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मोटर वाहन अधिनियम की धारा 206 | पुलिस अधिकारी की दस्तावेज परिबद्ध करने की शक्ति | MV Act, Section- 206 in hindi | Power of police officer to impound document.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए मोटर वाहन अधिनियम की धारा 206 के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है मोटर वाहन अधिनियम की धारा- 206, साथ ही इस धारा के अंतर्गत क्या परिभाषित किया गया है, यह सभी जानकारी इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

मोटर वाहन अधिनियम की धारा- 206 का विवरण

मोटर वाहन अधिनियम (Motor Vehicles Act) की धारा -206 के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। इस अधिनियम के आधीन यदि किसी पुलिस अधिकारी अथवा राज्य सरकार द्वारा इस निमित्त प्राधिकृत अन्य व्यक्ति को यह विश्वास करने का कारण है कि किसी मोटर यान पर ले जाया जाने वाला कोई भी पहचान चिह्न अथवा कोई अनुज्ञप्ति, परमिट, रजिस्ट्रीकरण प्रमाण-पत्र, बीमा प्रमाण-पत्र या अन्य दस्तावेज, जिसे मोटर यान के ड्राइवर या अन्य भारसाधक व्यक्ति द्वारा उसके समक्ष पेश किया गया है।

मोटर वाहन अधिनियम की धारा- 206 के अनुसार

पुलिस अधिकारी की दस्तावेज परिबद्ध करने की शक्ति-

(1) यदि किसी पुलिस अधिकारी अथवा राज्य सरकार द्वारा इस निमित्त प्राधिकृत अन्य व्यक्ति को यह विश्वास करने का कारण है कि किसी मोटर यान पर ले जाया जाने वाला कोई भी पहचान चिह्न अथवा कोई अनुज्ञप्ति, परमिट, रजिस्ट्रीकरण प्रमाण-पत्र, बीमा प्रमाण-पत्र या अन्य दस्तावेज, जिसे मोटर यान के ड्राइवर या अन्य भारसाधक व्यक्ति द्वारा उसके समक्ष पेश किया गया है, भारतीय दण्ड संहिता (1860 का 45) की धारा 464 के अर्थ में मिथ्या दस्तावेज है, तो वह उस चिह्न या दस्तावेज को अभिग्रहीत कर सकेगा तथा यान के ड्राइवर या स्वामी से यह अपेक्षा कर सकेगा कि वह ऐसे चिह्न या दस्तावेज के अपने कब्जे में होने अथवा यान में विद्यमान होने का कारण बताए।
(2) यदि राज्य सरकार द्वारा इस निमित्त प्राधिकृत किसी पुलिस अधिकारी अथवा अन्य व्यक्ति को यह विश्वास करने का कारण है कि किसी मोटर यान का ड्राइवर जिस पर इस अधिनियम के अधीन किसी अपराध का आरोप है, फरार हो सकता है या समन की तामील से अन्यथा बच सकता है तो वह ऐसे ड्राइवर द्वारा धारित किसी अनुज्ञप्ति को अभिगृहीत कर सकेगा और उस अपराध का संज्ञान करने वाले न्यायालय के पास उसे भेज सकेगा तथा उक्त न्यायालय अपने समक्ष ऐसे ड्राइवर के प्रथम बार उपस्थित होने पर उस अनुज्ञप्ति को ऐसी अस्थाई अभिस्वीकृति के बदले में, जो उपधारा (3) के अधीन दी गई है, उसे लौटा देगा।
(3) कोई पुलिस अधिकारी या अन्य व्यक्ति, जिसने उपधारा (2) के अधीन किसी अनुज्ञप्ति को अभिगृहीत किया है, उस व्यक्ति को, जिसने अनुज्ञप्ति अभ्यर्पित की है, उसके लिए अस्थाई अभिस्वीकृति देगा तथा ऐसी अभिस्वीकृति धारक को जब तक वह अनुज्ञप्ति उसे लौटा नहीं दी जाती अथवा ऐसी तारीख तक जो पुलिस अधिकारी या अन्य व्यक्ति द्वारा उस अभिस्वीकृति में निर्दिष्ट की गई है, इनमें से जो भी पूर्वतर हो, यान चलाने के लिए प्राधिकृत करेगी:
परन्तु यदि राज्य सरकार द्वारा इस निमित्त प्राधिकृत किसी मजिस्ट्रेट, पुलिस अधिकारी या अन्य व्यक्ति का, उससे आवेदन किए जाने पर यह समाधान हो जाता है कि वह अनुज्ञप्ति उसके धारक को अभिस्वीकृति में विनिर्दिष्ट तारीख से पूर्व ऐसे किसी कारण से, जिसके लिए वह धारक उत्तरदायी नहीं है, नहीं लौटाई जा सकती अथवा नहीं लौटाई गई है तो यथास्थिति, मजिस्ट्रेट, पुलिस अधिकारी या अन्य व्यक्ति मोटर चलाने के प्राधिकार की अवधि को उस तारीख तक के लिए बढ़ा सकेगा जो अभिस्वीकृति में विनिर्दिष्ट की जाए।
(4) राज्य सरकार द्वारा इस निमित्त प्राधिकृत कोई पुलिस अधिकारी या अन्य व्यक्ति, यदि उसके पास यह विश्वास करने का कारण है कि मोटर यान के चालक ने धारा 183, धारा 184, धारा 185, धारा 189, धारा 190, धारा 194ग, धारा 194घ या धारा 194ङ में से किसी धारा के अधीन कोई अपराध किया है तो ऐसे चालक द्वारा धारित चालन अनुज्ञप्ति को जब्त करेगा और उसे धारा 19 के अधीन निर्हरता संबंधी कार्यवाहियों के लिए अनुज्ञापन प्राधिकारी को अग्रेषित करेगा :
परन्तु अनुज्ञप्ति को जब्त करने वाला व्यक्ति उसके लिए अस्थायी अभिस्वीकृति अनुज्ञप्ति अभ्यर्पण करने वाले व्यक्ति को देगा किंतु ऐसी अभिस्वीकृति धारक को तब तक चालन करने के लिए प्राधिकृत नहीं करेगी जब तक कि अनुज्ञप्ति उसको न लौटा दी गई हो।

