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कंपनी अधिनियम की धारा 91| Companies Act Section 91

कंपनी अधिनियम Companies Act (Companies Act Section-91 in Hindi) के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। कंपनी अधिनियम की धारा 91 के अनुसार कोई कंपनी, सदस्यों के रजिस्टर या डिबेंचर धारकों के रजिस्टर को, प्रत्येक वर्ष में किसी ऐसी अवधि या अवधियों, जो कुल पैंतालीस दिनों से अधिक न हों किन्तु किसी एक समय में तीस दिन से अधिक न हों, के लिए ऐसी सूचीबद्ध कंपनियों या कंपनियों के लिए, जो अपनी सूचीबद्ध प्रतिभूतियों को ऐसी रीति में, जो विहित की जाए, सूचीबद्ध करने का आशय रखती है, जिसे Companies Act Section-91 के अन्तर्गत परिभाषित किया गया है।

कंपनी अधिनियम की धारा 91 (Companies Act Section-91) का विवरण

कंपनी अधिनियम की धारा 91 Companies Act Section-91 के अनुसार कोई कंपनी, सदस्यों के रजिस्टर या डिबेंचर धारकों के रजिस्टर को, प्रत्येक वर्ष में किसी ऐसी अवधि या अवधियों, जो कुल पैंतालीस दिनों से अधिक न हों किन्तु किसी एक समय में तीस दिन से अधिक न हों, के लिए ऐसी सूचीबद्ध कंपनियों या कंपनियों के लिए, जो अपनी सूचीबद्ध प्रतिभूतियों को ऐसी रीति में, जो विहित की जाए, सूचीबद्ध करने का आशय रखती है।

कंपनी अधिनियम की धारा 91 (Companies Act Section-91 in Hindi)

सदस्यों या डिबेंचर धारकों या अन्य प्रतिभूति धारकों के रजिस्टर को बंद करने की शक्ति-

(1) कोई कंपनी, सदस्यों के रजिस्टर या डिबेंचर धारकों के रजिस्टर को, प्रत्येक वर्ष में किसी ऐसी अवधि या अवधियों, जो कुल पैंतालीस दिनों से अधिक न हों किन्तु किसी एक समय में तीस दिन से अधिक न हों, के लिए ऐसी सूचीबद्ध कंपनियों या कंपनियों के लिए, जो अपनी सूचीबद्ध प्रतिभूतियों को ऐसी रीति में, जो विहित की जाए, सूचीबद्ध करने का आशय रखती है, कम से कम सात दिन या ऐसी लघुतर अवधि, जो प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड द्वारा विनिर्दिष्ट की जाए, की पूर्व सूचना देने के अध्यधीन, बंद कर सकेगी।
(2) यदि सदस्यों का या डिबेंचर धारकों या अन्य प्रतिभूति धारकों का रजिस्टर उपधारा (1) में यथा उपबंधित सूचना दिए बिना या इस प्रकार उपबंधित सूचना से कम अवधि की सूचना देने के पश्चात् या उस उपधारा में विनिर्दिष्ट सीमाओं से अधिक की निरंतर या कुल अवधि के लिए बन्द कर दिया जाता है, तो कंपनी और कंपनी का ऐसा प्रत्येक अधिकारी, जो व्यतिक्रम करता है, ऐसे प्रत्येक दिन के लिए, जिसके दौरान रजिस्टर बन्द रखा जाता है, अधिकतम एक लाख रुपए के अधीन रहते हुए, पांच हजार रुपए की शास्ति के लिए दायी होगा।

Companies Act Section-91 (Company Act Section-91 in English)

Power to close register of members or debenture-holders or other security holders

(1) A company may close the register of members or the register of debenture-holders or the register of other security holders for any period or periods not exceeding in the aggregate forty-five days in each year, but not exceeding thirty days at any one time, subject to giving of previous notice of at least seven days or such lesser period as may be specified by Securities and Exchange Board for listed companies or the companies which intend to get their securities listed, in such manner as may be prescribed.
(2) If the register of members or of debenture-holders or of other security holders is closed without giving the notice as provided in sub-section (1), or after giving shorter notice than that so provided, or for a continuous or an aggregate period in excess of the limits specified in that sub-section, the company and every officer of the company who is in default shall be liable to a penalty of five thousand rupees for every day subject to a maximum of one lakh rupees during which the register is kept closed.

