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भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 66 | Indian Contract Act Section 66

भारतीय संविदा अधिनियम Indian Contract Act (ICA Section-66) in Hindi के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 66 के अनुसार शून्यकरणीय संविदा का विखण्डन उसी प्रकार और उन्हीं नियमों के अध्यधीन संसूचित या प्रतिसंहृत किया जा सकेगा जो प्रस्थापना की संसूचना या प्रतिग्रहण को लागू है, जिसे IC Act Section-66 के अन्तर्गत परिभाषित किया गया है।

भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 66 (Indian Contract Act Section-66) का विवरण

भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 66 IC Act Section-66 के अनुसार शून्यकरणीय संविदा का विखण्डन उसी प्रकार और उन्हीं नियमों के अध्यधीन संसूचित या प्रतिसंहृत किया जा सकेगा जो प्रस्थापना की संसूचना या प्रतिग्रहण को लागू है।

भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 66 (IC Act Section-66 in Hindi)

शून्यकरणीय संविदा के विखंडन की संसूचना या प्रतिसंहरण की रीति-

शून्यकरणीय संविदा का विखण्डन उसी प्रकार और उन्हीं नियमों के अध्यधीन संसूचित या प्रतिसंहृत किया जा सकेगा जो प्रस्थापना की संसूचना या प्रतिग्रहण को लागू है।

Indian Contract Act Section-66 (IC Act Section-66 in English)

Mode of communicating or revoking rescission of voidable contract-

The rescission of a voidable contract may be communicated or revoked in the same manner, and subject to the same rules, as apply to the communication or revocation of the proposal.

हमारा प्रयास भारतीय संविदा अधिनियम (Indian Contract Act Section) की धारा 66 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 65 | Indian Contract Act Section 65

भारतीय संविदा अधिनियम Indian Contract Act (ICA Section-65) in Hindi के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 65 के अनुसार जबकि किसी करार के शून्य होने का पता चले या कोई संविदा शून्य हो जाए, तब वह व्यक्ति जिसने ऐसे करार या संविदा के अधीन कोई फायदा प्राप्त किया हो वह फायदा उस व्यक्ति को, जिससे उसने उसे प्राप्त किया था, प्रत्यावर्तित करने या उसके लिए प्रतिकर देने को आबद्ध होगा, जिसे IC Act Section-65 के अन्तर्गत परिभाषित किया गया है।

भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 65 (Indian Contract Act Section-65) का विवरण

भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 65 IC Act Section-65 के अनुसार जबकि किसी करार के शून्य होने का पता चले या कोई संविदा शून्य हो जाए, तब वह व्यक्ति जिसने ऐसे करार या संविदा के अधीन कोई फायदा प्राप्त किया हो वह फायदा उस व्यक्ति को, जिससे उसने उसे प्राप्त किया था, प्रत्यावर्तित करने या उसके लिए प्रतिकर देने को आबद्ध होगा।

भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 65 (IC Act Section-65 in Hindi)

उस व्यक्ति की बाध्यता, जिसने शून्य करार के अधीन या उस संविदा के अधीन जो शून्य हो गई हो, फायदा प्राप्त किया हो-

