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किशोर न्याय अधिनियम की धारा 47 | Juvenile Justice Act Section 47

किशोर न्याय अधिनियम JJ Act (Juvenile Justice Act Section-47) in Hindi के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। किशोर न्याय अधिनियम की धारा 47 के अनुसार राज्य सरकार, स्वयं या स्वैच्छिक अथवा गैर-सरकारी संगठनों के माध्यम से प्रत्येक जिला या जिलों के समूह में संप्रक्षण गृह स्थापित कर सकेगी और उनका रखरखाव कर सकेगी जिन्हें इस अधिनियम के अधीन किसी जांच के लंबित रहने के दौरान विधि का उल्लंघन करने के अभिकथित किसी बालक को अस्थायी रूप से रखने, उसकी देखरेख और पुनर्वास के लिए इस अधिनियम की धारा 41 के अधीन रजिस्ट्रीकृत किया जाएगा, जिसे JJ Act Section-47 के अन्तर्गत परिभाषित किया गया है।

किशोर न्याय अधिनियम की धारा 47 (Juvenile Justice Act Section-47) का विवरण

किशोर न्याय अधिनियम की धारा 47 JJ Act Section-47 के तहत किशोर न्याय बोर्ड (जेजेबी) राज्य सरकार, स्वयं या स्वैच्छिक अथवा गैर-सरकारी संगठनों के माध्यम से प्रत्येक जिला या जिलों के समूह में संप्रक्षण गृह स्थापित कर सकेगी और उनका रखरखाव कर सकेगी जिन्हें इस अधिनियम के अधीन किसी जांच के लंबित रहने के दौरान विधि का उल्लंघन करने के अभिकथित किसी बालक को अस्थायी रूप से रखने, उसकी देखरेख और पुनर्वास के लिए इस अधिनियम की धारा 41 के अधीन रजिस्ट्रीकृत किया जाएगा।

किशोर न्याय अधिनियम की धारा 47 (JJ Act Section-47 in Hindi)

संप्रेक्षण गृह

(1) राज्य सरकार, स्वयं या स्वैच्छिक अथवा गैर-सरकारी संगठनों के माध्यम से प्रत्येक जिला या जिलों के समूह में संप्रक्षण गृह स्थापित कर सकेगी और उनका रखरखाव कर सकेगी जिन्हें इस अधिनियम के अधीन किसी जांच के लंबित रहने के दौरान विधि का उल्लंघन करने के अभिकथित किसी बालक को अस्थायी रूप से रखने, उसकी देखरेख और पुनर्वास के लिए इस अधिनियम की धारा 41 के अधीन रजिस्ट्रीकृत किया जाएगा ।
(2) जहां राज्य सरकार की यह राय है कि उपधारा (1) के अधीन स्थापित या अनुरक्षित किसी गृह से भिन्न कोई रजिस्ट्रीकृत संस्था, इस अधिनियम के अधीन किसी जांच के लंबित रहने के दौरान विधि का उल्लंघन करने के अभिकथित ऐसे बालक को अस्थायी रूप से रखने के योग्य है, तो वह इस अधिनियम के प्रयोजनों के लिए ऐसी संस्था को संप्रेक्षण गृह के रूप में रजिस्ट्रीकृत कर सकेगी।
(3) राज्य सरकार, इस अधिनियम के अधीन बनाए गए नियमों द्वारा संप्रेक्षण गृहों के प्रबंध और मानीटरी के लिए उपबंध कर सकेगी, जिसके अंतर्गत विधि का उल्लंघन करने के अभिकथित किसी बालक के पुनर्वास और उसको समाज में मिलाने के लिए उनके द्वारा दी गई सेवाओं का स्तर और विभिन्न किस्में तथा ऐसी परिस्थितियां, जिनके अधीन और वह रीति भी है, जिसमें किसी संप्रेक्षण गृह का रजिस्ट्रीकरण मंजूर किया और वापस लिया जा सकेगा।
(4) विधि का उल्लंघन करने के लिए अभिकथित प्रत्येक ऐसे बालक को, जो माता या पिता,संरक्षक के भारसाधन में नहीं रखा जाता है और किसी संप्रेक्षण गृह में भेजा जाता है, बालक की शारीरिक और मानसिक प्रास्थिति और कारित अपराध की कोटि पर सम्यक विचार करने के पश्चात् बालक की आयु और लिंग के अनुसार उसे अलग रखा जाएगा।

