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मोटर वाहन अधिनियम की धारा 163 | धारा 161 के अधीन संदत्त प्रतिकर के कतिपय मामलों में प्रतिदाय | MV Act, Section- 163 in hindi | Refund in certain cases of compensation paid under section 161.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए मोटर वाहन अधिनियम की धारा 163 के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है मोटर वाहन अधिनियम की धारा- 163, साथ ही इस धारा के अंतर्गत क्या परिभाषित किया गया है, यह सभी जानकारी इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

मोटर वाहन अधिनियम की धारा- 163 का विवरण

मोटर वाहन अधिनियम (Motor Vehicles Act) की धारा -163 के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। इस अध्याय के आधीन धारा 161 के अधीन किसी व्यक्ति की मृत्यु या उसको हुई घोर उपहति की बाबत प्रतिकर का संदाय इस शर्त के अधीन रहते हुए होगा कि यदि कोई प्रतिकर (जिसे इस उपधारा में इसमें आगे अन्य प्रतिकर कहा गया है) या प्रतिकर के लिए दावे के बदले में या इस के चुकाए जाने के रूप में इस अधिनियम के किसी अन्य उपबंध या किसी अन्य विधि या अन्यथा के अधीन ऐसी मृत्यु या घोर उपहति की बाबत अधिनिर्णीत किया जाता है या संदत्त किया जाता है, तो अन्य उतना प्रतिकर या अन्य पूर्वोक्त रकम का जितना धारा 161 के अधीन संदत्त प्रतिकर के बराबर है, बीमाकर्ता को वापस लौटा दिया जाएगा।

मोटर वाहन अधिनियम की धारा- 163 के अनुसार

धारा 161 के अधीन संदत्त प्रतिकर के कतिपय मामलों में प्रतिदाय-

(1) धारा 161 के अधीन किसी व्यक्ति की मृत्यु या उसको हुई घोर उपहति की बाबत प्रतिकर का संदाय इस शर्त के अधीन रहते हुए होगा कि यदि कोई प्रतिकर (जिसे इस उपधारा में इसमें आगे अन्य प्रतिकर कहा गया है) या प्रतिकर के लिए दावे के बदले में या इस के चुकाए जाने के रूप में इस अधिनियम के किसी अन्य उपबंध या किसी अन्य विधि या अन्यथा के अधीन ऐसी मृत्यु या घोर उपहति की बाबत अधिनिर्णीत किया जाता है या संदत्त किया जाता है, तो अन्य उतना प्रतिकर या अन्य पूर्वोक्त रकम का जितना धारा 161 के अधीन संदत्त प्रतिकर के बराबर है, बीमाकर्ता को वापस लौटा दिया जाएगा।
(2) इस अधिनियम के किसी उपबंध के अधीन धारा 161 या तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि से भिन्न मोटर यान के उपयोग के कारण हई किसी व्यक्ति की मृत्यु या शारीरिक क्षति को अन्तर्वलित करने वाली दुर्घटना के संबंध में प्रतिकर अधिनिर्णीत करने से पूर्व दावा अधिकरण, न्यायालय या अन्य ऐसा प्रतिकर अधिनिर्णीत करने वाला प्राधिकारी इस बारे में कि यान ऐसी मृत्यु या शारीरिक क्षति की बाबत प्रतिकर का संदाय धारा 161 के अधीन पहले ही कर दिया गया है या प्रतिकर के संदाय के लिए आवेदन उस धारा के अधीन लंबित है और ऐसा अधिकरण, न्यायालय या अन्य प्राधिकारी–
(क) यदि प्रतिकर धारा 161 के अधीन पहले ही संदत्त कर दिया गया है, उसके द्वारा अधिनिर्णीत प्रतिकर का संदाय करने के लिए दायी व्यक्ति को यह निदेश देगा कि वह बीमाकर्ता को उसके उतने भाग का प्रतिदाय करे जितना उपधारा (1) के उपबंधों के अनुसार वापस किया जाना अपेक्षित है;
(ख) यदि प्रतिकर के संदाय के लिए आवेदन धारा 161 के अधीन लंबित है तो वह बीमाकर्ता को उसके द्वारा अधिनिर्णीत प्रतिकर के बारे में विशिष्टियां अग्रेषित करेगा;
स्पष्टीकरण- इस उपधारा के प्रयोजन के लिए धारा 161 के अधीन प्रतिकर के लिए आवेदन तब लंबित समझा जाएगा,
(i) यदि ऐसा आवेदन नामंजूर कर दिया गया है तो आवेदन की नामंजूरी की तारीख तक; और
(ii) किसी अन्य मामले में आवेदन के अनुसरण में प्रतिकर के संदाय की तारीख तक ।