Power of police officer to impound document-
(1) Any police officer or other person authorised in this behalf by the State Government may, if he has reason to believe that any identification mark carried on a motor vehicle or any licence, permit, certificate of registration, certificate of insurance or other document produced to him by the driver or person in charge of a motor vehicle is a false document within the meaning of section 464 of the Indian Penal Code (45 of 1860) seize the mark or document and call upon the driver or owner of the vehicle to account for his possession of or the presence in the vehicle of such mark or document.
(2) Any police officer or other person authorised in this behalf by the State Government may, if he has reason to believe that the driver of a motor vehicle who is charged with any offence under this Act may abscond or otherwise avoid the service of a summons, seize any licence held by such driver and forward it to the Court taking cognizance of the offence and the said Court shall or the first appearance of such driver before it, return the licence to him in exchange for the temporary acknowledgment given under sub-section (3).
(3) A police officer or other person seizing a licence under sub-section (2) shall give to the person surrendering the licence temporary acknowledgment therefor and such acknowledgment shall authorise the holder to drive until the licence has been returned to him or until such date as may be specified by the police officer or other person in the acknowledgment, whichever is earlier:
Provided that if any magistrate, police officer or other person authorised by the State Government in this behalf is, on an application made to him, satisfied that the licence cannot be, or has not been, returned to the holder thereof before the date specified in the acknowledgment for any reason for which the holder is not responsible, the magistrate, police officer or other person, as the case may be, may extend the period of authorization to drive to such date as may be specified in the acknowledgment.
(4) A police officer or other person authorised in this behalf by the State Government shall, if he has reason to believe that the driver of a motor vehicle has committed an offence under any of sections 183, 184, 185, 189, 190, 194C, 1940, or 194E, seize the driving licence held by such driver and forward it to the licensing authority for disqualification or revocation proceedings under section 19:
Provided that the person seizing the licence shall give to the person surrendering the licence a temporary acknowledgement therefor, but such acknowledgement shall not authorise the holder to drive until the licence has been returned to him.

