Home Blog Page 146

भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 116 | अभिधारी का और कब्जाधारी व्यक्ति के अनुज्ञप्तिधारी का विबन्ध | Indian Evidence Act Section- 116 in hindi| Estoppel of tenant; and of licensee of person in possession.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 116 के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 116, साथ ही क्या बतलाती है, यह भी इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

धारा 116 का विवरण

भारतीय साक्ष्य अधिनियम (Indian Evidence Act) की धारा 116 के अन्तर्गत स्थावर सम्पत्ति के किसी भी अभिधारी को या ऐसे अभिधारी से व्युत्पन्न अधिकार से दावा करने वाले व्यक्ति को, ऐसी अभिधृति के लागू रहते हुए, इसका प्रत्याख्यान न करने दिया जाएगा कि ऐसे अभिधारी के भू-स्वामी का ऐसी स्थावर सम्पत्ति पर, उस अभिधृति के आरम्भ पर हक था तथा किसी भी व्यक्ति को, जो किसी स्थावर सम्पत्ति पर उस पर कब्जाधारी व्यक्ति की अनुज्ञप्ति द्वारा आया है, इसका प्रत्याख्यान न करने दिया जाएगा कि ऐसे व्यक्ति को उस समय, जब ऐसी अनुज्ञप्ति दी गई थी, ऐसे कब्जे का हक था।

भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 116 के अनुसार

अभिधारी का और कब्जाधारी व्यक्ति के अनुज्ञप्तिधारी का विबन्ध-

स्थावर सम्पत्ति के किसी भी अभिधारी को या ऐसे अभिधारी से व्युत्पन्न अधिकार से दावा करने वाले व्यक्ति को, ऐसी अभिधृति के लागू रहते हुए, इसका प्रत्याख्यान न करने दिया जाएगा कि ऐसे अभिधारी के भू-स्वामी का ऐसी स्थावर सम्पत्ति पर, उस अभिधृति के आरम्भ पर हक था तथा किसी भी व्यक्ति को, जो किसी स्थावर सम्पत्ति पर उस पर कब्जाधारी व्यक्ति की अनुज्ञप्ति द्वारा आया है, इसका प्रत्याख्यान न करने दिया जाएगा कि ऐसे व्यक्ति को उस समय, जब ऐसी अनुज्ञप्ति दी गई थी, ऐसे कब्जे का हक था।

Estoppel of tenant; and of licensee of person in possession-
No tenant of immovable property, or person claiming through such tenant, shall, during the continuance of the tenancy, be permitted to deny that the landlord of such tenant had, at the beginning of the tenancy, a title to such immovable property; and no person who came upon any immovable property by the licence of the person in possession thereof, shall be permitted to deny that such person had a title to such possession at the time when such licence was given.

हमारा प्रयास भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 116 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 115 | विबन्ध | Indian Evidence Act Section- 115 in hindi| Estoppel.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 115 के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 115, साथ ही क्या बतलाती है, यह भी इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

धारा 115 का विवरण

भारतीय साक्ष्य अधिनियम (Indian Evidence Act) की धारा 115 के अन्तर्गत जबकि एक व्यक्ति ने अपनी घोषणा, कार्य या लोप द्वारा अन्य व्यक्ति को विश्वास साशय कराया है या कर लेने दिया है कि कोई बात सत्य है और ऐसे विश्वास पर कार्य कराया या करने दिया है, तब न तो उसे और न उसके प्रतिनिधि को अपने और ऐसे व्यक्ति के, या उसके प्रतिनिधि के बीच किसी वाद या कार्यवाही में उस बात की सत्यता का प्रत्याख्यान करने दिया जाएगा।

भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 115 के अनुसार

विबन्ध–

जबकि एक व्यक्ति ने अपनी घोषणा, कार्य या लोप द्वारा अन्य व्यक्ति को विश्वास साशय कराया है या कर लेने दिया है कि कोई बात सत्य है और ऐसे विश्वास पर कार्य कराया या करने दिया है, तब न तो उसे और न उसके प्रतिनिधि को अपने और ऐसे व्यक्ति के, या उसके प्रतिनिधि के बीच किसी वाद या कार्यवाही में उस बात की सत्यता का प्रत्याख्यान करने दिया जाएगा।

Estoppel-
When one person has, by his declaration, act or omission, intentionally caused or permitted another person to believe a thing to be true and to act upon such belief, neither he nor his representative shall be allowed, in any suit or proceeding between himself and such person or his representative, to deny the truth of that thing.