Refund in certain cases of compensation paid under section 161-
(1) The payment of compensation in respect of the death of, or grievous hurt to, any person under section 161 shall be subject to the condition that if any compensation (hereafter in this sub-section referred to as the other compensation) or other amount in lieu of or by way of satisfaction of a claim for compensation is awarded or paid in respect of such death or grievous hurt under any other provision of this Act or any other law for the time being in force or otherwise, so much of the other compensation or other amount aforesaid as is equal to the compensation paid under section 161, shall be refunded to the insurer.
(2) Before awarding compensation in respect of an accident involving the death of, or bodily injury to, any person arising out of the use of a motor vehicle under any provision of this Act other than section 161 or any other law for the time being in force, the Claims Tribunal, court or other authority awarding such compensation shall verify as to whether in respect of such death or bodily injury compensation has already been paid under section 161 or an application for payment of compensation is pending under that section, and such Tribunal, court or other authority shall-
(a) if compensation has already been paid under section 161, direct the person liable to pay the compensation awarded by it to refund to the insurer, so much thereof as is required to be refunded in accordance with the provisions of sub-section (1);
(b) if an application for payment of compensation is pending under section 161 forward the particulars as to the compensation awarded by it to the insurer.
Explanation- For the purpose of this sub-section, an application for compensation under section 161 shall be deemed to be pending–
(i) if such application has been rejected, till the date of the rejection site of the application; and
(ii) in any other case, till the date of payment of compensation in pursuance of the application.

हमारा प्रयास मोटर वाहन अधिनियम (MV Act) की धारा 163 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

मोटर वाहन अधिनियम की धारा 162 | स्वर्णिम काल के लिए स्कीम | MV Act, Section- 162 in hindi | Scheme for a golden hour.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए मोटर वाहन अधिनियम की धारा 162 के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है मोटर वाहन अधिनियम की धारा- 162, साथ ही इस धारा के अंतर्गत क्या परिभाषित किया गया है, यह सभी जानकारी इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

मोटर वाहन अधिनियम की धारा- 162 का विवरण

मोटर वाहन अधिनियम (Motor Vehicles Act) की धारा -162 के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। इस अध्याय के आधीन साधारण बीमा कंपनियां इस अधिनियम के उपबंधों के अनुसार और इस अधिनियम के अधीन बनाई गई स्कीम के अनुसार सड़क दुर्घटना पीड़ितों के, जिसके अंतर्गत स्वर्णिम काल के दौरान हुई दुर्घटनाओं के पीड़ित भी हैं, उपचार के लिए उपबंध करेंगी।

मोटर वाहन अधिनियम की धारा- 162 के अनुसार

स्वर्णिम काल के लिए स्कीम-

(1) साधारण बीमा कंपनी (राष्ट्रीयकरण) अधिनियम, 1972 (1972 का 57) या तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि या विधि का बल रखने वाली किसी लिखत में किसी बात के होते हुए भी भारत में तत्समय कारबार कर रही साधारण बीमा कंपनियां इस अधिनियम के उपबंधों के अनुसार और इस अधिनियम के अधीन बनाई गई स्कीम के अनुसार सड़क दुर्घटना पीड़ितों के, जिसके अंतर्गत स्वर्णिम काल के दौरान हुई दुर्घटनाओं के पीड़ित भी हैं, उपचार के लिए उपबंध करेंगी ।
(2) केन्द्रीय सरकार स्वर्णिम काल के दौरान सड़क दुघर्टना के पीड़ितों के नकदी रहित उपचार के लिए स्कीम बनाएगी और ऐसी स्कीम में ऐसे उपचार के लिए निधि के सृजन संबंधी उपबंध अंतर्विष्ट हो सकेंगे।

