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मोटर वाहन अधिनियम की धारा 113 | भार की सीमाएं और उपयोग किए जाने के बारे में निर्बन्धन | MV Act, Section- 113 in hindi | Limits of weight and limitations on use.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए मोटर वाहन अधिनियम की धारा 113 के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है मोटर वाहन अधिनियम की धारा- 113, साथ ही इस धारा के अंतर्गत क्या परिभाषित किया गया है, यह सभी जानकारी इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

मोटर वाहन अधिनियम की धारा- 113 का विवरण

मोटर वाहन अधिनियम (Motor Vehicles Act) की धारा -113 के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। इस अध्याय के अधीन राज्य सरकार राज्य या प्रादेशिक परिवहन प्राधिकरणों द्वारा परिवहन यानों के लिए परमिट दिए जाने के संबंध में शर्ते विहित कर सकेंगी तथा किसी क्षेत्र में या मार्ग पर ऐसे यानों का उपयोग प्रतिषिद्ध या निर्बन्धित कर सकेगी।

मोटर वाहन अधिनियम की धारा- 113 के अनुसार

भार की सीमाएं और उपयोग किए जाने के बारे में निर्बन्धन-

(1) राज्य सरकार राज्य या प्रादेशिक परिवहन प्राधिकरणों द्वारा परिवहन यानों के लिए परमिट दिए जाने के संबंध में शर्ते विहित कर सकेंगी तथा किसी क्षेत्र में या मार्ग पर ऐसे यानों का उपयोग प्रतिषिद्ध या निर्बन्धित कर सकेगी ।
(2) जैसा अन्यथा विहित किया जाए उसके सिवाय, कोई व्यक्ति किसी ऐसे मोटर यान को, जिसमें वातीय टायर न लगे हों, किसी सार्वजनिक स्थान में न तो चलाएगा, न चलवाएगा और न चलाने देगा।
(3) कोई व्यक्ति ऐसे किसी मोटर यान या ट्रेलर को किसी सार्वजनिक स्थान में न तो चलाएगा, न चलवाएगा और न चलाने देगा —
(क) जिसका लदान रहित भार यान के रजिस्ट्रीकरण प्रमाण-पत्र में विनिर्दिष्ट लदान रहित भार से अधिक है, या
(ख) जिसका लदान सहित भार रजिस्ट्रीकरण प्रमाण-पत्र में विनिर्दिष्ट यान सहित सकल भार से अधिक है।
(4) जहां उपधारा (2) या उपधारा (3) के खंड (क) का उल्लंघन करके चलाए गए किसी मोटर यान या ट्रेलर का ड्राइवर या भारसाधक व्यक्ति उसका स्वामी नहीं है, वहां न्यायालय यह उपधारणा कर सकेगा कि वह अपराध उस मोटर यान या ट्रेलर के स्वामी की जानकारी से या उसके आदेशों के अधीन किया गया था।

Limits of weight and limitations on use-
(1) The State Government may prescribe the conditions for the issue of permits for [transport vehicles] by the State or Regional Transport Authorities and may prohibit or restrict the use of such vehicles in any area or route.
(2) Except as may be otherwise prescribed, no person shall drive or cause or allow to be driven in any public place any motor vehicle which is not fitted with pneumatic tyres.
(3) No person shall drive or cause or allow to be driven in any public place any motor vehicle or trailer-
(a) the unladen weight of which exceeds the unladen weight specified in the certificate of registration of the vehicle, or
(b) the laden weight of which exceeds the gross vehicle weight specified in the certificate of registration.
(4) Where the driver or person in charge of a motor vehicle or trailer driven in contravention of sub-section (2) or clause (a) of sub-section (3) is not the owner, a Court may presume that the offence was committed with the knowledge of or under the orders of the owner of the motor vehicle or trailer.

