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मोटर वाहन अधिनियम की धारा 171 | जहां दावा मंजूर किया गया है वहां ब्याज दिलाना | MV Act, Section- 171 in hindi | Award of interest where any claim is allowed.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए मोटर वाहन अधिनियम की धारा 171 के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है मोटर वाहन अधिनियम की धारा- 171, साथ ही इस धारा के अंतर्गत क्या परिभाषित किया गया है, यह सभी जानकारी इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

मोटर वाहन अधिनियम की धारा- 171 का विवरण

मोटर वाहन अधिनियम (Motor Vehicles Act) की धारा -171 के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। इस अध्याय के आधीन जहां कोई दावा अधिकरण इस अधिनियम के अधीन किए गए प्रतिकर के दावे को मंजूर करता है वहां ऐसा अधिकरण यह निदेश दे सकेगा कि प्रतिकर की रकम के अतिरिक्त उतनी दर से तथा उस तारीख से जो दावा करने की तारीख से पहले की न होगी, जिसे वह इस निमित्त विनिर्दिष्ट करे, साधारण ब्याज भी दिया जाए।

मोटर वाहन अधिनियम की धारा- 171 के अनुसार

जहां दावा मंजूर किया गया है वहां ब्याज दिलाना-

जहां कोई दावा अधिकरण इस अधिनियम के अधीन किए गए प्रतिकर के दावे को मंजूर करता है वहां ऐसा अधिकरण यह निदेश दे सकेगा कि प्रतिकर की रकम के अतिरिक्त उतनी दर से तथा उस तारीख से जो दावा करने की तारीख से पहले की न होगी, जिसे वह इस निमित्त विनिर्दिष्ट करे, साधारण ब्याज भी दिया जाए।

Award of interest where any claim is allowed-
Where any Claims Tribunal allows a claim for compensation made under this Act, such Tribunal may direct that in addition to the amount of compensation simple interest shall also be paid at such rate and from such date not earlier than the date of making the claim as it may specify in this behalf.

हमारा प्रयास मोटर वाहन अधिनियम (MV Act) की धारा 171 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

मोटर वाहन अधिनियम की धारा 170 | कतिपय मामलों में बीमाकर्ता को पक्षकार बनाया जाना | MV Act, Section- 170 in hindi | Impleading insurer in certain cases.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए मोटर वाहन अधिनियम की धारा 170 के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है मोटर वाहन अधिनियम की धारा- 170, साथ ही इस धारा के अंतर्गत क्या परिभाषित किया गया है, यह सभी जानकारी इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

मोटर वाहन अधिनियम की धारा- 170 का विवरण

मोटर वाहन अधिनियम (Motor Vehicles Act) की धारा -170 के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। इस अध्याय के आधीन जहां जांच के अनुक्रम में दावा अधिकरण का यह समाधान हो जाता है कि दावा करने वाले व्यक्ति तथा उस व्यक्ति के बीच, जिसके विरुद्ध दावा किया गया है, दुरभिसंधि है कतिपय मामलों में बीमाकर्ता को पक्षकार बनाया जाना इस धारा के अन्तर्गत परिभाषित किया गया है।

मोटर वाहन अधिनियम की धारा- 170 के अनुसार

कतिपय मामलों में बीमाकर्ता को पक्षकार बनाया जाना-

जहां जांच के अनुक्रम में दावा अधिकरण का यह समाधान हो जाता है कि-
(क) दावा करने वाले व्यक्ति तथा उस व्यक्ति के बीच, जिसके विरुद्ध दावा किया गया है, दुरभिसंधि है, या
(ख) वह व्यक्ति जिसके विरुद्ध दावा किया गया है, उस दावे का विरोध करने में असफल रहा है, वहां वह उन कारणों से, जो लेखबद्ध किए जाएंगे, यह निदेश दे सकेगा कि वह बीमाकर्ता, जिस पर ऐसे दावे की बाबत दायित्व है, उस कार्यवाही का पक्षकार बनाया जाए और ऐसे पक्षकार बनाए गए बीमाकर्ता को तब [धारा 150] की उपधारा (2) के उपबंधों पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना यह अधिकार होगा कि वह उस दावे का विरोध उन सब या किन्हीं आधारों पर करे, जो उस व्यक्ति को प्राप्त है, जिसके विरुद्ध दावा किया गया है ।

Impleading insurer in certain cases-
Where in the course of any inquiry, the Claims Tribunal is satisfied that-
(a) there is collusion between the person making the claim and the person against whom the claim is made, or
(b) the person against whom the claim is made has failed to contest the claim, it may, for reasons to be recorded in writing, direct that the insurer who may be liable in respect of such claim, shall be impleaded as a party to the proceeding and the insurer so impleaded shall thereupon have, without prejudice to the provisions contained in sub-section (2) of [section 150], the right to contest the claim on all or any of the grounds that are available to the person against whom the claim has been made.

