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नोटिस किसे कहते है?, लीगल नोटिस कैसे बनाये?, लीगल नोटिस किसे देंनी चाहिये और कैसे बनाये? | What is notice? How to Create a Legion Notice? Who should give legal notice? Who should give legal notice? And how to make?

आज हम आपको नोटिस से संबंधित पूर्ण जानकारी देंगे साथ ही हम आपको लीगल नोटिस के बारे मे भी बतायेंगे, साथ ही हमे लीगल नोटिस कब और किसे भेजना चाहिए, यह भी बताएंगे इसके अलावा इस लेख के माध्यम से लीगल नोटिस बनाने की प्रकिया एवंम् फार्मेट भी आपको देंगे।

नोटिस (Notice) क्या है?

नोटिस Notice एक तरह से किसी व्यक्ति को सूचित करना अथवा संचार का साधन है कि व्दियीय पक्ष व्दारा जो गलती या भूल हुयी है, जो जानबूझकर या भूलवश की गयी है और उसे तुरन्त ही सुधार मे लाया जाये, इसे अवगत कराना ही नोटिस है। अन्यथा वह लीगल कार्यवाही के लिये तैयार रहे। किसी नोटिस का उद्देश्य बस इतना ही होता है।

नोटिस का साधारण भाषा मे अर्थ- किसी व्यक्ति या संस्था के लिए एक औपचारिक संचार है, जो आपके इरादे के किसी दूसरे पक्ष को उनके बारे में कानूनी कार्यवाही करने के लिए सूचित करता है और एक सुधार करने का एक आखरी मौका देने से है।

इसके अलावा जब नोटिस, किसी व्यक्ति को भेजी जाती है, तो कानूनी कार्यवाही से पहले उस व्यक्ति को उसको इरादे को के बारे अवगत कराने से है कि उसने प्रथम पक्ष के साथ क्या और क्यों किया है और इस प्रकार, प्रथम पक्ष आपकी शिकायत से अवगत कराता है। कई बार, एक कानूनी नोटिस जो दूसरी सेवा प्रदान करता है और समस्या को अदालत से बाहर भी हल किया जा सकता है, दोनों पक्षों में फलदायक चर्चा के साथ हल भी हो सकता हैं। यदि व्दितीय पक्ष उस नोटिस के अनुपालन मे सुधार करे।

वैसे नोटिस भेजना प्रत्येक मामले में लागू होता है, हालांकि किसी व्यक्ति या संस्था द्वारा आपकी बात नही सुनी या नही मानी अथवा आपके साथ किसी तरह से बेईमानी की गयी है, तो हम उन्हे कारण बताओ नोटिस भी भेज सकते है।

लीगल नोटिस (Legal Notice) क्या है और कब दिया जाता है?

लीगल नोटिस (Legal Notice) भी एक तरह से साधारण नोटिस की तरह ही होती है, यदि किसी व्यक्ति ने किसी व्यक्ति पैसों को लेकर बेईमानी किया है अथवा किसी तरह से पैसे न देने उद्देश्य से चेक बाउंस करा दिया है या किसी रूप मे आपके साथ सामने वाले व्यक्ति ने धोखा-धड़ी किया है तो भी हम उसे उस गलती को सुधार के उद्देश्य से व्दितीय पक्ष को एक नोटिस भेज कर उसके इरादो को अवगत कानूनी कार्यवाही करने के लिए सूचित करना होता है और एक सुधार करने का एक आखरी मौका देंगे।

वैसे लीगल नोटिस जिस व्यक्ति के साथ किसी तरह से धोखाधड़ी हुई है अथवा किसी ने किसी तरह से द्वितीय पक्ष को परेशान करने के उद्देश्य से कोई ऐसा कार्य किया है, जिससे उस को किसी को भारी नुकसान हुआ है अथवा पैसे को लेकर हेर-फेर किया है, तो हर व्यक्ति का यह अधिकार है कि वह उसे उस गलती को सुधार करने का एक मौका दिया जाये, और उसे एक निश्चित समय उत्तर देने के लिए प्रदान किया जाये।

यदि एक लीगल नोटिस भेजने के पश्चात् यदि वह नोटिस द्वितीय पक्ष रिसीव कर लेता है और फिर भी कोई उत्तर समय से नही देता है या आपकी नोटिस को रिसीव भी नहीं करता है, तो एक बार पुनः रिमाइंडर नोटिस भेज सकते है, और यदि फिर भी द्वितीय पक्ष द्वारा उत्तर दिया जाता है, तो आप उस द्वितीय पक्ष के खिलाफ लीगल कार्यवाही करने के लिए तत्पर हो जायेंगे।

