promise, the contract becomes voidable at the option of the party so prevented: and he is entitled to compensation from the other party for any loss which he may sustain in consequence of the non-performance of the contract.
Illustration
A and B contract that B shall execute certain work for A for a thousand rupees. B is ready and willing to execute the work accordingly, but A prevents him from doing so. The contract is voidable at the option of B; and, if he elects to rescind it, he is entitled to recover from A compensation for any loss which he has incurred by its non-performance.

हमारा प्रयास भारतीय संविदा अधिनियम (Indian Contract Act Section) की धारा 53 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 52 | Indian Contract Act Section 52

 भारतीय संविदा अधिनियम Indian Contract Act (ICA Section-52) in Hindi के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 52 के अनुसार जहाँ कि वह क्रम, जिससे व्यतिकारी वचनो का पालन किया जाना है, संविदा द्वारा अभिव्यक्तत: नियत हो वहाँ उनका पालन उसी क्रम से किया जाएगा और जहाँ कि वह क्रम संविदा द्वारा अभिव्यक्ततः नियत न हो वहाँ उनका पालन उस क्रम से किया जाएगा जो उस संव्यवहार की प्रकृति द्वारा अपेक्षित हो, जिसे IC Act Section-52 के अन्तर्गत परिभाषित किया गया है।

भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 52 (Indian Contract Act Section-52) का विवरण

भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 52 IC Act Section-52 के अनुसार जहाँ कि वह क्रम, जिससे व्यतिकारी वचनो का पालन किया जाना है, संविदा द्वारा अभिव्यक्तत: नियत हो वहाँ उनका पालन उसी क्रम से किया जाएगा और जहाँ कि वह क्रम संविदा द्वारा अभिव्यक्ततः नियत न हो वहाँ उनका पालन उस क्रम से किया जाएगा जो उस संव्यवहार की प्रकृति द्वारा अपेक्षित हो।

भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 52 (IC Act Section-52 in Hindi)

व्यतिकारी वचनों के पालन का क्रम-

जहाँ कि वह क्रम, जिससे व्यतिकारी वचनो का पालन किया जाना है, संविदा द्वारा अभिव्यक्तत: नियत हो वहाँ उनका पालन उसी क्रम से किया जाएगा और जहाँ कि वह क्रम संविदा द्वारा अभिव्यक्ततः नियत न हो वहाँ उनका पालन उस क्रम से किया जाएगा जो उस संव्यवहार की प्रकृति द्वारा अपेक्षित हो।
दृष्टान्तं
(क) ‘क’ और ‘ख’ संविदा करते हैं कि ‘क’ नियत कीमत पर ‘ख’ के लिए एक गृह बनाएगा। ‘क’ को गृह बनाने के वचन का पालन ‘ख’ द्वारा उसके लिए संदाय के वचन के पालन से पहले करना होगा।
(ख) ‘क’ और ‘ख’ संविदा करते हैं कि ‘क’ अपना व्यापार-स्टॉक एक नियत कीमत पर ‘क’ को दे देगा; और ‘ख’ धन के संदाय के लिए प्रतिभूति देने का वचन देता है। ‘क’ के वचन का पालन किया जाना तब तक आवश्यक नहीं है जब तक प्रतिभूति न दे दी जाए, क्योंकि इस संव्यवहार की प्रकृति यह अपेक्षा करती है कि अपने व्यापार – स्टॉक का परिदान करने से पूर्व ‘क’ को प्रतिभूति मिलनी चाहिये।

Indian Contract Act Section-52 (IC Act Section-52 in English)

Order of performance of reciprocal promises-

Where the order in which reciprocal promises are to be performed is expressly fixed by the contract, they shall be performed in that order; and where the order is not expressly fixed by the contract, they shall be performed in that order which the nature of the transaction requires.
Illustrations
(a) A and B contract that A shall build a house for B at a fixed price. As promise to build the house must be performed before B’s promise to pay for it.
(b) A and B contract that A shall make over his stock-in-trade to B at a fixed price, and B promise to give security for the payment of the money. A’s promise need not be performed until the security is given, for the nature of transaction requires that A should have security before he delivers up his stock.

हमारा प्रयास भारतीय संविदा अधिनियम (Indian Contract Act Section) की धारा 52 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 51 | Indian Contract Act Section 51

 भारतीय संविदा अधिनियम Indian Contract Act (ICA Section-51) in Hindi के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 51 के अनुसार जबकि कोई संविदा साथ-साथ पालन किए जाने वाले व्यतिकारी वचनों से गठित हो तब किसी भी वचनदाता के लिए अपने वचन का पालन करना आवश्यक नहीं है जब तक कि वचनग्रहीता अपने व्यतिकारी वचन का पालन करने के लिए तैयार और रजामन्द न हो, जिसे IC Act Section-51 के अन्तर्गत परिभाषित किया गया है।

भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 51 (Indian Contract Act Section-51) का विवरण

भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 51 IC Act Section-51 के अनुसार जबकि कोई संविदा साथ-साथ पालन किए जाने वाले व्यतिकारी वचनों से गठित हो तब किसी भी वचनदाता के लिए अपने वचन का पालन करना आवश्यक नहीं है जब तक कि वचनग्रहीता अपने व्यतिकारी वचन का पालन करने के लिए तैयार और रजामन्द न हो।

भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 51 (IC Act Section-51 in Hindi)

वचनदाता पालन करने के लिए आबद्ध नहीं है जब तक कि व्यतिकारी वचनग्रहीता पालन के लिए तैयार और रजामन्द न हो-

जबकि कोई संविदा साथ-साथ पालन किए जाने वाले व्यतिकारी वचनों से गठित हो तब किसी भी वचनदाता के लिए अपने वचन का पालन करना आवश्यक नहीं है जब तक कि वचनग्रहीता अपने व्यतिकारी वचन का पालन करने के लिए तैयार और रजामन्द न हो।
दृष्टान्त
(क) ‘क’ और ‘ख’ संविदा करते हैं कि ‘ख’ को ‘क’ माल परिदत्त करेगा जिसके लिए संदाय माल के परिदान पर ‘ख’ द्वारा किया जाएगा। माल का परिदान करना ‘क’ के लिए आवश्यक नहीं है जब तक कि ‘ख’ परिदान पर माल के लिए संदाय करने को तैयार और रजामन्द न हो। |
माल के लिए संदाय करना ‘ख’ के लिए आवश्यक नहीं है जब तक कि संदाय पर माल को परिदत्त करने के लिए ‘क’ तैयार और रजामन्द न हो।
(ख) ‘क’ और ‘ख’ संविदा करते हैं कि ‘क’ किस्तों में दी जाने वाली कीमत पर ‘ख’ को माल परिदत्त करेगा और पहली किस्त परिदान पर दी जानी है। माल का परिदान करना ‘क’ के लिए आवश्यक नहीं है जब तक कि ‘ख’ परिदान पर पहली किस्त देने के लिए तैयार और रजामन्द न हो।
पहली किस्त देना ‘ख’ के लिए आवश्यक नहीं है जब तक कि वह पहली किस्त में संदाय पर माल परिदत्त करने के लिए तैयार और रजामन्द न हो।

Indian Contract Act Section-51 (IC Act Section-51 in English)

Promisor not bound to perform, unless reciprocal promisee ready and willing to perform-

When a contract consists of reciprocal promises to be simultaneously performed, no promisor need perform his promise unless the promisee is ready and willing to perform his reciprocal promise. 
Illustrations
(a) A and B contract that A shall deliver goods to B to be paid for by B on delivery. A need not deliver the goods, unless B is ready and willing to pay for the goods on delivery.
B need not pay for the goods, unless A is ready and willing to deliver them on payment
(b) A and B contract that A shall deliver goods to B at a price to be paid by installments, the first installment to be paid on delivery. A need not deliver, unless B is ready and willing to pay the first installment on delivery.
B need not pay the first installment, unless A is ready and willing to deliver the goods on payment of the first installment.

हमारा प्रयास भारतीय संविदा अधिनियम (Indian Contract Act Section) की धारा 51 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 50 | Indian Contract Act Section 50

 भारतीय संविदा अधिनियम Indian Contract Act (ICA Section-50) in Hindi के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 50 के अनुसार किसी भी वचन का पालन उस प्रकार से और उस समय पर किया जा सकेगा, जिसे वचनग्रहीता विहित या मंजूर करे, जिसे IC Act Section-50 के अन्तर्गत परिभाषित किया गया है।

भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 50 (Indian Contract Act Section-50) का विवरण

भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 50 IC Act Section-50 के अनुसार किसी भी वचन का पालन उस प्रकार से और उस समय पर किया जा सकेगा, जिसे वचनग्रहीता विहित या मंजूर करे।

भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 50 (IC Act Section-50 in Hindi)

