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आईपीसी की धारा 147 | बल्वा करने के लिए दंड | IPC Section- 147 in hindi| Punishment for rioting.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपको आईपीसी की रोचक धारा के बारे में बताएंगे। आज हम बात करेंगे, जो लोग किसी गैरकानूनी सभा या समूह में हिंसा करते है, अर्थात् मारपीट या झगड़ा करते हैं वह भारतीय दण्ड संहिता की धारा 147 अप्लाई होगी है, जिसके अंतर्गत अपराधी को कारावास और जुर्माने अथवा दोनो से दंडित किया जाएगा। आइए जानते है, क्या कहती है ? धारा 147 साथ ही सम्पूर्ण जानकारी आपको इस लेख के माध्यम से देंगे।

धारा 147 का विवरण

भारतीय दण्ड संहिता (IPC) में आज हम बात करेंगे धारा 147 के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। जब कोई व्यक्ति किसी गैरकानूनी समूह या किसी विधिविरुद्ध जमाव में बल और हिंसा फैलाने के उद्देश्य से शामिल होता है, तो वह व्यक्ति भारतीय दण्ड संहिता की धारा 147 के अंतर्गत अपराधी होगा। इस लेख के माध्यम से हम आपको दंड, जमानत कैसे मिलेगी और इत्यादि की जानकारी आप को देगें। ।

आईपीसी की धारा 147 के अनुसार-

बल्वा करने के लिए दण्ड-

जो कोई बल्वा करने का दोषी होगा, वह दोनों में से किसी भाँति के कारावास से, जिसकी अवधि दो वर्ष तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, या दोनों से, दण्डित किया जाएगा।

Punishment for rioting-
Whoever is guilty of rioting, shall be punished with imprisonment of either description for a term which may extend to two years, or with fine, or with both.

बल्वा (rioting) किसे कहते हैं?

वैसे साधारण भाषा में जाने तो किसी गैरकानूनी सभा में शामिल होकर बल और हिंसा करना अर्थात् दंगा करना, बल्वा कहलाता है साथ ही भारतीय दंड संहिता की धारा 146 में बल्वा को परिभाषित किया गया है। यह धारा किसी गैरकानूनी सभा या किसी समूह में शामिल प्रत्येक व्यक्ति पर लागू होती है।

लागू अपराध

बल्वा करना।
सजा- दो वर्ष का कारावास या जुर्माना अथवा दोनो।
यह एक जमानती, संज्ञेय अपराध है और किसी भी वर्ग के मजिस्ट्रेट द्वारा विचारणीय है।
यह अपराध समझौते योग्य नही है।

सजा (Punishment) का प्रावधान

जब कोई व्यक्ति गैर कानूनी सभा में भाग लेता है या उपस्थित होता है, और उस सभा में दंगा करता है या कराने का प्रयास करता है तो उस समूह में शामिल प्रत्येक व्यक्ति पर धारा 147 के अंतर्गत अपराधी होगा। जिसके लिए प्रत्येक व्यक्ति दो वर्ष के लिए कारावास या जुर्माने से, या दोनों दंडनीय होगा।

जमानत (Bail) का प्रावधान

भारतीय दंड संहिता की धारा 147 में जो अपराध बताया गया है अगर कोई व्यक्ति इस धारा में लिप्त होता है तो वह न्यायालय से जमानत याचिका दायर करके, जमानत आसानी से मिल जाएगी क्योंकि यह अपराध एक जमानतीय, संज्ञेय अपराध की श्रेणी में आता है। इसलिए  अपराध जमानतीय होने के कारण जमानत आसानी से मिल जाएगी।

अपराधसजाअपराध श्रेणीजमानतविचारणीय
बल्वा करना।दो वर्ष का कारावास या जुर्माना
अथवा दोनो।
संज्ञेयजमानतीयकिसी भी वर्ग के मजिस्ट्रेट द्वारा

हमारा प्रयास आईपीसी की धारा 147 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी , फिर भी अगर आप के पास कोई सवाल हो,तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है ।

आईपीसी की धारा 146 | बल्वा करना | IPC Section- 146 in hindi | Rioting.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए भारतीय दंड संहिता की धारा 146 के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है भारतीय दंड संहिता की धारा 146? साथ ही हम आपको IPC की धारा 146 सम्पूर्ण जानकारी एवम् परिभाषा भी जानेंगे। इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

