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मोटर वाहन अधिनियम की धारा 200 | कतिपय अपराधों का शमन | MV Act, Section- 200 in hindi | Composition of certain offences.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए मोटर वाहन अधिनियम की धारा 200 के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है मोटर वाहन अधिनियम की धारा- 200, साथ ही इस धारा के अंतर्गत क्या परिभाषित किया गया है, यह सभी जानकारी इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

मोटर वाहन अधिनियम की धारा- 200 का विवरण

मोटर वाहन अधिनियम (Motor Vehicles Act) की धारा -200 के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। इस उपरोक्त धाराओ के अन्तर्गत किये गये अपराधों मे कतिपय अपराधों का शमन अधिनियम के प्रारम्भ के पूर्व किया गया हो या पश्चात् किया गया हो, ऐसे अधिकारियों या प्राधिकारियों द्वारा और ऐसी राशि के लिए जो राज्य सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, इस निमित्त विनिर्दिष्ट करे, शमन या तो अभियोजन संस्थित किए जाने के पूर्व या पश्चात् किया जा सकेगा।

मोटर वाहन अधिनियम की धारा- 200 के अनुसार

कतिपय अपराधों का शमन-

(1) [धारा 177, धारा 178, धारा 179, धारा 180, धारा 181, धारा 182, धारा 182क की उपधारा (1) या उपधारा (3) या उपधारा (4), धारा 182ख, धारा 183 की उपधारा (1) या उपधारा (2), हस्तधारित संसूचना युक्तियों के उपयोग के विस्तार तक ही धारा 184, धारा 186, धारा 189, धारा 190 की उपधारा (2), धारा 192, धारा 192क, धारा 194, धारा 194क, धारा 194ख, धारा 194ग, धारा 194घ, धारा 194ङ, धारा 194च, धारा 196, धारा 198 के अधीन दण्डनीय] किसी अपराध का, चाहे वह इस अधिनियम के प्रारम्भ के पूर्व किया गया हो या पश्चात् किया गया हो, ऐसे अधिकारियों या प्राधिकारियों द्वारा और ऐसी राशि के लिए जो राज्य सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, इस निमित्त विनिर्दिष्ट करे, शमन या तो अभियोजन संस्थित किए जाने के पूर्व या पश्चात् किया जा सकेगा :
[पंरतु यह कि राज्य सरकार ऐसी रकम के अतिरिक्त, अपराधी से सामुदायिक सेवा की अवधि का वचनबंध करने की अपेक्षा कर सकेगी ।]
(2) जहां किसी अपराध का शमन उपधारा (1) के अधीन किया गया है वहां अपराधी को, यदि वह अभिरक्षा में हो, निर्मुक्त कर दिया जाएगा और ऐसे अपराध के बारे में उसके विरुद्ध आगे कार्यवाही नहीं की जाएगी :
[परंतु इस धारा के अधीन शमन के होते हुए भी, ऐसा अपराध यह अवधारण करने के प्रयोजन के लिए उसी अपराध के पूर्व में किया जाना समझा जाएगा कि क्या पश्चातवर्ती अपराध किया गया है:
परंतु यह और कि किसी अपराध का शमन अपराधी को धारा 206 की उपधारा (4) के अधीन कार्यवाहियों से या चालक पुनश्चर्या प्रशिक्षण पाठयक्रम पूरा करने की बाध्यता या संपूर्ण सामदायिक सेवा की बाध्यता से यदि लागू हो, उन्मुक्त नहीं करेगा।

Composition of certain offences-
(1) Any offence whether committed before or after the commencement of this Act [punishable under section 177, section 178, section 179, section 180, section 181, section 182, sub-section (1) or subsection (3) or sub-section (4) of section 182A, section 182B, sub-section (1) or subsection (2) of section 183, section 184 only to the extent of use of handheld communication devices, section 186, section 189, sub-section (2) of section 190, section 192, section 192A, section 194, section 1944, section 194B, section 1940, section 1940, section 1948, section 194F, section 196, section 198] may either before or after the institution of the prosecution, be compounded by such officers or authorities and for such amount as the State Government may, by notification in the Official Gazette, specify in this behalf :
[Provided that the State Government may, in addition to such amount, require the offender to undertake a period of community service.]
(2) Where an offence has compounded under sub-section (1), the offender, if in custody, shall be discharged and no further proceedings shall be taken against him in respect of such offence :
[Provided that notwithstanding compounding under this section, such offence shall be deemed to be a previous commission of the same offence for the purpose of determining whether a subsequent offence has been committed:
Provided further that compounding of an offence will not discharge the offender from proceedings under sub-section (4) of section 206 or the obligation to complete a driver refresher training course, or the obligation to complete community service, if applicable.

