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आईपीसी की धारा 89 | संरक्षक द्वारा या उसकी सहमति से शिशु या उन्मत व्यक्ति के फायदे के लिए सद्भावपूर्वक किया गया कार्य| IPC Section- 89 in hindi| Act done in good faith for benefit of child or insane person, by or by consent of guardian.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए भारतीय दंड संहिता की धारा 89 के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है भारतीय दंड संहिता की धारा 89 साथ ही हम आपको IPC की धारा 89 सम्पूर्ण जानकारी एवम् परिभाषा इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

धारा 89 का विवरण

भारतीय दण्ड संहिता (IPC) में धारा 89 के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। यह धारा उन मामलो को परिभाषित करती है, जैसा हम सभी ने देखा कि कभी-कभी डॉक्टर्स द्वारा किसी मरीज की इलाज करते समय मरीज की मृत्यु भी हो जाती है, तो उन मामलों में क्या हम डॉक्टर का अपराधी कहेंगे नही, यह धारा उन शिशु या चित्तविकृति वाले व्यक्ति की यदि किसी डॉक्टर्स द्वारा ऑपरेशन में मृत्यु कारित हो जाती है, तो वह अपराधी नहीं होगा। यह धारा इसी तरह  से ऐसे मामलो को परिभाषित करती है, भारतीय दण्ड संहिता की धारा 89 इसी विषय के बारे में बतलाती है।

आईपीसी की धारा 89 के अनुसार-

संरक्षक द्वारा या उसकी सम्मति से शिशु या उन्मत्त व्यक्ति के फायदे के लिए सद्भावपूर्वक किया गया कार्य-

कोई बात, जो बारह वर्ष से कम आयु के या विकृतचित व्यक्ति के फायदे के लिए सद्भावपूर्वक उसके संरक्षक के, या विधिपूर्ण भारसाधक किसी दूसरे व्यक्ति के द्वारा, या की अभिव्यक्त या विवक्षित सम्मति से की जाए, किसी ऐसी अपहानि के कारण, अपराध नहीं है जो उस बात से उस व्यक्ति को कारित हो, या कारित करने का कर्त्ता का आशय हो या कारित होने की सम्भाव्यता कर्त्ता को ज्ञात हो :
अपवाद
पहला- इस अपवाद का विस्तार साशय मृत्यु कारित करने या मृत्यु कारित करने का प्रयत्न करने पर न होगा।
दूसरा-इस अपवाद का विस्तार मृत्यु या घोर उपहति के निवारण के या किसी घोर रोग या अंग शैथिल्य से मुक्त करने के प्रयोजन से भिन्न किसी प्रयोजन के लिए किसी ऐसी बात के करने पर न होगा जिसे करने वाला व्यक्ति जानता हो कि उससे मृत्यु कारित होना सम्भाव्य है;
तीसरा- इस अपवाद का विस्तार स्वेच्छया घोर उपहति कारित करने, या घोर उपहति कारित करने का प्रयत्न करने पर न होगा जब तक कि वह मृत्यु या घोर उपहति के निवारण के या किसी घोर रोग या अंग शैथिल्य से मुक्त करने के प्रयोजन से न की गई हो;
चौथा- इस अपवाद का विस्तार किसी ऐसे अपराध के दुष्प्रेरण पर न होगा जिस अपराध के किए जाने पर इसका विस्तार नहीं है।

Act done in good faith for benefit of child or insane person, by or by consent of guardian-
Nothing which is done in good faith for the benefit of a person under twelve years of age, or of unsound mind, by or by consent, either express or implied, of the guardian or other person having lawful charge of that person, is an offence by reason of any harm which it may cause, or be intended by the doer to cause or be known by the doer to be likely to cause to that person :
Exception
First.- That this exception shall not extend to the intentional causing of death, or to the attempting to cause death; ;
Secondly.- That this exception shall not extend to the doing of anything which the person doing it knows to be likely to cause death, for any purpose other than the preventing of death or grievous hurt, or the curing of any grievous disease or infirmity: Thirdly- That this exception shall not extend to the voluntary causing of grievous hurt, or to the attempting to cause grievous hurt, unless it be for the purpose of preventing death or grievous hurt, or the curing of any grievous disease or infirmity;
Fourthly- That this exception shall not extend to the abetment of any offence, to the committing of which offence it would not extend.