Scheme for a golden hour-
(1) Notwithstanding anything contained in the General Insurance Companies (Nationalisation) Act, 1972 (57 of 1972) or any other law for the time being in force or any instrument having the force of law, the insurance companies for the time being carrying on general insurance business in India shall provide in accordance with the provisions of this Act and the schemes made under this Act for the treatment of road accident victims, including during the golden hour.
(2) The Central Government shall make a scheme for the cashless treatment of victims of the accident during the golden hour and such schemę may contain provisions for the creation of a fund for such treatment.

हमारा प्रयास मोटर वाहन अधिनियम (MV Act) की धारा 162 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

मोटर वाहन अधिनियम की धारा 161 | हिट एंड रन मोटरयान दुघर्टना में प्रतिकर के विशेष उपबंध | MV Act, Section- 161 in hindi | Special provisions as to compensation in case of hit and run motor accident.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए मोटर वाहन अधिनियम की धारा 161 के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है मोटर वाहन अधिनियम की धारा- 161, साथ ही इस धारा के अंतर्गत क्या परिभाषित किया गया है, यह सभी जानकारी इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

मोटर वाहन अधिनियम की धारा- 161 का विवरण

मोटर वाहन अधिनियम (Motor Vehicles Act) की धारा -161 के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। इस अध्याय के आधीन मोटर कार के उपयोग से उद्भूत दुर्घटना हिट एंड रन मोटरयान दुघर्टना में प्रतिकर के विशेष उपबंध है। इस धारा मे उन मामलो के विशेष उपबंध बनाये गये है।

मोटर वाहन अधिनियम की धारा- 161 के अनुसार

हिट एंड रन मोटरयान दुघर्टना में प्रतिकर के विशेष उपबंध-

(1) तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि या विधि का बल रखने वाली किसी लिखत में अंतर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी, केन्द्रीय सरकार, इस अधिनियम और उपधारा (3) के उपबंधों के अधीन बनाई गई किसी स्कीम के उपबंधों के अनुसार हिट एंड रन मोटर यान दुर्घटना के परिणामस्वरूप व्यक्तियों की मृत्यु, या उनको घोर उपहति की बाबत, प्रतिकर के संदाय के लिए उपबंध करेगी ।
(2) इस अधिनियम के उपबंधों और उपधारा (3) के अधीन बनायी गई स्कीम के अध्यधीन रहते हुए, प्रतिकर संदत्त किया जाएगा,-
(क) हिट एंड रन मोटरयान दुर्घटना के परिणामस्वरूप किसी व्यक्ति की मृत्यु की बाबत, दो लाख रुपए की नियत राशि या कोई उच्चतर राशि जैसा केंद्रीय सरकार द्वारा विहित किया जाए;
(ख) हिट एंड रन दुर्घटना के परिणामस्वरूप किसी व्यक्ति को घोर उपहति की बाबत, पचास हजार रुपए की नियत राशि या कोई उच्चतर राशि, जैसा केंद्रीय सरकार द्वारा विहित किया जाए।
(3) केंद्रीय सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, एक स्कीम, ऐसी रीति विनिर्दिष्ट करते हुए जिसमें केन्द्रीय सरकार या साधारण बीमा परिषद् द्वारा स्कीम प्रशासित की जाएगी, प्ररूप, रीति और समय जिसमें प्रतिकर के लिए आवेदन किए जा सकेंगे, अधिकारी या प्राधिकारी जिसको ऐसे आवेदन किए जा सकते हैं ऐसे अधिकारियों या प्राधिकारियों द्वारा ऐसे आवेदनों पर विचार करने और आदेश पारित करने के लिए अनुसरण की जाने वाली प्रक्रिया और स्कीम के प्रशासन और इस धारा के अधीन प्रतिकर के संदाय से संबंधित या आनुषंगिक अन्य मामले में, बना सकेगी।
(4) उपधारा (3) के अधीन बनायी गई स्कीम यह उपबंध कर सकेगी, कि–
(क) ऐसी किसी स्कीम के अधीन किसी दावाकर्ता को अंतरिम अनुतोष के रूप में ऐसी राशि का संदाय, जो केंद्रीय सरकार द्वारा विहित की जाए;
(ख) उसके किसी उपबंध का उल्लंघन करना ऐसी अवधि के कारावास से जो दो वर्ष तक का हो सकेगा या जुर्माने से जो पच्चीस हजार रुपए से कम नहीं होगा किन्तु पांच लाख रुपए तक का हो सकेगा या दोनों से दंडनीय होगा;
(ग) ऐसी स्कीम द्वारा किसी अधिकारी या प्राधिकारी को प्रदत्त या अधिरोपित शक्तियां, कृत्य या कर्तव्य, केंद्रीय सरकार के पूर्व लिखित अनुमोदन से, ऐसे अधिकारी या प्राधिकारी से अन्य अधिकारी या प्राधिकारी को प्रत्यायोजित किए जा सकेंगे।