दृष्टान्त
क साशय और मिथ्या रूप से ख को यह विश्वास करने के लिए प्रेरित करता है कि अमुक भूमि क की है और तद्द्वारा ख को उसे क्रय करने और उसका मूल्य चुकाने के लिए उत्प्रेरित करता है।
तत्पश्चात् भूमि क की सम्पत्ति हो जाती है और क इस आधार पर कि विक्रय के समय उसका उसमें हक नहीं था, विक्रय अपास्त करने की ईप्सा करता है। उसे अपने हक का अभाव साबित नहीं करने दिया जाएगा।

हमारा प्रयास भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 115 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 114B | भारतीय दण्ड संहिता, 1860 की धारा 354, धारा 354क, धारा 354ख, धारा 354ग, धारा 354घ, धारा 509, धारा 509क या धारा 509ख के अधीन कारित अपराधों के संबंध में उपधारणा | Indian Evidence Act Section- 114B in hindi| Presumption as to offences committed under Section 354, Section 354A, Section 354B, Section 354C, Section 354D, Section 509, Section 509A or Section 509B of the Indian Penal Code, 1860.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 114B के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 114B, साथ ही क्या बतलाती है, यह भी इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

धारा 114B का विवरण

भारतीय साक्ष्य अधिनियम (Indian Evidence Act) की धारा 114B के अन्तर्गत किसी व्यक्ति ने अपराध कारित किया है और यदि पीड़ित, न्यायालय के समक्ष यह कथन करती है कि उसका यौन उत्पीड़न हुआ या उसकी लज्जा भंग हुई अथवा उसके कपड़े उतारे गए अथवा उसका पीछा किया गया या उसकी निजता में हस्तक्षेप किया गया अथवा वह किन्हीं साधनों द्वारा यौन उत्पीड़ित की गई, यथास्थिति, वहां न्यायालय, जब तक कि विपरीत साबित न हो, तब तक यह उपधारणा कर सकेगा कि ऐसा अपराध उस व्यक्ति द्वारा कारित किया गया है।

भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 114B के अनुसार

भारतीय दण्ड संहिता, 1860 की धारा 354, धारा 354क, धारा 354ख, धारा 354ग, धारा 354घ, धारा 509, धारा 509क या धारा 509ख के अधीन कारित अपराधों के संबंध में उपधारणा–

जब प्रश्न यह है कि क्या भारतीय दण्ड संहिता, 1860 की धारा 354, धारा 354क, धारा 354ख, धारा 354ग, धारा 354घ, धारा 509, धारा 509क या धारा 509ख के अंतर्गत किसी व्यक्ति ने अपराध कारित किया है और यदि पीड़ित, न्यायालय के समक्ष यह कथन करती है कि उसका यौन उत्पीड़न हुआ या उसकी लज्जा भंग हुई अथवा उसके कपड़े उतारे गए अथवा उसका पीछा किया गया या उसकी निजता में हस्तक्षेप किया गया अथवा वह किन्हीं साधनों द्वारा यौन उत्पीड़ित की गई, यथास्थिति, वहां न्यायालय, जब तक कि विपरीत साबित न हो, तब तक यह उपधारणा कर सकेगा कि ऐसा अपराध उस व्यक्ति द्वारा कारित किया गया है।

Presumption as to offences committed under Section 354, Section 354A, Section 354B, Section 354C, Section 354D, Section 509, Section 509A or Section 509B of the Indian Penal Code, 1860-
When the question is whether a person has committed an offence under Section 354, Section 354A, Section 354B, Section 354C, Section 354D, Section 509, Section 509A or Section 509B of the Indian Penal Code and if the victim deposes before the court that she has been subjected to sexual harassment or her modesty was outraged or she was disrobed or she was stalked or her privacy was intruded or she was sexually harassed by any means, as the case may be, the court may, unless contrary is proved, presume that such offence has been committed by that person.