दृष्टान्त
क सद्भावपूर्वक, अपने शिशु के फायदे के लिए अपने शिशु की सम्मति के बिना, यह सम्भाव्य जानते हुए कि शस्त्रकर्म से उस शिशु की मृत्यु कारित होगी, न कि इस आशय से कि उस शिशु को मृत्यु कारित कर दें शल्य चिकित्सक द्वारा पथरी निकलवाने के लिए अपने शिशु की शल्य क्रिया करवाता है। क का उद्देश्य शिशु को रोगमुक्त कराना था, इसलिए वह इस अपवाद के अन्तर्गत आता है।

हमारा प्रयास आईपीसी की धारा 89 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके पास कोई सवाल हो,तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

आईपीसी की धारा 148 | घातक आयुध से सज्जित होकर बल्वा करना | IPC Section- 148 in hindi| Rioting, armed with deadly weapon.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए भारतीय दंड संहिता की धारा 148 के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है भारतीय दंड संहिता की धारा 148 साथ ही हम आपको IPC की धारा 148 सम्पूर्ण जानकारी एवम् इस अपराध में क्या दंड मिलेगा इत्यादि जानकारी इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

धारा 148 का विवरण

भारतीय दण्ड संहिता (IPC) में आज हम बात करेंगे धारा 148 के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। जब कोई व्यक्ति किसी गैरकानूनी समूह या किसी विधिविरुद्ध जमाव में बल और हिंसा फैलाने के उद्देश्य से घातक हथियारों के साथ शामिल होकर दंगा करता है तो वह व्यक्ति भारतीय दण्ड संहिता की धारा 148 के अंतर्गत अपराधी होगा।

आईपीसी की धारा 148 के अनुसार-

घातक आयुध से सज्जित होकर बल्वा करना-

जो कोई घातक आयुध से, या किसी ऐसी चीज से, जिससे आक्रामक आयुध के रूप में उपयोग किए जाने पर मृत्यु कारित होनी सम्भाव्य हो, सज्जित होते हुए बल्वा करने का दोषी होगा, वह दोनों में से किसी भाँति के कारावास से, जिसकी अवधि तीन वर्ष तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, या दोनों से दण्डित किया जाएगा।

Rioting, armed with deadly weapon-
Whoever is guilty of rioting, be armed with a deadly weapon or with anything which, used as a weapon of offences likely to cause death, shall be punished with imprisonment of either description for term which may extend to three years, or with fine, or with both.

लागू अपराध

घातक आयुध से सज्जित होकर बल्वा करना।
सजा- तीन वर्ष का कारावास या जुर्माना अथवा दोनो।
यह एक जमानती, संज्ञेय अपराध है और प्रथम वर्ग के मजिस्ट्रेट द्वारा विचारणीय है।
यह अपराध समझौते योग्य नही है।

सजा (Punishment) का प्रावधान

जो कोई घातक हथियार सहित अथवा किसी ऐसी अक्रामक वस्तु के साथ, जिससे मृत्यु की संभावना होती हो, दंगा करता है तो वह धारा 148 के अंतर्गत अपराधी होगा। जिसके लिए प्रत्येक व्यक्ति तीन वर्ष के लिए कारावास या जुर्माने से, या दोनों दंडनीय होगा।

जमानत (Bail) का प्रावधान

भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 148 में जिस अपराध की सजा के बारे में बताया गया है उस अपराध को एक जमानती और संज्ञेय अपराध बताया गया है। यह अपराध संज्ञेय अपराध और जमानतीय होने के कारण किसी व्यक्ति द्वारा यह अपराध कारित किया जाता है, तो उसके द्वारा न्यायालय में जमानत याचिका दायर करने पर न्यायालय द्वारा उसकी याचिका पर जमानत दी जानी चाहिए।

अपराधसजाअपराध श्रेणीजमानतविचारणीय
घातक आयुध से सज्जित होकर बल्वा करना।तीन वर्ष का कारावास या जुर्माना अथवा दोनो।संज्ञेयजमानतीयप्रथम वर्ग के मजिस्ट्रेट द्वारा

