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मोटर वाहन अधिनियम की धारा 109 | यानों के निर्माण और अनुरक्षण संबंधी साधारण उपबंध | MV Act, Section- 109 in hindi | General provision regarding construction and maintenance of vehicles.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए मोटर वाहन अधिनियम की धारा 109 के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है मोटर वाहन अधिनियम की धारा- 109, साथ ही इस धारा के अंतर्गत क्या परिभाषित किया गया है, यह सभी जानकारी इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

मोटर वाहन अधिनियम की धारा- 109 का विवरण

मोटर वाहन अधिनियम (Motor Vehicles Act) की धारा -109 के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। इस अध्याय के अधीन प्रत्येक मोटर यान का निर्माण ऐसे किया जाएगा और उसे ऐसे अनुरक्षित रखा जाएगा कि वह हर समय उसे चलाने वाले व्यक्ति के वास्तविक नियंत्रण में रहे।

मोटर वाहन अधिनियम की धारा- 109 के अनुसार

यानों के निर्माण और अनुरक्षण संबंधी साधारण उपबंध-

(1) प्रत्येक मोटर यान का निर्माण ऐसे किया जाएगा और उसे ऐसे अनुरक्षित रखा जाएगा कि वह हर समय उसे चलाने वाले व्यक्ति के वास्तविक नियंत्रण में रहे ।
(2) जब तक कि मोटर यान में विहित प्रकार की यांत्रिक या वैद्युत संकेतन युक्ति लगी न हो तब तक प्रत्येक मोटर यान, ऐसे निर्मित किया जाएगा कि उसमें स्टीयरिंग नियंत्रण दाहिनी ओर हो ।
(3) यदि केन्द्रीय सरकार की यह राय है कि लोकहित में ऐसा करना आवश्यक या समीचीन है तो वह, राजपत्र में प्रकाशित आदेश द्वारा, यह अधिसूचित कर सकेगी कि किसी विनिर्माता द्वारा उपयोग में लाई जाने वाली कोई वस्तु या प्रक्रिया ऐसे मानक के अनुरूप होगी, जो उस आदेश में विनिर्दिष्ट किया जाए।

General provision regarding construction and maintenance of vehicles-
(1) Every motor vehicle shall be so constructed and so maintained as to be at all times under the effective control of the person driving the vehicle.
(2) Every motor vehicle shall be so constructed as to have right-hand steering control unless it is equipped with a mechanical or electrical signalling device of a prescribed nature.
(3) If the Central Government is of the opinion that it is necessary or expedient so to do in the public interest, it may by order published in the Official Gazette, notify that any article or process used by a manufacturer shall conform to such standard as may be specified in that order.

हमारा प्रयास मोटर वाहन अधिनियम (MV Act) की धारा 109 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

मोटर वाहन अधिनियम की धारा 108 | राज्य सरकार की कुछ शक्तियों का केन्द्रीय सराकर द्वारा प्रयोग किया जा सकता | MV Act, Section- 108 in hindi | Certain powers of State Government exercisable by the Central Government.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए मोटर वाहन अधिनियम की धारा 108 के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है मोटर वाहन अधिनियम की धारा- 108, साथ ही इस धारा के अंतर्गत क्या परिभाषित किया गया है, यह सभी जानकारी इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

मोटर वाहन अधिनियम की धारा- 108 का विवरण

मोटर वाहन अधिनियम (Motor Vehicles Act) की धारा -108 के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। इस अध्याय के अधीन राज्य सरकार को इस अध्याय के अधीन प्रदत्त शक्तियां, ऐसे निगम या कम्पनी के संबंध में, जो केन्द्रीय सरकार के अथवा केन्द्रीय सरकार और एक या अधिक राज्य सरकारों के स्वामित्वाधीन या नियंत्रणाधीन है, किसी अन्तरराज्यिक मार्ग या क्षेत्र के बारे में केवल केन्द्रीय सरकार द्वारा प्रयुक्त की जा सकेंगी।

मोटर वाहन अधिनियम की धारा- 108 के अनुसार

राज्य सरकार की कुछ शक्तियों का केन्द्रीय सराकर द्वारा प्रयोग किया जा सकता-

राज्य सरकार को इस अध्याय के अधीन प्रदत्त शक्तियां, ऐसे निगम या कम्पनी के संबंध में, जो केन्द्रीय सरकार के अथवा केन्द्रीय सरकार और एक या अधिक राज्य सरकारों के स्वामित्वाधीन या नियंत्रणाधीन है, किसी अन्तरराज्यिक मार्ग या क्षेत्र के बारे में केवल केन्द्रीय सरकार द्वारा प्रयुक्त की जा सकेंगी।

Certain powers of State Government exercisable by the Central Government-
The powers conferred on the State Government under this Chapter shall, in relation to a corporation or company owned or controlled by the Central Government or by the Central Government and one or more State Governments, be exercisable only by the Central Government in relation to an inter-State route or area.