हमारा प्रयास भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 114B की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 114A | लैंगिक हमला के लिये कतिपय अभियोजन में सम्मति न होने की उपधारणा | Indian Evidence Act Section- 114A in hindi| Presumption as to absence of consent in certain prosecution for rape.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 114A के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 114A, साथ ही क्या बतलाती है, यह भी इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

धारा 114A का विवरण

भारतीय साक्ष्य अधिनियम (Indian Evidence Act) की धारा 114A के अन्तर्गत बलात्संग के लिये किसी अभियोजन में, जहां अभियुक्त द्वारा मैथुन करना साबित हो जाता है और प्रश्न यह है कि क्या उस स्त्री, जिसके साथ बलात्संग किया जाना अभिकथित है, की सम्मति के बिना किया गया था, और ऐसी स्त्री न्यायालय के समक्ष अपने के साक्ष्य में यह अधिकथित करती है कि वह सम्मति नहीं दी थी, वहाँ न्यायालय यह उपधारित करेगा कि वह सम्मति नहीं दी थी।

भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 114A के अनुसार

लैंगिक हमला के लिये कतिपय अभियोजन में सम्मति न होने की उपधारणा-

भारतीय दण्ड संहिता (1860 का 45) की धारा 376 की उपधारा (2) के खण्ड (क), खण्ड (ख), खण्ड (ग), खण्ड (घ), खण्ड (ङ), खण्ड (च), खण्ड (छ), खण्ड (ज), खण्ड (झ), खण् (ञ), खण्ड (ट), खण्ड (ठ) या खण्ड (ड) के अधीन बलात्संग के लिये किसी अभियोजन में, जहां अभियुक्त द्वारा मैथुन करना साबित हो जाता है और प्रश्न यह है कि क्या उस स्त्री, जिसके साथ बलात्संग किया जाना अभिकथित है, की सम्मति के बिना किया गया था, और ऐसी स्त्री न्यायालय के समक्ष अपने के साक्ष्य में यह अधिकथित करती है कि वह सम्मति नहीं दी थी, वहाँ न्यायालय यह उपधारित करेगा कि वह सम्मति नहीं दी थी।

Presumption as to absence of consent in certain prosecution for rape-
In a prosecution for rape under clause (a), clause (b), clause (c), clause (d), clause (e), clause (f), clause (g), clause (h), clause (i), clause (j), clause (k), clause (1), clause (in) or clause (n) of sub-section (2) of Section 376 of the Indian Penal Code (45 of 1860), where sexual intercourse by the accused is proved and the question is whether it was without the consent of the woman alleged to have been raped and such woman states in her evidence before the court that she did not consent, the court shall presume that she did not consent.

स्पष्टीकरण- इस धारा में “मैथुन” से भारतीय दण्ड संहिता (1860 का 45) की धारा 375 के खण्ड (क) से (ग) में वर्णित कार्यों में से कोई अभिप्रेत होगा।

हमारा प्रयास भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 114A की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 114 | न्यायालय किन्हीं तथ्यों का अस्तित्व उपधारित कर सकेगा | Indian Evidence Act Section- 114 in hindi| Court may presume existence of certain facts.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 114 के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 114, साथ ही क्या बतलाती है, यह भी इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

धारा 114 का विवरण

भारतीय साक्ष्य अधिनियम (Indian Evidence Act) की धारा 114 के अन्तर्गत न्यायालय ऐसे किसी तथ्य का अस्तित्व उपधारित कर सकेगा जिसका घटित होना उस विशिष्ट मामले के तथ्यों के सम्बन्ध में प्राकृतिक घटनाओं, मानवीय आचरण तथा लोक और प्राइवेट कारोबार के सामान्य अनुक्रम को ध्यान में रखते हुए वह सम्भाव्य समझता है।

भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 114 के अनुसार

न्यायालय किन्हीं तथ्यों का अस्तित्व उपधारित कर सकेगा-

न्यायालय ऐसे किसी तथ्य का अस्तित्व उपधारित कर सकेगा जिसका घटित होना उस विशिष्ट मामले के तथ्यों के सम्बन्ध में प्राकृतिक घटनाओं, मानवीय आचरण तथा लोक और प्राइवेट कारोबार के सामान्य अनुक्रम को ध्यान में रखते हुए वह सम्भाव्य समझता है।

Court may presume existence of certain facts-
The Court may presume the existence of any fact which it thinks likely to have happened, regard being had to the common course of natural events, human conduct and public and private business, in their relation to the facts of the particular case.