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आईपीसी की धारा 108A | भारत से बाहर के अपराधों का भारत में दुष्प्रेरण | IPC Section- 108A in hindi| Abetment in India of offences outside India.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए भारतीय दंड संहिता की धारा 108A के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है भारतीय दंड संहिता की धारा 108A साथ ही हम आपको IPC की धारा 108A सम्पूर्ण जानकारी एवम् परिभाषा इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

धारा 108A का विवरण

भारतीय दण्ड संहिता (IPC) में धारा 108A के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। जो व्यक्ति किसी अपराध का दुष्प्रेरण इस संहिता के अर्थ के अन्तर्गत अपराध का दुष्प्रेरण करता है, जो भारत से बाहर और उससे परे किसी ऐसे कार्य के किए जाने का भारत में दुष्प्रेरण करता है, जो अपराध होगा, यदि भारत में किया जाए। तो यह धारा 108A भारत से बाहर के अपराधों का भारत में दुष्प्रेरण को परिभाषित करती है, भारतीय दण्ड संहिता की धारा 108A इसी विषय के बारे में बतलाती है।

आईपीसी की धारा 108A के अनुसार-

भारत से बाहर के अपराधों का भारत में दुष्प्रेरण-

वह व्यक्ति इस संहिता के अर्थ के अन्तर्गत अपराध का दुष्प्रेरण करता है, जो भारत से बाहर और उससे परे किसी ऐसे कार्य के किए जाने का भारत में दुष्प्रेरण करता है, जो अपराध होगा, यदि भारत में किया जाए।
दृष्टान्त
क, भारत में ख को, जो गोवा में विदेशीय है, गोवा में हत्या करने के लिए उकसाता है। क हत्या के दुष्प्रेरण का दोषी है।

Abetment in India of offences outside India-
A person abets an offence within the meaning of this Code who, in India, abets the commission of any act without and beyond India which would constitute an offence if committed in India.
Illustration
A, in India, instigates B, a foreigner in Goa, to commit a murder in Goa. A is guilty of abetting murder.

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आईपीसी धारा-151 क्या है ?(IPC 151 in Hindi)

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए भारतीय दंड संहिता की धारा 151 के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है भारतीय दंड संहिता की धारा 151? साथ ही हम आपको IPC की धारा 151 सम्पूर्ण जानकारी एवम् परिभाषा भी जानेंगे। इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

धारा 151 का विवरण

भारतीय दण्ड संहिता में आज हम आपको बहुत ही महत्वपूर्ण धारा के बारे में बताने जा रहे हैं, जो कि भविष्य में आपके बहुत काम आने वाली है। हम में बहुत लोग यह नहीं जानते हैं कि शांति भंग की आशंका क्या होती है आइए जानते हैं, धारा 151 के संबंध मे पूर्ण जानकारी सजा, अर्थदण्ड और जमानत कैसे मिलती है ।

आईपीसी की धारा 151 के अनुसार –

पांच या अधिक व्यक्ति के जमाव को बिखर जाने का समादेश दिए जाने के पश्चात उसमें जानते हुए सम्मिलित होना या बने रहना-

जो कोई पांच या अधिक व्यक्तियों के किसी जमाव में, जिसमें लोक शांति में विघ्न कारित होना सम्भाव्य हो, ऐसे जमाव को बिखर जाने का समादेश विधिपूर्वक दे दिए जाने पर जानते हुए सम्मिलित होगा या बना रहेगा, वह दोनों मैं से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि छह मास तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, या दोनों से, दंडित किया जाएगा।
स्पष्टीकरण- यदि वह जमाव धारा 141 के अर्थ के अंतर्गत विधिविरुद्ध जमाव हो, तो अपराधी धारा 145 के अधीन दंडनीय होगा।

Knowingly joining or continuing in assembly of five or more persons after it has been commanded to disperse-
Whoever knowingly joins or continues in any assembly of five or more persons likely to cause a disturbance of the public peace, after such assembly has been lawfully commanded to disperse, shall be punished with imprisonment of either description for a term which may extend to six months, or with fine, or with both.
Explanation.-If the assembly is an unlawful assembly within the meaning of Section 141, the offender will be punishable under Section 145.

