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EPF क्या है और किन-किन मामलों मे लागू होती है आइए जाते है पूर्ण जानकारी।

EPF को हिन्दी मे कर्मचारी भविष्य निधि के नाम से और अंग्रेजी मे Employees’ Provident Fund के नाम से जाना जाता है। EPF केन्द्र सरकार व्दारा संचालित एक भविष्य सेविंग्स स्कीम है, जिसे कर्मचारी रिटायरमेंट सेविंग स्कीम भी कह सकते है, जो नौकरी पेशा कर्मचारियों के लिए होती है। इसे कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO), जो कि श्रम और रोजगार मंत्रालय के अंतर्गत संचालित होता है। इस योजना में कर्मचारी और नियोक्ता दोनों अपने-अपने हिस्से के रूप में मासिक वेतन का 12% का योगदान करते हैं, जो कर्मचारी के भविष्य के लिए जमा होता है।

EPF क्या है

ईपीएक किसी प्राइवेट/कंपनी/संस्था या अन्य जिसमें 20 या उससे ज्यादा कर्मचारी हैं, तो आपके लिए EPF में रजिस्टर्ड होना अनिवार्य है। 20 या उससे कम कर्मचारी होने पर स्वैच्छिक आधार पर भी रजिस्टर्ड किया जा सकता है। यह योजना आपके लंबे समय के वित्तीय भविष्य को सुरक्षित करने का एक महत्वपूर्ण साधन है। EPFO के तहत काम करने वाले कर्मचारी इस योजना का लाभ प्राप्त करते हैं, और उन्हें एक यूनिवर्सल अकाउंट नंबर (UAN) दिया जाता है, जिससे वे अपने PF खातों को मैनेज कर सकते हैं।

EPF से मिलने वाले लाभों में रिटायरमेंट के समय पेंशन, बीमा और अन्य निकासी शामिल हैं। इसके अलावा, EPF में जमा राशि पर हर वित्तीय वर्ष की ब्याज दर लागू होती है, जो फिलहाल लगभग 8.25% है। EPF में जमा राशि का उपयोग कर्मचारी को आर्थिक सुरक्षा प्रदान करता है जब वह रिटायर हो जाता है या अन्य आपातकालीन परिस्थितियों में कर सकता है।

EPF के नियम क्या हैं?

ईपीएफ एक सरकारी प्रावधान है जो नौकरीपेशा कर्मचारियों को भविष्य के लिए बचत और वित्तीय सुरक्षा प्रदान करता है। यह योजना कर्मचारियों और नियोक्ता दोनों की नियमित मासिक बचत के जरिए उन्हें रिटायरमेंट के बाद आर्थिक मदद् देती है।

ईपीएफ में कर्मचारी और नियोक्ता दोनों हर माह कर्मचारी के मूल वेतन का एक निश्चित प्रतिशत (आमतौर पर 12%) 3.67% EPF और 8.33% EPS (पेंशन) के रूप मे योगदान देते हैं। यह योजना कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) के तहत श्रम एवं रोजगार मंत्रालय के अधीन संचालित होता है।

कर्मचारी का सारा योगदान भविष्य निधि खाते में जाता है जबकि कंपनी/संस्था/अन्य का योगदान दो हिस्सों में बंटता है — एक हिस्सा पेंशन फंड में और दूसरा ईपीएफ अकाउंट में

नौकरी के दौरान मेडिकल इमरजेंसी, घर खरीदना/बनवाना, शादी, उच्च शिक्षा, बेरोजगारी या रिटायरमेंट जैसे कारणों से आंशिक राशि निकाली जा सकती है। 54 वर्ष या उससे अधिक की उम्र या रिटायरमेंट के एक वर्ष पहले खाते की 90% तक राशि निकाली जा सकती है।

ईपीएफ के क्या फायदे है?

ईपीएफ (कर्मचारी भविष्य निधि) के कई प्रमुख फायदे हैं, जो नौकरीपेशा कर्मचारियों के आर्थिक भविष्य को सुरक्षित बनाते हैं। 

  • EPF के खास फायदे रिटायरमेंट के बाद सुरक्षित फंड: नौकरी के दौरान हर महीने जमा रकम और ब्याज को रिटायरमेंट के बाद एकमुश्त निकाल सकते हैं।
  • टैक्स छूट: EPF में जमा राशि और मिलने वाला ब्याज दोनों पर इनकम टैक्स एक्ट की धारा 80C के तहत टैक्स छूट मिलती है।
  • इमरजेंसी में आंशिक निकासी: शादी, मेडिकल खर्च, मकान खरीदने या बनवाने जैसी ज़रूरतों के लिए आंशिक निकासी की सुविधा मिलती है।
  • रिस्क फ्री इन्वेस्टमेंट: EPF सरकारी स्कीम है, इसलिए निवेश और ब्याज दोनों पूरी तरह सुरक्षित हैं।
  • यूनिवर्सल अकाउंट नंबर (UAN): EPF खाते का एक यूनिक नंबर मिलता है, जिससे नौकरी बदलने पर फंड ट्रांसफर, बैलेंस चेक, पासबुक डाउनलोड जैसी सुविधाएं ऑनलाइन मिलती हैं।
  • EPF में फैमिली को लाभकर्मचारी की मृत्यु होने पर नॉमिनी या परिवार को फंड मिलता है, जिससे उन्हें आर्थिक सहयोग मिलता है।

ईपीएफ पेंशन के क्या नियम हैं?

