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पॉक्सो एक्ट की धारा 39 | विशेषज्ञ आदि की सहायता लेने के लिए बालक के लिए मार्गनिर्देश | Pocso Act Section- 39 by in hindi | Guidelines for child to take assistance of experts, etc.

Pocso Section- 39

नमस्कार दोस्तों, आज हम पॉक्सो एक्ट की धारा 39 के बारे में सम्पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है पॉक्सो एक्ट (POCSO ACT) की धारा 39? साथ ही हम आपको POCSO ACT की धारा 39 क्या परिभाषित करती है, इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

पॉक्सो एक्ट (POCSO ACT) की धारा 39 का विवरण

पॉक्सो एक्ट की धारा 39 के अंतर्गत विशेष न्यायालय मामलों का विचारण हेतु, यदि विशेषज्ञ आदि की सहायता लेने के लिए बालक के लिए मार्गनिर्देश की आवश्यकता है, तो सहायता ले सकेगा। यह पॉक्सो एक्ट की धारा 39 विशेषज्ञ आदि की सहायता लेने के लिए बालक के लिए मार्गनिर्देश को परिभाषित करता है।

पॉक्सो एक्ट (POCSO ACT) की धारा 39 के अनुसार

विशेषज्ञ आदि की सहायता लेने के लिए बालक के लिए मार्गनिर्देश-

राज्य सरकार, ऐसे नियमों के अधीन रहते हुए जो इस निमित्त बनाए जाएं गैर-सरकारी संगठनों, वृत्तिकों और विशेषज्ञों या ऐसे व्यक्तियों जिनके पास मनोविज्ञान, सामाजिक कार्य, चिकित्सीय स्वास्थ्य, मानसिक स्वास्थ्य और बाल विकास में ज्ञान है, बालक को सहायता करने के लिए पूर्व विचारण और विचारण प्रक्रम पर सहयोजित करने के लिए मार्गनिर्देश तैयार करेगी।

Guidelines for child to take assistance of experts, etc-
Subject to such rules as may be made in this behalf, the State Government shall prepare guidelines for use of non-governmental organisations, professionals and experts or persons having knowledge of psychology, social work, physical health, mental health and child development to be associated with the pre-trial and trial stage to assist the child.

हमारा प्रयास पॉक्सो एक्ट की धारा 39 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप बेझिझक कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।
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पॉक्सो एक्ट की धारा 38 | बालक का साक्ष्य अभिलिखित करते समय किसी दुभाषिया या विशेषज्ञ की सहायता लेना | Pocso Act Section- 38 by in hindi | Assistance of an interpreter or expert while recording evidence of child.

Pocso section-38

नमस्कार दोस्तों, आज हम पॉक्सो एक्ट की धारा 38 के बारे में सम्पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है पॉक्सो एक्ट (POCSO ACT) की धारा 38? साथ ही हम आपको POCSO ACT की धारा 38 क्या परिभाषित करती है, इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

पॉक्सो एक्ट (POCSO ACT) की धारा 38 का विवरण

पॉक्सो एक्ट की धारा 38 के अंतर्गत विशेष न्यायालय मामलों का विचारण करने हेतु बालक के साक्ष्य अभिलिखित करते समय किसी दुभाषिया या विशेषज्ञ की सहायता लेना, यदि अनिवार्य पड़े तो सहायता ले सकेगा। उसे यह पॉक्सो एक्ट की धारा 38 बालक का साक्ष्य अभिलिखित करते समय किसी दुभाषिया या विशेषज्ञ की सहायता लेने को परिभाषित करती है।

पॉक्सो एक्ट (POCSO ACT) की धारा 38 के अनुसार

बालक का साक्ष्य अभिलिखित करते समय किसी दुभाषिया या विशेषज्ञ की सहायता लेना-

(1) जब कभी आवश्यक हो, न्यायालय बालक का साक्ष्य अभिलिखित करते समय किसी ऐसे अनुवादक या दुभाषिए, जो ऐसी अर्हताएं, अनुभव रखता हो और ऐसी फीस के संदाय पर जो विहित की जाए, की सहायता ले सकेगा।
(2) यदि बालक मानसिक या शारीरिक रूप से निःशक्त है तो विशेष न्यायालय, बालक का साक्ष्य अभिलिखित करने के लिए किसी विशेष शिक्षक या बालक से संपर्क की रीति से सुपरिचित कोई व्यक्ति या उस क्षेत्र में किसी विशेषज्ञ, जो ऐसी अर्हताएं, अनुभव रखता हो और ऐसी फीस के संदाय पर जो विहित की जाए, की सहायता ले सकेगा।

Assistance of an interpreter or expert while recording evidence of child-
(1) Wherever necessary, the Court may take the assistance of a translator or interpreter having such qualifications, experience and on payment of such fees as may be prescribed, while recording the evidence of the child.
(2) If a child has a mental or physical disability, the Special Court may take the assistance of a special educator or any person familiar with the manner of communication of the child or an expert in that field, having such qualifications, experience and on payment of such fees as may be prescribed to record the evidence of the child.

