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आईपीसी की धारा 158 | विधिविरुद्ध जमाव या बल्वे में भाग लेने के लिए भाड़े पर जाना | IPC Section- 158 in hindi | Being hired to take part in an unlawful assembly or riot.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए भारतीय दंड संहिता की धारा 158 के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है भारतीय दंड संहिता की धारा 158? साथ ही हम आपको IPC की धारा 158 सम्पूर्ण जानकारी कैसे क्या सजा मिलती है और जमानत कैसे मिलेगी, और यह अपराध किस श्रेणी में आता है, इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

धारा 158 का विवरण

भारतीय दण्ड संहिता (IPC) में धारा 158 के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। जो कोई गैरकानूनी जमाव करने के लिए भाड़े पर जाने वाले या भाड़े में शामिल होने वाले प्रत्येक व्यक्ति पर यह धारा अप्लाई होगी, साथ ही जो व्यक्ति गैरकानूनी जमाव में किसी शस्त्र का प्रयोग करता है, तब भी यह धारा 158 अप्लाई होगी। जिसके लिए वह दंड का भागीदार होगा। भारतीय दण्ड संहिता की धारा 158 इसी विषय के बारे में बतलाती है।

आईपीसी की धारा 158 के अनुसार-

विधिविरुद्ध जमाव या बल्वे में भाग लेने के लिए भाड़े पर जाना-

जो कोई धारा 141 में विनिर्दिष्ट कार्यों में से किसी को करने के लिए या करने में सहायता देने के लिए वचनबद्ध किया या भाड़े पर लिया जाएगा या भाड़े पर लिए जाने या वचनबद्ध किए जाने के लिए अपनी प्रस्थापना करेगा या प्रयत्न करेगा, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि छह मास तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, या दोनों से, दण्डित किया जाएगा।
या सशस्त्र चलना- तथा जो कोई पूर्वोक्त प्रकार से वचनबद्ध होने या भाड़े पर लिए जाने पर, किसी घातक आयुध से या ऐसी किसी चीज से, जिससे आक्रामक आयुध के रूप में उपयोग किए जाने पर मृत्यु कारित होनी सम्भाव्य है, सज्जित होकर चलेगा या सज्जित होकर चलने के लिये वचनबद्ध होगा या अपनी प्रस्थापना करेगा, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि दो वर्ष तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, या दोनों से, दण्डित किया जाएगा।

Being hired to take part in an unlawful assembly or riot-
Whoever is engaged, or hired, or offers or attempts to be hired or engaged, to do or assist in doing any of the acts specified in Section 141, shall be punished with imprisonment of either description for a term which may extend to six months, or with fine, or with both.
or to go armed- and whoever, being so engaged or hired as aforesaid, goes armed, or engages or offers to go armed, with any deadly weapon or with anything which used as a weapon of offence is likely to cause death, shall be punished with imprisonment of either description for a term which may extend to two years, or with fine, or with both.

लागू अपराध

विधिविरुद्ध जमाव या बल्वे में भाग लेने के लिए भाड़े पर जाना।
सजा- छह मास के लिए कारावास, या जुर्माना या दोनो।
सशस्त्र चलना।
सजा- दो वर्ष के लिए कारावास, या जुर्माना या दोनो।
यह एक जमानतीय, संज्ञेय अपराध है और किसी भी श्रेणी के मजिस्ट्रेट द्वारा विचारणीय है।
यह अपराध समझौता योग्य नही है।

सजा (Punishment) का प्रावधान

भारतीय दंड संहिता की धारा 158 के अंतर्गत जो कोई  विधिविरुद्ध जमाव में  भाग लेने के लिए भाड़े पर जाएगा या रखेगा और साथ ही किसी शस्त्र से हमला करता है तो वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि छह मास तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, या दोनों से, दण्डित किया जाएगा। इसी तरह से भाड़े पर लाए गए, किसी सदस्य द्वारा शस्त्र का प्रयोग करता है तो वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि दो वर्ष तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, या दोनों से, दण्डित किया जाएगा।

