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भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 36 | Indian Contract Act Section 36

 भारतीय संविदा अधिनियम Indian Contract Act (ICA Section-36) in Hindi के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 36 के अनुसार समाश्रित करार, जो किसी असम्भव घटना के घटित होने पर ही कोई बात करने या न करने के लिए हों, शून्य हैं, चाहे घटना की असम्भवता करार के पक्षकारों को उस समय ज्ञात थी या नहीं जब करार किया गया था, जिसे IC Act Section-36 के अन्तर्गत परिभाषित किया गया है।

भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 36 (Indian Contract Act Section-36) का विवरण

भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 36 IC Act Section-36 के अनुसार समाश्रित करार, जो किसी असम्भव घटना के घटित होने पर ही कोई बात करने या न करने के लिए हों, शून्य हैं, चाहे घटना की असम्भवता करार के पक्षकारों को उस समय ज्ञात थी या नहीं जब करार किया गया था।

भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 36 (IC Act Section-36 in Hindi)

असम्भव घटनाओं पर समाश्रित करार शून्य हैं-

समाश्रित करार, जो किसी असम्भव घटना के घटित होने पर ही कोई बात करने या न करने के लिए हों, शून्य हैं, चाहे घटना की असम्भवता करार के पक्षकारों को उस समय ज्ञात थी या नहीं जब करार किया गया था।
दृष्टान्त
(क) क’ करार करता है कि यदि दो सरल रेखाएँ किसी स्थान को घेर लें तो वह ‘ख’ को 1,000 रुपये देगा। करार शून्य है।
(ख) ‘क’ करार करता है कि यदि ‘क’ की पुत्री ‘ग’ से ‘ख’ विवाह कर ले तो वह ‘ख’ को 1,000 रुपये देगा। करार के समय ‘ग’ मर चुकी थी। करार शून्य है।

Indian Contract Act Section-36 (IC Act Section-36 in English)

Agreements contingent on impossible event void-

Contingent agreements to do or not to do anything, if an impossible event happens, are void, whether the impossibility of the event is known or not to the parties to the agreement at the time when it is made.
Illustrations
(a) A agrees to pay B 1,000 rupees if two straight lines should enclose a space. The agreement is void.
(b) A agrees to pay B 1,000 rupees if B will marry A’s daughter C. C was dead at the time of the agreement. The agreement is void.

हमारा प्रयास भारतीय संविदा अधिनियम (Indian Contract Act Section) की धारा 36 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 35 | Indian Contract Act Section 35

 भारतीय संविदा अधिनियम Indian Contract Act (ICA Section-35) in Hindi के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 35 के अनुसार समाश्रित संविदाएँ, जो किसी विनिर्दिष्ट अनिश्चित घटना के किसी नियत समय के भीतर घटित होने पर किसी बात को करने या न करने के लिए हों, शून्य हो जाती हैं, यदि उस नियत समय के अवसान पर ऐसी घटना न घटित हुई हो या यदि उस नियत समय से पूर्व ऐसी घटना असम्भव हो जाए, जिसे IC Act Section-35 के अन्तर्गत परिभाषित किया गया है।

भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 35 (Indian Contract Act Section-35) का विवरण

भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 35 IC Act Section-35 के अनुसार समाश्रित संविदाएँ, जो किसी विनिर्दिष्ट अनिश्चित घटना के किसी नियत समय के भीतर घटित होने पर किसी बात को करने या न करने के लिए हों, शून्य हो जाती हैं, यदि उस नियत समय के अवसान पर ऐसी घटना न घटित हुई हो या यदि उस नियत समय से पूर्व ऐसी घटना असम्भव हो जाए।

भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 35 (IC Act Section-35 in Hindi)

संविदाएँ जो नियत समय के भीतर विनिर्दिष्ट घटना के घटित होने पर समाश्रित हों, कब शून्य हो जाती है-

