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सीआरपीसी की धारा 455 | अपमानलेखीय और अन्य सामग्री का नष्ट किया जाना | CrPC Section- 455 in hindi| Destruction of libellous and other matter.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 455 के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 455 कब लागू होती है, यह भी इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

धारा 455 का विवरण

दण्ड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 455 के अन्तर्गत भारतीय दण्ड संहिता (1860 का 45) की धारा 292, धारा 293, धारा 501 या धारा 502 के अधीन दोषसिद्धि पर न्यायालय उस चीज की सब प्रतियों के, जिसके बारे में दोषसिद्धि हुई है और जो न्यायालय की अभिरक्षा में है, या सिद्धदोष व्यक्ति के कब्जे या शक्ति में है, नष्ट किए जाने के लिए आदेश दे सकता है।

सीआरपीसी की धारा 455 के अनुसार

अपमानलेखीय और अन्य सामग्री का नष्ट किया जाना-

भारतीय दण्ड संहिता (1860 का 45) की धारा 292, धारा 293, धारा 501 या धारा 502 के अधीन दोषसिद्धि पर न्यायालय उस चीज की सब प्रतियों के, जिसके बारे में दोषसिद्धि हुई है और जो न्यायालय की अभिरक्षा में है, या सिद्धदोष व्यक्ति के कब्जे या शक्ति में है, नष्ट किए जाने के लिए आदेश दे सकता है।
(2) न्यायालय भारतीय दण्ड संहिता, 1860 (1860 का 45) की धारा 272, धारा 273, धारा 274 या धारा 275 के अधीन दोषसिद्धि पर उस खाद्य, पेय औषधि या भेषजीय निर्मित के, जिसके बारे में दोषसिद्धि हुई है, नष्ट किए जाने का उसी प्रकार से आदेश दे सकता है।

Destruction of libellous and other matter-
(1) On a conviction under Section 292, Section 293, Section 501 or Section 502 of the Indian Penal Code (45 of 1860), the Court may order the destruction of all the copies of the thing in respect of which the conviction was had, and which are in the custody of the Court or remain in the possession or power of the person convicted.
(2) The Court may, in like manner, on a conviction under Section 272, Section 273, Section 274 or Section 275 of the Indian Penal Code (45 of 1860), order the food, drink, drug or medical preparation in respect of which the conviction was had, to be destroyed.

हमारा प्रयास सीआरपीसी की धारा 455 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

सीआरपीसी की धारा 454 | धारा 452 या 453 के अधीन आदेशों के विरुद्ध अपील | CrPC Section- 454 in hindi| Appeal against orders under Section 452 or Section 453.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 454 के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 454 कब लागू होती है, यह भी इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

धारा 454 का विवरण

दण्ड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 454 के अन्तर्गत धारा 452 या धारा 453 के अधीन किसी न्यायालय द्वारा दिए गए आदेश से व्यथित कोई व्यक्ति उसके विरुद्ध अपील उस न्यायालय में कर सकता है जिसमें मामूली तौर पर पूर्वकथित न्यायालय द्वारा की गई दोषसिद्धि के विरुद्ध अपीलें होती हैं। ऐसी अपीलो पर, अपील न्यायालय यह निदेश दे सकता है कि अपील का निपटारा होने तक आदेश रोक दिया जाए या वह ऐसे आदेश को उपान्तरित, परिवर्तित या रद्द कर सकता है और कोई अतिरिक्त आदेश, जो न्यायसंगत हो, कर सकता है।

सीआरपीसी की धारा 454 के अनुसार

धारा 452 या 453 के अधीन आदेशों के विरुद्ध अपील-

(1) धारा 452 या धारा 453 के अधीन किसी न्यायालय द्वारा दिए गए आदेश से व्यथित कोई व्यक्ति उसके विरुद्ध अपील उस न्यायालय में कर सकता है जिसमें मामूली तौर पर पूर्वकथित न्यायालय द्वारा की गई दोषसिद्धि के विरुद्ध अपीलें होती हैं।
(2) ऐसी अपील पर, अपील न्यायालय यह निदेश दे सकता है कि अपील का निपटारा होने तक आदेश रोक दिया जाए या वह ऐसे आदेश को उपान्तरित, परिवर्तित या रद्द कर सकता है और कोई अतिरिक्त आदेश, जो न्यायसंगत हो, कर सकता है।
(3) किसी ऐसे मामले को, जिसमें उपधारा (1) में निर्दिष्ट आदेश दिया गया है, निपटाते समय अपील, पुष्टीकरण या पुनरीक्षण न्यायालय भी उपधारा (2) में निर्दिष्ट शक्तियों का प्रयोग कर सकता है।

Appeal against orders under Section 452 or Section 453-
(1) Any person aggrieved by an order made by a Court under Section 452 or Section 453, may appeal against it to the Court to which appeals ordinarily lie from convictions by the former Court.
(2) On such appeal, the Appellate Court may direct the order to be stayed pending disposal of the appeal, or may modify, alter or annul the order and make any further orders that may be just.
(3) The powers referred to in sub-section (2) may also be exercised by a Court of appeal, confirmation or revision while dealing with the case in which the order referred to in sub-section (1) was made.

