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किशोर न्याय अधिनियम की धारा 53 | Juvenile Justice Act Section 53

किशोर न्याय अधिनियम JJ Act (Juvenile Justice Act Section-53) in Hindi के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। किशोर न्याय अधिनियम की धारा 53 के अनुसार वे सेवाएं, जो बालकों के पुनर्वास और पुनः मिलाने की प्रक्रिया में इस अधिनियम के अधीन रजिस्ट्रीकृत संस्थाओं द्वारा प्रदान की जाएंगी, ऐसी रीति में होंगी, जो विहित की जाएं, जिसमें निम्नलिखित हो सकेंगी, जिसे JJ Act Section-53 के अन्तर्गत परिभाषित किया गया है।

किशोर न्याय अधिनियम की धारा 53 (Juvenile Justice Act Section-53) का विवरण

किशोर न्याय अधिनियम की धारा 53 JJ Act Section-53 के तहत किशोर न्याय बोर्ड (जेजेबी) वे सेवाएं, जो बालकों के पुनर्वास और पुनः मिलाने की प्रक्रिया में इस अधिनियम के अधीन रजिस्ट्रीकृत संस्थाओं द्वारा प्रदान की जाएंगी, ऐसी रीति में होंगी, जो विहित की जाएं, जिसमें निम्नलिखित हो सकेंगी।

किशोर न्याय अधिनियम की धारा 53 (JJ Act Section-53 in Hindi)

इस अधिनियम के अधीन रजिस्ट्रीकृत संस्थाओं में पुनर्वास और पुनः मिलाने की सेवाएं और उनका प्रबंध

(1) वे सेवाएं, जो बालकों के पुनर्वास और पुनः मिलाने की प्रक्रिया में इस अधिनियम के अधीन रजिस्ट्रीकृत संस्थाओं द्वारा प्रदान की जाएंगी, ऐसी रीति में होंगी, जो विहित की जाएं, जिसमें निम्नलिखित हो सकेंगी–
(i) विहित मानकों के अनुसार आधारभूत आवश्यकताएं, जैसे खाना, आश्रय, कपड़े और चिकित्सा सुविधा;
(ii) विशेष जरूरतों वाले बालकों के लिए उपस्कर, जैसे व्हील चेयर, प्रोस्थेटिक युक्तियां, श्रवण सहाय यंत्र, ब्रेल किट या यथापेक्षित कोई अन्य उपयुक्त साधन और साधित्र; 
(iii) विशेष जरूरतों वाले बालकों के लिए उपयुक्त शिक्षा, जिसके अंतर्गत अनुपूरक शिक्षा,विशेष शिक्षा और समुचित शिक्षा भी है: 
परंतु छह वर्ष से चौदह वर्ष के बीच की आयु वाले बालकों के लिए निःशुल्क और अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 (2009 का 35) के उपबंध लागू होंगे; 
(iv) कौशल विकास;
(v) उपजीविकाजन्य थेरेपी और जीवन कौशल शिक्षा; 
(vi) मानसिक स्वास्थ्य मध्यक्षेप, जिसके अंतर्गत बालक की जरूरत के लिए विनिर्दिष्ट परामर्श भी है; 
(vii) आमोद-प्रमोद क्रियाकलाप, जिसके अंतर्गत खेलकूद और सांस्कृतिक क्रियाकलाप भी है; 
(viii) विधिक सहायता, जहां अपेक्षित हो;
(ix) शिक्षा, व्यावसायिक प्रशिक्षण, निराव्यसन, रोगों के उपचार के लिए परामर्श सेवाएं, जहां अपेक्षित हों; 
(x) देखरेख प्रबंध, जिसके अंतर्गत व्यष्टिक देखरेख योजना की तैयारी और उसका चालू रहना भी है;
(xi) जन्म रजिस्ट्रीकरण;
(xii) पहचान का सबूत प्राप्त करने के लिए सहायता, जहां अपेक्षित हो; और
(xiii) कोई अन्य सेवा, जो बालक के कल्याण को सुनिश्चित करने के लिए राज्य सरकार, रजिस्ट्रीकृत या योग्य व्यष्टिकों या संस्थाओं द्वारा या तो प्रत्यक्षतः या परामर्श सेवाओं के माध्यम से युक्तियुक्त रूप से प्रदान की जा सके ।
(2) संस्था के प्रबंध और प्रत्येक बालक की प्रगति को मानीटर करने के लिए प्रत्येक संस्था की, ऐसी रीति में, जो विहित की जाए, स्थापित की गई एक प्रबंध समिति होगी ।
(3) छह वर्ष से ऊपर के बालकों को रखने वाली प्रत्येक संस्था का प्रभारी अधिकारी, बालकों को ऐसे क्रियाकलापों में भाग लेने के लिए, जो संस्था में बालकों की सुरक्षा और कल्याण के लिए विहित किए जाएं, बाल समितियां स्थापित करने को सुकर बनाएगा ।