समाश्रित संविदाएँ, जो किसी विनिर्दिष्ट अनिश्चित घटना के किसी नियत समय के भीतर घटित होने पर किसी बात को करने या न करने के लिए हों, शून्य हो जाती हैं, यदि उस नियत समय के अवसान पर ऐसी घटना न घटित हुई हो या यदि उस नियत समय से पूर्व ऐसी घटना असम्भव हो जाए।
विनिर्दिष्ट घटना के नियत समय के भीतर घटित न होने पर समाश्रित संविदाओं का प्रवर्तन कब कराया जा सकेगा — समाश्रित संविदाएँ, जो किसी विनिर्दिष्ट अनिश्चित घटना के किसी नियत समय के भीतर घटित न होने पर किसी बात को करने या न करने के लिए हों, विधि द्वारा तब प्रवर्तित कराई जा सकेंगी जब उस नियत समय का अवसान हो गया हो और ऐसी घटना घटित न हुई हो या उस नियत समय के अवसान से पूर्व यह निश्चित हो जाए कि ऐसी घटना घटित नहीं होगी।
दृष्टान्त
 (क) ‘क’ वचन देता है कि यदि अमुक पोत एक वर्ष के भीतर वापस आ जाए तो वह ‘ख’ को एक धनराशि देगा। यदि पोत उस वर्ष के भीतर वापस आ जाए तो संविदा का प्रवर्तन कराया जा सकेगा और यदि पोत उस वर्ष के भीतर जल जाए तो संविदा शून्य हो जाएगी।
(ख) ‘क’ वचन देता है कि अमुक पोत एक वर्ष के भीतर न लौटे तो वह ‘ख’ को एक धनराशि देगा। यदि पोत उस वर्ष के भीतर न लौटे या उस वर्ष के भीतर जल जाए तो संविदा का प्रवर्तन कराया जा सकेगा।

Indian Contract Act Section-35 (IC Act Section-35 in English)

When contracts become void, which are contingent on happening of specified event within fixed time-

Contingent contracts to do or not to do anything, if a specified uncertain event happens within a fixed time, become void if, at the expiration of the time fixed, such event has not happened, or if, before the time fixed, such event becomes impossible.
When contracts may be enforced, which are contingent on specified event not happening within fixed time-Contingent contracts to do or not to do anything, if a specified uncertain event does not happen within a fixed time, may be enforced by law when the time fixed has expired, and such event has not happened, or before the time fixed has expired, if it becomes certain that such event will not happen.
Illustrations
(a) A promises to pay B a sum of money if a certain ship returns within a year. The contract may be enforced if the ship returns within the year; and becomes void if the ship is burnt within the year.
(b) A promises to pay B a sum of money if a certain ship does not return within a year. The contract may be enforced if the ship does not return within the year.

हमारा प्रयास भारतीय संविदा अधिनियम (Indian Contract Act Section) की धारा 35 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 34 | Indian Contract Act Section 34

 भारतीय संविदा अधिनियम Indian Contract Act (ICA Section-34) in Hindi के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 34 के अनुसार यदि वह भावी घटना, जिस पर कोई संविदा समाश्रित है, इस प्रकार हो जिस प्रकार से कोई व्यक्ति किसी अविनिर्दिष्ट समय पर कार्य करेगा, तो वह घटना असम्भव हुई तब समझी जाएगी जब ऐसा व्यक्ति कोई ऐसी बात करे जो किसी भी परिमित समय के भीतर, या उत्तरदायी आकस्मिकताओं के बिना उस व्यक्ति द्वारा वैसा किया जाना असम्भव कर दे, जिसे IC Act Section-34 के अन्तर्गत परिभाषित किया गया है।

भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 34 (Indian Contract Act Section-34) का विवरण

भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 30 IC Act Section-34 के अनुसार यदि वह भावी घटना, जिस पर कोई संविदा समाश्रित है, इस प्रकार हो जिस प्रकार से कोई व्यक्ति किसी अविनिर्दिष्ट समय पर कार्य करेगा, तो वह घटना असम्भव हुई तब समझी जाएगी जब ऐसा व्यक्ति कोई ऐसी बात करे जो किसी भी परिमित समय के भीतर, या उत्तरदायी आकस्मिकताओं के बिना उस व्यक्ति द्वारा वैसा किया जाना असम्भव कर दे।

भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 34 (IC Act Section-34 in Hindi)

जिस घटना पर संविदा समाश्रित है, यदि वह किसी जीवित व्यक्ति का भावी आचरण हो तो वह घटना कब असंभव समझी जाएगी-

