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भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 159 | स्मृति ताजी करना एवं साक्षी स्मृति ताजी करने के लिए दस्तावेज की प्रतिलिपि का उपयोग कब कर सकेगा | Indian Evidence Act Section- 159 in hindi| Refreshing memory and When witness may use copy of document to refresh memory.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 159 के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 159, साथ ही क्या बतलाती है, यह भी इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

धारा 159 का विवरण

भारतीय साक्ष्य अधिनियम (Indian Evidence Act) की धारा 159 के अन्तर्गत कोई साक्षी, जबकि वह परीक्षा के अधीन है, किसी ऐसे लेख को देख करके, जो कि स्वयं उसने उस संव्यवहार के समय जिसके सम्बन्ध में उससे प्रश्न किया जा रहा है, या इतने शीघ्र पश्चात् बनाया हो कि न्यायालय इसे सम्भाव्य समझता हो कि वह संव्यवहार उस समय उसकी स्मृति में ताजा था, अपनी स्मृति को ताजा कर सकेगा साथ ही कोई साक्षी अपनी स्मृति किसी दस्तावेज को देखने ताजी कर सकता है, तब वह न्यायालय की अनुज्ञा से, ऐसी दस्तावेज की प्रतिलिपि को देख सकेगा।

भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 159 के अनुसार

स्मृति ताजी करना–

कोई साक्षी, जबकि वह परीक्षा के अधीन है, किसी ऐसे लेख को देख करके, जो कि स्वयं उसने उस संव्यवहार के समय जिसके सम्बन्ध में उससे प्रश्न किया जा रहा है, या इतने शीघ्र पश्चात् बनाया हो कि न्यायालय इसे सम्भाव्य समझता हो कि वह संव्यवहार उस समय उसकी स्मृति में ताजा था, अपनी स्मृति को ताजा कर सकेगा।
साक्षी उपर्युक्त प्रकार के किसी ऐसे लेख को भी देख सकेगा जो किसी अन्य व्यक्ति द्वारा तैयार किया गया हो और उस साक्षी द्वारा उपर्युक्त समय के भीतर पढ़ा गया हो, यदि वह उस लेख का, उस समय जबकि उसने उसे पढ़ा था, सही होना जानता था।
साक्षी स्मृति ताजी करने के लिए दस्तावेज की प्रतिलिपि का उपयोग कब कर सकेगा- जब कभी कोई साक्षी अपनी स्मृति किसी दस्तावेज को देखने ताजी कर सकता है, तब वह न्यायालय की अनुज्ञा से, ऐसी दस्तावेज की प्रतिलिपि को देख सकेगा :
परन्तु यह तब जबकि न्यायालय का समाधान हो गया हो कि मूल को पेश न करने के लिए पर्याप्त कारण हैं।
विशेषज्ञ अपनी स्मृति वृत्तिक पुस्तकों को देख कर ताजी कर सकेगा।

Refreshing memory-
A witness may, while under examination, refresh his memory by referring to any writing made by himself at the time of the transaction concerning which he is questioned, or so soon afterwards that the Court considers it likely that the transaction was at that time fresh in his memory.
The witness may also refer to any such writing made by any other person, and read by the witness within the time aforesaid, if when he read it he knew it to be correct.
When witness may use copy of document to refresh memory- Whenever a witness may refresh his memory by reference to any document, he may, with the permission of the Court, refer to a copy of such document:
Provided the Court be satisfied that there is sufficient reason for the non production of the original.
An expert may refresh his memory by reference to professional treaties.

हमारा प्रयास भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 159 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 158 | साबित कथन के बारे में, जो कथन धारा 32 या 33 के अधीन सुसंगत है, कौन-सी बातें साबित की जा सकेंगी | Indian Evidence Act Section- 158 in hindi| What matters may be proved in connection with proved statement relevant under Section 32 or 33.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 158 के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 158, साथ ही क्या बतलाती है, यह भी इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

धारा 158 का विवरण

भारतीय साक्ष्य अधिनियम (Indian Evidence Act) की धारा 158 के अन्तर्गत जब कभी कोई कथन, जो धारा 32 या 33 के अधीन सुसंगत है, साबित कर किया जाए, तब चाहे उसके खण्डन के लिए या सम्पुष्टि के लिए या जिसके द्वारा वह दिया गया था उस व्यक्ति की विश्वसनीयता को अधिक्षिप्त या पुष्ट करने के लिए वे सभी बातें साबित की जा सकेंगी, जो यदि वह व्यक्ति साक्षी के रूप में बुलाया गया होता और उसने प्रतिपरीक्षा में सुझायी हुई बात की सत्यता का प्रत्याख्यान किया होता, तो साबित की जा सकतीं।

भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 158 के अनुसार

साबित कथन के बारे में, जो कथन धारा 32 या 33 के अधीन सुसंगत है, कौन-सी बातें साबित की जा सकेंगी-

जब कभी कोई कथन, जो धारा 32 या 33 के अधीन सुसंगत है, साबित कर किया जाए, तब चाहे उसके खण्डन के लिए या सम्पुष्टि के लिए या जिसके द्वारा वह दिया गया था उस व्यक्ति की विश्वसनीयता को अधिक्षिप्त या पुष्ट करने के लिए वे सभी बातें साबित की जा सकेंगी, जो यदि वह व्यक्ति साक्षी के रूप में बुलाया गया होता और उसने प्रतिपरीक्षा में सुझायी हुई बात की सत्यता का प्रत्याख्यान किया होता, तो साबित की जा सकतीं।

What matters may be proved in connection with proved statement relevant under Section 32 or 33-
Whenever any statement, relevant under Section 32 or 33, is proved, all matters may be proved, either in order to contradict or to corroborate it, or in order to impeach or confirm the credit of the person by whom it was made, which might have been proved if that person had been called as a witness and had denied upon cross-examination of the truth of the matter suggested.

हमारा प्रयास भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 158 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 157 | उसी तथ्य के बारे में पश्चात्वर्ती अभिसाक्ष्य की सम्पुष्टि करने के लिए साक्षी के पूर्वतन कथन साबित किए जा सकेंगे | Indian Evidence Act Section- 157 in hindi| Former statements of witness may be proved to corroborate later testimony as to same fact.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 157 के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 157, साथ ही क्या बतलाती है, यह भी इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

धारा 157 का विवरण

भारतीय साक्ष्य अधिनियम (Indian Evidence Act) की धारा 157 के अन्तर्गत किसी साक्षी के परिसाक्ष्य की सम्पुष्टि करने के लिए ऐसे साक्षी द्वारा उसी तथ्य से सम्बन्धित, उस समय पर या के लगभग जब वह तथ्य घटित हुआ था, किया हुआ या उस तथ्य का अन्वेषण करने के लिए विधि द्वारा सक्षम किसी प्राधिकारी के समक्ष किया हुआ कोई पूर्वतन कथन साबित किया जा सकेगा।

भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 157 के अनुसार

उसी तथ्य के बारे में पश्चात्वर्ती अभिसाक्ष्य की सम्पुष्टि करने के लिए साक्षी के पूर्वतन कथन साबित किए जा सकेंगे-

किसी साक्षी के परिसाक्ष्य की सम्पुष्टि करने के लिए ऐसे साक्षी द्वारा उसी तथ्य से सम्बन्धित, उस समय पर या के लगभग जब वह तथ्य घटित हुआ था, किया हुआ या उस तथ्य का अन्वेषण करने के लिए विधि द्वारा सक्षम किसी प्राधिकारी के समक्ष किया हुआ कोई पूर्वतन कथन साबित किया जा सकेगा।

Former statements of witness may be proved to corroborate later testimony as to same fact-
In order to corroborate the testimony of a witness, any former statement made by such witness relating to the same fact, at or about the time when the fact took place, or before any authority legally competent to investigate the fact, may be proved.

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भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 156 | सुसंगत तथ्य के साक्ष्य की सम्पुष्टि करने की प्रवृत्ति रखने वाले प्रश्न ग्राह्य होंगे | Indian Evidence Act Section- 156 in hindi| Questions tending to corroborate evidence of relevant fact, admissible.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 156 के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 156, साथ ही क्या बतलाती है, यह भी इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