EPS पेंशन की पात्रता और शर्तेंकर्मचारी को EPS पेंशन का लाभ लेने के लिए कम से कम 10 वर्ष नौकरी (service) पूरी करनी अनिवार्य है। ईपीएस से मासिक पेंशन 58 वर्ष की आयु पूरी होने के बाद मिलती है। यदि कर्मचारी 50 साल की उम्र के बाद लेकिन 58 वर्ष से पहले पेंशन लेना चाहता है, तो उसे “घटी हुई पेंशन” (Reduced Pension) का विकल्प मिलता है, जिसमें पेंशन राशि कम हो जाती है।

नौकरी के दौरान मृत्यु या स्थायी विकलांगता की स्थिति में भी परिवार या सदस्य पेंशन के हकदार होते हैं। नियोक्ता (employer) कर्मचारी की बेसिक सैलरी का 8.33% हर महीने EPS खाते में जमा करता है (बेसिक + DA, अधिकतम ₹15,000 तक पर)।

EPS पेंशन की गणना: पेंशन की मासिक राशि का कैलकुलेशन फॉर्मूला है: “मासिक पेंशन = (पेंशन योग्य वेतन) × (पेंशन योग्य सेवा) ÷ 70 “पेंशन योग्य वेतन: अंतिम 60 महीनों का औसत बेसिक + डीए (अधिकतम ₹15,000) पेंशन योग्य सेवा: कुल नौकरी के वर्षों की संख्या (अधिकतम 35 वर्ष तक)

EPS पेंशन 58 वर्ष पूरी करने के बाद दो साल और (मतलब 60 वर्ष) तक पेंशन लेने में देरी करने पर हर साल 4% अतिरिक्त पेंशन मिलती है। अगर 10 साल से कम नौकरी की है, तो पेंशन की जगह निकासी (withdrawal benefit) क्लेम किया जा सकता है, लेकिन मासिक पेंशन नहीं मिलेगी। नॉमिनी/परिवार को भी EPS के तहत पारिवारिक पेंशन का लाभ मिलता है।

ईपीएफ का पैसा कैसे निकाले?

EPF/ईपीएफ का पैसा निकालने के लिये इम्पलॉय को बैंक एकाउंट न0, आधार नं0 और पैन नं0, दर्ज होना अनिवार्य है। इसके अलावा सभी दस्तावेजो पर कोई त्रुटि या मिसमैच नही होना चाहिये। इसके पश्चात् ही इम्पलॉय अपना UAN Number पर सभी दस्तावेजों को दर्ज कर KYC करा सकते है। KYC के पश्चात् ही इम्पलॉय का ईपीएफ पैसा निकासी की जा सकती है। सामान्यतः KYC के पश्तात् इम्पलॉय दो माध्यम से ईपीएफ पैसा निकासी कर सकता है, जो KYC के पश्चात् ही सम्भव है-

01. ऑनलाइन तरीका (UAN पोर्टल): कोई भी इम्पलॉय अपने UAN और पासवर्ड के साथ EPFO मेंबर पोर्टल में लॉग-इन करके, Online Services’ टैब में जाकर ‘Claim (Form-31, 19 & 10C)’ चुनें बैंक खाते की जानकारी वेरिफाई कर Advance या Settlement के लिए क्लेम कर सकता है।

Universal Account Number (UAN)
MEMBER e-SEWA login Portal

02. UMANG ऐप द्वारा: कोई भी इम्पलॉय अपने वेरीफाई UAN के बाद UMANG मोबाइल ऐप से भी फॉर्म भरकर आंशिक/पूर्ण निकासी के लिए क्लेम कर सकता हैं।

Umang Mobile App

EPF क्लेम सबमिट करने के पश्तात्, 5 से 10 दिन के भीतर क्लेम अप्रूव होने पर राशि बैंक खाते में भेज दी जाती है।

EPF/ESI Services

ईपीएफ क्लेम निकालने के मुख्य शर्ते-

ईपीएफ का पैसा क्लेम करने से पहले यह समझना आवश्यक होगा कि किसी इम्पलॉय को अपने EPF पैसा निकालने के लिये क्या क्या कारण और क्या अवधि होना आवश्यक है, अन्यथा किये गये क्लेम की गयी राशि को EPFO व्दारा रिजेक्ट कर दिया जाता है।

निकासी का कारणनौकरी/सेवा की अवधिनिकासी की रकममहत्वपूर्ण शर्ते/सीमाए
रिटायरमेंट55 साल की उम्रपूरी राशिरिटायरमेंट के बाद
बेरोजगारी1-2 माह75% से 100%1 माह की बेरोजगारी पर 75% व दो माह पर 100%
मेडिकल इमरजेंसीकोई न्यूनतम् नौकरी अवधि नहीजमा राशि का गुना कर्मचारी योगदान जितना कम होपरिवार भी लाभ ले सकता है।
घर खरीदना/बनवाना5 साल नौकरीवेतन का 24-36 गुनास्वयं/पति-पत्नी ही ले सकते है।
लोन भुगतान3 साल नौकरी90% राशिघर खरीदने के लिये
शादी/शिक्षा7 साल नौकरीकर्मचारी योगदान का 50%शादी शिक्षा के लिये

ईपीएफ का पैसे निकालने या सम्बन्धित जानकारी के लिये Contact form मे सम्पर्क करे।

वक्फ बोर्ड क्या है? वक्फ बोर्ड मे कौन कौन से महत्वपूर्ण बदलाव किये है आइये जानते है?

वक्फ बोर्ड (Waqf Board) आजकल भारत मे चर्चित मुद्दो मे से एक बन गया है। वक्फ बोर्ड के लिये एक विशेष कानून भी बनाया गया है, लेकिन कानून इतना लचक होने के कारण वक्फ बोर्ड/सदस्यो व्दारा इसका गलत इस्तेमाल किया जा रहा है, इसलिये Waqf Amendment Bill 2025 लाया गया । Waqf Amendment Bill 2025 मे आज हल्ला मचा हुआ है हालाकिं सरकार भी जान चुकी है, किन परिस्थियों मे वक्फ बोर्ड आम जन नागरिक को परेशानी हो रही है। आज हम जानेंगे पहले वक्फ बोर्ड के कानून से क्या-क्या आम नागरिक को परेशानी हुयी है।

waqf Board
वक्फ संसोधन बिल 2025

वक्फ बोर्ड इस्लामी कानून के तहत धार्मिक या धर्मार्थ उद्देश्यों के लिए विशेष रूप से समर्पित संपत्तियों को संभालने का काम करता है। एक बार वक्फ के रूप में नामित होने के बाद संपत्ति दान करने वाले व्यक्ति से अल्लाह को ट्रांसफर हो जाती है और यह अपरिवर्तनीय होती है। इन संपत्तियों का प्रबंधन वक्फ या सक्षम प्राधिकारी की ओर से नियुक्त मुतव्वली द्वारा किया जाता है।

वक्फ बोर्ड क्या है और इनके क्या कार्य है?