जमानत (Bail) का प्रावधान

भारतीय दंड संहिता की धारा 158 अंतर्गत जो अपराध कारित किए जाते है वह अपराध दंड प्रक्रिया संहिता में जमानतीय (Baileble) है, इसलिए इस धारा के अंतर्गत किए गए अपराध जमानतीय होने के कारण जमानत आसानी से मिल जाती है।

अपराधसजाअपराध श्रेणीजमानतविचारणीय
विधिविरुद्ध जमाव या बल्वे में भाग लेने के लिए भाड़े पर जाना।छह मास के लिए कारावास, या जुर्माना या दोनो।संज्ञेयजमानतीयकिसी भी वर्ग के मजिस्ट्रेट द्वारा
सशस्त्र चलना।दो वर्ष के लिए कारावास, या जुर्माना या दोनो।संज्ञेयजमानतीयकिसी भी वर्ग के मजिस्ट्रेट द्वारा

हमारा प्रयास आईपीसी की धारा 158 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके पास कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

आईपीसी की धारा 157 | विधिविरुद्ध जमाव के लिए भाड़े पर लाए गए व्यक्तियों को संश्रय देना | IPC Section- 157 in hindi | Harbouring persons hired for an unlawful assembly.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए भारतीय दंड संहिता की धारा 157 के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है भारतीय दंड संहिता की धारा 157? साथ ही हम आपको IPC की धारा 157 सम्पूर्ण जानकारी कैसे क्या सजा मिलती है और जमानत कैसे मिलेगी, और यह अपराध किस श्रेणी में आता है, इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

धारा 157 का विवरण

भारतीय दण्ड संहिता (IPC) में धारा 157 के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। जो कोई गैरकानूनी जमाव करने के लिए भाड़े पर लाए गए व्यक्तियों को, यह जानते हुए, किसी गृह या परिसर में आश्रय देता है तो वह व्यक्ति पर यह धारा 157 अप्लाई होगी। जिसके लिए वह दंड का भागीदार होगा। भारतीय दण्ड संहिता की धारा 157 इसी विषय के बारे में बतलाती है।

आईपीसी की धारा 157 के अनुसार-

विधिविरुद्ध जमाव के लिए भाड़े पर लाए गए व्यक्तियों को संश्रय देना-

जो कोई अपने अधिभोग या भारसाधन, या नियन्त्रण के अधीन किसी गृह या परिसर में किन्हीं व्यक्तियों को, यह जानते हुए कि वे व्यक्ति विधिविरुद्ध जमाव में सम्मिलित होने या सदस्य बनने के लिए भाड़े पर लाए गए, वचनबद्ध या नियोजित किए गये हैं या भाड़े पर लाए जाने, वचनबद्ध या नियोजित किए जाने वाले हैं, संश्रय देगा, आने देगा या सम्मलित करेगा, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि छह मास तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, या दोनों से, दण्डित किया जाएगा।

Harbouring persons hired for an unlawful assembly-
Whoever harbours, receives or assembles, in any house or premises in his occupation or charge, or under his control any person, knowing that such persons have been hired, engaged. employed, or are about to be hired, engaged or employed, to join or become members of an unlawful assembly, shall be punished with imprisonment of either description for a term which may extend to six months, or with fine, or with both.

लागू अपराध

विधिविरुद्ध जमाव के लिए भाड़े पर लाए गए व्यक्तियों को संश्रय देना।
सजा- छह मास के लिए कारावास, या जुर्माना या दोनो।
यह एक जमानतीय, संज्ञेय अपराध है और किसी भी श्रेणी के मजिस्ट्रेट द्वारा विचारणीय है।
यह अपराध समझौता योग्य नही है।

सजा (Punishment) का प्रावधान

भारतीय दंड संहिता की धारा 157 के अंतर्गत जो कोई  विधिविरुद्ध जमाव में भाड़े पर लाए गए व्यक्तियों को यह जानते हुए भी किसी सदस्य को आश्रय देता है तो वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि छह मास तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, या दोनों से, दण्डित किया जाएगा।