यदि वह भावी घटना, जिस पर कोई संविदा समाश्रित है, इस प्रकार हो जिस प्रकार से कोई व्यक्ति किसी अविनिर्दिष्ट समय पर कार्य करेगा, तो वह घटना असम्भव हुई तब समझी जाएगी जब ऐसा व्यक्ति कोई ऐसी बात करे जो किसी भी परिमित समय के भीतर, या उत्तरदायी आकस्मिकताओं के बिना उस व्यक्ति द्वारा वैसा किया जाना असम्भव कर दे।
दृष्टान्त
 ‘क’ करार करता है कि यदि ‘ग’ से ‘ख’ विवाह करे तो वह ‘ख’ को एक धनराशि देगा। ‘घ’ से ‘ग विवाह कर लेती है। अब ‘ग’ से ‘ख’ का विवाह असम्भव समझा जाना चाहिए यद्यपि यह सम्भव है कि ‘घ’ की मृत्यु हो जाए और तत्पश्चात् ‘ख’ से ‘ग विवाह कर ले।

Indian Contract Act Section-34 (IC Act Section-34 in English)

When event on which contract is contingent to be deemed impossible, if it is the future conduct of a living person-

If the future event on which a contract is contingent is the way in which a person will act at an unspecified time, the event shall be considered to become impossible when such person does anything which renders it impossible that he should so act within any definite time, or otherwise than under further contingencies.
Illustration
A agrees to pay B a sum of money if B marries C, C marries D. The marriage of B to C must now be considered impossible, although it is possible that D may die and that C may afterwards marry B.

हमारा प्रयास भारतीय संविदा अधिनियम (Indian Contract Act Section) की धारा 34 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 33 | Indian Contract Act Section 33

 भारतीय संविदा अधिनियम Indian Contract Act (ICA Section-33) in Hindi के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 33 के अनुसार उन समाश्रित संविदाओं का प्रवर्तन, जो किसी अनिश्चित भावी घटना के घटित न होने पर किसी बात को करने या न करने के लिए हों, तब कराया जा सकता है जब उस घटना का घटित होना असम्भव हो जाए उससे पूर्व नहीं, जिसे IC Act Section-33 के अन्तर्गत परिभाषित किया गया है।

भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 33 (Indian Contract Act Section-33) का विवरण

भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 33 IC Act Section-33 के अनुसार उन समाश्रित संविदाओं का प्रवर्तन, जो किसी अनिश्चित भावी घटना के घटित न होने पर किसी बात को करने या न करने के लिए हों, तब कराया जा सकता है जब उस घटना का घटित होना असम्भव हो जाए उससे पूर्व नहीं।

भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 33 (IC Act Section-33 in Hindi)

उन संविदाओं का प्रवर्तन जो किसी घटना के घटित न होने पर समाश्रित हों-

उन समाश्रित संविदाओं का प्रवर्तन, जो किसी अनिश्चित भावी घटना के घटित न होने पर किसी बात को करने या न करने के लिए हों, तब कराया जा सकता है जब उस घटना का घटित होना असम्भव हो जाए उससे पूर्व नहीं।
दृष्टान्त
‘क’ करार करता है कि यदि अमुक पोत वापस न आए तो वह ‘ख’ को एक धनराशि देगा। वह पोत डूब जाता है। संविदा का प्रवर्तन पोत के डूब जाने पर कराया जा सकता है।

Indian Contract Act Section-33 (IC Act Section-33 in English)

Enforcement of contracts contingent on an event not happening-

Contingent contracts to do or not to do anything if an uncertain future event does not happen, can be enforced when the happening of that event becomes impossible, and not before.
Illustration
A agrees to pay B a sum of money if a certain ship does not return. The ship is sunk. The contract can be enforced when the ship sinks.

हमारा प्रयास भारतीय संविदा अधिनियम (Indian Contract Act Section) की धारा 33 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 32 | Indian Contract Act Section 32

 भारतीय संविदा अधिनियम Indian Contract Act (ICA Section-32) in Hindi के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 32 के अनुसार “समाश्रित संविदा’ वह संविदा है जो ऐसी संविदा में साम्पार्श्विक किसी घटना के घटित होने या न होने पर ही किसी बात को करने या न करने के लिए हो, जिसे IC Act Section-32 के अन्तर्गत परिभाषित किया गया है।

भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 32 (Indian Contract Act Section-32) का विवरण

भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 32 IC Act Section-32 के अनुसार “समाश्रित संविदा’ वह संविदा है जो ऐसी संविदा में साम्पार्श्विक किसी घटना के घटित होने या न होने पर ही किसी बात को करने या न करने के लिए हो।

भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 32 (IC Act Section-32 in Hindi)

