Home Blog Page 171

सीआरपीसी की धारा 449 | धारा 446 के अधीन आदेशों से अपील | CrPC Section- 449 in hindi| Appeal from orders under Section 446.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 449 के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 449 कब लागू होती है, यह भी इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

धारा 449 का विवरण

दण्ड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 449 के अन्तर्गत धारा 446 के अधीन किए गए किसी मजिस्ट्रेट द्वारा किए गए आदेश की दशा में सेशन न्यायाधीश अथवा सेशन न्यायालय द्वारा किए गए आदेश की दशा में वह न्यायालय जिसे ऐसे न्यायालय द्वारा किए गए आदेशो में ही अपील की जा सकेगी।

सीआरपीसी की धारा 449 के अनुसार

धारा 446 के अधीन आदेशों से अपील-

धारा 446 के अधीन किए गए सभी आदेशों की निम्नलिखित को अपील होगी, अर्थात् :-
(i) किसी मजिस्ट्रेट द्वारा किए गए आदेश की दशा में सेशन न्यायाधीश;
(ii) सेशन न्यायालय द्वारा किए गए आदेश की दशा में वह न्यायालय जिसे ऐसे न्यायालय द्वारा किए गए आदेश की अपील होती है।

Appeal from orders under Section 446-
All orders passed under Section 446, shall be appealable-
(i) in the case of an order made by a Magistrate, to the Sessions Judge;
(ii) in the case of an order made by a Court of Session, to the Court to which
an appeal lies from an order made by such Court.

हमारा प्रयास सीआरपीसी की धारा 449 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

सीआरपीसी की धारा 448 | अवयस्क से अपेक्षित बन्धपत्र | CrPC Section- 448 in hindi| Bond required from minor.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 448 के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 448 कब लागू होती है, यह भी इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

धारा 448 का विवरण

दण्ड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 448 के अन्तर्गत यदि बन्धपत्र, निष्पादित करने के लिए किसी न्यायालय या अधिकारी द्वारा अपेक्षित व्यक्ति अवयस्क है तो वह न्यायालय या अधिकारी उसके बदले में केवल प्रतिभू या प्रतिभुओं द्वारा निष्पादित बन्धपत्र स्वीकार कर सकता है।

सीआरपीसी की धारा 448 के अनुसार

अवयस्क से अपेक्षित बन्धपत्र–

यदि बन्धपत्र, निष्पादित करने के लिए किसी न्यायालय या अधिकारी द्वारा अपेक्षित व्यक्ति अवयस्क है तो वह न्यायालय या अधिकारी उसके बदले में केवल प्रतिभू या प्रतिभुओं द्वारा निष्पादित बन्धपत्र स्वीकार कर सकता है।

Bond required from minor-
When the person required by any Court, or officer to execute a bond is a minor, such Court or officer may accept, in lieu thereof, a bond executed by a surety or sureties only.

हमारा प्रयास सीआरपीसी की धारा 448 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

सीआरपीसी की धारा 447 | प्रतिभू के दिवालिया हो जाने या उसकी मृत्यु हो जाने या बन्धपत्र का समपहरण हो जाने की दशा में प्रक्रिया | CrPC Section- 447 in hindi| Procedure in case of insolvency or death of surety or when a bond is forfeited.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 447 के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 447 कब लागू होती है, यह भी इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

धारा 447 का विवरण

दण्ड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 447 के अन्तर्गत जब इस संहिता के अधीन बन्धपत्र का कोई प्रतिभू दिवालिया हो जाता है या मर जाता है। अथवा जब किसी बन्धपत्र का धारा 446 के उपबन्धों के अधीन समपहरण हो जाता है तब वह न्यायालय, जिसके आदेश से ऐसा बन्धपत्र लिया गया था या प्रथम वर्ग मजिस्ट्रेट उस व्यक्ति को, जिससे ऐसी प्रतिभूति मांगी गई थी, यह आदेश दे सकता है कि वह मूल आदेश के निदेशों के अनुसार नई प्रतिभूति दे और यदि ऐसी प्रतिभूति न दी जाए तो वह न्यायालय या मजिस्ट्रेट ऐसे कार्यवाही कर सकता है मानो उस मूल आदेश के अनुपालन में व्यतिक्रम किया गया है।

सीआरपीसी की धारा 447 के अनुसार

प्रतिभू के दिवालिया हो जाने या उसकी मृत्यु हो जाने या बन्धपत्र का समपहरण हो जाने की दशा में प्रक्रिया–

जब इस संहिता के अधीन बन्धपत्र का कोई प्रतिभू दिवालिया हो जाता है या मर जाता है। अथवा जब किसी बन्धपत्र का धारा 446 के उपबन्धों के अधीन समपहरण हो जाता है तब वह न्यायालय, जिसके आदेश से ऐसा बन्धपत्र लिया गया था या प्रथम वर्ग मजिस्ट्रेट उस व्यक्ति को, जिससे ऐसी प्रतिभूति मांगी गई थी, यह आदेश दे सकता है कि वह मूल आदेश के निदेशों के अनुसार नई प्रतिभूति दे और यदि ऐसी प्रतिभूति न दी जाए तो वह न्यायालय या मजिस्ट्रेट ऐसे कार्यवाही कर सकता है मानो उस मूल आदेश के अनुपालन में व्यतिक्रम किया गया है।

Procedure in case of insolvency or death of surety or when a bond is forfeited-
When any surety to a bond under this Code becomes insolvent or dies, or when any bond is forfeited under the provisions of Section 446, the Court by whose order such bond was taken, or a Magistrate of the first class may order the person from whom such security was demanded to furnish fresh security in accordance with the directions of the original order, and if such security is not furnished, such Court or Magistrate may proceed as if there had been a default in complying with such original order.