Special provisions as to compensation in case of hit and run motor accident-
(1) Notwithstanding anything contained in any other law for the time being in force or any instrument having the force of law, the Central Government shall provide for paying in accordance with the provisions of this Act and the scheme made under sub-section (3), compensation in respect of the death of, or grievous hurt to, persons resulting from hit and run motor accidents.
(2) Subject to the provisions of this Act and the scheme made under subsection (3), there shall be paid as compensation,-
(a) in respect of the death of any person resulting from a hit and run motor accident, a fixed sum of two lakh rupees or such higher amount as may be prescribed by the Central Government;
(b) in respect of grievous hurt to any person resulting from a hit and run motor accident, a fixed sum of fifty thousand rupees or such higher 15 amount as may be prescribed by the Central Government.
(3) The Central Government may, by notification in the Official Gazette, make a scheme specifying the manner in which the scheme shall be administered by the Central Government or General Insurance Council, the form, manner and the time within which applications for compensation may be made, the officers or authorities to whom such applications may be made, the procedure to be followed by such officers or authorities for considering and passing orders on such applications, and all other matters connected with, or incidental to, the administration of the scheme and the payment of compensation under this section.
(4) A scheme made under sub-section (3) may provide that —
(a) a payment of such sum as may be prescribed by the Central Government as interim relief to any claimant under such scheme;
(b) a contravention of any provision thereof shall be punishable with imprisonment which may extend to two years, or with fine which shall not be less than twenty-five thousand rupees but may extend to five lakh rupees or with both;
(c) the powers, functions or duties conferred or imposed on any officer or authority by such scheme may be delegated with the prior approval in writing of Central Government, by such officer or authority to any other officer or authority.

हमारा प्रयास मोटर वाहन अधिनियम (MV Act) की धारा 161 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

मोटर वाहन अधिनियम की धारा 160 | दुर्घटना में संलिप्त यान की विशिष्टियां प्रस्तुत करने का कर्तव्य | MV Act, Section- 160 in hindi | Duty to furnish particulars of vehicle involved in accident.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए मोटर वाहन अधिनियम की धारा 160 के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है मोटर वाहन अधिनियम की धारा- 160, साथ ही इस धारा के अंतर्गत क्या परिभाषित किया गया है, यह सभी जानकारी इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

