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सीआरपीसी की धारा 376 | छोटे मामलों में अपील न होना | CrPC Section- 376 in hindi| No appeal in petty cases.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 376 के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 376 कब लागू होती है, यह भी इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

धारा 376 का विवरण

दण्ड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 376 के अन्तर्गत धारा 374 में किसी बात के होते हुए भी, दोषसिद्ध व्यक्ति द्वारा कोई अपील निम्नलिखित में से किसी मामले में न होगी। जहां उच्च न्यायालय केवल छह मास से अनधिक की अवधि के कारावास का या एक हजार रुपये से अनधिक जुर्माने का अथवा ऐसे कारावास और जुर्माने दोनों का, दंडादेश पारित करता है।जहां सेशन न्यायालय या महानगर मजिस्ट्रेट केवल तीन मास से अनधिक की अवधि के कारावास का या दो सौ रुपए से अनधिक जुर्माने का अथवा ऐसे कारावास और जुर्माने दोनों का, दंडादेश पारित करता है।

सीआरपीसी की धारा 376 के अनुसार

छोटे मामलों में अपील न होना-
धारा 374 में किसी बात के होते हुए भी, दोषसिद्ध व्यक्ति द्वारा कोई अपील निम्नलिखित में से किसी मामले में न होगी, अर्थात्:
(क) जहां उच्च न्यायालय केवल छह मास से अनधिक की अवधि के कारावास का या एक हजार रुपये से अनधिक जुर्माने का अथवा ऐसे कारावास और जुर्माने दोनों का, दंडादेश पारित करता है;
(ख) जहां सेशन न्यायालय या महानगर मजिस्ट्रेट केवल तीन मास से अनधिक की अवधि के कारावास का या दो सौ रुपए से अनधिक जुर्माने का अथवा ऐसे कारावास और जुर्माने दोनों का, दंडादेश पारित करता है;
(ग) जहां प्रथम वर्ग मजिस्ट्रेट केवल एक सौ रुपए से अनधिक जुर्माने का दंडादेश पारित करता है; अथवा
(घ) जहां संक्षेपत: विचारित किसी मामले में, धारा 260 के अधीन कार्य करने के लिए सशक्त मजिस्ट्रेट केवल दो सौ रुपये से अनधिक जुर्माने का दंडादेश पारित करता है:
परन्तु यदि ऐसे किसी दंडादेश के साथ कोई अन्य दण्ड मिला दिया गया है तो ऐसे दंडादेश के विरुद्ध अपील की जा सकती है किन्तु वह केवल इस आधार पर अपीलनीय न हो जायेगा कि-
(i) दोषसिद्ध व्यक्ति को परिशान्ति कायम रखने के लिए प्रतिभूति देने का आदेश दिया गया है; अथवा
(ii) जुर्माना देने में व्यतिक्रम होने पर कारावास के निदेश को दंडादेश में सम्मिलित किया गया है; अथवा
(iii) उस मामले में जुर्माने का एक से अधिक दंडादेश पारित किया गया है, यदि अधिरोपित जुर्माने की कुल रकम उस मामले की बाबत इसमें इसके पूर्व विनिर्दिष्ट रकम से अधिक नहीं है।

No appeal in petty cases-
Notwithstanding anything contained in Section 374, there shall be no appeal by a convicted person in any of the following cases, namely-
(a) where a High Court passes only a sentence of imprisonment for a term not exceeding six months or of fine not exceeding one thousand rupees, or of both such imprisonment and fine;
(b) where a Court of Session or a Metropolitan Magistrate passes only a sentence of imprisonment for a term not exceeding three months or of fine not exceeding two hundred rupees, or of both such imprisonment and fine;
(c) where a Magistrate of the first class passes only a sentence of fine not exceeding one hundred rupees; or
(d) where, in a case tried summarily, a Magistrate empowered to act under Section 260 passes only a sentence of fine not exceeding two hundred rupees :
Provided that an appeal may be brought against any such sentence if any other punishment is combined with it, but such sentence shall not be appealable merely on the ground-
(i) that the person convicted is ordered to furnish security to keep the peace; or
(ii) that a direction for imprisonment in default of payment of fine is included in the sentence; or
(iii) that more than one sentence of fine is passed in the case, if the total amount of fine imposed does not exceed the amount hereinbefore specified in respect of the case.