हमारा प्रयास कंपनी अधिनियम (Companies Act Section) की धारा 91 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स मे कमेंट करके पूछ सकते है।

कंपनी अधिनियम की धारा 90| Companies Act Section 90

कंपनी अधिनियम Companies Act (Companies Act Section-90 in Hindi) के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। कंपनी अधिनियम की धारा 90 के अनुसार जहां केन्द्रीय सरकार को यह प्रतीत होता है कि ऐसा करने के लिए कारण हैं, वहां वह किसी शेयर या शेयरों के वर्ग के संबंध में हिताधिकारी के रूप में स्वामित्व का अन्वेषण करने और उसकी रिपोर्ट करने के लिए एक या अधिक सक्षम व्यक्तियों को नियुक्त कर सकेगी और यथाशक्य, धारा 216 के उपबंध ऐसे अन्वेषण को इस प्रकार लागू होंगे, मानो अन्वेषण उस धारा के अधीन आदेशित किया गया था, जिसे Companies Act Section-90 के अन्तर्गत परिभाषित किया गया है।

कंपनी अधिनियम की धारा 90 (Companies Act Section-90) का विवरण

कंपनी अधिनियम की धारा 90 Companies Act Section-90 के अनुसार जहां केन्द्रीय सरकार को यह प्रतीत होता है कि ऐसा करने के लिए कारण हैं, वहां वह किसी शेयर या शेयरों के वर्ग के संबंध में हिताधिकारी के रूप में स्वामित्व का अन्वेषण करने और उसकी रिपोर्ट करने के लिए एक या अधिक सक्षम व्यक्तियों को नियुक्त कर सकेगी और यथाशक्य, धारा 216 के उपबंध ऐसे अन्वेषण को इस प्रकार लागू होंगे, मानो अन्वेषण उस धारा के अधीन आदेशित किया गया था।

कंपनी अधिनियम की धारा 90 (Companies Act Section-90 in Hindi)

कतिपय मामलों मे शेयरों के हिताधिकारी स्वामित्व का अन्वेषण-

जहां केन्द्रीय सरकार को यह प्रतीत होता है कि ऐसा करने के लिए कारण हैं, वहां वह किसी शेयर या शेयरों के वर्ग के संबंध में हिताधिकारी के रूप में स्वामित्व का अन्वेषण करने और उसकी रिपोर्ट करने के लिए एक या अधिक सक्षम व्यक्तियों को नियुक्त कर सकेगी और यथाशक्य, धारा 216 के उपबंध ऐसे अन्वेषण को इस प्रकार लागू होंगे, मानो अन्वेषण उस धारा के अधीन आदेशित किया गया था ।

Companies Act Section-90 (Company Act Section-90 in English)

Investigation of beneficial ownership of shares in certain cases

Where it appears to the Central Government that there are reasons so to do, it may appoint one or more competent persons to investigate and report as to beneficial ownership with regard to any share or class of shares and the provisions of section 216 shall, as far as may be, apply to such investigation as if it were an investigation ordered under that section.

हमारा प्रयास कंपनी अधिनियम (Companies Act Section) की धारा 90 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स मे कमेंट करके पूछ सकते है।

कंपनी अधिनियम की धारा 89| Companies Act Section 89

कंपनी अधिनियम Companies Act (Companies Act Section-89 in Hindi) के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। कंपनी अधिनियम की धारा 89 के अनुसार जहां किसी व्यक्ति का नाम, किसी कंपनी के सदस्यों के रजिस्टर में, उस कंपनी के शेयरों के धारक के रूप में प्रविष्ट किया जाता है, किन्तु वह ऐसे शेयरों में फायदाप्रद हित धारण नहीं करता है, वहां ऐसा व्यक्ति ऐसे समय के भीतर और ऐसे प्ररूप में, जो विहित किया जाए, कंपनी को उस व्यक्ति का, जो ऐसे शेयरों में फायदाप्रद हित- धारण करता है, जिसे Companies Act Section-89 के अन्तर्गत परिभाषित किया गया है।