हमारा प्रयास मोटर वाहन अधिनियम (MV Act) की धारा 108 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

मोटर वाहन अधिनियम की धारा 107 | राज्य सरकार की नियम बनाने की शक्ति | MV Act, Section- 107 in hindi | Power of State Government to make rules.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए मोटर वाहन अधिनियम की धारा 107 के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है मोटर वाहन अधिनियम की धारा- 107, साथ ही इस धारा के अंतर्गत क्या परिभाषित किया गया है, यह सभी जानकारी इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

मोटर वाहन अधिनियम की धारा- 107 का विवरण

मोटर वाहन अधिनियम (Motor Vehicles Act) की धारा -107 के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। इस अध्याय के अधीन राज्य सरकार इस अध्याय के उपबंधों को कार्यान्वित करने के प्रयोजन के लिए नियम बना सकेगी।

मोटर वाहन अधिनियम की धारा- 107 के अनुसार

राज्य सरकार की नियम बनाने की शक्ति-

(1) राज्य सरकार इस अध्याय के उपबंधों को कार्यान्वित करने के प्रयोजन के लिए नियम बना सकेगी।
(2) विशिष्टतया और पूर्वगामी शक्ति की व्यापकता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, ऐसे नियम निम्नलिखित सभी बातों या उनमें से किसी के लिए उपबंध कर सकेंगे, अर्थात् :-
(क) वह प्ररूप जिसमें किसी स्कीम की बाबत कोई प्रस्थापना धारा 99 के अधीन प्रकाशित की जा सकेगी;
(ख) वह रीति जिसमें धारा 100 की उपधारा (1) के अधीन आक्षेप फाइल किए जा सकेंगे;
(ग) वह रीति जिसमें धारा 100 की उपधारा (2) के अधीन आक्षेपों पर विचार और उनका निपटारा किया जा सकेगा;
(घ) वह प्ररूप जिसमें धारा 100 की उपधारा (3) के अधीन कोई अनुमोदित स्कीम प्रकाशित की जा सकेगी;
(ङ) वह रीति जिसमें धारा 103 की उपधारा (1) के अधीन आवेदन किया जा सकेगा;
(च) वह अवधि जिसके अन्दर किसी परिवहन यान में छूटी पाई गई किसी वस्तु का स्वामी, धारा 106 के अधीन उसके लिए दावा कर सकेगा तथा उस वस्तु के विक्रय की रीति;
(छ) इस अध्याय के अधीन आदेशों की तामील की रीति;
(ज) कोई अन्य बात जो विहित की जानी है या की जाए।

Power of State Government to make rules-
(1) The State Government may make rules for the purpose of carrying into effect the provisions of this Chapter.
(2) In particular and without prejudice to the generality of the foregoing power, such rules may provide for all or any of the following matters, namely:-
(a) the form in which any proposal regarding a scheme may be published under section 99;
(b) the manner in which objections may be filed under sub-section (1) of 11 section 100;
(c) the manner in which objections may be considered and disposed of under sub-section (2) of section 100;
(d) the form in which any approved scheme may be published under subsection (3) of section 100;
(e) the manner in which application under sub-section (1) of section 103 may be made;
(f) the period within which the owner may claim any article found left in any transport vehicle under section 106 and the manner of sale of such article;
(g) the manner of service of orders under this Chapter;
(h) any other matter which has to be, or maybe, prescribed.

