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भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 60 | Indian Contract Act Section 60

भारतीय संविदा अधिनियम Indian Contract Act (ICA Section-60) in Hindi के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 60 के अनुसार जहाँ कि ऋणी ने यह प्रज्ञापित नहीं किया है और कोई परिस्थितियाँ नहीं हैं जिनसे यह उपदर्शित होता हो कि वह संदाय किस ऋण के लिए उपयोजित किया जाना है वहाँ लेनदार स्वविवेकानुसार उसे ऐसे किसी विधिपूर्ण ऋण मद्दे उपयोजित कर सकेगा जो ऋणी द्वारा उसे वस्तुतः शोध्य और देय हो, चाहे उसकी वसूली वादों की परिसीमा सम्बन्धी तत्समय प्रवृत्त विधि द्वारा वारित हो या न हो, जिसे IC Act Section-60 के अन्तर्गत परिभाषित किया गया है।

भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 60 (Indian Contract Act Section-60) का विवरण

भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 60 IC Act Section-60 के अनुसार जहाँ कि ऋणी ने यह प्रज्ञापित नहीं किया है और कोई परिस्थितियाँ नहीं हैं जिनसे यह उपदर्शित होता हो कि वह संदाय किस ऋण के लिए उपयोजित किया जाना है वहाँ लेनदार स्वविवेकानुसार उसे ऐसे किसी विधिपूर्ण ऋण मद्दे उपयोजित कर सकेगा जो ऋणी द्वारा उसे वस्तुतः शोध्य और देय हो, चाहे उसकी वसूली वादों की परिसीमा सम्बन्धी तत्समय प्रवृत्त विधि द्वारा वारित हो या न हो।

भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 60 (IC Act Section-60 in Hindi)

जहाँ कि वह ऋण उपदर्शित न हो जिसका उन्मोचन किया जाना है, वहाँ संदाय का उपयोजन-

जहाँ कि ऋणी ने यह प्रज्ञापित नहीं किया है और कोई परिस्थितियाँ नहीं हैं जिनसे यह उपदर्शित होता हो कि वह संदाय किस ऋण के लिए उपयोजित किया जाना है वहाँ लेनदार स्वविवेकानुसार उसे ऐसे किसी विधिपूर्ण ऋण मद्दे उपयोजित कर सकेगा जो ऋणी द्वारा उसे वस्तुतः शोध्य और देय हो, चाहे उसकी वसूली वादों की परिसीमा सम्बन्धी तत्समय प्रवृत्त विधि द्वारा वारित हो या न हो।

Indian Contract Act Section-60 (IC Act Section-60 in English)

Application of payment where debt to be discharged is not indicated-

Where the debtor has omitted to intimate, and there are no other circumstances indicating to which debt the payment is to be applied, the creditor may apply it at his discretion to any lawful debt actually due and payable to him from the debtor, whether its recovery is or is not barred by the law in force for the time being as to the limitations of suits.

हमारा प्रयास भारतीय संविदा अधिनियम (Indian Contract Act Section) की धारा 60 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 59 | Indian Contract Act Section 59

भारतीय संविदा अधिनियम Indian Contract Act (ICA Section-59) in Hindi के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 59 के अनुसार जहाँ कि कोई ऋणी, जिस पर एक व्यक्ति के कई सुभिन्न ऋण हों, उस व्यक्ति को या तो अभिव्यक्त प्रज्ञापना सहित या ऐसी परिस्थितियों में, जिनसे विवक्षित हो कि वह संदाय किसी विशिष्ट ऋण के उन्मोच के लिए उपयोजित किया जाना है, कोई संदाय करता है वहाँ उस संदाय को, यदि वह प्रतिग्रहीत कर लिया जाए, तद्नुसार उपयोजित करना होगा, जिसे IC Act Section-59 के अन्तर्गत परिभाषित किया गया है।

भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 59 (Indian Contract Act Section-59) का विवरण

भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 59 IC Act Section-59 के अनुसार जहाँ कि कोई ऋणी, जिस पर एक व्यक्ति के कई सुभिन्न ऋण हों, उस व्यक्ति को या तो अभिव्यक्त प्रज्ञापना सहित या ऐसी परिस्थितियों में, जिनसे विवक्षित हो कि वह संदाय किसी विशिष्ट ऋण के उन्मोच के लिए उपयोजित किया जाना है, कोई संदाय करता है वहाँ उस संदाय को, यदि वह प्रतिग्रहीत कर लिया जाए, तद्नुसार उपयोजित करना होगा।

भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 59 (IC Act Section-59 in Hindi)