हमारा प्रयास मोटर वाहन अधिनियम (MV Act) की धारा 200 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

मोटर वाहन अधिनियम की धारा 199B | जुर्मानों का पुनरीक्षण | MV Act, Section- 199B in hindi | Revision of fines.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए मोटर वाहन अधिनियम की धारा 199B के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है मोटर वाहन अधिनियम की धारा- 199B, साथ ही इस धारा के अंतर्गत क्या परिभाषित किया गया है, यह सभी जानकारी इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

मोटर वाहन अधिनियम की धारा- 199B का विवरण

मोटर वाहन अधिनियम (Motor Vehicles Act) की धारा -199B के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। इस अधिनियम में यथा उपबंधित जुर्मानों को मोटरयान (संशोधन) अधिनियम, 2019 के प्रारंभ की तारीख से प्रत्येक वर्ष के 1 अप्रैल को वार्षिक आधार पर विद्यमान जुर्मानों के मूल्य से दस प्रतिशत से अनधिक की ऐसी रकम तक बढ़ाया जाएगा, जो केन्द्रीय सरकार द्वारा अधिसूचित की जाए।

मोटर वाहन अधिनियम की धारा- 199B के अनुसार

जुर्मानों का पुनरीक्षण-

इस अधिनियम में यथा उपबंधित जुर्मानों को मोटरयान (संशोधन) अधिनियम, 2019 के प्रारंभ की तारीख से प्रत्येक वर्ष के 1 अप्रैल को वार्षिक आधार पर विद्यमान जुर्मानों के मूल्य से दस प्रतिशत से अनधिक की ऐसी रकम तक बढ़ाया जाएगा, जो केन्द्रीय सरकार द्वारा अधिसूचित की जाए।

Revision of fines-
The fines as provided in this Act shall be increased by such amount not exceeding ten per cent. in value of the existing fines, on an annual basis on 1st day of April of each year from the date of commencement of the Motor Vehicles (Amendment) Act, 2019, as may be notified by the Central Government.

हमारा प्रयास मोटर वाहन अधिनियम (MV Act) की धारा 199B की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

मोटर वाहन अधिनियम की धारा 199A | किशोर द्वारा अपराध | MV Act, Section- 199A in hindi | Offences by Juveniles.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए मोटर वाहन अधिनियम की धारा 199A के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है मोटर वाहन अधिनियम की धारा- 199A, साथ ही इस धारा के अंतर्गत क्या परिभाषित किया गया है, यह सभी जानकारी इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

मोटर वाहन अधिनियम की धारा- 199A का विवरण

मोटर वाहन अधिनियम (Motor Vehicles Act) की धारा -199A के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। जहां कोई अपराध इस अधिनियम के अधीन किसी किशोर द्वारा किया गया है ऐसे किशोर संरक्षक या मोटर यान का स्वामी उल्लंघन का दोषी समझा जाएगा और उसके विरुद्ध कार्रवाई का दायी होगा।