हमारा प्रयास मोटर वाहन अधिनियम (MV Act) की धारा 107 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

मोटर वाहन अधिनियम की धारा 106 | यानों में पाई गई वस्तुओं का व्ययन | MV Act, Section- 106 in hindi | Disposal of articles found in vehicles.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए मोटर वाहन अधिनियम की धारा 106 के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है मोटर वाहन अधिनियम की धारा- 106, साथ ही इस धारा के अंतर्गत क्या परिभाषित किया गया है, यह सभी जानकारी इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

मोटर वाहन अधिनियम की धारा- 106 का विवरण

मोटर वाहन अधिनियम (Motor Vehicles Act) की धारा -106 के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। इस अध्याय के अधीन जहां राज्य परिवहन उपक्रम द्वारा चलाए जा रहे किसी परिवहन यान में पाई गई किसी वस्तु पर उसके स्वामी द्वारा विहित अवधि के अन्दर दावा नहीं किया जाता वहां राज्य परिवहन उपक्रम उस वस्तु को विहित रीति से बेच सकेगा और उसके विक्रयआगम, उसके स्वामी द्वारा उनकी मांग किए जाने पर, उनमें से विक्रय के आनुषंगिक खर्चे काटकर, उसे दे दिए जाएंगे।

मोटर वाहन अधिनियम की धारा- 106 के अनुसार

यानों में पाई गई वस्तुओं का व्ययन-

जहां राज्य परिवहन उपक्रम द्वारा चलाए जा रहे किसी परिवहन यान में पाई गई किसी वस्तु पर उसके स्वामी द्वारा विहित अवधि के अन्दर दावा नहीं किया जाता वहां राज्य परिवहन उपक्रम उस वस्तु को विहित रीति से बेच सकेगा और उसके विक्रयआगम, उसके स्वामी द्वारा उनकी मांग किए जाने पर, उनमें से विक्रय के आनुषंगिक खर्चे काटकर, उसे दे दिए जाएंगे।

Disposal of articles found in vehicles-
Where any article found in any transport vehicle operated by the State transport undertaking is not claimed by its owner within the prescribed period, the State transport undertaking may sell the article in the prescribed manner and the sale proceeds thereof, after deducting the costs incidental to sale, shall be paid to the owner on demand.

हमारा प्रयास मोटर वाहन अधिनियम (MV Act) की धारा 106 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

मोटर वाहन अधिनियम की धारा 105 | प्रतिकर अवधारित करने के सिद्धांत और रीति तथा उसका संदाय | MV Act, Section- 105 in hindi | Principles and method of determining compensation and payment thereof.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए मोटर वाहन अधिनियम की धारा 105 के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है मोटर वाहन अधिनियम की धारा- 105, साथ ही इस धारा के अंतर्गत क्या परिभाषित किया गया है, यह सभी जानकारी इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

मोटर वाहन अधिनियम की धारा- 105 का विवरण

मोटर वाहन अधिनियम (Motor Vehicles Act) की धारा -105 के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। इस अध्याय के अधीन किसी विद्यमान परमिट के रद्द किए जाने अथवा उसके निबन्धनों में कोई उपांतरण किए जाने के कारण कोई प्रतिकर उस दशा में देय न होगा जब उसके बदले में किसी दूसरे मार्ग या क्षेत्र के लिए, यथास्थिति, राज्य परिवहन प्राधिकरण या प्रादेशिक परिवहन प्राधिकरण ने परमिट देने का प्रस्ताव किया है और परमिट के धारक ने उसे स्वीकार कर लिया है।