जहाँ कि वह ऋण उपदर्शित हो, जिसका उन्मोचन किया जाना है, वहाँ संदायों का उपयोजन-

जहाँ कि कोई ऋणी, जिस पर एक व्यक्ति के कई सुभिन्न ऋण हों, उस व्यक्ति को या तो अभिव्यक्त प्रज्ञापना सहित या ऐसी परिस्थितियों में, जिनसे विवक्षित हो कि वह संदाय किसी विशिष्ट ऋण के उन्मोच के लिए उपयोजित किया जाना है, कोई संदाय करता है वहाँ उस संदाय को, यदि वह प्रतिग्रहीत कर लिया जाए, तद्नुसार उपयोजित करना होगा।
दृष्टान्त
(क) अन्य ऋणों के साथ-साथ एक वचनपत्र पर, जो पहली जून को शोध्य है, ‘ख’ का ‘क’ 1,000 रुपये का देनदार है। वह ‘ख’ को उसी रकम के किसी अन्य ऋण का देनदार नहीं है। पहली जून को ‘ख’ को ‘क’ 1,000 रुपये देता है। यह संदाय वचनपत्र का उन्मोचन करने के लिए उपयोजित किया जाना है।
(ख) अन्य ऋणों के साथ-साथ ‘ख’ को ‘क’ 567 रुपये का देनदार है। ‘क’ से ‘ख’ इस राशि के संदाय की लिखित  माँग करता है। ‘ख’ को ‘क’ 567 रुपये भेजता है। यह संदाय उस ऋण के उन्मोचन के लिए उपयोजित किया जाना है जिनके संदाय की माँग ‘ख’ ने की थी।

Indian Contract Act Section-59 (IC Act Section-59 in English)

Application of payment, where debt to be discharged is indicated-

Where a debtor, owing several distinct debts to one person, makes a payment to him, either with express intimation, or under circumstances implying, that the payment is to be applied to the discharge of some particular debt, the payment, if accepted, must be applied accordingly.
Illustrations
(a) A owes B, among other debts, 1,000 rupees upon a promissory note, which falls due on the first June. He owes B no other debt of that amount. On the first June, A pays to B 1,000 rupees. The payment is to be applied to the discharge of the promissory note.
(b) A owes to B, along other debts, the sum of 567 rupees. B writes to A and demands payment of this sum. A sends to B 567 rupees. This payment is to be applied to the discharge of the debt of which B had demanded payment.

हमारा प्रयास भारतीय संविदा अधिनियम (Indian Contract Act Section) की धारा 59 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 58 | Indian Contract Act Section 58

भारतीय संविदा अधिनियम Indian Contract Act (ICA Section-58) in Hindi के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 58 के अनुसार ऐसे अनुकल्पी वचन की दशा में, जिसकी एक शाखा वैध हो और दूसरी अवैध, केवल वैध शाखा का ही प्रवर्तन कराया जा सकता है, जिसे IC Act Section-58 के अन्तर्गत परिभाषित किया गया है।

भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 58 (Indian Contract Act Section-58) का विवरण

भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 58 IC Act Section-58 के अनुसार ऐसे अनुकल्पी वचन की दशा में, जिसकी एक शाखा वैध हो और दूसरी अवैध, केवल वैध शाखा का ही प्रवर्तन कराया जा सकता है।

भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 58 (IC Act Section-58 in Hindi)

अनुकल्पी वचन जिसकी एक शाखा अवैध हो-

ऐसे अनुकल्पी वचन की दशा में, जिसकी एक शाखा वैध हो और दूसरी अवैध, केवल वैध शाखा का ही प्रवर्तन कराया जा सकता है।
दृष्टान्त
‘क’ और ‘ख’ करार करते हैं कि ‘ख’ को ‘क’ 1,000 देगा, जिसके लिए के’ को ‘ख’ तत्पश्चात् या तो चावल या तस्करित अफीम परिदत्त करेगा।
यह चावल परिदत्त करने की विधिमान्य संविदा है और अफीम के बारे में शून्य करार है।

Indian Contract Act Section-58 (IC Act Section-58 in English)

Alternative promise, one branch being illegal-

In the case of an alternative promise, one branch of which is legal and the other illegal, the legal branch alone can be enforced.
Illustration
A and B agree that A shall pay B 1,000 rupees, for which B shall afterwards deliver to A either rice or smuggled opium.
This is a valid contract to deliver rice, and a void agreement as to the opium.

