नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 245 के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 245 कब लागू होती है, यह भी इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।
धारा 245 का विवरण
दण्ड प्रक्रिया संहिता (CrPC) में धारा 245 के अन्तर्गत यदि धारा 244 में निर्दिष्ट सब साक्ष्य लेने पर मजिस्ट्रेट का, उन कारणों से, जो लेखबद्ध किए जाएंगे, यह विचार है कि अभियुक्त के विरुद्ध ऐसा कोई मामला सिद्ध नहीं हुआ है तो अखंडित रहने पर उसकी दोषसिद्धि के लिए समुचित आधार हो तो मजिस्ट्रेट उसको उन्मोचित कर देगा, तो इस धारा की कोई बात मजिस्ट्रेट को मामले के किसी पूर्वतन प्रक्रम में अभियुक्त को उस दशा में उन्मोचित करने से निवारित करने वाली न समझी जाएगी जिसमें ऐसा मजिस्ट्रेट ऐसे कारणों से, जो लेखबद्ध किए जाएंगे, यह विचार करता है कि आरोप निराधार है।
सीआरपीसी की धारा 245 के अनुसार
अभियुक्त को कब उन्मोचित किया जाएगा-
(1) यदि धारा 244 में निर्दिष्ट सब साक्ष्य लेने पर मजिस्ट्रेट का, उन कारणों से, जो लेखबद्ध किए जाएंगे, यह विचार है कि अभियुक्त के विरुद्ध ऐसा कोई मामला सिद्ध नहीं हुआ है तो अखंडित रहने पर उसकी दोषसिद्धि के लिए समुचित आधार हो तो मजिस्ट्रेट उसको उन्मोचित कर देगा। (2) इस धारा की कोई बात मजिस्ट्रेट को मामले के किसी पूर्वतन प्रक्रम में अभियुक्त को उस दशा में उन्मोचित करने से निवारित करने वाली न समझी जाएगी जिसमें ऐसा मजिस्ट्रेट ऐसे कारणों से, जो लेखबद्ध किए जाएंगे, यह विचार करता है कि आरोप निराधार है।
When accused shall be discharged- (1) If, upon taking all the evidence referred to in Section 244, the Magistrate considers, for reasons to be recorded, that no case against the accused has been made out which, if unrebutted, would warrant his conviction, the Magistrate shall discharge him. (2) Nothing in this section shall be deemed to prevent a Magistrate from discharging the accused at any previous stage of the case if, for reasons to be recorded by such Magistrate, he considers the charge to be groundless.
हमारा प्रयास सीआरपीसी की धारा 245 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।
नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 244 के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 244 कब लागू होती है, यह भी इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।
धारा 244 का विवरण
दण्ड प्रक्रिया संहिता (CrPC) में धारा 244 के अन्तर्गत जब पुलिस रिपोर्ट से भिन्न आधार पर संस्थित किसी वारण्ट मामले में मजिस्ट्रेट के समक्ष अभियुक्त हाजिर होता है या लाया जाता है तब मजिस्ट्रेट अभियोजन को सुनने के लिए और ऐसा सब साक्ष्य लेने के लिए अग्रसर होगा जो अभियोजन के समर्थन में पेश किया जाए। मजिस्ट्रेट, अभियोजन के आवेदन पर, उसके साक्षियों में से किसी को हाजिर होने या कोई दस्तावेज या अन्य चीज पेश करने का निदेश देने वाला समन जारी कर सकता है।
सीआरपीसी की धारा 244 के अनुसार
अभियोजन का साक्ष्य-
(1) जब पुलिस रिपोर्ट से भिन्न आधार पर संस्थित किसी वारण्ट मामले में मजिस्ट्रेट के समक्ष अभियुक्त हाजिर होता है या लाया जाता है तब मजिस्ट्रेट अभियोजन को सुनने के लिए और ऐसा सब साक्ष्य लेने के लिए अग्रसर होगा जो अभियोजन के समर्थन में पेश किया जाए। (2) मजिस्ट्रेट, अभियोजन के आवेदन पर, उसके साक्षियों में से किसी को हाजिर होने या कोई दस्तावेज या अन्य चीज पेश करने का निदेश देने वाला समन जारी कर सकता है।
Evidence for prosecution- (1) When, in any warrant-case instituted otherwise than on a police report, the accused appears or is brought before a Magistrate, the Magistrate shall proceed to hear the prosecution and take all such evidence as may be produced in support of the prosecution. (2) The Magistrate may, on the application of the prosecution, issue a summons to any of its witnesses directing him to attend or to produce any document or other thing.