धारा 146 का विवरण

भारतीय दण्ड संहिता (IPC) में धारा 146 के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। वैसे हमने देखा होगा, कभी कभी किसी गैरकानूनी जनसभा में विधिविरुद्ध जमाव द्वारा या उस समूह में शामिल सदस्य द्वारा, सामान्य उद्देश्य के लिए बल या हिंसा का प्रयोग करता है, तब ऐसे जमाव में शामिल प्रत्येक सदस्य बल्वा करने के अपराध का दोषी होगा। भारतीय दंड संहिता की धारा 146 बल्वा को परिभाषित करती है। भारतीय दण्ड संहिता की धारा 146 इसी विषय के बारे में बतलाती है।

आईपीसी की धारा 146 के अनुसार-

बल्वा करना-

जब कभी विधिविरुद्ध जमाव द्वारा या उसके किसी सदस्य द्वारा, ऐसे जमाव के सामान्य उद्देश्य को अग्रसर करने में बल या हिंसा का प्रयोग किया जाता है, तब ऐसे जमाव का हर सदस्य बल्वा करने के अपराध का दोषी होगा।

Rioting-
Whenever force or violence is used by an unlawful assembly, or by any member thereof, in prosecution of the common object of such assembly, every member of such assembly is guilty of the offence of rioting.

बल्वा का अर्थ-

बल्वा करना (Rioting)- जो कोई विधिविरुद्ध जमाव द्वारा या उसके किसी सदस्य द्वारा, किसी गैर कानूनी जनसभा में बल अथवा हिंसा का प्रयोग किया जाता है, अर्थात् समाज में हिंसा फैलती है, जिसे हम बल्वा कहते है। तब ऐसे जमाव का हर सदस्य बल्वा करने के अपराध का दोषी होगा।

हमारा प्रयास आईपीसी की धारा 146 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आप के पास कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

आईपीसी की धारा 143 | विधिविरुद्ध जमाव का सदस्य होना, दंड | IPC Section- 143 in hindi | being member of unlawful assembly, punishment.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए भारतीय दंड संहिता की धारा 143 के बारे में सम्पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है भारतीय दंड संहिता की धारा 143? साथ ही हम आपको IPC की धारा 143 के अंतर्गत कैसे क्या सजा मिलती है और जमानत कैसे मिलती है, और यह अपराध किस श्रेणी में आता है, इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

धारा 143 का विवरण

भारतीय दण्ड संहिता (IPC) में आज हम आपको महत्वपूर्ण धारा 143 के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। यदि कोई व्यक्ति किसी गैरकानूनी समूह का सदस्य होगा, अर्थात् वह किसी विधिविरुद्ध समूह में हिस्सा ले रहा है, जबकि उसे पता है, ऐसा करना गलत है, फिर भी उस समूह में शामिल होता है, तो वह दंड का भागीदार होगा। भारतीय दंड संहिता की धारा 143 विधिविरुद्ध जमाव का सदस्य होने पर दंड के प्रावधान को परिभाषित करती है।

आईपीसी की धारा 143 के अनुसार –

विधिविरुद्ध जमाव का सदस्य होने पर दंड-

जो कोई विधिविरुद्ध जमाव का सदस्य होगा, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि छह मास तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, या दोनों से, दंडित किया जाएगा।

being member of unlawful assembly, punishment-
Whoever is a member of an unlawful assembly, shall be punished with imprisonment of either description for a term which may extend to six month, or with fine, or with both.

विधिविरुद्ध जमाव का अर्थ-

भारतीय दण्ड संहिता की धारा 142 के अंतर्गत विधिविरुद्ध जमाव का सदस्य होना होना परिभाषित किया गया है। जिसमे यदि कोई व्यक्ति जानबूझकर किसी ऐसे गैरकानूनी सभा में शामिल होता है या बना रहता है, साथ उसे ज्ञात है, कि इससे समाज की शांति भंग होती है साथ ही धारा 143 ऐसे जो व्यक्ति शांति भंग करने के आशय से विधिविरुद्ध जमाव करते है, तो वह इसी धारा के अंतर्गत दंड के भागीदार होंगे।

विधिविरुद्ध जमाव (या गैरकानूनी सभा) का अर्थ व सजा-

जानबूझकर शांति भंग करने के आपसी इरादे लेकर सम्मिलित होने वाले लोगों के एक समूह जिसमे कोई व्यक्ति किसी गैर इरादे से शामिल होता है, कभी कभी ऐसे गैर कानूनी समूहो द्वारा समाज में शांति भंग होती है, तो इसे दंगा करार दिया जाता है। इसलिए गैरकानूनी सभा में शामिल होना भी एक तरह का अपराध होता है, यदि कोई व्यक्ति ऐसी सभा में शामिल होगा,वह छह माह के लिए कारावास का भागीदार बनेगा।