हमारा प्रयास मोटर वाहन अधिनियम (MV Act) की धारा 206 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

मोटर वाहन अधिनियम की धारा 205 | मोटर यान चलाने की अयोग्यता की उपधारणा | MV Act, Section- 205 in hindi | Presumption of unfitness to drive.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए मोटर वाहन अधिनियम की धारा 205 के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है मोटर वाहन अधिनियम की धारा- 205, साथ ही इस धारा के अंतर्गत क्या परिभाषित किया गया है, यह सभी जानकारी इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

मोटर वाहन अधिनियम की धारा- 205 का विवरण

मोटर वाहन अधिनियम (Motor Vehicles Act) की धारा -205 के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। इस अधिनियम के आधीन धारा 185 के अधीन दण्डनीय किसी अपराध के लिए किसी कार्यवाही में यदि यह साबित हो जाता है कि किसी अभियुक्त ने, जब किसी पुलिस अधिकारी द्वारा किसी समय ऐसा करने के लिए अनुरोध किया गया था, श्वास-परीक्षण के लिए श्वास का नमूना अथवा प्रयोगशाला परीक्षण के लिए उसके रक्त का नमूना जाने या देने से इंकार किया है तो पुलिस अधिकारी द्वारा अपेक्षा की जा सकेगी।

मोटर वाहन अधिनियम की धारा- 205 के अनुसार

मोटर यान चलाने की अयोग्यता की उपधारणा-

धारा 185 के अधीन दण्डनीय किसी अपराध के लिए किसी कार्यवाही में यदि यह साबित हो जाता है कि किसी अभियुक्त ने, जब किसी पुलिस अधिकारी द्वारा किसी समय ऐसा करने के लिए अनुरोध किया गया था, श्वास-परीक्षण के लिए श्वास का नमूना अथवा प्रयोगशाला परीक्षण के लिए उसके रक्त का नमूना लिए जाने या देने से इन्कार किया था, ऐसा नहीं किया था या करने में असफल रहा था, तो उसका इन्कार, ऐसा न करना या असफलता, जब तक कि उसके लिए उचित कारण न दर्शित किया गया हो, उस समय उसकी दशा के बारे में, अभियोजन की ओर से दिए गए किसी साक्ष्य का समर्थन करने वाला या प्रतिरक्षा की ओर से दिए गए किसी साक्ष्य का खंडन करने वाला माना जाएगा।

Presumption of unfitness to drive-
In any proceeding for an offence punishable under section 185 if it is proved that the accused when requested by a police officer at any time so to do, had refused, omitted or failed to consent to the taking of or providing a specimen of his breath for a breath test or a specimen of his blood for a laboratory test, his refusal, omission or failure may, unless reasonable cause therefor is shown, be presumed to be a circumstance supporting any evidence given on behalf of the prosecution, or rebutting any evidence given on behalf of the defence, with respect to his condition at that time.

हमारा प्रयास मोटर वाहन अधिनियम (MV Act) की धारा 205 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

मोटर वाहन अधिनियम की धारा 204 | प्रयोगशाला परीक्षण | MV Act, Section- 204 in hindi | Laboratory test.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए मोटर वाहन अधिनियम की धारा 204 के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है मोटर वाहन अधिनियम की धारा- 204, साथ ही इस धारा के अंतर्गत क्या परिभाषित किया गया है, यह सभी जानकारी इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

मोटर वाहन अधिनियम की धारा- 204 का विवरण

मोटर वाहन अधिनियम (Motor Vehicles Act) की धारा -204 के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। इस अधिनियम के आधीन किसी ऐसे व्यक्ति से, जिसे धारा 203 के अधीन गिरफ्तार किया गया है, जब वह पुलिस थाने में हो, ऐसे रजिस्ट्रीकृत चिकित्सा व्यवसायी को, जो पुलिस अधिकारी द्वारा पेश किया जाए, प्रयोगशाला परीक्षण के लिए अपने रक्त का कोई नमूना देने की पुलिस अधिकारी द्वारा अपेक्षा की जा सकेगी।