हमारा प्रयास सीआरपीसी की धारा 244 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।
नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 243 के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 243 कब लागू होती है, यह भी इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।
धारा 243 का विवरण
दण्ड प्रक्रिया संहिता (CrPC) में धारा 243 के अन्तर्गत जब किसी मामले में न्यायालय किसी वाद को सुनती है, तब अभियुक्त से भी अपेक्षा करती है कि वह भी अपनी प्रतिरक्षा में प्रतिपरीक्षा आरंभ करे और अपना साक्ष्य पेश करे अथवा साक्षी को प्रस्तुत करे, अभियुक्त परीक्षा या प्रतिपरीक्षा के, या कोई दस्तावेज या अन्य चीज पेश करने के प्रयोजन से हाजिर होने के लिए किसी साक्षी को विवश करने के लिए कोई आदेशिका जारी करे तो, मजिस्ट्रेट ऐसी आदेशिका जारी करेगा जब तक उसका यह विचार न हो कि ऐसा आवेदन इस आधार पर नामंजूर कर दिया जाता है। यदि अभियुक्त ने किसी साक्षी की प्रतिपरीक्षा कर ली है या उसे प्रतिपरीक्षा करने का अवसर मिल चुका है तब ऐसे साक्षी को हाजिर होने के लिए इस धारा के अधीन तब तक विवश नहीं किया जाएगा जब तक मजिस्ट्रेट का यह समाधान नहीं हो जाता है कि ऐसा करना न्याय के प्रयोजनों के लिए आवश्यक है। यह धारा 243 प्रतिरक्षा का साक्ष्य प्रस्तुत करने की प्रक्रिया को बताती है।
सीआरपीसी की धारा 243 के अनुसार
प्रतिरक्षा का साक्ष्य-
(1) तब अभियुक्त से अपेक्षा की जाएगी कि वह अपनी प्रतिपरीक्षा आरम्भ करे और अपना साक्ष्य पेश करे; और यदि अभियुक्त कोई लिखित कथन देता है तो मजिस्ट्रेट उसे अभिलेख में फाइल करेगा। (2) यदि अभियुक्त अपनी प्रतिरक्षा आरम्भ करने के पश्चात् मजिस्ट्रेट से आवेदन करता है कि वह परीक्षा या प्रतिपरीक्षा के, या कोई दस्तावेज या अन्य चीज पेश करने के प्रयोजन से हाजिर होने के लिए किसी साक्षी को विवश करने के लिए कोई आदेशिका जारी करे तो, मजिस्ट्रेट ऐसी आदेशिका जारी करेगा जब तक उसका यह विचार न हो कि ऐसा आवेदन इस आधार पर नामंजूर कर दिया जाना चाहिए कि वह तंग करने के या विलम्ब करने के या न्याय के उद्देश्यों को विफल करने के प्रयोजन से किया गया है, और ऐसा कारण उसके द्वारा लेखबद्ध किया जाएगा : परन्तु जब अपनी प्रतिपरीक्षा आरम्भ करने के पूर्व अभियुक्त ने किसी साक्षी की प्रतिपरीक्षा कर ली है या उसे प्रतिपरीक्षा करने का अवसर मिल चुका है तब ऐसे साक्षी को हाजिर होने के लिए इस धारा के अधीन तब तक विवश नहीं किया जाएगा जब तक मजिस्ट्रेट का यह समाधान नहीं हो जाता है कि ऐसा करना न्याय के प्रयोजनों के लिए आवश्यक है। (3) मजिस्ट्रेट उपधारा (2) के अधीन किसी आवेदन पर किसी साक्षी को समन करने के पूर्व यह अपेक्षा कर सकता है कि विचारण के प्रयोजन के लिए हाजिर होने में उस साक्षी द्वारा किए जाने वाले उचित व्यय न्यायलय में जमा कर दिए जाएं।