लीगल नोटिस का प्रारूप (Legal Notice Format)


चेक बाउंस नोटिस

चेक के अनादर के मामले में, नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट की धारा 138 के तहत कानूनी नोटिस दायर किया जाता है।

चेक के अनादर के मामले में नमूना कानूनी नोटिस:

पंजीकृत एडी

कानूनी नोटिस

दिनांक:

मिस्टर ……………, (प्राप्तकर्ता का नाम और पता।)

श्रीमान,

मेरे मुवक्किल श्री …………… के निर्देश और अधिकार के तहत, मैं नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट एक्ट, 1881 की धारा 138 के तहत आपको निम्नलिखित नोटिस देता हूं:-

यहकि मेरे मुवक्किल और आप एक दूसरे को पिछले 4 साल से आपसे व्यापार कर रहे है। आप व्दारा मुझसे रू0 …………….. दिनांक ……… को उधार का माल खरीदा गया था, और आप व्दारा कहा गया था कि लगभग् 1 माह के अन्दर हम आपका भुगतान कर देगे।

यहकि मेरे मुवक्किल ने आपको पैसे चुकाने का पर्याप्त अवसर प्रदान किया, किन्तु आप व्दारा न तो पैसा दिया और न ही मेरे मुवक्किल का फोन उठाया गया। आपके इस व्यवहार के कारण मेरे मुवक्किल व्दारा आपके व्यापार स्थल पर अपने बकाया रूपये लेने आये, तो आप व्दारा उन्हे एक बैंक चेक दे दिया, जो बैंक व्दारा अनादर कर वापस कर दिया गया था।

यहकि इससे पहले, भी आप व्दारा अपनी देनदारी का निर्वहन समय पर किया जा रहा था। उपरोक्त बिल के सम्बन्ध मे आप व्दारा रू0 ……………….. का चेक दिनांक ………. को जारी किया था।

यहकि मेरे मुवक्किल द्वारा चेक को भुनाने के लिए प्रस्तुत किया गया था, तो आपके बैंक खाते मे “अपर्याप्त धन” न होने के कारण बैंकर द्वारा बिना भुगतान किए वापस कर दिया गया था। मेरे मुवक्किल ने आपको इसके बारे में टेलीफोन के माध्यम से सूचित किया। (तथ्यों का विवरण)

यहकि आपको काफी समय प्रदान करने के बावजूद भी, आप मेरे मुवक्किल को देय राशि का भुगतान करने में विफल रहे। आपने मामले से बचने की कोशिश की। यही कारण है कि मेरे मुवक्किल के पास आपको कानूनी नोटिस देने के अलावा और कोई विकल्प नहीं बचा है। (कार्रवाई का कारण)

यहकि आप कानून के प्रावधानों का पालन करने में विफल रहे हैं और अपने खाते से अपनी देनदारी का निर्वहन करने में भी विफल रहे हैं और वही चेक जानबूझकर और जानबूझकर अस्वीकृत किया गया था।

यहकि या तो आप अगले 15 दिनों में मेरे मुवक्किल के प्रति अपने दायित्व का निर्वहन करें या आपके खिलाफ आपराधिक और दीवानी आरोप तय किए जाएंगे, और आपको कारावास की सजा हो सकती है जो दो साल तक बढ़ सकती है, या जुर्माने के साथ जो राशि का दोगुना हो सकता है चेक से, या दोनों के साथ। (राहत का दावा और कानूनी आधार)

…………………. (एडवोकेट)

किसी व्यक्ति ने आपसे माल खरीदा लेकिन समय से उस माल का भुगतान नहीं किया।

पैसे समय से न देने के नोटिस प्रेषित

नोटिस पंजीकृत

दिनांक- …….

प्रेषककर्ता- श्री ………………………… पुत्र श्री ……………..  निवासी ……………………….. 