हमारा प्रयास सीआरपीसी की धारा 447 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

सीआरपीसी की धारा 446 | प्रक्रिया, जब बंधपत्र समपहृत कर लिया जाता है | CrPC Section- 446 in hindi| Procedure when bond has been forfeited.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 446 के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 446 कब लागू होती है, यह भी इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

धारा 446 का विवरण

दण्ड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 446 के अन्तर्गत जहां इस संहिता के अधीन कोई बन्धपत्र किसी न्यायालय के समक्ष हाजिर होने या सम्पत्ति पेश करने के लिए है और उस न्यायालय या किसी ऐसे न्यायालय को, जिसे तत्पश्चात् मामला अन्तरित किया गया है, समाधानप्रद रूप में यह साबित कर दिया जाता है कि बन्धपत्र समपहृत हो चुका है, अथवा जहां इस संहिता के अधीन किसी अन्य बन्धपत्र की बाबत उस न्यायालय को, जिसके द्वारा बन्धपत्र लिया गया था, या ऐसे किसी न्यायालय को, जिसे तत्पश्चात् मामला अंतरित किया गया है, या प्रथम वर्ग मजिस्ट्रेट के किसी न्यायालय को, समाधानप्रद रूप में यह साबित कर दिया जाता है कि बन्धपत्र समपहृत हो चुका है।

सीआरपीसी की धारा 446 के अनुसार

प्रक्रिया, जब बंधपत्र समपहृत कर लिया जाता है—

(1) जहां इस संहिता के अधीन कोई बन्धपत्र किसी न्यायालय के समक्ष हाजिर होने या सम्पत्ति पेश करने के लिए है और उस न्यायालय या किसी ऐसे न्यायालय को, जिसे तत्पश्चात् मामला अन्तरित किया गया है, समाधानप्रद रूप में यह साबित कर दिया जाता है कि बन्धपत्र समपहृत हो चुका है,
अथवा जहां इस संहिता के अधीन किसी अन्य बन्धपत्र की बाबत उस न्यायालय को, जिसके द्वारा बन्धपत्र लिया गया था, या ऐसे किसी न्यायालय को, जिसे तत्पश्चात् मामला अंतरित किया गया है, या प्रथम वर्ग मजिस्ट्रेट के किसी न्यायालय को, समाधानप्रद रूप में यह साबित कर दिया जाता है कि बन्धपत्र समपहृत हो चुका है,
वहां न्यायालय ऐसे सबूत के आधारों को अभिलिखित करेगा और ऐसे बन्धपत्र से आबद्ध किसी व्यक्ति से अपेक्षा कर सकेगा कि वह उसकी शास्ति दे या कारण दर्शित करे कि वह क्यों नहीं दी जानी चाहिए।
स्पष्टीकरण- न्यायालय के समक्ष हाजिर होने या सम्पत्ति पेश करने के लिए बन्धपत्र की किसी शर्त का यह अर्थ लगाया जाएगा कि उसके अंतर्गत ऐसे न्यायालय के समक्ष, जिसको तत्पश्चात् मामला अन्तरित किया जाता है, यथास्थिति, हाजिर होने या सम्पत्ति पेश करने की शर्त भी है।

Procedure when bond has been forfeited-
(1) Where a bond under this Code is for appearance, or for production of property, before a Court and it is proved to the satisfaction of that Court, or of any Court to which the case has subsequently been transferred, that the bond has been forfeited.
or where, in respect of any other bond under this Code, it is proved to the satisfaction of the Court by which the bond was taken, or of any Court to which the case has subsequently been transferred, or of the Court of any Magistrate of the first class, that the bond has been forfeited,
the Court shall record the grounds of such proof, and may call upon any person bound by such bond to pay the penalty thereof or to show cause why it should not be paid.