साधारण भाषा में धारा 151 को समझते है।

धारा-151 को स्पष्ट भाषा मे यह कह सकते है- यदि कोई व्यक्ति किसी समूह मे सम्मलित होता है, जिसमे पांच अथवा पांच से अधिक व्यक्ति मिलकर, समाज की शांति भंग करते है या भंग करते पाये जाते है, तो वह 6 मास कारावास या अर्थदण्ड अथवा दोनो के भागीदार होंगे।
यह अपराध समझौता योग्य नहीं है।

धारा-151 के अन्तर्गत गिरफ्तारी-

इस धारा का मुख्य उद्देश्य उन सभी लोगों को सजा दिलाने का होता है, जो समाज में अशांति फ़ैलाने का कार्य करते  हैं, जब किसी समाज में किसी गैर क़ानूनी जन सभा द्वारा कोई अपराध को अंजाम दिया जाता है, जिसमें सभी अपराधियों का एक जैसा उद्देश्य हो, तो ऐसे अपराधियों को पुलिस के अधिकारी द्वारा प्रथम सूचना दर्ज होने के आधार अथवा किसी अन्य व्यक्ति के व्दारा शिकायत की जाने के पश्चात् अगर व्यक्ति वास्तव में दोषी पाया जाता है तो पुलिस उनको गिरफ्तार कर, उन पर धारा-151 का चालान करके, उनकी गिरफ्तार कर 24 घन्टे के भीतर कोर्ट मे पेश करती है ।

लागू अपराध

पांच या अधिक व्यक्तियो के किसी जमाव को बिखर जाने का समादेश दिए जाने के पश्चात् उसमे जानते हुए सम्मिलित होना या बने रहना।
सजा- छह मास के लिए कारावास या जुर्माना, या दोनो।
यह एक जमानतीय, संज्ञेय अपराध है और किसी भी श्रेणी के मजिस्ट्रेट द्वारा विचारणीय है।

धारा-151 के अन्तर्गत सजा

धारा-151 के अन्तर्गत किया गया अपराध असंज्ञेय अपराध की श्रेणी मे आता है। धारा-151 के अपराध किसी व्यक्ति के व्दारा किये गये कृत के आधार पर कोर्ट अपराधी को 6 मास तक का कारावास अथवा आर्थिक दण्ड उसकी आर्थिक स्थिति को देखकर भी लगा सकती है । 

जमानत (Bail) का प्रावधान

जब कोई गैर क़ानूनी जन सभा किसी समाज के लोगों में अशांति फ़ैलाने की कोशिश करे तब पुलिस ऐसे सभी अपराधियों को जो किसी भी प्रकार से उस गैर क़ानूनी जन सभा में शामिल रहते हैं, तो ऐसे व्यक्तियों को पुलिस न्यायालय में पेश करती है । अपराधी के अपराध को देखते हुये कोर्ट निर्णय लेती है कि व्यक्ति ने किस तरह से अपराध किस रूप मे किया है । उसी के आधार पर न्यायालय जमानत दे देती है ।  यह एक जमानती और संज्ञेय अपराध है और किसी भी न्यायधीश द्वारा विचारणीय है साथ ही यह अपराध समझौता करने योग्य नहीं है।

अपराधसजाअपराध श्रेणीजमानतविचारणीय
पांच या अधिक व्यक्तियो के किसी जमाव को बिखर जाने का समादेश दिए जाने के पश्चात् उसमे जानते हुए सम्मिलित होना या बने रहना।छह मास के लिए कारावास या जुर्माना, या दोनो।संज्ञेयजमानतीयकिसी भी श्रेणी के मजिस्ट्रेट व्दारा

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धन्यवाद

आईपीसी की धारा 119 | किसी ऐसे अपराध के किये जाने की परिकल्पना का लोक सेवक व्दारा छिपाना जाना, जिसका निवारण करना उसका कर्तव्य है | IPC Section- 119 in hindi| Public servant concealing design to commit offence which it is his duty to prevent.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए भारतीय दंड संहिता की धारा 119 के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है भारतीय दंड संहिता की धारा 119? साथ ही हम आपको IPC की धारा 119 सम्पूर्ण जानकारी एवम् क्या सजा मिलेगी और कैसे क्या जमानत मिलेगी। इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

