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भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 37 | किन्हीं अधिनियमों या अधिसूचनाओं में अन्तर्विष्ट लोक प्रकृति के तथ्य के बारे में कथन की सुसंगति | Indian Evidence Act Section- 37 in hindi| Relevancy of statement as to fact to public nature, contained in certain Acts or notifications.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 37 के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 37, साथ ही क्या बतलाती है, यह भी इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

धारा 37 का विवरण

भारतीय साक्ष्य अधिनियम (Indian Evidence Act) की धारा 37 के अन्तर्गत जब न्यायालय किसी लोक प्रकृति के तथ्य के अस्तित्व के बारे में राय बनानी है तब यूनाइटेड किंगडम की पार्लियामेन्ट के ऐक्ट में या किसी केन्द्रीय अधिनियम, प्रान्तीय अधिनियम या राज्य अधिनियम में या शासकीय राजपत्र में प्रकाशित किसी सरकारी अधिसूचना या क्राउन रिप्रेजेन्टेटिव द्वारा की गयी अधिसूचना में या लन्दन गजट या हिज मैजेस्टी के किसी डोमीनियन, उपनिवेश या कब्जाधीन क्षेत्र का सरकारी राजपत्र तात्पर्यित होने वाले किसी मुद्रित-पत्र में अन्तर्विष्ट परिवर्णन में किया गया उसका कोई कथन सुसंगत तथ्य है।

भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 37 के अनुसार

किन्हीं अधिनियमों या अधिसूचनाओं में अन्तर्विष्ट लोक प्रकृति के तथ्य के बारे में कथन की सुसंगति–

जबकि न्यायालय को किसी लोक प्रकृति के तथ्य के अस्तित्व के बारे में राय बनानी है तब यूनाइटेड किंगडम की पार्लियामेन्ट के ऐक्ट में या किसी केन्द्रीय अधिनियम, प्रान्तीय अधिनियम या राज्य अधिनियम में या शासकीय राजपत्र में प्रकाशित किसी सरकारी अधिसूचना या क्राउन रिप्रेजेन्टेटिव द्वारा की गयी अधिसूचना में या लन्दन गजट या हिज मैजेस्टी के किसी डोमीनियन, उपनिवेश या कब्जाधीन क्षेत्र का सरकारी राजपत्र तात्पर्यित होने वाले किसी मुद्रित-पत्र में अन्तर्विष्ट परिवर्णन में किया गया उसका कोई कथन सुसंगत तथ्य है।

Relevancy of statement as to fact to public nature, contained in certain Acts or notifications-
When the Court has to form an opinion as to the existence of any fact of a public nature, any statement of it, made in a recital contained in any Act of Parliament of the United Kingdom or in any Central Act, Provincial Act, or a State Act, or in a Government notification or notification by the Crown Representative appearing in the Official Gazette or in any printed paper purporting to be the London Gazette or the Government Gazette of any Dominion, colony or possession of His Majesty is a relevant fact.

हमारा प्रयास भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 37 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।


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भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 36 | Indian Evidence Act Section- 36 in hindi

भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 36 | मानचित्रों, चार्टों और रेखांकों के कथनों की सुसंगति | Indian Evidence Act Section- 36 in hindi| Relevancy of statements in maps, charts and plans.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 36 के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 36, साथ ही क्या बतलाती है, यह भी इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

धारा 36 का विवरण

भारतीय साक्ष्य अधिनियम (Indian Evidence Act) की धारा 36 के अन्तर्गत विवाद्यक तथ्यों या सुसंगत तथ्यों के वे कथन, जो प्रकाशित मानचित्रों या चार्टों में, जो लोक विक्रय के लिये साधारणतः प्रस्थापित किये जाते हैं, अथवा केन्द्रीय सरकार या किसी राज्य सरकार के प्राधिकार के अधीन बनाये गये मानचित्रों या रेखांकों में किये गये हैं, उन विषयों के बारे में, जो ऐसे मानचित्रों, चार्टी या रेखांकों में प्रायः रूपित या कथित होते हैं, स्वयं सुसंगत तथ्य हैं।

भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 36 के अनुसार

मानचित्रों, चार्टों और रेखांकों के कथनों की सुसंगति-

विवाद्यक तथ्यों या सुसंगत तथ्यों के वे कथन, जो प्रकाशित मानचित्रों या चार्टों में, जो लोक विक्रय के लिये साधारणतः प्रस्थापित किये जाते हैं, अथवा केन्द्रीय सरकार या किसी राज्य सरकार के प्राधिकार के अधीन बनाये गये मानचित्रों या रेखांकों में किये गये हैं, उन विषयों के बारे में, जो ऐसे मानचित्रों, चार्टी या रेखांकों में प्रायः रूपित या कथित होते हैं, स्वयं सुसंगत तथ्य हैं।

Relevancy of statements in maps, charts and plans-
Statements of facts in issue or relevant facts, made in published maps or charts generally offered for public sale, or in maps or plans made under the authority of the Central Government or any State Government, as to matters usually represented or stated in such maps, charts or plans, are themselves relevant facts.