Juvenile Justice Act Section-47 (JJ Act Section-47 in English)

Observation homes

(1) The State Government shall establish and maintain in every district or a group of districts, either by itself, or through voluntary or non-governmental organisations, observation homes, which shall be registered under section 41 of this Act, for temporary reception, care and rehabilitation of any child alleged to be in conflict with law, during the pendency of any inquiry under this Act.
(2) Where the State Government is of the opinion that any registered institution other than a home established or maintained under sub-section (1), is fit for the temporary reception of such child alleged to be in conflict with law during the pendency of any inquiry under this Act, it may register such institution as an observation home for the purposes of this Act.
(3) The State Government may, by rules made under this Act, provide for the management and monitoring of observation homes, including the standards and various types of services to be provided by them for rehabilitation and social integration of a child alleged to be in conflict with law and the circumstances under which, and the manner in which, the registration of an observation home may be granted or withdrawn.
(4) Every child alleged to be in conflict with law who is not placed under the charge of parent or guardian and is sent to an observation home shall be segregated according to the child’s age and gender, after giving due consideration to physical and mental status of the child and degree of the offence committed.

हमारा प्रयास किशोर न्याय अधिनियम (Juvenile Justice Act Section) की धारा 47 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

किशोर न्याय अधिनियम की धारा 46 | Juvenile Justice Act Section 46

किशोर न्याय अधिनियम JJ Act (Juvenile Justice Act Section-46) in Hindi के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। किशोर न्याय अधिनियम की धारा 46 के अनुसार किसी बालक के अट्ठारह वर्ष आयु पूरी करने पर किसी बालक देखरेख संस्था को छोड़ने पर बालक को समाज की मुख्य धारा में पुनः लाने को सुकर बनाने के लिए ऐसी रीति में, जो विहित की जाए, वित्तीय सहायता प्रदान की जा सकेगी, जिसे JJ Act Section-46 के अन्तर्गत परिभाषित किया गया है।

किशोर न्याय अधिनियम की धारा 46 (Juvenile Justice Act Section-46) का विवरण

किशोर न्याय अधिनियम की धारा 46 JJ Act Section-46 के तहत किशोर न्याय बोर्ड (जेजेबी) किसी बालक के अट्ठारह वर्ष आयु पूरी करने पर किसी बालक देखरेख संस्था को छोड़ने पर बालक को समाज की मुख्य धारा में पुनः लाने को सुकर बनाने के लिए ऐसी रीति में, जो विहित की जाए, वित्तीय सहायता प्रदान की जा सकेगी।

किशोर न्याय अधिनियम की धारा 46 (JJ Act Section-46 in Hindi)

बालक देखरेख संस्थाओं को छोड़ने वाले बालकों की पश्चातवर्ती देखरेख

किसी बालक के अट्ठारह वर्ष आयु पूरी करने पर किसी बालक देखरेख संस्था को छोड़ने पर बालक को समाज की मुख्य धारा में पुनः लाने को सुकर बनाने के लिए ऐसी रीति में, जो विहित की जाए, वित्तीय सहायता प्रदान की जा सकेगी ।

Juvenile Justice Act Section-46 (JJ Act Section-46 in English)

After care of children leaving child care institution

Any child leaving a child care institution on completion of eighteen years of age may be provided with financial support in order to facilitate childs re-integration into the mainstream of the society in the manner as may be prescribed.

हमारा प्रयास किशोर न्याय अधिनियम (Juvenile Justice Act Section) की धारा 46 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

किशोर न्याय अधिनियम की धारा 45 | Juvenile Justice Act Section 45

किशोर न्याय अधिनियम JJ Act (Juvenile Justice Act Section-45) in Hindi के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। किशोर न्याय अधिनियम की धारा 45 के अनुसार राज्य सरकार, व्यष्ट दर व्यष्टिक प्रवर्तकता, सामूहिक प्रवर्तकता या सामुदायिक प्रवर्तकता जैसी बालकों की प्रवर्तकता के विभिन्न कार्यक्रमों को हाथ में लेने के प्रयोजन के लिए नियम बना सकेगी जहां माता विधवा या विच्छिन्न विवाह स्त्री या कुटुंब द्वारा परित्यक्ता है या जहां बालक अनाथ हैं और विस्तारित कुटुंब के साथ रह रहे हैं या जहां माता-पिता जीवन के लिए संकटमय रोग से पीड़ित हैं अथवा जहां माता-पिता दुर्घटना के कारण अशक्त हो गए हैं, जिसे JJ Act Section-45 के अन्तर्गत परिभाषित किया गया है।