Evidence for defence– (1) The accused shall then be called upon to enter upon his defence and produce his evidence; and if the accused puts in any written statement, the Magistrate shall file it with the record. (2) If the accused, after he has entered upon his defence, applies to the Magistrate to issue any process for compelling the attendance of any witness for the purpose of examination or cross-examination, or the production of any document or other thing. the Magistrate shall issue such process unless he considers that such application should be refused on the ground that it is made for the purpose of vexation or delay or for defeating the ends of justice and such ground shall be recorded by him in writing: Provided that, when the accused has cross-examined or had the opportunity of cross-examining any witness before entering on his defence, the attendance of such witness shall not be compelled under this section, unless the Magistrate is satisfied that it is necessary for the ends of justice. (3) The Magistrate may, before summoning any witness on an application under sub-section (2), require that the reasonable expenses incurred by the witness in attending for the purposes of the trial be deposited in Court.
हमारा प्रयास सीआरपीसी की धारा 243 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।
आज हम बात करेंगे दिनांक 01/10/2021 से जीएसटी मे कुछ महत्वपूर्ण बदलाव किये गये है। साथ ही जानेंगे जीएसटी काउसिंल की 45वी मीटिंग के पश्चात् क्या क्या बदलाव के प्रस्ताव रखे गये। जी हां बहुत से ऐसे बदलाव किये गये है, जिन्हे जानना बहुत जरूरी है, अन्यथा आप जीएसटी मे गलती कर सकते है।
जीएसटी काउसिंल की 45वी मीटिंग (45th Meeting of the GST Council)
दिनांक 17-09-2021 को जीएसटी बैठक केन्द्रीय वित्त और कॉर्पोरेट मामलों के मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण जीएसटी परिषद ने अन्य बातों के साथ-साथ आपूर्ति पर जीएसटी दरों में परिवर्तन से संबंधित कुछ महत्वपूर्ण बिन्दुओ पर चर्चा हुयी जिसके पश्चात् CBIC व्दारा महत्वपूर्ण बदलाव किये गये।
1- GST कर दरों में (COVID-19) के तहत राहत छूट
जीएसटी बैठक मे COVID-19 उपदार दवाईयों मे कर दर 1 अक्टूबर से नये लागू होगे, जो 31 दिसम्बर 2021 तक वैध होंगे। (बढायें अथवा घटायें जाने पर नये नोटिफिकेशन लागू होगा।)
Amphotericin B -nil
Remdesivir – 5%
Tocilizumab -nil
Anti-coagulants like Heparin – 5%
वह कोविड की उपचार दवाईयां जिन पर 5%, 31 दिसंबर, 2021 तक किया गया।
Itolizumab
Posaconazole
Infliximab
Favipiravir
Casirivimab & Imdevimab
2-Deoxy-D-Glucose
Bamlanivimab & Etesevimab
2- माल के संबंध में जीएसटी टैक्स दर में परिवर्तन-
S. No.
Item
Old
New
1
Retro fitment kits for vehicles used by the disabled
Appl. rate
5%
2
Fortified Rice Kernels for schemes like ICDS etc.
18%
5%
3
Medicine Keytruda for treatment of cancer
12%
5%
4
Biodiesel supplied to OMCs for blending with Diesel
12%
5%
5
Ores and concentrates of metals such as iron, copper, aluminum, zinc and few others
5%
18%
6
Specified Renewable Energy Devices and parts
5%
12%
7
Cartons, boxes, bags, packing containers of paper etc.