मोटर वाहन अधिनियम की धारा- 204 के अनुसार

प्रयोगशाला परीक्षण-

(1) किसी ऐसे व्यक्ति से, जिसे धारा 203 के अधीन गिरफ्तार किया गया है, जब वह पुलिस थाने में हो, ऐसे रजिस्ट्रीकृत चिकित्सा व्यवसायी को, जो पुलिस अधिकारी द्वारा पेश किया जाए, प्रयोगशाला परीक्षण के लिए अपने रक्त का कोई नमूना देने की पुलिस अधिकारी द्वारा अपेक्षा की जा सकेगी, यदि :-
(क) पुलिस अधिकारी को ऐसा प्रतीत होता है कि वह युक्ति जिसके द्वारा ऐसे व्यक्ति के संबंध में श्वास-परीक्षण किया गया है, ऐसे व्यक्ति के रक्त में एल्कोहल होने का संकेत करती है; या
(ख) ऐसे व्यक्ति ने, जब उसे श्वास-परीक्षण कराने के लिए अवसर दिया गया था, ऐसा करने से इन्कार किया है, ऐसा नहीं किया है या करने में असफल रहा है :
परन्तु जहां ऐसा नमूना देने के लिए अपेक्षित व्यक्ति कोई स्त्री है और ऐसे पुलिस अधिकारी द्वारा पेश किया गया रजिस्ट्रीकृत चिकित्सा व्यवसायी कोई पुरुष चिकित्सा व्यवसायी है तो नमूना किसी स्त्री की उपस्थिति में ही, चाहे वह चिकित्सा व्यवसायी हो या नहीं, लिया जाएगा।
(2) किसी व्यक्ति से, जब वह अंतरंग रोगी के रूप में किसी अस्पताल में हो, किसी पुलिस अधिकारी द्वारा अस्पताल में प्रयोगशाला परीक्षण के लिए अपने रक्त का नमूना देने की अपेक्षा की जा सकेगी :-
(क) यदि पुलिस अधिकारी को यह प्रतीत होता है कि वह युक्ति, जिसके द्वारा ऐसे व्यक्ति के संबंध में श्वास का परीक्षण किया गया है, ऐसे व्यक्ति के रक्त में एल्कोहल होने का संकेत करती है, या
(ख) यदि उस व्यक्ति ने, चाहे अस्पताल में या अन्यत्र, श्वास-परीक्षण के लिए श्वास का नमूना देने की अपेक्षा की जाने पर ऐसा करने से इन्कार किया है, ऐसा नहीं किया है या ऐसा करने में असफल रहा है, और पुलिस अधिकारी के पास उसके रक्त में एल्कोहल होने का सन्देह करने का युक्तियुक्त कारण है:
परन्तु किसी व्यक्ति से, इस उपधारा के अधीन प्रयोगशाला परीक्षण के लिए अपने रक्त का नमूना देने की अपेक्षा नहीं की जाएगी यदि उस रजिस्ट्रीकृत चिकित्सा व्यवसायी को, जिसकी अव्यवहित देखरेख में उक्त व्यक्ति है, नमूना लेने की प्रस्थापना की सूचना पहले नहीं दी गई है, अथवा वह इस आधार पर नमूना दिए जाने पर आपत्ति करता है कि नमूने का दिया जाना या दिए जाने की अध्यपेक्षा रोगी की समुचित देख-रेख या उपचार पर प्रतिकूल प्रभाव डालेगी।
(3) इस धारा के अनुसरण में किए गए प्रयोगशाला परीक्षण के परिणाम साक्ष्य में ग्राह्य होंगे।
स्पष्टीकरण- इस धारा के प्रयोजनों के लिए “प्रयोगशाला परीक्षण” से केन्द्रीय सरकार या किसी राज्य सरकार द्वारा स्थापित, अनुरक्षित अथवा मान्यता प्राप्त प्रयोगशाला में रक्त के नमूने का किया गया विश्लेषण अभिप्रेत है।