हमारा प्रयास मोटर वाहन अधिनियम (MV Act) की धारा 113 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

मोटर वाहन अधिनियम की धारा 112 | गति सीमा | MV Act, Section- 112 in hindi | Limits of speed.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए मोटर वाहन अधिनियम की धारा 112 के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है मोटर वाहन अधिनियम की धारा- 112, साथ ही इस धारा के अंतर्गत क्या परिभाषित किया गया है, यह सभी जानकारी इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

मोटर वाहन अधिनियम की धारा- 112 का विवरण

मोटर वाहन अधिनियम (Motor Vehicles Act) की धारा -112 के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। इस अध्याय के अधीन कोई व्यक्ति किसी सार्वजनिक स्थान में किसी मोटर यान को न तो उस अधिकतम गति से अधिक या न्यूनतम गति से कम गति पर चलाएगा, न चलवाएगा और न चलाने देगा।

मोटर वाहन अधिनियम की धारा- 112 के अनुसार

गति सीमा-

(1) कोई व्यक्ति किसी सार्वजनिक स्थान में किसी मोटर यान को न तो उस अधिकतम गति से अधिक या न्यूनतम गति से कम गति पर चलाएगा, न चलवाएगा और न चलाने देगा जो इस अधिनियम के अधीन या उस समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि के द्वारा या अधीन उस यान के लिए नियत की गई है :
परन्तु ऐसी अधिकतम गति किसी भी दशा में केन्द्रीय सरकार द्वारा, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, किसी मोटर यान या किसी वर्ग या वर्णन के मोटर यानों के लिए नियत की गई अधिकतम गति से अधिक नहीं होगी।
(2) यदि राज्य सरकार का या ऐसे किसी प्राधिकारी का जो इस निमित्त राज्य सरकार द्वारा प्राधिकृत हो, समाधान हो जाता है कि सार्वजनिक सुरक्षा या सुविधा की दृष्टि से या किसी सड़क या पुल के स्वरूप के कारण यह आवश्यक है कि मोटर यानों की गति परिसीमित की जाए, तो वह राजपत्र में अधिसूचना द्वारा और धारा 116 के अधीन उचित स्थानों पर समुचित यातायात चिन्ह रखवाकर या लगवाकर मोटर यानों की या किसी विनिर्दिष्ट वर्ग या वर्णन के मोटर यानों की या ऐसे मोटर यानों की जिनके साथ ट्रेलर संलग्न है या तो साधारणतया या किसी विशिष्ट क्षेत्र में या विशिष्ट सड़क या सड़कों के बारे में ऐसी अधिकतम गति सीमाएं या न्यूनतम गति सीमाएं नियत कर सकेगी जो वह ठीक समझे:
परन्तु ऐसी अधिसूचना आवश्यक नहीं होगी यदि इस धारा के अधीन कोई निर्बन्धन एक मास से अधिक के लिए प्रवृत्त नहीं रहना है।
(3) इस धारा की कोई बात धारा 60 के अधीन रजिस्ट्रीकृत किसी यान को उस समय लागू न होगी जब उसका उपयोग युद्धाभ्यास और खुले क्षेत्र में गोला चलाने तथा तोप दागने का अभ्यास अधिनियम, 1938 (1938 का 5) की धारा 2 की उपधारा (1) के अधीन अधिसूचना में विनिर्दिष्ट क्षेत्र में और अवधि के दौरान सैनिक युद्धाभ्यास के लिए किया जा रहा है।

Limits of speed-
(1) No person shall drive a motor vehicle or cause or allow a motor vehicle to be driven in any public place at a speed exceeding the maximum speed or below the minimum speed fixed for the vehicle under this Act or by or under any other law for the time being in force :
Provided that such maximum speed shall in no case exceed the maximum fixed for any motor vehicle or class or description of motor vehicles by the Central Government by notification in the Official Gazette.
(2) The State Government or any authority authorised in this behalf by the State Government may, if satisfied that it is necessary to restrict the speed of motor vehicles in the interest of public safety or convenience or because of the nature of any road or bridge, by notification in the Official Gazette, and by causing appropriate traffic signs to be placed or erected under section 116 at suitable places, fix such maximum speed limits or minimum speed limits as it thinks fit for motor vehicles or any specified class or description of motor vehicles or for motor vehicles to which a trailer is attached, either generally or in a particular area or on a particular road or roads :
Provided that no such notification is necessary if any restriction under this section is to remain in force for not more than one month.
(3) Nothing in this section shall apply to any vehicle registered under section 60 while it is being used in the execution of military manoeuvres within the area and during the period specified in the notification under sub-section (1) of section 2 of the Manoeuvres, Field Firing and Artillery Practice Act, 1938 (5 of 1938).