वक्फ बोर्ड (Waqf Board) एक कानूनी इस्लामिक संस्था है जो इस्लामी कानून के तहत वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन और नियंत्रण के लिए जिम्मेदार होती है। वक्फ (Waqf) का अर्थ है किसी संपत्ति, भूमि, या इमारत को धार्मिक, सामाजिक, या परोपकारी उद्देश्यों के लिए स्थायी रूप से दान करना। यह संपत्ति अल्लाह के नाम पर समर्पित होती है और इसका उपयोग मुस्लिम समुदाय के कल्याण के लिए किया जाता है।

वक्फ बोर्ड के कार्य

वक्फ संपत्तियों का पंजीकरण और दस्तावेजीकरण

  • वक्फ बोर्ड सभी वक्फ संपत्तियों (मस्जिदें, दरगाहें, कब्रिस्तान, स्कूल, अस्पताल, जमीन आदि) का रजिस्ट्रेशन करता है।
  • संपत्ति की विवरणिका (सर्वे) तैयार करना और उसे अद्यतन रखना।

संपत्ति का प्रशासन और रखरखाव

  • वक्फ संपत्तियों के रखरखाव, मरम्मत, और संरक्षण की जिम्मेदारी।
  • संपत्ति से होने वाली आय (किराया, दान, लाभ आदि) का प्रबंधन करना।
  • धार्मिक, शैक्षणिक, या सामाजिक उद्देश्यों के लिए संपत्ति का उपयोग सुनिश्चित करना।

वित्तीय प्रबंधन और ऑडिट

  • वक्फ संपत्तियों से प्राप्त आय का लेखा-जोखा रखना।
  • वार्षिक ऑडिट करवाना और वित्तीय रिपोर्ट प्रकाशित करना।
  • आय का उपयोग मस्जिदों के रखरखाव, गरीबों की मदद, शिक्षा, और चिकित्सा सेवाओं में करना।

कानूनी सुरक्षा और विवाद समाधान

  • वक्फ संपत्तियों पर अवैध कब्जे या दुरुपयोग के मामलों में कानूनी कार्रवाई करना।
  • संपत्ति से जुड़े विवादों (जैसे स्वामित्व या उपयोग) को निपटाने के लिए अदालतों या मध्यस्थता का सहारा लेना।
  • वक्फ संपत्तियों को गैर-धार्मिक उद्देश्यों में इस्तेमाल होने से बचाना।

समाज कल्याण और विकास कार्य

  • शैक्षणिक संस्थानों, छात्रवृत्तियाँ, और व्यावसायिक प्रशिक्षण केंद्र चलाना।
  • गरीबों को आर्थिक सहायता, चिकित्सा शिविर, और आपदा राहत कार्यक्रम आयोजित करना।
  • धार्मिक शिक्षा और सांस्कृतिक गतिविधियों को बढ़ावा देना।

वक्फ बोर्ड/वक्फ बोर्ड परिषद् मे कानून के तहत सम्पत्ति विवाद

वक्फ बोर्ड (Waqf Board) कानून के तहत पहले वक्फ बोर्ड जिस भी सम्पत्ति पर कब्जा कर लेती थी, उस सम्पत्ति की सुनवाई केवल वक्फ बोर्ड काउसिंल मे ही अपनी बात रखने का मौका दिया जाता था, और वक्फ बोर्ड/वक्फ बोर्ड परिषद् अपनी इच्छा से चाहे तो ही सम्पत्ति को छोड़ सकती है। इसके आलावा स्पेशल वक्फ कोर्ट उच्च न्यायालय मे ही इसकी सुनवाई हो सकती थी, अन्य कही नही। जिसके चलते वक्फ बोर्ड/वक्फ बोर्ड परिषद् काफी विवादो से घिरा रहा है, जिसके लिये वक्फ बोर्ड कानून मे संसोधन होने की अवश्यकता थी।

आज भारत मे वक्फ बोर्ड (Waqf Board) के पास रेलवे और रक्षा विभाग के बाद सबसे अधिक कथित तौर पर तीसरा सबसे बड़ा भूमि धारक है। वक्फ बोर्ड भारत भर में 9.4 लाख एकड़ में फैली 8.7 लाख संपत्तियों को नियंत्रित करते हैं, जिनकी अनुमानित कीमत 1.2 लाख करोड़ रुपये है। उत्तर प्रदेश और बिहार में दो शिया वक्फ बोर्ड सहित 32 वक्फ बोर्ड हैं। राज्य वक्फ बोर्ड का नियंत्रण लगभग 200 व्यक्तियों के हाथों में है।

वक्फ बोर्ड व्दारा सम्पत्ति विवाद को लेकर लगभग् 5 लाख मामले कथिक तौर पर चल रहे है और लगभग् 1 लाख मामले कानूनी दाव पेंच के अन्तर्गत पेडिंग पडे है, इसके आलाव आम नागरिको व्दारा यह भी कहा गया है कि उनकी सम्पत्ति को वक्फ बोर्ड को दान मे दिया जाना बोलकर कब्जा किया गया है, जबकि उनके और उनके परिवार व्दारा कभी वक्फ बोर्ड को सम्पत्ति दान नही की गयी है। वक्फ बोर्ड सम्पत्तियों के विवाद को लेकर इस कानून मे संशोधन की अवश्यकता को जताया गया है, हालाकि राज्य सभा मे संसोधित बिल की मांग को लेकर वोटिंग हुयी है, जिसमे संसोधित बिल पास भी हो गया है, जिसके चलते बंगाल और असम मे काफी विरोध प्रदर्शन और दंगे भी हो रहे है।

क्या भारत में वक्फ बोर्ड प्रतिबंधित है?

