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भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 77 | प्रमाणित प्रतियों के पेश करने द्वारा दस्तावेजों का सबूत | Indian Evidence Act Section- 77 in hindi| Proof of documents by production of certified copies.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 77 के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 77, साथ ही क्या बतलाती है, यह भी इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

धारा 77 का विवरण

भारतीय साक्ष्य अधिनियम (Indian Evidence Act) की धारा 77 के अन्तर्गत ऐसी प्रमाणित प्रतियाँ उन लोक दस्तावेजों की या उन लोक दस्तावेज के भागों की अन्तर्वस्तु के सबूत में पेश की जा सकेंगी जिनकी वे प्रतियाँ होना तात्पर्यित हैं।

भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 77 के अनुसार

प्रमाणित प्रतियों के पेश करने द्वारा दस्तावेजों का सबूत-

ऐसी प्रमाणित प्रतियाँ उन लोक दस्तावेजों की या उन लोक दस्तावेज के भागों की अन्तर्वस्तु के सबूत में पेश की जा सकेंगी जिनकी वे प्रतियाँ होना तात्पर्यित हैं।

Proof of documents by production of certified copies-
Such certified copies may be produced in proof of the contents of the public documents or parts of the public documents of which they purport to be copies.

हमारा प्रयास भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 77 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 76 | लोक दस्तावेजों की प्रमाणित प्रतियाँ | Indian Evidence Act Section- 76 in hindi| Certified copies of public documents.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 76 के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 76, साथ ही क्या बतलाती है, यह भी इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

धारा 76 का विवरण

भारतीय साक्ष्य अधिनियम (Indian Evidence Act) की धारा 76 के अन्तर्गत हर लोक आफिसर जिसकी अभिरक्षा में कोई ऐसी लोक दस्तावेज है, जिसके निरीक्षण करने का किसी भी व्यक्ति को अधिकार है, मांग किये जाने पर उस व्यक्ति को उसकी प्रति उसके लिए विधिक फीस चुकाये जाने पर प्रति के नीचे इस लिखित प्रमाणपत्र के सहित देगा कि वह, यथास्थिति, ऐसी दस्तावेज की या उसके भाग की शुद्ध प्रति है तथा ऐसा प्रमाणपत्र ऐसे आफिसर द्वारा दिनांकित किया जायेगा और उसके नाम और पदाभिधान से हस्ताक्षरित किया जायेगा।

भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 76 के अनुसार

लोक दस्तावेजों की प्रमाणित प्रतियाँ-

हर लोक आफिसर जिसकी अभिरक्षा में कोई ऐसी लोक दस्तावेज है, जिसके निरीक्षण करने का किसी भी व्यक्ति को अधिकार है, मांग किये जाने पर उस व्यक्ति को उसकी प्रति उसके लिए विधिक फीस चुकाये जाने पर प्रति के नीचे इस लिखित प्रमाणपत्र के सहित देगा कि वह, यथास्थिति, ऐसी दस्तावेज की या उसके भाग की शुद्ध प्रति है तथा ऐसा प्रमाणपत्र ऐसे आफिसर द्वारा दिनांकित किया जायेगा और उसके नाम और पदाभिधान से हस्ताक्षरित किया जायेगा तथा जब कभी ऐसा आफिसर विधि द्वारा किसी मुद्रा का उपयोग करने के लिए प्राधिकृत है तब मुद्रायुक्त किया जाएगा, तथा इस प्रकार प्रमाणित ऐसी प्रतियां प्रमाणित प्रतियाँ कहलायेंगी।

Certified copies of public documents-
Every public officer having the custody of a public document, which any person has a right to inspect, shall give that person on demand a copy of it on payment of the legal fees therefor, together with a certificate written at the foot of such copy that it is a true copy of such document or part thereof, as the case may be, and such certificate shall be dated and subscribed by such officer with his name and his official title, and shall be sealed, whenever such officer is authorised by law to make use of a seal; and such copies so certified shall be called certified copies.
स्पष्टीकरण- जो कोई आफिसर पदीय कर्तव्य के मामूली अनुक्रम में ऐसी प्रतियाँ परिदान करने के लिए प्राधिकृत है, वह इस धारा के अर्थ के अन्तर्गत ऐसी दस्तावेजों की अभिरक्षा रखता है, यह समझा जायेगा।

हमारा प्रयास भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 76 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 74 | लोक दस्तावेजें | Indian Evidence Act Section- 74 in hindi| Public documents.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 74 के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 74, साथ ही क्या बतलाती है, यह भी इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