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सीआरपीसी की धारा 453 | अभियुक्त के पास मिले धन का निर्दोष क्रेता को संदाय | CrPC Section- 453 in hindi| Payment to innocent purchaser of money found on accused.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 453 के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 453 कब लागू होती है, यह भी इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

धारा 453 का विवरण

दण्ड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 453 के अन्तर्गत जहां इस संहिता के अधीन कोई बन्धपत्र किसी न्यायालय के समक्ष हाजिर होने या सम्पत्ति पेश करने के लिए है और उस न्यायालय या किसी ऐसे न्यायालय को, जिसे तत्पश्चात् मामला अन्तरित किया गया है, समाधानप्रद रूप में यह साबित कर दिया जाता है कि बन्धपत्र समपहृत हो चुका है, अथवा जहां इस संहिता के अधीन किसी अन्य बन्धपत्र की बाबत उस न्यायालय को, जिसके द्वारा बन्धपत्र लिया गया था, या ऐसे किसी न्यायालय को, जिसे तत्पश्चात् मामला अंतरित किया गया है, या प्रथम वर्ग मजिस्ट्रेट के किसी न्यायालय को, समाधानप्रद रूप में यह साबित कर दिया जाता है कि बन्धपत्र समपहृत हो चुका है।

सीआरपीसी की धारा 453 के अनुसार

अभियुक्त के पास मिले धन का निर्दोष क्रेता को संदाय-

जब कोई व्यक्ति किसी अपराध के लिए, जिसके अन्तर्गत चोरी या चुराई हुई सम्पत्ति को प्राप्त करना है अथवा जो चोरी या चुराई हुई सम्पत्ति प्राप्त करने की कोटि में आता है, दोषसिद्ध किया जाता है और यह साबित कर दिया जाता है कि किसी अन्य व्यक्ति ने चुराई हुई सम्पत्ति को, यह जाने बिना या अपने पास यह विश्वास करने का कारण हुए बिना कि वह चुराई हुई है, उससे क्रय किया है और सिद्धदोष व्यक्ति की गिरफ्तारी पर उसके कब्जे में से कोई धन निकाला गया था तब न्यायालय ऐसे क्रेता के आवेदन पर और चुराई हुई सम्पत्ति पर कब्जे के हकदार व्यक्ति को उस सम्पत्ति के वापस कर दिया जाने पर आदेश दे सकता है कि ऐसे क्रेता द्वारा दिये गए मूल्य से अनधिक राशि ऐसे धन में उसे परिदत्त की जाए।

Payment to innocent purchaser of money found on accused-
When any person is convicted on any offence which includes, or amounts to, theft or receiving stolen property, and it is proved that any other person bought the stolen property from him without knowing or having reason to believe that the same was stolen, and that any money has on his arrest been taken out of the possession of the convicted person, the Court may, on the application of such purchaser and on the restitution of the stolen property to the person entitled to the possession thereof, order that out of such money a sum not exceeding the price paid by such purchaser be delivered to him.

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सीआरपीसी की धारा 452 | विचारण की समाप्ति पर संपत्ति के व्ययन के लिए आदेश | CrPC Section- 452 in hindi| Order for disposal of property at con ‘usion of trial.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 452 के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 452 कब लागू होती है, यह भी इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

धारा 452 का विवरण

दण्ड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 452 के अन्तर्गत जब किसी दण्ड न्यायालय में जांच या विचारण समाप्त हो जाता है तब न्यायालय उस संपत्ति या दस्तावेज को, जो उसके समक्ष पेश की गई है, या उसकी अभिरक्षा में है अथवा जिसके बारे में कोई अपराध किया गया प्रतीत होता है या जो किसी अपराध के करने में प्रयुक्त की गई है, नष्ट करके, अधिहृत करके या किसी ऐसे व्यक्ति को परिदान करके, जो उस पर कब्जा करने का हकदार होने का दावा करता है, या किसी अन्य प्रकार से उसका व्ययन करने के लिए ऐसा आदेश दे सकेगा जैसा वह ठीक समझे।