हमारा प्रयास मोटर वाहन अधिनियम (MV Act) की धारा 170 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

मोटर वाहन अधिनियम की धारा 169 | दावा अधिकरणों की प्रक्रिया और शक्तियां | MV Act, Section- 169 in hindi | Procedure and powers of Claims Tribunals.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए मोटर वाहन अधिनियम की धारा 169 के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है मोटर वाहन अधिनियम की धारा- 169, साथ ही इस धारा के अंतर्गत क्या परिभाषित किया गया है, यह सभी जानकारी इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

मोटर वाहन अधिनियम की धारा- 169 का विवरण

मोटर वाहन अधिनियम (Motor Vehicles Act) की धारा -169 के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। इस अध्याय के आधीन दावा अधिकरण को शपथ पर साक्ष्य लेने, साक्षियों को हाजिर कराने तथा दस्तावेजों और भौतिक वस्तुओं का प्रकटीकरण और पेशी कराने तथा ऐसे अन्य प्रयोजनों के लिए, जो विहित किए जाएं, सिविल न्यायालय की सब शक्तियां प्राप्त होंगी।

मोटर वाहन अधिनियम की धारा- 169 के अनुसार

दावा अधिकरणों की प्रक्रिया और शक्तियां-

(1) धारा 168 के अधीन कोई जांच करते समय दावा अधिकरण ऐसे किन्हीं नियमों के अधीन रहते हुए, जो इस निमित्त बनाए जाएं, ऐसी संक्षिप्त प्रक्रिया का अनुसरण करेगा जो वह ठीक समझे।
(2) दावा अधिकरण को शपथ पर साक्ष्य लेने, साक्षियों को हाजिर कराने तथा दस्तावेजों और भौतिक वस्तुओं का प्रकटीकरण और पेशी कराने तथा ऐसे अन्य प्रयोजनों के लिए, जो विहित किए जाएं, सिविल न्यायालय की सब शक्तियां प्राप्त होंगी तथा दावा अधिकरण को दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 (1974 का 2) की धारा 195 और उसके अध्याय 26 के सब प्रयोजनों के लिए सिविल न्यायालय समझा जाएगा।
(3) ऐसे किन्हीं नियमों के अधीन रहते हुए जो इस निमित्त बनाए जाएं, दावा अधिकरण, प्रतिकर के किसी दावे का अधिनिर्णय करने के प्रयोजन के लिए, जांच करने में उसे सहायता देने के लिए जांच से सुसंगत किसी विषय का विशेष ज्ञान रखने वाले एक या अधिक व्यक्तियों को चुन सकेगा।
(4) इसके अधिनिर्णय के प्रवर्तन के प्रयोजन के लिए, दावा अधिकरण को भी सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 (1908 का 5) के अधीन डिक्री के निष्पादन में सिविल न्यायालय की सभी शक्तियां प्राप्त होंगी मानो अधिनिर्णय किसी सिविल वाद में ऐसे न्यायालय द्वारा पारित धन के संदाय के लिए डिक्री थी।

Procedure and powers of Claims Tribunals-
(1) In holding any inquiry under section 168, the Claims Tribunal may, subject to any rules that may be made in this behalf, follow such summary procedure as it thinks fit.
(2) The Claims Tribunal shall have all the powers of a Civil Court for the purpose of taking evidence on oath and of enforcing the attendance of witnesses and of compelling the discovery and production of documents and material objects and for such other purposes as may be prescribed; and the Claims Tribunal shall be deemed to be a Civil Court for all the purposes of section 195 and Chapter XXVI of the Code of Criminal Procedure, 1973 (2 of 1974).
(3) Subject to any rules that may be made in this behalf, the Claims Tribunal may, for the purpose of adjudicating upon any claim for compensation, choose one or more persons possessing special knowledge of any matter relevant to the inquiry to assist it in holding the inquiry.
(4) For the purpose of enforcement of its award, the Claims Tribunal shall also have all the powers of a Civil Court in the execution of a decree under the Code of Civil Procedure, 1908 (5 of 1908), as if the award were a decree for the payment of money passed by such court in a civil suit.