Laboratory test-
(1) A person, who has been arrested under section 203 may, while at a police station, be required by a police officer to provide to such registered medical practitioner as may be produced by such police officer, a specimen of his blood for a laboratory test if :-
(a) it appears to the police officer that device, by means of which breath test was taken in relation to such person, indicates the presence of alcohol in the blood of such person, or
(b) such person, when given the opportunity to submit to a breath test, has refused, omitted or failed to do so :
Provided that where the person required to provide such specimen is a female and the registered medical practitioner produced by such police officer is a male medical practitioner, the specimen shall be taken only in the presence of a female, whether a medical practitioner or not.
(2) A person while at a hospital as an indoor patient may be required by a police officer to provide at the hospital a specimen of his blood for a laboratory test :-
(a) if it appears to the police officer that the device by means of which test is carried out in relation to the breath of such person indicates the presence of alcohol in the blood of such person, or
(b) if the person having been required, whether at the hospital or elsewhere, to provide a specimen of breath for a breath test, has refused, omitted or failed to do so and a police officer has reasonable cause to suspect him of having alcohol in his blood:
Provided that a person shall not be required to provide a specimen of his blood for a laboratory test under this sub-section if the registered medical practitioner in immediate charge of his case is not first notified of the proposal to make the requirement or objects to the provision of such specimen on the ground that its provision or the requirement to provide it would be prejudicial to the proper care or treatment of the patient.
(3) The results of a laboratory test made in pursuance of this section shall be admissible in evidence.
Explanation- For the purposes of this section, “laboratory test” means the analysis of a specimen of blood made at a laboratory established, maintained or recognised by the Central Government or a State Government.

हमारा प्रयास मोटर वाहन अधिनियम (MV Act) की धारा 204 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

मोटर वाहन अधिनियम की धारा 203 | श्वास-परीक्षण | MV Act, Section- 203 in hindi | Breath tests.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए मोटर वाहन अधिनियम की धारा 203 के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है मोटर वाहन अधिनियम की धारा- 203, साथ ही इस धारा के अंतर्गत क्या परिभाषित किया गया है, यह सभी जानकारी इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

मोटर वाहन अधिनियम की धारा- 203 का विवरण

मोटर वाहन अधिनियम (Motor Vehicles Act) की धारा -203 के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। इस अधिनियम के आधीन वर्दी पहने हुए कोई पुलिस अधिकारी या मोटर यान विभाग का कोई अधिकारी जिसे उस विभाग द्वारा इस निमित्त प्राधिकृत किया जाए, किसी सार्वजनिक स्थान में मोटर यान चलाने वाले या चलाने का प्रयास करने वाले किसी व्यक्ति से श्वास परीक्षण के लिए वहां या पास के स्थान में श्वास के एक या अधिक नमूने देने की उस दशा में अपेक्षा कर सकेगा।