हमारा प्रयास भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 36 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

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भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 31 | Indian Evidence Act Section- 31 in hindi

भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 35 | कर्त्तव्य पालन में की गई लोक [अभिलेख या इलेक्ट्रानिक अभिलेख] की प्रविष्टियों की सुसंगति | Indian Evidence Act Section- 35 in hindi| Relevancy of entry in public [record or an electronic record], made in performance of duty.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 35 के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 35, साथ ही क्या बतलाती है, यह भी इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

धारा 35 का विवरण

भारतीय साक्ष्य अधिनियम (Indian Evidence Act) की धारा 35 के अन्तर्गत किसी लोक या अन्य राजकीय पुस्तक, रजिस्टर या अभिलेख या इलेक्ट्रानिक अभिलेख में की गई प्रविष्टि, जो किसी विवाद्यक या सुसंगत तथ्य का कथन करती है और किसी लोक सेवक द्वारा अपने पदीय कर्तव्य के निर्वहन में या उस देश की, जिसमें ऐसी पुस्तक, रजिस्टर या अभिलेख या इलेक्ट्रानिक अभिलेख रखा जाता है, विधि द्वारा विशेष रूप से व्यादिष्ट कर्तव्य के पालन में किसी अन्य व्यक्ति द्वारा की गई है, स्वयं सुसंगत तथ्य है।

भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 35 के अनुसार

कर्त्तव्य पालन में की गई लोक [अभिलेख या इलेक्ट्रानिक अभिलेख] की प्रविष्टियों की सुसंगति-

किसी लोक या अन्य राजकीय पुस्तक, रजिस्टर या अभिलेख या इलेक्ट्रानिक अभिलेख में की गई प्रविष्टि, जो किसी विवाद्यक या सुसंगत तथ्य का कथन करती है और किसी लोक सेवक द्वारा अपने पदीय कर्तव्य के निर्वहन में या उस देश की, जिसमें ऐसी पुस्तक, रजिस्टर या अभिलेख या इलेक्ट्रानिक अभिलेख रखा जाता है, विधि द्वारा विशेष रूप से व्यादिष्ट कर्तव्य के पालन में किसी अन्य व्यक्ति द्वारा की गई है, स्वयं सुसंगत तथ्य है।

Relevancy of entry in public [record or an electronic record], made in performance of duty-
An entry in any public or other official book, register or record or an electronic record, stating a fact in issue or relevant fact, and made by a public servant in the discharge of his official duty, or by any other person in performance of a duty specially enjoined by the law of the country in which such book, register, or record or an electronic record is kept, is itself a relevant fact.

हमारा प्रयास भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 35 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

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भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 34 | Indian Evidence Act Section- 34 in hindi

भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 31 | Indian Evidence Act Section- 31 in hindi

भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 34 | लेखा पुस्तकों की प्रविष्टियाँ, जिनमें वे शामिल हैं, जिन्हें इलेक्ट्रानिक रूप में रखा गया है, कब सुसंगत हैं | Indian Evidence Act Section- 34 in hindi| Entries in the books of account, including those maintained in an eletronic form, when relevant.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 34 के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 34, साथ ही क्या बतलाती है, यह भी इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

धारा 34 का विवरण

भारतीय साक्ष्य अधिनियम (Indian Evidence Act) की धारा 34 के अन्तर्गत कारोबार के अनुक्रम में नियमित रूप से रखी गई [लेखा पुस्तकों की प्रविष्टियाँ, जिनमें वे शामिल हैं, जिन्हें इलेक्ट्रानिक रूप में रखा गया है], जब कभी वे ऐसे विषय का निर्देश करती हैं। जिसमें न्यायालय को जांच करनी है, सुसंगत हैं, किन्तु अकेले ऐसे कथन ही किसी व्यक्ति को दायित्व से भारित करने के लिये पर्याप्त साक्ष्य नहीं होंगे।

भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 34 के अनुसार

लेखा पुस्तकों की प्रविष्टियाँ, जिनमें वे शामिल हैं, जिन्हें इलेक्ट्रानिक रूप में रखा गया है, कब सुसंगत हैं–

कारोबार के अनुक्रम में नियमित रूप से रखी गई [लेखा पुस्तकों की प्रविष्टियाँ, जिनमें वे शामिल हैं, जिन्हें इलेक्ट्रानिक रूप में रखा गया है], जब कभी वे ऐसे विषय का निर्देश करती हैं। जिसमें न्यायालय को जांच करनी है, सुसंगत हैं, किन्तु अकेले ऐसे कथन ही किसी व्यक्ति को दायित्व से भारित करने के लिये पर्याप्त साक्ष्य नहीं होंगे।

Entries in the books of account, including those maintained in an eletronic form, when relevant-
Entries in the books of account, including those maintained in an electronic form, regularly kept in the course of business, are relevant whenever they refer to a matter into which the Court has to inquire, but such statements shall not alone be sufficient evidence to charge any person with liability.