हमारा प्रयास मोटर वाहन अधिनियम (MV Act) की धारा 112 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

मोटर वाहन अधिनियम की धारा 111 | राज्य सरकार की नियम बनाने की शक्ति | MV Act, Section- 111 in hindi | Power of State Government to make rules.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए मोटर वाहन अधिनियम की धारा 111 के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है मोटर वाहन अधिनियम की धारा- 111, साथ ही इस धारा के अंतर्गत क्या परिभाषित किया गया है, यह सभी जानकारी इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

मोटर वाहन अधिनियम की धारा- 111 का विवरण

मोटर वाहन अधिनियम (Motor Vehicles Act) की धारा -111 के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। इस अध्याय के अधीन राज्य सरकार को अपने नियम बनाने की शक्ति होती है, इसके अलावा नियमो मे बदलाव करने की शक्ति होती है।

मोटर वाहन अधिनियम की धारा- 111 के अनुसार

राज्य सरकार की नियम बनाने की शक्ति-

(1) कोई राज्य सरकार, मोटर यानों और ट्रेलरों के निर्माण उपस्कर और अनुरक्षण का विनियमन करने के लिए धारा 110 की उपधारा (1) में विनिर्दिष्ट बातों से भिन्न सभी बातों की बाबत नियम बना सकेगी।
(2) पूर्वगामी शक्ति की व्यापकता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, इस धारा के अधीन या तो साधारणतया मोटर यानों या ट्रेलरों की बाबत या किसी विशिष्ट वर्ग या वर्णन के मोटर यानों या ट्रेलरों की बाबत या विशिष्ट परिस्थितियों में निम्नलिखित सभी बातों या उनमें से किसी के बारे में नियम बनाए जा सकेंगे, अर्थात् :-
(क) सार्वजनिक सेवा यानों में बैठने की व्यवस्था और मौसम से यात्रियों का संरक्षण;
(ख) कुछ समय पर या कुछ स्थानों में सुनाई देने वाले संकेतकों के प्रयोग का प्रतिषेध या निर्बन्धन;
(ग) ऐसे साधित्रों का ले जाया जाना, प्रतिषिद्ध करना जिनसे क्षोभ या खतरा होने की संभावना है;
(घ) विहित प्राधिकारियों द्वारा यानों का नियतकालिक परीक्षण और निरीक्षण और ऐसे परीक्षण के लिए प्रभारित की जाने वाली फीस;
(ङ) रजिस्ट्रीकरण चिह्नों से भिन्न विशिष्टियां जो यानों पर प्रदर्शित की जानी हैं और वह रीति जिससे वे प्रदर्शित की जाएंगी।
(च) मोटर यानों के साथ टेलरों का उपयोग;

Power of State Government to make rules-
(1) A State Government may make rules regulating the construction, equipment and maintenance of motor vehicles and trailers with respect to all matters other than the matters specified in sub-section (1) of section 110.
(2) Without prejudice to the generality of the foregoing power, rules may be made under this section governing all or any of the following matters either generally in respect of motor vehicles or trailers or in respect of motor vehicles or trailers of a particular class or description or in particular circumstances, namely :-
(a) seating arrangements in public service vehicles and the protection of passengers against the weather;
(b) prohibiting or restricting the use of audible signals at certain times or in certain places;
(c) prohibiting the carrying of appliances likely to cause annoyance or danger;
(d) the periodical testing and inspection of vehicles by prescribed authorities [and fees to be charged for such test];
(e) the particulars other than registration marks to be exhibited by vehicles
and the manner in which they shall be exhibited;
(f) the use of trailers with motor vehicles;

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मोटर वाहन अधिनियम की धारा 110B | किस्म-अनुमोदन प्रमाणपत्र और परीक्षण अभिकरण | MV Act, Section- 110B in hindi | Type-approval certificate and testing agencies.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए मोटर वाहन अधिनियम की धारा 110B के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है मोटर वाहन अधिनियम की धारा- 110B, साथ ही इस धारा के अंतर्गत क्या परिभाषित किया गया है, यह सभी जानकारी इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