मोटर वाहन अधिनियम की धारा- 199A के अनुसार

किशोर द्वारा अपराध-

(1) जहां कोई अपराध इस अधिनियम के अधीन किसी किशोर द्वारा किया गया है ऐसे किशोर संरक्षक या मोटर यान का स्वामी उल्लंघन का दोषी समझा जाएगा और उसके विरुद्ध कार्रवाई का दायी होगा तथा तद्नुसार दंडित किया जाएगा :
परंतु इस उपधारा की कोई बात, ऐसे संरक्षक या स्वामी को इस अधिनियम में उपबंधित किसी दंड के लिए दायी नहीं बनाएगी यदि वह यह साबित कर देता है कि अपराध उसकी जानकारी के बिना किया गया था या उसने ऐसे अपराध के किए जाने को रोकने के लिए सम्यक तत्परता बरती थी।
स्पष्टीकरण- इस धारा के प्रयोजन के लिए, न्यायालय यह उपधारणा करेगा कि किशोर द्वारा मोटर यान का प्रयोग, यथास्थिोति, ऐसे किशोर का संरक्षक था या स्वामी की सहमति से किया गया था।
(2) उपधारा (1) के अधीन शास्ति के अतिरिक्त ऐसा संरक्षक या स्वामी ऐसे कारावास से जिसकी अवधि तीन वर्ष तक की हो सकेगी और जुर्माने से जो पच्चीस हजार रुपए तक का हो सकेगा, दंडनीय होगा ।
(3) उपधारा (1) और उपधारा (2) के उपबंध ऐसे संरक्षक या स्वामी को लागू नहीं होंगे यदि अपराध करने वाले किशोर को धारा 8 के अधीन शिक्षार्थी अनुज्ञप्ति या चालन अनुज्ञप्ति प्रदान की गई थी और ऐसा मोटर यान प्रचालित कर रहा था जिसे ऐसा किशोर चलाने के लिए अनुज्ञप्त किया गया था ।
(4) जहां इस धारा के अधीन कोई अपराध किसी किशोर द्वारा किया गया है वहां अपराध किए जाने में प्रयुक्त मोटर यान बारह मास की अवधि के लिए रद्द किया जाएगा ।
(5) जहां इस अधिनियम के अधीन कोई अपराध किसी किशोर द्वारा किया गया है वहां धारा 4 या धारा 7 के होते हुए भी, ऐसा किशोर धारा 9 के अधीन चालन अनुज्ञप्ति या धारा 8 के अधीन शिक्षार्थी अनुज्ञप्ति प्रदान किए जाने के लिए पात्र तब तक नहीं होगा जब तक कि ऐसे किशोर ने पच्चीस वर्ष की आयु पूरी न कर ली हो ।
(6) जहां इस अपराध के अधीन कोई अपराध किसी किशोर द्वारा किया गया है वहां ऐसा किशोर इस अधिनियम में यथा उपबंधित ऐसे जुर्मानों से दंडनीय होगा जबकि कोई अभिरक्षक अभिरक्षा, दंडादेश किशोर न्याय अधिनियम, 2000 (2000 का 56) के उपबंधों के अधीन उपांतरित किया जा सकेगा।

Offences by Juveniles-
(1) Where an offence under this Act has been committed by a juvenile, the guardian of such juvenile or the owner of the motor vehicle shall be deemed to be guilty of the contravention and shall be liable to be proceeded against and punished accordingly:
Provided that nothing in this sub-section shall render such guardian or owner liable to any punishment provided in this Act, if he proves that the offence was committed without his knowledge or that he exercised all due diligence to prevent the commission of such offence.
Explanation- For the purposes of this section, the Court shall presume that the use of the motor vehicle by the juvenile was with the consent of the guardian of such juvenile or the owner of the motor vehicle, as the case may be.
(2) In addition to the penalty under sub-section (1), such guardian or owner shall be punishable with imprisonment for a term which may extend to three years and with a fine of twenty-five thousand rupees.
(3). The provisions of sub-section (1) and sub-section (2) shall not apply to such guardian or owner if the juvenile committing the offence had been granted a learner’s licence under section 8 or a driving licence and was operating a motor vehicle which such juvenile was licensed to operate.
(4) Where an offence under this Act has been committed by a juvenile, the registration of the motor vehicle used in the commission of the offence shall be cancelled for a period of twelve months.
(5) Where an offence under this Act has been committed by a juvenile, then notwithstanding section 4 or section 7, such juvenile shall not be eligible to be granted a driving licence under section 9 or a learner’s licence under section 8 until such juvenile has attained the age of twenty-five years.
(6) Where an offence under this Act has been committed by a juvenile, then such juvenile shall be punishable with such fines as provided in the Act while any custodial sentence may be modified as per the provisions of the Juvenile Justice Act, 2000 (56 of 2000).

