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भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 122 | विवाहित स्थिति के दौरान में की गई संसूचनाएँ | Indian Evidence Act Section- 122 in hindi| Communications during marriage.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 122 के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 122, साथ ही क्या बतलाती है, यह भी इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

धारा 122 का विवरण

भारतीय साक्ष्य अधिनियम (Indian Evidence Act) की धारा 122 के अन्तर्गत कोई भी व्यक्ति, जो विवाहित है या जो विवाहित रह चुका है, किसी संसूचना को, जो किसी व्यक्ति द्वारा, जिससे वह विवाहित है या रह चुका है, विवाहित स्थिति के दौरान में उसे दी गई थी, प्रकट करने के लिए विवश न किया जाएगा, और न वह किसी ऐसी संसूचना को प्रकट करने के लिए अनुज्ञात किया जाएगा, जब तक वह व्यक्ति, जिसने वह संसूचना दी है या उसका हित-प्रतिनिधि सम्मत न हो, सिवाय उन वादों में, जो विवाहित व्यक्तियों के बीच हों, या उन कार्यवाहियों में, जिनमें एक विवाहित व्यक्ति दूसरे के विरुद्ध किए गए किसी अपराध के लिए अभियोजित है।

भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 122 के अनुसार

विवाहित स्थिति के दौरान में की गई संसूचनाएँ-

कोई भी व्यक्ति, जो विवाहित है या जो विवाहित रह चुका है, किसी संसूचना को, जो किसी व्यक्ति द्वारा, जिससे वह विवाहित है या रह चुका है, विवाहित स्थिति के दौरान में उसे दी गई थी, प्रकट करने के लिए विवश न किया जाएगा, और न वह किसी ऐसी संसूचना को प्रकट करने के लिए अनुज्ञात किया जाएगा, जब तक वह व्यक्ति, जिसने वह संसूचना दी है या उसका हित-प्रतिनिधि सम्मत न हो, सिवाय उन वादों में, जो विवाहित व्यक्तियों के बीच हों, या उन कार्यवाहियों में, जिनमें एक विवाहित व्यक्ति दूसरे के विरुद्ध किए गए किसी अपराध के लिए अभियोजित है।

Communications during marriage-
No person who is or has been married, shall be compelled to disclose any communication made to him during marriage by any person to whom he is or has been married; nor shall he be permitted to disclose any such communication, unless the person who made it, or his representative in interest, consents, except in suits between married persons, or proceedings in which one married person is prosecuted for any crime committed against the other.

हमारा प्रयास भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 122 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 121 | न्यायाधीश और मजिस्ट्रेट | Indian Evidence Act Section- 121 in hindi| Judges and Magistrates.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 121 के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 121, साथ ही क्या बतलाती है, यह भी इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

धारा 121 का विवरण

भारतीय साक्ष्य अधिनियम (Indian Evidence Act) की धारा 121 के अन्तर्गत किसी व्यक्ति ने किसी स्त्री की दहेज मृत्यु की है और यह दर्शित किया जाता है कि मृत्यु के कुछ पूर्व ऐसे व्यक्ति ने दहेज की किसी मांग के लिए या उसके सम्बन्ध में उस स्त्री के साथ क्रूरता की थी या उसको तंग किया था, तो न्यायालय यह उपधारणा करेगा कि ऐसे व्यक्ति ने दहेज मृत्यु कारित की थी।

भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 121 के अनुसार

न्यायाधीश और मजिस्ट्रेट-

कोई भी न्यायाधीश या मजिस्ट्रेट न्यायालय में ऐसे न्यायाधीश या मजिस्ट्रेट के नाते अपने स्वयं के आचरण के बारे में, या ऐसी किसी बात के बारे में, जिसका ज्ञान उसे ऐसे न्यायाधीश या मजिस्ट्रेट के नाते न्यायालय में हुआ, किन्हीं प्रश्नों का उत्तर देने के लिये ऐसे किसी भी न्यायालय के विशेष आदेश के सिवाय, जिसके वह अधीनस्थ है, विवश नहीं किया जायेगा; किन्तु अन्य बातों के बारे में जो उसकी उपस्थिति में उस समय घटित हुई थीं, जब वह ऐसे कार्य कर रहा था उसकी परीक्षा की जा सकेगी।

Judges and Magistrates-
No Judge or Magistrate shall, except upon the special order of some Court to which he is subordinate, be compelled to answer any questions as to his own conduct in Court as such Judge or Magistrate, or as to anything which came to his knowledge in Court as such Judge or Magistrate; but he may be examined as to other matters which occurred in his presence whilst he was so acting.