मोटर वाहन अधिनियम की धारा- 110B का विवरण

मोटर वाहन अधिनियम (Motor Vehicles Act) की धारा -110B के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। इस अध्याय के अधीन किसी भी मोटर यान का, जिसके अंतर्गत कोई ट्रेलर या अर्ध ट्रेलर या माड्युलर या हाइड्रोलिक ट्रेलर या साइड कार भी है, तब तक भारत में विक्रय या परिदान या किसी सार्वजनिक स्थान में उपयोग नहीं किया जाएगा।

मोटर वाहन अधिनियम की धारा- 110B के अनुसार

किस्म-अनुमोदन प्रमाणपत्र और परीक्षण अभिकरण-

(1) किसी भी मोटर यान का, जिसके अंतर्गत कोई ट्रेलर या अर्ध ट्रेलर या माड्युलर या हाइड्रोलिक ट्रेलर या साइड कार भी है, तब तक भारत में विक्रय या परिदान या किसी सार्वजनिक स्थान में उपयोग नहीं किया जाएगा, जब तक कि उपधारा (2) में ऐसे यान के संबंध में निर्दिष्ट किस्म-अनुमोदन प्रमाणपत्र जारी न कर दिया गया हो :
परंतु केन्द्रीय सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, किसी मोटर यान द्वारा खींचे जाने वाले या खींचे जाने के लिए आशयित अन्य यानों के किस्म-अनुमोदन प्रमाणपत्र की अपेक्षा को विस्तारित कर सकेगी:
परंतु यह और कि ऐसा प्रमाणपत्र ऐसे यानों के लिए अपेक्षित नहीं होगा,-
(क) जो निर्यात के लिए अथवा प्रदर्शन या निदर्शन या संप्रदर्शन के लिए आशयित हैं; या
(ख) जिनका उपयोग मोटर यानों या मोटर यान संघटकों के किसी विनिर्माता या किसी अनुसंधान और विकास केंद्र द्वारा किया जाता है या जिनकी परीक्षा किसी परीक्षण और विधिमान्यकरण अभिकरण द्वारा या किसी डाटा संग्रहण के लिए किन्हीं कारखाना परिसरों के भीतर किसी गैर-सार्वजनिक स्थान पर किया जाता है; या
(ग) जिन्हें केन्द्रीय सरकार द्वारा छूट प्राप्त है
(2) ऐसे मोटर यानों का, जिसके अंतर्गत कोई ट्रेलर या अर्ध टेलर या माड्यूलर या हाइड्रोलिक ट्रेलर या साइड कार भी है, विनिर्माता या आयातकर्ता किस्म-अनुमोदन प्रमाणपत्र अभिप्राप्त करने के लिए किसी परीक्षण अभिकरण को विनिर्मित या आयातित किए जाने वाले यान की प्रोटोकिस्म परीक्षण के लिए प्रस्तुत करेगा।
(3) केन्द्रीय सरकार, परीक्षण अभिकरणों के प्रत्यायन, रजिस्ट्रीकरण और विनियमन के लिए नियम बनाएगी।
(4) परीक्षण अभिकरण, विनिर्माता की उत्पादन पंक्ति से लिए गए यानों या अन्यथा अभिप्राप्त किए गए यानों का यह सत्यापन करने के लिए परीक्षण करेंगे कि ऐसे यान इस अध्याय और तद्धीन बनाए गए नियमों और विनियमों के उपबंधों के अनुरूप हैं ।
(5) जहां किस्म-अनुमोदन प्रमाणपत्र धारण करने वाले किसी मोटर यान को धारा 110क के अधीन वापस बुलाया जाता है, वहां ऐसा परीक्षण अभिकरण, जिसने ऐसे मोटर यान को प्रमाणपत्र मंजूर किया था, उसके प्रत्यायन और रजिस्ट्रीकरण को रद्द किए जाने के लिए दायी होगा।