भारत में वक्फ बोर्ड प्रतिबंधित नहीं है। वक्फ बोर्ड भारत में एक कानूनी और संवैधानिक संस्था है, जो इस्लामिक धार्मिक संपत्तियों (वक्फ संपत्ति) के प्रबंधन और रखरखाव के लिए जिम्मेदार है। यह “वक्फ अधिनियम, 1995” (और बाद में संशोधित 2013 के अधिनियम) के तहत स्थापित किया गया है और वक्फ बोर्ड संसोधन 2025 कुछ महत्वपूर्ण बदलाव किये गये है।

मुख्य बिंदु:

  1. कानूनी स्थिति: वक्फ बोर्ड राज्य स्तर पर काम करते हैं और प्रत्येक राज्य में अलग-अलग बोर्ड मौजूद हैं। इन्हें भारत सरकार के अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय द्वारा विनियमित किया जाता है।
  2. उद्देश्य: वक्फ संपत्तियों (जैसे मस्जिद, दरगाह, स्कूल, या चैरिटेबल ट्रस्ट) का प्रशासनिक नियंत्रण और आय का उपयोग समाज के कल्याण के लिए करना।
  3. हाल के विवाद: कुछ मामलों में वक्फ बोर्ड के कार्यों और संपत्ति प्रबंधन को लेकर सवाल उठाए गए हैं, लेकिन इनकी कानूनी वैधता बनी हुई है।
  4. सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी: 2023 में, सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि वक्फ बोर्ड को “अनावश्यक रूप से संपत्ति पर दावा नहीं करना चाहिए”, लेकिन इसकी वैधता को चुनौती नहीं दी।

वक्फ (संशोधन) विधेयक, 2025

वक्फ बोर्ड संशोधन 2025 एक महत्वपूर्ण कानून है, जो वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन और प्रशासन में बदलाव के लिये लाया गया है। इसका मुख्य उद्देश्य पारदर्शिता बढ़ाना, दुरुपयोग रोकना और वक्फ संपत्तियों के बेहतर उपयोग को सुनिश्चित करना है। यह अधिनियम वक्फ संपत्तियों के प्रशासन और प्रबंधन में सुधार के लिए कई प्रावधान करता है, जैसे कि वक्फ बोर्ड में गैर-मुस्लिम सदस्यों को शामिल करना, संपत्ति प्रबंधन में डिजिटलीकरण, और वक्फ बोर्ड के कामकाज को सुव्यवस्थित करना है।

लंबे समय से चले आ रहे मुद्दों का समाधान करना

वक्फ (संशोधन) विधेयक का उद्देश्य निम्नलिखित मुद्दों का समाधान करना है –

  1. वक्फ संपत्ति प्रबंधन में पारदर्शिता की कमी
  2. वक्फ भूमि अभिलेखों का अधूरा सर्वेक्षण और म्यूटेशन
  3. महिलाओं के उत्तराधिकार अधिकारों के लिए अपर्याप्त प्रावधान
  4. अतिक्रमण सहित बड़ी संख्या में लंबे समय से चल रहे मुकदमे। वर्ष 2013 में 10,381 मामले लंबित थे, जो अब बढ़कर 21,618 हो गए हैं।
  5. किसी भी संपत्ति को अपनी जांच के आधार पर वक्फ की संपत्ति घोषित करने की वक्फ बोर्डों की अतार्किक शक्ति।
  6. सरकारी भूमि को वक्फ घोषित करने से जुड़े कई विवाद।
  7. वक्फ संपत्तियों के उचित लेखा-जोखा और लेखा-परीक्षण का अभाव।
  8. वक्फ प्रबंधन में प्रशासनिक अक्षमता।
  9. ट्रस्ट संपत्तियों के साथ अनुचित व्यवहार।
  10. केंद्रीय वक्फ परिषद और राज्य वक्फ बोर्डों में हितधारकों का कम प्रतिनिधित्व।

वक्फ बोर्ड से सम्बन्धित विवाद पर संसोधन विधेयक

वक्फ संपत्ति के रूप में घोषित गैर-मुस्लिम संपत्तियां – वक्फ (संशोधन) विधेयक 2025 का उद्देश्य विरासत स्थलों और व्यक्तिगत संपत्ति अधिकारों की सुरक्षा करते हुए वक्फ संपत्ति प्रबंधन को सुव्यवस्थित करना है। विभिन्न राज्यों में वक्फ संपत्ति के दावों को लेकर विवाद देखे गए हैं, जिससे कानूनी लड़ाई और सामुदायिक चिंताएं पैदा हुई हैं। सितंबर 2024 के आंकड़ों के अनुसार, 25 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के वक्फ बोर्डों में कुल 5973 सरकारी संपत्तियों को वक्फ संपत्ति घोषित किया गया है। इसके कुछ उदाहरण:

तमिलनाडु: थिरुचेंथुरई गांव का एक किसान वक्फ बोर्ड के पूरे गांव पर दावे के कारण अपनी ज़मीन नहीं बेच पा रहा था। इसके चलते वह अपनी बेटी की शादी हेतु लिए गए ऋण को चुकाने के लिए अपनी ज़मीन बेच नहीं सका।

गोविंदपुर गांव, बिहार: अगस्त 2024 में, बिहार सुन्नी वक्फ बोर्ड के अगस्त 2024 में पूरे गांव पर किए गए दावे के कारण सात परिवार प्रभावित हुए।  यह मामला पटना उच्च न्यायालय में चल रहा है।

केरल: सितंबर 2024 में एर्नाकुलम जिले के करीब 600 ईसाई परिवार अपनी पुश्तैनी जमीन पर वक्फ बोर्ड के दावे का विरोध कर रहे हैं। उन्होंने संयुक्त संसदीय समिति में अपील की है।

कर्नाटक: 2024 में वक्फ बोर्ड द्वारा विजयपुरा में 15,000 एकड़ जमीन को वक्फ जमीन के रूप में नामित करने के बाद किसानों ने विरोध प्रदर्शन किया। बल्लारी, चित्रदुर्ग, यादगीर और धारवाड़ में भी विवाद उठे। हालांकि, सरकार ने आश्वासन दिया कि कोई बेदखली नहीं होगी।

उत्तर प्रदेश: राज्य वक्फ बोर्ड के कथित भ्रष्टाचार और कुप्रबंधन के खिलाफ शिकायतें उठाई गई हैं।

इसके अलावावक्फ (संशोधन) विधेयक पर गठित संयुक्त समिति को वक्फ बोर्डों द्वारा संपत्तियों के गैरकानूनी दावे के बारे में कुछ शिकायतें प्राप्त हुएजो इस प्रकार हैं:

कर्नाटक (1975 और 2020): 40 वक्फ संपत्तियों को अधिसूचित किया गया, जिनमें खेत, सार्वजनिक स्थान, सरकारी भूमि, कब्रिस्तान, झीलें और मंदिर शामिल हैं।