हमारा प्रयास पॉक्सो एक्ट की धारा 38 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप बेझिझक कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।
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पॉक्सो एक्ट की धारा 37 | विचारण का बंद कमरे में संचालन | Pocso Act Section- 37 by in hindi | Trials to be conducted in camera.

Pocso section- 37

नमस्कार दोस्तों, आज हम पॉक्सो एक्ट की धारा 37 के बारे में सम्पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है पॉक्सो एक्ट (POCSO ACT) की धारा 37? साथ ही हम आपको POCSO ACT की धारा 37 क्या परिभाषित करती है, इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

पॉक्सो एक्ट (POCSO ACT) की धारा 37 का विवरण

पॉक्सो एक्ट की धारा 37 के अंतर्गत विशेष न्यायालय मामलों का विचारण बंद कमरे में और बालक के माता-पिता या किसी ऐसे अन्य व्यक्ति की उपस्थिति में करेगा, जिसमें बालक का विश्वास या भरोसा है, तो यह पॉक्सो एक्ट की धारा 37 विचारण का बंद कमरे में संचालन करना इस धारा में परिभाषित करती है।

पॉक्सो एक्ट (POCSO ACT) की धारा 37 के अनुसार

विचारण का बंद कमरे में संचालन-

विशेष न्यायालय मामलों का विचारण बंद कमरे में और बालक के माता-पिता या किसी ऐसे अन्य व्यक्ति की उपस्थिति में करेगा, जिसमें बालक का विश्वास या भरोसा है।
परंतु जहां विशेष न्यायालय की यह राय है कि बालक की परीक्षा न्यायालय से भिन्न किसी अन्य स्थान पर किए जाने की आवश्यकता है, वहाँ वह दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 (1974 का 2) की धारा 284 के उपबंधों के अनुसरण में कमीशन निकालने के लिए कार्यवाही करेगा।

Trials to be conducted in camera-
The Special Court shall try cases in camera and in the presence of the parents of the child or any other person in whom the child has trust or confidence:
Provided that where the Special Court is of the opinion that the child needs to be examined at a place other than the court, it shall proceed to issue a commission in accordance with the provisions of Section 284 of the Code of Criminal Procedure, 1973 (2 of 1974).

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पॉक्सो एक्ट की धारा 36 | साक्ष्य देते समय बालक का अभियुक्त को न दिखाना | Pocso Act Section- 36 by in hindi | Child not to see accused at the time of testifying.

नमस्कार दोस्तों, आज हम पॉक्सो एक्ट की धारा 36 के बारे में सम्पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है पॉक्सो एक्ट (POCSO ACT) की धारा 36? साथ ही हम आपको POCSO ACT की धारा 36 क्या परिभाषित करती है, इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

पॉक्सो एक्ट (POCSO ACT) की धारा 36 का विवरण

पॉक्सो एक्ट की धारा 36 के अंतर्गत विशेष न्यायालय यह सुनिश्चित करेगा कि बालक किसी भी प्रकार से साक्ष्य के अभिलिखित करते समय अभियुक्त के सामने अभिदर्शित नहीं किया गया है, जब कि उसी समय यह सुनिश्चित करेगा कि अभियुक्त उस बालक का कथन सुनने और अपने अधिवक्ता के संपर्क में है, तो यह पॉक्सो एक्ट की धारा 36 साक्ष्य देते समय बालक का अभियुक्त को न दिखाना, प्रक्रिया को परिभाषित करती है।

पॉक्सो एक्ट (POCSO ACT) की धारा 36 के अनुसार

साक्ष्य देते समय बालक का अभियुक्त को न दिखाना-

(1) विशेष न्यायालय यह सुनिश्चित करेगा कि बालक किसी भी प्रकार से साक्ष्य के अभिलिखित करते समय अभियुक्त के सामने अभिदर्शित नहीं किया गया है, जब कि उसी समय यह सुनिश्चित करेगा कि अभियुक्त उस बालक का कथन सुनने और अपने अधिवक्ता के संपर्क में है।
(2) उपधारा (1) के प्रयोजनों के लिए विशेष न्यायालय बालक का कथन वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से या एकल दृश्य दर्पण या पर्दा या ऐसी ही अन्य युक्ति का उपयोग करके अभिलिखित कर सकेगा।

Child not to see accused at the time of testifying-
(1) The Special Court shall ensure that the child is not exposed in any way to the accused at the time of recording of the evidence, while at the same time ensuring that the accused is in a position to hear the statement of the child and communicate with his advocate.
(2) For the purposes of sub-section (1), the Special Court may record the statement of a child through video conferencing or by utilising single visibility mirrors or curtains or any other device.

हमारा प्रयास पॉक्सो एक्ट की धारा 36 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप बेझिझक कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।
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पॉक्सो एक्ट की धारा 35 | बालक के साक्ष्य को अभिलिखित और मामले का निपटारा करने के लिए अवधि | Pocso Act Section- 35 by in hindi | Period for recording of evidence of child and disposal of case.