किशोर न्याय अधिनियम की धारा 45 (Juvenile Justice Act Section-45) का विवरण

किशोर न्याय अधिनियम की धारा 45 JJ Act Section-45 के तहत किशोर न्याय बोर्ड (जेजेबी) राज्य सरकार, व्यष्ट दर व्यष्टिक प्रवर्तकता, सामूहिक प्रवर्तकता या सामुदायिक प्रवर्तकता जैसी बालकों की प्रवर्तकता के विभिन्न कार्यक्रमों को हाथ में लेने के प्रयोजन के लिए नियम बना सकेगी जहां माता विधवा या विच्छिन्न विवाह स्त्री या कुटुंब द्वारा परित्यक्ता है या जहां बालक अनाथ हैं और विस्तारित कुटुंब के साथ रह रहे हैं या जहां माता-पिता जीवन के लिए संकटमय रोग से पीड़ित हैं अथवा जहां माता-पिता दुर्घटना के कारण अशक्त हो गए हैं।

किशोर न्याय अधिनियम की धारा 45 (JJ Act Section-45 in Hindi)

प्रवर्तकता

(1) राज्य सरकार, व्यष्ट दर व्यष्टिक प्रवर्तकता, सामूहिक प्रवर्तकता या सामुदायिक प्रवर्तकता जैसी बालकों की प्रवर्तकता के विभिन्न कार्यक्रमों को हाथ में लेने के प्रयोजन के लिए नियम बना सकेगी ।
(2) प्रवर्तकता मानदंडों के अंतर्गत निम्नलिखित होंगे,-
(i) जहां माता विधवा या विच्छिन्न विवाह स्त्री या कुटुंब द्वारा परित्यक्ता है;
(ii) जहां बालक अनाथ हैं और विस्तारित कुटुंब के साथ रह रहे हैं;
(iii) जहां माता-पिता जीवन के लिए संकटमय रोग से पीड़ित हैं;
(iv) जहां माता-पिता दुर्घटना के कारण अशक्त हो गए हैं और बालकों की वित्तीय और शारीरिक दोनों प्रकार से देखरेख करने में असमर्थ हैं।
(3) प्रवर्तकता की अवधि ऐसी होगी जो विहित की जाए ।
(4) प्रवर्तकता कार्यक्रम द्वारा बालकों के जीवन स्तर में सुधार लाने की दृष्टि से उनकी चिकित्सा, पोषण, शिक्षा संबंधी और अन्य आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए कुटुम्बों, बाल गृहों और विशेष गृहों को अनुपूरक सहायता प्रदान की जा सकेगी।

Juvenile Justice Act Section-45 (JJ Act Section-45 in English)

Sponsorship

(1) The State Government shall make rules for the purpose of undertaking various programmes of sponsorship of children, such as individual to individual sponsorship, group sponsorship or community sponsorship.
(2) The criteria for sponsorship shall include,—
(i) where mother is a widow or divorced or abandoned by family;
(ii) where children are orphan and are living with the extended family;
(iii) where parents are victims of life threatening disease;
(iv) where parents are incapacitated due to accident and unable to take care of children both financially and physically.
(3) The duration of sponsorship shall be such as may be prescribed.
(4) The sponsorship programme may provide supplementary support to families, to Children’s Homes and to special homes to meet medical, nutritional, educational and other needs of the children, with a view to improving their quality of life.

हमारा प्रयास किशोर न्याय अधिनियम (Juvenile Justice Act Section) की धारा 45 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

किशोर न्याय अधिनियम की धारा 44 | Juvenile Justice Act Section 44

किशोर न्याय अधिनियम JJ Act (Juvenile Justice Act Section-44) in Hindi के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। किशोर न्याय अधिनियम की धारा 44 के अनुसार देखरेख और संरक्षण के जरूरतमंद बालकों को पोषण देखरेख में, जिसके अंतर्गत समिति के आदेशों के माध्यम से उनकी देखरेख और संरक्षण के लिए सामूहिक पोषण देखरेख भी है, ऐसी प्रक्रिया का अनुसरण करके जो इस संबंध में विहित की जाए, किसी ऐसे कुटुंब में, जिसके अंतर्गत बालक के जैव या दत्तक माता-पिता नहीं हैं या राज्य सरकार द्वारा इस प्रयोजन के लिए उपयुक्त होने के रूप में मान्यताप्राप्त किसी असंबद्ध कुटुंब में, अल्पावधि या बढ़ाई अवधि के लिए रखा जा सकेगा, जिसे JJ Act Section-44 के अन्तर्गत परिभाषित किया गया है।