पंजाब वक्फ बोर्ड ने पटियाला में शिक्षा विभाग की जमीन पर दावा किया है।

इसके अतिरिक्त, आवासन और शहरी कार्य मंत्रालय ने सितंबर 2024 में अपनी प्रस्तुति के दौरान संयुक्त संसदीय समिति को सूचित किया कि भूमि और विकास कार्यालय के नियंत्रण में 108 संपत्तियां, दिल्ली विकास प्राधिकरण के नियंत्रण में 130 संपत्तियां और सार्वजनिक डोमेन में 123 संपत्तियों को वक्फ संपत्ति घोषित किया गया और मुकदमेबाजी में लाया गया।

वक्फ संसोधन विधेयक (2025) का उद्देश्य

  • वक्फ प्रबंधन में पारदर्शिता – भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने के लिए वक्फ रिकॉर्ड का डिजिटलीकरण।
  • कानूनी सहायता और सामाजिक कल्याण – पारिवारिक विवादों और उत्तराधिकार अधिकारों के लिए कानूनी सहायता केंद्रों की स्थापना।
  • सांस्कृतिक और धार्मिक पहचान – सांस्कृतिक संरक्षण और अंतर-धार्मिक संवाद को मजबूत करना।

वक्फ (संशोधन) विधेयक 2025 वक्फ प्रशासन के लिए एक धर्मनिरपेक्ष, पारदर्शी और जवाबदेह व्यवस्था तय करता है। जहां वक्फ संपत्तियां धार्मिक और धर्मार्थ उद्देश्यों की पूर्ति करती हैं, उनके प्रबंधन में कानूनी, वित्तीय और प्रशासनिक जिम्मेदारियां शामिल होती हैं जिनके लिए सुव्यवस्थित शासन की आवश्यकता होती है। वक्फ बोर्ड और केंद्रीय वक्फ परिषद (सीडब्ल्यूसी) की भूमिका धार्मिक नहीं बल्कि नियामक है, जो कानूनी अनुपालन सुनिश्चित करती है और सार्वजनिक हितों की रक्षा करती है। यह विधेयक हितधारकों को सशक्त बनाकर और शासन में सुधार करके देश में वक्फ प्रशासन के लिए एक प्रगतिशील और निष्पक्ष ढांचा तैयार करता है।

सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) विधेयक, 2024 क्या है और यह किन-किन मामलो मे लागू होता है?

सार्वजनिक परीक्षा विधेयक (public examinations bill) 2024 बिल सार्वजनिक परीक्षाओं मे अनुचित संसाधनो के उपयोग करने से रोकना है अर्थात् सार्वजनिक परीक्षाये जैसे राज्य सरकार अथवा केन्द्र सरकार व्दारा अधिसूचित परीक्षाओं से है। यह विधेयक 5 फ़रवरी, 2024 को लोकसभा में पेश किया गया था। इसके पश्चात् 9 फ़रवरी, 2024 को इसे राज्यसभा में पारित किया गया। इसके पश्चात् 13 फ़रवरी, 2024 को इस विधेयक को राष्ट्रपति की स्वीकृति मिली, जिसके पश्चात् इस विधेयक को 21 जून 2024 को लागू किया गया। इस कानून का मुख्य उद्देश्य सार्वजनिक परीक्षाओं में पारदर्शिता, निष्पक्षता, और विश्वसनीयता को लाना है। इस कानून के तहत यदि कोई व्यक्ति या सास्थां पेपर लीक करने या अनुचित साधनों का इस्तेमाल करने मे मदद् करता या कराता है, तो वह कम से कम तीन साल की जेल और 10 लाख रुपये तक का जुर्माना हो सकता है।

सार्वजनिक परीक्षा (Public Examination) विधेयक के तहत केंद्र सरकार द्वारा अधिसूचित परीक्षाओं की सूची

सार्वजनिक परीक्षा विधेयक 2024 (the public examinations act 2024) के तहत सार्वजनिक परीक्षाओं में पारदर्शिता बढ़ाने और परीक्षाओं में गड़बड़ी करने वालों पर कार्रवाई करने का प्रावधान है. इसके तहत, पेपर लीक करने या अनुचित साधन इस्तेमाल करने से रोकना है। इस विधेयक की अनुसूची के तहत निर्दिष्ट अधिकारियों द्वारा या केंद्र सरकार द्वारा अधिसूचित परीक्षाओं से है।

इनमें शामिल हैं:-
(i) संघ लोक सेवा आयोग (Union Public Service Commission)
(ii) कर्मचारी चयन आयोग (Staff Selection Commission)
(iii) रेलवे भर्ती बोर्ड (Railway Recruitment Board)
(iv) राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (National Testing Agency)
(v) बैंकिंग कार्मिक चयन संस्थान (Institute Of Banking Personnel Selection)
(vi) केंद्र सरकार के विभाग और भर्ती के लिए उनके संलग्न कार्यालय। (Central Government Departments and their attached offices for recruitment)

सार्वजनिक परीक्षाओं के संबंध में अपराध (Offences in connection with public examinations)

विधेयक सार्वजनिक परीक्षाओं के संबंध में कई अपराधों को परिभाषित करता है। यह किसी भी अनुचित तरीके से लिप्तता को सुविधाजनक बनाने के लिए मिलीभगत या साजिश पर रोक लगाता है। यह अनुचित साधनों को निर्दिष्ट करता है

जिसमें शामिल हैं:-
(i) प्रश्न पत्र या उत्तर कुंजी की अनधिकृत पहुंच या लीक (Unauthorized access or leak of question paper or answer key)
(ii) सार्वजनिक परीक्षा के दौरान उम्मीदवार की सहायता करना (Assisting candidates during public examinations)
(iii) कंप्यूटर नेटवर्क या संसाधनों के साथ छेड़छाड़ (Tampering with computer networks or resources)
(iv) शॉर्टलिस्टिंग के लिए दस्तावेजों के साथ छेड़छाड़ या योग्यता सूची या रैंक को अंतिम रूप देना (Tampering of documents for shortlisting or finalization of merit list or ranks)
(v) मौद्रिक लाभ के लिए नकली परीक्षा आयोजित करना, नकली प्रवेश पत्र जारी करना या धोखाधड़ी के लिए प्रस्ताव पत्र जारी करना। (Conducting fake examinations, issuing fake admit cards or issuing offer letters fraudulently for monetary gain)
यह निम्नलिखित पर भी रोक लगाता है:-
(i) समय से पहले परीक्षा से संबंधित गोपनीय जानकारी का खुलासा करना, और
(ii) व्यवधान पैदा करने के लिए अनधिकृत लोगों को परीक्षा केंद्रों में प्रवेश करने से। 