मोटर वाहन अधिनियम की धारा- 105 के अनुसार

प्रतिकर अवधारित करने के सिद्धांत और रीति तथा उसका संदाय-

(1) जहां धारा 103 की उपधारा (2) के खण्ड (ख) या खण्ड (ग) द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए कोई विद्यमान परमिट रद्द किया जाता है या उसके निबन्धनों में उपांतरण किया जाता है वहां उस परमिट के धारक को राज्य परिवहन उपक्रम द्वारा प्रतिकर दिया जाएगा जिसकी रकम, यथास्थिति, उपधारा (4) या उपधारा (5) के उपबंधों के अनुसार अवधारित की जाएगी।
(2) उपधारा (1) में किसी बात के होते हुए भी, किसी विद्यमान परमिट के रद्द किए जाने अथवा उसके निबन्धनों में कोई उपांतरण किए जाने के कारण कोई प्रतिकर उस दशा में देय न होगा जब उसके बदले में किसी दूसरे मार्ग या क्षेत्र के लिए, यथास्थिति, राज्य परिवहन प्राधिकरण या प्रादेशिक परिवहन प्राधिकरण ने परमिट देने का प्रस्ताव किया है और परमिट के धारक ने उसे स्वीकार कर लिया है।
(3) शंकाओं को दूर करने के लिए घोषित किया जाता है कि कोई भी प्रतिकर धारा 103 की उपधारा (2) के खण्ड (क) के अधीन परमिट का नवीकरण करने से इन्कार करने के कारण देय न होगा ।
(4) जहां धारा 103 की उपधारा (2) के खण्ड (ख) या खण्ड (ग) के उपखण्ड अथवा उपखण्ड द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए कोई विद्यमान परमिट रद्द किया जाता है या उसके निबन्धनों में ऐसे उपांतरण किए जाते हैं कि परमिट का धारक उसके अधीन उपयोग के लिए प्राधिकृत किसी यान का उपयोग उस पूरी अवधि के लिए, जिसके लिए वह परमिट अन्यथा प्रभावी होता, करने से निवारित हो जाता है वहां ऐसे रद्द किए जाने या उपांतरण से प्रभावित प्रत्येक यान के लिए परमिट के धारक को देय प्रतिकर की संगणना निम्नलिखित रीति से की जाएगी-
(क) परमिट की असमाप्त अवधि के प्रत्येक पूरे मास के लिए या मास के पन्द्रह दिन से अधिक के भाग के लिए : दो सौ रुपए
(ख) परमिट की असमाप्त अवधि के मास के उस भाग के लिए जो पन्द्रह दिन से अधिक नहीं है : एक सौ रुपए
परन्तु प्रतिकर की रकम किसी भी दशा में चार सौ रुपए से कम न होगी ।
(5) जहां धारा 103 की उपधारा (2) के खण्ड (ग) के उपखण्ड द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए किसी विद्यमान परमिट के निबन्धनों में ऐसे उपांतरण किए जाते हैं कि उसके अधीन उपयोग के लिए प्राधिकृत किसी यान का क्षेत्र या मार्ग कम हो जाता है वहां ऐसी कमी के कारण परमिट के धारक को देय प्रतिकर निम्नलिखित सूत्र के अनुसार संगणित रकम होगी, अर्थात् :-
स्पष्टीकरण — इस सूत्र में-
“य” से वह दूरी या क्षेत्र अभिप्रेत है जितने से परमिट के अन्तर्गत मार्ग या क्षेत्र कम किया जाता है।
“र” से वह रकम अभिप्रेत है जो उपधारा (4) के अनुसार संगणित की गई है;
“म’ से मार्ग की वह कुल लम्बाई अथवा वह कुल क्षेत्र अभिप्रेत है जो परमिट के अंतर्गत है।
(6) इस धारा के अधीन देय प्रतिकर की रकम उसके हकदार व्यक्ति या व्यक्तियों को राज्य परिवहन उपक्रम द्वारा उस तारीख से, जिसको परमिट का रद्द किया जाना या परिवर्तन प्रभावी होता है, एक मास के अन्दर दी जाएगी :
परन्तु यदि राज्य परिवहन उपक्रम उक्त एक मास की अवधि के अन्दर उसे देने में असफल रहता है तो वह उस तारीख से, जिसको वह रकम देय होती है, उस पर सात प्रतिशत प्रतिवर्ष की दर से ब्याज देगा ।

Principles and method of determining compensation and payment thereof-
(1) Where, in exercise of the powers conferred by clause (b) or clause (c) of sub-section (2) of section 103, any existing permit is cancelled or the terms thereof are modified, there shall, be paid by the State transport undertaking to the holder of the permit, compensation, the amount of which shall be determined in accordance with the provisions of sub-section (4) or sub-section (5), as the case may be.
(2) Notwithstanding anything contained in sub-section (1), no compensation shall be payable on account of the cancellation of any existing permit or any modification of the terms thereof, when a permit for an alternative route or area in lieu thereof has been offered by the State Transport Authority or the Regional Transport Authority, as the case may be and accepted by the holder of the permit.
(3) For the removal of doubts, it is hereby declared that no compensation shall be payable on account of the refusal to renew a permit under clause (a) of subsection (2) of section 103.
(4) Where, in exercise of the powers conferred by clause (b) or sub-clause (i) or sub-clause (ii) of clause (c) of sub-section (2) of section 103, any existing permit is cancelled or the terms thereof are modified so as to prevent the holder of the permit from using any vehicle authorised to be used thereunder for the full period from which the permit, would otherwise have been effective, the compensation payable to the holder of the permit for each vehicle affected by such cancellation or modification shall be computed as follows :-
(a) for every complete month or part of a month exceeding fifteen days of the unexpired period of the permit : Two hundred rupees;
(b) for part of a month not exceeding fifteen days of the unexpired period of the permit : One hundred rupees :
Provided that the amount of compensation shall, in no case, be less than four hundred rupees.
(5) Where, in exercise of the powers conferred by sub-clause (iii) of clause (c) of sub-section (2) of section 103, the terms of an existing permit are modified so as to curtail the area or route of any vehicle authorised to be used thereunder, the compensation payable to the holder of the permit on account of such curtailment shall be an amount computed in accordance with the following formula, namely :–
Explanation- In this formula-
(i) “Y” means the length or area by which the route or area covered by the permit is curtailed;
(ii) “A” means the amount computed in accordance with sub-section (4);
(iii) “R” means the total length of the route or the total area covered by the permit.
(6) The amount of compensation payable under this section shall be paid by the State transport undertaking to the person or persons entitled thereto within one month from the date on which the cancellation or modification of the permit becomes effective:
Provided that where the State transport undertaking fails to make the payment within the said period of one month, it shall pay interest at the rate of seven per cent per annum from the date on which it falls due.