कंपनी अधिनियम की धारा 89 (Companies Act Section-89) का विवरण

कंपनी अधिनियम की धारा 89 Companies Act Section-89 के अनुसार जहां किसी व्यक्ति का नाम, किसी कंपनी के सदस्यों के रजिस्टर में, उस कंपनी के शेयरों के धारक के रूप में प्रविष्ट किया जाता है, किन्तु वह ऐसे शेयरों में फायदाप्रद हित धारण नहीं करता है, वहां ऐसा व्यक्ति ऐसे समय के भीतर और ऐसे प्ररूप में, जो विहित किया जाए, कंपनी को उस व्यक्ति का, जो ऐसे शेयरों में फायदाप्रद हित- धारण करता है।

कंपनी अधिनियम की धारा 89 (Companies Act Section-89 in Hindi)

किसी शेयर मे फायदाप्रद हित के सम्बन्ध मे घोषणा-

(1) जहां किसी व्यक्ति का नाम, किसी कंपनी के सदस्यों के रजिस्टर में, उस कंपनी के शेयरों के धारक के रूप में प्रविष्ट किया जाता है, किन्तु वह ऐसे शेयरों में फायदाप्रद हित धारण नहीं करता है, वहां ऐसा व्यक्ति ऐसे समय के भीतर और ऐसे प्ररूप में, जो विहित किया जाए, कंपनी को उस व्यक्ति का, जो ऐसे शेयरों में फायदाप्रद हित- धारण करता है, नाम तथा उसकी अन्य विशिष्टियों को विनिर्दिष्ट करते हुए, एक घोषणा करेगा।
(2) प्रत्येक ऐसा व्यक्ति, जो किसी कंपनी के किसी शेयर में फायदाप्रद हित धारण करता है या अर्जित करता है, अपने हित के स्वरूप उस व्यक्ति की विशिष्टियां, जिसके नाम में कंपनी की बहियों में शेयर रजिस्ट्रीकृत हैं और ऐसी अन्य विशिष्टियां, जो विहित की जाएं, विनिर्दिष्ट करते हुए कंपनी को एक घोषणा करेगा।
(3) जहाँ ऐसे शेयरों के फायदाप्रद हित में कोई परिवर्तन होता है, वहां उपधारा (1) में निर्दिष्ट व्यक्ति और उपधारा (2) में विनिर्दिष्ट हिताधिकारी स्वामी, ऐसे परिवर्तन की तारीख से तीस दिन के भीतर कंपनी को ऐसे प्ररूप में और ऐसे विशिष्टियों वाली, जो विहित की जाएं, एक घोषणा करेंगे।
(4) केन्द्रीय सरकार इस धारा के अधीन फायदाप्रद हित और हिताधिकारी के रूप में स्वामित्व धारण करने और उसका प्रकटन करने की रीति उपबंधित करने के लिए नियम बना सकेंगी।
(5) यदि कोई व्यक्ति किसी युक्तियुक्त कारण के बिना, उपधारा (1) या उपधारा (2) या उपधारा (3) के अधीन यथा अपेक्षित घोषणा करने में असफल रहता है वह ऐसे जुर्माने से जो पचास हजार रुपए तक का हो सकेगा और जहां ऐसी असफलता जारी रहती है वहां ऐसे और जुर्माने से, जो पहले दिन के पश्चात् प्रत्येक दिन के लिए जिसके दौरान असफलता जारी रहती है, एक हजार रुपए तक का हो सकेगा, दंडनीय होगा।
(6) जहाँ इस धारा के अधीन कोई घोषणा किसी कंपनी को की जाती है वहां कंपनी संबद्ध रजिस्टर में ऐसी घोषणा का उल्लेख करेगी और उसके द्वारा घोषणा की प्राप्ति की तारीख से तीस दिन के भीतर ऐसी घोषणा के संबंध में विहित में ऐसी फीस या अतिरिक्त फीस के साथ जो विहित की जाए धारा 403 के अधीन विनिर्दिष्ट समय के भीतर रजिस्ट्रार के पास विवरणी फाइल करेगी।
(7) यदि कोई कंपनी जिससे उपधारा (6) के अधीन विवरणी फाइल करने की अपेक्षा है. धारा 403 की उपधारा (1) के पहले परन्तुक के अधीन विनिर्दिष्ट समय की समाप्ति से पूर्व ऐसा करने में असफल रहती है तो वह कंपनी और कंपनी का ऐसा प्रत्येक अधिकारी, जो व्यतिक्रम करता है, ऐसे जुर्माने से, जो पांच सौ रुपए से कम का नहीं होगा, किन्तु जो एक हजार रुपए तक का हो सकेगा और जहां ऐसी असफलता जारी रहती है वहां ऐसे और जुर्माने से, जो पहले दिन के पश्चात् प्रत्येक ऐसे दिन के लिए, जिसके दौरान असफलता जारी रहती है, एक हजार रुपए तक का हो सकेगा, दण्डनीय होगा।
(8) किसी ऐसे शेयर के संबंध में कोई अधिकार, जिसके संबंध में इस धारा के अधीन किसी घोषणा का किया जाना अपेक्षित है, किन्तु हिताधिकारी स्वामी द्वारा नहीं की गई है, उसके द्वारा या उसके माध्यम से दावा करने वाले किसी व्यक्ति द्वारा प्रवर्तनीय नहीं होगा।
(9) इस धारा की कोई बात इस अधिनियम के अधीन कंपनी के सदस्यों को लाभांश का संदाय करने की उसकी बाध्यता पर प्रतिकूल प्रभाव डालने वाली नहीं समझी जाएगी और उक्त बाध्यता, ऐसा संदाय किए जाने पर उन्मोचित हो जाएगी।