जमानत (Bail) का प्रावधान

भारतीय दंड संहिता की धारा 157 अंतर्गत जो अपराध कारित किए जाते है वह अपराध दंड प्रक्रिया संहिता में जमानतीय (Baileble) है, इसलिए इस धारा के अंतर्गत किए गए अपराध जमानतीय होने के कारण जमानत आसानी से मिल जाती है।

अपराधसजाअपराध श्रेणीजमानतविचारणीय
विधिविरुद्ध जमाव के लिए भाड़े पर लाए गए व्यक्तियों को संश्रय देना।छह मास के लिए कारावास, या जुर्माना या दोनो।संज्ञेयजमानतीयकिसी भी वर्ग के मजिस्ट्रेट द्वारा

हमारा प्रयास आईपीसी की धारा 157 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आप के पास कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

आईपीसी की धारा 156 | उस स्वामी या अधिभोगी के अभिकर्ता का दायित्व, जिसके फायदे के लिए बल्वा किया जाता है | IPC Section- 156 in hindi | Liability of agent of owner or occupier for whose benefit riot is committed.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए भारतीय दंड संहिता की धारा 156 के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है भारतीय दंड संहिता की धारा 156? साथ ही हम आपको IPC की धारा 156 सम्पूर्ण जानकारी कैसे क्या सजा मिलती है और जमानत कैसे मिलेगी, और यह अपराध किस श्रेणी में आता है, इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

धारा 156 का विवरण

भारतीय दण्ड संहिता (IPC) में धारा 156 के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। जब कभी ऐसे व्यक्ति के फायदे के लिए या ऐसे व्यक्ति की ओर से बल्वा किया जाए, जो किसी भूमि का, जिसके विषय में ऐसा बल्वा हो, स्वामी हो या अधिभोगी हो या जो ऐसी भूमि में या बल्बे के पैदा करने वाले किसी विवादग्रस्त विषय में कोई हित रखने का दावा करता हो। उस व्यक्ति का अभिकर्ता या प्रबन्धक इस धारा के तहत अपराधी माना जायेगा और उस पर यह धारा 156 अप्लाई होगी। भारतीय दण्ड संहिता की धारा 156 इसी विषय के बारे में बतलाती है।

आईपीसी की धारा 156 के अनुसार-

उस स्वामी या अधिभोगी के अभिकर्ता का दायित्व, जिसके फायदे के लिए बल्वा किया जाता है-

जब कभी ऐसे व्यक्ति के फायदे के लिए या ऐसे व्यक्ति की ओर से बल्वा किया जाए, जो किसी भूमि का, जिसके विषय में ऐसा बल्वा हो, स्वामी हो या अधिभोगी हो या जो ऐसी भूमि में या बल्बे के पैदा करने वाले किसी विवादग्रस्त विषय में कोई हित रखने का दावा करता हो या जो उससे कोई फायदा प्रतिगृहीत कर या पा चुका हो,
तब उस व्यक्ति का अभिकर्ता या प्रबन्धक जुर्माने से दण्डनीय होगा, यदि ऐसा अभिकर्ता या प्रबन्धक यह विश्वास करने का कारण रखते हुए कि ऐसे बल्वे का किया जाना सम्भाव्य था या कि जिस विधिविरुद्ध जमाव द्वारा ऐसा बल्वा किया गया था उसका किया जाना सम्भाव्य था, अपनी शक्ति-भर सब विधिपूर्ण साधनों का ऐसे बल्वे या जमाव का किया जाना निवारित करने के लिए और उसको दबाने और बिखरने के लिए उपयोग नहीं करता या करते।

Liability of agent of owner or occupier for whose benefit riot is committed-
Whenever a riot is committed for the benefit or on behalf of any person who is the owner or occupier of any land respecting which such riot takes place, or who claims any interest in such land, or in the subject of any dispute which gave rise to the riot, or who has accepted or derived any benefit therefrom,
the agent or manager of such person shall be punishable with fine, if such agent or manager having reason to believe that such riot was likely to be committed, or that the unlawful assembly by which such riot was committed was likely to be held, shall not use all lawful means in his power to prevent such riot or assembly from taking place and for suppressing and dispersing the same.