दृष्टान्त
ख पर क 1,000 रुपयों के लिये वाद लाता है और अपनी लेखा बहियों की वे प्रविष्टियां दर्शित करता है, जिनमें ख को इस रकम के लिये उसका ऋणी दर्शित किया गया है। ये प्रविष्टियां सुसंगत हैं, किन्तु ऋण साबित करने के लिये अन्य साक्ष्य के बिना पर्याप्त नहीं हैं।

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भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 31 | स्वीकृतियां निश्चायक सबूत नहीं हैं किन्तु विबन्ध कर सकती हैं | Indian Evidence Act Section- 31 in hindi| Admissions not conclusive proof, but may estop.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 31 के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 31, साथ ही क्या बतलाती है, यह भी इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

धारा 31 का विवरण

भारतीय साक्ष्य अधिनियम (Indian Evidence Act) की धारा 31 के अन्तर्गत स्वीकृतियां, स्वीकृत विषयों का निश्चायक सबूत नहीं हैं, किन्तु एतस्मिन्पश्चात् अन्तर्विष्ट उपबन्धों के अधीन विबन्ध के रूप में प्रवर्तित हो सकेंगी।

भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 31 के अनुसार

स्वीकृतियां निश्चायक सबूत नहीं हैं किन्तु विबन्ध कर सकती हैं —

स्वीकृतियां, स्वीकृत विषयों का निश्चायक सबूत नहीं हैं, किन्तु एतस्मिन्पश्चात् अन्तर्विष्ट उपबन्धों के अधीन विबन्ध के रूप में प्रवर्तित हो सकेंगी।

Admissions not conclusive proof, but may estop-
Admissions are not conclusive proof of the matters admitted, but they may operate as estoppels under the provisions hereinafter contained.

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भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 30 | साबित संस्वीकृति को, जो उसे करने वाले व्यक्ति तथा एक ही अपराध के लिए संयुक्त रूप से विचारित अन्य को प्रभावित करती है विचार में लेना | Indian Evidence Act Section- 30 in hindi| Consideration of proved confession affecting person making it and others jointly under trial for same offence.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 30 के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 30, साथ ही क्या बतलाती है, यह भी इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

धारा 30 का विवरण

भारतीय साक्ष्य अधिनियम (Indian Evidence Act) की धारा 30 के अन्तर्गत जब एक से अधिक व्यक्ति एक ही अपराध के लिए संयुक्त रूप से विचारित हैं तथा ऐसे व्यक्तियों में से किसी एक के द्वारा, अपने को और ऐसे व्यक्तियों में से किसी अन्य को प्रभावित करने वाली की गई संस्वीकृति को साबित किया जाता है, तब न्यायालय ऐसी संस्वीकृति को ऐसे अन्य व्यक्ति के विरुद्ध तथा ऐसे संस्वीकृति करने वाले व्यक्ति के विरुद्ध विचार में ले सकेगा।

भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 30 के अनुसार

साबित संस्वीकृति को, जो उसे करने वाले व्यक्ति तथा एक ही अपराध के लिए संयुक्त रूप से विचारित अन्य को प्रभावित करती है विचार में लेना-

जबकि एक से अधिक व्यक्ति एक ही अपराध के लिए संयुक्त रूप से विचारित हैं तथा ऐसे व्यक्तियों में से किसी एक के द्वारा, अपने को और ऐसे व्यक्तियों में से किसी अन्य को प्रभावित करने वाली की गई संस्वीकृति को साबित किया जाता है, तब न्यायालय ऐसी संस्वीकृति को ऐसे अन्य व्यक्ति के विरुद्ध तथा ऐसे संस्वीकृति करने वाले व्यक्ति के विरुद्ध विचार में ले सकेगा।

Consideration of proved confession affecting person making it and others jointly under trial for same offence-
When more persons than one are being tried jointly for the same offence, and a confession made by one of such persons affecting himself and some other of such persons is proved, the Court may take into consideration such confession as against such other person as well as against the person who makes such confession.

स्पष्टीकरण- इस धारा में प्रयुक्त “अपराध” शब्द के अन्तर्गत उस अपराध का दुष्प्रेरण या उसे करने का प्रयत्न आता है।
दृष्टान्त
(क) क और ख को ग की हत्या के लिये संयुक्तत: विचारित किया जाता है। यह साबित किया जाता है कि क ने कहा, ” ख और मैंने ग की हत्या की है।” ख के विरुद्ध इस संस्वीकृति के प्रभाव पर न्यायालय विचार कर सकेगा।

(ख) ग की हत्या करने के लिए क का विचारण हो रहा है। यह दर्शित करने के लिए साक्ष्य है कि ग की हत्या क और ख द्वारा की गई थी और यह कि ख ने कहा था कि “क और मैंने ग की हत्या की है।” न्यायालय इस कथन को क के विरुद्ध विचारार्थ नहीं ले सकेगा, क्योंकि ख संयुक्तत: विचारित नहीं हो रहा है।

हमारा प्रयास भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 30 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।