Companies Act Section-89 (Company Act Section-89 in English)

Declaration in respect of beneficial interest in any share-

(1) Where the name of a person is entered in the register of members of a company as the holder of shares in that company but who does not hold the beneficial interest in such shares, such person shall make a declaration within such time and in such form as may be prescribed to the company specifying the name and other particulars of the person who holds the beneficial interest in such shares.
(2) Every person who holds or acquires a beneficial interest in share of a company shall make a declaration to the company specifying the nature of his interest, particulars of the person in whose name the shares stand registered in the books of the company and such other particulars as may be prescribed.
(3) Where any change occurs in the beneficial interest in such shares, the person referred to in subsection (1) and the beneficial owner specified in sub-section (2) shall, within a period of thirty days from the date of such change, make a declaration to the company in such form and containing such particulars as may be prescribed.
(4) The Central Government may make rules to provide for the manner of holding and disclosing beneficial interest and beneficial ownership under this section.
(5) If any person fails, to make a declaration as required under sub-section (1) or sub-section (2) or sub-section (3), without any reasonable cause, he shall be punishable with fine which may extend to fifty thousand rupees and where the failure is a continuing one, with a further fine which may extend to one thousand rupees for every day after the first during which the failure continues.
(6) Where any declaration under this section is made to a company, the company shall make a note of such declaration in the register concerned and shall file, within thirty days from the date of receipt of declaration by it, a return in the prescribed form with the Registrar in respect of such declaration with such fees or additional fees as may be prescribed, within the time specified under section 403.
(7) If a company, required to file a return under sub-section (6), fails to do so before the expiry of the time specified under the first proviso to sub-section (1) of section 403, the company and every officer of the company who is in default shall be punishable with fine which shall not be less than five hundred rupees but which may extend to one thousand rupees and where the failure is a continuing one, with a further fine which may extend to one thousand rupees for every day after the first during which the failure continues.
(8) No right in relation to any share in respect of which a declaration is required to be made under this section but not made by the beneficial owner, shall be enforceable by him or by any person claiming through him.
(9) Nothing in this section shall be deemed to prejudice the obligation of a company to pay dividend to its members under this Act and the said obligation shall, on such payment, stand discharged.

हमारा प्रयास कंपनी अधिनियम (Companies Act Section) की धारा 89 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स मे कमेंट करके पूछ सकते है।

कंपनी अधिनियम की धारा 88| Companies Act Section 88

कंपनी अधिनियम Companies Act (Companies Act Section-88 in Hindi) के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। कंपनी अधिनियम की धारा 88 के अनुसार कोई कंपनी, यदि उसके अनुच्छेदों द्वारा इस प्रकार प्राधिकृत किया जाए, भारत से बाहर किसी देश में ऐसी रीति में, जो विहित की जाए, उपधारा (1) में निर्दिष्ट “विदेशी रजिस्टर” नामक रजिस्टर का एक भाग रख सकेगी, जिसमें भारत से बाहर निवास कर रहे सदस्यों, डिबेंचर धारकों, अन्य प्रतिभूति धारकों या हिताधिकारी स्वामियों के नाम तथा विशिष्टियां अंतर्विष्ट होंगी, जिसे Companies Act Section-88 के अन्तर्गत परिभाषित किया गया है।