धारा 119 का विवरण

भारतीय दण्ड संहिता (IPC) में धारा 119 के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। जो कोई लोक सेवक (सरकारी नौकर जैसे- पुलिस अधिकारी अथवा कोई सरकारी अफसर), किसी ऐसे अपराध के किये जाने की परिकल्पना को छिपाता है, जबकि उसका कर्तव्य है, उनका निवारण करना, फिर भी छिपाता है, तो भारतीय दंड संहिता की धारा 119 अप्लाई होगी।  भारतीय दण्ड संहिता की धारा 119 इसी विषय के बारे में बतलाती है।

आईपीसी की धारा 119 के अनुसार-

किसी ऐसे अपराध के किए जाने की परिकल्पना का लोक सेवक द्वारा छिपाया जाना, जिसका निवारण करना उसका कर्तव्य है-

जो कोई लोक सेवक होते हुए उस अपराध का किया जाना, जिसका निवारण करना ऐसे लोक सेवक के नाते उसका कर्तव्य है, सुकर बनाने के आशय से या सम्भाव्यतः तद्वारा सुकर बनाएगा यह जानते हुए,
ऐसे अपराध के किए जाने की [परिकल्पना के अस्तित्व को किसी कार्य या अवैध लोप द्वारा या इमक्रिप्शन या उपकरण छिपाने की किसी अन्य सूचना के प्रयोग द्वारा स्वेच्छया छिपाएगा] या ऐसी परिकल्पना के बारे में ऐसा व्यपदेशन करेगा जिसका मिथ्या होना वह जानता है,
यदि अपराध कर दिया जाए- यदि ऐसा अपराध कर दिया जाए, तो वह उस अपराध के लिए उपबन्धित किसी भांति के कारावास से जिसकी अवधि ऐसे कारावास की दीर्घतम अवधि से आधी तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, जो उस अपराध के लिए उपबन्धित है, या दोनों से;
यदि अपराध मृत्यु, आदि से दण्डनीय है- अथवा यदि वह अपराध मृत्यु या आजीवन कारावास से दण्डनीय हो; तो वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि दस वर्ष तक की हो सकेगी;
यदि अपराध नहीं किया जाए- अथवा यदि वह अपराध नहीं किया जाए, तो वह उस अपराध के लिए उपबन्धित किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि ऐसे कारावास की दीर्घतम अवधि की एक चौथाई तक की हो सकेगी या ऐसे जुर्माने से, जो उस अपराध के लिए उपबन्धित है, या दोनों से, दण्डित किया जाएगा।
दृष्टांत
क, एक पुलिस आफिसर, लूट किए जाने से सम्बन्धित सब परिकल्पनाओं की, जो उसको ज्ञात हो जाए, इतिला देने के लिए वैध रूप से आबद्ध होते हुए और यह जानते हुए कि ख लूट करने की परिकल्पना बना रहा है, अपराध के किए जाने को सुकर बनाने के आशय से ऐसी इत्तिला देने का लोप करता है। यहाँ क ने ख की परिकल्पना के अस्तित्व को एक अवैध लोप द्वारा छिपाया है, और वह इस धारा के उपबन्ध के अनुसार दण्डनीय है।

Public servant concealing design to commit offence which it is his duty to prevent-
Whoever, being a public servant, intending to facilitate or knowing it to be likely that he will thereby facilitate the commission of an offence which it is his duty as such public servant to prevent;
[voluntarily conceals by any act or omission or by the use of encryption or any other information hiding tool, the existence of a design] to commit such offence, or makes any representation which he knows to be false respecting such design;
If offence be committed.- shall, if the offence be committed, be punished with imprisonment of any description provided for the offence, for a term which may extend to one-half of the longest term of such imprisonment, or with such fine as is provided for that offence, or with both;
If offence be punishable with death, etc.- or, if the offence be punishable with death or imprisonment for life, with imprisonment of either description for a term which may extend to ten years;
If offence be not committed.- or, if the offence be not committed, shall be punished with imprisonment of any description provided for the offence, for a term which may extend to one-fourth part of the longest term of such imprisonment or with such fine as is provided for the offence, or with both.
Illustration
A, an officer of police, being legally bound to give information of all designs to commit robbery which may come to his knowledge, and knowing that B designs to commit robbery. omits to give such information, with intent to facilitate the commission of that offence. Here A has by an illegal omission concealed the existence of B’s design, and is liable to punishment according to the provision of this section.