जबकि किसी करार के शून्य होने का पता चले या कोई संविदा शून्य हो जाए, तब वह व्यक्ति जिसने ऐसे करार या संविदा के अधीन कोई फायदा प्राप्त किया हो वह फायदा उस व्यक्ति को, जिससे उसने उसे प्राप्त किया था, प्रत्यावर्तित करने या उसके लिए प्रतिकर देने को आबद्ध होगा।
दृष्टान्त
(क) ‘ख’ को यह वचन देने के प्रतिफलस्वरूप कि वह ‘क’ की पुत्री ‘ग’ से विवाह कर लेगा ‘ख’ को ‘क’ 1,000 रुपये देता है। वचन के समय ‘ग’ मर चुकी है। करार शून्य है, किन्तु ‘ख’ को वे 1,000 रुपये ‘क’ को प्रतिसंदत्त करने होंगे।
(ख) ‘ख’ से ‘क’ उसे एक मई के पूर्व 250 मन चावल परिदत्त करने की संविदा करता है। ‘क’ उस दिन के पूर्व केवल 130 मन परिदत्त करता है और तत्पश्चात् कुछ नहीं। ‘ख’ उस 130 मन को एक मई के पश्चात् रखे रखता है। वह ‘क’ को उसके लिए संदाय करने को आबद्ध है।
(ग) एक गायिका ‘क’, एक नाट्यगृह प्रबंधक ‘ख’, से अगले दो मास में प्रति सप्ताह में दो रात उसके नाट्यगृह में गाने की संविदा करती है और ‘ख’ उसे हर रात के गाने के लिए एक सौ रुपये देने के लिए वचनबद्ध होता है। छठी रात को ‘क’ उस नाट्यगृह से जानबूझकर अनुपस्थित रहती है और परिणामस्वरूप ‘ख’ उस संविदा को विखंडित कर देता है। ‘ख’ को उन पाँचों रातों के लिए, जिनमें ‘क’ ने गाया था, उसे संदाय करना होगा।
(घ) ‘क’ एक संगीत समारोह में 1,000 रुपये पर, जो अग्रिम दिए जाते हैं, ‘ख’ के लिए गाने की संविदा करती है। ‘क’ इतनी रुग्ण है कि गा नहीं सकती। ‘क’ उन लाभों की हानि के लिए प्रतिकर देने को आबद्ध नहीं है, जो ‘ख’ को होते, यदि ‘क’ गा सकती, किन्तु उसे अग्रिम दिए गए 1,000 रुपये ‘ख’ को लौटाने होंगे।

Indian Contract Act Section-65 (IC Act Section-65 in English)

Obligation of person who has received advantage under void agreement, or contract that becomes void-

When an agreement is discovered to be void, or when a contract becomes void, any person who has received any advantage under such agreement or contract is bound to restore it, or to make compensation for it to the person from whom he received it.
Illustrations
(a) A pays B 1,000 rupees, in consideration of B’s promising to marry C, A’s daughter. C is dead at the time of the promise. The agreement is void, but B must repay A the 1,000 rupees.
(b) A contract with B to deliver to him 250 maunds of rice before the first of May. A delivers 130 maunds only before that day, and none after. B retains the 130 maunds after the first of May. He is bound to pay A for them.
(c) A, a singer, contracts with B, the manager of a theatre, to sing at his theatre for two nights in every week during the next two months, and B engages to pay her a hundred rupees for each night’s performance. On the sixth night, A wilfully absents herself from the theatre, and B, in consequence, rescinds the contract. B must pay A for the five nights on which she had sung.
(d) A contract to sing for B at a concert for 1,000 rupees, which are paid in advance. A is too ill to sing. A is not bound to make compensation to B for the loss of the profits which B would have made if A had been able to sing, but must refund to B the 1,000 rupees paid in advance.

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भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 64 | Indian Contract Act Section 64

भारतीय संविदा अधिनियम Indian Contract Act (ICA Section-64) in Hindi के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 64 के अनुसार जबकि कोई व्यक्ति, जिसके विकल्प पर कोई संविदा शून्यकरणीय है, उसे विखण्डित कर देता है उसके दूसरे पक्षकार को, उसमें अन्तर्विष्ट किसी वचन का, जिसका वह वचनदाता है, पालन करने की आवश्यकता नहीं है। शून्यकरणीय संविदा को विखण्डित करने वाले पक्षकार ने, यदि ऐसी संविदा के किसी दूसरे पक्षकार से तदधीन कोई फायदा प्राप्त किया है, तो वह ऐसा फायदा, उस व्यक्ति को, जिससे वह प्राप्त किया गया था, यथासम्भव प्रत्यावर्तित कर देगा, जिसे IC Act Section-64 के अन्तर्गत परिभाषित किया गया है।

भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 64 (Indian Contract Act Section-64) का विवरण

भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 64 IC Act Section-64 के अनुसार जबकि कोई व्यक्ति, जिसके विकल्प पर कोई संविदा शून्यकरणीय है, उसे विखण्डित कर देता है उसके दूसरे पक्षकार को, उसमें अन्तर्विष्ट किसी वचन का, जिसका वह वचनदाता है, पालन करने की आवश्यकता नहीं है। शून्यकरणीय संविदा को विखण्डित करने वाले पक्षकार ने, यदि ऐसी संविदा के किसी दूसरे पक्षकार से तदधीन कोई फायदा प्राप्त किया है, तो वह ऐसा फायदा, उस व्यक्ति को, जिससे वह प्राप्त किया गया था, यथासम्भव प्रत्यावर्तित कर देगा।

भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 64 (IC Act Section-64 in Hindi)

शून्यकरणीय संविदा के विखण्डन के परिणाम-

जबकि कोई व्यक्ति, जिसके विकल्प पर कोई संविदा शून्यकरणीय है, उसे विखण्डित कर देता है उसके दूसरे पक्षकार को, उसमें अन्तर्विष्ट किसी वचन का, जिसका वह वचनदाता है, पालन करने की आवश्यकता नहीं है। शून्यकरणीय संविदा को विखण्डित करने वाले पक्षकार ने, यदि ऐसी संविदा के किसी दूसरे पक्षकार से तदधीन कोई फायदा प्राप्त किया है, तो वह ऐसा फायदा, उस व्यक्ति को, जिससे वह प्राप्त किया गया था, यथासम्भव प्रत्यावर्तित कर देगा।

Indian Contract Act Section-64 (IC Act Section-64 in English)

Consequences of rescission of a voidable contract-

When a person at whose option a contract is voidable rescinds it, the other party thereto need not perform any promise therein contained in which he is the promisor. The party rescinding a voidable contract shall, if he had received any benefit thereunder from another party to such contract, restore such benefit, so far as may be, to the person from whom it was received.

हमारा प्रयास भारतीय संविदा अधिनियम (Indian Contract Act Section) की धारा 64 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 63 | Indian Contract Act Section 63

भारतीय संविदा अधिनियम Indian Contract Act (ICA Section-63) in Hindi के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 63 के अनुसार हर वचनग्रहीता अपने को दिये गए किसी वचन के पालन से अभिमुक्ति या उसका परिहार पूर्णत: या भागतः दे या कर सकेगा, या ऐसे पालन के लिए समय बढ़ा सकेगा, या उसके स्थान पर किसी तुष्टि को, जिसे वह ठीक समझे प्रतिग्रहीत कर सकेगा, जिसे IC Act Section-63 के अन्तर्गत परिभाषित किया गया है।

भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 63 (Indian Contract Act Section-63) का विवरण

भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 63 IC Act Section-63 के अनुसार हर वचनग्रहीता अपने को दिये गए किसी वचन के पालन से अभिमुक्ति या उसका परिहार पूर्णत: या भागतः दे या कर सकेगा, या ऐसे पालन के लिए समय बढ़ा सकेगा, या उसके स्थान पर किसी तुष्टि को, जिसे वह ठीक समझे प्रतिग्रहीत कर सकेगा।

भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 63 (IC Act Section-63 in Hindi)

वचनग्रहीता वचन के पालन से अभिमुक्ति या उसका परिहार दे या कर सकेगा-

हर वचनग्रहीता अपने को दिये गए किसी वचन के पालन से अभिमुक्ति या उसका परिहार पूर्णत: या भागतः दे या कर सकेगा, या ऐसे पालन के लिए समय बढ़ा सकेगा, या उसके स्थान पर किसी तुष्टि को, जिसे वह ठीक समझे प्रतिग्रहीत कर सकेगा।
दृष्टान्त
(क) ‘ख’ के लिए ‘क’ एक रंगचित्र बनाने का वचन देता है। तत्पश्चात् ‘ख’ उससे वैसा करने का निषेध कर देता है। ‘क’ उस वचन के पालन के लिए अब आबद्ध नहीं है।
(ख). ‘ख’ का ‘क’ 5,000 रुपये का देनदार है। ‘क’ उस समय और स्थान पर, जिस पर 5,000 रुपये देय थे, ‘ख’ को 2,000 रुपये देता है और ‘ख’ सम्पूर्ण ऋण की तुष्टि में उन्हें प्रतिग्रहीत कर लेता है। सम्पूर्ण ऋण का उन्मोचन हो जाता है
(ग) ‘ख’ का ‘क’ 5,000 रुपये का देनदार है। ‘ख’ को ‘ग’ 1,000 रुपये देता है और ‘ख’ उन्हें ‘क’ पर अपने दावे की तुष्टि में प्रतिग्रहीत कर लेता है। यह संदाय सम्पूर्ण दावे का उन्मोचन है।
(घ) ‘क’ एक संविदा के अधीन ‘ख’ को ऐसी धनराशि का देनदार है जिसका परिमाण अभिनिश्चित नहीं किया गया है। ‘क’ परिमाण अभिनिश्चित किए बिना, ‘ख’ को 2,000 रुपये देता है और ‘ख’ उसे उसकी तुष्टि में प्रतिग्रहीत कर लेता है। यह सम्पूर्ण ऋण का उन्मोचन है चाहे उसका परिमाण कुछ भी हो। 
(ङ) ‘ख’ का ‘क’ 2,000 रुपये का देनदार है और अन्य लेनदारों का भी ऋणी है। ‘ख’ समेत लेनदारों से ‘क’ उनकी अपनी-अपनी मांगों का प्रशमन करने के लिए उन्हें रुपये में आठ आने देने का ठहराव करता है। ‘ख’ को 1,000 रुपये का संदाय ‘ख’ की माँग का उन्मोचन है।

