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आईपीसी की धारा 128 | लोक सेवक का स्वेच्छया राजकैदी या युद्ध कैदी को निकल भागने देना | IPC Section- 128 in hindi| Public servant voluntarily allowing prisoner of State or of war to escape.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए भारतीय दंड संहिता की धारा 128 के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है भारतीय दंड संहिता की धारा 128? साथ ही हम आपको IPC की धारा 128 सम्पूर्ण जानकारी एवम् क्या सजा मिलेगी और कैसे क्या जमानत मिलेगी। इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

धारा 128 का विवरण

भारतीय दण्ड संहिता (IPC) में धारा 128 के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। जो कोई लोक सेवक होते हुए, किसी राजकैदी या युद्ध कैदी की अभिरक्षा में रखते हुए, अपनी इच्छा से कैदी को आजाद करता है, तो भारतीय दंड संहिता की धारा 128 अप्लाई होगी। भारतीय दण्ड संहिता की धारा 128 इसी विषय के बारे में बतलाती है।

आईपीसी की धारा 128 के अनुसार-

लोक सेवक का स्वेच्छया राजकैदी या युद्ध कैदी को निकल भागने देना-

जो कोई लोक सेवक होते हुए और किसी राजकैदी या युद्ध कैदी की अभिरक्षा में रखते हुए, स्वेच्छया ऐसे कैदी को किय ऐसे स्थान से जिसमें ऐसा कैदी परिरुद्ध है, निकल भागने देगा, वह आजीवन कारावास से या दोनों में से किसी भाँति के कारावास से, जिसकी अवधि दस वर्ष तक की हो सकेगी, दण्डित किया जाएगा और जुर्माने से भी, दण्डनीय होगा।

Public servant voluntarily allowing prisoner of State or of war to escape-
Whoever, being a public servant and having the custody of any State prisoner or prisoner of war, voluntarily allows such prisoner to escape from any place in which such prisoner is confined, shall be punished with imprisonment for life, or imprisonment of either description for a term which may extend to ten years, and shall also be liable to fine.

लागू अपराध

लोक सेवक का स्वेच्छया राजकैदी या युद्ध कैदी को निकल भागने देना।
सजा- आजीवन कारावास या दस वर्ष के लिए कारावास और जुर्माना।
यह एक गैर-जमानतीय, संज्ञेय अपराध है और सेशन न्यायालय द्वारा विचारणीय है।
यह अपराध समझौता योग्य नही है।

सजा (Punishment) का प्रावधान

भारतीय दंड संहिता की धारा 128 के अंतर्गत जो कोई लोक सेवक होते हुए, स्वेच्छया से राज्यकैदी या युद्ध कैदी को अभिरक्षा से निकल भागने देगा। वह आजीवन कारावास से या दोनों में से किसी भाँति के कारावास से, जिसकी अवधि दस वर्ष तक की हो सकेगी, दण्डित किया जाएगा और जुर्माने से भी, दण्डनीय होगा।

जमानत (Bail) का प्रावधान

जो कोई व्यक्ति लोक सेवक होते हुए भी स्वेच्छया राज्यकैदी या युद्ध कैदी को अभिरक्षा से निकल भागने देगा, तो वह व्यक्ति राज्यद्रोह के अपराध का भागीदार होगा।  ऐसे अपराध कारित करने वाले व्यक्ति राज्यद्रोह व लोक सेवक से भी निष्कासित कर दिया जाता है साथ ही  अपराधी व्यक्ति द्वारा किए गए अपराध के अनुसार ही मामले में पुलिस द्वारा FIR दर्ज करती है यह अपराध गैर-जमानतीय होने के कारण जमानत आसानी से नही मिल सकेगी।

अपराधसजाअपराध श्रेणीजमानतविचारणीय
लोक सेवक का स्वेच्छया राजकैदी या युद्ध कैदी को निकल भागने देना।आजीवन कारावास या दस वर्ष के लिए कारावास और जुर्माना।संज्ञेयगैर-जमानतीयसेशन न्यायालय द्वारा

हमारा प्रयास आईपीसी की धारा 128 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आप के पास कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