लागू अपराध

विधिविरुद्ध जमाव का सदस्य होना।
सजा – छह मास के लिए कारावास या आर्थिक दंड या दोनों का भागीदार होगा।
यह एक जमानती, संज्ञेय अपराध है और किसी भी श्रेणी के मजिस्ट्रेट द्वारा विचारणीय है।

सजा (Punishment) का प्रावधान

जिसमे यदि कोई व्यक्ति जानबूझकर किसी ऐसे गैरकानूनी सभा में शामिल होता है या बना रहता है, साथ उसे ज्ञात है, कि इससे समाज की शांति भंग होगी, तो हमारे संविधान में ऐसे अपराधों के लिए दण्ड का प्रावधान भारतीय दंड संहिता की धारा 143 में किया गया है। विधिविरुद्ध समूह में सम्मलित होना जैसे अपराध करने की सजा 6 माह के लिए कारावास या आर्थिक दंड या दोनो का भागीदार होगा।

जमानत (Bail) का प्रावधान

यह अपराध एक जमानतीय, संज्ञेय अपराध की श्रेणी में आता है। यह अपराध जमानतीय होने के कारण आसानी से जमानत मिल सकेगी।
जब भी किसी व्यक्ति को IPC की धारा 143, के अंतर्गत गिरफ्तार किया जाता है, तो वह सत्र न्यायालय में अग्रिम जमानत के लिए आवेदन कर सकता है। न्यायाधीश द्वारा आसानी से अभियुक्त को जमानत प्रदान कर दी जाती है।

अपराधसजाअपराध श्रेणीजमानतविचारणीय
विधिविरुद्ध जमाव का सदस्य होना।छह मास के लिए कारावास या आर्थिक दंड या दोनों का भागीदार होगा।संज्ञेयजमानतीयकिसी भी वर्ग के मजिस्ट्रेट द्वारा

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आईपीसी की धारा 142 | विधिविरुद्ध जमाव का सदस्य होना | IPC Section- 142 in hindi | Being member of unlawful assembly.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए भारतीय दंड संहिता की धारा 142 के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है भारतीय दंड संहिता की धारा 142? साथ ही हम आपको IPC की धारा 142 सम्पूर्ण जानकारी एवम् परिभाषा भी जानेंगे। इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

धारा 142 का विवरण

भारतीय दण्ड संहिता (IPC) में धारा 142 के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। जो कोई यह जानते हुए कि यह गैरकानूनी सभा है, इसका उद्देश्य सिर्फ लोक शांति भंग करना है, उस सभा का निर्माण करते है या फिर भी उस सभा में सम्मलित होता है, या बना रहता है, वह उस विधिविरुद्ध जमाव का सदस्य है, तब यह कहा जाता है। यह भारतीय दंड संहिता की धारा 142 विधिविरुद्ध जमाव को परिभाषित करती है। भारतीय दण्ड संहिता की धारा 142 इसी विषय के बारे में बतलाती है।

आईपीसी की धारा 142 के अनुसार-

विधिविरुद्ध जमाव का सदस्य होना-

जो कोई उन तथ्यों से परिचित होते हुए, जो किसी जमाव को विधिविरुद्ध जमाव बनाते हैं, उस जमाव में साशय सम्मिलित होता है, या उसमें बना रहता है, वह विधिविरुद्ध जमाव का सदस्य है, यह कहा जाता है।

Being member of unlawful assembly-
Whoever, being aware of facts which render any assembly an unlawful assembly, intentionally joins that assembly, or continues in it, is said to be a member of an unlawful assembly.

विधिविरुद्ध जमाव का सदस्य होना किसे कहते है?

विधिविरुद्ध जमाव (या गैरकानूनी सभा) जानबूझकर लोक शांति भंग करने के इरादे लेकर जब कोई व्यक्तियों का समूह मिलकर कोई सभा का निर्माण करते है या रखते है, या किसी सभा में शामिल होते है, अथवा सब कुछ जानते हुए भी उस सभा में बने रहते है, तो हम उनको विधिविरुद्ध जमाव का सदस्य होना कहते है।

हमारा प्रयास आईपीसी की धारा 142 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आप के पास कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

आईपीसी की धारा 141 | विधिविरुद्ध जमाव | IPC Section- 141 in hindi | Unlawful assembly.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए भारतीय दंड संहिता की धारा 141 के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है भारतीय दंड संहिता की धारा 141? साथ ही हम आपको IPC की धारा 141 सम्पूर्ण जानकारी एवम् परिभाषा भी जानेंगे। इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