वचनग्रहीता द्वारा विहित या मंजूर किए गए प्रकार से या समय पर पालन-

किसी भी वचन का पालन उस प्रकार से और उस समय पर किया जा सकेगा, जिसे वचनग्रहीता विहित या मंजूर करे ।
दृष्टान्त
(क) ‘क’ का ‘ख’ 2,000 रुपये का देनदार है। ‘क’ चाहता है कि ‘ख’ उस रकम को एक बैंककार ‘ग’ के यहाँ ‘क’ के खाते में जमा करा दे। ‘ख’ का भी ‘ग’ के यहाँ खाता है और वह यह आदेश देता है कि वह रकम उसके खाते में से अन्तरित करके ‘ख’ के नाम जमा कर दी जाए और ‘ग’ ऐसा कर देता है। तत्पश्चात् और उस अन्तरण का ज्ञान ‘क’ को होने से पूर्व ‘ग’ का कारबार बैठ जाता है। ‘ख’ का संदाय ठीक है
(ख) ‘क’ और ‘ख’ परस्पर ऋणी हैं। ‘क’ और ‘ख’ एक मद को दूसरी में से मुजरा करके लेखा का परिनिर्धारण कर | लेते हैं और ऐसे परिनिर्धारण पर जो धन उससे शोध्य बाकी निकलता है उसे ‘क’ को ‘ख’ देता है। यह ‘क’ और ‘ख’ द्वारा एक-दूसरे को देय राशियों का संदाय क्रमशः एक-दूसरे को हो जाता है।
(ग) ‘क’ का ‘ख’ 2,000 रुपये का देनदार है। उस ऋण में कमी करने के लिए ‘ख’ का कुछ माल ‘क’ प्रतिग्रहित करता है। माल के परिदान से भागित संदाय हो जाता है। 
(घ) ‘क’ यह चाहता है कि ‘ख’, जो उसे 100 रुपये का देनदार है, उसे डाक द्वारा 100 रुपये का नोट भेजे। जैसे ही ‘ख’ उस नोट सहित चिट्ठी को, जिस पर ‘क’ का पता सम्यक् रूप से लिखा है, डाक में डालता है वैसे ही ऋण का सम्मोचन हो जाता है।

Indian Contract Act Section-50 (IC Act Section-50 in English)

Performance in manner or at time prescribed or sanctioned by promisee-

The performance of any promise may be made in any manner, or at any time which the promisee prescribes or sanctions.
Illustrations
(a) Bowes A 2,000 rupees. A desires B to pay the amount to A’s account with C, a banker. B, who also banks with C, orders the amount to be transferred from his account to A’s credit, and this is done by C. Afterwards, and before A knows of the transfer, C fails. There has been a good payment by B.
(b) A and B are mutually indebted. A and B settle an account by setting off one item against another, and B pays A the balance found to be due from him upon such settlement. This amounts to a payment by A and B, respectively, of the sums which they owed to each other.
(c) A owes B 2,000 rupees. B accepts some of A’s goods in reduction of the debt. The delivery of the goods operates as a part payment,
(d) A desires B, who owes him Rs.100, to send him a note for Rs.100 by post. The debt is discharged as soon as B puts into the post a letter containing the note duly addressed to A

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भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 49 | Indian Contract Act Section 49

 भारतीय संविदा अधिनियम Indian Contract Act (ICA Section-49) in Hindi के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 49 के अनुसार जबकि किसी वचन का पालन वचनग्रहीता के आवेदन के बिना किया जाना हो और उसके पालन के लिए कोई स्थान नियत न हो तब वचनदाता का कर्तव्य है कि वह वचन के पालन के लिए युक्तियुक्त स्थान नियत करने के लिए वचनग्रहीता से आवेदन करे और ऐसे स्थान में उसका पालन करे, जिसे IC Act Section-49 के अन्तर्गत परिभाषित किया गया है।

भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 49 (Indian Contract Act Section-49) का विवरण

भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 49 IC Act Section-49 के अनुसार जबकि किसी वचन का पालन वचनग्रहीता के आवेदन के बिना किया जाना हो और उसके पालन के लिए कोई स्थान नियत न हो तब वचनदाता का कर्तव्य है कि वह वचन के पालन के लिए युक्तियुक्त स्थान नियत करने के लिए वचनग्रहीता से आवेदन करे और ऐसे स्थान में उसका पालन करे।

भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 49 (IC Act Section-49 in Hindi)

वचन के पालन के लिए स्थान, जहाँ कि पालन के लिए, आवेदन न किया जाना हो और कोई स्थान नियत न हो-

जबकि किसी वचन का पालन वचनग्रहीता के आवेदन के बिना किया जाना हो और उसके पालन के लिए कोई स्थान नियत न हो तब वचनदाता का कर्तव्य है कि वह वचन के पालन के लिए युक्तियुक्त स्थान नियत करने के लिए वचनग्रहीता से आवेदन करे और ऐसे स्थान में उसका पालन करे। |
दृष्टान्त
‘क’ एक हजार मन पटसन ‘ख’ को एक नियत दिन परिदत्त करने का वचन देता है। ‘क’ को ‘ख’ से आवेदन करना होगा कि वह उसे लेने के लिए युक्तियुक्त स्थान नियत करे और ‘क’ को ऐसे स्थान पर पटसन परिदत्त करना होगा।

Indian Contract Act Section-49 (IC Act Section-49 in English)

Place for the performance of promise, where no application to be made and no place fixed for performance-

When a promise is to be performed without application by the promisee, and no place is fixed for the performance of it, it is the duty of the promisor to apply to the promisee to appoint a reasonable place for the performance of the promise, and to perform it at such a place.
Illustration
A undertakes to deliver a thousand maunds of jute to B on a fixed day. A must apply to B to appoint a reasonable place for the purpose of receiving it, and must deliver it to him at such place.

हमारा प्रयास भारतीय संविदा अधिनियम (Indian Contract Act Section) की धारा 49 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।