कंपनी अधिनियम की धारा 88 (Companies Act Section-88) का विवरण

कंपनी अधिनियम की धारा 88 Companies Act Section-88 के अनुसार कोई कंपनी, यदि उसके अनुच्छेदों द्वारा इस प्रकार प्राधिकृत किया जाए, भारत से बाहर किसी देश में ऐसी रीति में, जो विहित की जाए, उपधारा (1) में निर्दिष्ट “विदेशी रजिस्टर” नामक रजिस्टर का एक भाग रख सकेगी, जिसमें भारत से बाहर निवास कर रहे सदस्यों, डिबेंचर धारकों, अन्य प्रतिभूति धारकों या हिताधिकारी स्वामियों के नाम तथा विशिष्टियां अंतर्विष्ट होंगी।

कंपनी अधिनियम की धारा 88 (Companies Act Section-88 in Hindi)

सदस्यों, आदि का रजिस्टर

(1) प्रत्येक कंपनी ऐसे प्ररूप में और ऐसी रीति में, जो विहित की जाए सदस्यों, आदि का निम्नलिखित रजिस्टर रखेगी और उन्हें बनाए रखेगी, अर्थात्-
(क) भारत में या भारत से बाहर निवास कर रहे प्रत्येक सदस्य द्वारा धारित साधारण और अधिमानी शेयरों के प्रत्येक वर्ग को पृथक् रूप से उपदर्शित करने वाला सदस्यों का रजिस्टर,
(ख) डिबेंचर धारकों का रजिस्टर और
(ग) किन्हीं अन्य प्रतिभूति धारकों का रजिस्टर ।
(2) उपधारा (1) के अधीन बनाए रखे गए प्रत्येक रजिस्टर में उसमें सम्मिलित नामों की अनुक्रमणिका होगी ।
(3) निक्षेपागार अधिनियम, 1996 की धारा 11 के अधीन किसी निक्षेपागार द्वारा बनाए रखे गए हिताधिकारी स्वामियों के रजिस्टर और अनुक्रमणिका को इस अधिनियम के प्रयोजनों के लिए तत्समान रजिस्टर और अनुक्रमणिका समझा जाएगा।
(4) कोई कंपनी, यदि उसके अनुच्छेदों द्वारा इस प्रकार प्राधिकृत किया जाए, भारत से बाहर किसी देश में ऐसी रीति में, जो विहित की जाए, उपधारा (1) में निर्दिष्ट “विदेशी रजिस्टर” नामक रजिस्टर का एक भाग रख सकेगी, जिसमें भारत से बाहर निवास कर रहे सदस्यों, डिबेंचर धारकों, अन्य प्रतिभूति धारकों या हिताधिकारी स्वामियों के नाम तथा विशिष्टियां अंतर्विष्ट होंगी ।
(5) यदि कोई कंपनी, उपधारा (1) या उपधारा (2) के उपबंधों के अनुसार सदस्यों या डिबेंचर धारकों या अन्य प्रतिभूति धारकों का रजिस्टर नहीं रखती है या उसे बनाए रखने में असफल रहती है तो कंपनी और कंपनी का प्रत्येक ऐसा अधिकारी जो व्यतिक्रम करता है, ऐसे जुर्माने से जो पचास हजार रुपए से कम का नहीं होगा किन्तु जो तीन लाख रुपए तक का हो सकेगा, और जहां ऐसी असफलता जारी रहती है वहां ऐसे और जुर्माने से, जो पहले दिन के पश्चात् प्रत्येक दिन के लिए, जिसके दौरान असफलता जारी रहती है. एक हजार रुपए तक का हो सकेगा, दंडनीय होगा।

Companies Act Section-88 (Company Act Section-88 in English)

