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मोटर वाहन अधिनियम की धारा 123 | रनिंग बोर्ड आदि पर सवारी करना | MV Act, Section- 123 in hindi | Riding on running board, etc.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए मोटर वाहन अधिनियम की धारा 123 के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है मोटर वाहन अधिनियम की धारा- 123, साथ ही इस धारा के अंतर्गत क्या परिभाषित किया गया है, यह सभी जानकारी इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

मोटर वाहन अधिनियम की धारा- 123 का विवरण

मोटर वाहन अधिनियम (Motor Vehicles Act) की धारा -123 के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। इस अध्याय के अधीन किसी मोटर यान का ड्राइवर या भारसाधक व्यक्ति किसी भी व्यक्ति को न तो रनिंग बोर्ड पर ले जाएगा और न ही छत या बोनेट पर यात्रा नहीं करेगा।

मोटर वाहन अधिनियम की धारा- 123 के अनुसार

रनिंग बोर्ड आदि पर सवारी करना-

(1) मोटर यान का ड्राइवर या भारसाधक व्यक्ति किसी भी व्यक्ति को न तो रनिंग बोर्ड पर ले जाएगा और न यान की बॉडी के अंदर ले जाने से अन्यथा ले जाएगा और न ऐसे ले जाए जाने की अनुज्ञा देगा।
(2) कोई व्यक्ति मोटर यान के रनिंग बोर्ड या छत या बोनेट पर यात्रा नहीं करेगा ।

Riding on running board, etc-
(1) No person driving or in charge of a motor vehicle shall carry any person or permit any person to be carried on the running board or otherwise than within the body of the vehicle.
(2) No person shall travel on the running board or on the top or on the bonnet of a motor vehicle.

हमारा प्रयास मोटर वाहन अधिनियम (MV Act) की धारा 123 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

मोटर वाहन अधिनियम की धारा 122 | यान को खतरनाक स्थिति में छोड़ना | MV Act, Section- 122 in hindi | Leaving vehicle in dangerous position.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए मोटर वाहन अधिनियम की धारा 122 के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है मोटर वाहन अधिनियम की धारा- 122, साथ ही इस धारा के अंतर्गत क्या परिभाषित किया गया है, यह सभी जानकारी इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

मोटर वाहन अधिनियम की धारा- 122 का विवरण

मोटर वाहन अधिनियम (Motor Vehicles Act) की धारा -122 के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। इस अध्याय के अधीन किसी मोटर यान का भारसाधक व्यक्ति किसी यान या ट्रेलर को किसी सार्वजनिक स्थान पर न तो ऐसी स्थिति में, न ऐसी हालत में और न ऐसी परिस्थितियों में छोड़ेगा या रहने देगा या छोड़ने या रहने देने की अनुज्ञा देगा।

मोटर वाहन अधिनियम की धारा- 122 के अनुसार

यान को खतरनाक स्थिति में छोड़ना-

किसी मोटर यान का भारसाधक व्यक्ति किसी यान या ट्रेलर को किसी सार्वजनिक स्थान पर न तो ऐसी स्थिति में, न ऐसी हालत में और न ऐसी परिस्थितियों में छोड़ेगा या रहने देगा या छोड़ने या रहने देने की अनुज्ञा देगा, जिससे सार्वजनिक स्थान का उपयोग करने वाले अन्य व्यक्तियों या यात्रियों को खतरा, बाधा या असम्यक् असुविधा हो या होने की संभावना हो।

Leaving vehicle in dangerous position-
No person in charge of a motor vehicle shall cause or allow the vehicle or any trailer to be abandoned or to remain at rest on any public place in such a position or in such a condition or in such circumstances as to cause or likely to cause danger, obstruction or undue inconvenience to other users of the public place or to the passengers.