Type-approval certificate and testing agencies-
(1) No motor vehicle, including a trailer or semi-trailer or modular hydraulic trailer or side car shall be sold or delivered or offered for sale or delivery or used in a public place in India unless a type-approval certificate referred to in sub-section (2) has been issued in respect of such vehicle:
Provided that the Central Government may, by notification in the Official Gazette, extend the requirement of type-approval certificate to other vehicles drawn or intended to be drawn by a motor vehicle :
Provided further that such certificate shall not be required for vehicles which are-
(a) intended for export or display or demonstration or exhibition; or
(b) used by a manufacturer of motor vehicles or motor vehicle components or a research and development centre or a test by agency for testing and validation or for data collection, inside factory premises or in a non public place; or
(c) exempted by the Central Government.
(2) The manufacturer or importer of motor vehicles including trailers, semi-trailers, modular hydraulic trailers and side cars shall submit the prototype of the vehicle to be manufactured or imported for test to a testing agency for obtaining a type-approval certificate by such agency.
(3) The Central Government shall make rules for the accreditation, registration and regulation of testing agencies.
(4) The testing agencies shall conduct tests on vehicles drawn from the production line of the manufacturer or obtained otherwise to verify the conformity of such vehicles to the provisions of this Chapter and the rules and regulations made thereunder.
(5) Where the motor vehicle having a type-approval certificate is recalled under section 110A, the testing agency which granted the certificate to such motor vehicle shall be liable for its accreditation and registration to be cancelled.

हमारा प्रयास मोटर वाहन अधिनियम (MV Act) की धारा 110B की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

मोटर वाहन अधिनियम की धारा 110A | मोटर यानों का वापस बुलाना | MV Act, Section- 110A in hindi | Recall of motor vehicles.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए मोटर वाहन अधिनियम की धारा 110A के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है मोटर वाहन अधिनियम की धारा- 110A, साथ ही इस धारा के अंतर्गत क्या परिभाषित किया गया है, यह सभी जानकारी इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

मोटर वाहन अधिनियम की धारा- 110A का विवरण

मोटर वाहन अधिनियम (Motor Vehicles Act) की धारा -110A के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। इस अध्याय के अधीन केन्द्रीय सरकार, आदेश द्वारा विनिर्माता को यह निदेश दे सकेगी कि वह किसी विशिष्ट किस्म के मोटर यानों या उसके परिवर्तियों को तब वापस बुलाएगी, उस विशिष्ट किस्म के मोटर यान में ऐसा कोई दोष है जो पर्यावरण या ऐसे मोटर यान के चालक या उसमें बैठने वाले व्यक्तियों या सड़क मार्ग का उपयोग करने वाले अन्य व्यक्तियों को क्षति पहुंचा सकता है।