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मोटर वाहन अधिनियम की धारा 199 | कंपनियों द्वारा अपराध | MV Act, Section- 199 in hindi | Offences by companies.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए मोटर वाहन अधिनियम की धारा 199 के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है मोटर वाहन अधिनियम की धारा- 199, साथ ही इस धारा के अंतर्गत क्या परिभाषित किया गया है, यह सभी जानकारी इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

मोटर वाहन अधिनियम की धारा- 199 का विवरण

मोटर वाहन अधिनियम (Motor Vehicles Act) की धारा -199 के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। इस अधिनियम के अधीन अधीन अपराध किसी कंपनी द्वारा किया गया है वहां प्रत्येक व्यक्ति, जो उस अपराध के किए जाने के समय उस कंपनी के कारबार के संचालन के लिए उस कंपनी का भारसाधक और उसके प्रति उत्तरदायी था और साथ ही वह कंपनी भी उस उल्लंघन के दोषी समझे जाएंगे तथा तदनुसार अपने विरुद्ध कार्यवाही किए जाने और दण्डित किए जाने के भागी होंगा।

मोटर वाहन अधिनियम की धारा- 199 के अनुसार

कंपनियों द्वारा अपराध-

(1) जहां इस अधिनियम के अधीन अपराध किसी कंपनी द्वारा किया गया है वहां प्रत्येक व्यक्ति, जो उस अपराध के किए जाने के समय उस कंपनी के कारबार के संचालन के लिए उस कंपनी का भारसाधक और उसके प्रति उत्तरदायी था और साथ ही वह कंपनी भी उस उल्लंघन के दोषी समझे जाएंगे तथा तदनुसार अपने विरुद्ध कार्यवाही किए जाने और दण्डित किए जाने के भागी होंगे :
परन्तु इस उपधारा की कोई बात किसी ऐसे व्यक्ति को इस अधिनियम में उपबंधित किसी दण्ड के लिए दायी नहीं बनाएगी यदि वह यह साबित कर देता है कि वह अपराध उसकी जानकारी के बिना किया गया था या उस अपराध के किए जाने का निवारण करने के लिए उसने सब सम्यक् तत्परता बरती थी।
(2) उपधारा (1) में किसी बात के होते हुए भी, जहां इस अधिनियम के अधीन कोई अपराध किसी कंपनी द्वारा किया गया है और यह साबित हो जाता है कि वह अपराध कंपनी के किसी निदेशक, प्रबंधक, सचिव या अन्य अधिकारी की सहमति या मौनानुकूलता से किया गया है या उस अपराध का किया जाना उसकी किसी उपेक्षा के कारण माना जा सकता है, वहां ऐसा निदेशक, प्रबंधक, सचिव या अन्य अधिकारी भी उस अपराध का दोषी समझा जाएगा और तदनुसार अपने विरुद्ध कार्यवाही किए जाने और दण्डित किए जाने का भागी होगा ।
स्पष्टीकरण- इस धारा के प्रयोजनों के लिए–
(क) “कंपनी” से कोई भी निगमित निकाय अभिप्रेत है और उसके अन्तर्गत फर्म या व्यष्टियों का अन्य संगम भी है; तथा
(ख) फर्म के संबंध में, “निदेशक” से उस फर्म का भागीदार अभिप्रेत है।

Offences by companies-
(1) Where an offence under this Act has been committed by a company, every person who at the time the offence was committed, was in charge of, and was responsible to, the company for the conduct of the business of the company, as well as the company, shall be deemed to be guilty of the contravention and shall be liable to be proceeded against and punished accordingly:
Provided that nothing in this sub-section shall render any such person liable to any punishment provided in this Act, if he proves that the offence was committed without his knowledge or that he exercised all due diligence to prevent the commission of such offence.
(2) Notwithstanding anything contained in sub-section (1), where an offence under this Act has been committed by a company, and it is proved that the offence was committed with the consent or connivance of, or is attributable to any neglect on the part of any director, manager, secretary or other officer of the company, such director, manager, secretary or other officer shall also be deemed to be guilty of that offence and shall be liable to be proceeded against and punished accordingly.
Explanation- For the purposes of this section-
(a) “company“ means any body corporate and includes a firm or other association of individuals; and
(b) “director”, in relation to a firm, means a partner in the firm.