आईपीसी की धारा 127 | धारा 125 और 126 में वर्णित युद्ध या लूटपाट द्वारा ली गयी सम्पत्ति प्राप्त करना | IPC Section- 127 in hindi| Receiving property taken by war or depredation mentioned in Sections 125 and 126.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए भारतीय दंड संहिता की धारा 127 के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है भारतीय दंड संहिता की धारा 127? साथ ही हम आपको IPC की धारा 127 सम्पूर्ण जानकारी एवम् क्या सजा मिलेगी और कैसे क्या जमानत मिलेगी। इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

धारा 127 का विवरण

भारतीय दण्ड संहिता (IPC) में धारा 127 के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। जो कोई किसी सम्पत्ति को यह जानते हुए प्राप्त करेगा कि वह धारा 125 और 126 में वर्णित अपराधों में से किसी के किए जाने में ली गई है तो भारतीय दंड संहिता की धारा 127अप्लाई होगी। भारतीय दण्ड संहिता की धारा 127 इसी विषय के बारे में बतलाती है।

आईपीसी की धारा 127 के अनुसार-

धारा 125 और 126 में वर्णित युद्ध या लूटपाट द्वारा ली गयी सम्पत्ति प्राप्त करना-

जो कोई किसी सम्पत्ति को यह जानते हुए प्राप्त करेगा कि वह धारा 125 और 126 में वर्णित अपराधों में से किसी के किए जाने में ली गई है, वह दोनों में से किसी भाँति के कारावास से, जिसकी अवधि सात वर्ष तक की हो सकेगी, दण्डित किया जाएगा और वह जुर्माने से और इस प्रकार प्राप्त की गई सम्पत्ति के समपहरण से भी दण्डनीय होगा।

Receiving property taken by war or depredation mentioned in Sections 125 and 126-
Whoever receives any property knowing the same to have been taken in the commission of any of the offence mentioned in Sections 125 and 126, shall be punished with imprisonment of either description for a term which may extend to seven years, and shall also be liable to fine and to forfeiture of the property so received.

लागू अपराध

धारा 125 और 126 मे वर्णित युद्ध या लूटपाट व्दारा ली गई सम्पत्ति प्राप्त करना।
सजा- सात वर्ष के लिए कारावास और जुर्माना और कुछ संपत्ति का समपहरण।
यह एक गैर-जमानती, संज्ञेय अपराध है और सेशन न्यायालय द्वारा विचारणीय है।
यह अपराध समझौता योग्य नही है।

सजा (Punishment) का प्रावधान

भारतीय दंड संहिता की धारा 127 के अंतर्गत जो कोई किसी सम्पत्ति को यह जानते हुए प्राप्त करेगा कि वह धारा 125 और 126 में वर्णित अपराधों में से किसी के किए जाने में ली गई है, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि सात वर्ष तक को हो सकेगी, और जुर्माने से और अर्जित संपत्ति के समपहरण से भी दंडित किया जायेगा।

जमानत (Bail) का प्रावधान

जो कोई व्यक्ति जो कोई किसी सम्पत्ति को यह जानते हुए प्राप्त करेगा कि वह धारा 125 और 126 में वर्णित अपराधों में से किसी के किए जाने में ली गई है तो वह अपराधी व्यक्ति द्वारा किए गए अपराध के अनुसार ही मामले में पुलिस द्वारा FIR दर्ज करती है यह अपराध गैर-जमानतीय होने के कारण जमानत आसानी से नही मिल सकेगी, साथ ही आपकी अर्जित संपत्ति भी जब्त की जा सकेगी।

अपराधसजाअपराध श्रेणीजमानतविचारणीय
धारा 125 और 126 मे वर्णित युद्ध या लूटपाट व्दारा ली गई सम्पत्ति प्राप्त करना।सात वर्ष के लिए कारावास और जुर्माना और कुछ संपत्ति का समपहरण।संज्ञेयगैर-जमानतीयसेशन न्यायालय द्वारा

हमारा प्रयास आईपीसी की धारा 127 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आप के पास कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

आईपीसी की धारा 126 | भारत सरकार के साथ शांति का सम्बन्ध रखने वाली शक्ति के राज्यक्षेत्र में लूटपाट करना | IPC Section- 126 in hindi| Committing depredation on territories of power at peace with the Government of India.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए भारतीय दंड संहिता की धारा 126 के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है भारतीय दंड संहिता की धारा 126? साथ ही हम आपको IPC की धारा 126 सम्पूर्ण जानकारी एवम् क्या सजा मिलेगी और कैसे क्या जमानत मिलेगी। इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