मोटर वाहन अधिनियम की धारा- 203 के अनुसार

श्वास-परीक्षण-

(1) वर्दी पहने हुए कोई पुलिस अधिकारी या मोटर यान विभाग का कोई अधिकारी जिसे उस विभाग द्वारा इस निमित्त प्राधिकृत किया जाए, किसी सार्वजनिक स्थान में मोटर यान चलाने वाले या चलाने का प्रयास करने वाले किसी व्यक्ति से श्वास परीक्षण के लिए वहां या पास के स्थान में श्वास के एक या अधिक नमूने देने की उस दशा में अपेक्षा कर सकेगा जब ऐसे पुलिस अधिकारी या अधिकारी के पास ऐसे व्यक्ति द्वारा धारा 185 के अधीन दंडनीय कोई अपराध किए जाने का संदेह करने का कोई युक्तियुक्त कारण है:
परन्तु श्वास परीक्षण के लिए कोई अपेक्षा ऐसे अपराध के किए जाने के पश्चात् युक्तियुक्त तौर पर तब तक नहीं की जाएगी (जब तक कि ऐसा श्वास परीक्षण यथासाध्य शीघ्र नहीं करा लिया गया हो)
(2) यदि कोई मोटर यान किसी सार्वजनिक स्थान में दुर्घटनाग्रस्त है और वर्दी में किसी पुलिस अधिकारी को यह संदेह करने का युक्तियुक्त कारण है कि उस व्यक्ति के, जो दुर्घटना के समय मोटर यान चला रहा था, रक्त में एल्कोहल थी या वह धारा 185 में निर्दिष्ट किसी मादक द्रव्य के असर में यान चला रहा था, तो वह इस प्रकार मोटर यान चलाने वाले किसी व्यक्ति से :-
(क) ऐसे व्यक्ति की दशा में, जो किसी अस्पताल में अन्तरंग रोगी के रूप में है, उस अस्पताल में,
(ख) किसी अन्य व्यक्ति की दशा में, या तो उस स्थान पर या उसके समीप जहां अपेक्षा की गई है या यदि पुलिस अधिकारी उचित समझे तो पुलिस अधिकारी द्वारा विनिर्दिष्ट पुलिस थाने पर,
श्वास-परीक्षण के लिए श्वास-नमूना देने की अपेक्षा कर सकेगा :
परन्तु उस व्यक्ति से, जो किसी अस्पताल में अन्तरंग रोगी के रूप में है, ऐसा नमूना देने की अपेक्षा उस दशा में नहीं की जाएगी जब उस रजिस्ट्रीकृत चिकित्सा व्यवसायी को, जिसकी अव्यवहित देख-रेख में उक्त व्यक्ति है, नमूना लेने की प्रस्थापना की सूचना पहले नहीं दी गई है अथवा वह इस आधार पर नमूना दिए जाने पर आपत्ति करता है कि नमूने का दिया जाना या दिए जाने की अध्यपेक्षा रोगी की समुचित देख-रेख या उपचार पर प्रतिकूल प्रभाव डालेगी।
(3) यदि वर्दी में किसी पुलिस अधिकारी को उपधारा (1) या उपधारा (2) के अधीन किसी व्यक्ति पर उसके द्वारा किए गए श्वास-परीक्षण के परिणामस्वरूप यह प्रतीत होता है कि वह युक्ति जिसके द्वारा परीक्षण किया गया है, यह उपदर्शित करती है कि उस व्यक्ति के रक्त में एल्कोहल है, तो पुलिस अधिकारी उस व्यक्ति को बिना वारण्ट के गिरफ्तार कर सकेगा किन्तु तब नहीं जब वह व्यक्ति अन्तरंग रोगी के रूप में अस्पताल में हो ।
(4) यदि श्वास-परीक्षण के लिए श्वास का नमूना देने के लिए उपधारा (1) या उपधारा (2) के अधीन किसी पुलिस अधिकारी द्वारा अपेक्षित कोई व्यक्ति ऐसा करने से इन्कार करता है या ऐसा करने में असफल रहता है और पुलिस अधिकारी को उसके रक्त में एल्कोहल होने का सन्देह करने का युक्तियुक्त कारण है तो पुलिस अधिकारी उसे बिना वारण्ट के गिरफ्तार कर सकेगा किन्तु तब नहीं जब वह अंतरंग रोगी के रूप में अस्पताल में हो ।
(5) इस धारा के अधीन गिरफ्तार किए गए किसी व्यक्ति को, जब वह पुलिस थाने में हो, श्वास-परीक्षण के लिए श्वास का नमूना देने का अवसर दिया जाएगा ।
(6) इस धारा के उपबंधों के अनुसरण में किए गए श्वास-परीक्षण के परिणाम साक्ष्य में ग्राह्य होंगे।
स्पष्टीकरण- इस धारा के प्रयोजनों के लिए, श्वास-परीक्षण से किसी व्यक्ति के रक्त में एल्कोहल होने का कोई संकेत प्राप्त करने के प्रयोजनार्थ उस व्यक्ति द्वारा दिए गए श्वास के नमूने पर, उस युक्ति के द्वारा, जो केन्द्रीय सरकार द्वारा, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, ऐसे परीक्षण के प्रयोजन के लिए अनुमोदित की जाए, किया गया परीक्षण अभिप्रेत है।

Breath tests-
(1) A police officer in uniform or an officer of the Motor Vehicles Department, as may be authorised in this behalf by that Department, may require any person driving or attempting to drive a motor vehicle in a public place to provide one or more specimens of breath or breath test there or nearby, if such police officer or officer has any reasonable cause to suspect him of having committed an offence under section 185:
Provided that requirement for breath test shall be made (unless it is made) as soon as reasonably practicable after the commission of such offence.
(2) If a motor vehicle is involved in an accident in a public place and a police officer in uniform has any reasonable cause to suspect that the person who was driving the motor vehicle at the time of the accident, had alcohol in his blood or that he was driving under the influence of a drug referred to in section 185 he may require the person so driving the motor vehicle, to provide a specimen of his breath for a breath test :-
(a) in the case of a person who is at a hospital as an indoor patient, at the hospital,
(b) in the case of any other person, either at or near the place where the requirement is made, or, if the police officer thinks fit, at a police station specified by the police officer :
Provided that a person shall not be required to provide such a specimen while at a hospital as an indoor patient if the registered medical practitioner in immediate charge of his case is not first notified of the proposal to make the requirement or objects to the provision of a specimen on the ground, that its provision or the requirement to provide it would be prejudicial to the proper care or treatment of the patient.
(3) If it appears to a police officer in uniform, in consequence of a breath test carried out by him on any person under sub-section (1) or sub-section (2), that the device by means of which the test has been carried out indicates the presence of alcohol in the person’s blood, the police officer may arrest that person without warrant except while that person is at a hospital as an indoor patient.
(4) If a person, required by a police officer under sub-section (1) or subsection (2) to provide a specimen of breath for a breath test, refuses or fails to do so and the police officer has reasonable cause to suspect him of having alcohol in his blood, the police officer may arrest him without warrant except while he is at a hospital as an indoor patient.
(5) A person arrested under this section shall while at a police station, be given an opportunity to provide a specimen of breath for a breath test there.
(6) The results of a breath test made in pursuance of the provisions of this section shall be admissible in evidence.
Explanation- For the purposes of this section, “breath test” means a test for the purpose of obtaining an indication of the presence of alcohol in a person’s blood carried out on one or more specimens of breath provided by that person, by means of a device of a type approved by the Central Government, by notification in the Official Gazette, for the purpose of such a test.