Register of members, etc

(1) Every company shall keep and maintain the following registers in such form and in such manner as may be prescribed, namely:—
(a) register of members indicating separately for each class of equity and preference shares held by each member residing in or outside India;
(b) register of debenture-holders; and
(c) register of any other security holders.
(2) Every register maintained under sub-section (1) shall include an index of the names included therein.
(3) The register and index of beneficial owners maintained by a depository under section 11 of the Depositories Act, 1996 (22 of 1996), shall be deemed to be the corresponding register and index for the purposes of this Act.
(4) A company may, if so authorised by its articles, keep in any country outside India, in such a manner as may be prescribed, a part of the register referred to in sub-section (1), called “foreign register” containing the names and particulars of the members, debenture holders, other security holders or beneficial owners residing outside India.
(5) If a company does not maintain a register of members or debenture-holders or other security holders or fails to maintain them in accordance with the provisions of sub-section (1) or sub-section (2), the company and every officer of the company who is in default shall be punishable with fine which shall not be less than fifty thousand rupees but which may extend to three lakh rupees and where the failure is a continuing one, with a further fine which may extend to one thousand rupees for every day, after the first during which the failure continues.

हमारा प्रयास कंपनी अधिनियम (Companies Act Section) की धारा 88 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स मे कमेंट करके पूछ सकते है।

कंपनी अधिनियम की धारा 87| Companies Act Section 87

कंपनी अधिनियम Companies Act (Companies Act Section-87 in Hindi) के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। कंपनी अधिनियम की धारा 87 के अनुसार कंपनी द्वारा सृजित किसी भार के विवरण की या किसी ऐसे भार की जिसके अधीन ऐसी कोई सम्पति है. जो कंपनी द्वारा अर्जित की गई है या ऐसे भार के उपांतरण की विशिष्टियां फाइल करने का लोप, जिसे Companies Act Section-87 के अन्तर्गत परिभाषित किया गया है।

कंपनी अधिनियम की धारा 87 (Companies Act Section-87) का विवरण

कंपनी अधिनियम की धारा 87 Companies Act Section-87 के अनुसार कंपनी द्वारा सृजित किसी भार के विवरण की या किसी ऐसे भार की जिसके अधीन ऐसी कोई सम्पति है. जो कंपनी द्वारा अर्जित की गई है या ऐसे भार के उपांतरण की विशिष्टियां फाइल करने का लोप या भार के भुगतान या चुकाए जाने की प्रज्ञापना या किन्हीं अन्य आधारों पर अनुतोष देना न्यायोचित और साम्यापूर्ण है।

कंपनी अधिनियम की धारा 87 (Companies Act Section-87 in Hindi)

केन्द्रीय सरकार व्दारा भारों के रजिस्टर का परिशोधन-

(1) केन्द्रीय सरकार का, निम्नलिखित समाधान होने पर कि-

(i) (क) कंपनी द्वारा सृजित किसी भार के विवरण की या किसी ऐसे भार की जिसके अधीन ऐसी कोई सम्पति है. जो कंपनी द्वारा अर्जित की गई है या ऐसे भार के उपांतरण की विशिष्टियां फाइल करने का लोप; या
(ख) इस अध्याय के अधीन अपेक्षित समय के भीतर किसी भार को रजिस्ट्रीकृत करने का लोप या भार के भुगतान या चुकाए जाने की प्रज्ञापना इस अध्याय के अधीन अपेक्षित समय के भीतर, रजिस्ट्रार को देने का लोप: या
(ग) धारा 82 या धारा 83 के अनुसरण में किसी ऐसे भार या उपांतरण के संबंध में या चुकाए जाने के ज्ञापन के संबंध में या की गई अन्य प्रविष्टि के संबंध में किसी विशिष्टि का लोप या अयथार्थ कथन,
संयोगवश किसी अनवधानता या किसी अन्य पर्याप्त हेतुक के कारण हो गया था या वह इस प्रकार का नहीं है कि उससे कंपनी के लेनदारों या शेयर धारकों की स्थिति पर प्रतिकूल प्रभाव पड़े; या
(ii) किन्हीं अन्य आधारों पर अनुतोष देना न्यायोचित और साम्यापूर्ण है,
तो वह कंपनी या किसी हितबद्ध व्यक्ति के आवेदन पर और ऐसे निबंधनों और शर्तों पर जो केन्द्रीय सरकार को न्यायसंगत और समीचीन प्रतीत हो, “यह निर्देश दे सकेगी कि भार की विशिष्टियों को फाइल करने के लिए या उसके रजिस्ट्रीकरण के लिए या भुगतान या चुकाए जाने की प्रज्ञापना देने के लिए समय बढ़ाया जाए या जैसा अपेक्षित हो, उस लोप या अयथार्थ कथन को परिशोधित किया जाए।