हमारा प्रयास सीआरपीसी की धारा 446 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

सीआरपीसी की धारा 445 | मुचलके के बजाय निक्षेप | CrPC Section- 445 in hindi| Deposit instead of recognizance.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 445 के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 445 कब लागू होती है, यह भी इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

धारा 445 का विवरण

दण्ड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 445 के अन्तर्गत जब किसी व्यक्ति से किसी न्यायालय या अधिकारी द्वारा प्रतिभुओं सहित या रहित बन्धपत्र निष्पादित करने की अपेक्षा की जाती है तब वह न्यायालय या अधिकारी, उस दशा में जब वह बन्धपत्र सदाचार के लिए नहीं है उसे ऐसे बन्धपत्र के निष्पादन के बदले में इतनी धनराशि या इतनी रकम के सरकारी वचन पत्र, जितनी वह न्यायालय या अधिकारी नियत करे, निक्षिप्त करने की अनुज्ञा दे सकता है।

सीआरपीसी की धारा 445 के अनुसार

मुचलके के बजाय निक्षेप-

जब किसी व्यक्ति से किसी न्यायालय या अधिकारी द्वारा प्रतिभुओं सहित या रहित बन्धपत्र निष्पादित करने की अपेक्षा की जाती है तब वह न्यायालय या अधिकारी, उस दशा में जब वह बन्धपत्र सदाचार के लिए नहीं है उसे ऐसे बन्धपत्र के निष्पादन के बदले में इतनी धनराशि या इतनी रकम के सरकारी वचन पत्र, जितनी वह न्यायालय या अधिकारी नियत करे, निक्षिप्त करने की अनुज्ञा दे सकता है।

Deposit instead of recognizance-
When any person is required by any Court or officer to execute a bond with or without sureties, such Court or officer may, except in the case of a bond for good behaviour, permit him to deposit a sum of money or Government promissory notes to such amount as the Court or officer may fix in lieu of executing such bond.

हमारा प्रयास सीआरपीसी की धारा 445 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

सीआरपीसी की धारा 444 | प्रतिभुओं का उन्मोचन | CrPC Section- 444 in hindi| Discharge of sureties.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 444 के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 444 कब लागू होती है, यह भी इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

धारा 444 का विवरण

दण्ड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 444 के अन्तर्गत जमानत पर छोड़े गए व्यक्ति की हाजिरी और उपस्थिति के लिए प्रतिभुओं में से सब या कोई बन्धपत्र के या तो पूर्णतया या वहां तक, जहां तक वह आवेदकों से सम्बन्धित हैं, प्रभावोन्मुक्त किए जाने के लिए किसी समय मजिस्ट्रेट से आवेदन कर सकते हैं। ऐसा आवेदन किए जाने पर मजिस्ट्रेट यह निदेश देते हुए गिरफ्तारी का वारंट जारी करेगा कि ऐसे छोड़े गए व्यक्ति को उसके समक्ष लाया जाए। वारंट के अनुसरण में ऐसे व्यक्ति के हाजिर होने पर या उसके स्वेच्छया अभ्यर्पण करने पर, मजिस्ट्रेट बन्धपत्र के या तो पूर्णतया या, वहां तक, जहां तक कि वह आवेदकों से सम्बन्धित है, प्रभावोन्मुक्त किए जाने का निदेश देगा और ऐसे व्यक्ति से अपेक्षा करेगा कि वह अन्य पर्याप्त प्रतिभू दे और यदि वह ऐसा करने में असफल रहता है तो उसे जेल सुपुर्द कर सकता है।

सीआरपीसी की धारा 444 के अनुसार

प्रतिभुओं का उन्मोचन-

(1) जमानत पर छोड़े गए व्यक्ति की हाजिरी और उपस्थिति के लिए प्रतिभुओं में से सब या कोई बन्धपत्र के या तो पूर्णतया या वहां तक, जहां तक वह आवेदकों से सम्बन्धित हैं, प्रभावोन्मुक्त किए जाने के लिए किसी समय मजिस्ट्रेट से आवेदन कर सकते हैं।
(2) ऐसा आवेदन किए जाने पर मजिस्ट्रेट यह निदेश देते हुए गिरफ्तारी का वारंट जारी करेगा कि ऐसे छोड़े गए व्यक्ति को उसके समक्ष लाया जाए।
(3) वारंट के अनुसरण में ऐसे व्यक्ति के हाजिर होने पर या उसके स्वेच्छया अभ्यर्पण करने पर, मजिस्ट्रेट बन्धपत्र के या तो पूर्णतया या, वहां तक, जहां तक कि वह आवेदकों से सम्बन्धित है, प्रभावोन्मुक्त किए जाने का निदेश देगा और ऐसे व्यक्ति से अपेक्षा करेगा कि वह अन्य पर्याप्त प्रतिभू दे और यदि वह ऐसा करने में असफल रहता है तो उसे जेल सुपुर्द कर सकता है।

Discharge of sureties-
(1) All or any sureties for the attendance and appearance of a person released on bail may at any time apply to a Magistrate to discharge the bond, either wholly or so far as relates to the applicants.
(2) On such application being made, the Magistrate shall issue his warrant of arrest directing that the person so released be brought before him.
(3) On the appearance of such person pursuant to the warrant, or on his voluntary surrender, the Magistrate shall direct the bond to be discharged either wholly or so far as relates to the applicants, and shall call upon such person to find other sufficient sureties, and, if he fails to do so, may commit him to jail.

हमारा प्रयास सीआरपीसी की धारा 444 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।