जब कोई भूमि का स्वामी या अधिभोगी के अभिकर्ता द्वारा इस प्रकार बल्वे को जानबूझकर अपने फायदे को सिद्ध करने के उद्देश्य से किसी भूमि में हेतु बल्वा करता है, तो वह ही इस बल्वे का जिम्मेदार भूमि का स्वामी या अधिभोगी के अभिकर्ता होगा। तब यह धारा अप्लाई होती है, जिसके लिए उस व्यक्ति को जुर्माना भी भरना पड़ेगा।

लागू अपराध

उस स्वामी या अधिभोगी के अभिकर्ता का दायित्व, जिसके फायदे के लिए बल्वा किया जाता है।
सजा- जुर्माना।
यह एक जमानतीय, गैर-संज्ञेय अपराध है और किसी भी श्रेणी के मजिस्ट्रेट द्वारा विचारणीय है।
यह अपराध समझौता योग्य नही है।

सजा (Punishment) का प्रावधान

भारतीय दंड संहिता की धारा 156 के अंतर्गत जो भूमि का स्वामी या अधिभोगी के अभिकर्ता द्वारा किसी बल्वे को अपने फायदे के लिए आरंभ करता है, और उस उद्देश्य से किसी जनसमूह को इस प्रकार बल्वा कराया जाता है, कि उसका लाभ पूर्ण हो, तब वह व्यक्ति जिसने अपने फायदे के लिए बल्वा कराया गया है, तो ऐसा व्यक्ति, जुर्माने से दण्डनीय होगा।

जमानत (Bail) का प्रावधान

भारतीय दंड संहिता की धारा 156 के अंतर्गत जो अपराध कारित किए जाते है वह अपराध दंड प्रक्रिया संहिता में जमानतीय (Baileble) है, इसलिए इस धारा के अंतर्गत किए गए अपराध जमानतीय होने के कारण जमानत आसानी से मिल जाती है।

अपराधसजाअपराध श्रेणीजमानतविचारणीय
उस स्वामी या अधिभोगी के अभिकर्ता का दायित्व, जिसके फायदे के लिए बल्वा किया जाता है।जुर्माना।गैर-संज्ञेयजमानतीयकिसी भी वर्ग के मजिस्ट्रेट द्वारा

हमारा प्रयास आईपीसी की धारा 156 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके पास कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

आईपीसी की धारा 155 | उस व्यक्ति का दायित्व, जिसके फायदे के लिए बल्वा किया जाता है | IPC Section- 155 in hindi | Liability of person for whose benifit riot is committed.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए भारतीय दंड संहिता की धारा 155 के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है भारतीय दंड संहिता की धारा 155? साथ ही हम आपको IPC की धारा 155 सम्पूर्ण जानकारी कैसे क्या सजा मिलती है और जमानत कैसे मिलेगी, और यह अपराध किस श्रेणी में आता है, इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

धारा 155 का विवरण

भारतीय दण्ड संहिता (IPC) में धारा 155 के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। जब किसी गैरकानूनी जमाव द्वारा बल्वा किया जाता है, तब वह बल्वा किस कारणवश हुआ है, और इस बल्वे को आरंभ किसने किया। यह धारा उस व्यक्ति पर लागू होती है, जिसने अपने फायदे के लिए बल्वा कराया है और वह ही व्यक्ति उस बल्वा का जिम्मेदार होगा और वह व्यक्ति इस धारा के तहत अपराधी माना जायेगा और उस पर यह धारा 155 अप्लाई होगी। भारतीय दण्ड संहिता की धारा 155 इसी विषय के बारे में बतलाती है।