हमारा प्रयास मोटर वाहन अधिनियम (MV Act) की धारा 203 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

मोटर वाहन अधिनियम की धारा 202 | वारण्ट के बिना गिरफ्तार करने की शक्ति | MV Act, Section- 202 in hindi | Power to arrest without warrant.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए मोटर वाहन अधिनियम की धारा 202 के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है मोटर वाहन अधिनियम की धारा- 202, साथ ही इस धारा के अंतर्गत क्या परिभाषित किया गया है, यह सभी जानकारी इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

मोटर वाहन अधिनियम की धारा- 202 का विवरण

मोटर वाहन अधिनियम (Motor Vehicles Act) की धारा -202 के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। इस अधिनियम के आधीन वर्दी में कोई भी पुलिस अधिकारी किसी व्यक्ति को, जिसने उसकी उपस्थिति में ऐसा अपराध किया है जो धारा 184 या धारा 185 या धारा 197 के अधीन दण्डनीय है, वारण्ट के बिना गिरफ्तार कर सकेगा।

मोटर वाहन अधिनियम की धारा- 202 के अनुसार

वारण्ट के बिना गिरफ्तार करने की शक्ति-

(1) वर्दी में कोई भी पुलिस अधिकारी किसी व्यक्ति को, जिसने उसकी उपस्थिति में ऐसा अपराध किया है जो धारा 184 या धारा 185 या धारा 197 के अधीन दण्डनीय है, वारण्ट के बिना गिरफ्तार कर सकेगा:
परन्तु ऐसे किसी व्यक्ति की जो धारा 185 के अधीन दण्डनीय अपराध के संबंध में ऐसे गिरफ्तार किया गया है, धारा 203 और धारा 204 में निर्दिष्ट उसकी चिकित्सीय परीक्षा उसकी गिरफ्तारी के दो घण्टों के भीतर किसी रजिस्ट्रीकृत चिकित्सा व्यवसायी से कराई जाएगी और ऐसा न करने की दशा में उसे अभिरक्षा से निर्मुक्त किया जाएगा।
(2) वर्दी पहने हुए कोई पुलिस अधिकारी ऐसे व्यक्ति को जिसने इस अधिनियम के अधीन कोई अपराध किया है, बिना वारंट के गिरफ्तार कर सकेगा, यदि ऐसा व्यक्ति अपना नाम और पता देने से इंकार करता है ।
(3) मोटर यान के ड्राइवर को वारण्ट के बिना गिरफ्तार करने वाला पुलिस अधिकारी परिस्थितियों से अपेक्षित होने पर यान के अस्थायी निपटारे के लिए ऐसे कदम उठाएगा या उठवाएगा जो वह उचित समझे।

Power to arrest without warrant-
(1) A police officer in uniform may arrest without warrant any person who in his presence commits an offence punishable under section 184 or section 185 or section 197:
Provided that any person so arrested in connection with an offence punishable under section 185 shall, within two hours of his arrest, be subjected to a medical examination referred to in sections 203 and 204 by a registered medical practitioner failing which he shall be released from custody.
(2) A police officer in uniform may arrest without warrant any person, who has committed an offence under this Act, if such person refuses to give his name and address.
(3) A police officer arresting without warrant the driver of a motor vehicle shall if the circumstances so require take or cause to be taken any steps he may consider proper for the temporary disposal of the vehicle.