हमारा प्रयास सीआरपीसी की धारा 376 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

सीआरपीसी की धारा 375 | कुछ मामलों में जब अभियुक्त दोषी होने का अभिवचन करे, अपील न होना | CrPC Section- 375 in hindi| No appeal in certain cases when accused pleads guilty.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 375 के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 375 कब लागू होती है, यह भी इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

धारा 375 का विवरण

दण्ड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 375 के अन्तर्गत धारा 374 में किसी बात के होते हुए भी, जहां अभियुक्त व्यक्ति ने दोषी होने का अभिवचन किया है, और ऐसे अभिवचन पर वह दोषसिद्ध किया गया है वहां यदि दोषसिद्धि उच्च न्यायालय द्वारा की गई है, तो कोई अपील नहीं होगी, अथवा दोषसिद्धि सेशन न्यायालय, महानगर मजिस्ट्रेट या प्रथम वर्ग मजिस्ट्रेट या द्वितीय वर्ग मजिस्ट्रेट द्वारा की गई है तो अपील, दण्ड के परिणाम या उसकी वैधता के बारे में ही हो सकेगी, अन्यथा नहीं।

सीआरपीसी की धारा 375 के अनुसार

कुछ मामलों में जब अभियुक्त दोषी होने का अभिवचन करे, अपील न होना-
धारा 374 में किसी बात के होते हुए भी, जहां अभियुक्त व्यक्ति ने दोषी होने का अभिवचन किया है, और ऐसे अभिवचन पर वह दोषसिद्ध किया गया है वहां-
(क) यदि दोषसिद्धि उच्च न्यायालय द्वारा की गई है, तो कोई अपील नहीं होगी, अथवा
(ख) यदि दोषसिद्धि सेशन न्यायालय, महानगर मजिस्ट्रेट या प्रथम वर्ग मजिस्ट्रेट या द्वितीय वर्ग मजिस्ट्रेट द्वारा की गई है तो अपील, दण्ड के परिणाम या उसकी वैधता के बारे में ही हो सकेगी, अन्यथा नहीं।

No appeal in certain cases when accused pleads guilty-
Notwithstanding anything contained in Section 374, where an accused person has pleaded guilty and has been convicted on such plea, there shall be no appeal-
(a) if the conviction is by a High Court; or
(b) if the conviction is by a Court of Session, Metropolitan Magistrate or Magistrate of the first or second class, except as to the extent or legality of the sentence.

हमारा प्रयास सीआरपीसी की धारा 375 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

सीआरपीसी की धारा 374 | दोषसिद्धि से अपील | CrPC Section- 374 in hindi| Appeals from convictions.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 374 के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 374 कब लागू होती है, यह भी इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

धारा 374 का विवरण

दण्ड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 374 के अन्तर्गत कोई व्यक्ति जो उच्च न्यायालय द्वारा असाधारण आरंभिक दांडिक अधिकारिता के प्रयोग में किए गए विचारण में दोषसिद्ध किया गया है, अथवा जो महानगर मजिस्ट्रेट या सहायक सेशन न्यायाधीश या प्रथम वर्ग मजिस्ट्रेट या मजिस्ट्रेट द्वारा किए गए विचारण में दोषसिद्ध किया गया है, वह उच्चतम न्यायालय में अपील कर सकता है।

सीआरपीसी की धारा 374 के अनुसार

दोषसिद्धि से अपील-

(1) कोई व्यक्ति जो उच्च न्यायालय द्वारा असाधारण आरंभिक दांडिक अधिकारिता के प्रयोग में किए गए विचारण में दोषसिद्ध किया गया है, उच्चतम न्यायालय में अपील कर सकता है।
(2) कोई व्यक्ति जो सेशन न्यायाधीश या अपर सेशन न्यायाधीश द्वारा किए गए विचारण में या किसी अन्य न्यायालय द्वारा किए गए विचारण में दोषसिद्ध किया गया है, जिसमें सात वर्ष से अधिक के कारावास का दंडादेश 2[ उसके विरुद्ध या उसी विचारण में दोषसिद्ध किए गए किसी अन्य व्यक्ति के विरुद्ध दिया गया है] उच्च न्यायालय में अपील कर सकता है।
(3) उपधारा (2) में जैसा उपबंधित है उसके सिवाय, कोई व्यक्ति-
(क) जो महानगर मजिस्ट्रेट या सहायक सेशन न्यायाधीश या प्रथम वर्ग मजिस्ट्रेट या मजिस्ट्रेट द्वारा किए गए विचारण में दोषसिद्ध किया गया है, अथवा
(ख) जो धारा 325 के अधीन दण्डादिष्ट किया गया है, अथवा
(ग) जिसके बारे में किसी मजिस्ट्रेट द्वारा धारा 360 के अधीन आदेश दिया गया है या दंडादेश पारित किया गया है, सेशन न्यायालय में अपील कर सकता है।
(4) जब भारतीय दण्ड संहिता (1860 का 45) की धारा 376, धारा 376क, धारा 376 कख, धारा 376ख, धारा 376ग, धारा 376घ, धारा 376घक, धारा 376घख या धारा 376ङ के अधीन पारित किसी दण्डादेश के विरुद्ध अपील फाइल की गई है, तो अपील का निपटारा, ऐसी अपील फाइल किए जाने की तारीख से छह मास की अवधि के भीतर किया जाएगा।