मेसर्स- …………………………………..
महोदय,

1- हस्व हिदायत अपने मुवक्किल श्री ………………………… पुत्र …………………… व्दारा उपलब्ध करायी जानकारी पर आपको निम्न नोटिस प्रेषित की जा रही है ।

2- यहकि मेरे मुवक्कील …………………………….. का कार्य करते है। मेरे मुवक्किल व्दारा आपकी फर्म/कम्पनी …………………………… जीएसटी नं0- ………………….  को बिल सं0 …… दिनांक ………………… के माध्यम से रू0 ……………….. वस्तु की बिक्री की गयी थी।

3- यहकि उक्त जारी बिल विधिवत् रूप से जारी किया गया है जिसका इन्द्राज लेखापुस्तको  मे भी विधिवत् रूप से किया गया है यहकि आपके व्दारा उक्त बिल का माल प्राप्त कर हस्ताक्षर भी किये गये है परन्तु इसके बावजूद आज दिनांक …………………. व्दारा उक्त बिल का भुगतान मेरे मुवक्किल को प्राप्त नही हुआ है।

4- यहकि मेरे मुवक्किल व्दारा आपके कई बार उक्त बिल के भुगतान के लिये कहा गया परन्तु आपकी गतिविधि व टाल मटोल करने के उपरान्त भी अभी तक भुगतान न करने की नियत यह प्रमाणित करती है कि आप भुगतान नही करना चाहते, आपका यह कृत्य धोखा-धडी पूर्ण एवंम् दोषपूर्ण कृत्य है।

अतएव आपको इस नोटिस व्दारा सूचित किया जाता है कि आप इस नोटिस प्राप्ति के 15 दिनो के अन्दर आप बिल सं0 ………. दिनांक ………….. का भुगतान करना सुनिश्चित् करे अन्यथा विवश होकर मेरे मुवक्किल व्दारा आप पर (Suit of Rendition of Accounts Order 20 Rule 13 CPC) के आधार पर न्यायालय मे, आपके विरूद्ध वाद दाखिल किया जायेगा। जिसके समस्त हर्जे खर्चे की जिम्मेदारी आपको व्यय करनी होगी।

भवदीय
……………………… (एडवोकेट)

इसी तरह से जो कारण बताओ नोटिस भी बनाई जा सकती है, वैसे लगभग् सारी नोटिस इसी प्रारूप के अनुसार कारण बिंदु देकर द्वितीय पक्ष को नोटिस भेज कर कोर्ट के बाहर या अपनी सुविधानुसार समझौता किया जा सकता हैं।

उपरोक्त लेख में नोटिस के संबंध में अगर आपके मन मे कोई सवाल हो तो आप कॉमेंट बॉक्स में पूछ सकते है।

आईपीसी की धारा 511 | आजीवन कारावास या अन्य कारावास से दण्डनीय अपराधों को करने के प्रयत्न करने के लिये दण्ड | IPC Section- 511 in hindi| Punishment for attempting to commit offences punishable with imprisonment for life or other imprisonment.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए भारतीय दंड संहिता की धारा 511 के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है भारतीय दंड संहिता की धारा 511 के अंतर्गत कैसे क्या सजा मिलती है और जमानत कैसे मिलती है, और यह अपराध किस श्रेणी में आता है, इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

धारा 511 का विवरण

भारतीय दण्ड संहिता (IPC) में धारा 511 के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। जो कोई इस संहिता द्वारा आजीवन कारावास से या कारावास से दण्डनीय अपराध करने का, या ऐसा अपराध कारित किये जाने का प्रयत्न करेगा, और ऐसे प्रयत्न में अपराध करने की दिशा में कोई कार्य करेगा, तो वह धारा 511 के अंतर्गत दंड एवं जुर्माने से दण्डित किया जाएगा।

आईपीसी की धारा 511 के अनुसार

आजीवन कारावास या अन्य कारावास से दण्डनीय अपराधों को करने के प्रयत्न करने के लिये दण्ड-

जो कोई इस संहिता द्वारा आजीवन कारावास से या कारावास से दण्डनीय अपराध करने का, या ऐसा अपराध कारित किये जाने का प्रयत्न करेगा, और ऐसे प्रयत्न में अपराध करने की दिशा में कोई कार्य करेगा, जहाँ कि ऐसे प्रयत्न के दण्ड के लिये कोई अभिव्यक्त उपबन्ध इस संहिता द्वारा नहीं किया गया है, वहाँ वह उस अपराध के लिए उपबन्धित किसी भांति के कारावास से उस अवधि के लिए, जो यथास्थिति, आजीवन कारावास से आधे तक की या उस अपराध के लिये उपबन्धित दीर्घतम अवधि के आधे तक की हो सकेगी, या ऐसे जुर्माने से, जो उस अपराध के लिये उपबन्धित है, या दोनों से, दण्डित किया जायेगा।
दृष्टान्त
(क) क, एक सन्दूक तोड़कर खोलता है और उसमें से कुछ आभूषण चुराने का प्रयत्न करता है। सन्दूक इस प्रकार खोलने के पश्चात् उसे ज्ञात होता है कि उसमें कोई आभूषण नहीं है। उसने चोरी करने की दिशा में कार्य किया है, और इसलिये, वह इस धारा के अधीन दोषी है।
(ख) क, य की जेब में हाथ डालकर य की जेब से चुराने का प्रयत्न करता है। य की जेब में कुछ न होने के परिणामस्वरूप क अपने प्रयत्न में असफल रहता है। क इस धारा के अधीन दोषी है।