लागू अपराध

किसी ऐसे अपराध के किये जाने की परिकल्पना का लोक सेवक व्दारा छिपाना जाना, जिसका निवारण करना उसका कर्तव्य है, यदि अपराध कर दिया जाता है।
सजा- उस दीर्घतम् अवधि के आधे भाग तक का कारावास जो उस अपराध के लिये उपबन्धित है, या जुर्माना अथवा दोनो।
यदि अपराध मृत्यु या आजीवन कारावास से दण्डनीय है।
सजा- दस वर्ष के लिए कारावास।
यदि अपराध नही किया गया है।
सजा- उस दीर्घतम् अवधि के एक चौथाई भाग तक का कारावास जो उस अपराध के लिये उपबन्धित है, या जुर्माना अथवा दोनो।
जो दुष्प्रेरित अपराध के अनुसार ही संज्ञेय, गैर-संज्ञेय अपराध की श्रेणी में आएगा। साथ ही यदि लोकसेवक व्दारा अपराध की परिकल्पना को छिपाता है, जबकि अपराध कर दिया जाता है, तो अपराध के अनुसार ही जमानतीय एवंम् गैर-जमानतीय अपराध, की श्रेणी  मे आयेगा और यदि अपराध मृत्यु या आजीवन कारावास से दंडनीय है तो वह गैर-जमानतीय अपराध की श्रेणी मे आयेगा और यदि अपराध नही किया जाता है तो जमानतीय अपराध श्रेणी मे आयेगा।
उस न्यायालय द्वारा जिसके द्वारा दुष्प्रेरित अपराध विचारणीय है।
यह अपराध समझौता योग्य नही है।

सजा (Punishment) का प्रावधान

भारतीय दंड संहिता की धारा 119 के अंतर्गत जो लोक सेवक व्दारा किसी अपराध को छिपाता है, जबकि निवारण करना उसका कर्तव्य है, फिर भी छिपाता है और यदि अपराध कर दिया जाता है तो उस दीर्घतम् अवधि के आधे भाग तक का कारावास जो उस अपराध के लिये उपबन्धित है, या जुर्माना अथवा दोनो। इसी तरह से यदि अपराध मृत्यु या आजीवन कारावास से दंडनीय है तो दस वर्ष के लिए कारावास और यदि वास्तव मे अपराध नही किया गया है तो उस दीर्घतम् अवधि के एक चौथाई भाग तक का कारावास जो उस अपराध के लिये उपबन्धित है, या जुर्माना अथवा दोनो से, दण्डित किया जायेगा।

जमानत (Bail) का प्रावधान

जब कोई लोक सेवक किसी ऐसे अपराध के किये जाने की परिकल्पना को छिपाता है, जबकि निवारण करना उसका कर्तव्य है, छिपाता है तो वह अपराधी व्यक्ति द्वारा किए गए अपराध के अनुसार ही मामले में पुलिस द्वारा FIR दर्ज करती है अथवा करानी पडेगी। यदि अपराधी व्यक्ति द्वारा अपराध कर दिया जाता है तो वह अपराध के अनुसार ही जमानतीय अथवा गैर-जमानतीय अपराध कारित हुआ है, उसी के अनुरूप ही जमानत मिलेगी। इसी तरह से यदि अपराध मृत्यु या आजीवन कारावास से दंडनीय है तो ऐसे अपराधो मे जो कोई लोक सेवक छिपायेगा वह गैर-जमानती अपराध की श्रेणी मे आने के कारण जमानत आसानी से नही मिल सकेगी। इसी तरह से यदि अपराध नही कारित हुआ है तो वह जमानतीय अपराध की श्रेणी मे आयेगा, जिसमे आसानी से अच्छे वकील की मदद् से जमानत मिल सकेगी।