Appeals from convictions-
(1) Any person convicted on a trial held by a High Court in its extraordinary original criminal jurisdiction may appeal to the Supreme Court.
(2) Any person convicted on a trial held by a Sessions Judge or an Additional Sessions Judge or on a trial held by any other Court in which a sentence of imprisonment for more than seven years 2[has been passed against him or against any other person convicted at the same trial], may appeal to the High Court.
(3) Save as otherwise provided in sub-section (2), any person-
(a) convicted on a trial held by a Metropolitan Magistrate or Assistant Sessions Judge or Magistrate of the first class, or of the second class, or
(b) sentenced under Section 325, or
(c) in respect of whom an order has been made or a sentence has been passed under Section 360 by any Magistrate, may appeal to the Court of Session.
(4) When an appeal has been filed against a sentence passed under section 376. section 376A, section 376AB, section 376B, section 376C, section 376D, section 376DA, section 376DB or section 376E of the Indian Penal Code (45 of 1860), the appeal shall be disposed of within a period of six months from the date of filing of such appeal.

हमारा प्रयास सीआरपीसी की धारा 374 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

सीआरपीसी की धारा 373 | परिशान्ति कायम रखने या सदाचार के लिए प्रतिभूति अपेक्षित करने वाले या प्रतिभूति स्वीकार करने से इंकार करने वाले या अस्वीकार करने वाले आदेश से अपील | CrPC Section- 373 in hindi| Appeal from orders requiring security or refusal to accept or rejecting surety for keeping peace or good behaviour.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 373 के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 373 कब लागू होती है, यह भी इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

धारा 373 का विवरण

दण्ड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 373 के अन्तर्गत कोई व्यक्ति परिशान्ति कायम रखने या सदाचार के लिए प्रतिभूति अपेक्षित करने वाले या प्रतिभूति स्वीकार करने से इंकार करने वाले या अस्वीकार करने के आधार पर सेशन न्यायालय में ऐसे आदेश के विरुद्ध अपील कर सकता है।

सीआरपीसी की धारा 373 के अनुसार

परिशान्ति कायम रखने या सदाचार के लिए प्रतिभूति अपेक्षित करने वाले या प्रतिभूति स्वीकार करने से इंकार करने वाले या अस्वीकार करने वाले आदेश से अपील-
कोई व्यक्ति,-
(i) जिसे परिशान्ति कायम रखने या सदाचार के लिए प्रतिभूति देने के लिए धारा 117 के अधीन आदेश दिया गया है, अथवा
(ii) जो धारा 121 के अधीन प्रतिभू स्वीकार करने से इंकार करने या उसे अस्वीकार करने वाले किसी आदेश से व्यथित है,
सेशन न्यायालय में ऐसे आदेश के विरुद्ध अपील कर सकता है:
परन्तु इस धारा की कोई बात उन व्यक्तियों को लागू नहीं होगी जिनके विरुद्ध कार्यवाही सेशन न्यायाधीश के समक्ष धारा 122 की उपधारा (2) या उपधारा (4) के उपबंधों के अनुसार रखी गई है।

Appeal from orders requiring security or refusal to accept or rejecting surety for keeping peace or good behaviour-
Any person-
(i) who has been ordered under Section 117 to give security for keeping the peace or for good behaviour, or
(ii) who is aggrieved by any order refusing to accept or rejecting a surety under Section 121,
may appeal against such order to the Court of Session :
Provided that nothing in this section shall apply to persons the proceedings against whom are laid before a Sessions Judge in accordance with the provisions of sub section (2) or sub-section (4) of Section 122.