Punishment for attempting to commit offences punishable with imprisonment for life or other imprisonment-
Whoever attempts to commit an offence punishable by this Code with imprisonment for life or imprisonment, or to cause such an offence to be committed, and in such attempt does any act towards the commission of the offence, shall, where no express provision is made by this Code for the punishment of such attempt, be punished with imprisonment of any description provided for the offence, for a term which may extend to one-half of the imprisonment for life or, as the case may be, one-half of the longest term of imprisonment provided for that offence, or with such fine as is provided for the offence, or with both.
Illustrations
(a) A makes an attempt to steal some jewels by breaking open a box, and finds, after so opening the box, that there is no jewel in it. He has done an act towards the commission of theft, and therefore is guilty under this section.
(b) A makes an attempt to pick the pocket of Z by thrusting his hand into Z’s pocket. A fails in the attempt in consquence of Z’s having nothing in his pocket. A is guilty under this section.

लागू अपराध

आजीवन कारावास या कारावास से दण्डनीय अपराधों को करने का प्रयत्न करना और ऐसे प्रयत्न में ऐसे अपराध के किए जाने की दशा में कोई कार्य करना।
सजा- आजीवन कारावास या उस दीर्घतम अवधि के आधे से अधिक न होने वाला कारावास जो उस अपराध के लिए उपबंधित है या जुर्माना या दोनों।
इस धारा के अंतर्गत किए गए अपराध के अनुसार ही संज्ञेय एवंम् गैर-संज्ञेय का पता लगेगा, इसी तरह से जमानत मिलेगी या नहीं अपराधनुसार ही पता लगेगी।
वह न्यायालय जिसके द्वारा प्रयतित अपराध विचारणीय है।

जुर्माना/सजा (Fine/Punishment) का प्रावधान

भारतीय दंड संहिता की धारा 511 के अंतर्गत जो कोई इस संहिता द्वारा आजीवन कारावास से या कारावास से दण्डनीय अपराध करने का, या ऐसा अपराध कारित किये जाने का प्रयत्न करेगा, और ऐसे प्रयत्न में अपराध करने की दिशा में कोई कार्य करेगा, तो वह आजीवन कारावास या उस दीर्घतम अवधि के आधे से अधिक न होने वाला कारावास जो उस अपराध के लिए उपबंधित है या जुर्माना या दोनों से दण्डित किया जाएगा और जुर्माने से भी दण्डनीय होगा।

जमानत (Bail) का प्रावधान

भारतीय दंड संहिता की धारा 511 अंतर्गत जो अपराध कारित किए जाते है वह अपराध की प्रकृति पर निर्भर होते है, अर्थात् यदि अपराध जमानतीय किया गया है, तो जमानत मिल सकेगी और यदि अपराध गैर-जमानतीय हुआ है तो, जमानत नहीं मिल सकेगी।

अपराधसजाअपराध श्रेणीजमानतविचारणीय
आजीवन कारावास या कारावास से दण्डनीय अपराधों को करने का प्रयत्न करना और ऐसे प्रयत्न में ऐसे अपराध के किए जाने की दशा में कोई कार्य करना।आजीवन कारावास या उस दीर्घतम अवधि के आधे से अधिक न होने वाला कारावास जो उस अपराध के लिए उपबंधित है या जुर्माना या दोनों।अपराध अनुसारअपराध अनुसारवह न्यायालय जिसके द्वारा प्रयतित अपराध विचारणीय

हमारा प्रयास आईपीसी की धारा 511 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