धारा 126 का विवरण

भारतीय दण्ड संहिता (IPC) में धारा 126 के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। जो कोई भारत सरकार से मैत्री का या शांति का सम्बंध रखने वाली किसी शक्ति के राज्यक्षेत्र में लूटपाट करेगा, या लूटपाट करने की तैयारी करेगा तो भारतीय दंड संहिता की धारा 126 अप्लाई होगी। भारतीय दण्ड संहिता की धारा 126 इसी विषय के बारे में बतलाती है।

आईपीसी की धारा 126 के अनुसार-

भारत सरकार के साथ शान्ति का सम्बन्ध रखने वाली शक्ति के राज्यक्षेत्र में लूटपाट करना –

जो कोई भारत सरकार से मैत्री का या शान्ति का सम्बन्ध रखने वाली किसी शक्ति के क्षेत्र में लूटपाट करेगा, या लूटपाट करने की तैयारी करेगा, वह दोनों में से किसी भाँति के कारावास से, जिसकी अवधि सात वर्ष तक की हो सकेगी, दण्डित किया जाएगा और वह जुर्माने से और ऐसी लूटपाट करने के लिए उपयोग में लाई गई या उपयोग में लाई जाने के लिए आशयित या ऐसी लूटपाट के समपहरण से भी दण्डनीय होगा।

Committing depredation on territories of Power at peace with the Government of India-
Whoever commits depredation, or makes preparation to commit depredation, on the territories of any Power in alliance or at peace with the Government of India, shall be punished with imprisonment of either description for a term which may extend to seven years, and shall also be liable to fine and to forfeiture of any property used or intended to be used in committing such depredation, or acquired by such depredation.

लागू अपराध

भारत सरकार के साथ शांति का सम्बन्ध रखने वाली शक्ति के राज्यक्षेत्र में लूटपाट करना।
सजा- सात वर्ष के लिए कारावास और जुर्माना और कुछ संपत्ति का समपहरण ।
यह एक गैर-जमानती, संज्ञेय अपराध है और सेशन न्यायालय द्वारा विचारणीय है।
यह अपराध समझौता योग्य नही है।

सजा (Punishment) का प्रावधान

भारतीय दंड संहिता की धारा 126 के अंतर्गत जो कोई भारत सरकार से मैत्री का या शांति का सम्बन्ध रखने वाली शक्ति के राज्यक्षेत्र में लूटपाट करेगा या लूटपाट करने की तैयारी करेगा, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि सात वर्ष तक को हो सकेगी, और जुर्माने से और अर्जित संपत्ति के समपहरण से भी दण्डित किया जायेगा।

जमानत (Bail) का प्रावधान

जब कोई व्यक्ति भारत सरकार से मैत्री का या शांति का सम्बन्ध रखने वाली शक्ति के राज्यक्षेत्र में लूटपाट करेगा या लूटपाट करने की तैयारी करेगा तो वह अपराधी व्यक्ति द्वारा किए गए अपराध के अनुसार ही मामले में पुलिस द्वारा FIR दर्ज करती है यह अपराध गैर-जमानतीय होने के कारण जमानत आसानी से नही मिल सकेगी, साथ ही आपकी अर्जित संपत्ति भी जब्त की जा सकेगी।

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हमारा प्रयास आईपीसी की धारा 126 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आप के पास कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

आईपीसी की धारा 136 | अभित्याजक को संश्रय देना | IPC Section- 136 in hindi | Harbouring deserter.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए भारतीय दंड संहिता की धारा 136 के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है भारतीय दंड संहिता की धारा 136? साथ ही हम आपको IPC की धारा 136 सम्पूर्ण जानकारी एवम् क्या सजा मिलेगी और कैसे क्या जमानत मिलेगी। इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