हमारा प्रयास सीआरपीसी की धारा 373 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

सीआरपीसी की धारा 372 | जब तक अन्यथा उपबन्धित न हो किसी अपील का न होना | CrPC Section- 372 in hindi| No appeal to lie unless otherwise provided.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 372 के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 372 कब लागू होती है, यह भी इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

धारा 372 का विवरण

दण्ड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 372 के अन्तर्गत दण्ड न्यायालय के किसी निर्णय या आदेश से कोई अपील इस संहिता द्वारा या तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि द्वारा जैसा उपबंधित हो उसके सिवाय न होगी। परन्तु यह कि पीड़ित को न्यायालय द्वारा पारित किसी आदेश, जिसके द्वारा अभियुक्त को दोषमुक्त किया गया है या न्यूनतर अपराध के लिए दोषसिद्ध किया गया है या अपर्याप्त प्रतिकर अधिरोपित किया गया है, के विरुद्ध अपील दाखिल करने का अधिकार होगा और ऐसी अपील उस न्यायालय में होगी जिसमें अपील समान्य रूप से ऐसे न्यायालय की दोषसिद्धि के आदेश के विरुद्ध होती है।

सीआरपीसी की धारा 372 के अनुसार

जब तक अन्यथा उपबन्धित न हो किसी अपील का न होना-
दण्ड न्यायालय के किसी निर्णय या आदेश से कोई अपील इस संहिता द्वारा या तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि द्वारा जैसा उपबंधित हो उसके सिवाय न होगी।
[परन्तु यह कि पीड़ित को न्यायालय द्वारा पारित किसी आदेश, जिसके द्वारा अभियुक्त को दोषमुक्त किया गया है या न्यूनतर अपराध के लिए दोषसिद्ध किया गया है या अपर्याप्त प्रतिकर अधिरोपित किया गया है, के विरुद्ध अपील दाखिल करने का अधिकार होगा और ऐसी अपील उस न्यायालय में होगी जिसमें अपील समान्य रूप से ऐसे न्यायालय की दोषसिद्धि के आदेश के विरुद्ध होती है।]

No appeal to lie unless otherwise provided-
No appeal shall lie from an judgment or order of a Criminal Court except as provided for by this Code or by any other law for the time being in force.
[Provided that the victim shall have a right to prefer an appeal against any order passed by the Court acquitting the accused or convicting for a lesser offence or imposing inadequate compensation, and such appeal shall lie to the Court to which an appeal ordinarily lies against the order of conviction of such Court.]

हमारा प्रयास सीआरपीसी की धारा 372 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

सीआरपीसी की धारा 371 | उच्च न्यायालय की पुष्टि के लिए प्रस्तुत मामलों में प्रक्रिया | CrPC Section- 371 in hindi| Procedure in cases submitted to High Court for confirmation.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 371 के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 371 कब लागू होती है, यह भी इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

धारा 371 का विवरण

दण्ड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 371 के अन्तर्गत मृत्यु दंडादेश की पुष्टि के लिए उच्च न्यायालय को सेशन न्यायालय द्वारा प्रस्तुत मामलों में उच्च न्यायालय द्वारा पुष्टि के आदेश या अन्य आदेश के दिए जाने के पश्चात् उच्च न्यायालय का समुचित अधिकारी विलम्ब के बिना, आदेश की प्रतिलिपि उच्च न्यायालय की मुद्रा लगाकर और अपने पदीय हस्ताक्षरों से अनुप्रमाणित करके सेशन न्यायालय को भेजेगा।

सीआरपीसी की धारा 371 के अनुसार

उच्च न्यायालय की पुष्टि के लिए प्रस्तुत मामलों में प्रक्रिया-
मृत्यु दंडादेश की पुष्टि के लिए उच्च न्यायालय को सेशन न्यायालय द्वारा प्रस्तुत मामलों में उच्च न्यायालय द्वारा पुष्टि के आदेश या अन्य आदेश के दिए जाने के पश्चात् उच्च न्यायालय का समुचित अधिकारी विलम्ब के बिना, आदेश की प्रतिलिपि उच्च न्यायालय की मुद्रा लगाकर और अपने पदीय हस्ताक्षरों से अनुप्रमाणित करके सेशन न्यायालय को भेजेगा।

Procedure in cases submitted to High Court for confirmation-
In cases submitted by the Court of Session to the High Court for the confirmation of a sentence of death, the proper officer of the High Court shall, without delay, after the order of confirmation or other order has been made by the High Court, send a copy of the order, under the seal of the High Court and attested with his official signature, to the Court of Session.

हमारा प्रयास सीआरपीसी की धारा 371 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।