आईपीसी की धारा 510 | मत व्यक्ति द्वारा लोक-स्थान में अवचार | IPC Section- 510 in hindi| Misconduct in public by a drunken person.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए भारतीय दंड संहिता की धारा 510 के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है भारतीय दंड संहिता की धारा 510 के अंतर्गत कैसे क्या सजा मिलती है और जमानत कैसे मिलती है, और यह अपराध किस श्रेणी में आता है, इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

धारा 510 का विवरण

भारतीय दण्ड संहिता (IPC) में धारा 510 के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। जो कोई मत्तता की हालत (शराब के नशे की हालत में) में किसी लोक-स्थान में, या किसी ऐसे स्थान में, जिसमें उसका प्रवेश करना अतिचार हो, आयेगा और वहां इस प्रकार का आचरण करेगा जिससे किसी व्यक्ति को क्षोभ हो, ऐसा कार्य कारित करेगा, तो वह धारा 510 के अंतर्गत दंड एवं जुर्माने से दण्डित किया जाएगा।

आईपीसी की धारा 510 के अनुसार

मत व्यक्ति द्वारा लोक-स्थान में अवचार-

जो कोई मत्तता की हालत में किसी लोक-स्थान में, या किसी ऐसे स्थान में, जिसमें उसका प्रवेश करना अतिचार हो, आयेगा और वहां इस प्रकार का आचरण करेगा जिससे किसी व्यक्ति को क्षोभ हो, वह सादा कारावास से, जिसकी अवधि चौबीस घण्टे तक की हो सकेगी, या जुर्माने से जो दस रुपये तक का हो सकेगा, या दोनों से, दण्डित किया जायेगा।

Misconduct in public by a drunken person-
Whoever, in a state of intoxication, appears in any public place, or in any place which it is a treapass in him to enter, and there conducts himself in such a manner as to cause annoyance to any person, shall be punished with simple imprisonment for a term which may extend to twenty-four hours, or with fine which may extend to ten rupees, or with both.

लागू अपराध

मत्तता की हालत में लोक स्थान, आदि में प्रवेश करना और किसी व्यक्ति को क्षोभ कारित करना।
सजा- 24 घंटे के लिए सादा कारावास, या दस रुपए का जुर्माना या दोनों।
यह अपराध एक जमानतीय और गैर-संज्ञेय अपराध की श्रेणी में आता है।
किसी भी श्रेणी के मजिस्ट्रेट द्वारा विचारणीय है।

जुर्माना/सजा (Fine/Punishment) का प्रावधान

भारतीय दंड संहिता की धारा 510 के अंतर्गत जो कोई मत्तता की हालत (शराब के नशे की हालत में) में किसी लोक-स्थान में, या किसी ऐसे स्थान में, जिसमें उसका प्रवेश करना अतिचार हो, आयेगा और वहां इस प्रकार का आचरण करेगा जिससे किसी व्यक्ति को क्षोभ हो, ऐसा कार्य कारित करेगा, तो वह सादा कारावास से, जिसकी अवधि चौबीस घण्टे तक की हो सकेगी, या जुर्माने से जो दस रुपये तक का हो सकेगा, या दोनों से, दण्डित किया जायेगा।

जमानत (Bail) का प्रावधान

भारतीय दंड संहिता की धारा 510 अंतर्गत जो अपराध कारित किए जाते है वह अपराध दंड प्रक्रिया संहिता में जमानतीय (Baileble) अपराध की श्रेणी में आते है, इसलिए इस धारा के अंतर्गत किए गए अपराध में जमानत मिल सकेगी।

अपराधसजाअपराध श्रेणीजमानतविचारणीय
मत्तता की हालत में लोक स्थान, आदि में प्रवेश करना और किसी व्यक्ति को क्षोभ कारित करना।24 घंटे के लिए सादा कारावास, या दस रुपए का जुर्माना या दोनों।गैर-संज्ञेयजमानतीयकिसी भी श्रेणी के मजिस्ट्रेट द्वारा

हमारा प्रयास आईपीसी की धारा 510 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

आईपीसी की धारा 509B | इलेक्ट्रॉनिक साधनों द्वारा यौन उत्पीड़न | IPC Section- 509B in hindi| Sexual harassment by electronic modes.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए भारतीय दंड संहिता की धारा 509B के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है भारतीय दंड संहिता की धारा 509B के अंतर्गत कैसे क्या सजा मिलती है और जमानत कैसे मिलती है, और यह अपराध किस श्रेणी में आता है, इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