आईपीसी की धारा 155 के अनुसार-

उस व्यक्ति का दायित्व, जिसके फायदे के लिए बल्वा किया जाता है –

जब कभी किसी ऐसे व्यक्ति के फायदे के लिए या उसकी ओर से बल्वा किया जाए, जो किसी भूमि का, जिसके विषय में ऐसा बल्वा हो, स्वामी या अधिभोगी हो या जो ऐसी भूमि में या बल्वे को पैदा करने वाले किसी विवादग्रस्त विषय में कोई हित रखने का दावा करता हो या जो उससे कोई फायदा प्रतिगृहीत कर या पा चुका हो, तब ऐसा व्यक्ति, जुर्माने से दण्डनीय होगा, यदि वह या उसका अभिकर्ता या प्रबन्धक इस बात का विश्वास करने का कारण रखते हुए कि ऐसा बल्वा किया जाना सम्भाव्य था या कि जिस विधिविरुद्ध जमाव द्वारा ऐसा बल्वा किया गया था, वह जमाव किया जाना सम्भाव्य था, अपनी शक्ति-भर सब विधिपूर्ण साधनों का ऐसे जमाव या बल्वे का किया जाना निवारित करने के लिए और उसे दबाने और बिखेरने के लिए उपयोग नहीं करता या करते।

Liability of person for whose benefit riot is committed-
Whenever a riot is committed for the benefit or on behalf of any person who is the owner or occupier of any land respecting which such riot takes place, or who claims any interest in such land, or in the subject of any dispute which gave rise to the riot, or who has accepted or derived any benefit therefrom, such person shall be punishable with fine, if he or his agent or manager, having reason to believe that such riot was likely to be committed or that the unlawful assembly by which such riot was committed was likely to be held, shall not respectively use all lawful means in his or their power to prevent such assembly or riot from taking place, and for suppressing and dispersing the same.

जब कोई व्यक्ति इस प्रकार बल्वे को जानबूझकर अपने फायदे को सिद्ध करने के उद्देश्य से किसी जनसमूह में  बल्वा करता है, तो वह ही इस बल्वे का जिम्मेदार होगा। तब यह धारा अप्लाई होती है, जिसके लिए उस व्यक्ति को  जुर्माना भी भरना पड़ेगा।

लागू अपराध

उस व्यक्ति का दायित्व, जिसके फायदे के लिए बल्वा किया जाता है।
सजा- जुर्माना।
यह एक जमानतीय, गैर-संज्ञेय अपराध है और किसी भी श्रेणी के मजिस्ट्रेट द्वारा विचारणीय है।
यह अपराध समझौता योग्य नही है।

सजा (Punishment) का प्रावधान

भारतीय दंड संहिता की धारा 155 के अंतर्गत जो व्यक्ति किसी बल्वे को अपने फायदे के लिए आरंभ करता है, और उस उद्देश्य से किसी जनसमूह को इस प्रकार बल्वा कराया जाता है, कि उसका लाभ पूर्ण हो, तब वह व्यक्ति जिसने अपने फायदे के लिए बल्वा कराया गया है, तो ऐसा व्यक्ति, जुर्माने से दण्डनीय होगा।

जमानत (Bail) का प्रावधान

भारतीय दंड संहिता की धारा 155 के अंतर्गत जो अपराध कारित किए जाते है वह अपराध दंड प्रक्रिया संहिता में जमानतीय (Baileble) है, इसलिए इस धारा के अंतर्गत किए गए अपराध जमानतीय होने के कारण जमानत आसानी से मिल जाती है।

अपराधसजाअपराध श्रेणीजमानतविचारणीय
उस व्यक्ति का दायित्व, जिसके फायदे के लिए बल्वा किया जाता है।जुर्माना।गैर-संज्ञेयजमानतीयजमानतीय

हमारा प्रयास आईपीसी की धारा 155 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