मोटर वाहन अधिनियम की धारा- 160 का विवरण

मोटर वाहन अधिनियम (Motor Vehicles Act) की धारा -160 के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। इस अध्याय के आधीन रजिस्ट्रीकरण प्राधिकारी या पुलिस थाने का भारसाधक अधिकारी, यदि किसी ऐसे व्यक्ति द्वारा, जो यह अभिकथित करता है कि वह मोटर कार के उपयोग से उद्भूत दुर्घटना की बाबत प्रतिकर का दावा करने का हकदार है, ऐसा अपेक्षित किया जाए या बीमाकर्ता द्वारा जिसके विरुद्ध किसी मोटरयान की बाबत दावा किया गया है, तो पुलिस भार साधक अधिकारी दुर्घटना में संलिप्त यान की विशिष्टियां प्रस्तुत करने का कर्तव्य होता है।

मोटर वाहन अधिनियम की धारा- 160 के अनुसार

दुर्घटना में संलिप्त यान की विशिष्टियां प्रस्तुत करने का कर्तव्य-

रजिस्ट्रीकरण प्राधिकारी या पुलिस थाने का भारसाधक अधिकारी, यदि किसी ऐसे व्यक्ति द्वारा, जो यह अभिकथित करता है कि वह मोटर कार के उपयोग से उद्भूत दुर्घटना की बाबत प्रतिकर का दावा करने का हकदार है, ऐसा अपेक्षित किया जाए या बीमाकर्ता द्वारा जिसके विरुद्ध किसी मोटरयान की बाबत दावा किया गया है, ऐसा अपेक्षित किया जाए तो, यथास्थिति, उस व्यक्ति या उस बीमाकर्ता को, जैसा भी मामला हो, विहित फीस के संदाय पर, उक्त प्राधिकारी या उक्त पुलिस अधिकारी को यान के पहचान चिन्हों या अन्य विशिष्टियों और उस व्यक्ति, जो यान का उपयोग दुर्घटना के समय कर रहा था या उसके द्वारा क्षतिग्रस्त हुआ था का नाम और पता और संपत्ति, यदि कोई हो, जिसका नुकसान हुआ है, की सूचना ऐसे प्ररूप में और ऐसे समय के भीतर जो केंद्रीय सरकार द्वारा विहित किया जाए, देगा।

Duty to furnish particulars of vehicle involved in accident-
A registering authority or the officer-in-charge of a police station shall, if so required by a person who alleges that he is entitled to claim compensation in respect of an accident arising out of the use of a motor vehicle, or if so required by an insurer against whom a claim has been made in respect of any motor vehicle, furnish to that person or to that insurer, as the case may be, on payment of the prescribed fee, any information at the disposal of the said authority or the said police officer relating to the identification marks and other particulars of the vehicle and the name and address of the person who was using the vehicle at the time of the accident or was injured by it and the property, if any, damaged in such form and within such time as the Central Government may prescribe.

हमारा प्रयास मोटर वाहन अधिनियम (MV Act) की धारा 160 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

मोटर वाहन अधिनियम की धारा 159 | दुर्घटना के संबंध में सूचना का दिया जाना | MV Act, Section- 159 in hindi | Information to be given regarding accident.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए मोटर वाहन अधिनियम की धारा 159 के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है मोटर वाहन अधिनियम की धारा- 159, साथ ही इस धारा के अंतर्गत क्या परिभाषित किया गया है, यह सभी जानकारी इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

मोटर वाहन अधिनियम की धारा- 159 का विवरण

मोटर वाहन अधिनियम (Motor Vehicles Act) की धारा -159 के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। इस अध्याय के आधीन पुलिस अधिकारी, अन्वेषण पूरा करने के दौरान दावे के निपटारे को सुकर बनाने के लिए ऐसे प्ररूप और रीति में तथा तीन मास के भीतर और ऐसी विशिष्टियों से युक्त दुर्घटना सूचना रिपोर्ट तैयार करेगा और उसे दावा अधिकरण और ऐसे अन्य अभिकरण जो विहित किया जा सकेगा, को प्रस्तुत करेगा।