धारा 509B का विवरण

भारतीय दण्ड संहिता (IPC) में धारा 509B के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। जो कोई, उत्पीड़न करने के आशय से या इस बात का ज्ञान होते हुए कि उससे स्त्री को उत्पीड़न होगा या क्षोभ या मानसिक पीड़ा कारित होगी, दूरसंचार यंत्र द्वारा या इंटरनेट को सम्मिलित करते हुए किसी अन्य इलेक्ट्रॉनिक साधन द्वारा कोई टिप्पणी, अनुरोध, सुझाव, प्रस्ताव, छवि बनाता है, सृजित करता है, याचना करता है या उसके पारेषण (संचरण) को प्रारंभ करता है या अन्य संचरण जो कि अश्लील, कामुक, वासनामूलक, गंदा या अभद्र कार्य कारित करेगा, तो वह धारा 509B के अंतर्गत दंड एवं जुर्माने से दण्डित किया जाएगा।

आईपीसी की धारा 509B के अनुसार

इलेक्ट्रॉनिक साधनों द्वारा यौन उत्पीड़न-

जो कोई, उत्पीड़न करने के आशय से या इस बात का ज्ञान होते हुए कि उससे स्त्री को उत्पीड़न होगा या क्षोभ या मानसिक पीड़ा कारित होगी, दूरसंचार यंत्र द्वारा या इंटरनेट को सम्मिलित करते हुए किसी अन्य इलेक्ट्रॉनिक साधन द्वारा कोई टिप्पणी, अनुरोध, सुझाव, प्रस्ताव, छवि बनाता है, सृजित करता है, याचना करता है या उसके पारेषण (संचरण) को प्रारंभ करता है या अन्य संचरण जो कि अश्लील, कामुक, वासनामूलक, गंदा या अभद्र हो, वह कठोर कारावास से दण्डित होगा जिसकी अवधि छः माह से कम नहीं होगी किन्तु जो दो वर्ष तक का हो सकेगा एवं जुर्माने के लिए भी दायी होगा।

Sexual harassment by electronic modes-
Whoever, by means of telecommunication device or by any other electronic hode including internet, makes, creates, solicits or initiates the transmission of any comment, request, suggestion, proposal, image or other communication, which is obscene, lewd, lascivious, filthy or indecent with intent to harass or cause or having knowledge that it would harass or cause annoyance or mental agony to a woman shall be punished with rigorous imprisonment for a term which shall not be less than six months but may extend to two years and shall also be liable to fine.

लागू अपराध

इलेक्ट्रॉनिक साधनों द्वारा यौन उत्पीड़न।
सजा- कठोर कारावास, जो 6 माह से कम का नहीं होगा किंतु जो 2 वर्ष तक का हो सकेगा और जुर्माना।
यह अपराध एक गैर-जमानतीय और संज्ञेय अपराध की श्रेणी में आता है।
प्रथम श्रेणी के मजिस्ट्रेट द्वारा विचारणीय है।

जुर्माना/सजा (Fine/Punishment) का प्रावधान

भारतीय दंड संहिता की धारा 509B के अंतर्गत जो कोई, उत्पीड़न करने के आशय से या इस बात का ज्ञान होते हुए कि उससे स्त्री को उत्पीड़न होगा या क्षोभ या मानसिक पीड़ा कारित होगी, दूरसंचार यंत्र द्वारा या इंटरनेट को सम्मिलित करते हुए किसी अन्य इलेक्ट्रॉनिक साधन द्वारा कोई टिप्पणी, अनुरोध, सुझाव, प्रस्ताव, छवि बनाता है, सृजित करता है, याचना करता है या उसके पारेषण (संचरण) को प्रारंभ करता है या अन्य संचरण जो कि अश्लील, कामुक, वासनामूलक, गंदा या अभद्र कार्य कारित करेगा, तो वह कठोर कारावास से दण्डित होगा जिसकी अवधि छः माह से कम नहीं होगी किन्तु जो दो वर्ष तक का हो सकेगा एवं जुर्माने के लिए भी दायी होगा।

जमानत (Bail) का प्रावधान

भारतीय दंड संहिता की धारा 509B अंतर्गत जो अपराध कारित किए जाते है वह अपराध दंड प्रक्रिया संहिता में गैर-जमानतीय (Non-Baileble) अपराध की श्रेणी में आते है, इसलिए इस धारा के अंतर्गत किए गए अपराध में जमानत नहीं मिल सकेगी।