उपरोक्त अपराधों पर तीन से पांच साल तक की कैद और 10 लाख रुपये तक का जुर्माना होगा।

सार्वजनिक परिक्षाओं को गठित करने वाले सेवा प्रदाताओं की जिम्मेदारियां

विधेयक के प्रावधानों के उल्लंघन की स्थिति में, सार्वजनिक परिक्षाओं को गठित करने वाले सेवा प्रदाताओं को पुलिस और संबंधित परीक्षा प्राधिकरण को रिपोर्ट करना होगा। सेवा प्रदाता एक ऐसा संगठन है जो सार्वजनिक परीक्षा प्राधिकरण को कंप्यूटर संसाधन या कोई अन्य सहायता प्रदान करता है। ऐसी घटनाओं की रिपोर्ट न करना अपराध होगा। यदि सेवा प्रदाता स्वयं कोई अपराध करता है, तो परीक्षा प्राधिकारी को इसकी सूचना पुलिस को देनी होगी। विधेयक सेवा प्रदाताओं को परीक्षा प्राधिकरण की अनुमति के बिना परीक्षा केंद्र स्थानांतरित करने से रोकता है। सेवा प्रदाता द्वारा किए गए अपराध पर एक करोड़ रुपये तक का जुर्माना लगाया जाएगा। ऐसे सेवा प्रदाता से जांच की आनुपातिक लागत भी वसूल की जाएगी। इसके अलावा, उन्हें चार साल तक सार्वजनिक परीक्षा आयोजित करने से भी रोक दिया जाएगा। 

यदि यह प्रमाणित हो जाता है कि सेवा प्रदाताओं से जुड़े अपराध किसी निदेशक, वरिष्ठ प्रबंधन, या सेवा प्रदाताओं के प्रभारी व्यक्तियों की सहमति या मिलीभगत से किए गए थे, तो ऐसे व्यक्तियों को व्यक्तिगत रूप से उत्तरदायी ठहराया जाएगा। इन्हें तीन साल से लेकर 10 साल तक की कैद और एक करोड़ रुपये जुर्माने की सजा होगी।

संगठित अपराध और उनसे जुड़े सजा का प्रावधान (Organized crime and punishment for it)

विधेयक संगठित अपराधों के लिए उच्च सज़ा निर्दिष्ट करता है। एक संगठित अपराध को  सार्वजनिक परीक्षाओं के संबंध में गलत लाभ के लिए साझा हित को आगे बढ़ाने के लिए किसी व्यक्ति या व्यक्तियों के समूह द्वारा किए गए गैरकानूनी कृत्य के रूप में परिभाषित किया गया है। संगठित अपराध करने वाले व्यक्तियों को पांच साल से 10 साल तक की सजा और कम से कम एक करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा। यदि किसी संस्था को संगठित अपराध करने का दोषी ठहराया जाता है, तो उसकी संपत्ति कुर्क और ज़ब्त कर ली जाएगी, और परीक्षा की आनुपातिक लागत भी उससे वसूल की जाएगी।

सार्वजनिक परिक्षा विधेयक के तहत अपराध की प्रकृति एवंम् जांच (Nature and investigation of offences under Public Examination Bill)

सार्वजनिक परिक्षा विधेयक 2024 (Public Examination Bill 2024) के तहत सभी अपराध संज्ञेय, गैर-जमानती और गैर-शमनयोग्य होंगे। कोई भी कार्रवाई अपराध नहीं मानी जाएगी यदि यह साबित हो जाए कि आरोपी ने उचित परिश्रम किया था। उपाधीक्षक या सहायक पुलिस आयुक्त रैंक से नीचे का अधिकारी अधिनियम के तहत अपराधों की जांच नहीं करेगा। केंद्र सरकार जांच को किसी भी केंद्रीय जांच एजेंसी को स्थानांतरित कर सकती है।  

सार्वजनिक परिक्षा विधेयक बिल 2024 के तहत किसी परीक्षा लीक और डेटा चोरी जैसी घटनाओं पर नियंत्रण किया जा सके। इस विधेयक का उद्देश्य शिक्षा क्षेत्र में पारदर्शिता और विश्वसनीयता को बनाए रखना है, ताकि परीक्षाओं का संचालन ईमानदारी से हो सके और छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ न हो।

सार्वजनिक परीक्षा विधेयक (public examinations bill) 2024 के तहत छह अध्यायों मे बांटा गया है, जिसमे कुल 19 धाराये है। Public Examinations (Prevention of Unfair Means) Act, 2024 PDF

कंपनी अधिनियम की धारा 147| Companies Act Section 147

कंपनी अधिनियम Companies Act (Companies Act Section-147 in Hindi) के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। कंपनी अधिनियम की धारा 147 के अनुसार किसी उपबंध का उल्लंघन किया गया है, तो कंपनी, जुर्माने से, जो पच्चीस हजार रुपए से कम का नहीं होगा, किंतु जो पांच लाख रुपए तक का हो सकेगा, दंडनीय होगी और कंपनी का प्रत्येक ऐसा अधिकारी, जो व्यतिक्रमी है, कारावास से, जिसकी अवधि एक वर्ष तक की हो सकेगी या जुर्माने से, जो दस हजार रुपए से कम का नहीं होगा, किंतु जो एक लाख रुपए तक का हो सकेगा या दोनों से, दंडनीय होगा, जिसे Companies Act Section-147 के अन्तर्गत परिभाषित किया गया है।

कंपनी अधिनियम की धारा 147 (Companies Act Section-147) का विवरण

कंपनी अधिनियम की धारा 147 Companies Act Section-147 के अनुसार किसी उपबंध का उल्लंघन किया गया है, तो कंपनी, जुर्माने से, जो पच्चीस हजार रुपए से कम का नहीं होगा, किंतु जो पांच लाख रुपए तक का हो सकेगा, दंडनीय होगी और कंपनी का प्रत्येक ऐसा अधिकारी, जो व्यतिक्रमी है, कारावास से, जिसकी अवधि एक वर्ष तक की हो सकेगी या जुर्माने से, जो दस हजार रुपए से कम का नहीं होगा, किंतु जो एक लाख रुपए तक का हो सकेगा या दोनों से, दंडनीय होगा।