हमारा प्रयास मोटर वाहन अधिनियम (MV Act) की धारा 169 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

मोटर वाहन अधिनियम की धारा 168 | दावा अधिकरणों का अधिनिर्णय | MV Act, Section- 168 in hindi | Award of the Claims Tribunal.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए मोटर वाहन अधिनियम की धारा 168 के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है मोटर वाहन अधिनियम की धारा- 168, साथ ही इस धारा के अंतर्गत क्या परिभाषित किया गया है, यह सभी जानकारी इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

मोटर वाहन अधिनियम की धारा- 168 का विवरण

मोटर वाहन अधिनियम (Motor Vehicles Act) की धारा -168 के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। इस अध्याय के आधीन धारा 166 के अधीन किए गए प्रतिकर के लिए आवेदन की प्राप्ति पर, दावा अधिकरण बीमाकर्ता को आवेदन की सूचना देने और पक्षकारों को सुनवाई का अवसर देने के पश्चात् (जिसके अंतर्गत बीमाकर्ता भी है), यथास्थिति, दावे की या दावों में से प्रत्येक की जांच करेगा तथा, [धारा 163] के उपबंधों के अधीन रहते हुए अधिनिर्णय देगा जिसमें प्रतिकर की उतनी रकम अवधारित होगी, जितनी उसे न्यायसंगत प्रतीत होती है तथा वह व्यक्ति या वे व्यक्ति विनिर्दिष्ट होंगे जिन्हें प्रतिकर दिया जाएगा।

मोटर वाहन अधिनियम की धारा- 168 के अनुसार

दावा अधिकरणों का अधिनिर्णय-

(1) धारा 166 के अधीन किए गए प्रतिकर के लिए आवेदन की प्राप्ति पर, दावा अधिकरण बीमाकर्ता को आवेदन की सूचना देने और पक्षकारों को सुनवाई का अवसर देने के पश्चात् (जिसके अंतर्गत बीमाकर्ता भी है), यथास्थिति, दावे की या दावों में से प्रत्येक की जांच करेगा तथा, [धारा 163] के उपबंधों के अधीन रहते हुए अधिनिर्णय देगा जिसमें प्रतिकर की उतनी रकम अवधारित होगी, जितनी उसे न्यायसंगत प्रतीत होती है तथा वह व्यक्ति या वे व्यक्ति विनिर्दिष्ट होंगे जिन्हें प्रतिकर दिया जाएगा, और अधिनिर्णय देते समय दावा अधिकरण वह रकम विनिर्दिष्ट करेगा जो, यथास्थिति, बीमाकर्ता द्वारा या उस यान के जो दुर्घटना में अंतर्ग्रस्त था, स्वामी या ड्राइवर द्वारा, अथवा उन सब या उनमें से किसी के द्वारा दी जाएगी।
(2) दावा अधिकरण अधिनिर्णय की प्रतियां संबंधित पक्षकारों को शीघ्र ही, और किसी भी दशा में अधिनिर्णय की तारीख से पन्द्रह दिन की अवधि के भीतर, परिदत्त करने की व्यवस्था करेगा।
(3) जहां इस धारा के अधीन कोई अधिनिर्णय किया जाता है वहां वह व्यक्ति जिससे ऐसे अधिनिर्णय के निबन्धनों के अनुसार किसी रकम का संदाय करने की अपेक्षा की जाती है, दावा अधिकरण द्वारा अधिनिर्णय घोषित करने की तारीख से तीस दिन के भीतर अधिनिर्णीत समस्त रकम, ऐसी रीति से जैसी दावा अधिकरण निर्दिष्ट करे, जमा करेगा।

Award of the Claims Tribunal-
(1) On receipt of an application for compensation made under section 166, the Claims Tribunal shall, after giving notice of the application to the insurer and after giving the parties (including the insurer) an opportunity of being heard, hold an inquiry into the claim or, as the case may be, each of the claims and, subject to the provisions of [section 163] may make an award determining the amount of compensation which appears to it to be just and specifying the person or persons to whom compensation shall be paid and in making the award the Claims Tribunal shall specify the amount which shall be paid by the insurer or owner or driver of the vehicle involved in the accident or by all or any of them, as the case may be.
(2) The Claims Tribunal shall arrange to deliver copies of the award to the parties concerned expeditiously and in any case within a period of fifteen days from the date of the award.
(3) When an award is made under this section, the person who is required to pay any amount in terms of such award shall, within thirty days of the date of announcing the award by the Claims Tribunal, deposit the entire amount awarded in such manner as the Claims Tribunal may direct.