धारा 136 का विवरण

भारतीय दण्ड संहिता (IPC) में धारा 136 के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। जो कोई यह जानते हुए या विश्वास का कारण रखते हुए कि भारत सरकार की सेना, नौसेना, या वायुसेना के किसी आफिसर, सैनिक, नौसैनिक या वायुसैनिक द्वारा अभित्यजन/परित्याग (Desertion) किया है, ऐसे आफिसर, सैनिक, नौसैनिक या वायुसैनिक को संश्रय देगा (साधारण भाषा Harbouring  deserter को हम भगौड़े को शरण देना भी कह सकते है- जो कोई जानते हुए कि भारत सरकार के सैनिक है और इसका परित्याग किया है, उसको अगर कोई सैनिक शरण देता है) तो भारतीय दंड संहिता की धारा 136 अप्लाई होगी। भारतीय दण्ड संहिता की धारा 136 इसी विषय के बारे में बतलाती है।

आईपीसी की धारा 136 के अनुसार-

अभित्याजक को संश्रय देना-

जो कोई सिवाय एतस्मिन् पश्चात् यथा अपवादित के, यह जानते हुए या यह विश्वास करने का कारण रखते हुए कि भारत सरकार की सेना, नौसेना या वायुसेना के किसी आफिसर, सैनिक, नौसैनिक या वायुसैनिक ने अभित्यजन किया है, ऐसे आफिसर, सैनिक, नौसैनिक या वायुसैनिक को संश्रय देगा, वह दोनों में से किसी भाँति के कारावास से, जिसकी अवधि दो वर्ष तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, या दोनों से दण्डित किया जाएगा।
अपवाद- इस उपबन्ध का विस्तार उस मामले पर नहीं है, जिसमें पत्नी द्वारा अपने पति को संश्रय दिया जाता है।

Harbouring deserter-
Whoever, except as hereinafter expected, knowing or having reason to believe that an officer, soldier, sailor or airman, in the Army, Navy or Air Force of the Government of India, has deserted, harbours such officer, soldier, sailor or airman, shall be punished with imprisonment of either description for a term which may extend to two years, or with fine, or with both.
Exception-This provision does not extend to the case in which the harbour is given by a wife to her husband.

लागू अपराध

ऐसे आफिसर, सैनिक, नौसैनिक या वायुसैनिक को, जिसने अभित्यजन किया है, संश्रय देना।
सजा- दो वर्ष के लिए कारावास या जुर्माना अथवा दोनो।
यह एक जमानतीय, संज्ञेय अपराध है और किसी भी श्रेणी के मजिस्ट्रेट द्वारा विचारणीय है।
यह अपराध समझौता योग्य नही है।

सजा (Punishment) का प्रावधान

भारतीय दंड संहिता की धारा 136 के अंतर्गत जो कोई यह जानते हुए या विश्वास रखते हुए, भारत सरकार की सेना, नौसेना, या वायुसेना के किसी आफिसर, सैनिक, नौसैनिक या वायुसैनिक द्वारा अभित्यजन किया है, ऐसे आफिसर, सैनिक, नौसैनिक या वायुसैनिक को संश्रय देगा तो वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि दो वर्ष तक की हो सकेगी, दण्डित किया जाएगा या जुर्माने से, या दोनो, से दण्डनीय होगा।

जमानत (Bail) का प्रावधान

जो कोई व्यक्ति यह जानते हुए या विश्वास रखते हुए,  भारत सरकार की सेना, नौसेना, या वायुसेना के किसी आफिसर, सैनिक, नौसैनिक या वायुसैनिक द्वारा अभित्यजन किया है, ऐसे आफिसर, सैनिक, नौसैनिक या वायुसैनिक को संश्रय देगा तो वह व्यक्ति भारतीय दंड संहिता की धारा 136 के अंतर्गत दंड का भागीदार होगा ऐसे अपराध कारित करने वाले व्यक्ति अपराध के अनुसार ही मामले में पुलिस द्वारा FIR दर्ज करती है यह अपराध गैर-जमानतीय होने के कारण जमानत आसानी से नही मिल सकेगी।

अपराधसजाअपारध श्रेणीजमानतविचारणीय
ऐसे आफिसर, सैनिक, नौसैनिक या वायुसैनिक को, जिसने अभित्यजन किया है, संश्रय देना।दो वर्ष के लिए कारावास या जुर्माना अथवा दोनो।संज्ञेयजमानतीयकिसी भी वर्ग के मजिस्ट्रेट द्वारा

हमारा प्रयास आईपीसी की धारा 136 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आप के पास कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