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भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 57 | Indian Contract Act Section 57

भारतीय संविदा अधिनियम Indian Contract Act (ICA Section-57) in Hindi के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 57 के अनुसार जहाँ कि कोई व्यक्ति, प्रथमत: कुछ ऐसी बातें करने का, जो वैध हों, और द्वितीयतः विनिर्देशित परिस्थितियों में, कुछ अन्य बातें करने का, जो अवैध हों, व्यतिकारी वचन देते हैं, वहाँ वचनों का प्रथम संवर्ग, संविदा है किन्तु द्वितीय संवर्ग शून्य करार है, जिसे IC Act Section-57 के अन्तर्गत परिभाषित किया गया है।

भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 57 (Indian Contract Act Section-57) का विवरण

भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 57 IC Act Section-57 के अनुसार जहाँ कि कोई व्यक्ति, प्रथमत: कुछ ऐसी बातें करने का, जो वैध हों, और द्वितीयतः विनिर्देशित परिस्थितियों में, कुछ अन्य बातें करने का, जो अवैध हों, व्यतिकारी वचन देते हैं, वहाँ वचनों का प्रथम संवर्ग, संविदा है किन्तु द्वितीय संवर्ग शून्य करार है।

भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 57 (IC Act Section-57 in Hindi)

वैध बातों, और ऐसी अन्य बातों को भी, जो अवैध हों, करने का व्यतिकारी वचन-

जहाँ कि कोई व्यक्ति, प्रथमत: कुछ ऐसी बातें करने का, जो वैध हों, और द्वितीयतः विनिर्देशित परिस्थितियों में, कुछ अन्य बातें करने का, जो अवैध हों, व्यतिकारी वचन देते हैं, वहाँ वचनों का प्रथम संवर्ग, संविदा है किन्तु द्वितीय संवर्ग शून्य करार है।
दृष्टान्त
‘क’ और ‘ख’ करार करते हैं कि ‘ख’ को एक गृह ‘क’ 10,000 रुपये में बेचेगा, किन्तु यदि ‘ख’ उसे एक द्यूत​गृह के रूप में उपयोग में लाए तो वह ‘क’ को उसके लिए 50,000 रुपये देगा। 
व्यतिकारी बचनों का, अर्थात् गृह को बेचने का और उसके लिए 10,000 रुपये देने का प्रथम वचन-संवर्ग एक संविदा है।
द्वितीय संवर्ग एक विधि-विरुद्ध उद्देश्य के लिए है, अर्थात् इस उद्देश्य के लिए है कि ‘ख’ उस गृह को द्यूत​गृह के रूप में उपयोग में लाए, और वह शून्य करार है।

Indian Contract Act Section-57 (IC Act Section-57 in English)

Reciprocal promise to do things legal, and also other things illegal-

Where persons reciprocally promise, firstly to do certain things which are legal, and secondly, under specified circumstances, to do certain other things which are illegal, the first set of promises is a contract, but the second is a void agreement.
Illustration
A and B agree that A shall sell B a house for 10,000 rupees, but that, if B uses it as a gambling house, he shall pay A 50,000 rupees for it. 
The first set of reciprocal promises, namely, to sell the house and to pay 10,000 rupees for it, is a contract. 
The second set is for an unlawful object, namely, that B may use the house as a gambling house, and is a void agreement.

हमारा प्रयास भारतीय संविदा अधिनियम (Indian Contract Act Section) की धारा 57 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 56 | Indian Contract Act Section 56

भारतीय संविदा अधिनियम Indian Contract Act (ICA Section-56) in Hindi के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 56 के अनुसार वह करार, जो ऐसा कार्य करने के लिए हो, जो स्वतः असम्भव है, शून्य है, अर्थात् ऐसा कार्य करने की संविदा, जो संविदा के किए जाने के पश्चात् असम्भव या किसी घटना के कारण जिसका निवारण वचनदाता नहीं कर सकता था, विधिविरुद्ध हो जाए, तब शून्य हो जाता है, जिसे IC Act Section-56 के अन्तर्गत परिभाषित किया गया है।

भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 56 (Indian Contract Act Section-56) का विवरण

भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 56 IC Act Section-56 के अनुसार वह करार, जो ऐसा कार्य करने के लिए हो, जो स्वतः असम्भव है, शून्य है, अर्थात् ऐसा कार्य करने की संविदा, जो संविदा के किए जाने के पश्चात् असम्भव या किसी घटना के कारण जिसका निवारण वचनदाता नहीं कर सकता था, विधिविरुद्ध हो जाए, तब शून्य हो जाता है।

भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 56 (IC Act Section-56 in Hindi)