12% or 18%
18%
8
Waste and scrap of polyurethanes and other plastics
5%
18%
9
All kinds of pens
12% or 18%
18%
10
Railway parts, locomotives & other goods in Chapter 86
12%
18%
11
Miscellaneous goods of paper like cards, catalogue, printed material (Chapter 49 of tariff)
12%
18%
12
IGST on import of medicines for personal use, namely i. Zolgensma for Spinal Muscular Atrophy ii. Viltepso for Duchenne Muscular Dystrophy iii. Other medicines used in treatment of muscular atrophy recommended by Ministry of Health and Family Welfare and Department of Pharmaceuticals.
12%
Nil
13
IGST exemption on goods supplied at Indo-Bangladesh Border haats
Appl. Rate
Nil
14
Unintended waste generated during the production of fish meal except for Fish Oil
3- वस्तुओं पर जीएसटी दरों से संबंधित अन्य परिवर्तन
अपंजीकृत व्यक्ति से मेंथा तेल की आपूर्ति को रिवर्स चार्ज के तहत जोड़ा गया है, इसके अलावा जीएसटी काउंसिल व्दारा केवल मेंथा तेल के निर्यात की अनुमति दी है, साथ ही मेंथा ऑयल की अनुमति केवल (LUT) लेटर ऑफ अंडरटेकिंग पर ही इनपुट टैक्स क्रेडिट के रिफंड ले सकेंगे।
ईट भट्टों को स्पेशल कम्पोजिशन स्कीम के तहत जो़ड़ा गया है, जिसकी लिमिट 20 लाख होगी, जो दिनांक 01-04-2022 से 6% कर दर से लागू होगा। जिस पर ITC नही मिलेगी। इसके अलावा रेगुलर टैक्स कर देयता 12% होगी, जिस पर ITC की छूट मिल सकेगी।
4- फुटवियर और टेक्सटाइल सेक्टर में इनवर्टेड ड्यूटी स्ट्रक्चर में सुधार
फुटवियर और टेक्सटाइल सेक्टर में Inverted duty इनवर्टेड ड्यूटी को लागू करने के लिए जीएसटी काउंसिल व्दारा चर्चा की गयी थी, लेकिन इसे उचित समय के लिए स्थगित कर दिया गया है । जो दिनांक 01.01.2022 से लागू किया जाएगा।
5- केरल हाइकोर्ट के निर्देशअनुसार
केरल हाइकोर्ट ने पेट्रोलियम उत्पादो को भी जीएसटी मे जाेड़ने के लिये निर्देश के सम्बन्ध मे कहा था कि क्या निर्दिष्ट पेट्रोलियम उत्पादों को जीएसटी के दायरे में लाया जाना चाहिए? इस विचार को जीएसटी बैठक मे रखा गया। इस विचार को जीएसटी काउंसिल व्दारा अच्छे से विचार विमर्श करने के पश्चात् यह निर्णय लिया गया कि अभी पेट्रोलियम उत्पादों को जीएसटी मे जोड़ना उचित नही है।
6- जीएसटी सेवाओं के संबंध में प्रमुख जीएसटी कर बदलाव
S.No.
Item/ Description
Old
New
1
Validity of GST exemption on transport of goods by vessel and air from India to outside India is extended upto 30.9.2022.
–
Nil
2
Services by way of grant of National Permit to goods carriages on payment of fee
18%
Nil
3
Skill Training for which Government bears 75% or more of the expenditure [ presently exemption applies only if Govt funds 100%]
18%
Nil
4
Services related to AFC Women’s Asia Cup 2022.
18%
Nil
5
Licensing services/ the right to broadcast and show original films, sound recordings, Radio and Television programmes [to bring parity between distribution and licencing services]
12%
18%
6
Printing and reproduction services of recorded media where content is supplied by the publisher (to bring it on parity with Colour printing of images from film or digital media)
12%
18%
7
Exemption on leasing of rolling stock by IRFC to Indian Railways withdrawn.
8
E Commerce Operators are being made liable to pay tax on following services provided through them (i) transport of passengers, by any type of motor vehicles through it [w.e.f. 1st January, 2022] (ii) restaurant services provided through it with some exceptions [w.e.f. 1st January, 2022]
9
Certain relaxations have been made in conditions relating to IGST exemption relating to import of goods on lease, where GST is paid on the lease amount, so as to allow this exemption even if (i) such goods are transferred to a new lessee in India upon expiry or termination of lease; and (ii) the lessor located in SEZ pays GST under forward charge.