आईपीसी की धारा 154 | उस भूमि का स्वामी या अधिभोगी, जिस पर विधिविरुद्ध जमाव किया गया है | IPC Section- 154 in hindi | Owner or occupier of land on which an unlawful assembly is held.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए भारतीय दंड संहिता की धारा 154 के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है भारतीय दंड संहिता की धारा 154? साथ ही हम आपको IPC की धारा 154 सम्पूर्ण जानकारी कैसे क्या सजा मिलती है और जमानत कैसे मिलेगी, और यह अपराध किस श्रेणी में आता है, इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

धारा 154 का विवरण

भारतीय दण्ड संहिता (IPC) में धारा 154 के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। जब कोई व्यक्ति किसी व्यक्ति की भूमि पर किसी गैरकानूनी जमाव द्वारा बल्वा किया जा रहा है, अर्थात् जिस जगह पर या भूमि पर किसी प्रकार की गैरकानूनी जनसमूह एकत्र है, तो उस जगह के मालिक या स्वामी को यदि वह इस प्रकार की गैरकानूनी जनसमूह की जानकारी  रखता हो और इस जानकारी को पुलिस तक नहीं पहुंचता है, तब वह व्यक्ति इस धारा के तहत अपराधी माना जायेगा और उस पर यह धारा 154 अप्लाई होगी। भारतीय दण्ड संहिता की धारा 154 इसी विषय के बारे में बतलाती है।

आईपीसी की धारा 154 के अनुसार-

उस भूमि का स्वामी या अधिभोगी, जिस पर विधिविरुद्ध जमाव किया गया है-

जब कभी कोई विधिविरुद्ध जमाव या बल्वा हो, तब जिस भूमि पर ऐसा विधिविरुद्ध जमाव हो या ऐसा बल्वा किया जाए, उसका स्वामी या अधिभोगी और ऐसी भूमि में हित रखने वाला या हित रखने का दावा करने वाला व्यक्ति एक हजार रुपए से अनधिक जुर्माने से दण्डनीय होगा, यदि वह या उसका अभिकर्ता या प्रबन्धक यह जानते हुए कि ऐसा अपराध किया जा रहा है या किया जा चुका है या इस बात की विश्वास करने का कारण रखते हुए कि ऐसे अपराध का किया जाना सम्भाव्य है, उस बात को अपनी शक्ति-भर शीघ्रतम सूचना निकटतम पुलिस थाने के प्रधान आफिसर को न दे या न दें और उस दशा में, जिसमें कि उसे या उन्हें यह विश्वास करने का कारण हो कि यह लगभग किया ही जाने वाला है, अपनी शक्ति-भर सब विधिपूर्ण साधनों का उपयोग उसका निवारण करने के लिए नहीं करता या करते और उसके हो जाने पर अपनी शक्ति-भर सब विधिपूर्ण साधनों का उस विधिविरुद्ध जमाव को बिखेरने या बल्वे को दबाने के लिए उपयोग नहीं करता या करते।

Owner or occupier of land on which an unlawful assembly is held-
Whenever any unlawful assembly or riot takes place, the owner or occupier of the land upon which such unlawful assembly is held, or such riot is committed, and any person having or claiming an interest in such land, shall be punishable with fine not exceeding one thousand rupees, if he or his agent or manager, knowing that such offence is being or has been committed, or having reason to believe it is likely to be committed, do not give the earliest notice thereof in his or their power to the principal officer at the nearest police station, and do not, in the case of his or their having reason to believe that it was about to be committed, use all lawful means in his or their power to prevent it, and, in the event of its taking place, do not use all lawful means in his or their power to disperse or suppress the riot or unlawful assembly.