मोटर वाहन अधिनियम की धारा- 159 के अनुसार

दुर्घटना के संबंध में सूचना का दिया जाना-

पुलिस अधिकारी, अन्वेषण पूरा करने के दौरान दावे के निपटारे को सुकर बनाने के लिए ऐसे प्ररूप और रीति में तथा तीन मास के भीतर और ऐसी विशिष्टियों से युक्त दुर्घटना सूचना रिपोर्ट तैयार करेगा और उसे दावा अधिकरण और ऐसे अन्य अभिकरण जो विहित किया जा सकेगा, को प्रस्तुत करेगा।

Information to be given regarding accident-
The police officer shall, during the investigation, prepare an accident information report to facilitate the settlement of claim in such form and manner, within three months and containing such particulars and submit the same to the Claims Tribunal and such other agency as may be prescribed.

हमारा प्रयास मोटर वाहन अधिनियम (MV Act) की धारा 159 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

मोटर वाहन अधिनियम की धारा 158 | कतिपय मामलों में कतिपय प्रमाणपत्रों, अनुज्ञप्ति और अनुज्ञापत्र का पेश किया जाना | MV Act, Section- 158 in hindi | Production of certain certificates, licence and permit in certain cases.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए मोटर वाहन अधिनियम की धारा 158 के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है मोटर वाहन अधिनियम की धारा- 158, साथ ही इस धारा के अंतर्गत क्या परिभाषित किया गया है, यह सभी जानकारी इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

मोटर वाहन अधिनियम की धारा- 158 का विवरण

मोटर वाहन अधिनियम (Motor Vehicles Act) की धारा -158 के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। इस अध्याय के आधीन ऐसा व्यक्ति जो किसी सार्वजनिक स्थान पर मोटरयान चला रहा है, वर्दीधारी पुलिस अधिकारी जो इस निमित्त राज्य सरकार द्वारा प्राधिकृत किया गया है, द्वारा अपेक्षा किए जाने पर वाहन के उपयोग के संबंध में निम्नलिखित पेश करेगा।