अपराधसजाअपराध श्रेणीजमानतविचारणीय
किसी ऐसे अपराध के किये जाने की परिकल्पना का लोक सेवक व्दारा छिपाना जाना, जिसका निवारण करना उसका कर्तव्य है, यदि अपराध कर दिया जाता है।उस दीर्घतम् अवधि के आधे भाग तक का कारावास जो उस अपराध के लिये उपबन्धित है, या जुर्माना अथवा दोनो।अपराधनुसारअपराधनुसारउस न्यायालय द्वारा जिसके द्वारा दुष्प्रेरित अपराध विचारणीय है।
यदि अपराध मृत्यु या आजीवन कारावास से दण्डनीय है।दस वर्ष के लिए कारावास।अपराधनुसारअपराधनुसारउस न्यायालय द्वारा जिसके द्वारा दुष्प्रेरित अपराध विचारणीय है।
यदि अपराध नही किया गया है।उस दीर्घतम् अवधि के एक चौथाई भाग तक का कारावास जो उस अपराध के लिये उपबन्धित है, या जुर्माना अथवा दोनो।अपराधनुसारअपराधनुसारउस न्यायालय द्वारा जिसके द्वारा दुष्प्रेरित अपराध विचारणीय है।

हमारा प्रयास आईपीसी की धारा 119 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके पास कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

आईपीसी की धारा 118 | मृत्यु या आजीवन कारावास से दंडनीय अपराध करने की परिकल्पना को छिपाना | IPC Section- 118 in hindi| Concealing design to commit offence punishable with death or imprisonment for life.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए भारतीय दंड संहिता की धारा 118 के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है भारतीय दंड संहिता की धारा 118? साथ ही हम आपको IPC की धारा 118 सम्पूर्ण जानकारी एवम् क्या सजा मिलेगी और कैसे क्या जमानत मिलेगी। इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

धारा 118 का विवरण

भारतीय दण्ड संहिता (IPC) में धारा 118 के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। जो कोई मृत्यु या आजीवन कारावास से दंडनीय अपराध करने की परिकल्पना को छिपाता है, यदि अपराध कर दिया जाता है अथवा अपराध नही किया जाता है, तो भारतीय दंड संहिता की धारा 118 अप्लाई होगी।  भारतीय दण्ड संहिता की धारा 118 इसी विषय के बारे में बतलाती है।

आईपीसी की धारा 118 के अनुसार-

मृत्यु या आजीवन कारावास से दण्डनीय अपराध करने की परिकल्पना को छिपाना–

जो कोई मृत्यु या आजीवन कारावास से दण्डनीय अपराध का किया जाना सुकर बनाने के आशय से या सम्भाव्यतः तद्द्वारा सुकर बनाएगा यह जानते हुए, ऐसे अपराध के किए जाने की [परिकल्पना के अस्तित्व को किसी कार्य या अवैध लोप द्वारा या इमक्रिप्शन या उपकरण छिपाने की किसी अन्य सूचना के प्रयोग द्वारा स्वेच्छया छिपाएगा] या ऐसी परिकल्पना के बारे में ऐसा व्यपदेशन करेगा जिसका मिथ्या होना वह जानता है;
यदि अपराध कर दिया जाए- यदि अपराध नहीं किया जाए- यदि ऐसा अपराध कर दिया जाए, तो वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि सात वर्ष तक की हो सकेगी, अथवा यदि अपराध न किया जाए, तो वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि तीन वर्ष तक की हो सकेगी, दण्डित किया जाएगा और दोनों दशाओं में से हर एक में जुर्माने से भी दण्डनीय होगा।
दृष्टांत
क यह जानते हुए कि ख स्थान पर डकैती पड़ने वाली है, मजिस्ट्रेट को यह मिथ्या इत्तिला देता है कि डकैती ग स्थान पर, जो विपरीत दिशा में है, पड़ने वाली है और इस आशय से कि एतद्वारा उस अपराध का किया जाना सुकर बनाए, मजिस्ट्रेट को भुलावा देता है। डकैती परिकल्पना के अनुसरण में स्थान पर पड़ती है। क इस धारा के अधीन दण्डनीय है।