हमारा प्रयास मोटर वाहन अधिनियम (MV Act) की धारा 105 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

मोटर वाहन अधिनियम की धारा 104 | अधिसूचित क्षेत्र या अधिसूचित मार्ग की बाबत परमिट दिए जाने पर निर्बन्धन | MV Act, Section- 104 in hindi | Restriction on grant of permits in respect of a notified area or notified route.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए मोटर वाहन अधिनियम की धारा 104 के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है मोटर वाहन अधिनियम की धारा- 104, साथ ही इस धारा के अंतर्गत क्या परिभाषित किया गया है, यह सभी जानकारी इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

मोटर वाहन अधिनियम की धारा- 104 का विवरण

मोटर वाहन अधिनियम (Motor Vehicles Act) की धारा -104 के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। इस अध्याय के अधीन किसी जहां किसी अधिसूचित क्षेत्र या अधिसूचित मार्ग की बाबत कोई स्कीम धारा 100 की उपधारा (3) के अधीन प्रकाशित की गई है वहां, यथास्थिति, राज्य परिवहन प्राधिकरण या प्रादेशिक परिवहन प्राधिकरण कोई भी परमिट उस स्कीम के उपबंधों के अनुसार ही देगा, अन्यथा नहीं: परन्तु जहां अनुमोदित स्कीम के अनुसरण में किसी अधिसूचित क्षेत्र या अधिसूचित मार्ग की बाबत परमिट के लिए कोई आवेदन राज्य परिवहन उपक्रम द्वारा नहीं किया गया हैं।

मोटर वाहन अधिनियम की धारा- 104 के अनुसार

अधिसूचित क्षेत्र या अधिसूचित मार्ग की बाबत परमिट दिए जाने पर निर्बन्धन-

जहां किसी अधिसूचित क्षेत्र या अधिसूचित मार्ग की बाबत कोई स्कीम धारा 100 की उपधारा (3) के अधीन प्रकाशित की गई है वहां, यथास्थिति, राज्य परिवहन प्राधिकरण या प्रादेशिक परिवहन प्राधिकरण कोई भी परमिट उस स्कीम के उपबंधों के अनुसार ही देगा, अन्यथा नहीं:
परन्तु जहां अनुमोदित स्कीम के अनुसरण में किसी अधिसूचित क्षेत्र या अधिसूचित मार्ग की बाबत परमिट के लिए कोई आवेदन राज्य परिवहन उपक्रम द्वारा नहीं किया गया हैं वहां, यथास्थिति, राज्य परिवहन प्राधिकरण या प्रादेशिक परिवहन प्राधिकरण ऐसे अधिसूचित क्षेत्र या अधिसूचित मार्ग की बाबत किसी व्यक्ति को अस्थाई परमिट इस शर्त पर दे सकेगा कि ऐसा परमिट उस क्षेत्र या मार्ग की बाबत राज्य परिवहन उपक्रम को परमिट दिए जाने पर प्रभावी नहीं रहेगा।

Restriction on grant of permits in respect of a notified area or notified route-
Where a scheme has been published under sub-section (3) of section 100 in respect of any notified area or notified route, the State Transport Authority or the Regional Transport Authority, as the case may be, shall not grant any permit except in accordance with the provisions of the scheme:
Provided that where no application for a permit has been made by the State transport undertaking in respect of any notified area or notified route in pursuance of an approved scheme, the State Transport Authority or the Regional Transport Authority, as the case may be, may grant temporary permits to any person in respect of such notified area or notified route subject to the condition that such permit shall cease to be effective on the issue of a permit to the State transport undertaking in respect of that area or route.

हमारा प्रयास मोटर वाहन अधिनियम (MV Act) की धारा 104 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।