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भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 18 | स्वीकृति–कार्यवाही के पक्षकार या उसके अभिकर्ता द्वारा- कथन स्वीकृतियाँ हैं | Indian Evidence Act Section- 18 in hindi| Admission by party to proceeding or his agent.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 18 के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 18, साथ ही क्या बतलाती है, यह भी इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

धारा 18 का विवरण

भारतीय साक्ष्य अधिनियम (Indian Evidence Act) की धारा 18 के अन्तर्गत कार्यवाही के पक्षकार या उसके अभिकर्ता द्वारा- कथन स्वीकृतियाँ हैं, जिन्हें कार्यवाही के किसी पक्षकार ने किया हो, या ऐसे किसी पक्षकार के ऐसे किसी अभिकर्ता ने किया हो जिसे मामले की परिस्थितियों में न्यायालय उन कथनों को करने के लिए उस पक्षकार द्वारा अभिव्यक्त या विवक्षित रूप से प्राधिकृत किया हुआ मानता है।

भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 18 के अनुसार

स्वीकृति–कार्यवाही के पक्षकार या उसके अभिकर्ता द्वारा- कथन स्वीकृतियाँ हैं, जिन्हें-

कार्यवाही के किसी पक्षकार ने किया हो, या ऐसे किसी पक्षकार के ऐसे किसी अभिकर्ता ने किया हो जिसे मामले की परिस्थितियों में न्यायालय उन कथनों को करने के लिए उस पक्षकार द्वारा अभिव्यक्त या विवक्षित रूप से प्राधिकृत किया हुआ मानता है।
प्रतिनिधिक रूप से वादकर्ता द्वारा- वाद के ऐसे पक्षकारों द्वारा, जो प्रतिनिधिक हैसियत में वाद ला रहे हों या जिन पर प्रतिनिधिक हैसियत में वाद लाया जा रहा हो, किये गये कथन, जब तक कि वे उस समय न किए गए हों जबकि उनको करने वाला पक्षकार वैसी हैसियत धारण करता था, स्वीकृतियां नहीं हैं।
वे कथन स्वीकृतियां हैं, जो-
(1) विषयवस्तु में हितबद्ध पक्षकार द्वारा- ऐसे व्यक्तियों द्वारा किए गए हैं, जिनका कार्यवाही की विषयवस्तु में कोई साम्पत्तिक या धन सम्बन्धी हित है और जो इस प्रकार हितबद्ध व्यक्तियों की हैसियत में वह कथन करते हैं, अथवा
(2) उस व्यक्ति द्वारा जिससे हित व्युत्पन्न हुआ हो-ऐसे व्यक्तियों द्वारा किए गए हैं, जिनसे वाद के पक्षकारों का वाद की विषयवस्तु में अपना हित व्युत्पन्न हुआ है। यदि वे कथन उन्हें करने वाले व्यक्तियों के हित के चालू रहने के दौरान में किए गए हैं।

Admission by party to proceeding or his agent-
Statements made by a party to the proceeding, or by an agent to any such party, whom the Court regards, under the circumstances of the case, as expressly or impliedly authorized by him to make them, are admissions.
By suitor in representative character- Statements made by parties to suits, suing or sued in a representative character, are not admissions, unless they were made while the party making them held that character.
Statement made by-
(1) party interested in subject-matter- Persons who have any proprietary or pecuniary interest in the subject-matter of the proceedings, and who make the statement in their character of persons so interested, or
(2) person from whom interest derived.-Persons from whom the parties to the suit have derived their interest in the subject-matter of the suit. are admissions, if they are made during the continuance of the interest of the persons making the statements.

हमारा प्रयास भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 18 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

GST में 6 महत्वपूर्ण बदलाव माह नवंबर में? 6 important changes in GST in the month of November?