Brewers’ Spent Grain (BSG), Dried Distillers’ Grains with Soluble [DDGS] and other such residues
2303
5%
3
All laboratory reagents and other goods
3822
12%
4
Scented sweet supari and flavored and coated illachi falling
2106
18%
5
Carbonated Fruit Beverages of Fruit Drink” and “Carbonated Beverages with Fruit Juice
28%+12% Cess
6
Tamarind seeds
1209
5%
7
External batteries sold along with UPS Systems/ Inverter
28% or 18%
8
GST on specified Renewable Energy Projects can be paid in terms of the 70:30 ratio for goods and services, respectively, during the period from 1.7.2017 to 31.12.2018, in the same manner as has been prescribed for the period on or after 1st January 2019
9
Due to ambiguity in the applicable rate of GST on Fibre Drums, the supplies made at 12% GST in the past have been regularised. Henceforth, a uniform GST rate of 18% would apply to all paper and paper board containers, whether corrugated or non-corrugated.
18%
10
Distinction between fresh and dried fruits and nuts is being clarified for application of GST rate of “nil” and 5%/12% respectively;
11
All pharmaceutical goods
3006
12%
12
Essentiality certificate issued by Directorate General of Hydrocarbons on imports would suffice; no need for taking a certificate every time on inter-state stock transfer.
Coaching services to students provided by coaching institutions and NGOs under the central sector scheme of ‘Scholarships for students with Disabilities” is exempt from GST
Exempt
2
Services by cloud kitchens/central kitchens are covered under ‘restaurant service’
5% (No ITC)
3
Ice cream parlor sells already manufactured ice- cream. Such supply of ice cream by parlors
18%
4
Overloading charges at toll plaza are exempt from GST being akin to toll.
Exempt
5
The renting of vehicle by State Transport Undertakings and Local Authorities is covered by expression ‘giving on hire’ for the purposes of GST exemption
Exempt
6
The services by way of grant of mineral exploration and mining rights
18%
7
Admission to amusement parks having rides etc. attracts GST rate of 18%. The GST rate of 28% applies only to admission to such facilities that have casinos etc.
18%
8
Alcoholic liquor for human consumption is not food and food products for the purpose of the entry prescribing 5% GST rate on job work services in relation to food and food products
जीएसटी बैठक मे व्यापारिक फार्म आईटीसी-04 दाखिल करने के लिये महत्वपूर्ण बदलाव किये गये है, तो आइये जानते है वह ऐसे कौन से महत्वपूर्ण बदलाव है-
क्रम सं.
प्रस्ताव
उपाय
1
फार्म आईटीसी-04
पिछले वित्तीय वर्ष में वार्षिक कुल कारोबार रू 5 करोड़ से अधिक है तो वह छमाही (Half Yearly) दाखिल कर सकेंगे। वित्तीय वर्ष में वार्षिक कुल कारोबार रू 5 कारोड़ तक का है, तो वह सालान (Yearly) दाखिल कर सकेंगे।
2
ब्याज केवल शुद्ध नकद कर देयता के संबंध में लगाया जाना है।
सीजीएसटी नियम 50(3) के अन्तर्गत संसोधन दिनांक 01-07-2017 ऐसे मामलों में जहां 01.07.2017 से प्राप्त अपात्र आईटीसी पर 18% की दर से ब्याज लगाया जायेगा।
3