सीआरपीसी की धारा 452 के अनुसार

विचारण की समाप्ति पर संपत्ति के व्ययन के लिए आदेश-

(1) जब किसी दण्ड न्यायालय में जांच या विचारण समाप्त हो जाता है तब न्यायालय उस संपत्ति या दस्तावेज को, जो उसके समक्ष पेश की गई है, या उसकी अभिरक्षा में है अथवा जिसके बारे में कोई अपराध किया गया प्रतीत होता है या जो किसी अपराध के करने में प्रयुक्त की गई है, नष्ट करके, अधिहृत करके या किसी ऐसे व्यक्ति को परिदान करके, जो उस पर कब्जा करने का हकदार होने का दावा करता है, या किसी अन्य प्रकार से उसका व्ययन करने के लिए ऐसा आदेश दे सकेगा जैसा वह ठीक समझे।
(2) किसी सम्पत्ति के कब्जे का हकदार होने का दावा करने वाले किसी व्यक्ति को उस संपत्ति के परिदान के लिए उपधारा (1) के अधीन आदेश किसी शर्त के बिना या इस शर्त पर दिया जा सकता है कि वह न्यायालय को समाधानप्रद रूप में यह वचनबन्ध करते हुए प्रतिभुओं सहित या रहित बन्धपत्र निष्पादित करे कि यदि उपधारा (1) के अधीन किया गया आदेश अपील या पुनरीक्षण में उपांतरित या अपास्त कर दिया गया तो वह उस सम्पत्ति को ऐसे न्यायालय को वापस कर देगा।
(3) उपधारा (1) के अधीन स्वयं आदेश देने के बदले सेशन न्यायालय सम्पत्ति को मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट को परिदत्त किए जाने का निदेश दे सकता है, जो तब उस सम्पत्ति के विषय में धारा 457, 458 और 450 में उपबन्धित रीति से कार्रवाई करेगा।
(4) उस दशा के सिवाय, जब सम्पत्ति पशुधन है या शीघ्रतया और प्रकृत्या क्षयशील है या जब उपधारा (2) के अनुसरण में बन्धपत्र निष्पादित किया गया है, उपधारा (1) के अधीन दिया गया आदेश दो मास तक अथवा जहां अपील उपस्थित की गई है वहां जब तक उस अपील का निपटारा न हो जाए, कार्यान्वित न किया जाएगा।
(5) उस सम्पत्ति की दशा में, जिसके बारे में अपराध किया गया प्रतीत होता है, इस धारा में ‘सम्पत्ति” पद के अन्तर्गत न केवल ऐसी सम्पत्ति है जो मूलतः किसी पक्षकार के कब्जे या नियन्त्रण में रह चुकी है वरन् ऐसी कोई सम्पत्ति जिसमें या जिसके लिए उस सम्पत्ति का संपरिवर्तन या विनिमय किया गया है और ऐसे संपरिवर्तन या विनिमय से, चाहे अव्यवहित रूप से चाहे अन्यथा, अर्जित कोई चीज भी है।

Order for disposal of property at con ‘usion of trial-
(1) When an inquiry or trial in any Criminal Court is concluded, the Court may make such order as it thinks fit for the disposal, by destruction, confiscation or delivery to any person claiming to be entitled to possession thereof or otherwise, of any property or document produced before it or in its custody, or regarding which any offence appears to have been committed, or which has been used for the commission of any offence.
(2) An order may be made under sub-section (1) for the delivery of any property to any person claiming to be entitled to the possession thereof, without any condition or on condition that he executes a bond, with or without sureties, to the satisfaction of the Court, engaging to restore such property to the Court if the order made under sub section (1) is modified or set aside on appeal or revision.
(3) A Court of Session may, instead of itself making an order under sub-section (1), direct the property to be delivered to the Chief Judicial Magistrate, who shall thereupon deal with it in the manner provided in Sections 457, 458 and 459.
(4) Except where the property is livestock or is subject to speedy and natural decay, or where a bond has been executed in pursuance of sub-section (2), an order made under sub-section (1) shall not be carried out for two months, or when an appeal is presented, until such appeal has been disposed of.
(5) In this section, the term “property” includes, in the case of property regarding which an offence appears to have been committed, not only such property as has been originally in the possession or under the control of any party, but also any property into or for which the same may have been converted or exchanged, and anything acquired by such conversion or exchange, whether immediately or otherwise.