हमारा प्रयास मोटर वाहन अधिनियम (MV Act) की धारा 199 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

मोटर वाहन अधिनियम की धारा 198A | सड़क डिजाइन, संनिर्माण और रख-रखाव के मानकों का अनुपालन करने में असफल रहना | MV Act, Section- 198A in hindi | Failure to comply with standards for road design, construction and maintenance.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए मोटर वाहन अधिनियम की धारा 198A के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है मोटर वाहन अधिनियम की धारा- 198A, साथ ही इस धारा के अंतर्गत क्या परिभाषित किया गया है, यह सभी जानकारी इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

मोटर वाहन अधिनियम की धारा- 198A का विवरण

मोटर वाहन अधिनियम (Motor Vehicles Act) की धारा -198A के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। इस अधिनियम के अधीन सड़क के डिजाइन या संनिर्माण या रख-रखाव के सुरक्षा मानकों के लिए उत्तरदायी कोई अभिहित प्राधिकारी, संविदाकार, परामर्शी या ग्राही सड़क डिजाइन, संनिर्माण और रखरखाव के ऐसे मानकों का अनुपालन करना इत्यादि परिभाषित किया गया है।

मोटर वाहन अधिनियम की धारा- 198A के अनुसार

सड़क डिजाइन, संनिर्माण और रख-रखाव के मानकों का अनुपालन करने में असफल रहना-

(1) सड़क के डिजाइन या संनिर्माण या रख-रखाव के सुरक्षा मानकों के लिए उत्तरदायी कोई अभिहित प्राधिकारी, संविदाकार, परामर्शी या ग्राही सड़क डिजाइन, संनिर्माण और रखरखाव के ऐसे मानकों का अनुपालन करेगा, जो केन्द्रीय सरकार द्वारा समय-समय पर विहित किए जाएं।
(2) जहां उपधारा (1) के अधीन उत्तरदायी किसी अभिहित प्राधिकारी, संविदाकार, परामर्शी या ग्राही द्वारा सड़क डिजाइन, संनिर्माण और रख-रखाव के मानकों का अनुपालन करने में असफल रहने के परिणामस्वरूप किसी व्यक्ति की मृत्यु या निःशक्तता होती है वहां ऐसा प्राधिकारी या संविदाकार या ग्राही ऐसे जुर्माने से दंडनीय होगा, जो एक लाख रुपए तक का हो सकेगा और उसका संदाय धारा 164ख के अधीन गठित निधि में किया जाएगा।
(3) उपधारा (2) के प्रयोजनों के लिए न्यायालय विशिष्ट रूप से निम्नलिखित विषयों को ध्यान में रखेगा, अर्थात् :-
(क) सड़क की विशेषताएं और ऐसे यातायात की प्रकृति और किस्म जिसके द्वारा उसे युक्तियुक्त रूप से सड़क के डिजाइन के अनुसार उपयोग किया जाना संभावी है;
(ख) उस विशेषता की सड़क और ऐसे यातायात द्वारा उपयोग के लिए लागू रख-रखाव संनियमों का मानक;
(ग) मरम्मत की वह स्थिति जिसमें सड़क को उपयोग करने वाले उस सड़क को पाए जाने की प्रत्याशा करते हैं;
(घ) क्या सड़क के रख-रखाव के लिए उत्तरदायी अभिहित प्राधिकारी यह जानता था या उससे यह जानने की युक्तियुक्त रूप से प्रत्याशा की जा सकती थी कि सड़क के उस भाग की, जिससे कार्रवाई संबंधित है, स्थिति के कारण सड़क का उपयोग करने वालों के खतरे में पड़ने की संभावना थी;
(ङ) क्या सड़क के रख-रखाव के लिए उत्तरदायी अभिहित प्राधिकारी से युक्तियुक्त रूप से यह प्रत्याशित था कि वह हेतुक उद्भूत होने से पूर्व सड़क के उस भाग की मरम्मत करता;
(च) क्या सड़क चिह्नों के माध्यम से सड़क की स्थिति के संबंध में पर्याप्त चेतावनी सूचनाएं प्रदर्शित की गई थी; और
(छ) ऐसे अन्य विषय, जो केन्द्रीय सरकार द्वारा विहित किए जाएं ।
स्पष्टीकरण- इस धारा के प्रयोजनों के लिए, “संविदाकार” पद में उप-संविदाकार और ऐसे सभी व्यक्ति सम्मिलित होंगे. जो किसी भी प्रक्रम पर सडक के भाग के डिजाइन, संनिर्माण और रख-रखाव के लिए उत्तरदायी हैं।