दृष्टान्त
(क) सेशन्स न्यायालय के समक्ष अपने विचार में क कहता है कि अभिसाक्ष्य मजिस्ट्रेट ख द्वारा अनुचित रूप से लिया गया था। तद्विषयक प्रश्नों का उत्तर देने के लिए क को किसी वरिष्ठ न्यायालय के विशेष आदेश के सिवाय विवश नहीं किया जा सकता।
(ख) मजिस्ट्रेट ख के समक्ष मिथ्या साक्ष्य देने का क सेशन्स न्यायालय के समक्ष अभियुक्त है। वरिष्ठ न्यायालय के विशेष आदेश के सिवाय ख से यह नहीं पूछा जा सकता कि कने क्या कहा था।
(ग) क सेशन्स न्यायालय के समक्ष इसलिए अभियुक्त है कि उसने सेशन्स न्यायाधीश ख के समक्ष विचारित होते समय किसी पुलिस आफिसर की हत्या करने का प्रयत्न किया। ख की यह परीक्षा की जा सकेगी कि क्या घटित हुआ था।

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भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 120 | सिविल वाद के पक्षकार और उनकी पत्नियाँ या पति। दांडिक विचारण के अधीन व्यक्ति का पति या पत्नी | Indian Evidence Act Section- 120 in hindi| Parties to civil suit, and their wives or husbands. Husband, or wife of person under criminal trial.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 120 के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 120, साथ ही क्या बतलाती है, यह भी इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

धारा 120 का विवरण

भारतीय साक्ष्य अधिनियम (Indian Evidence Act) की धारा 120 के अन्तर्गत किसी व्यक्ति ने किसी स्त्री की दहेज मृत्यु की है और यह दर्शित किया जाता है कि मृत्यु के कुछ पूर्व ऐसे व्यक्ति ने दहेज की किसी मांग के लिए या उसके सम्बन्ध में उस स्त्री के साथ क्रूरता की थी या उसको तंग किया था, तो न्यायालय यह उपधारणा करेगा कि ऐसे व्यक्ति ने दहेज मृत्यु कारित की थी।

भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 120 के अनुसार

सिविल वाद के पक्षकार और उनकी पत्नियाँ या पति। दांडिक विचारण के अधीन व्यक्ति का पति या पत्नी-

सभी सिविल कार्यवाहियों में वाद के पक्षकार और वाद के किसी पक्षकार का पति या पत्नी सक्षम साक्षी होंगे। किसी व्यक्ति के विरुद्ध दाण्डिक कार्यवाही में उस व्यक्ति का पति या पत्नी सक्षम साक्षी होगा या होगी।

Parties to civil suit, and their wives or husbands. Husband, or wife of person under criminal trial-
In all civil proceedings the parties to the suit, and the husband or wife of any party to the suit, shall be competent witnesses. In criminal proceedings against any person, the husband or wife of such person, respectively, shall be a competent witness.

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भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 119 | साक्षी, जो मौखिक रूप से संसूचना देने में असमर्थ है | Indian Evidence Act Section- 119 in hindi| Witness unable to communicate verbally.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 119 के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 119, साथ ही क्या बतलाती है, यह भी इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

धारा 119 का विवरण

भारतीय साक्ष्य अधिनियम (Indian Evidence Act) की धारा 119 के अन्तर्गत वह साक्षी, जो बोलने में असमर्थ है, अपना साक्ष्य किसी अन्य प्रकार से, जिसमें वह उसे बोधगम्य बना सकता हो, यथा लिखकर या संकेतों द्वारा दे सकेगा, किन्तु ऐसा लेख और वे संकेत खुले न्यायालय में लिखने होंगे या करने होंगे। इस प्रकार दिया हुआ साक्ष्य मौखिक साक्ष्य होना ही समझा जायेगा।

भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 119 के अनुसार

साक्षी, जो मौखिक रूप से संसूचना देने में असमर्थ है-

वह साक्षी, जो बोलने में असमर्थ है, अपना साक्ष्य किसी अन्य प्रकार से, जिसमें वह उसे बोधगम्य बना सकता हो, यथा लिखकर या संकेतों द्वारा दे सकेगा, किन्तु ऐसा लेख और वे संकेत खुले न्यायालय में लिखने होंगे या करने होंगे। इस प्रकार दिया हुआ साक्ष्य मौखिक साक्ष्य होना ही समझा जायेगाः
परन्तु यदि साक्षी मौखिक रूप से संसूचना देने में असमर्थ है, तो न्यायालय कथन को अभिलिखित करने में विशेष द्विभाषिये या विशेष प्रबोधक की सहायता लेगा और ऐसे कथन की वीडियो फिल्म तैयार की जा सकेगी।

Witness unable to communicate verbally-
A witness who is unable to speak may give his evidence in any other manner in which he can make it intelligible, as by writing or by signs; but such writing must be written and the signs made in open Court, evidence so given shall be deemed to be oral evidence:
Provided that if the witness is unable to communicate verbally, the Court shall take the assistance of an interpreter or special educator in recording the statement, and such statement shall be videographed.