मोटर वाहन अधिनियम की धारा- 110A के अनुसार

मोटर यानों का वापस बुलाना-

(1) केन्द्रीय सरकार, आदेश द्वारा विनिर्माता को यह निदेश दे सकेगी कि वह किसी विशिष्ट किस्म के मोटर यानों या उसके परिवर्तियों को तब वापस बुलाएगी, यदि :-
(क) उस विशिष्ट किस्म के मोटर यान में ऐसा कोई दोष है जो पर्यावरण या ऐसे मोटर यान के चालक या उसमें बैठने वाले व्यक्तियों या सड़क मार्ग का उपयोग करने वाले अन्य व्यक्तियों को क्षति पहुंचा सकता है; और
(ख) उस विशिष्ट किस्म के मोटर यान में ऐसा कोई दोष निम्नलिखित द्वारा केन्द्रीय सरकार को रिपोर्ट किया गया है,-
(i) स्वामियों के ऐसे प्रतिशत द्वारा, जिसे केन्द्रीय सरकार, राजपत्र में, अधिसूचना द्वारा विनिर्दिष्ट करे; या
(ii) किसी परीक्षण अभिकरण; या
(iii) किसी अन्य स्त्रोत ।
(2) जहां उपधारा (1) में निर्दिष्ट दोष मोटर यान के किसी संघटक में है, वहां केन्द्रीय सरकार, आदेश द्वारा विनिर्माता को, ऐसे सभी मोटर यानों को, ऐसे मोटर यानों की किस्म या परिवर्तियों पर ध्यान न देते हुए, जिनमें ऐसा संघटक लगा हुआ है, वापस बुलाने का निदेश दे सकेगी।
(3) ऐसा कोई विनिर्माता, जिसके यानों को उपधारा (1) या उपधारा (2) के अधीन वापस बुलाया जाता है,
(क) क्रेताओं को किसी अवक्रय या पट्टा-आडमान करार के अधीन रहते हुए मोटर यान की संपूर्ण लागत की प्रतिपूर्ति करेगा; या
(ख) दोषपूर्ण मोटर यान को समान या बेहतर विनिर्देशों वाले किसी ऐसे अन्य मोटर यान से प्रतिस्थापित करेगा, जो इस अधिनियम के अधीन विनिर्दिष्ट मानकों का अनुपालन करता है या उसकी मरम्मत करेगा; और
(ग) ऐसे जुर्माने और अन्य शोध्यों का संदाय करेगा, जो उपधारा (6) के अनुसार हों।
(4) जहां विनिर्माता द्वारा विनिर्मित किसी मोटर यान में कोई दोष उसकी सूचना में आता है तो वह ऐसे दोष की जानकारी केन्द्रीय सरकार को देगा और यानों को वापस बुलाए जाने की प्रक्रियाएं आरंभ करेगा और ऐसी दशा में विनिर्माता उपधारा (3) के अधीन जुर्माने का संदाय करने का दायी नहीं होगा।
(5) केन्द्रीय सरकार, इस धारा के अधीन किसी अधिकारी को अन्वेषण करने के लिए प्राधिकृत कर सकेगी, जिसके पास निम्नलिखित विषयों के संबंध में सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 (1908 का 5) के अधीन किसी वाद का विचारण करने वाले किसी सिविल न्यायालय की सभी शक्तियां होंगी, अर्थात् :-
(क) किसी व्यक्ति को समन करने और हाजिर कराने तथा शपथ पर उसकी परीक्षा करने;
(ख) किसी दस्तावेज को प्रकट और प्रस्तुत करने की अपेक्षा करना;
(ग) शपथपत्र पर साक्ष्य प्राप्त करने; और
(घ) ऐसा कोई अन्य विषय, जो विहित किया जाए।
(6) केन्द्रीय सरकार, किसी ऐसे दोष के लिए, जो केन्द्रीय सरकार की राय में पर्यावरण या ऐसे मोटर यान के चालक या उसमें बैठने वाले व्यक्तियों या सड़क मार्ग का उपयोग करने वाले अन्य व्यक्तियों को क्षति पहुँचा सकता है. मोटर यानों की किसी विशिष्ट किस्म या उसके परिवर्तियों को वापस बुलाने का विनियमन करने के लिए नियम बना सकेगी।

Recall of motor vehicles-
(1) The Central Government may, by order, direct a manufacturer to recall motor vehicles of a particular type or its variants, if-
(a) a defect in that particular type of motor vehicle may cause harm to the environment or to the driver or occupants of such motor vehicle or other road users; and
(b) a defect in that particular type of motor vehicle has been reported to the Central Government by-
(i) such percentage of owners, as the Central Government, may by notification in the Official Gazette, specify; or
(ii) a testing agency; or
(iii) any other source.
(2) Where the defect referred to in sub-section (1) lies in a motor vehicle component, the Central Government may, by order, direct a manufacturer to recall all motor vehicles which contain such component, regardless of the type or variants of such motor vehicle.
(3) A manufacturer whose vehicles are recalled under sub-section (1) or sub-section (2), shall-
(a) reimburse the buyers for the full cost of the motor vehicle, subject to any hire-purchase or lease-hypothecation agreement; or
(b) replace the defective motor vehicle with another motor vehicle of similar or better specifications which complies with the standards specified under this Act or repair it; and
(c) pay such fines and other dues in accordance with sub-section (6).
(4) Where a manufacturer notices a defect in a motor vehicle manufactured by him, he shall inform the Central Government of the defect and initiate recall proceedings and in such case the manufacturer shall not be liable to pay fine under sub-section (3).
(5) The Central Government may authorise any officer to conduct investigation under this section who shall have all the powers of a civil court, while trying a suit under the Code of Civil Procedure, 1908 (5 of 1908) in respect of the following matters, namely :-
(a) summoning and enforcing the attendance of any person and examining him on oath;
(b) requiring the discovery and production of any document;
(c) receiving evidence on affidavit; and
(d) any other matter as may be prescribed.
(6) The Central Government may make rules for regulating the recall of motor vehicles, of a particular type or its variants, for any defect which in the opinion of the Central Government, may cause harm to the environment or to the driver or occupants of such motor vehicle or to other road users.