Juvenile Justice Act Section-53 (JJ Act Section-53 in English)

Rehabilitation and re-integration services in institutions registered under this Act and management thereof

(1) The services that shall be provided, by the institutions registered under this Act in the process of rehabilitation and re-integration of children, shall be in such manner as may be prescribed, which may include—
(i) basic requirements such as food, shelter, clothing and medical attention as per the prescribed standards;
(ii) equipment such as wheel-chairs, prosthetic devices, hearing aids, braille kits, or any other suitable aids and appliances as required, for children with special needs;
(iii) appropriate education, including supplementary education, special education, and appropriate education for children with special needs:
Provided that for children between the age of six to fourteen years, the provisions of the Right of Children to Free and Compulsory Education Act, 2009 (35 of 2009) shall apply;
(iv) skill development;
(v) occupational therapy and life skill education;
(vi) mental health interventions, including counselling specific to the need of the child;
(vii) recreational activities including sports and cultural activities;
(viii) legal aid where required;
(ix) referral services for education, vocational training, de-addiction, treatment of diseases where required;
(x) case management including preparation and follow up of individual care plan;
(xi) birth registration;
(xii) assistance for obtaining the proof of identity, where required; and
(xiii) any other service that may reasonably be provided in order to ensure the well-being of the child, either directly by the State Government, registered or fit individuals or institutions or through referral services.
(2) Every institution shall have a Management Committee, to be set up in a manner as may be prescribed, to manage the institution and monitor the progress of every child.
(3) The officer in-charge of every institution, housing children above six years of age, shall facilitate setting up of childrens committees for participating in such activities as may be prescribed, for the safety and well-being of children in the institution.

हमारा प्रयास किशोर न्याय अधिनियम (Juvenile Justice Act Section) की धारा 53 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

किशोर न्याय अधिनियम की धारा 52 | Juvenile Justice Act Section 52

किशोर न्याय अधिनियम JJ Act (Juvenile Justice Act Section-52) in Hindi के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। किशोर न्याय अधिनियम की धारा 52 के अनुसार बोर्ड या समिति, किसी बालक की देखरेख, संरक्षण और उपचार के लिए किसी विनिर्दिष्ट अवधि के लिए और ऐसी रीति में, जो विहित की जाए, किसी बालक को अस्थायी रूप से लेने के लिए किसी व्यक्ति को उसके प्रत्यय पत्र के सम्यक् सत्यापन के पश्चात् योग्य व्यक्ति के रूप में मान्यता प्रदान कर सकेगी, जिसे JJ Act Section-52 के अन्तर्गत परिभाषित किया गया है।

किशोर न्याय अधिनियम की धारा 52 (Juvenile Justice Act Section-52) का विवरण

किशोर न्याय अधिनियम की धारा 52 JJ Act Section-52 के तहत किशोर न्याय बोर्ड (जेजेबी) बोर्ड या समिति, किसी बालक की देखरेख, संरक्षण और उपचार के लिए किसी विनिर्दिष्ट अवधि के लिए और ऐसी रीति में, जो विहित की जाए, किसी बालक को अस्थायी रूप से लेने के लिए किसी व्यक्ति को उसके प्रत्यय पत्र के सम्यक् सत्यापन के पश्चात् योग्य व्यक्ति के रूप में मान्यता प्रदान कर सकेगी।

किशोर न्याय अधिनियम की धारा 52 (JJ Act Section-52 in Hindi)