हमारा प्रयास मोटर वाहन अधिनियम (MV Act) की धारा 202 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

मोटर वाहन अधिनियम की धारा 201 | यातायात के मुक्त प्रवाह में अवरोध डालने के लिए शास्ति | MV Act, Section- 201 in hindi | Penalty for causing obstruction to free flow of traffic.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए मोटर वाहन अधिनियम की धारा 201 के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है मोटर वाहन अधिनियम की धारा- 201, साथ ही इस धारा के अंतर्गत क्या परिभाषित किया गया है, यह सभी जानकारी इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

मोटर वाहन अधिनियम की धारा- 201 का विवरण

मोटर वाहन अधिनियम (Motor Vehicles Act) की धारा -201 के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। इस अधिनियम के आधीन जो कोई किसी यान को किसी सार्वजनिक स्थान पर ऐसी रीति से रखेगा जिससे कि यातायात का मुक्त प्रवाह अवरुद्ध होता है तो वह, जब तक यान उस स्थिति में रहता है, पांच सौ रुपए तक की शास्ति के लिए दायी होगा।

मोटर वाहन अधिनियम की धारा- 201 के अनुसार

यातायात के मुक्त प्रवाह में अवरोध डालने के लिए शास्ति-

(1) जो कोई किसी यान को किसी सार्वजनिक स्थान पर ऐसी रीति से रखेगा जिससे कि यातायात का मुक्त प्रवाह अवरुद्ध होता है तो वह, जब तक यान उस स्थिति में रहता है, पांच सौ रुपए तक की शास्ति के लिए दायी होगा:
परन्तु दुर्घटनाग्रस्त यान केवल उस समय से शास्ति का दायी होगा जिस समय विधि के अधीन निरीक्षण की औपचारिकताएं पूरी हो जाती हैं :
[परन्तु यह और कि जहां यान किसी [केन्द्रीय सरकार या राज्य सरकार द्वारा प्राधिकृत कोई अभिकरण द्वारा हटाया जाता है, वहां हटाए जाने का प्रभार] यान के स्वामी या ऐसे यान के भारसाधक व्यक्ति से वसूल किए जाएंगे।]
(2) इस धारा के अधीन शास्तियां या [हटाने का प्रभार] ऐसे अधिकारी या प्राधिकारी द्वारा वसूल किए जाएंगे जिसे राज्य सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, प्राधिकृत करे ।]
(3) उपधारा (1) वहां लागू नहीं होगी जहां मोटर यान ने अनवेक्षित खराबी हो गई है और हटाए जाने की प्रक्रिया में है।
स्पष्टीकरण- इस धारा के प्रयोजनों के लिए “हटाए जाने के प्रभारों” के अंतर्गत अनुकर्षण के माध्यम सहित और ऐसे मोटर यान के भंडारण से संबद्ध किन्हीं लागतों सहित भी एक अवस्थिति से दूसरी अवस्थिति तक एक मोटर यान के हटाए जाने में अंतवलित कोई लागत सम्मिलित होगी।

Penalty for causing obstruction to free flow of traffic-
(1) Whoever keeps a vehicle on any public place, in such a manner, so as to cause impediment to the free flow of traffic, shall be liable for penalty up to [five hundred rupees], so long as it remains in that position :
Provided that the vehicle involved in accidents shall be liable for penalty only from the time of completion of inspection formalities under the law:
Provided further that where the vehicle is removed by [an agency authorised by the Central Government or State Government, removal charges] shall be recovered from the vehicle owner or person in-charge of such vehicle.
(2) Penalties or [removal charges] under this section shall be recovered by such officer or authority as the State Government may, by notification in the Official Gazette, authorise.
(3) Sub-section (1) shall not apply where the motor vehicle has suffered an unforeseen breakdown and is in the process of being removed.
Explanation- For the purposes of this section,”removal charges” includes any costs involved in the removal of the motor vehicle from one location to another and also includes any costs related to storage of such motor vehicle.

हमारा प्रयास मोटर वाहन अधिनियम (MV Act) की धारा 201 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।