Failure to comply with standards for road design, construction and maintenance-
(1) Any designated authority, contractor, consultant or concessionaire responsible for the design or construction or maintenance of the safety standards of the road shall follow such design, construction and maintenance standards, as may be prescribed by the Central Government from time to time.
(2) Where failure on the part of the designated authority, contractor, consultant or concessionaire responsible under sub-section (1) to comply with standards for road design, construction and maintenance, results in death or disability, such authority or contractor or concessionaire shall be punishable with a fine which may extend to one lakh rupees and the same shall be paid to the Fund constituted under section 164B.
(3) For the purposes of sub-section (2), the court shall in particular have regard to the following matters namely:-
(a) the characteristics of the road, and the nature and type of traffic which was reasonably expected to use it as per the design of road;
(b) the standard of maintenance norms applicable for a road of that character and use by such traffic;
(c) the state of repair in which road users would have expected to find the road;
(d) whether the designated authority responsible for the maintenance of the road knew, or could reasonably have been expected to know, that the condition of the part of the road to which the action relates was likely to cause danger to the road users;
(e) whether the designated authority responsible for the maintenance of the road could not reasonably have been expected to repair that part of the road before the cause of action arose;
(f) whether adequate warning notices through road signs, of its condition had been displayed; and (g) such other matters as may be prescribed by the Central Government.
Explanation- For the purposes of this section, the term “contractor” shall include sub-contractors and all such persons who are responsible for any stage in the design, construction and maintenance of a stretch of road.

हमारा प्रयास मोटर वाहन अधिनियम (MV Act) की धारा 198A की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

मोटर वाहन अधिनियम की धारा 198 | यान में अनधिकृत हस्तक्षेप | MV Act, Section- 198 in hindi | Unauthorised interference with vehicle.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए मोटर वाहन अधिनियम की धारा 198 के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है मोटर वाहन अधिनियम की धारा- 198, साथ ही इस धारा के अंतर्गत क्या परिभाषित किया गया है, यह सभी जानकारी इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

मोटर वाहन अधिनियम की धारा- 198 का विवरण

मोटर वाहन अधिनियम (Motor Vehicles Act) की धारा -198 के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। इस अधिनियम के अधीन जो कोई विधिपूर्ण प्राधिकार या युक्तियुक्त प्रतिहेतु के बिना किसी खड़े हुए मोटर यान में प्रवेश करेगा या चढ़ेगा या मोटर यान के ब्रेक या यंत्र जाल के किसी भाग को बिगाड़ेगा, तो वह जुर्माने दंडनीय होगा।

मोटर वाहन अधिनियम की धारा- 198 के अनुसार

यान में अनधिकृत हस्तक्षेप-

जो कोई विधिपूर्ण प्राधिकार या युक्तियुक्त प्रतिहेतु के बिना किसी खड़े हुए मोटर यान में प्रवेश करेगा या चढ़ेगा या मोटर यान के ब्रेक या यंत्र जाल के किसी भाग को बिगाड़ेगा वह एक हजार रुपए के जुर्माने से, दण्डनीय होगा।

Unauthorised interference with vehicle-
Whoever otherwise than with lawful authority or reasonable excuse enters or mounts any stationary motor vehicle or tampers with the brake or any part of the mechanism of a motor vehicle shall be punishable with fine [of one thousand rupees.

हमारा प्रयास मोटर वाहन अधिनियम (MV Act) की धारा 198 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।