आईपीसी की धारा 135 | सैनिक, नौसैनिक या वायुसैनिक द्वारा अभित्यजन का दुष्प्रेरण | IPC Section- 135 in hindi | Abetment of desertion of soldier, sailor or airman.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए भारतीय दंड संहिता की धारा 135 के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है भारतीय दंड byसंहिता की धारा 135? साथ ही हम आपको IPC की धारा 135 सम्पूर्ण जानकारी एवम् क्या सजा मिलेगी और कैसे क्या जमानत मिलेगी। इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

धारा 135 का विवरण

भारतीय दण्ड संहिता (IPC) में धारा 135 के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। जो कोई भारत सरकार की सेना, नौसेना, या वायुसेना के किसी आफिसर, सैनिक, नौसैनिक या वायुसैनिक द्वारा अभित्यजन/परित्याग (Desertion) किए जाने का दुष्प्रेरण करेगा, तो भारतीय दंड संहिता की धारा 135 अप्लाई होगी। भारतीय दण्ड संहिता की धारा 135 इसी विषय के बारे में बतलाती है।

आईपीसी की धारा 135 के अनुसार-

सैनिक, नौसैनिक या वायुसैनिक द्वारा अभित्यजन का दुष्प्रेरण-

जो कोई भारत सरकार की सेना, नौसेना या वायुसेना के किसी आफिसर, सैनिक, नौसैनिक या वायुसैनिक द्वारा अभित्यजन किए जाने का दुष्प्रेरण करेगा, वह दोनों में से किसी भाँति के कारावास से, जिसकी अवधि दो वर्ष तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, या दोनों से, दण्डित किया जाएगा।

Abetment of desertion of soldier, sailor or airman-
Whoever abets the desertion of any officer, soldier, sailor or airman in the Army, Navy or Air Force of the Government of India, shall be punished with imprisonment of either description for a term which may extend to two years, or with fine, or with both.

लागू अपराध

आफिसर, सैनिक, नौसैनिक या वायु सैनिक द्वारा अभित्यजन का दुष्प्रेरण।
सजा- दो वर्ष के लिए कारावास या जुर्माना अथवा दोनो।
यह एक जमानतीय, संज्ञेय अपराध है और किसी भी श्रेणी के मजिस्ट्रेट द्वारा विचारणीय है।
यह अपराध समझौता योग्य नही है।

सजा (Punishment) का प्रावधान

भारतीय दंड संहिता की धारा 135 के अंतर्गत जो कोई  भारत सरकार की सेना, नौसेना, या वायुसेना के किसी आफिसर, सैनिक, नौसैनिक या वायुसैनिक द्वारा अभित्यजन का दुष्प्रेरण करेगा, तो वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि दो वर्ष तक की हो सकेगी, दण्डित किया जाएगा या जुर्माने से, या दोनो, से दण्डनीय होगा।

जमानत (Bail) का प्रावधान

जो कोई व्यक्ति भारत सरकार की सेना, नौसेना, या वायुसेना के किसी आफिसर, सैनिक, नौसैनिक या वायुसैनिक द्वारा अभित्यजन का दुष्प्रेरण करेगा, तो वह व्यक्ति भारतीय दंड संहिता की धारा 135 के अंतर्गत दंड का भागीदार होगा ऐसे अपराध कारित करने वाले व्यक्ति अपराध के अनुसार ही मामले में पुलिस द्वारा FIR दर्ज करती है यह अपराध गैर-जमानतीय होने के कारण जमानत आसानी से नही मिल सकेगी।

अपराधसजाअपराध श्रेणीजमानतविचारणीय
आफिसर, सैनिक, नौसैनिक या वायु सैनिक द्वारा अभित्यजन का दुष्प्रेरण।दो वर्ष के लिए कारावास या जुर्माना अथवा दोनो।संज्ञेयजमानतीयकिसी भी वर्ग के मजिस्ट्रेट द्वारा

हमारा प्रयास आईपीसी की धारा 135 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आप के पास कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

आईपीसी की धारा 134 | ऐसे हमले का दुष्प्रेरण, यदि हमला किया जाए | IPC Section- 134 in hindi | Abetment of such assault, if the assault is committed.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए भारतीय दंड संहिता की धारा 134 के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है भारतीय दंड संहिता की धारा 134? साथ ही हम आपको IPC की धारा 134 सम्पूर्ण जानकारी एवम् क्या सजा मिलेगी और कैसे क्या जमानत मिलेगी। इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