धारा 74 का विवरण

भारतीय साक्ष्य अधिनियम (Indian Evidence Act) की धारा 74 के अन्तर्गत वे दस्तावेजें जो प्रभुतासम्पन्न प्राधिकारी के, शासकीय निकायों और अधिकरणों के, तथा भारत के किसी भाग या कामनवेल्थ के, या किसी विदेश के विधायी, न्यायिक तथा कार्यपालक लोक आफिसरों के कार्यों के रूप में या कार्यों के अभिलेख के रूप में हैं अथवा किसी राज्य में रखे गये प्राइवेट दस्तावेजों के लोक अभिलेख, लोक दस्तावेज होते है।

भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 74 के अनुसार

लोक दस्तावेजें–

निम्नलिखित दस्तावेजें लोक दस्तावेज हैं:
(1) वे दस्तावेजें जो
(i) प्रभुतासम्पन्न प्राधिकारी के,
(ii) शासकीय निकायों और अधिकरणों के, तथा
(iii) भारत के किसी भाग या कामनवेल्थ के, या किसी विदेश के विधायी, न्यायिक तथा कार्यपालक लोक आफिसरों के,
कार्यों के रूप में या कार्यों के अभिलेख के रूप में हैं;
(2) किसी राज्य में रखे गये प्राइवेट दस्तावेजों के लोक अभिलेख

Public documents
The following documents are public documents :
(1) documents forming the acts, or records of the acts-
(i) of the sovereign authority,
(ii) of official bodies and tribunals, and
(iii) of public officers, legislative, judicial and executive, of any part of India or of the Commonwealth, or of a foregin country;
(2) public records kept in any State of private documents.

टिप्पणियाँ
वाद पत्र को लोक दस्तावेज नहीं माना गया है। यह साक्ष्य में तब तक ग्राह्य नहीं होता जब तक इसकी अन्तर्वस्तुओं को साबित नहीं कर दिया जाता है।

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भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 73A | अंकीय हस्ताक्षर के सत्यापन के बारे में सबूत | Indian Evidence Act Section- 73A in hindi| Proof as to verification of digital signature.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 73A के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 73A, साथ ही क्या बतलाती है, यह भी इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

धारा 73A का विवरण

भारतीय साक्ष्य अधिनियम (Indian Evidence Act) की धारा 73A के अन्तर्गत यह सुनिश्चित करने के लिए, कि क्या अंकीय हस्ताक्षर उस व्यक्ति का अंकीय हस्ताक्षर है, जिसके द्वारा वह किया गया तात्पर्यित है, न्यायालय उस व्यक्ति या नियंत्रक या प्रमाणकर्ता प्राधिकारी को अंकीय हस्ताक्षर प्रमाणपत्र पेश करने का निदेश दे सकेगा।

भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 73A के अनुसार

अंकीय हस्ताक्षर के सत्यापन के बारे में सबूत-

यह सुनिश्चित करने के लिए, कि क्या अंकीय हस्ताक्षर उस व्यक्ति का अंकीय हस्ताक्षर है, जिसके द्वारा वह किया गया तात्पर्यित है, न्यायालय-
(क) उस व्यक्ति या नियंत्रक या प्रमाणकर्ता प्राधिकारी को अंकीय हस्ताक्षर प्रमाणपत्र पेश करने का निदेश दे सकेगा,
(ख) किसी अन्य व्यक्ति को अंकीय हस्ताक्षर प्रमाणपत्र में सूचीबद्ध सार्वजनिक सूचक शब्द को प्रयोग करने और उस व्यक्ति द्वारा किया गया तात्पर्यित अंकीय हस्ताक्षर को सत्यापित करने का निर्देश दे सकेगा।

Proof as to verification of digital signature-
In order to ascertain whether a digital signature is that of the person by whom it purports to have been affixed, the Court may direct-
(a) that person or the Controller or the Certifying Authority to produce the Digital Signature Certificate;
(b) any other person to apply the public key listed in the Digital Signature Certificate and verify the digital signature purported to have been affixed by that person.