हमारा प्रयास मोटर वाहन अधिनियम (MV Act) की धारा 110A की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

मोटर वाहन अधिनियम की धारा 110 | केन्द्रीय सरकार की नियम बनाने की शक्ति | MV Act, Section- 110 in hindi | Power of Central Government to make rules.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए मोटर वाहन अधिनियम की धारा 110 के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है मोटर वाहन अधिनियम की धारा- 110, साथ ही इस धारा के अंतर्गत क्या परिभाषित किया गया है, यह सभी जानकारी इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

मोटर वाहन अधिनियम की धारा- 110 का विवरण

मोटर वाहन अधिनियम (Motor Vehicles Act) की धारा -110 के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। इस अध्याय के अधीन केन्द्र सरकार को अपने नियम बनाने की शक्ति होती है, इसके अलावा नियमो मे बदलाव करने की शक्ति होती है।

मोटर वाहन अधिनियम की धारा- 110 के अनुसार

केन्द्रीय सरकार की नियम बनाने की शक्ति-

(1) केन्द्रीय सरकार मोटर यानों और ट्रेलरों के निर्माण, उपस्कर और अनुरक्षण का विनियमन करने के लिए निम्नलिखित सभी बातों या उनमें से किसी की बाबत नियम बना सकेगी, अर्थात् :-
(क) यानों की ओर से जाए जाने वाले भार की चौड़ाई, ऊंचाई, लम्बाई और प्रलंब;
(ख) टायरों का आकार, प्रकार, अधिकतम खुदरा कीमत और हालत जिसके अन्तर्गत विनिर्माण की तारीख और वर्ष का उस पर समुद्धृत किया जाना है और अधिकतम भार वहन क्षमता;
(ग) ब्रेक और स्टीयरिंग गियर;
(घ) सुरक्षा कांच का प्रयोग, जिसके अंतर्गत कलईदार सुरक्षा कांच के प्रयोग का प्रतिषेध है;
(ङ) संकेतन-साधित्र, लैम्प और परावर्तक;
(च) गति नियंत्रक;
(छ) धुएं, दिखाई देने वाली भाप, चिंगारी, राख, बाल-कण या तेल का उत्सर्जन;
(ज) यानों से निकलने वाली या होने वाली आवाज को घटाना;
(झ) चैसिस संख्यांक तथा इंजन संख्यांक और विनिर्माण की तारीख का उत्कीर्ण होना;
(ञ) सुरक्षा पट्टियां, मोटर साइकिलों की हैंडिल शलाका, ऑटो-डिपर और ड्राइवरों, यात्रियों और सड़क का उपयोग करने वाले अन्य व्यक्तियों के लिए आवश्यक अन्य उपस्कर;
(ट) यान में अन्तःनिर्मित सुरक्षा युक्तियों के रूप में प्रयुक्त संघटकों के मानक जिसके अंतर्गत साफ्टवेयर है;
(ठ) मानव जीवन के लिए खतरनाक या परिसंकटमय प्रकृति के माल के परिवहन के लिए उपबंध
(ड) वायु प्रदूषकों के उत्सर्जन के लिए मानक :
(ढ) विहित किए जाने वाले यानों के वर्ग में उत्प्रेरक परिवर्तक का लगाया जाना;
(ण) सार्वजनिक यानों में दृश्य-श्रवण या रेडियो या टेपरिकार्डर जैसी युक्तियों का लगाया जाना;
(त) यान के विक्रय के पश्चात् वारंटी और उसके लिए मानक :
परन्तु पर्यावरण के संरक्षण से संबंधित विषयों के संबंध में कोई नियम, जहां तक हो सके, भारत सरकार के पर्यावरण से संबंधित मंत्रालय से परामर्श करने के पश्चात् बनाए जाएंगे।
(2) उपधारा (1) के अधीन उसमें वर्णित बातों को शासित करने वाले नियम बनाए जा सकेंगे जिनके अन्तर्गत ऐसी बातों का अनुपालन सुनिश्चित कराने की रीति और ऐसी बातों की बाबत या तो साधारणतया मोटर यानों या ट्रेलरों की बाबत या किसी विशिष्ट वर्ग या विशिष्ट परिस्थितियों में और ऐसे नियम अन्वेषण की प्रक्रिया, ऐसा अन्वेषण संचालित करने के लिए सशक्त अधिकारी, ऐसे विषयों की सुनवाई के लिए प्रक्रिया तथा उनके तद्धीन उदगृहीत की जाने वाली शास्तियां मोटर यानों या ट्रेलरों की बाबत मोटर यानों के अनुरक्षण भी हैं।
(2क) उपधारा (2) में निर्दिष्ट अन्वेषणों के संचालन के लिए उपधारा (2) के अधीन सशक्त व्यक्तियों को सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 (1908 का 5) के अधीन निम्नलिखित विषयों के संबंध में सिविल न्यायालय की सभी शक्तियां होंगी, अर्थात् :-
(क) किसी व्यक्ति को समन करना और हाजिर करना तथा शपथ पत्र पर उसकी परीक्षा;
(ख) किसी दस्तावेज की मांग और प्रस्तुत करने की अपेक्षा;
(ग) शपथ पत्र पर साक्ष्य प्राप्त करना; और
(घ) कोई अन्य विषय, जो विहित किया जाए।
(3) इस धारा में किसी बात के होते हुए भी-
(क) केन्द्रीय सरकार, किसी वर्ग के मोटर यानों को इस अध्याय के उपबंधों से छूट दे सकेगी;
(ख) कोई राज्य सरकार, किसी मोटर यान या किसी वर्ग या वर्णन के मोटर यानों को उपधारा (1) के अधीन बनाए गए नियमों से ऐसी शर्तों के अधीन रहते हुए छूट दे सकेगी जो केन्द्रीय सरकार द्वारा विहित की जाएं।