योग्य व्यक्ति

(1) बोर्ड या समिति, किसी बालक की देखरेख, संरक्षण और उपचार के लिए किसी विनिर्दिष्ट अवधि के लिए और ऐसी रीति में, जो विहित की जाए, किसी बालक को अस्थायी रूप से लेने के लिए किसी व्यक्ति को उसके प्रत्यय पत्र के सम्यक् सत्यापन के पश्चात् योग्य व्यक्ति के रूप में मान्यता प्रदान कर सकेगी । 
(2) यथास्थिति, बोर्ड या समिति, उपधारा (1) के अधीन प्रदान की गई मान्यता को लेखबद्ध किए जाने वाले कारणों से वापस ले सकेगी।

Juvenile Justice Act Section-52 (JJ Act Section-52 in English)

Fit person

(1) The Board or the Committee shall, after due verification of credentials, recognise any person fit to temporarily receive a child for care, protection and treatment of such child for a specified period and in the manner as may be prescribed.
(2) The Board or Committee, as the case may be, may withdraw the recognition granted under subsection (1) for reasons to be recorded in writing.

हमारा प्रयास किशोर न्याय अधिनियम (Juvenile Justice Act Section) की धारा 52 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

किशोर न्याय अधिनियम की धारा 51 | Juvenile Justice Act Section 51

किशोर न्याय अधिनियम JJ Act (Juvenile Justice Act Section-51) in Hindi के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। किशोर न्याय अधिनियम की धारा 51 के अनुसार बोर्ड या समिति, तत्समय प्रवृत्त किसी विधि के अधीन रजिस्ट्रीकृत किसी सरकारी संगठन या स्वैच्छिक अथवा गैर-सरकारी संगठनों द्वारा चलाए जा रहे किसी सुविधा तंत्र और बालक की देखरेख करने वाले सुविधा तंत्र संगठन की उपयुक्तता की बाबत सम्यक् जांच के पश्चात् किसी विनिर्दिष्ट प्रयोजन के लिए किसी बालक का अस्थायी रूप से उत्तरदायित्व लेने के योग्य होने की मान्यता ऐसी रीति में प्रदान करेगी जो विहित की जाए, जिसे JJ Act Section-51 के अन्तर्गत परिभाषित किया गया है।

किशोर न्याय अधिनियम की धारा 51 (Juvenile Justice Act Section-51) का विवरण

किशोर न्याय अधिनियम की धारा 51 JJ Act Section-51 के तहत किशोर न्याय बोर्ड (जेजेबी) बोर्ड या समिति, तत्समय प्रवृत्त किसी विधि के अधीन रजिस्ट्रीकृत किसी सरकारी संगठन या स्वैच्छिक अथवा गैर-सरकारी संगठनों द्वारा चलाए जा रहे किसी सुविधा तंत्र और बालक की देखरेख करने वाले सुविधा तंत्र संगठन की उपयुक्तता की बाबत सम्यक् जांच के पश्चात् किसी विनिर्दिष्ट प्रयोजन के लिए किसी बालक का अस्थायी रूप से उत्तरदायित्व लेने के योग्य होने की मान्यता ऐसी रीति में प्रदान करेगी जो विहित की जाए। 

किशोर न्याय अधिनियम की धारा 51 (JJ Act Section-51 in Hindi)

उचित सुविधा तंत्र

( 1 ) बोर्ड या समिति, तत्समय प्रवृत्त किसी विधि के अधीन रजिस्ट्रीकृत किसी सरकारी संगठन या स्वैच्छिक अथवा गैर-सरकारी संगठनों द्वारा चलाए जा रहे किसी सुविधा तंत्र और बालक की देखरेख करने वाले सुविधा तंत्र संगठन की उपयुक्तता की बाबत सम्यक् जांच के पश्चात् किसी विनिर्दिष्ट प्रयोजन के लिए किसी बालक का अस्थायी रूप से उत्तरदायित्व लेने के योग्य होने की मान्यता ऐसी रीति में प्रदान करेगी जो विहित की जाए । 
(2) बोर्ड या समिति उपधारा (1) के अधीन प्रदान की गई मान्यता को लेखबद्ध किए जाने वाले कारणों से वापस ले सकेगी ।

Juvenile Justice Act Section-51 (JJ Act Section-51 in English)

Fit facility

(1) The Board or the Committee shall recognise a facility being run by a Governmental organisation or a voluntary or non-governmental organisation registered under any law for the time being in force to be fit to temporarily take the responsibility of a child for a specific purpose after due inquiry regarding the suitability of the facility and the organisation to take care of the child in such manner as may be prescribed.
(2) The Board or the Committee may withdraw the recognition under sub-section (1) for reasons to be recorded in writing.