असम्भव कार्य करने का करार-

वह करार, जो ऐसा कार्य करने के लिए हो, जो स्वतः असम्भव है, शून्य है।
उस कार्य को करने की संविदा जो तत्पश्चात् असम्भव या विधिविरुद्ध हो जाए –– ऐसा कार्य करने की संविदा, जो संविदा के किए जाने के पश्चात् असम्भव या किसी घटना के कारण जिसका निवारण वचनदाता नहीं कर सकता था, विधिविरुद्ध हो जाए, तब शून्य हो जाती है जब वह कार्य असम्भव या विधिविरुद्ध हो जाए।
ऐसे कार्य के अपालन से हुई हानि के लिए प्रतिकर जिसका असम्भव या विधिविरुद्ध होना ज्ञात हो — जहाँ कि एक व्यक्ति ने ऐसी कोई बात करने का वचन दिया हो जिसका असम्भव या विधिविरुद्ध होना वह जानता था या युक्तियुक्त तत्परता से जान सकता था और वचनग्रहीता नहीं जानता था, वहाँ जो कोई हानि ऐसे वचनग्रहीता को उस वचन के अपालन से हो, उसके लिए ऐसा वचनदाता ऐसे वचनग्रहीता को प्रतिकर देगा।
दृष्टान्त
 (क) जादू से गुप्तनिधि का पता चलाने का ‘ख’ से ‘क’ करार करता है। यह करार शून्य है।
(ख) ‘क’ और ‘ख’ आपस में विवाह करने की संविदा करते हैं; विवाह के लिए नियत समय से पूर्व ‘क’ पागल हो जाता है। संविदा शून्य हो जाती है।
(ग) ‘क’, जो पहले से ही ‘ग’ से विवाहित है और जिसके लिए बहुपत्नीत्व उस विधि द्वारा, जिसके वह अध्यधीन है, निषिद्ध है, ‘ख’ से विवाह करने की संविदा करता है। उसके वचन के अपालन से ‘ख’ को हुई हानि के लिए ‘क’ को उसे प्रतिकर देना होगा।
(घ), ‘क’ संविदा करता है कि वह एक विदेशी पत्तन पर ‘ख’ के लिए स्थोरा भरेगा। तत्पश्चात् ‘क’ की सरकार उस देश के विरुद्ध, जिसमें वह पत्तन स्थित है, युद्ध की घोषणा कर देती है। संविदा तब शून्य हो जाती है जब युद्ध घोषित किया जाता है।
(ङ) ‘ख’ द्वारा अग्रिम दी गई राशि के प्रतिफल पर ‘क’ छह मास के लिए एक नाट्यगृह में अभिनय करने की संविदा करता है। अनेक अवसरों पर ‘क’ बहुत बीमार होने के कारण अभिनय नहीं कर सकता। उन अवसरों पर अभिनय करने की संविदा शून्य हो जाती है।

Indian Contract Act Section-56 (IC Act Section-56 in English)

Agreement to do impossible act-

An agreement to do an act impossible in itself is void.
Contract to do act afterwards becoming impossible or unlawful — A contract to do an act which, after the contract is made, becomes impossible, or, by reason of some event which the promisor could not prevent, unlawful, becomes void when the act becomes impossible or unlawful.
Compensation for loss through non-performance of act known to be impossible or unlawful – Where one person has promised to do something which he knew, or, with reasonable diligence, might have known, and which the promisee did not know, to be impossible or unlawful, such promisor must make compensation to such promisee for any loss which such promisee sustains through the non-performance of the promise.
Illustrations
(a) A agrees with B to discover treasure by magic. The agreement is void.
(b) A and B contract to marry each other. Before the time fixed for the marriage, A goes mad. The contract becomes void.
(C) A contract to marry B, being already married to C, and being forbidden by the law to which he is subject to practise polygamy. A must make compensation to B for the loss caused to her by the non-performance of his promise.
(d) A contract to take in cargo for B at a foreign port. A’s Government afterwards declares war against the country in which the port is situated. The contract becomes void when war is declared.
(e) A contract to act at a theatre for six months in consideration of a sum paid in advance by B. On several occasions A is too ill to act. The contract to act on those occasions becomes void.