वैसे तो हम सभी जानते हैं कि GST में आए दिन कोई न कोई बदलाव होते रहते है, इसके अलावा भी दिन प्रतिदिन कमियों को दूर किया जा रहा है इसके साथ ही GST कानून को और सख्त बनाया जा रहा है। आज हम बात करेगें नवंबर माह के अंत में 6 ऐसे Recent Changes in GST Portal पर GST Latest Amendments किए गए हैं, तो आइए जानते है-

जीएसटी मे महत्वपूर्ण बदलाव (Important Changes in GST)

1- सबसे बड़ा बदलाव GST Registration में किया गया है, पहले जब हम किसी GST Number को कैंसिल करने के लिए आवेदन करते थे, उसके पश्चात् ही हमारा GST Registration बंद होता था। लेकिन अब एक आवश्यक बिंदु फिर से जोड़ दिया गया है, यदि कोई करदाता अपना रजिस्ट्रेशन भूलवश कैंसिल का आवेदन कर देता है अथवा कैंसिल का आवेदन के पश्चात् उसे ऐसा प्रतीत होता है, कि अभी मुझे व्यापार करना है, बंद नहीं करना है, तो भी वह REG-16 फॉर्म भरकर आवेदन कर सकता है, बशर्ते GST Registration जीएसटी से संबंधित अधिकारी द्वारा को कैंसिल का आवेदन स्वीकार न किया गया हो। इसके अलावा Search Taxpayers विंडो में पहले किसी GST Number की Suspended date अथवा बंद करने की तारीख नही दिखाई देती थी, लेकिन अब देख सकेंगे।
2- पहले सभी करदाता जो कंपनी एक्ट में तहत रजिस्टर्ड है, वह बिना DSC (Digital Signature Certificate) के न तो रिटर्न फाइल कर सकते थे, न रिफंड और न ही रजिस्ट्रेशन करा सकते थे और न ही कोई प्रार्थना पत्र के लिये आवेदन कर सकते थे, लेकिन अब वह EVC (Electronic Verification Code) से भी सभी कार्य कर सकेंगे।
3- यदि किसी करदाता ने रिफंड के लिए आवेदन किया और किसी कारणवश संबंधित अधिकारी द्वारा आवेदन को खारिज कर दिया गया था, और न ही इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी)/कैश करदाता को उसके इलेक्ट्रॉनिक कैश/क्रेडिट लेजर में वापस नहीं कर सकते थे। इसलिए फॉर्म जीएसटी PMT-03 लागू किया गया है, क्योंकि कर अधिकारियों के पास अस्वीकृत रिफंड दावों को फिर से जमा करने की सुविधा नहीं थी। कर अधिकारियों को PMT-03 जारी करने इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) या कैश जमा लेजर में पाने के लिए करदाताओं को एक वचन पत्र PMT-03 के रूप मे आवेदन करना होगा।
04- यदि कोई करदाता रिफंड हेतु आवेदन करता है और रिफंड देरी से प्राप्त होता है, तो करदाता अपील रिफंड पर ब्याज पाने के लिए दायर कर सकेगा और कर अधिकारी को हुई रिफंड देरी के सम्बन्ध मे ब्याज देय होगा।
05- यदि किसी करदाता की गाड़ी रास्ते में किसी गलती के कारण रोक लिया गया है, तो GST में MOV-11 और MOV-09 के ऑर्डर में सुधार किया जा सकेगा अथवा डिमांड टाइपिंग में कोई गलत इंगित कर दिया गया है, तो अब अपडेट कर सकेंगे। जोकि अब E-way bill changes GST पोर्टल पर ही उपलब्ध होगा।
06- यदि किसी करदाता के ऊपर डिमांड बकाया भुगतान करना पुष्टि हो गई है और करदाता एक साथ पूर्ण डिमांड जमा करने में असमर्थ हैं और बकाया धनराशि 25000/ से ऊपर है, तो करदाता एक प्रार्थना पत्र देते हुए, धारा 80 के अंतर्गत इंस्टालमेंट में भुगतान कर सकेंगे।

भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 17 | स्वीकृति की परिभाषा | Indian Evidence Act Section- 17 in hindi| Admission defined.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 17 के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 17, साथ ही क्या बतलाती है, यह भी इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

धारा 17 का विवरण

भारतीय साक्ष्य अधिनियम (Indian Evidence Act) की धारा 17 के अन्तर्गत स्वीकृति मौखिक या दस्तावेजी या इलेक्ट्रानिक रूप में अन्तर्विष्ट कथन है, जो किसी विवाद्यक तथ्य या सुसंगत तथ्य के बारे में कोई अनुमान इंगित करता है और जो ऐसे व्यक्तियों में से किसी के द्वारा और ऐसी परिस्थितियों में किया गया है, अर्थात् किसी व्यक्ति ने अपने किसी कार्य को करने के स्वीकृति प्रदान किया।

भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 17 के अनुसार

स्वीकृति की परिभाषा-

स्वीकृति वह [मौखिक या दस्तावेजी या इलेक्ट्रानिक रूप में अन्तर्विष्ट] कथन है, जो किसी विवाद्यक तथ्य या सुसंगत तथ्य के बारे में कोई अनुमान इंगित करता है और जो ऐसे व्यक्तियों में से किसी के द्वारा और ऐसी परिस्थितियों में किया गया है जो एतस्मिन्पश्चात् वर्णित है।

Admission defined-
An admission is a statement [oral or documentary or contained in electronic form] which suggests any inference as to any fact in issue or relevant fact, and which is made by any of the persons, and under the circumstances, hereinafter mentioned.

हमारा प्रयास भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 17 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 15 | कार्य आकस्मिक या साशय था इस प्रश्न पर प्रकाश डालने वाले तथ्य | Indian Evidence Act Section- 15 in hindi| Facts bearing on question whether act was accidental or inten-tional.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 15 के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 15, साथ ही क्या बतलाती है, यह भी इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

धारा 15 का विवरण

भारतीय साक्ष्य अधिनियम (Indian Evidence Act) की धारा 15 के अन्तर्गत जब कोई कार्य आकस्मिक या साशय था या किसी विशिष्ट ज्ञान या आशय से किया गया था, तब यह तथ्य कि ऐसा कार्य समरूप घटनाओं की आवली का भाग था जिनमें से हर एक घटना के साथ वह कार्य करने वाला व्यक्ति संपृक्त था, सुसंगत है, तो ऐसे प्रकाश डालने वाले तथ्य साक्ष्य का रूप ले सकेंगे।

भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 15 के अनुसार

कार्य आकस्मिक या साशय था इस प्रश्न पर प्रकाश डालने वाले तथ्य-

जबकि प्रश्न यह है कि कार्य आकस्मिक या साशय था या किसी विशिष्ट ज्ञान या आशय से किया गया था, तब यह तथ्य कि ऐसा कार्य समरूप घटनाओं की आवली का भाग था जिनमें से हर एक घटना के साथ वह कार्य करने वाला व्यक्ति संपृक्त था, सुसंगत है।

Facts bearing on question whether act was accidental or inten-tional-
When there is a question whether an act was accidental or intentional, or done with a particular knowledge or intention, the fact that such act formed part of a series of similar occurrences, in each of which the person doing the act was concerned, is relevant.