कंपनी अधिनियम की धारा 147 (Companies Act Section-147 in Hindi)

उल्लंघन के लिए दंड-

(1) यदि धारा 139 से धारा 146 (दोनों सम्मिलित) तक के उपबंधों में से किसी उपबंध का उल्लंघन किया गया है, तो कंपनी, जुर्माने से, जो पच्चीस हजार रुपए से कम का नहीं होगा, किंतु जो पांच लाख रुपए तक का हो सकेगा, दंडनीय होगी और कंपनी का प्रत्येक ऐसा अधिकारी, जो व्यतिक्रमी है, कारावास से, जिसकी अवधि एक वर्ष तक की हो सकेगी या जुर्माने से, जो दस हजार रुपए से कम का नहीं होगा, किंतु जो एक लाख रुपए तक का हो सकेगा या दोनों से, दंडनीय होगा ।
(2) यदि कंपनी का कोई संपरीक्षक धारा 139, धारा 143, धारा 144 या धारा 145 के किन्हीं उपबंधों का उल्लंघन करेगा, तो संपरीक्षक जुर्माने से, जो पच्चीस हजार रुपए से कम का नहीं होगा किन्तु जो पांच लाख रुपए तक का हो सकेगा, दंडनीय होगा :
परंतु यदि ऐसा संपरीक्षक कंपनी या उसके शेयर धारकों या लेनदारों अथवा कर प्राधिकारियों की प्रवंचना के आशय से ऐसे उपबंधों का जानते हुए या जानबूझकर उल्लंघन करेगा, तो संपरीक्षक कारावास से, जिसकी अवधि एक वर्ष तक की हो सकेगी और जुर्माने से, जो एक लाख रुपए से कम का नहीं होगा, किन्तु जो पच्चीस लाख रुपए तक का हो सकेगा, दंडनीय होगा ।
(3) जहां किसी संपरीक्षक को उपधारा (2) के अर्थ दोषसिद्ध किया गया है, वहां वह-
(i) उसके द्वारा प्राप्त किए गए पारिश्रमिक का० कंपनी को प्रतिदाय करने के लिए दायी होगा और
(ii) कंपनी, कानूनी निकायों या प्राधिकारियों को या किन्हीं अन्य व्यक्तियों को, उसकी संपरीक्षा रिपोर्ट में की गई विशिष्टियों के गलत या भ्रामक कथनों से होने वाली हानि के लिए किसी नुकसानी का संदाय करने के लिए दायी होगा ।
(4) केंद्रीय सरकार, उपधारा (3) के खंड (ii) के अधीन कंपनी या व्यक्तियों को नुकसानी का तुरंत संदाय सुनिश्चित करने के लिए किसी कानूनी निकाय या प्राधिकारी या किसी अधिकारी को, अधिसूचना द्वारा विनिर्दिष्ट करेगी और ऐसा निकाय, प्राधिकारी या अधिकारी, ऐसी नुकसानी का ऐसी कंपनी या व्यक्तियों को संदाय करने के पश्चात् ऐसी नुकसानी करने की बाबत केंद्रीय सरकार के पास रिपोर्ट ऐसी रीति में जो उक्त अधिसूचना में विनिर्दिष्ट की जाए, फाइल करेगा।
(5) जहां किसी संपरीक्षा फर्म द्वारा संचालित की जा रही किसी कंपनी की संपरीक्षा की दशा में यह साबित हो जाता है कि संपरीक्षा भागीदार या भागीदारों ने कपटपूर्ण रीति में कार्य किया है या कंपनी या उसके निदेशकों अथवा अधिकारियों के संबंध में या उनके साथ किसी कपट के लिए दुष्प्रेरण या दुस्संधि की है, वहां ऐसे कृत्य के लिए इस अधिनियम या तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि में यथाउपबंधित सिविल या दांडिक दायित्व संपरीक्षा फर्म से संबंधित भागीदार या भागीदारों और फर्म का संयुक्त रूप से और पृथक रूप से होगा।

Companies Act Section-147 (Company Act Section-147 in English)

Punishment for contravention

(1) If any of the provisions of sections 139 to 146 (both inclusive) is contravened, the company shall be punishable with fine which shall not be less than twenty- five thousand rupees but which may extend to five lakh rupees and every officer of the company who is in default shall be punishable with imprisonment for a term which may extend to one year or with fine which shall not be less than ten thousand rupees but which may extend to one lakh rupees, or with both.
(2) If an auditor of a company contravenes any of the provisions of section 139, section 143, section 144 or section 145, the auditor shall be punishable with fine which shall not be less than twenty-five thousand rupees but which may extend to five lakh rupees:
Provided that if an auditor has contravened such provisions knowingly or wilfully with the intention to deceive the company or its shareholders or creditors or tax authorities, he shall be punishable with imprisonment for a term which may extend to one year and with fine which shall not be less than one lakh rupees but which may extend to twenty-five lakh rupees.
(3) Where an auditor has been convicted under sub-section (2), he shall be liable to—
(i) refund the remuneration received by him to the company; and
(ii) pay for damages to the company, statutory bodies or authorities or to any other persons for loss arising out of incorrect or misleading statements of particulars made in his audit report.
(4) The Central Government shall, by notification, specify any statutory body or authority or an officer for ensuring prompt payment of damages to the company or the persons under clause (ii) of sub-section (3) and such body, authority or officer shall after payment of damages to such company or persons file a report with the Central Government in respect of making such damages in such manner as may be specified in the said notification.
(5) Where, in case of audit of a company being conducted by an audit firm, it is proved that the partner or partners of the audit firm has or have acted in a fraudulent manner or abetted or colluded in any fraud by, or in relation to or by, the company or its directors or officers, the liability, whether civil or criminal as provided in this Act or in any other law for the time being in force, for such act shall be of the partner or partners concerned of the audit firm and of the firm jointly and severally.