धारा 156 का विवरण

भारतीय साक्ष्य अधिनियम (Indian Evidence Act) की धारा 156 के अन्तर्गत जब कोई साक्षी, जिसकी सम्पुष्टि करना आशयित हो, किसी सुसंगत तथ्य का साक्ष्य देता है, तब उससे ऐसी अन्य किन्हीं भी परिस्थितियों के बारे में प्रश्न किया जा सकेगा, जिन्हें उसने उस समय या स्थान पर, या के निकट सम्प्रेक्षित किया, जिस पर ऐसा सुसंगत तथ्य घटित हुआ, यदि न्यायालय की यह राय हो कि ऐसी परिस्थितियाँ, यदि वे साबित हो जाएं, साक्षी के उस सुसंगत तथ्य के बारे में, जिसका वह साक्ष्य देता है, परिसाक्ष्य को सम्पुष्ट करेंगी।

भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 156 के अनुसार

सुसंगत तथ्य के साक्ष्य की सम्पुष्टि करने की प्रवृत्ति रखने वाले प्रश्न ग्राह्य होंगे-

जबकि कोई साक्षी, जिसकी सम्पुष्टि करना आशयित हो, किसी सुसंगत तथ्य का साक्ष्य देता है, तब उससे ऐसी अन्य किन्हीं भी परिस्थितियों के बारे में प्रश्न किया जा सकेगा, जिन्हें उसने उस समय या स्थान पर, या के निकट सम्प्रेक्षित किया, जिस पर ऐसा सुसंगत तथ्य घटित हुआ, यदि न्यायालय की यह राय हो कि ऐसी परिस्थितियाँ, यदि वे साबित हो जाएं, साक्षी के उस सुसंगत तथ्य के बारे में, जिसका वह साक्ष्य देता है, परिसाक्ष्य को सम्पुष्ट करेंगी।

Questions tending to corroborate evidence of relevant fact, admissible-
When a witness whom it is intended to corroborate gives evidence of any relevant fact, he may be questioned as to any other circumstances which he observed at or near to the time or place at which such relevant fact occurred, if the Court is of opinion that such circumstances, if proved, would corroborate the testimony of the witness as to the relevant fact which he testifies.

दृष्टान्त
क, एक सहअपराधी किसी लूट का, जिसमें उसने भाग लिया था, वृत्तान्त देता है। वह लूट से असंसक्त विभिन्न घटनाओं का वर्णन करता है जो उस स्थान को और जहाँ कि वह लूट की गयी थी, जाते हुए और वहाँ से आते हुए मार्ग में घटित हुई थीं।
इन तथ्यों का स्वतन्त्र साक्ष्य स्वयं उस लूट के बारे में उसके साक्ष्य को सम्पुष्ट करने के लिए दिया जा सकेगा।

हमारा प्रयास भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 156 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 155 | साक्षी की विश्वसनीयता पर अधिक्षेप | Indian Evidence Act Section- 155 in hindi| Impeaching credit of witness.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 155 के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 155, साथ ही क्या बतलाती है, यह भी इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

धारा 155 का विवरण

भारतीय साक्ष्य अधिनियम (Indian Evidence Act) की धारा 155 के अन्तर्गत किसी साक्षी की विश्वसनीयता पर  किसी अन्य साक्षी को विश्वसनीयता के लिए अपात्र घोषित करता है, अपने से की गई मुख्य परीक्षा में अपने विश्वास के कारणों को चाहे न बताए, किन्तु प्रतिपरीक्षा में उससे उनके कारणों को पूछा जा सकेगा, और उन उत्तरों का, जिन्हें वह देता है, खण्डन नहीं किया जा सकता, तथापि यदि वे मिथ्या हों, तो तत्पश्चात् उस पर मिथ्या साक्ष्य देने का आरोप लगाया जा सकेगा।

भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 155 के अनुसार

साक्षी की विश्वसनीयता पर अधिक्षेप-

किसी साक्षी की विश्वसनीयता पर प्रतिपक्षी द्वारा, या न्यायालय की सम्मति से उस पक्षकार द्वारा, जिसने उसे बुलाया है, निम्नलिखित प्रकारों से अधिक्षेप किया जा सकेगा :
(1) उन व्यक्तियों के साक्ष्य द्वारा, जो यह परिसाक्ष्य देते हैं कि साक्षी के बारे में अपने ज्ञान के आधार पर, वे उसे विश्वसनीयता का अपात्र समझते हैं;
(2) यह साबित किए जाने द्वारा कि साक्षी को रिश्वत दी गई है या उसने रिश्वत की प्रस्थापना प्रतिगृहीत कर ली है या उसे अपना साक्ष्य देने के लिए कोई अन्य भ्रष्ट उत्प्रेरणा मिली है;
(3) उसके साक्ष्य के किसी ऐसे भाग से, जिसका खण्डन किया जा सकता है, असंगत पिछले कथनों को साबित करने द्वारा;
स्पष्टीकरण- कोई साक्षी जो किसी अन्य साक्षी को विश्वसनीयता के लिए अपात्र घोषित करता है, अपने से की गई मुख्य परीक्षा में अपने विश्वास के कारणों को चाहे न बताए, किन्तु प्रतिपरीक्षा में उससे उनके कारणों को पूछा जा सकेगा, और उन उत्तरों का, जिन्हें वह देता है, खण्डन नहीं किया जा सकता, तथापि यदि वे मिथ्या हों, तो तत्पश्चात् उस पर मिथ्या साक्ष्य देने का आरोप लगाया जा सकेगा।

Impeaching credit of witness-
The credit of a witness may be impeached in the following ways by the adverse party, or, with the consent of the Court, by the party who calls him-
(1) by the evidence of persons who testify that they, from their knowledge of the witness, believe him to be unworthy of credit;
(2) by proof that the witness has been bribed, or has accepted the offer of a bribe, or has received any other corrupt inducement to give his evidence;
(3) by proof of former statements inconsistent with any part of his evidence
which is liable to be contradicted;
Explanation- A witness declaring another itness to be unworthy of credit may not, upon his examination-in-chief, give reasons for his belief, but he may be asked his reasons in cross-examination, and the answers which he gives cannot be contradicted, though, if they are false, he may afterwards be charged with giving false evidence.

दृष्टान्त
(क) ख को बेचे गए और परिदान किए गए माल के मूल्य के लिए ख पर क वाद लाता है। ग कहता है कि उसने ख को माल का परिदान किया।
यह दर्शित करने के लिए साक्ष्य प्रस्थापित किया जाता है कि किसी पूर्व अवसर पर उसने कहा था कि उसने उस माल का परिदान ख को नहीं किया था।
यह साक्ष्य ग्राह्य है।
(ख) ख की हत्या के लिए क पर अभ्यारोप लगाया गया है।
ग कहता है कि ख ने मरते समय घोषित किया था कि कने ख को यह घाव किया था, जिससे वह मर गया। यह दर्शित करने के लिए साक्ष्य प्रस्थापित किया जाता है कि किसी पूर्व अवसर पर गने कहा था कि घाव क द्वारा या उसकी उपस्थिति में नहीं किया गया था।
यह साक्ष्य ग्राह्य है।

हमारा प्रयास भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 155 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 154 | पक्षकार द्वारा अपने ही साक्षी से प्रश्न | Indian Evidence Act Section- 154 in hindi| Question by party to his own witness.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 154 के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 154, साथ ही क्या बतलाती है, यह भी इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

धारा 154 का विवरण

भारतीय साक्ष्य अधिनियम (Indian Evidence Act) की धारा 154 के अन्तर्गत न्यायालय उस व्यक्ति को, जो साक्षी को बुलाता है, उस साक्षी से कोई ऐसे प्रश्न करने की अपने विवेकानुसार अनुज्ञा दे सकेगा, जो प्रतिपक्षी द्वारा प्रतिपरीक्षा में किए जा सकते हैं।

भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 154 के अनुसार

पक्षकार द्वारा अपने ही साक्षी से प्रश्न-

(1)न्यायालय उस व्यक्ति को, जो साक्षी को बुलाता है, उस साक्षी से कोई ऐसे प्रश्न करने की अपने विवेकानुसार अनुज्ञा दे सकेगा, जो प्रतिपक्षी द्वारा प्रतिपरीक्षा में किए जा सकते हैं।
(2) इस धारा की कोई चीज उपधारा (1) के अधीन इस प्रकार अनुज्ञात व्यक्ति को ऐसे साक्षी के साक्ष्य के किसी भाग पर विश्वास करने से वंचित नहीं करेगा।

Question by party to his own witness-
(1) The Court may, in its discretion, permit the person who calls a witness to put any questions to him which might be put in cross-examination by the adverse party.
(2) Nothing in this section shall disentitle the person so permitted under sub section (1), to rely on any part of the evidence of such witness.

हमारा प्रयास भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 154 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।