मोटर वाहन अधिनियम की धारा- 158 के अनुसार

कतिपय मामलों में कतिपय प्रमाणपत्रों, अनुज्ञप्ति और अनुज्ञापत्र का पेश किया जाना-

(1) ऐसा व्यक्ति जो किसी सार्वजनिक स्थान पर मोटरयान चला रहा है, वर्दीधारी पुलिस अधिकारी जो इस निमित्त राज्य सरकार द्वारा प्राधिकृत किया गया है, द्वारा अपेक्षा किए जाने पर वाहन के उपयोग के संबंध में निम्नलिखित पेश करेगा-
(क) बीमा प्रमाणपत्र;
(ख) रजिस्ट्रीकरण प्रमाणपत्र;
(ग) प्रदूषण नियंत्रण के अधीन होने का प्रमाणपत्र;
(घ) चालन अनुज्ञप्ति;
(ङ) परिवहन यान की दशा में, धारा 56 में निदिष्ट उपयुक्तता प्रमाणपत्र और अनुज्ञापत्र भी; और
(च) इस अधिनियम के अधीन प्रदत्त किया जा सकने वाला कोई भी प्रमाणपत्र या छूट का प्राधिकार।
(2) जहां सार्वजनिक स्थान पर मोटर यान की उपस्थिति के कारण दुर्घटना घटित होती है जिसके कारण किसी अन्य व्यक्ति की मृत्यु या शारीरिक क्षति होती है, यदि यान का चालक उस समय अपेक्षित प्रमाणपत्र, चालन अनुज्ञप्ति और उपधारा (1) में निर्दिष्ट अनुज्ञापत्र पुलिस अधिकारी को पेश नहीं करता तो वह या स्वामी उक्त प्रमाणपत्र, अनुज्ञप्ति और अनुज्ञापत्र पुलिस थाने में जिसमें चालक रिपोर्ट करता है, पेश करेगा।
(3) कोई व्यक्ति उपधारा (1) या उपधारा (2) के अधीन अपेक्षित प्रमाणपत्र पेश किए जाने में असफलता के कारण, अपराधों के लिए दोषसिद्ध किए जाने के दायी नहीं होगा यदि, वह, यथास्थिति, उपधारा (1) के अधीन पेश किए जाने के लिए अपेक्षित तारीख से या दुर्घटना के घटित होने की तारीख से सात दिनों के भीतर, पुलिस अधिकारी जिसके द्वारा उसका पेश किया जाना अपेक्षित है, द्वारा उसको विनिर्दिष्ट किए गए पुलिस थाने में या जैसा भी मामला हो, दुर्घटना के स्थान पर पुलिस अधिकारी से या उस पुलिस थाने के प्रभारी अधिकारी को जहां उसने दुर्घटना की रिपोर्ट की है, प्रमाणपत्र पेश करता है :
परंतु ऐसे विस्तार के साथ और ऐसे उपांतरण के साथ जैसा विहित किया जाए, इस उपधारा के उपबंध किसी परिवहन यान के चालक को लागू नहीं होंगे।
(4) मोटरयान का स्वामी, राज्य सरकार द्वारा इस निमित्त सशक्त किये गए पुलिस अधिकारी द्वारा या उसकी ओर से अपेक्षित सूचना यह अवधारित करने के प्रयोजन के लिए कि क्या यान धारा 146 के उल्लंघन में चलाया या नहीं चलाया जा रहा था और किसी अन्य अवसर पर जब चालक से इस खंड के अधीन बीमा प्रमाणपत्र पेश किए जाने की अपेक्षा की जाए, देगा।
(5) इस धारा में “बीमा के प्रमाणपत्र को पेश करना” अभिव्यक्ति से बीमा के सुसंगत प्रमाणपत्र या ऐसे अन्य साक्ष्य, जो इस बात को साबित करने के लिए विहित किया जाए कि यान धारा 146 के उल्लंघन में नहीं चलाया जा रहा था, को परीक्षा के लिए पेश किया जाना अभिप्रेत है।

Production of certain certificates, licence and permit in certain cases-
(1) Any person driving a motor vehicle in any public place shall, on being so required by a police officer in uniform authorised in this behalf by the State Government, produce-
(a) the certificate of insurance;
(b) the certificate of registration;
(c) the pollution under control certificate;
(d) the driving licence;
(e) in the case of a transport vehicle, also the certificate of fitness referred to in section 56, and the permit; and
(f) any certificate or authorization of exemption that has been granted under this Act, relating to the use of the vehicle.
(2) Where, owing to the presence of a motor vehicle in a public place, an accident occurs involving death or bodily injury to another person, if the driver of the vehicle does not at that time produce the required certificate, driving licence and permit referred to in sub-section (1) to a police officer, he or the owner shall produce the said certificates, licence and permit at the police station at which the driver makes the report required by section 134.
(3) No person shall be liable to conviction for offences under sub-section (1) or sub-section (2) by reason of the failure to produce the required certificate if, within seven days from the date on which its production was required under subsection (1), or as the case may be, from the date of occurrence of the accident, he produces the certificate at such police station as may have been specified by him to the police officer who required its production or, as the case may be, to the police officer at the site of the accident or to the officer-in-charge of the police station at which he reported the accident :
Provided that except to such extent and with such modifications as may be prescribed, the provisions of this sub-section shall not apply to the driver of a transport vehicle.
(4) The owner of a motor vehicle shall give such information as he may be required by or on behalf of a police officer empowered in this behalf by the State Government for the purpose of determining whether the vehicle was or was not being driven in contravention of section 146 and on any occasion when the driver was required under this section to produce the certificate of insurance.
(5) In this section, the expression “produce the certificate of insurance” means production for examination the relevant certificate of insurance or such other evidence as may be prescribed to prove that the vehicle was not being driven in contravention of section 146.

हमारा प्रयास मोटर वाहन अधिनियम (MV Act) की धारा 158 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।