अपराधसजाअपराध श्रेणीजमानतविचारणीय
इलेक्ट्रॉनिक साधनों द्वारा यौन उत्पीड़न।कठोर कारावास, जो 6 माह से कम का नहीं होगा किंतु जो 2 वर्ष तक का हो सकेगा और जुर्माना।संज्ञेयगैर-जमानतीयप्रथम श्रेणी के मजिस्ट्रेट द्वारा

हमारा प्रयास आईपीसी की धारा 509B की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

आईपीसी की धारा 509A | नातेदार द्वारा यौन उत्पीड़न | IPC Section- 509A in hindi| Sexual harassment by relative.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए भारतीय दंड संहिता की धारा 509A के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है भारतीय दंड संहिता की धारा 509A के अंतर्गत कैसे क्या सजा मिलती है और जमानत कैसे मिलती है, और यह अपराध किस श्रेणी में आता है, इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

धारा 509A का विवरण

भारतीय दण्ड संहिता (IPC) में धारा 509A के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। जो कोई, स्त्री से रक्त, दत्तक या विवाह के माध्यम से संबंधित होते हुए तथा उसका पति न होते हुए, शब्द, अंगविक्षेप अथवा कार्य द्वारा उसकी लज्जा का अनादर करने के आशय से अपनी निकटता का लाभ उठाता है, और ऐसी स्त्री को उत्प्रेरित करता है, विलुब्ध करता है या धमकी देता है, तो वह धारा 509A के अंतर्गत दंड एवं जुर्माने से दण्डित किया जाएगा।

आईपीसी की धारा 509A के अनुसार

नातेदार द्वारा यौन उत्पीड़न-

जो कोई, स्त्री से रक्त, दत्तक या विवाह के माध्यम से संबंधित होते हुए तथा उसका पति न होते हुए, शब्द, अंगविक्षेप अथवा कार्य द्वारा उसकी लज्जा का अनादर करने के आशय से अपनी निकटता का लाभ उठाता है, और ऐसी स्त्री को उत्प्रेरित करता है, विलुब्ध करता है या धमकी देता है, वह कठोर कारावास से जो एक वर्ष से कम नहीं होगा किन्तु जो पांच वर्ष तक का हो सकेगा, दण्डित किया जाएगा और जुर्माने के लिए भी दायी होगा।

Sexual harassment by relative-
Whoever, being related to a woman through blood, adoption or marriage, and not being her husband, takes the advantage of his proximity and induces, seduces or threatens such woman with intent to insult her modesty by word, gesture or act shall be punished with rigorous imprisonment which shall not be less than one year but which may extend to five years and shall also be liable to fine.

लागू अपराध

नातेदार द्वारा यौन उत्पीडन।
सजा- कठोर कारावास, जो 1 वर्ष से कम नहीं होगा किंतु जो 5 वर्ष तक का हो सकेगा और जुर्माना।
यह अपराध एक गैर-जमानतीय और संज्ञेय अपराध की श्रेणी में आता है।
प्रथम श्रेणी के मजिस्ट्रेट द्वारा विचारणीय है।

जुर्माना/सजा (Fine/Punishment) का प्रावधान

भारतीय दंड संहिता की धारा 509A के अंतर्गत जो कोई, स्त्री से रक्त, दत्तक या विवाह के माध्यम से संबंधित होते हुए तथा उसका पति न होते हुए, शब्द, अंगविक्षेप अथवा कार्य द्वारा उसकी लज्जा का अनादर करने के आशय से अपनी निकटता का लाभ उठाता है, और ऐसी स्त्री को उत्प्रेरित करता है, विलुब्ध करता है या धमकी देता है, तो वह कठोर कारावास से जो एक वर्ष से कम नहीं होगा किन्तु जो पांच वर्ष तक का हो सकेगा, दण्डित किया जाएगा और जुर्माने के लिए भी दायी होगा।

जमानत (Bail) का प्रावधान

भारतीय दंड संहिता की धारा 509A अंतर्गत जो अपराध कारित किए जाते है वह अपराध दंड प्रक्रिया संहिता में गैर-जमानतीय (Non-Baileble) अपराध की श्रेणी में आते है, इसलिए इस धारा के अंतर्गत किए गए अपराध में जमानत नहीं मिल सकेगी।

अपराधसजाअपराध श्रेणीजमानतविचारणीय
नातेदार द्वारा यौन उत्पीडन।कठोर कारावास, जो 1 वर्ष से कम नहीं होगा किंतु जो 5 वर्ष तक का हो सकेगा और जुर्माना।संज्ञेयगैर-जमानतीयप्रथम श्रेणी के मजिस्ट्रेट द्वारा