हमारा प्रयास कंपनी अधिनियम (Companies Act Section) की धारा 147 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स मे कमेंट करके पूछ सकते है।

कंपनी अधिनियम की धारा 146| Companies Act Section 146

कंपनी अधिनियम Companies Act (Companies Act Section-146 in Hindi) के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। कंपनी अधिनियम की धारा 146 के अनुसार किसी साधारण अधिवेशन की सभी सूचनाएं और उससे संबंधित अन्य संसूचनाएं, कंपनी के संपरीक्षक को भेजी जाएगी और संपरीक्षक जब तक कंपनी द्वारा अन्यथा छूट न दी गई हो या तो स्वयं या अपने ऐसे प्राधिकृत प्रतिनिधि के माध्यम से जो संपरीक्षक के रूप में अर्हित होगा, किसी साधारण अधिवेशन में उपस्थित होगा, जिसे Companies Act Section-146 के अन्तर्गत परिभाषित किया गया है।

कंपनी अधिनियम की धारा 146 (Companies Act Section-146) का विवरण

कंपनी अधिनियम की धारा 146 Companies Act Section-146 के अनुसार किसी साधारण अधिवेशन की सभी सूचनाएं और उससे संबंधित अन्य संसूचनाएं, कंपनी के संपरीक्षक को भेजी जाएगी और संपरीक्षक जब तक कंपनी द्वारा अन्यथा छूट न दी गई हो या तो स्वयं या अपने ऐसे प्राधिकृत प्रतिनिधि के माध्यम से जो संपरीक्षक के रूप में अर्हित होगा, किसी साधारण अधिवेशन में उपस्थित होगा।

कंपनी अधिनियम की धारा 146 (Companies Act Section-146 in Hindi)

संपरीक्षकों का साधारण अधिवेशन मे उपस्थित होना-

किसी साधारण अधिवेशन की सभी सूचनाएं और उससे संबंधित अन्य संसूचनाएं, कंपनी के संपरीक्षक को भेजी जाएगी और संपरीक्षक जब तक कंपनी द्वारा अन्यथा छूट न दी गई हो या तो स्वयं या अपने ऐसे प्राधिकृत प्रतिनिधि के माध्यम से जो संपरीक्षक के रूप में अर्हित होगा, किसी साधारण अधिवेशन में उपस्थित होगा और उसे ऐसे अधिवेशन के कारवार के किसी ऐसे भाग करे, जो संपरीक्षक के प उससे संबद्ध है सुने जाने का अधिकार होगा।

Companies Act Section-146 (Company Act Section-146 in English)

Auditors to attend general meeting-

All notices of, and other communications relating to, any general meeting shall be forwarded to the auditor of the company, and the auditor shall, unless otherwise exempted by the company, attend either by himself or through his authorised representative, who shall also be qualified to be an auditor, any general meeting and shall have right to be heard at such meeting on any part of the business which concerns him as the auditor.

हमारा प्रयास कंपनी अधिनियम (Companies Act Section) की धारा 146 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स मे कमेंट करके पूछ सकते है।

कंपनी अधिनियम की धारा 145| Companies Act Section 145

कंपनी अधिनियम Companies Act (Companies Act Section-145 in Hindi) के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। कंपनी अधिनियम की धारा 145 के अनुसार कंपनी के संपरीक्षक के रूप में नियुक्त व्यक्ति, धारा 141 की उपधारा (2) के उपबंधों के अनुसार संपरीक्षक की रिपोर्ट पर हस्ताक्षर करेगा या कंपनी के किसी अन्य दस्तावेज पर हस्ताक्षर या उसको प्रमाणित करेगा और ऐसे मामलों या वित्तीय संव्यवहारों के संबंध में ऐसी अर्हताओं, संप्रेक्षणों या टीका टिप्पणियां जिनसे संपक की रिपोर्ट में वर्णित कंपनी के कार्यकरण पर कोई प्रतिकूल प्रभाव पड़ता हो, जिसे Companies Act Section-145 के अन्तर्गत परिभाषित किया गया है।

कंपनी अधिनियम की धारा 145 (Companies Act Section-145) का विवरण

कंपनी अधिनियम की धारा 145 Companies Act Section-145 के अनुसार कंपनी के संपरीक्षक के रूप में नियुक्त व्यक्ति, धारा 141 की उपधारा (2) के उपबंधों के अनुसार संपरीक्षक की रिपोर्ट पर हस्ताक्षर करेगा या कंपनी के किसी अन्य दस्तावेज पर हस्ताक्षर या उसको प्रमाणित करेगा और ऐसे मामलों या वित्तीय संव्यवहारों के संबंध में ऐसी अर्हताओं, संप्रेक्षणों या टीका टिप्पणियां जिनसे संपक की रिपोर्ट में वर्णित कंपनी के कार्यकरण पर कोई प्रतिकूल प्रभाव पड़ता हो।

कंपनी अधिनियम की धारा 145 (Companies Act Section-145 in Hindi)

संपरीक्षा रिपोर्टों आदि पर संपरीक्षक का हस्ताक्षर किया जाना-

कंपनी के संपरीक्षक के रूप में नियुक्त व्यक्ति, धारा 141 की उपधारा (2) के उपबंधों के अनुसार संपरीक्षक की रिपोर्ट पर हस्ताक्षर करेगा या कंपनी के किसी अन्य दस्तावेज पर हस्ताक्षर या उसको प्रमाणित करेगा और ऐसे मामलों या वित्तीय संव्यवहारों के संबंध में ऐसी अर्हताओं, संप्रेक्षणों या टीका टिप्पणियां जिनसे संपक की रिपोर्ट में वर्णित कंपनी के कार्यकरण पर कोई प्रतिकूल प्रभाव पड़ता हो, साधारण अधिवेशन में कंपनी के समक्ष पद जाएगा तथा कंपनी के किसी सदस्य द्वारा निरीक्षण के लिए खुला रहेगा।

Companies Act Section-145 (Company Act Section-145 in English)

Auditor to sign audit reports, etc-

The person appointed as an auditor of the company shall sign the auditor‘s report or sign or certify any other document of the company in accordance with the provisions of sub-section (2) of section 141, and the qualifications, observations or comments on financial transactions or matters, which have any adverse effect on the functioning of the company mentioned in the auditor‘s report shall be read before the company in general meeting and shall be open to inspection by any member of the company.

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