हमारा प्रयास मोटर वाहन अधिनियम (MV Act) की धारा 122 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

मोटर वाहन अधिनियम की धारा 121 | संकेत और संकेतन युक्तियां | MV Act, Section- 121 in hindi | Signals and signaling devices.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए मोटर वाहन अधिनियम की धारा 121 के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है मोटर वाहन अधिनियम की धारा- 121, साथ ही इस धारा के अंतर्गत क्या परिभाषित किया गया है, यह सभी जानकारी इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

मोटर वाहन अधिनियम की धारा- 121 का विवरण

मोटर वाहन अधिनियम (Motor Vehicles Act) की धारा -121 के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। इस अध्याय के अधीन किसी मोटर यान का ड्राइवर ऐसे संकेत ऐसे अवसरों पर करेगा जो केन्द्रीय सरकार के विहित दाईं ओर के स्टीयरिंग नियंत्रण वाले मोटर यान की दशा में, यान में लगी विहित प्रकृति की यांत्रिक या विद्युत युक्ति द्वारा दिया जा सकेगा।

मोटर वाहन अधिनियम की धारा- 121 के अनुसार

संकेत और संकेतन युक्तियां-

किसी मोटर यान का ड्राइवर ऐसे संकेत ऐसे अवसरों पर करेगा जो केन्द्रीय सरकार विहित करे:
परन्तु दाईं या बाईं ओर मुड़ने के या रोकने के आशय का संकेत-
(क) दाईं ओर के स्टीयरिंग नियंत्रण वाले मोटर यान की दशा में, यान में लगी विहित प्रकृति की यांत्रिक या विद्युत युक्ति द्वारा दिया जा सकेगा; और
(ख) बाईं ओर के स्टीयरिंग नियंत्रण वाले मोटर यान की दशा में यान में लगी विहित प्रकृति की यांत्रिक या विद्युत युक्ति द्वारा दिया जाएगा :
परन्तु यह और कि राज्य सरकार, किसी क्षेत्र या मार्ग की चौड़ाई और हालत को ध्यान में रखते हुए, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, ऐसे किसी मोटर यान या ऐसे किसी वर्ग या वर्णन के मोटर यानों को उस क्षेत्र या मार्ग पर चलाने के प्रयोजन के लिए इस धारा के प्रवर्तन से ऐसी शर्तों के अधीन रहते हुए छूट दे सकेगी जो उसमें विनिर्दिष्ट की जाए ।

Signals and signaling devices-
The driver of a motor vehicle shall make such signals and on such occasions as may be prescribed by the Central Government :
Provided that the signal of an intention to turn to the right or left or to stop —
(a) in the case of a motor vehicle with a right-hand steering control, may be given by a mechanical or electrical device of a prescribed nature affixed to the vehicle; and
(b) in the case of a motor vehicle with a left hand steering control, shall be given by a mechanical or electrical device of a prescribed nature affixed to the vehicle :
Provided further that the State Government may, having regard to the width and condition of the roads in any area or route, by notification in the Official gazette, exempt subject to such conditions as may be specified therein any motor vehicle or class or description of motor vehicles from the operation of this section for the purpose of plying in that area or route.

हमारा प्रयास मोटर वाहन अधिनियम (MV Act) की धारा 121 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

मोटर वाहन अधिनियम की धारा 120 | बाईं ओर के नियंत्रण वाले यान | MV Act, Section- 120 in hindi | Vehicles with left hand control.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए मोटर वाहन अधिनियम की धारा 120 के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है मोटर वाहन अधिनियम की धारा- 120, साथ ही इस धारा के अंतर्गत क्या परिभाषित किया गया है, यह सभी जानकारी इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

मोटर वाहन अधिनियम की धारा- 120 का विवरण

मोटर वाहन अधिनियम (Motor Vehicles Act) की धारा -120 के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। इस अध्याय के अधीन कोई व्यक्ति बाईं ओर के स्टीयरिंग नियंत्रण वाले ऐसे किसी मोटर यान को किसी सार्वजनिक स्थान में तभी चलाएगा या चलवाएगा या चलाने देगा, जब उसमें विहित प्रकार की यांत्रिक या विद्युत संकेतन युक्ति लगी हुई हो और वह चालू हालत में हो, अन्यथा नहीं।

मोटर वाहन अधिनियम की धारा- 120 के अनुसार

बाईं ओर के नियंत्रण वाले यान-

कोई व्यक्ति बाईं ओर के स्टीयरिंग नियंत्रण वाले ऐसे किसी मोटर यान को किसी सार्वजनिक स्थान में तभी चलाएगा या चलवाएगा या चलाने देगा, जब उसमें विहित प्रकार की यांत्रिक या विद्युत संकेतन युक्ति लगी हुई हो और वह चालू हालत में हो, अन्यथा नहीं।

Vehicles with left hand control-
No person shall drive or cause or allow to be driven in any public place any motor vehicle with a left-hand steering control unless it is equipped with a mechanical or electrical signalling device of a prescribed nature and in working order.