हमारा प्रयास किशोर न्याय अधिनियम (Juvenile Justice Act Section) की धारा 51 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

किशोर न्याय अधिनियम की धारा 50 | Juvenile Justice Act Section 50

किशोर न्याय अधिनियम JJ Act (Juvenile Justice Act Section-50) in Hindi के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। किशोर न्याय अधिनियम की धारा 50 के अनुसार राज्य सरकार, प्रत्येक जिले या जिलों के समूह में स्वयं या स्वैच्छिक अथवा गैर सरकारी संगठनों के माध्यम से ऐसे बाल गृह स्थापित कर सकेगी और उनका रखरखाव कर सकेगी, जिन्हें बालकों को देखरेख, उपचार, शिक्षा, प्रशिक्षण, विकास और पुनर्वास के लिए देखरेख और संरक्षण के जरूरतमंद बालकों को रखने के लिए उस रूप में रजिस्ट्रीकृत किया जाएगा, जिसे JJ Act Section-50 के अन्तर्गत परिभाषित किया गया है।

किशोर न्याय अधिनियम की धारा 50 (Juvenile Justice Act Section-50) का विवरण

किशोर न्याय अधिनियम की धारा 50 JJ Act Section-50 के तहत किशोर न्याय बोर्ड (जेजेबी) राज्य सरकार, प्रत्येक जिले या जिलों के समूह में स्वयं या स्वैच्छिक अथवा गैर सरकारी संगठनों के माध्यम से ऐसे बाल गृह स्थापित कर सकेगी और उनका रखरखाव कर सकेगी, जिन्हें बालकों को देखरेख, उपचार, शिक्षा, प्रशिक्षण, विकास और पुनर्वास के लिए देखरेख और संरक्षण के जरूरतमंद बालकों को रखने के लिए उस रूप में रजिस्ट्रीकृत किया जाएगा।

किशोर न्याय अधिनियम की धारा 50 (JJ Act Section-50 in Hindi)

बाल गृह

(1) राज्य सरकार, प्रत्येक जिले या जिलों के समूह में स्वयं या स्वैच्छिक अथवा गैर सरकारी संगठनों के माध्यम से ऐसे बाल गृह स्थापित कर सकेगी और उनका रखरखाव कर सकेगी, जिन्हें बालकों को देखरेख, उपचार, शिक्षा, प्रशिक्षण, विकास और पुनर्वास के लिए देखरेख और संरक्षण के जरूरतमंद बालकों को रखने के लिए उस रूप में रजिस्ट्रीकृत किया जाएगा ।
(2) राज्य सरकार, किसी बाल गृह को, बालकों के लिए विशेष जरूरतों वाले ऐसे उपयुक्त गृह के रूप में अभिहित कर सकेगी, जो आवश्यकता पर निर्भर करते हुए विशिष्ट सेवा प्रदान करता है।
(3) राज्य सरकार, नियमों द्वारा बाल गृहों की मानीटरी और प्रबंध का उपबंध कर सकेगी,जिसके अंतर्गत प्रदत्त प्रत्येक बालक के लिए व्यष्टिक देखरेख योजना के आधार पर उनके द्वारा प्रदत्त की जाने वाली सेवाओं का स्तर और प्रकृति भी है।

Juvenile Justice Act Section-50 (JJ Act Section-50 in English)

Children’s Home

(1) The State Government may establish and maintain, in every district or group of districts, either by itself or through voluntary or non-governmental organisations, Childrens Homes, which shall be registered as such, for the placement of children in need of care and protection for their care, treatment, education, training, development and rehabilitation.
(2) The State Government shall designate any Childrens Home as a home fit for children with special needs delivering specialised services, depending on requirement.
(3) The State Government may, by rules, provide for the monitoring and management of Childrens Homes including the standards and the nature of services to be provided by them, based on individual care plans for each child.