Power of Central Government to make rules-
(1) The Central Government may make rules regulating the construction, equipment and maintenance of motor vehicles and trailers with respect to all or any of the following matters, namely :-
(a) the width, height, length and overhang of vehicles and of the loads carried;
(b) the size, nature, maximum retail price and condition of tyres, including embossing thereon of date and year of manufacture, and the maximum load carrying capacity;
(c) brakes and steering gear;
(d) the use of safety glasses including prohibition of the use of tinted safety glasses;
(e) signalling appliances, lamps and reflectors;
(f) speed governors;
(g) the emission of smoke, visible vapour, sparks, ashes, grit or cai;
(h) the reduction of noise emitted by or caused by vehicles;
(i) the embossment of chassis number and engine number and the date of manufacture;
(j) safety belts, handle bars of motor cycles, auto-dippers and other equipments essential for safety of drivers, passengers and other road users,
(k) standards of the components [including software,] used in the vehicle as inbuilt safety devices;
(l) provision for transportation of goods of dangerous or hazardous nature to human life;
(m) standards for emission of air pollutants:
(n) installation of catalytic converters in the class of vehicles to be prescribed;
(o) the placement of audio-visual or radio or tape recorder type of devices in public vehicles;
(p) warranty after sale of vehicle and norms therefore:
Provided that any rules relating to the matters dealing with the protection of environment, so far as may be, shall be made after consultation with the Ministry of the Government of India dealing with environment.
(2) Rules may be made under sub-section (1) governing the matters mentioned therein, including the manner of ensuring the compliance with such matters and the maintenance of motor vehicles in respect of such matters, either generally in respect of motor vehicles or trailers or in respect of motor vehicles or trailers of a particular class or in particular circumstances and such rules may lay down the procedure for investigation, the officers empowered to conduct such investigations, the procedure for hearing of such matters and the penalties to be levied thereunder.
(2A) Persons empowered under sub-section (2) to conduct investigations referred to in sub-section (2) shall have all the powers of a civil court, while trying a suit under the Code of Civil Procedure, 1908 (5 of 1908) in respect of the following matters, namely:-
(a) summoning and enforcing the attendance of any person and examining him on oath;
(b) requiring the discovery and production of any document;
(c) receiving evidence on affidavit; and
(d) any other matter as may be prescribed.
(3) Notwithstanding anything contained in this section-
(a) the Central Government may exempt any class of motor vehicles from the provisions of this Chapter;
(b) a State Government may exempt any motor vehicle or any class or description of motor vehicles from the rules made under sub-section (1) subject to such conditions as may be prescribed by the Central Government.

हमारा प्रयास मोटर वाहन अधिनियम (MV Act) की धारा 110 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।