हमारा प्रयास मोटर वाहन अधिनियम (MV Act) की धारा 168 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

मोटर वाहन अधिनियम की धारा 167 | कतिपय मामलों में प्रतिकर के लिए दावों के बारे में विकल्प | MV Act, Section- 167 in hindi | Option regarding claims for compensation in certain cases.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए मोटर वाहन अधिनियम की धारा 167 के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है मोटर वाहन अधिनियम की धारा- 167, साथ ही इस धारा के अंतर्गत क्या परिभाषित किया गया है, यह सभी जानकारी इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

मोटर वाहन अधिनियम की धारा- 167 का विवरण

मोटर वाहन अधिनियम (Motor Vehicles Act) की धारा -167 के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। इस अध्याय के आधीन जहां किसी व्यक्ति की मृत्यु या उसे हुई शारीरिक क्षति से इस अधिनियम के अधीन तथा कर्मकार प्रतिकर अधिनियम, 1923 (1923 का 8) के अधीन भी प्रतिकर के लिए दावा उद्भूत होता है वहां प्रतिकर पाने का हकदार व्यक्ति कर्मकार प्रतिकर अधिनियम, 1923 में किसी बात के होते हुए भी ऐसे प्रतिकर के लिए, अध्याय 10 के उपबंधों पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, दावा उन दोनों अधिनियमों में से किसी एक के अधीन कर सकेगा, दोनों के अधीन नहीं कर सकेगा।

मोटर वाहन अधिनियम की धारा- 167 के अनुसार

कतिपय मामलों में प्रतिकर के लिए दावों के बारे में विकल्प-

जहां किसी व्यक्ति की मृत्यु या उसे हुई शारीरिक क्षति से इस अधिनियम के अधीन तथा कर्मकार प्रतिकर अधिनियम, 1923 (1923 का 8) के अधीन भी प्रतिकर के लिए दावा उद्भूत होता है वहां प्रतिकर पाने का हकदार व्यक्ति कर्मकार प्रतिकर अधिनियम, 1923 में किसी बात के होते हुए भी ऐसे प्रतिकर के लिए, अध्याय 10 के उपबंधों पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, दावा उन दोनों अधिनियमों में से किसी एक के अधीन कर सकेगा, दोनों के अधीन नहीं कर सकेगा।

Option regarding claims for compensation in certain cases-
Notwithstanding anything contained in the Workmen’s Compensation Act, 1923 (8 of 1923) where the death of, or bodily injury to, any person gives rise to a claim for compensation under this Act and also under the Workmen’s Compensation Act, 1923, the person entitled to compensation may without prejudice to the provisions of Chapter X claim such compensation under either of those Acts but not under both.

हमारा प्रयास मोटर वाहन अधिनियम (MV Act) की धारा 167 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

मोटर वाहन अधिनियम की धारा 166 | प्रतिकर के लिए आवेदन | MV Act, Section- 166 in hindi | Application for compensation.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए मोटर वाहन अधिनियम की धारा 166 के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है मोटर वाहन अधिनियम की धारा- 166, साथ ही इस धारा के अंतर्गत क्या परिभाषित किया गया है, यह सभी जानकारी इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

मोटर वाहन अधिनियम की धारा- 166 का विवरण

मोटर वाहन अधिनियम (Motor Vehicles Act) की धारा -166 के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। इस अध्याय के आधीनधारा 165 की उपधारा (1) में विनिर्दिष्ट प्रकार की दुर्घटना से उद्भूत प्रतिकर के लिए आवेदन निम्नलिखित द्वारा किया जा सकेगा।