किशोर न्याय अधिनियम की धारा 44 (Juvenile Justice Act Section-44) का विवरण

किशोर न्याय अधिनियम की धारा 44 JJ Act Section-44 के तहत किशोर न्याय बोर्ड (जेजेबी) देखरेख और संरक्षण के जरूरतमंद बालकों को पोषण देखरेख में, जिसके अंतर्गत समिति के आदेशों के माध्यम से उनकी देखरेख और संरक्षण के लिए सामूहिक पोषण देखरेख भी है, ऐसी प्रक्रिया का अनुसरण करके जो इस संबंध में विहित की जाए, किसी ऐसे कुटुंब में, जिसके अंतर्गत बालक के जैव या दत्तक माता-पिता नहीं हैं या राज्य सरकार द्वारा इस प्रयोजन के लिए उपयुक्त होने के रूप में मान्यताप्राप्त किसी असंबद्ध कुटुंब में, अल्पावधि या बढ़ाई अवधि के लिए रखा जा सकेगा।

किशोर न्याय अधिनियम की धारा 44 (JJ Act Section-44 in Hindi)

पोषण देखरेख

(1) देखरेख और संरक्षण के जरूरतमंद बालकों को पोषण देखरेख में, जिसके अंतर्गत समिति के आदेशों के माध्यम से उनकी देखरेख और संरक्षण के लिए सामूहिक पोषण देखरेख भी है, ऐसी प्रक्रिया का अनुसरण करके जो इस संबंध में विहित की जाए, किसी ऐसे कुटुंब में, जिसके अंतर्गत बालक के जैव या दत्तक माता-पिता नहीं हैं या राज्य सरकार द्वारा इस प्रयोजन के लिए उपयुक्त होने के रूप में मान्यताप्राप्त किसी असंबद्ध कुटुंब में, अल्पावधि या बढ़ाई अवधि के लिए रखा जा सकेगा।
(2) पोषक कुटुंब का चयन, कुटुंब की योग्यता, आशय, क्षमता और बालक की देखरेख करने के पूर्व अनुभव के आधार पर होगा । 
(3) सहोदरों को पोषक कुटुंबों में तब तक एक साथ रखने का प्रयास किया जाएगा, जब तक उन्हें एक साथ रखना उनके सर्वोत्तम हित में हो।
(4) राज्य सरकार, बालकों का कल्याण सुनिश्चित करने के लिए निरीक्षण ऐसी प्रक्रिया का अनुसरण करने के पश्चात्, जो विहित की जाए, जिला बाल संरक्षण एकक के माध्यम से ऐसी पोषण देखरेख के लिए बालकों की संख्या को ध्यान में रखकर मासिक वित्त पोषण प्रदान करेगी ।
(5) उन दशाओं में, जहां बालक इस कारण से पोषण देखरेख में रखे गए हैं कि उनके माता पिता बालक की देखरेख करने के लिए अयोग्य या असमर्थ हैं, बालक के माता-पिता नियमित अंतरालों पर पोषक कुटुंब में बालक से तब तक मिल सकेंगे जब तक समिति, उसके लिए लेखबध्द किए जाने वाले कारणों से यह अनुभव न करे कि ऐसे मिलना बालक के सर्वोत्तम हित में नहीं है; और समिति द्वारा एक बार माता-पिता को बालक की देखरेख करने के योग्य अवधारित करने पर अंततः बालक माता-पिता के घर वापस जा सकेगा ।
(6) पोषक कुटुंब, बालक को शिक्षा, स्वास्थ्य और पोषण प्रदान करने के लिए उत्तरदायी होगा और वह बालक का ऐसी रीति में समग्र कल्याण सुनिश्चित करेगा जो विहित की जाए ।
(7) राज्य सरकार, ऐसी प्रक्रिया, मानदंड और रीति को, जिसमें बालक को पोषण देखरेख सेवाएं प्रदान की जाएंगी, परिभाषित करने के प्रयोजन के लिए नियम बना सकेगी ।
(8) समिति द्वारा बालक के कल्याण की जांच करने के लिए ऐसे रूप विधान में, जो विहित किया जाए, प्रत्येक मास पोषक कुटुंबों का निरीक्षण किया जाएगा और जब कभी किसी पोषक कुटुंब मैं बालक की देखरेख करने में कमी पाई जाती है तो बालक को उस पोषक कुटुंब से हटा दिया जाएगा और किसी दूसरे ऐसे पोषक कुटुंब में भेज दिया जाएगा जो समिति उचित समझे ।
(9) ऐसे किसी बालक को, जिसे समिति द्वारा दत्तक ग्रहण योग्य पाया जाता है, दीर्घकालीन पोषण देखरेख में नहीं दिया जाएगा।