हमारा प्रयास भारतीय संविदा अधिनियम (Indian Contract Act Section) की धारा 56 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 55 | Indian Contract Act Section 55

 भारतीय संविदा अधिनियम Indian Contract Act (ICA Section-55) in Hindi के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 55 के अनुसार जबकि किसी संविदा का एक पक्षकार किसी बात को विनिर्दिष्ट समय पर या उसके पूर्व, या किन्हीं बातों को विनिर्दिष्ट समयों पर या उनसे पूर्व करने का वचन दे और ऐसी किसी भी बात को उस विनिर्दिष्ट समय पर या उससे पूर्व करने में असफल रहे, तब वह संविदा या उसमें से उतनी, जितनी का पालन न किया गया हो, वचनग्रहीता के विकल्प पर शून्यकरणीय हो जाएगी। यदि पक्षकारों का आशय यह रहा हो कि समय संविदा का मर्म होना चाहिये, जिसे IC Act Section-55 के अन्तर्गत परिभाषित किया गया है।

भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 55 (Indian Contract Act Section-55) का विवरण

भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 55 IC Act Section-55 के अनुसार जबकि किसी संविदा का एक पक्षकार किसी बात को विनिर्दिष्ट समय पर या उसके पूर्व, या किन्हीं बातों को विनिर्दिष्ट समयों पर या उनसे पूर्व करने का वचन दे और ऐसी किसी भी बात को उस विनिर्दिष्ट समय पर या उससे पूर्व करने में असफल रहे, तब वह संविदा या उसमें से उतनी, जितनी का पालन न किया गया हो, वचनग्रहीता के विकल्प पर शून्यकरणीय हो जाएगी। यदि पक्षकारों का आशय यह रहा हो कि समय संविदा का मर्म होना चाहिये।

भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 55 (IC Act Section-55 in Hindi)

उस संविदा में जिसमें समय मर्मभूत है नियत समय पर पालन न करने का प्रभाव-

जबकि किसी संविदा का एक पक्षकार किसी बात को विनिर्दिष्ट समय पर या उसके पूर्व, या किन्हीं बातों को विनिर्दिष्ट समयों पर या उनसे पूर्व करने का वचन दे और ऐसी किसी भी बात को उस विनिर्दिष्ट समय पर या उससे पूर्व करने में असफल रहे, तब वह संविदा या उसमें से उतनी, जितनी का पालन न किया गया हो, वचनग्रहीता के विकल्प पर शून्यकरणीय हो जाएगी। यदि पक्षकारों का आशय यह रहा हो कि समय संविदा का मर्म होना चाहिये।
ऐसी असफलता का प्रभाव जब समय मर्मभूत नहीं है — यदि पक्षकारों का यह आशय न रहा हो कि समय संविदा का मर्म होना चाहिये तो संविदा ऐसी बात को विनिर्दिष्ट समय पर या उससे पूर्व करने में असफल रहने से शून्यकरणीय नहीं होगी, किन्तु वचनग्रहीता ऐसी असफलता से उसे हुई किसी भी हानि के लिए वचनदाता से प्रतिकार पाने का हकदार है।
करारित समय से भिन्न समय पर किए गए पालन के प्रतिग्रहण का प्रभाव – यदि ऐसी संविदा की दशा में, जो करारित समय पर वचन के पालन में वचनदाता की असफलता के कारण शून्यकरणीय हो, वचनग्रहीता ऐसे वचन का करारित समय से भिन्न किसी समय पर किया गया पालन प्रतिग्रहीत कर ले तो वचनग्रहीता करारित समय पर वचन के अपालन से हुई किसी हानि के लिए प्रतिकर का दावा नहीं कर सकेगा जब तक कि उसने ऐसे प्रतिग्रहण के समय अपने ऐसा करने के आशय की सूचना वचनदाता को न दे दी हो।

Indian Contract Act Section-55 (IC Act Section-55 in English)

Effect of failure to perform at a fixed time, in contract in which time is essential-

When a party to a contract promises to do a certain thing at or before a specified time, or certain things at or before specified times, and fails to do any such thing at or before the specified time, the contract, or so much of it as has not been performed, becomes voidable at the option of the promisee, if the intention of the parties was that time should be of the essence of the contract.
Effect of such failure when time is not essential – If it was not the intention of the parties that time should be of the essence of the contract, the contract does not become voidable by the failure to do such thing at or before the specified time; but the promisee is entitled to compensation from the promisor for any loss occasioned to him by such failure.
Effect of acceptance of performance at time other than that agreed upon – If, in case of a contract voidable on account of the promisor’s failure to perform his promise at the time agreed, the promisee accepts performance of such promise at any time other than that agreed, the promisee cannot claim compensation for any loss occasioned by the nonperformance of the promise at the time agreed, unless, at the time of such acceptance he gives notice to the promisor of his intention to do so.

हमारा प्रयास भारतीय संविदा अधिनियम (Indian Contract Act Section) की धारा 55 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।