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सीआरपीसी की धारा 451 | प्रक्रिया, जब बंधपत्र समपहृत कर लिया जाता है | CrPC Section- 451 in hindi| Order for custody and disposal of property pending trial in certain cases.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 451 के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 451 कब लागू होती है, यह भी इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

धारा 451 का विवरण

दण्ड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 451 के अन्तर्गत जब कोई सम्पत्ति, किसी दण्ड न्यायालय के समक्ष किसी जांच या विचारण के दौरान पेश की जाती है तब वह न्यायालय उस जांच या विचारण के समाप्त होने तक ऐसी सम्पत्ति की उचित अभिरक्षा के लिए ऐसा आदेश, जैसा वह ठीक समझे, कर सकता है और यदि वह सम्पत्ति शीघ्रतया या प्रकृत्या क्षयशील है या यदि ऐसा करना अन्यथा समीचीन है तो वह न्यायालय, ऐसा साक्ष्य अभिलिखित करने के पश्चात् जैसा वह आवश्यक समझे, उसके विक्रय या उसका अन्यथा व्ययन किए जाने के लिए आदेश कर सकता है।

सीआरपीसी की धारा 451 के अनुसार

कुछ मामलों में विचारण लंबित रहने तक संपत्ति की अभिरक्षा और व्ययन के लिए आदेश-

जब कोई सम्पत्ति, किसी दण्ड न्यायालय के समक्ष किसी जांच या विचारण के दौरान पेश की जाती है तब वह न्यायालय उस जांच या विचारण के समाप्त होने तक ऐसी सम्पत्ति की उचित अभिरक्षा के लिए ऐसा आदेश, जैसा वह ठीक समझे, कर सकता है और यदि वह सम्पत्ति शीघ्रतया या प्रकृत्या क्षयशील है या यदि ऐसा करना अन्यथा समीचीन है तो वह न्यायालय, ऐसा साक्ष्य अभिलिखित करने के पश्चात् जैसा वह आवश्यक समझे, उसके विक्रय या उसका अन्यथा व्ययन किए जाने के लिए आदेश कर सकता है।
स्पष्टीकरण- इस धारा के प्रयोजन के लिए “सम्पत्ति” के अन्तर्गत निम्नलिखित है-
(क) किसी भी किस्म की सम्पत्ति या दस्तावेज जो न्यायालय के समक्ष पेश की जाती है या जो उसकी अभिरक्षा में है,
(ख) कोई भी सम्पत्ति जिसके बारे में कोई अपराध किया गया प्रतीत होता है या जो किसी अपराध के करने में प्रयुक्त की गई प्रतीत होती है।

Order for custody and disposal of property pending trial in certain cases-
When any property is produced before any Criminal Court during any inquiry or trial, the Court may make such order as it thinks fit for the proper custody of such property pending the conclusion of the inquiry or trial, and, if the property is subject to speedy and natural decay, or if it is otherwise expedient so to do, the Court may, after recording such evidence as it thinks necessary, order it to be sold or otherwise disposed of.
Explanation- For the purposes of this section, “property” includes-
(a) property of any kind or document which is produced before the Court or which is in its custody,
(b) any property regarding which an offence appears to have been committed or which appears to have been used for the commission of any offence.

हमारा प्रयास सीआरपीसी की धारा 451 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

सीआरपीसी की धारा 450 | कुछ मुचलकों पर देय रकम का उद्ग्रहण करने का निदेश देने की शक्ति | CrPC Section- 450 in hindi| Power to direct levy of amount due on certain recognizances.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 450 के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 450 कब लागू होती है, यह भी इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

धारा 450 का विवरण

दण्ड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 450 के अन्तर्गत उच्च न्यायालय या सेशन न्यायालय किसी मजिस्ट्रेट को निर्देश दे सकता है कि वह उस रकम को उद्ग्रहीत करे जो ऐसे उच्च न्यायालय या सेशन न्यायालय में हाजिर और उपस्थित होने के लिए किसी बन्धपत्र पर देय है।

सीआरपीसी की धारा 450 के अनुसार

कुछ मुचलकों पर देय रकम का उद्ग्रहण करने का निदेश देने की शक्ति–

उच्च न्यायालय या सेशन न्यायालय किसी मजिस्ट्रेट को निदेश दे सकता है कि वह उस रकम को उद्ग्रहीत करे जो ऐसे उच्च न्यायालय या सेशन न्यायालय में हाजिर और उपस्थित होने के लिए किसी बन्धपत्र पर देय है।

Power to direct levy of amount due on certain recognizances-
The High Court or Court of Session may direct any Magistrate to levy the amount due on a bond for appearance or attendance at such High Court or Court of Session.

हमारा प्रयास सीआरपीसी की धारा 450 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।