धारा 141 का विवरण

भारतीय दण्ड संहिता (IPC) में धारा 141 के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। जो कोई पांच या पांच व्यक्तियों का जमाव ही विधिविरुद्ध जमाव (Unlawful assembly) कहा जाता है, किसी विधिविरुद्ध जमाव में पांच या पांच से अधिक व्यक्तियों द्वारा किसी जनसभा में अपराधिक बल के प्रदर्शन द्वारा आतंकित करना, अथवा बल प्रयोग करके किसी व्यक्ति को वह करने जिसके लिए विवश करता है, तो वहा भारतीय दंड संहिता की धारा 141 अप्लाई होगी। भारतीय दण्ड संहिता की धारा 141 इसी विषय के बारे में बतलाती है।

आईपीसी की धारा 141 के अनुसार-

विधिविरुद्ध जमाव-

पाँच या अधिक व्यक्तियों का जमाव “विधिविरुद्ध जमाव” कहा जाता है, यदि उन व्यक्तियों का, जिनसे वह जमाव गठित हुआ है, सामान्य उद्देश्य हो-
पहला- केन्द्रीय सरकार को, या किसी राज्य सरकार को, या संसद को, या किसी राज्य के विधान मण्डल को, या किसी लोक सेवक को, जबकि वह ऐसे लोक सेवक की विधिपूर्ण शक्ति का प्रयोग कर रहा हो, आपराधिक बल द्वारा या आपराधिक बल के प्रदर्शन द्वारा आतंकित करना, अथवा
दूसरा- किसी विधि के, या किसी वैध आदेशिका के निष्पादन का प्रतिरोध करना, अथवा
तीसरा-किसी रिष्टि या आपराधिक अतिचार या अन्य अपराध का करना, अथवा
चौथा- किसी व्यक्ति पर आपराधिक बल द्वारा या आपराधिक बल के प्रदर्शन द्वारा किसी सम्पत्ति का कब्जा लेना या अभिप्राप्त करना या किसी व्यक्ति को किसी मार्ग के अधिकार के उपभोग से, या जल का उपभोग करने के अधिकार या अन्य अमूर्त अधिकार से, जिसका वह कब्जा रखता हो, या उपभोग करता हो, वंचित करना या किसी अधिकार या अनुमित अधिकार को प्रवर्तित करना, अथवा
पाँचवां- आपराधिक बल द्वारा या आपराधिक बल के प्रदर्शन द्वारा किसी व्यक्ति को वह करने के लिए, जिसे करने के लिए वह वैध रूप से आबद्ध न हो या उसका लोप करने के लिए, जिसे करने का वह वैध रूप से हकदार हो, विवश करना।
स्पष्टीकरण- कोई जमाव, जो इकट्ठा होते समय विधिविरुद्ध नहीं था, बाद को विधिविरुद्ध जमाव हो सकेगा।

Unlawful assembly-
An assembly of five or more persons is designated a “unlawful assembly” if the common object of the person composing that assembly is-
First- To overawe by criminal force, or show of criminal force, the Central or any State Government or Parliament or the Legislature of any State, or any public servant in the exercise of the lawful power of such public servant or;
Secondly- To resist the execution of any law, or of any legal process; or
Thirdly- To commit any mischief or criminal trepass or other offence; or
Fourthly-By means of criminal force, or show of criminal force, to any person to take or obtain possession of any property, or to deprive any person of the enjoyment of a right of way, or of the use of water or other incorporeal right of which he is in possession or enjoyment, or to enforce any right or supposed right; or
Fifthly- By means of criminal force, or show of criminal force to compel any person to do what he is not legally bound to do, or to omit to do what he is legally entitled to do.
Explanation-An assembly which was not unlawful when it asembled may subsequently become an unlawful assembly.

विधिविरुद्ध जमाव की परिभाषा-

विधिविरुद्ध जमाव (या गैरकानूनी सभा) जानबूझकर शांति भंग करने के आपसी इरादे लेकर पांच या पांच से अधिक व्यक्तियों का एक समूह का वर्णन करने के लिए एक कानूनी शब्द है। यदि समूह गड़बड़ी की कार्रवाई शुरू करने वाला है, तो इसे एक नियम कहा जाता है; अगर गड़बड़ी शुरू हो जाती है, तो इसे दंगा करार दिया जाता है।

हमारा प्रयास आईपीसी की धारा 141 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके पास कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