POCSO Section-35

नमस्कार दोस्तों, आज हम पॉक्सो एक्ट की धारा 35 के बारे में सम्पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है पॉक्सो एक्ट (POCSO ACT) की धारा 35? साथ ही हम आपको POCSO ACT की धारा 35 क्या परिभाषित करती है, इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

पॉक्सो एक्ट (POCSO ACT) की धारा 35 का विवरण

पॉक्सो एक्ट की धारा 35 के अंतर्गत बालक के साक्ष्य को विशेष न्यायालय द्वारा अपराध का संज्ञान लिए जाने के तीस दिन के भीतर अभिलिखित किया जाएगा और विलंब के लिए कारण, यदि कोई हो, विशेष न्यायालय द्वारा कारण अभिलिखित किए जाएंगे साथ ही यथासंभव अपराध का संज्ञान लिए जाने की तारीख से एक वर्ष को अवधि के भीतर विचारण को पूरा करेगा। तो यह पॉक्सो एक्ट की धारा 35 बालक के साक्ष्य को अभिलिखित और मामले का निपटारा करने के लिए अवधि को बतलाती है।

पॉक्सो एक्ट (POCSO ACT) की धारा 35 के अनुसार

बालक के साक्ष्य को अभिलिखित और मामले का निपटारा करने के लिए अवधि-

(1) बालक के साक्ष्य को विशेष न्यायालय द्वारा अपराध का संज्ञान लिए जाने के तीस दिन के भीतर अभिलिखित किया जाएगा और विलंब के लिए कारण, यदि कोई हो, विशेष न्यायालय द्वारा कारण अभिलिखित किए जाएंगे।
(2) विशेष न्यायालय यथासंभव अपराध का संज्ञान लिए जाने की तारीख से एक वर्ष को अवधि के भीतर विचारण को पूरा करेगा।

Period for recording of evidence of child and disposal of case-
(1) The evidence of the child shall be recorded within a period of thirty days of the Special Court taking cognizance of the offence and reasons for delay, if any, shall be recorded by the Special Court.
(2) The Special Court shall complete the trial, as far as possible, within a period of one year from the date of taking cognizance of the offence.

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पॉक्सो एक्ट की धारा 34 | बालक द्वारा अपराध किए जाने और विशेष न्यायालय द्वारा आयु का अवधारण करने के मामले में प्रक्रिया | Pocso Act Section- 34 by in hindi | Procedure in case of commission of offence by child and determination of age by Special Court.

POCSO Section-34

नमस्कार दोस्तों, आज हम पॉक्सो एक्ट की धारा 34 के बारे में सम्पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है पॉक्सो एक्ट (POCSO ACT) की धारा 34? साथ ही हम आपको POCSO ACT की धारा 34 क्या परिभाषित करती है, इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

पॉक्सो एक्ट (POCSO ACT) की धारा 34 का विवरण

पॉक्सो एक्ट की धारा 34 के अंतर्गत जो कोई अपराध, किसी बालक द्वारा किया जाता है वहां ऐसे बालक पर, विशेष न्यायालय द्वारा आयु का अवधारण करने के मामले में प्रक्रिया यह पॉक्सो एक्ट की धारा 34 आयु का अवधारण/गणना करने की प्रकिया को परिभाषित करती है।

पॉक्सो एक्ट (POCSO ACT) की धारा 34 के अनुसार

बालक द्वारा अपराध किए जाने और विशेष न्यायालय द्वारा आयु का अवधारण करने के मामले में प्रक्रिया-

(1) जहां इस अधिनियम के अधीन कोई अपराध, किसी बालक द्वारा किया जाता है वहां ऐसे बालक पर [किशोर न्याय (बालकों की देखरेख और संरक्षण) अधिनियम, 2015 (2016 का 2)] के उपबंधों के अधीन कार्रवाई की जाएगी।
(2) यदि विशेष न्यायालय के समक्ष किसी कार्यवाही में इस संबंध में कोई प्रश्न उठता है कि कोई व्यक्ति बालक है या नहीं तो ऐसे प्रश्न का अवधारण विशेष न्यायालय द्वारा ऐसे व्यक्ति की आयु के बारे में स्वयं का समाधान करने के पश्चात् किया जाएगा और वह ऐसे अवधारण के लिए उसके कारणों को लेखबद्ध करेगा।
(3) विशेष न्यायालय द्वारा किया गया कोई आदेश केवल पश्चात्वर्ती इस सबूत के कारण अविधिमान्य नहीं समझा जाएगा कि उपधारा (2) के अधीन उसके द्वारा यथाअवधारित किसी व्यक्ति की आयु उस व्यक्ति की सही आयु नहीं थी।

Procedure in case of commission of offence by child and determination of age by Special Court-
(1) Where any offence under this Act is committed by a child, such child shall be dealt with under the provisions of [the Juvenile Justice (Care and Protection of Children) Act, 2015 (2 of 2016)].
(2) If any question arises in any proceeding before the Special Court whether a person is a child or not, such question shall be determined by the Special Court after satisfying itself about the age of such person and it shall record in writing its reasons for such determination.
(3) No order made by the Special Court shall be deemed to be invalid merely by any subsequent proof that the age of a person as determined by it under sub section (2) was not the correcta age of that person.

हमारा प्रयास पॉक्सो एक्ट की धारा 34 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप बेझिझक कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।
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