Indian Contract Act Section-63 (IC Act Section-63 in English)

Promisee may dispense with or remit performance of promise-

Every promisee may dispense with or remit, wholly or in part, the performance of the premise made to him, or may extend the time for such performance or may accept instead of it any satisfaction which he thinks fit.
Illustrations
(a) A promises to paint a picture for B. B afterward forbids him to do so. A is no longer bound to perform the promise.
(b) A owes B 5,000 rupees. A pays to B, and B accepts, in satisfaction of the whole debt, 2,000 rupees paid at the time and place at which the 5,000 rupees were payable. The whole debt is discharged.
(c) A owes B 5,000 rupees. C pays to B 1,000 rupees, and B accepts them, in satisfaction of his claim on A. This payment is a discharge of the whole claim.
(d) A owes B, under a contract, a sum of money, the amount of which has not been ascertained. A, without ascertaining the amount, gives to B, and B, in satisfaction thereof, accepts, the sum of 2,000 rupees. This is a discharge of the whole debt, whatever may be its amount.
(e) A owes B 2,000 rupees, and is also indebted to another creditor. A makes an arrangement with his creditors, including B, to pay them a composition of eight annas in the rupee upon their respective demands. Payment to B of 1,000 rupees is a discharge of B’s demand.

हमारा प्रयास भारतीय संविदा अधिनियम (Indian Contract Act Section) की धारा 63 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 62 | Indian Contract Act Section 62

भारतीय संविदा अधिनियम Indian Contract Act (ICA Section-62) in Hindi के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 62 के अनुसार यदि किसी संविदा के पक्षकार उसके बदले एक नई संविदा प्रतिस्थापित करने या उस संविदा को विखण्डित या परिवर्तित करने का करार करें तो मूल संविदा का पालन करने की आवश्यकता न होगी, जिसे IC Act Section-62 के अन्तर्गत परिभाषित किया गया है।

भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 62 (Indian Contract Act Section-62) का विवरण

भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 62 IC Act Section-62 के अनुसार यदि किसी संविदा के पक्षकार उसके बदले एक नई संविदा प्रतिस्थापित करने या उस संविदा को विखण्डित या परिवर्तित करने का करार करें तो मूल संविदा का पालन करने की आवश्यकता न होगी।

भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 62 (IC Act Section-62 in Hindi)

संविदा के नवीयन, विखण्डन और परिवर्तन का प्रभाव-

यदि किसी संविदा के पक्षकार उसके बदले एक नई संविदा प्रतिस्थापित करने या उस संविदा को विखण्डित या परिवर्तित करने का करार करें तो मूल संविदा का पालन करने की आवश्यकता न होगी।
दृष्टान्त
(क) ‘क’ एक संविदा के अधीन ‘ख’ को धन का देनदार है। ‘क’, ‘ख’ और ‘ग’ के बीच यह करार होता है कि ‘ख’ तत्पश्चात् ‘क’ के बजाय ‘ग’ को अपना ऋणी मानेगा। ‘क’ पर ‘ख’ के पुराने ऋण का अन्त हो गया और ‘ग’ पर ‘ख’ के एक नये ऋण की संविदा हो गई है।
(ख) ‘ख’ का ‘क’ 10,000 रुपये का देनदार है। ‘ख’ से ‘क’ ठहराव करता है और ‘ख’ को 10,000 रुपये के ऋण के बदले 5,000 रुपये के लिए ‘क’ की सम्पदा बन्धक करता है। यह नई संविदा है और पुरानी को निर्वाचित कर देती है।
(ग) ‘क’ एक संविदा के अधीन ‘ख’ को 1,000 रुपये का देनदार है। ‘ग’ का ‘ख’ 1,000 रुपये का देनदार है। ‘क’ को ‘ख’ आदेश देता है कि वह अपनी बहियों में ‘ग’ के नाम 1,000 रुपये जमा कर दे, किन्तु ‘ग’ इस ठहराव के लिए अनुमति नहीं देता। ‘ख’ अब भी ‘ग’ का 1,000 रुपये का देनदार है और कोई नई संविदा नहीं की गई है।