Juvenile Justice Act Section-44 (JJ Act Section-44 in English)

Foster care

(1) The children in need of care and protection may be placed in foster care, including group foster care for their care and protection through orders of the Committee, after following the procedure as may be prescribed in this regard, in a family which does not include the childs biological or adoptive parents or in an unrelated family recognised as suitable for the purpose by the State Government, for a short or extended period of time.
(2) The selection of the foster family shall be based on familys ability, intent, capacity and prior experience of taking care of children.
(3) All efforts shall be made to keep siblings together in foster families, unless it is in their best interest not to be kept together.
(4) The State Government, after taking into account the number of children, shall provide monthly funding for such foster care through District Child Protection Unit after following the procedure, as may be prescribed, for inspection to ensure well being of the children.
(5) In cases where children have been placed in foster care for the reason that their parents have been found to be unfit or incapacitated by the Committee, the childs parents may visit the child in the foster family at regular intervals, unless the Committee feels that such visits are not in the best interest of the child, for reasons to be recorded therefor; and eventually, the child may return to the parents homes once the parents are determined by the Committee to be fit to take care of the child.
(6) The foster family shall be responsible for providing education, health and nutrition to the child and shall ensure the overall well being of the child in such manner, as may be prescribed.
(7) The State Government may make rules for the purpose of defining the procedure, criteria and the manner in which foster care services shall be provided for children.
(8) The inspection of foster families shall be conducted every month by the Committee in the form as may be prescribed to check the well-being of the child and whenever a foster family is found lacking in taking care of the child, the child shall be removed from that foster family and shifted to another foster family as the Committee may deem fit.
(9) No child regarded as adoptable by the Committee shall be given for long-term foster care.

हमारा प्रयास किशोर न्याय अधिनियम (Juvenile Justice Act Section) की धारा 44 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

किशोर न्याय अधिनियम की धारा 43 | Juvenile Justice Act Section 43

किशोर न्याय अधिनियम JJ Act (Juvenile Justice Act Section-43) in Hindi के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। किशोर न्याय अधिनियम की धारा 43 के अनुसार राज्य सरकार, स्वयं या स्वैच्छिक अथवा गैर-सरकारी संगठनों के माध्यम से उतने खुले आश्रय स्थापित कर सकेगी और उनका रखरखाव कर सकेगी, जितने अपेक्षित हो और ऐसे खुले आश्रय का ऐसी रीति में, जो विहित की जाए, उस रूप में रजिस्टर किया जाएगा, जिसे JJ Act Section-43 के अन्तर्गत परिभाषित किया गया है।

किशोर न्याय अधिनियम की धारा 43 (Juvenile Justice Act Section-43) का विवरण

किशोर न्याय अधिनियम की धारा 43 JJ Act Section-43 के तहत किशोर न्याय बोर्ड (जेजेबी) राज्य सरकार, स्वयं या स्वैच्छिक अथवा गैर-सरकारी संगठनों के माध्यम से उतने खुले आश्रय स्थापित कर सकेगी और उनका रखरखाव कर सकेगी, जितने अपेक्षित हो और ऐसे खुले आश्रय का ऐसी रीति में, जो विहित की जाए, उस रूप में रजिस्टर किया जाएगा|

किशोर न्याय अधिनियम की धारा 43 (JJ Act Section-43 in Hindi)

खुला आश्रय

(1) राज्य सरकार, स्वयं या स्वैच्छिक अथवा गैर-सरकारी संगठनों के माध्यम से उतने खुले आश्रय स्थापित कर सकेगी और उनका रखरखाव कर सकेगी, जितने अपेक्षित हो और ऐसे खुले आश्रय का ऐसी रीति में, जो विहित की जाए, उस रूप में रजिस्टर किया जाएगा |
(2) उपधारा (1) में निर्दिष्ट खुले आश्रय, आवासिक सहायता के जरूरतमंद बालकों के लिए अल्पकालिक आधार पर, ऐसे बालकों के साथ दुर्व्यवहार करने या बालाहार बंचन से संरक्षण या उन्हें सड़कों पर निराश्रित छोड़े जाने से बचाने के उद्देश्य से समुदाय आधारित सुविधा के रूप में कार्य करेंगे ।
(3) खुले आश्रय प्रत्येक मास ऐसी रीति में, जो विहित की जाए, आश्रय की सेवाओं का लाभ उठाने वाले बालकों की बाबत जिला बालक संरक्षण एकक और समिति को सूचना भेजेंगे।