मोटर वाहन अधिनियम की धारा- 166 के अनुसार

प्रतिकर के लिए आवेदन-

(1) धारा 165 की उपधारा (1) में विनिर्दिष्ट प्रकार की दुर्घटना से उद्भूत प्रतिकर के लिए आवेदन निम्नलिखित द्वारा किया जा सकेगा, अर्थात् :-
(क) उस व्यक्ति द्वारा, जिसे क्षति हुई है; या
(ख) संपत्ति के स्वामी द्वारा; या
(ग) जब दुर्घटना के परिणामस्वरूप मृत्यु हुई है, तब मृतक के सभी या किसी विधिक प्रतिनिधि द्वारा; या
(घ) जिस व्यक्ति को क्षति पहुंची है उसके द्वारा अथवा सम्यक् रूप से प्राधिकृत किसी अभिकर्ता द्वारा अथवा मृतक के सभी या किसी विधिक प्रतिनिधि द्वारा :
परन्तु जहां प्रतिकर के लिए किसी आवेदन में मृतक के सभी विधिक प्रतिनिधि सम्मिलित नहीं हुए हैं वहां वह आवेदन मृतक के सभी विधिक प्रतिनिधियों की ओर से या उनके फायदे के लिए किया जाएगा और जो विधिक प्रतिनिधि ऐसे सम्मिलित नहीं हुए हैं उन्हें आवेदन के प्रत्यर्थियों के रूप में पक्षकार बनाया जाएगा :
परन्तु यह और कि जहां कोई व्यक्ति धारा 149 के अधीन उपबंधित प्रक्रिया के अनुसार धारा 164 के अधीन प्रतिकर स्वीकार करता है, वहां दावा अधिकरण के समक्ष उसकी दावा याचिका व्यपगत हो जाएगी।
(2) उपधारा (1) के अधीन प्रत्येक आवेदन, दावाकर्ता के विकल्प पर, उस दावा अधिकरण को जिसकी उस क्षेत्र पर अधिकारिता थी जिसमें दुर्घटना हुई है, अथवा उस दावा अधिकरण को जिसकी अधिकारिता की स्थानीय सीमाओं के भीतर दावाकर्ता निवास करता है या कारबार करता है अथवा जिसकी अधिकारिता की स्थानीय सीमाओं के भीतर प्रतिवादी निवास करता है, किया जाएगा और वह ऐसे प्ररूप में होगा और उसमें ऐसी विशिष्टिया होगी जो विहित की जाए ।
(3) प्रतिकर के लिए कोई आवेदन तब तक ग्रहण नहीं किया जाएगा जब तक कि उसे दुर्घटना के होने से छह मास के भीतर प्रस्तुत न किया गया हो ।
(4) दावा अधिकरण, धारा 159 के अधीन उसको भेजी गई दुर्घटनाओं की किसी रिपोर्ट को इस अधिनियम के अधीन प्रतिकर के लिए आवेदन के रूप में मानेगा ।
(5) इस अधिनियम या तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि में किसी बात के होते हुए भी, किसी दुर्घटना में क्षति के लिए प्रतिकर का दावा करने वाले व्यक्ति का अधिकार, जिस व्यक्ति को क्षति पहुँची है, उसकी मृत्यु होने पर उसके विधिक प्रतिनिधियों के लिए, इस बात को ध्यान में न रखते हुए कि मृत्यु का कारण क्षति वाले अन्तर्संबंध से संबंधित है या नहीं या इसका उसके साथ कोई अन्तर्संबंध था या नहीं, विद्यमान होगा।

Application for compensation-
(1) An application for compensation arising out of an accident of the nature specified in sub-section (1) of section 165 may be made-
(a) by the person who has sustained the injury; or
(b) by the owner of the property, or
(c) where death has resulted from the accident, by all or any of the legal representatives of the deceased; or
(d) by any agent duly authorised by the person injured or all or any of the legal representatives of the deceased, as the case may be :
Provided that where all the legal representatives of the deceased have not joined in any such application for compensation, the application shall be made on behalf of or for the benefit of all the legal representatives of the deceased and the legal representatives who have not so joined, shall be impleaded as respondents to the application :
Provided further that where a person accepts compensation under section 164 in accordance with the procedure provided under section 149, his claims petition before the Claims Tribunal shall lapse.
(2) Every application under sub-section (1) shall be made, at the option of the claimant, either to the Claims Tribunal having jurisdiction over the area in which the accident occurred, or to the Claims Tribunal within the local limits of whose jurisdiction the claimant resides or carries on business or within the local limits of whose jurisdiction the defendant resides, and shall be in such form and contain such particulars as may be prescribed.
(3) No application for compensation shall be entertained unless it is made within six months of the occurrence of the accident.
(4) The Claims Tribunal shall treat any report of accidents forwarded to it under section 159 as an application for compensation under this Act.
(5) Notwithstanding anything in this Act or any other law for the time being in force, the right of a person to claim compensation for injury in an accident shall, upon the death of the person injured, survive to his legal representatives, irrespective of whether the cause of death is relatable to or had any nexus with the injury or not.

हमारा प्रयास मोटर वाहन अधिनियम (MV Act) की धारा 166 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।