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भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 134 | साक्षियों की संख्या | Indian Evidence Act Section- 134 in hindi| Number of witnesses.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 134 के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 134, साथ ही क्या बतलाती है, यह भी इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

धारा 134 का विवरण

भारतीय साक्ष्य अधिनियम (Indian Evidence Act) की धारा 134 के अन्तर्गत किसी मामले में किसी तथ्य को साबित करने के लिए साक्षियों की कोई विशिष्ट संख्या अपेक्षित नहीं होगी।

भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 134 के अनुसार

साक्षियों की संख्या-

किसी मामले में किसी तथ्य को साबित करने के लिए साक्षियों की कोई विशिष्ट संख्या अपेक्षित नहीं होगी।

Number of witnesses-
No particular number of witnesses shall in any case be required for the proof of any fact.

हमारा प्रयास भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 134 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 133 | सहअपराधी | Indian Evidence Act Section- 133 in hindi| Accomplice.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 133 के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 133, साथ ही क्या बतलाती है, यह भी इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

धारा 133 का विवरण

भारतीय साक्ष्य अधिनियम (Indian Evidence Act) की धारा 133 के अन्तर्गत सहअपराधी, अभियुक्त व्यक्ति के विरुद्ध सक्षम साक्षी होगा, और कोई दोषसिद्धि केवल इसलिए अवैध नहीं है कि वह किसी सहअपराधी के असम्पुष्ट परिसाक्ष्य के आधार पर की गई है।

भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 133 के अनुसार

सहअपराधी-

सहअपराधी, अभियुक्त व्यक्ति के विरुद्ध सक्षम साक्षी होगा, और कोई दोषसिद्धि केवल इसलिए अवैध नहीं है कि वह किसी सहअपराधी के असम्पुष्ट परिसाक्ष्य के आधार पर की गई है।

Accomplice-
An accomplice shall be a competent witness against an accused person; and a conviction is not illegal merely because it proceeds upon the uncorroborated testimony of an accomplice.

बलात्कार की शिकार महिला को अपराध में सह-अपराधी नहीं माना गया है। ऐसी महिला की साक्ष्य पर सह अपराधी की साक्ष्य की तरह सन्देह नहीं किया जा सकता है।

हमारा प्रयास भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 133 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 132 | इस आधार पर कि उत्तर उसे अपराध में फँसाएगा, साक्षी उत्तर देने से क्षम्य न होगा | Indian Evidence Act Section- 132 in hindi| Witness not excused from answering on ground that answer will criminate.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 132 के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 132, साथ ही क्या बतलाती है, यह भी इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

धारा 132 का विवरण

भारतीय साक्ष्य अधिनियम (Indian Evidence Act) की धारा 132 के अन्तर्गत कोई साक्षी किसी वाद या किसी सिविल या दाण्डिक कार्यवाही में विवाद्यक विषय से सुसंगत किसी विषय के बारे में किए गए किसी प्रश्न का उत्तर देने से इस आधार पर क्षम्य नहीं होगा कि ऐसे प्रश्न का उत्तर ऐसे साक्षी को अपराध में फँसायेगा, या उसकी प्रवृत्ति प्रत्यक्षत: या परोक्षत: अपराध में फँसाने की होगी अथवा वह ऐसे साक्षी को किसी किस्म की शास्ति या समपहरण के लिए उच्छन्न करेगा या इसकी प्रवृत्ति प्रत्यक्षतः या परोक्षत: उच्छन्न करने की होगी।

भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 132 के अनुसार

इस आधार पर कि उत्तर उसे अपराध में फँसाएगा, साक्षी उत्तर देने से क्षम्य न होगा-

कोई साक्षी किसी वाद या किसी सिविल या दाण्डिक कार्यवाही में विवाद्यक विषय से सुसंगत किसी विषय के बारे में किए गए किसी प्रश्न का उत्तर देने से इस आधार पर क्षम्य नहीं होगा कि ऐसे प्रश्न का उत्तर ऐसे साक्षी को अपराध में फँसायेगा, या उसकी प्रवृत्ति प्रत्यक्षत: या परोक्षत: अपराध में फँसाने की होगी अथवा वह ऐसे साक्षी को किसी किस्म की शास्ति या समपहरण के लिए उच्छन्न करेगा या इसकी प्रवृत्ति प्रत्यक्षतः या परोक्षत: उच्छन्न करने की होगी :
परन्तुक-परन्तु ऐसा कोई भी उत्तर, जिसे देने के लिए कोई साक्षी विवश किया जाएगा, उसे गिरफ्तारी या अभियोजन के अध्यधीन नहीं करेगा और न ऐसे उत्तर द्वारा मिथ्या साक्ष्य देने के लिए अभियोजन में के सिवाय वह उसके विरुद्ध किसी दाण्डिक कार्यवाही में साबित किया जाएगा।

Witness not excused from answering on ground that answer will criminate-
A witness shall not be excused from answering any question as to any matter relevant to the matter in issue in any suit or in any civil or criminal proceeding. upon the ground that the answer to such question will criminate, or may tend directly or indirectly to criminate, such witness, or that it will expose, or tend directly or indirectly to expose, such witness to a penalty or forfeiture of any kind :
Proviso. Provided that no such answer, which a witness shall be compelled to give, shall subject him to any arrest or prosecution, or be proved against him in any criminal proceeding, except a prosecution for giving false evidence by such answer.

हमारा प्रयास भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 132 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 131 | उन दस्तावेजों या इलेक्ट्रानिक अभिलेखों का पेश किया जाना, जिन्हें कोई दूसरा व्यक्ति, जिसका उन पर कब्जा है, पेश करने से इंकार कर सकता था | Indian Evidence Act Section- 131 in hindi| Production of documents or electronic records which another person, having possession, could refuse to produce.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 131 के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 131, साथ ही क्या बतलाती है, यह भी इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

धारा 131 का विवरण

भारतीय साक्ष्य अधिनियम (Indian Evidence Act) की धारा 131 के अन्तर्गत कोई भी व्यक्ति अपने कब्जे में की ऐसी दस्तावेजों या अपने नियन्त्रण के अधीन के इलेक्ट्रानिक अभिलेखों को पेश करने के लिए, जिनको पेश करने से कोई अन्य व्यक्ति, यदि वे उसके कब्जे या नियन्त्रण में होती, विवश नहीं किया जाएगा, जब तक कि ऐसा अन्तिम वर्णित व्यक्ति उसके पेशकरण के लिये सम्मति नहीं देता।

भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 131 के अनुसार

उन दस्तावेजों या इलेक्ट्रानिक अभिलेखों का पेश किया जाना, जिन्हें कोई दूसरा व्यक्ति, जिसका उन पर कब्जा है, पेश करने से इंकार कर सकता था-

कोई भी व्यक्ति अपने कब्जे में की ऐसी दस्तावेजों या अपने नियन्त्रण के अधीन के इलेक्ट्रानिक अभिलेखों को पेश करने के लिए, जिनको पेश करने से कोई अन्य व्यक्ति, यदि वे उसके कब्जे या नियन्त्रण में होती, विवश नहीं किया जाएगा, जब तक कि ऐसा अन्तिम वर्णित व्यक्ति उसके पेशकरण के लिये सम्मति नहीं देता।

Production of documents or electronic records which another person, having possession, could refuse to produce-
No one shall be compelled to produce documents in his possession or electronic records under his control, which any other person would be entitled to refuse to produce if they were in his possession or control, unless such last-mentioned person consents to their production.

हमारा प्रयास भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 131 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 130 | जो साक्षी पक्षकार नहीं है, उसके हक-विलेखों का पेश किया जाना | Indian Evidence Act Section- 130 in hindi| Production of title-deeds of witness not a party.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 130 के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 130, साथ ही क्या बतलाती है, यह भी इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