Juvenile Justice Act Section-43 (JJ Act Section-43 in English)

Open shelter

(1) The State Government may establish and maintain, by itself or through voluntary or non-governmental organisations, as many open shelters as may be required, and such open shelters shall be registered as such, in the manner as may be prescribed.
(2) The open shelters referred to in sub-section (1) shall function as a community based facility for children in need of residential support, on short-term basis, with the objective of protecting them from abuse or weaning them, or keeping them, away from a life on the streets.
(3) The open shelters shall send every month information, in the manner as may be prescribed, regarding children availing the services of the shelter, to the District Child Protection Unit and the Committee.

हमारा प्रयास किशोर न्याय अधिनियम (Juvenile Justice Act Section) की धारा 43 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

किशोर न्याय अधिनियम की धारा 42 | Juvenile Justice Act Section 42

किशोर न्याय अधिनियम JJ Act (Juvenile Justice Act Section-42) in Hindi के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। किशोर न्याय अधिनियम की धारा 42 के अनुसार देखरेख और संरक्षण के लिए जरूरतमंद बालकों और विधि का उल्लंघन करने वाले बालकों को रखने वाली किसी संस्था के भारसाधक किसी व्यक्ति या किन्हीं व्यक्तियों की, जो धारा 41 की उपधारा (1) के उपबंधों का अनुपालन करने में असफल रहता है या रहते हैं, ऐसे कारावास से, जो एक वर्ष तक हो सकेगा या एक लाख रुपए से अन्यून के जमाने से या दोनों से दंडित किया जाएगा, जिसे JJ Act Section-42 के अन्तर्गत परिभाषित किया गया है।

किशोर न्याय अधिनियम की धारा 42 (Juvenile Justice Act Section-42) का विवरण

किशोर न्याय अधिनियम की धारा 42 JJ Act Section-42 के तहत किशोर न्याय बोर्ड (जेजेबी) देखरेख और संरक्षण के लिए जरूरतमंद बालकों और विधि का उल्लंघन करने वाले बालकों को रखने वाली किसी संस्था के भारसाधक किसी व्यक्ति या किन्हीं व्यक्तियों की, जो धारा 41 की उपधारा (1) के उपबंधों का अनुपालन करने में असफल रहता है या रहते हैं, ऐसे कारावास से, जो एक वर्ष तक हो सकेगा या एक लाख रुपए से अन्यून के जमाने से या दोनों से दंडित किया जाएगा।

किशोर न्याय अधिनियम की धारा 42 (JJ Act Section-42 in Hindi)

बाल देखरेख संस्था का रजिस्ट्रीकरण न कराए जाने के लिए शास्ति

देखरेख और संरक्षण के लिए जरूरतमंद बालकों और विधि का उल्लंघन करने वाले बालकों को रखने वाली किसी संस्था के भारसाधक किसी व्यक्ति या किन्हीं व्यक्तियों की, जो धारा 41 की उपधारा (1) के उपबंधों का अनुपालन करने में असफल रहता है या रहते हैं, ऐसे कारावास से, जो एक वर्ष तक हो सकेगा या एक लाख रुपए से अन्यून के जमाने से या दोनों से दंडित किया जाएगा :
परंतु रजिस्ट्रीकरण के लिए आवेदन करने में प्रत्येक तीस दिन के विलंब को एक पृथक् अपराध माना जाएगा।

Juvenile Justice Act Section-42 (JJ Act Section-42 in English)

 Penalty for non-registration of child care institutions

Any person, or persons, in-charge of an institution housing children in need of care and protection and children in conflict with law, who fails to comply with the provisions of sub-section (1) of section 41, shall be punished with imprisonment which may extend to one year or a fine of not less than one lakh rupees or both:
Provided that every thirty days delay in applying for registration shall be considered as a separate offence.

हमारा प्रयास किशोर न्याय अधिनियम (Juvenile Justice Act Section) की धारा 42 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।