ऐसी संविदाओं का प्रवर्तन, जो किसी घटना के घटित होने पर समाश्रित हों-

उन समाश्रित संविदाओं का प्रवर्तन, जो किसी अनिश्चित भावी घटना के घटित होने पर किसी बात को करने या न करने के लिए हो, विधि द्वारा नहीं कराया जा सकता, यदि और जब तक वह घटना घटित न हो गई हो।
यदि वह घटना असम्भव हो जाए तो ऐसी संविदाएँ शून्य हो जाती हैं।
 दृष्टान्त
(क) ‘ख’ से ‘क’ संविदा करता है कि यदि ‘ग’ के मरने के पश्चात् ‘क’ जीवित रहा तो वह ‘ख’ का घोड़ा खरीद लेगा। इस संविदा का प्रवर्तन विधि द्वारा नहीं कराया जा सकता यदि और जब तक ‘क’ के जीवनकाल में ‘ग’ मर न जाए।
(ख) ‘ख’ से ‘क’ संविदा करता है कि यदि ‘ग’ ने जिससे घोड़ा बेचने की प्रस्थापना की गई है, उसे खरीदने से इन्कार कर दिया तो वह ‘ख’ को वह घोड़ा विनिर्दिष्ट कीमत पर बेच देगा; इस संविदा का प्रवर्तन विधि द्वारा नहीं कराया जा सकता यदि और जब तक ‘ग’ घोड़े को खरीदने से इन्कार न कर दे।
(ग) ‘क’ यह संविदा करता है कि जब ‘ग’ से ‘ख’ विवाह कर लेगा तो ‘ख’ को ‘क’ एक नियत धनराशि देगा। ‘ख’ से विवाह हुए बिना ‘ग’ मर जाती है। संविदा शून्य हो जाती है। 

Indian Contract Act Section-32 (IC Act Section-32 in English)

Enforcement of contracts contingent on an event happening-

Contingent contracts to do or not to do anything if an uncertain future event happens, cannot be enforced by law unless and until that event has happened. If the event becomes impossible, such contracts become void.
Illustrations
(a) A makes a contract with B to buy B’s horse if A survives C. This contract cannot be enforced by law unless and until C dies in A’s lifetime.
(b) A makes a contract with B to sell a horse to B at a specified price, if C, to whom the horse has been offered, refuses to buy him. The contract cannot be enforced by law unless and until C refuses to buy the horse.
(c) A contracts to pay B a sum of money when B marries C. C dies without being married to B. The contract becomes void.

हमारा प्रयास भारतीय संविदा अधिनियम (Indian Contract Act Section) की धारा 32 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 31 | Indian Contract Act Section 31

 भारतीय संविदा अधिनियम Indian Contract Act (ICA Section-31) in Hindi के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 31 के अनुसार “समाश्रित संविदा’ वह संविदा है जो ऐसी संविदा में साम्पार्श्विक किसी घटना के घटित होने या न होने पर ही किसी बात को करने या न करने के लिए हो, जिसे IC Act Section-31 के अन्तर्गत परिभाषित किया गया है।

भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 31 (Indian Contract Act Section-31) का विवरण

भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 30 IC Act Section-31 के अनुसार “समाश्रित संविदा’ वह संविदा है जो ऐसी संविदा में साम्पार्श्विक किसी घटना के घटित होने या न होने पर ही किसी बात को करने या न करने के लिए हो।

भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 31 (IC Act Section-31 in Hindi)

“समाश्रित संविदा” की परिभाषा-

“समाश्रित संविदा’ वह संविदा है जो ऐसी संविदा में साम्पार्श्विक किसी घटना के घटित होने या न होने पर ही किसी बात को करने या न करने के लिए हो।
 दृष्टान्त
‘ख’ से ‘क’ संविदा करता है कि यदि ‘ख’ का गृह जल जाए तो वह ‘ख’ को 10,000 रुपये देगा। यह समाश्रित संविदा है।

Indian Contract Act Section-31 (IC Act Section-31 in English)

“Contingent contract” defined-

A “contingent contract” is a contract to do or not to do something, if some event, collateral to such contract, does or does not happen.
illustration
A contracts to pay to B Rs.10,000 if B’s house is burnt. This is a contingent contract.

हमारा प्रयास भारतीय संविदा अधिनियम (Indian Contract Act Section) की धारा 31 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।