धारा 134 का विवरण

भारतीय दण्ड संहिता (IPC) में धारा 134 के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। जो कोई भारत सरकार की सेना, नौसेना, या वायुसेना के किसी आफिसर, सैनिक, नौसैनिक या वायुसैनिक द्वारा किसी वरिष्ठ आफिसर पर, जब कि वह आफिसर अपने पद निष्पादन में हो, हमले का दुष्प्रेरण करेगा, यदि ऐसा हमला दुष्प्रेरण के परिणामस्वरूप किया जाए तो भारतीय दंड संहिता की धारा 134 अप्लाई होगी। भारतीय दण्ड संहिता की धारा 134 इसी विषय के बारे में बतलाती है।

आईपीसी की धारा 134 के अनुसार-

ऐसे हमले का दुष्प्रेरण, यदि हमला किया जाए-

जो कोई भारत सरकार की सेना, नौसेना या वायुसेना के आफिसर, सैनिक, नौसैनिक या वायुसैनिक द्वारा किसी वरिष्ठ आफिसर पर, जबकि वह आफिसर अपने पद-निष्पादन में हो, हमले का दुष्प्रेरण करेगा, यदि ऐसा हमला उस दुष्प्रेरण के परिणामस्वरूप किया जाए, तो वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि सात वर्ष तक की हो सकेगी, दण्डित किया जाएगा और जुर्माने से भी, दण्डनीय होगा।

Abetment of such assault, if the assault is committed-
Whoever abets an assault by an officer, soldier, sailor or airman in the Army, Navy or Air Force of the Government of India, on any superior officer being in the execution of his office, shall, if such assault be committed in consequence of that abetment be punished with imprisonment of either description for a term which may extend to seven years, and shall also be liable to fine.

लागू अपराध

ऐसे हमले का दुष्प्रेरण, यदि हमला किया जाए।
सजा- सात वर्ष के लिए कारावास और जुर्माना।
यह एक गैर-जमानतीय, संज्ञेय अपराध है और प्रथम श्रेणी के मजिस्ट्रेट द्वारा विचारणीय है।
यह अपराध समझौता योग्य नही है।

सजा (Punishment) का प्रावधान

भारतीय दंड संहिता की धारा 134 के अंतर्गत जो कोई भारत सरकार की सेना, नौसेना, या वायुसेना के किसी आफिसर, सैनिक, नौसैनिक या वायुसैनिक द्वारा किसी वरिष्ठ आफिसर पर, जब कि वह आफिसर अपने पद निष्पादन में हो, हमले का दुष्प्रेरण करेगा, यदि ऐसा हमला दुष्प्रेरण के परिणामस्वरूप किया जाए तो वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि सात वर्ष तक की हो सकेगी, दण्डित किया जाएगा और जुर्माने से भी, दण्डनीय होगा।

जमानत (Bail) का प्रावधान

जो कोई व्यक्ति भारत सरकार की सेना, नौसेना, या वायुसेना के किसी आफिसर, सैनिक, नौसैनिक या वायुसैनिक द्वारा किसी वरिष्ठ आफिसर पर, जब कि वह आफिसर अपने पद निष्पादन में हो, हमले का दुष्प्रेरण करेगा, यदि ऐसा हमला दुष्प्रेरण के परिणामस्वरूप किया जाए तो वह व्यक्ति भारतीय दंड संहिता की धारा 134 के अंतर्गत दंड का भागीदार होगा ऐसे अपराध कारित करने वाले व्यक्ति अपराध के अनुसार ही मामले में पुलिस द्वारा FIR दर्ज करती है यह अपराध गैर-जमानतीय होने के कारण जमानत आसानी से नही मिल सकेगी

अपराधसजाअपराध श्रेणीजमानतविचारणीय
ऐसे हमले का दुष्प्रेरण, यदि हमला किया जाए।सात वर्ष के लिए कारावास और जुर्माना।संज्ञेयगैर-जमानतीयप्रथम वर्ग के मजिस्ट्रेट द्वारा

हमारा प्रयास आईपीसी की धारा 134 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके पास कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।