Concealing design to commit offence punishable with death or imprisonment for life-
Whoever intending to facilitate or knowing it to be likely that he will thereby facilitate the commission of an offence punishable with death or imprisonment for life; [voluntarily conceals by any act or omission or by the use of encryption or any other information hiding tool, the existence of a design]to commit such offence or makes any representation which he knows to be false respecting such design,
If offence be committed-if offence be not committed.-shall, if that offence be committed, be punished with imprisonment of either description for a term which may extend to seven years, or, if the offence be not committed, with imprisonment of either description, for a term which may extend to three years; and in either case shall also be liable to fine.
Illustration
A, knowing that a dacoity is about to be committed at B, falsely informs the Magistrate that a dacoity is about to be committed at C, a place in an opposite direction, and thereby misleads the Magistrate with intent to facilitate the commission of the offence. The dacoity is committed at B in pursuance of the design. A is punishable under this section.

लागू अपराध

मृत्यु या आजीवन कारावास से दण्डनीय अपराध करने की परिकल्पना को छिपाना, यदि अपराध कर दिया जाता है।
सजा- सात वर्ष के लिए कारावास और जुर्माना अथवा दोनो।
मृत्यु या आजीवन कारावास से दण्डनीय अपराध करने की परिकल्पना को छिपाना, यदि  अपराध नही किया जाता है।
सजा- तीन वर्ष के लिए कारावास या जुर्माना अथवा दोनो।
जो दुष्प्रेरित अपराध के अनुसार ही संज्ञेय, गैर-संज्ञेय अपराध की श्रेणी में आएगा एवम यदि गम्भीर अपराध का दुष्प्रेरण किया गया है वहां गैर-जमानतीय और यदि अपराध गम्भीर अपराध का दुष्प्रेरण नही किया गया है वहां जमानतीय श्रेणी मे आयेगा।
उस न्यायालय द्वारा जिसके द्वारा दुष्प्रेरित अपराध विचारणीय है।
यह अपराध समझौता योग्य नही है।

सजा (Punishment) का प्रावधान

भारतीय दंड संहिता की धारा 118 के अंतर्गत जो कोई मृत्यु या आजीवन कारावास से दंडनीय अपराध करने की परिकल्पना को छिपाता है, यदि अपराध वास्तव मे हुआ है तो वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि सात वर्ष तक को हो सकेगी, या जुर्माने से या दोनों से, दण्डित किया जायेगा इसी तरह से यदि अपराध वास्तव मे नही हुआ है, तो वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि तीन वर्ष तक को हो सकेगी, या जुर्माने से या दोनों से, दण्डित किया जायेगा

जमानत (Bail) का प्रावधान

जब कोई मृत्यु या आजीवन कारावास से दंडनीय अपराध करने की परिकल्पना को छिपाता है, साथ ही अपराध वास्तव मे हुआ है अथवा अपराध नही हुआ है, तो वह अपराधी व्यक्ति द्वारा किए गए अपराध के अनुसार ही मामले में पुलिस द्वारा FIR दर्ज करती है यदि अपराधी व्यक्ति द्वारा गम्भीर अपराध का दुष्प्रेरण कारित हुआ है तो वह अपराध गैर-जमानतीय होने के कारण जमानत आसानी से नही मिल सकेगी। इसी तरह से यदि अपराध का दुष्प्रेरण नही कारित हुआ है तो वह जमानतीय अपराध की श्रेणी मे आयेगा, जिसमे आसानी से अच्छे वकील की मदद् से जमानत मिल सकेगी।

अपराधसजाअपराध श्रेणीजमानतविचारणीय
मृत्यु या आजीवन कारावास से दण्डनीय अपराध करने की परिकल्पना को छिपाना, यदि अपराध कर दिया जाता है।सात वर्ष के लिए कारावास और जुर्माना अथवा दोनो।अपराधनुसारअपराधनुसारउस न्यायालय द्वारा जिसके द्वारा दुष्प्रेरित अपराध विचारणीय है।
मृत्यु या आजीवन कारावास से दण्डनीय अपराध करने की परिकल्पना को छिपाना, यदि अपराध नही किया जाता है।तीन वर्ष के लिए कारावास या जुर्माना अथवा दोनो।अपराधनुसारअपराधनुसारउस न्यायालय द्वारा जिसके द्वारा दुष्प्रेरित अपराध विचारणीय है।

हमारा प्रयास आईपीसी की धारा 118 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके पास कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।