हमारा प्रयास किशोर न्याय अधिनियम (Juvenile Justice Act Section) की धारा 50 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

किशोर न्याय अधिनियम की धारा 49 | Juvenile Justice Act Section 49

किशोर न्याय अधिनियम JJ Act (Juvenile Justice Act Section-49) in Hindi के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। किशोर न्याय अधिनियम की धारा 49 के अनुसार राज्य सरकार, धारा 41 के अधीन रजिस्ट्रीकृत किसी राज्य में कम से कम एक सुरक्षित स्थान की स्थापना करेगी जिससे अठारह वर्ष से अधिक आयु के किसी व्यक्ति को या विधि का उल्लंघन करने वाले किसी बालक को, जो सोलह से अठारह वर्ष की आयु के बीच का है और कोई जघन्य अपराध कारित करने का अभियुक्त है या सिद्धदोष ठहराया गया है, रखा जा सके, जिसे JJ Act Section-49 के अन्तर्गत परिभाषित किया गया है।

किशोर न्याय अधिनियम की धारा 49 (Juvenile Justice Act Section-49) का विवरण

किशोर न्याय अधिनियम की धारा 49 JJ Act Section-49 के तहत किशोर न्याय बोर्ड (जेजेबी) राज्य सरकार, धारा 41 के अधीन रजिस्ट्रीकृत किसी राज्य में कम से कम एक सुरक्षित स्थान की स्थापना करेगी जिससे अठारह वर्ष से अधिक आयु के किसी व्यक्ति को या विधि का उल्लंघन करने वाले किसी बालक को, जो सोलह से अठारह वर्ष की आयु के बीच का है और कोई जघन्य अपराध कारित करने का अभियुक्त है या सिद्धदोष ठहराया गया है, रखा जा सके।

किशोर न्याय अधिनियम की धारा 49 (JJ Act Section-49 in Hindi)

सुरक्षित स्थान

(1) राज्य सरकार, धारा 41 के अधीन रजिस्ट्रीकृत किसी राज्य में कम से कम एक सुरक्षित स्थान की स्थापना करेगी जिससे अठारह वर्ष से अधिक आयु के किसी व्यक्ति को या विधि का उल्लंघन करने वाले किसी बालक को, जो सोलह से अठारह वर्ष की आयु के बीच का है और कोई जघन्य अपराध कारित करने का अभियुक्त है या सिद्धदोष ठहराया गया है, रखा जा सके ।
(2) प्रत्येक सुरक्षित स्थान में जांच की प्रक्रिया के दौरान ऐसे बालकों या व्यक्तियों के और कोई अपराध कारित करने के दोषसिद्ध बालकों या व्यक्तियों के ठहरने के लिए अलग प्रबंध और सुविधाएं होंगी ।
(3) राज्य सरकार, नियमों द्वारा उस प्रकार के स्थानों को, जिन्हें उपधारा (1) के अधीन सुरक्षित स्थान के रूप में अभिहित किया जा सकता है और उन सुविधाओं और सेवाओं को, जिनका उसमें उपबंध किया जाए, विहित कर सकेगी।

Juvenile Justice Act Section-49 (JJ Act Section-49 in English)

Place of safety

(1) The State Government shall set up atleast one place of safety in a State registered under section 41, so as to place a person above the age of eighteen years or child in conflict with law, who is between the age of sixteen to eighteen years and is accused of or convicted for committing a heinous offence.
(2) Every place of safety shall have separate arrangement and facilities for stay of such children or persons during the process of inquiry and children or persons convicted of committing an offence.
(3) The State Government may, by rules, prescribe the types of places that can be designated as place of safety under sub-section (1) and the facilities and services that may be provided therein.

हमारा प्रयास किशोर न्याय अधिनियम (Juvenile Justice Act Section) की धारा 49 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

किशोर न्याय अधिनियम की धारा 48 | Juvenile Justice Act Section 48

किशोर न्याय अधिनियम JJ Act (Juvenile Justice Act Section-48) in Hindi के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। किशोर न्याय अधिनियम की धारा 48 के अनुसारराज्य सरकार, प्रत्येक जिले या जिलों के समूह में, जो विधि का उल्लंघन करने वाले ऐसे बालकों के पुनर्वास के लिए अपेक्षित हों, जिनके बारे में यह पाया गया है। कि उन्होंने अपराध किया है और जो किशोर न्याय बोर्ड के धारा 18 के अधीन किए गए आदेश द्वारा वहां पर रखे गए हैं, स्वयं या स्वैच्छिक अथवा गैर सरकारी संगठनों के माध्यम से विशेष गृह स्थापित कर सकेगी और उनका रखरखाव कर सकेगी, जो उस रूप में ऐसी रीति में रजिस्ट्रीकृत किए जाएंगे, जो विहित की जाए, जिसे JJ Act Section-48 के अन्तर्गत परिभाषित किया गया है।