स्पष्टीकरण- इस धारा के प्रयोजनों के लिए, “नियंत्रक” से ऐसा नियंत्रक अभिप्रेत है, जो सूचना ” प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 की धारा 17 की उपधारा (1) के अधीन नियुक्त किया गया हो।

हमारा प्रयास भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 73A की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 73 | हस्ताक्षर, लेख, या मुद्रा की तुलना अन्यों से जो स्वीकृत या साबित हैं | Indian Evidence Act Section- 73 in hindi | Comparison of signature, writing or seal with others admitted or proved.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 73 के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 73, साथ ही क्या बतलाती है, यह भी इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

धारा 73 का विवरण

भारतीय साक्ष्य अधिनियम (Indian Evidence Act) की धारा 73 के अन्तर्गत यह अभिनिश्चित करने के लिए कि क्या कोई हस्ताक्षर, लेख या मुद्रा उस व्यक्ति की है, जिसके द्वारा उसका लिखा या किया जाना तात्पर्यित है, किसी हस्ताक्षर, लेख या मुद्रा की, जिसके बारे में यह स्वीकृत है या न्यायालय को समाधानप्रद रूप में साबित कर दिया गया है कि वह उस व्यक्ति द्वारा लिखा या किया गया था, उससे, जिसे साबित किया जाना है, तुलना की जा सकेगी, यद्यपि वह हस्ताक्षर, लेख या मुद्रा किसी अन्य प्रयोजन के लिए पेश या साबित न की गई हो।

भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 73 के अनुसार

हस्ताक्षर, लेख, या मुद्रा की तुलना अन्यों से जो स्वीकृत या साबित हैं–

यह अभिनिश्चित करने के लिए कि क्या कोई हस्ताक्षर, लेख या मुद्रा उस व्यक्ति की है, जिसके द्वारा उसका लिखा या किया जाना तात्पर्यित है, किसी हस्ताक्षर, लेख या मुद्रा की, जिसके बारे में यह स्वीकृत है या न्यायालय को समाधानप्रद रूप में साबित कर दिया गया है कि वह उस व्यक्ति द्वारा लिखा या किया गया था, उससे, जिसे साबित किया जाना है, तुलना की जा सकेगी, यद्यपि वह हस्ताक्षर, लेख या मुद्रा किसी अन्य प्रयोजन के लिए पेश या साबित न की गई हो।
न्यायालय में उपस्थित किसी व्यक्ति को किन्हीं शब्दों या अंकों के लिखने का निदेश न्यायालय इस प्रयोजन से दे सकेगा कि ऐसे लिखे गए शब्दों या अंकों की किन्हीं ऐसे शब्दों या अंकों से तुलना करने के लिए न्यायालय समर्थ हो सके जिनके बारे में अभिकथित है कि वे उस व्यक्ति द्वारा लिखे गए थे।
यह धारा किन्हीं आवश्यक उपान्तरों के साथ अंगुलि छापों को भी लागू है।

Comparison of signature, writing or seal with others admitted or proved-
In order to ascertain whether a signature, writing, or seal is that of the person by whom it purports to have been written or made, any signature, writing or seal admitted or proved to the satisfaction of the Court to have been written or made by that person may be compared with the one which is to be proved, although that signature, writing, or seal has not been produced or proved for any other purpose.
The Court may direct any person present in Court to write any words or figures for the purpose of enabling the Court to compare the words or figures so written with any words or figures alleged to have been written by such person.
This section applies also, with any necessary modification, to finger-impressions.

हमारा प्रयास भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 73 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 72 | उस दस्तावेज का साबित किया जाना जिसका अनुप्रमाणित होना विधि द्वारा अपेक्षित नहीं है | Indian Evidence Act Section- 72 in hindi| Proof of document not required by law to be attested.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 72 के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 72, साथ ही क्या बतलाती है, यह भी इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

धारा 72 का विवरण

भारतीय साक्ष्य अधिनियम (Indian Evidence Act) की धारा 72 के अन्तर्गत कोई अनुप्रमाणित दस्तावेज, जिसका अनुप्रमाणित होना विधि द्वारा अपेक्षित नहीं है, ऐसे साबित की जा सकेगी, मानो वह अनुप्रमाणित नहीं हो।

भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 72 के अनुसार

उस दस्तावेज का साबित किया जाना जिसका अनुप्रमाणित होना विधि द्वारा अपेक्षित नहीं है-

कोई अनुप्रमाणित दस्तावेज, जिसका अनुप्रमाणित होना विधि द्वारा अपेक्षित नहीं है, ऐसे साबित की जा सकेगी, मानो वह अनुप्रमाणित नहीं हो।

Proof of document not required by law to be attested-
An attesting document not required by law to be attested may be proved as if it was unattested.

हमारा प्रयास भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 72 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।