दृष्टान्त
न्यायालय उपधारित कर सकेगा-
(क) कि चुराए हुए माल पर जिस मनुष्य का चोरी के शीघ्र उपरान्त कब्जा है, जब तक कि वह अपने कब्जे का कारण न बता सके, या तो वह चोर है या उसने माल को चुराया हुआ जानते हुए प्राप्त किया है;
(ख) कि सह-अपराधी विश्वसनीयता के अयोग्य है, जब तक कि तात्विक विशिष्टियों में उसकी सम्पुष्टि नहीं होती;
किन्तु न्यायालय यह विचार करने में कि ऐसे सूत्र उसके समक्ष के विशिष्ट मामले को लागू होते हैं या नहीं, निम्नलिखित प्रकार के तथ्यों का भी ध्यान रखेगा:
दृष्टान्त (क) के बारे में- किसी दुकानदार के पास उसके गल्ले में कोई चिह्नित रुपया उसके चुराए जाने के शीघ्र पश्चात् है, और वह उसके कब्जे का कारण विनिर्दिष्टतः नहीं बता सकता, किन्तु अपने कारोबार के अनुक्रम में वह रुपया लगातार प्राप्त कर रहा है;
दृष्टान्त (ख) के बारे में-एक अत्यन्त ऊंचे शील का व्यक्ति, क किसी मशीनरी को ठीक-ठीक लगाने में किसी उपेक्षापूर्वक कार्य द्वारा किसी व्यक्ति की मृत्यु कारित करने के लिए विचारित है। वैसा ही अच्छे शील का व्यक्ति, ख जिसने मशीनरी लगाने के उस काम में भाग लिया था, ब्यौरेवार वर्णन करता है कि क्या-क्या किया गया था और क की और स्वयं अपनी सामान्य असावधानी स्वीकृत और स्पष्ट करता है।

हमारा प्रयास भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 114 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 113B | दहेज मृत्यु के बारे में उपधारणा | Indian Evidence Act Section- 113B in hindi| Presumption as to dowry death.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 113B के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 113B, साथ ही क्या बतलाती है, यह भी इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

धारा 113B का विवरण

भारतीय साक्ष्य अधिनियम (Indian Evidence Act) की धारा 113B के अन्तर्गत किसी व्यक्ति ने किसी स्त्री की दहेज मृत्यु की है और यह दर्शित किया जाता है कि मृत्यु के कुछ पूर्व ऐसे व्यक्ति ने दहेज की किसी मांग के लिए या उसके सम्बन्ध में उस स्त्री के साथ क्रूरता की थी या उसको तंग किया था, तो न्यायालय यह उपधारणा करेगा कि ऐसे व्यक्ति ने दहेज मृत्यु कारित की थी।

भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 113B के अनुसार

दहेज मृत्यु के बारे में उपधारणा-

जब प्रश्न यह है कि किसी व्यक्ति ने किसी स्त्री की दहेज मृत्यु की है और यह दर्शित किया जाता है कि मृत्यु के कुछ पूर्व ऐसे व्यक्ति ने दहेज की किसी मांग के लिए या उसके सम्बन्ध में उस स्त्री के साथ क्रूरता की थी या उसको तंग किया था, तो न्यायालय यह उपधारणा करेगा कि ऐसे व्यक्ति ने दहेज मृत्यु कारित की थी।

Presumption as to dowry death-
When the question is whether a person has committed the dowry death of a woman and it is shown that soon before her death such woman had been subjected by such person to cruelty or harassment for, or in connection with, any demand for dowry, the Court shall presume that such person had caused the dowry death.

स्पष्टीकरण- इस धारा के प्रयोजनों के लिए “दहेज मृत्यु” का वही अर्थ है जो भारतीय दण्ड संहिता (1860 का 45) की धारा 304 (ख) में है।

हमारा प्रयास भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 113B की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।