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भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 118 | कौन साक्ष्य दे सकेगा | Indian Evidence Act Section- 118 in hindi| Who may testify.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 118 के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 118, साथ ही क्या बतलाती है, यह भी इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

धारा 118 का विवरण

भारतीय साक्ष्य अधिनियम (Indian Evidence Act) की धारा 118 के अन्तर्गत सभी व्यक्ति साक्ष्य देने के लिए सक्षम होंगे, जब तक कि न्यायालय का यह विचार न हो कि कोमल वयस, अतिवार्धक्य, शरीर के या मन के रोग या इसी प्रकार के किसी अन्य कारण से वे उनसे किए गए प्रश्नों को समझने से या उन प्रश्नों के युक्तिसंगत उत्तर देने से निवारित हैं।

भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 118 के अनुसार

कौन साक्ष्य दे सकेगा–

सभी व्यक्ति साक्ष्य देने के लिए सक्षम होंगे, जब तक कि न्यायालय का यह विचार न हो कि कोमल वयस, अतिवार्धक्य, शरीर के या मन के रोग या इसी प्रकार के किसी अन्य कारण से वे उनसे किए गए प्रश्नों को समझने से या उन प्रश्नों के युक्तिसंगत उत्तर देने से निवारित हैं।

Who may testify-
All persons shall be competent to testify unless the Court considers that they are prevented from understanding the questions put to them, or from giving rational answers to those questions, by tender years, extreme old age, disease, whether of body or mind, or any other cause of the same kind.

स्पष्टीकरण- कोई पागल व्यक्ति साक्ष्य देने के लिए अक्षम नहीं है, जब तक कि वह अपने पागलपन के कारण उससे किए गए प्रश्नों को समझने से या उनके युक्तिसंगत उत्तर देने से निवारित न हो।
साक्षी की विश्वसनीयता- यदि किसी साक्षी पर ऐसी बिन्दु पर विश्वास नहीं किया जा सकता, तो दूसरे बिन्दु पर भी उस पर विश्वास न करना उचित नहीं है।
शिशु साक्षी के साक्ष्य का महत्व- केवल शिशु साक्षी के साक्ष्य के आधार पर दोषसिद्धि की जा सकती है, यदि वह तथ्य का साक्ष्य देने के लिए समर्थ पाया जाता है तथा उसका साक्ष्य विश्वसनीय है।

हमारा प्रयास भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 118 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 117 | विनिमय-पत्र के प्रतिगृहीता का, उपनिहिती का या अनुज्ञप्तिधारी का विबन्ध | Indian Evidence Act Section- 117 in hindi| Estoppel of acceptor of bill of exchange, bailee or licensee.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 117 के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 117, साथ ही क्या बतलाती है, यह भी इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

धारा 117 का विवरण

भारतीय साक्ष्य अधिनियम (Indian Evidence Act) की धारा 117 के अन्तर्गत किसी विनिमय-पत्र के प्रतिगृहीता को इसका प्रत्याख्यान करने की अनुज्ञा न दी जाएगी कि लेखीवाल को ऐसा विनिमय-पत्र लिखने या उसे पृष्ठांकित करने का प्राधिकार था, और न किसी उपनिहिती या अनुज्ञप्तिधारी को इसका प्रत्याख्यान करने दिया जाएगा कि उपनिधाता या अनुज्ञापक को उस समय, जब ऐसा उपनिधान या अनुज्ञप्ति आरम्भ हुई, ऐसे उपनिधान करने या अनुज्ञप्ति अनुदान करने का प्राधिकार था।

भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 117 के अनुसार

विनिमय-पत्र के प्रतिगृहीता का, उपनिहिती का या अनुज्ञप्तिधारी का विबन्ध-

किसी विनिमय-पत्र के प्रतिगृहीता को इसका प्रत्याख्यान करने की अनुज्ञा न दी जाएगी कि लेखीवाल को ऐसा विनिमय-पत्र लिखने या उसे पृष्ठांकित करने का प्राधिकार था, और न किसी उपनिहिती या अनुज्ञप्तिधारी को इसका प्रत्याख्यान करने दिया जाएगा कि उपनिधाता या अनुज्ञापक को उस समय, जब ऐसा उपनिधान या अनुज्ञप्ति आरम्भ हुई, ऐसे उपनिधान करने या अनुज्ञप्ति अनुदान करने का प्राधिकार था।

Estoppel of acceptor of bill of exchange, bailee or licensee-
No acceptor of a bill of exchange shall be permitted to deny that the drawer had authority to draw such bill or to endorse it; nor shall any bailee or licensee be permitted to deny that his bailor or licensor had, at the time when the bailment or licence commenced, authority to make such bailment or grant such licence.

स्पष्टीकरण 1- किसी विनिमय-पत्र का प्रतिगृहीता इसका प्रत्याख्यान कर सकता है कि विनिमय-पत्र वास्तव में उस व्यक्ति द्वारा लिखा गया था जिसके द्वारा लिखा गया वह तात्पर्यित है।

हमारा प्रयास भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 117 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।