हमारा प्रयास भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 15 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 14 | मन या शरीर की दशा या शारीरिक संवेदना का अस्तित्व दर्शित करने वाले तथ्य | Indian Evidence Act Section- 14 in hindi| Facts showing existence of state of mind, or of body or bodily feeling.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 14 के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 14, साथ ही क्या बतलाती है, यह भी इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

धारा 14 का विवरण

भारतीय साक्ष्य अधिनियम (Indian Evidence Act) की धारा 14 के अन्तर्गत जब किसी मामले में कोई मानसिक अथवा शारीरिक संवेदना को अस्तित्व साबित करने वाले तथ्य दिख रहे हो, इसके अलावा जैसे आशय, ज्ञान, सद्भाव, उपेक्षा, उतावलापन देखकर यह अनुमान लगाया जा सकता है कि यह व्यक्ति सत्य कह रहा है अथवा असत्य। तो वह तथ्य भीं साक्ष्य का रूप ले सकेंगे।

भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 14 के अनुसार

मन या शरीर की दशा या शारीरिक संवेदना का अस्तित्व दर्शित करने वाले तथ्य–

मन की कोई भी दशा जैसे आशय, ज्ञान, सद्भाव, उपेक्षा, उतावलापन, किसी विशिष्ट व्यक्ति के प्रति वैमनस्य या सदिच्छा दर्शित करने वाले अथवा शरीर की या शारीरिक संवेदना की किसी दशा का अस्तित्व दर्शित करने वाले तथ्य तब सुसंगत हैं, जबकि ऐसी मन की या शरीर की या शारीरिक संवेदना की किसी ऐसी दशा का अस्तित्व विवाद्य या सुसंगत है।

Facts showing existence of state of mind, or of body or bodily feeling-
Facts showing the existence of any state of mind, such as intention, knowledge, good faith, negligence, rashnesss, ill-will or good-will towards any particular person, or showing the existence of any state of body or bodily feeling, are relevant, when the existence of any such state of mind or body or bodily feeling, is in issue are relevant.

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भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 13 | जबकि अधिकार या रूढ़ि प्रश्नगत है, तब सुसंगत तथ्य | Indian Evidence Act Section- 13 in hindi| Facts relevant when right or custom is in question.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 13 के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 13, साथ ही क्या बतलाती है, यह भी इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

धारा 13 का विवरण

भारतीय साक्ष्य अधिनियम (Indian Evidence Act) की धारा 13 के अन्तर्गत जब किसी अधिकार या रूढ़ि प्रश्नगत है, तब सुसंगत तथ्य किसी अधिकार या रूढ़ि के अस्तित्व के बारे में प्रश्न है तो वह तथ्य भीं साक्ष्य का रूप ले सकेंगे। अर्थात् जब किसी व्यक्ति के पूर्वजों ने किसी विलेख या महत्वपूर्ण बदलाव किया जो सबके लिए आवश्यक था, और सही भी था, और आगे चलकर किसी ने उसे गलत ठहराया, तो रूढ़ि अधिकार प्रश्नगत है, तब सुसंगत तथ्य है।

भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 13 के अनुसार

जबकि अधिकार या रूढ़ि प्रश्नगत है, तब सुसंगत तथ्य-

जहाँ कि किसी अधिकार या रूढ़ि के अस्तित्व के बारे में प्रश्न है, वहाँ निम्नलिखित तथ्य सुसंगत हैं-
(क) कोई संव्यवहार, जिसके द्वारा प्रश्नगत अधिकार या रूढ़ि, सृष्ट, दावाकृत, उपांतरित, मान्यकृत, प्राख्यात या प्रत्याख्यात की गई थी या जो उसके अस्तित्व से असंगत था,
(ख) वे विशिष्ट उदाहरण, जिनमें वह अधिकार या रूढ़ि, दावाकृत, मान्यकृत या प्रयुक्त की गई थी या जिनमें उसका प्रयोग विवादग्रस्त था या प्राख्यात किया गया था या उसका अनुसरण नहीं किया गया था।

Facts relevant when right or custom is in question-
Where the question is as to the existence of any right or custom, the following facts are relevant-
(a) Any transaction by which the right or custom in question was created, claimed, modified, recognized, asserted, or denied, or which was inconsistent with its existence;
(b) Particular instances in which the right or custom was claimed, recognized, or exercised, or in which its exercise was disputed, asserted or departed from.

हमारा प्रयास भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 13 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।