ब्याज का भुगतान “अपात्र आईटीसी प्राप्त और उपयोग” पर किया जाना है, न कि “अपात्र आईटीसी प्राप्त” पर
ब्याज का भुगतान “अपात्र आईटीसी प्राप्त और उपयोग” पर किया जाना है, न कि “अपात्र आईटीसी प्राप्त” पर और सीजीएसटी और आईजीएसटी नकद कैश लेजर में अप्रयुक्त शेष राशि को स्थानांतरित करने की अनुमति दी जा सकती है
4
विभिन्न मुद्दों पर अस्पष्टता और कानूनी विवादों को दूर करने के लिए परिपत्र जारी करना।
1. w.e.f. 01.01.2021, डेबिट नोट जारी करने की तिथि (और अंतर्निहित चालान की तिथि नहीं) सीजीएसटी अधिनियम, 2017 की धारा 16(4) के उद्देश्य से संबंधित वित्तीय वर्ष का निर्धारण करेगी। 2. उन मामलों में कर चालान की भौतिक प्रति ले जाने की कोई आवश्यकता नहीं है जहां आपूर्तिकर्ता द्वारा सीजीएसटी नियम, 2017 के नियम 48(4) के तहत निर्धारित तरीके से चालान तैयार किया गया है। 3. केवल वे सामान जो वास्तव में निर्यात शुल्क के अधीन हैं, अर्थात जिन पर निर्यात के समय कुछ निर्यात शुल्क का भुगतान किया जाना है, सीजीएसटी अधिनियम, 2017 की धारा 54(3) के तहत लगाए गए प्रतिबंध के तहत कवर किया जाएगा। संचित आईटीसी की वापसी
5
रिफंड के लिए सीजीएसटी नियम, 2017 में शामिल किया जाने वाला प्रावधान
सीजीएसटी/एसजीएसटी अधिनियम की धारा 77(1) और आईजीएसटी अधिनियम की धारा 19(1) में निर्दिष्ट के अनुसार गलत तरीके से भुगतान किए गए कर की वापसी दाखिल करने की प्रक्रिया और समय सीमा के संबंध में अस्पष्टता को दूर करने के लिए।
a. जीएसटी पंजीयन दाखिल करने के लिए आधार प्रमाणीकरण (OTP Verification) अनिवार्य होगा और रिफण्ड का प्रार्थना पत्र और पंजीकरण रद्द करने के निरसन के लिए आवेदन करना होगा।
b. जीएसटी मे जीएसटीआर-1 रिर्टन लेट फीस अगले माह की रिर्टन जीएसटीआर-3B मे ऑटोपापुलेट होकर आयेगी, जिसे भरना अनिवार्य होगा, इसके पश्चात् ही जीएसटीआर-3B रिर्टन भर पायेंगे।
c. सीजीएसटी नियम 59(6) के अन्तर्गत यदि पिछले माह मे जीएसटीआर-3B नही भरा हुआ है, तो वह जीएसटीआर-1 नही भर सकेंगा।
d. एक बार सीजीएसटी अधिनियम, 2017 की धारा 16(2) के प्रस्तावित खंड (एए) को अधिसूचित करने के बाद, चालान/डेबिट नोटों के संबंध में आईटीसी के लाभ को प्रतिबंधित करने के लिए, इस तरह के चालान/डेबिट नोटों का विवरण आपूर्तिकर्ता द्वारा प्रस्तुत किया जाता है। फॉर्म GSTR-1 / IFF में और फॉर्म GSTR-2B में पंजीकृत व्यक्ति को सूचित किया जाता है।
नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 242 के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 242 कब लागू होती है, यह भी इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।
धारा 242 का विवरण
दण्ड प्रक्रिया संहिता (CrPC) में धारा 242 के अन्तर्गत यदि अभियुक्त अभिवचन करने से इंकार करता है या अभिवचन नहीं करता है या विचारण किए जाने का दावा करता है या मजिस्ट्रेट अभियुक्त को धारा 241 के अधीन दोषसिद्ध नहीं करता है तो वह मजिस्ट्रेट साक्षियों की परीक्षा के लिए तारीख नियत करेगा। परन्तु यह कि मजिस्ट्रेट पुलिस द्वारा अन्वेषण के दौरान अभिलिखित की गई साक्षियों के कथन अभियुक्त को अग्रिम रूप से प्रदान करेगा। यदि मजिस्ट्रेट, अभियोजन के आवेदन पर उसके साक्षियों में से किसी को हाजिर होने या कोई दस्तावेज या अन्य चीज पेश करने का निदेश देने वाला समन जारी कर सकता है। ऐसी नियत तारीख पर मजिस्ट्रेट ऐसा सब साक्ष्य लेने के लिए अग्रसर होगा जो अभियोजन के समर्थन में पेश किया जाता है, परन्तु मजिस्ट्रेट किसी साक्षी की प्रतिपरीक्षा तब तक के लिए, जब तक किसी अन्य साक्षी या साक्षियों की परीक्षा नहीं कर ली जाती है, आस्थगित करने की अनुज्ञा दे सकेगा या किसी साक्षी को अतिरिक्त प्रतिपरीक्षा के लिए पुन: बुला सकेगा।