आईपीसी की धारा 140 | सैनिक, नौसैनिक या वायुसैनिक द्वारा उपयोग में लाई जाने वाली पोशाक पहनना या टोकन धारण करना | IPC Section- 140 in hindi | Wearing garb of carrying token used by soldier, sailor or airman.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए भारतीय दंड संहिता की धारा 140 के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है भारतीय दंड संहिता की धारा 140? साथ ही हम आपको IPC की धारा 140 सम्पूर्ण जानकारी एवम् क्या सजा मिलेगी और कैसे क्या जमानत मिलेगी और यह अपराध किस श्रेणी में आता है, इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

धारा 140 का विवरण

भारतीय दण्ड संहिता (IPC) में धारा 140 के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। जो कोई भारत सरकार की सैन्य, नाविक या वायुसेना का सैनिक, नौसैनिक या वायुसैनिक न होते हुए, इस आशय से कि यह विश्वास किया जाए कि वह ऐसा सैनिक, नौसैनिक या वायुसैनिक है, ऐसी कोई पोशाक पहनेगा या ऐसा टोकन धारण करेगा, तो भारतीय दंड संहिता की धारा 140 अप्लाई होगी। भारतीय दण्ड संहिता की धारा 140 इसी विषय के बारे में बतलाती है।

आईपीसी की धारा 140 के अनुसार-

सैनिक, नौसैनिक या वायुसैनिक द्वारा उपयोग में लाई जाने वाली पोशाक पहनना या टोकन धारण करना-

जो कोई भारत सरकार की सैन्य, नाविक या वायुसेना का सैनिक, नौसैनिक या वायुसैनिक न होते हुए, इस आशय से कि यह विश्वास किया जाए कि वह ऐसा सैनिक, नौसैनिक या वायुसैनिक है, ऐसी कोई पोशाक पहनेगा या ऐसा टोकन धारण करेगा जो ऐसे सैनिक, नौसैनिक या वायुसैनिक द्वारा उपयोग में लाई जाने वाली पोशाक या टोकन के सदृश हो, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि तीन मास तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, जो पाँच सौ रुपए तक का हो सकेगा, या दोनों से, दण्डित किया जाएगा।

Wearing garb of carrying token used by soldier, sailor or airman-
Whoever, not being a soldier, sailor or airman in the Military, Naval or Air service of the Government of India, wears any garb or carries any token resembling any garb or token used by such soldier, sailor or airman with the intention that it may be believed that he is such a soldier, sailor or airman, shall be punished with imprisonment of either description for a term which may extend to three months, or with fine which may extend to five hundred rupees, or with both.

लागू अपराध

इस आशय से सैनिक, नौसैनिक या वायुसैनिक व्दारा उपयोग मे लाई जाने वाली पोशाक पहनना या कोई टोकन धारण करना कि वह ऐसा सैनिक, नौसैनिक या वायु सैनिक है।
सजा- तीन माह के लिए कारावास, या पांच सौ रूपये का जुर्माना, या दोनो।
यह एक जमानतीय, संज्ञेय अपराध है और किसी भी श्रेणी के मजिस्ट्रेट द्वारा विचारणीय है।
यह अपराध समझौता योग्य नही है।

सजा (Punishment) का प्रावधान

भारतीय दंड संहिता की धारा 140 के अंतर्गत जो कोई भारत सरकार की सैन्य, नाविक या वायुसेना का सैनिक, नौसैनिक या वायुसैनिक न होते हुए, इस आशय से कि यह विश्वास किया जाए कि वह ऐसा सैनिक, नौसैनिक या वायुसैनिक है, ऐसी कोई पोशाक पहनेगा या ऐसा टोकन धारण करेगा तो वह दोनों में से किसी भाँति के कारावास से, जिसकी अवधि तीन मास तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, जो पांच सौ रुपए तक का हो सकेगा, या दोनों से दण्डित किया जाएगा।

जमानत (Bail) का प्रावधान

भारतीय दंड संहिता की धारा 140 अंतर्गत जो अपराध कारित किए जाते है वह अपराध दंड प्रक्रिया संहिता में जमानतीय (Baileble) है, इसलिए इस धारा के अंतर्गत किए गए अपराध जमानतीय होने के कारण जमानत आसानी से मिल जाती है।

अपराधसजाअपराध श्रेणीजमानतविचारणीय
इस आशय से सैनिक, नौसैनिक या वायुसैनिक व्दारा उपयोग मे लाई जाने वाली पोशाक पहनना या कोई टोकन धारण करना कि वह ऐसा सैनिक, नौसैनिक या वायु सैनिक है।तीन माह के लिए कारावास, या पांच सौ रूपये का जुर्माना, या दोनो।संज्ञेयजमानतीयकिसी भी वर्ग के मजिस्ट्रेट द्वारा

हमारा प्रयास आईपीसी की धारा 140 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके पास कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।