धारा 130 का विवरण

भारतीय साक्ष्य अधिनियम (Indian Evidence Act) की धारा 130 के अन्तर्गत कोई भी साक्षी, जो वाद का पक्षकार नहीं है, किसी सम्पत्ति सम्बन्धी अपने हक-विलेखों को, या किसी ऐसी दस्तावेज को, जिसके बल पर वह गिरवीदार या बन्धकदार के रूप में कोई सम्पत्ति धारण करता है, या किसी दस्तावेज को, जिसका पेशकरण उसे अपराध में फँसाने की प्रवृत्ति रखता है, पेश करने के लिए विवश नहीं किया जाएगा. जब तक कि उसने ऐसे विलेखों के पेशकरण को ईप्सा रखने वाले व्यक्ति के साथ, या ऐसे किसी व्यक्ति के साथ जिससे व्युत्पन्न अधिकार से वह व्यक्ति दावा करता है, उन्हें पेश करने का लिखित करार न कर लिया हो।

भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 130 के अनुसार

जो साक्षी पक्षकार नहीं है, उसके हक-विलेखों का पेश किया जाना—

कोई भी साक्षी, जो वाद का पक्षकार नहीं है, किसी सम्पत्ति सम्बन्धी अपने हक-विलेखों को, या किसी ऐसी दस्तावेज को, जिसके बल पर वह गिरवीदार या बन्धकदार के रूप में कोई सम्पत्ति धारण करता है, या किसी दस्तावेज को, जिसका पेशकरण उसे अपराध में फँसाने की प्रवृत्ति रखता है, पेश करने के लिए विवश नहीं किया जाएगा. जब तक कि उसने ऐसे विलेखों के पेशकरण को ईप्सा रखने वाले व्यक्ति के साथ, या ऐसे किसी व्यक्ति के साथ जिससे व्युत्पन्न अधिकार से वह व्यक्ति दावा करता है, उन्हें पेश करने का लिखित करार न कर लिया हो।

Production of title-deeds of witness not a party-
No witness who is not a party to a suit shall be compelled to produce his title-deeds to any property, or any document in virtue of which he holds any property as pledgee or mortgagee, or any document the production of which might tend to criminate him, unless he has agreed in writing to produce them with the person seeking the production of such deeds of some person through whom he claims.

हमारा प्रयास भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 130 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 129 | विधि सलाहकारों से गोपनीय संसूचनाएँ | Indian Evidence Act Section- 129 in hindi| Confidential communications with legal advisers.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 129 के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 129, साथ ही क्या बतलाती है, यह भी इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

धारा 129 का विवरण

भारतीय साक्ष्य अधिनियम (Indian Evidence Act) की धारा 129 के अन्तर्गत कोई भी व्यक्ति किसी गोपनीय संसूचना को, जो उसके और उसके विधि-वृत्तिक सलाहकार के बीच हुई है, न्यायालय को प्रकट करने के लिए विवश नहीं किया जाएगा, जब तक कि वह अपने को साक्षी के तौर पर पेश न कर दे; ऐसे पेश करने की दशा में किन्हीं न्यायालय को आवश्यक प्रतीत हो, प्रकट करने के लिए विवश किया जा सकेगा, किन्तु किन्हीं भी अन्य भी ऐसी संसूचनाओं को, जिन्हें अउस किसी साक्ष्य को स्पष्ट करने के लिये जानना, जो उसने दिया है, संसूचनाओं को नहीं।

भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 129 के अनुसार

विधि सलाहकारों से गोपनीय संसूचनाएँ—

कोई भी व्यक्ति किसी गोपनीय संसूचना को, जो उसके और उसके विधि-वृत्तिक सलाहकार के बीच हुई है, न्यायालय को प्रकट करने के लिए विवश नहीं किया जाएगा, जब तक कि वह अपने को साक्षी के तौर पर पेश न कर दे; ऐसे पेश करने की दशा में किन्हीं न्यायालय को आवश्यक प्रतीत हो, प्रकट करने के लिए विवश किया जा सकेगा, किन्तु किन्हीं भी अन्य भी ऐसी संसूचनाओं को, जिन्हें अउस किसी साक्ष्य को स्पष्ट करने के लिये जानना, जो उसने दिया है, संसूचनाओं को नहीं।

Confidential communications with legal advisers-
No one shall be compelled to disclose to the Court any confidential communication which has taken place between him and his legal professional adviser, unless he offers himself as a witness, in which case he may be compelled to disclose any such communications as may appear to the Court necessary to be known in order to explain any evidence which he has given, but no others.

हमारा प्रयास भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 129 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।