सीआरपीसी की धारा 242 के अनुसार
अभियोजन के लिए साक्ष्य-
(1) यदि अभियुक्त अभिवचन करने से इंकार करता है या अभिवचन नहीं करता है या विचारण किए जाने का दावा करता है या मजिस्ट्रेट अभियुक्त को धारा 241 के अधीन दोषसिद्ध नहीं करता है तो वह मजिस्ट्रेट साक्षियों की परीक्षा के लिए तारीख नियत करेगा। परन्तु यह कि मजिस्ट्रेट पुलिस द्वारा अन्वेषण के दौरान अभिलिखित की गई साक्षियों के कथन अभियुक्त को अग्रिम रूप से प्रदान करेगा। (2) मजिस्ट्रेट, अभियोजन के आवेदन पर उसके साक्षियों में से किसी को हाजिर होने या कोई दस्तावेज या अन्य चीज पेश करने का निदेश देने वाला समन जारी कर सकता है। (3) ऐसी नियत तारीख पर मजिस्ट्रेट ऐसा सब साक्ष्य लेने के लिए अग्रसर होगा जो अभियोजन के समर्थन में पेश किया जाता है : परन्तु मजिस्ट्रेट किसी साक्षी की प्रतिपरीक्षा तब तक के लिए, जब तक किसी अन्य साक्षी या साक्षियों की परीक्षा नहीं कर ली जाती है, आस्थगित करने की अनुज्ञा दे सकेगा या किसी साक्षी को अतिरिक्त प्रतिपरीक्षा के लिए पुन: बुला सकेगा।
Evidence for prosecution- (1) If the accused refuses to plead or does not plead, or claims to be tried or the Magistrate does not convict the accused under Section 241, the Magistrate shall fix a date for the examination of witnesses. Provided that the Magistrate shall supply in advance to the accused, the statement of witnesses recorded during investigation by the police. (2) The Magistrate may, on the application of the prosecution, issue a summons to any of its witnesses directing him to attend or to produce any document or other thing. (3) On the date so fixed, the Magistrate shall proceed to take all such evidence as may be produced in support of the prosecution : Provided that the Magistrate may permit the cross-examination of any witness to be deferred until any other witness or witnesses have been examined or recall any witness for further cross-examination.
हमारा प्रयास सीआरपीसी की धारा 242 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।
नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 241 के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 241 कब लागू होती है, यह भी इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।
धारा 241 का विवरण
दण्ड प्रक्रिया संहिता (CrPC) में धारा 241 के अन्तर्गत यदि अभियुक्त दोषी होने का अभिवचन करता है तो मजिस्ट्रेट उस अभिवाक् को लेखबद्ध करेगा और उसके आधार पर उसे, स्वविवेकानुसार, दोषसिद्ध कर सकेगा।
सीआरपीसी की धारा 241 के अनुसार
दोषी होने के अभिवाक् पर दोषसिद्धि-
यदि अभियुक्त दोषी होने का अभिवचन करता है तो मजिस्ट्रेट उस अभिवाक् को लेखबद्ध करेगा और उसके आधार पर उसे, स्वविवेकानुसार, दोषसिद्ध कर सकेगा।
Conviction on plea of guilty- (1) If the accused pleads guilty, the Magistrate shall record the plea and may, in his discretion, convict him thereon.
हमारा प्रयास सीआरपीसी की धारा 241 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।