Indian Contract Act Section-62 (IC Act Section-62 in English)

Effect of novation, rescission, and alteration of contract-

If the parties to a contract agree to substitute a new contract for it, or to rescind or alter it, the original contract need not be performed.
Illustrations
(a) A owes money to B under a contract. It is agreed between A, B and C, that B shall thenceforth accept C as his debtor, instead of A. The old debt of A to B is at an end, and a new debt from C to B has been contracted.
(b) A owes B 10,000 rupees. A enters into an agreement with B, and gives B a mortgage of his (As), estate for 5,000 rupees in place of the debt of 10,000 rupees. This is a new contract and extinguishes the old.
(c) A owes B 1,000 rupees under a contract, B owes C 1,000 rupees, B orders A to credit C with 1,000 rupees in his books, but C does not assent to the agreement. B still owes C 1,000 rupees, and no new contract has been entered into.

हमारा प्रयास भारतीय संविदा अधिनियम (Indian Contract Act Section) की धारा 62 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 61 | Indian Contract Act Section 61

भारतीय संविदा अधिनियम Indian Contract Act (ICA Section-61) in Hindi के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 61 के अनुसार जहाँ कि दोनों पक्षकारों में से कोई भी विनियोग नहीं करता वहाँ वह संदाय समय-क्रमानुसार ऋणों के उन्मोचन में उपयोजित किया जाएगा, चाहे वे ऋण वादों की परिसीमा सम्बन्धी तत्समय प्रवृत्त विधि द्वारा वारित हों या न हों। यदि ऋण समकालिक हैं तो संदाय कर एक के उन्मोचन में अनुपाततः उपयोजित किया जाएगा, जिसे IC Act Section-61 के अन्तर्गत परिभाषित किया गया है।

भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 61 (Indian Contract Act Section-61) का विवरण

भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 61 IC Act Section-61 के अनुसार जहाँ कि दोनों पक्षकारों में से कोई भी विनियोग नहीं करता वहाँ वह संदाय समय-क्रमानुसार ऋणों के उन्मोचन में उपयोजित किया जाएगा, चाहे वे ऋण वादों की परिसीमा सम्बन्धी तत्समय प्रवृत्त विधि द्वारा वारित हों या न हों। यदि ऋण समकालिक हैं तो संदाय कर एक के उन्मोचन में अनुपाततः उपयोजित किया जाएगा।

भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 61 (IC Act Section-61 in Hindi)

जहाँ कि दोनों पक्षकारों में से कोई भी विनियोग नहीं करता है, वहाँ संदाय का उपयोजन-

जहाँ कि दोनों पक्षकारों में से कोई भी विनियोग नहीं करता वहाँ वह संदाय समय-क्रमानुसार ऋणों के उन्मोचन में उपयोजित किया जाएगा, चाहे वे ऋण वादों की परिसीमा सम्बन्धी तत्समय प्रवृत्त विधि द्वारा वारित हों या न हों। यदि ऋण समकालिक हैं तो संदाय कर एक के उन्मोचन में अनुपाततः उपयोजित किया जाएगा।

Indian Contract Act Section-61 (IC Act Section-61 in English)

Application of payment where neither party appropriates-

Where neither party makes any appropriation, the payment shall be applied in discharge of the debts in order of time, whether they are or are not barred by the law in force for the time being as to the limitation of suits. If the debts are of equal standing, the payment shall be applied in discharge of each proportionably.

हमारा प्रयास भारतीय संविदा अधिनियम (Indian Contract Act Section) की धारा 61 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।