हमारा प्रयास आईपीसी की धारा 509A की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

आईपीसी की धारा 509 | शब्द, अंगविक्षेप या कार्य जो किसी स्त्री की लज्जा का अनादर करने के लिये आशयित है | IPC Section- 509 in hindi| Word, gesture or act intended to insult the modesty of a woman.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए भारतीय दंड संहिता की धारा 509 के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है भारतीय दंड संहिता की धारा 509 के अंतर्गत कैसे क्या सजा मिलती है और जमानत कैसे मिलती है, और यह अपराध किस श्रेणी में आता है, इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

धारा 509 का विवरण

भारतीय दण्ड संहिता (IPC) में धारा 509 के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। जो कोई किसी स्त्री की लज्जा का अनादर करने के आशय से कोई शब्द कहेगा, कोई ध्वनि या अंगविक्षेप करेगा, या कोई वस्तु प्रदर्शित करेगा, तो वह धारा 509 के अंतर्गत दंड एवं जुर्माने से दण्डित किया जाएगा।

आईपीसी की धारा 509 के अनुसार

शब्द, अंगविक्षेप या कार्य जो किसी स्त्री की लज्जा का अनादर करने के लिये आशयित है-

जो कोई किसी स्त्री की लज्जा का अनादर करने के आशय से कोई शब्द कहेगा, कोई ध्वनि या अंगविक्षेप करेगा, या कोई वस्तु प्रदर्शित करेगा, इस आशय से कि ऐसी स्त्री द्वारा ऐसा शब्द या ध्वनि सुनी जाये, या ऐसा अंगविक्षेप या वस्तु देखी जाये अथवा ऐसी स्त्री की एकान्तता का अतिक्रमण करेगा, वह सादा कारावास से, जिसकी अवधि तीन वर्ष तक की हो सकेगी, दण्डित किया जायेगा और जुर्माने से भी दण्डित किया जाएगा।

Word, gesture or act intended to insult the modesty of a woman-
Whoever, intending to insult the modesty of any woman, utters any word, makes any sound or gesture, or exhibits any object, intending that such words or sound shall be heard, or that such gesture or object shall be seen, by such woman, or intrudes upon the privacy of such woman, ¹[shall be punished with simple imprisonment for a term which may extend to three years, and also with fine.

लागू अपराध

स्त्री की लज्जा का अनादार करने के आशय से कोई शब्द कहना या कोई अंगविक्षेप करना, आदि।
सजा- तीन वर्ष के लिए सादा कारावास और जुर्माना दोनो।
यह अपराध एक जमानतीय और संज्ञेय अपराध की श्रेणी में आता है।
किसी भी श्रेणी के मजिस्ट्रेट द्वारा विचारणीय है।

जुर्माना/सजा (Fine/Punishment) का प्रावधान

भारतीय दंड संहिता की धारा 509 के अंतर्गत जो कोई किसी स्त्री की लज्जा का अनादर करने के आशय से कोई शब्द कहेगा, कोई ध्वनि या अंगविक्षेप करेगा, या कोई वस्तु प्रदर्शित करेगा, इस आशय से कि ऐसी स्त्री द्वारा ऐसा शब्द या ध्वनि सुनी जाये, या ऐसा अंगविक्षेप या वस्तु देखी जाये अथवा ऐसी स्त्री की एकान्तता का अतिक्रमण करेगा, तो वह सादा कारावास से, जिसकी अवधि तीन वर्ष तक की हो सकेगी, दण्डित किया जाएगा और जुर्माने से या दोनो से भी दण्डनीय होगा।

जमानत (Bail) का प्रावधान

भारतीय दंड संहिता की धारा 509 अंतर्गत जो अपराध कारित किए जाते है वह अपराध दंड प्रक्रिया संहिता में जमानतीय (Baileble) अपराध की श्रेणी में आते है, इसलिए इस धारा के अंतर्गत किए गए अपराध में जमानत मिल सकेगी।

अपराधसजाअपराध श्रेणीजमानतविचारणीय
स्त्री की लज्जा का अनादार करने के आशय से कोई शब्द कहना या कोई अंगविक्षेप करना, आदि।तीन वर्ष के लिए सादा कारावास और जुर्माना दोनो।संज्ञेयजमानतीयकिसी भी श्रेणी के मजिस्ट्रेट द्वारा

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