जब कोई व्यक्ति इस प्रकार हो रहे बल्वे को जानबूझकर छिपाने का प्रयास करता है, अथवा इसकी सूचना पुलिस को नही बताता है, तो वह व्यक्ति जिसको इस बल्वे की जानकारी है और वह उस भूमि का स्वामी या उसी स्थान पर रहने वाला पड़ोसी है, फिर भी छिपाता है तो वह व्यक्ति के ऊपर यह धारा अप्लाई होगी।

लागू अपराध

बल्वे आदि की इत्तिला का भूमि के स्वामी या आधिभोगी द्वारा न दिया जाना ।
सजा- एक हजार रुपए का जुर्माना।
यह एक जमानतीय, गैर-संज्ञेय अपराध है और किसी भी श्रेणी के मजिस्ट्रेट द्वारा विचारणीय है।
यह अपराध समझौता योग्य नही है।

सजा (Punishment) का प्रावधान

भारतीय दंड संहिता की धारा 154 के अंतर्गत जो व्यक्ति किसी बल्वे में भाग लेने वाले एवम बल्वे को छिपाने का प्रयास करता है, अर्थात् जिस जगह पर या भूमि पर किसी प्रकार की गैरकानूनी जनसमूह एकत्र है, तो उस जगह के मालिक या स्वामी को यदि वह इस प्रकार की गैरकानूनी जनसमूह की जानकारी होकर भी इस जानकारी को पुलिस तक नहीं पहुंचता है, छिपाने का प्रयास करता है तो वह भी व्यक्ति एक हजार रुपए जुर्माने से दण्डित किया जाएगा।

जमानत (Bail) का प्रावधान

भारतीय दंड संहिता की धारा 154 अंतर्गत जो अपराध कारित किए जाते है वह अपराध दंड प्रक्रिया संहिता में जमानतीय (Baileble) है, इसलिए इस धारा के अंतर्गत किए गए अपराध जमानतीय होने के कारण जमानत आसानी से मिल जाती है।

अपराधसजाअपराध श्रेणीजमानतविचारणीय
बल्वे आदि की इत्तिला का भूमि के स्वामी या आधिभोगी द्वारा न दिया जाना ।एक हजार रुपए का जुर्माना।गैर-संज्ञेयजमानतीयकिसी भी वर्ग के मजिस्ट्रेट द्वारा

हमारा प्रयास आईपीसी की धारा 154 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

पॉक्सो एक्ट की धारा 12 | लैंगिक उत्पीड़न के लिए दंड | Pocso Act Section- 12 in hindi | Punishment for sexual harassment.

नमस्कार दोस्तों, आज हम पॉक्सो एक्ट की धारा 12 के बारे में सम्पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है पॉक्सो एक्ट (POCSO ACT) की धारा 12? साथ ही हम आपको POCSO ACT की धारा 12 के अंतर्गत क्या परिभाषित करती है, इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

पॉक्सो एक्ट (POCSO ACT) की धारा 12 का विवरण

पॉक्सो एक्ट की धारा 12 के अंतर्गत जो कोई व्यक्ति लैंगिक आशय से किसी बालक को लैंगिक उत्पीड़न (Sexual harassment) करता है तो वह इस कृत्य के लिए पॉक्सो एक्ट की धारा 12 के अंतर्गत दंड को परिभाषित करता है यह पॉक्सो की धारा 12 लैंगिक उत्पीड़न के लिए दंड का प्रावधान को परिभाषित करता है।

पॉक्सो एक्ट (POCSO ACT) की धारा 12 के अनुसार-

लैंगिक उत्पीड़न के लिए दंड-

जो कोई, किसी बालक पर लैंगिक उत्पीड़न करेगा वह दोनो में से किसी भांति के कारावास से जिसकी अवधि तीन वर्ष तक को हो सकेगी,दोनों में से जाएगा और जुर्माने से भी दंडनीय होगा।

Punishment for sexual harassment-
Whoever commits sexual harassment upon a child shall be punished with imprisonment of either description for a term which may extend to three years and shall also be liable to fine.

सजा (Punishment)

जो कोई किसी बालक पर लैंगिक उत्पीड़न करेगा वह दोनो में से किसी भांति के कारावास से जिसकी अवधि तीन वर्ष तक को हो सकेगी,दोनों से दंडित किया जाएगा और जुर्माने से भी दंडनीय होगा।

हमारा प्रयास पॉक्सो एक्ट की धारा 12 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आप के मन में कोई सवाल हो, तो आप बेझिझक कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।
धन्यवाद