(2) जहां, केन्द्रीय सरकार किसी भार के रजिस्ट्रीकरण के लिए समय बढ़ाती है, वहां भार के, वास्तव में रजिस्ट्रीकृत किए जाने के पूर्व संपृक्त संपत्ति के संबंध में अर्जित किन्हीं अधिकारों पर कोई प्रतिकूल प्रभाव उस आदेश से नहीं पड़ेगा ।

Companies Act Section-87 (Company Act Section-87 in English)

Punishment for contravention

(1) The Central Government on being satisfied that—
(i) (a) the omission to file with the Registrar the particulars of any charge created by a company or any charge subject to which any property has been acquired by a company or any modification of such charge; or
(b) the omission to register any charge within the time required under this Chapter or the
omission to give intimation to the Registrar of the payment or the satisfaction of a charge, within the time required under this Chapter; or
(c) the omission or misstatement of any particular with respect to any such charge or
modification or with respect to any memorandum of satisfaction or other entry made in pursuance of section 82 or section 83,
was accidental or due to inadvertence or some other sufficient cause or it is not of a nature to prejudice the position of creditors or shareholders of the company; or
(ii) on any other grounds, it is just and equitable to grant relief,

it may on the application of the company or any person interested and on such terms and conditions as it
may seem to the Central Government just and expedient, direct that the time for the filing of the particulars or for the registration of the charge or for the giving of intimation of payment or satisfaction shall be extended or, as the case may require, that the omission or misstatement shall be rectified.
(2) Where the Central Government extends the time for the registration of a charge, the order shall not prejudice any rights acquired in respect of the property concerned before the charge is actually registered.

हमारा प्रयास कंपनी अधिनियम (Companies Act Section) की धारा 87 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स मे कमेंट करके पूछ सकते है।

कंपनी अधिनियम की धारा 86| Companies Act Section 86

कंपनी अधिनियम Companies Act (Companies Act Section-86 in Hindi) के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। कंपनी अधिनियम की धारा 86 के अनुसार यदि कोई कंपनी इस अध्याय के किसी उपबंध का उल्लंघन करेगी, तो कंपनी ऐसे जुर्माने से, जो एक लाख रुपए से कम का न होगा, किन्तु जो दस लाख रुपए तक का हो सकेगा, दंडनीय होगा, जिसे Companies Act Section-86 के अन्तर्गत परिभाषित किया गया है।

कंपनी अधिनियम की धारा 86 (Companies Act Section-86) का विवरण

कंपनी अधिनियम की धारा 86 Companies Act Section-86 के अनुसार यदि कोई कंपनी इस अध्याय के किसी उपबंध का उल्लंघन करेगी, तो कंपनी ऐसे जुर्माने से, जो एक लाख रुपए से कम का न होगा, किन्तु जो दस लाख रुपए तक का हो सकेगा, दंडनीय होगा।

कंपनी अधिनियम की धारा 86 (Companies Act Section-86 in Hindi)

उल्लंघन के लिए दंड

यदि कोई कंपनी इस अध्याय के किसी उपबंध का उल्लंघन करेगी, तो कंपनी ऐसे जुर्माने से, जो एक लाख रुपए से कम का न होगा, किन्तु जो दस लाख रुपए तक का हो सकेगा, दंडनीय होगी और कंपनी का ऐसा प्रत्येक अधिकारी, जो व्यतिक्रम करता है, ऐसी अवधि के कारावास से, जो छह मास तक का हो सकेगा या जुर्माने से, जो पच्चीस हजार रुपए से कम का नहीं होगा, किन्तु जो एक लाख रुपए तक का हो सकेगा या दोनों से, दंडनीय होगा।

Companies Act Section-86 (Company Act Section-86 in English)

Punishment for contravention

If any company contravenes any provision of this Chapter, the company shall be punishable with a fine which shall not be less than one lakh rupees but which may extend to ten lakh rupees and every officer of the company who is in default shall be punishable with imprisonment for a term which may extend to six months or with fine which shall not be less than twenty-five thousand rupees but which may extend to one lakh rupees, or with both.

हमारा प्रयास कंपनी अधिनियम (Companies Act Section) की धारा 86 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स मे कमेंट करके पूछ सकते है।