किशोर न्याय अधिनियम की धारा 48 (Juvenile Justice Act Section-48) का विवरण

किशोर न्याय अधिनियम की धारा 48 JJ Act Section-48 के तहत किशोर न्याय बोर्ड (जेजेबी) राज्य सरकार, प्रत्येक जिले या जिलों के समूह में, जो विधि का उल्लंघन करने वाले ऐसे बालकों के पुनर्वास के लिए अपेक्षित हों, जिनके बारे में यह पाया गया है। कि उन्होंने अपराध किया है और जो किशोर न्याय बोर्ड के धारा 18 के अधीन किए गए आदेश द्वारा वहां पर रखे गए हैं, स्वयं या स्वैच्छिक अथवा गैर सरकारी संगठनों के माध्यम से विशेष गृह स्थापित कर सकेगी और उनका रखरखाव कर सकेगी, जो उस रूप में ऐसी रीति में रजिस्ट्रीकृत किए जाएंगे, जो विहित की जाए।

किशोर न्याय अधिनियम की धारा 48 (JJ Act Section-48 in Hindi)

विशेष गृह

( 1 ) राज्य सरकार, प्रत्येक जिले या जिलों के समूह में, जो विधि का उल्लंघन करने वाले ऐसे बालकों के पुनर्वास के लिए अपेक्षित हों, जिनके बारे में यह पाया गया है। कि उन्होंने अपराध किया है और जो किशोर न्याय बोर्ड के धारा 18 के अधीन किए गए आदेश द्वारा वहां पर रखे गए हैं, स्वयं या स्वैच्छिक अथवा गैर सरकारी संगठनों के माध्यम से विशेष गृह स्थापित कर सकेगी और उनका रखरखाव कर सकेगी, जो उस रूप में ऐसी रीति में रजिस्ट्रीकृत किए जाएंगे, जो विहित की जाए ।
(2) राज्य सरकार, विशेष गृहों के प्रबंध और मॉनीटरी के लिए नियमों द्वारा उपबंध कर सकेगी, जिसके अंतर्गत उनके द्वारा दी गई सेवाओं के स्तर और विभिन्न किस्में, जो किसी बालक को समाज में पुन: मिलाने के लिए आवश्यक हैं और वे परिस्थितियां, जिनके अधीन और वह रीति भी है, जिसमें किसी विशेष गृह का रजिस्ट्रीकरण मंजूर किया और वापस लिया जा सकेगा ।
(3) उपधारा (2) के अधीन बनाए गए नियमों में विधि का उल्लंघन करते पाए गए बालकों की आयु, लिंग, उनके द्वारा कारित अपराध की प्रकृति और बालक की मानसिक और शारीरिक प्रास्थिति के आधार पर उन्हें विलग और पृथक् रखने के उपबंध भी किए जा सकेंगे।

Juvenile Justice Act Section-48 (JJ Act Section-48 in English)

Special homes

(1) The State Government may establish and maintain either by itself or through voluntary or non-governmental organisations, special homes, which shall be registered as such, in the manner as may be prescribed, in every district or a group of districts, as may be required for rehabilitation of those children in conflict with law who are found to have committed an offence and who are placed there by an order of the Juvenile Justice Board made under section 18.
(2) The State Government may, by rules, provide for the management and monitoring of special homes, including the standards and various types of services to be provided by them which are necessary for social re-integration of a child, and the circumstances under which, and the manner in which, the registration of a special home may be granted or withdrawn.
(3) The rules made under sub-section (2) may also provide for the segregation and separation of children found to be in conflict with law on the basis of age, gender, the nature of offence committed by them and the childs mental and physical status.

हमारा प्रयास किशोर न्याय अधिनियम (Juvenile Justice Act Section) की धारा 48 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।