हमारा प्रयास मोटर वाहन अधिनियम (MV Act) की धारा 120 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

आईपीसी की धारा 304B (दहेज मृत्यु) | IPC 304B in Hindi (Dowry death)

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए भारतीय दंड संहिता की धारा 304B के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है भारतीय दंड संहिता की धारा 304B के अंतर्गत कैसे क्या सजा मिलती है और जमानत कैसे मिलती है, और यह अपराध किस श्रेणी में आता है, इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

धारा 304B का विवरण

भारतीय दण्ड संहिता (IPC) में धारा 304B के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। जहाँ किसी स्त्री की मृत्यु किसी दाह या शारीरिक क्षति द्वारा कारित की जाती है या उसके विवाह के सात वर्ष के भीतर सामान्य परिस्थितियों से अन्यथा हो जाती है और यह दर्शित किया जाता है कि उसकी मृत्यु के कुछ पूर्व उसके पति ने या उसके पति के किसी नातेदार ने, दहेज की किसी मांग के लिये, या उसके सम्बन्ध में, उसके साथ क्रूरता की थी या उसे तंग किया था वहाँ ऐसी मृत्यु को “दहेज मृत्यु” कहा जायेगा तो वह इस धारा के अन्तर्गत कारावास से दंडित किया जाएगा, साथ ही जुर्माने से भी दंडित किया जाएगा।

आईपीसी की धारा 304B के अनुसार

दहेज मृत्यु-

(1) जहाँ किसी स्त्री की मृत्यु किसी दाह या शारीरिक क्षति द्वारा कारित की जाती है या उसके विवाह के सात वर्ष के भीतर सामान्य परिस्थितियों से अन्यथा हो जाती है और यह दर्शित किया जाता है कि उसकी मृत्यु के कुछ पूर्व उसके पति ने या उसके पति के किसी नातेदार ने, दहेज की किसी मांग के लिये, या उसके सम्बन्ध में, उसके साथ क्रूरता की थी या उसे तंग किया था वहाँ ऐसी मृत्यु को “दहेज मृत्यु” कहा जायेगा, और ऐसा पति या नातेदार उसकी मृत्यु कारित करने वाला समझा जाएगा।
स्पष्टीकरण—इस उपधारा के प्रयोजनों के लिये “दहेज का वही अर्थ है जो दहेज प्रतिषेध 11 अधिनियम, 1961 (1961 का 28) की धारा 2 में है।
(2) जो कोई दहेज मृत्यु कारित करेगा वह कारावास से, जिसकी अवधि सात वर्ष से कम की नहीं होगी किन्तु जो आजीवन कारावास तक की हो सकेगी, दण्डित किया जाएगा।

Dowry death-
(1) Where the death of a woman is caused by any burns or bodily injury or occurs otherwise than under normal circumstances within seven years of her marriage and it is shown that soon before her death she was subjected to cruelty or harassment by her husband or any relative of her husband for, or in connection with, any demand for dowry, such death shall be called “dowry death”, and such husband or relative shall be deemed to have caused her death.
Explanation-For the purposes of this sub-section, “dowry” shall have the same meaning as in Section 2 of the Dowry Prohibition Act, 1961 (28 of 1961).
(2) Whoever commits dowry death shall be punished with imprisonment for a term which shall not be less than seven years but which may extend to imprisonment for life.

लागू अपराध

दहेज मृत्यु।
सजा-
कम से कम सात वर्ष के लिए कारावास, किंतु जो आजीवन कारावास तक का हो सकेगा।
यह अपराध एक गैर-जमानतीय और संज्ञेय अपराध की श्रेणी में आता है।
सेशन न्यायालय द्वारा विचारणीय है।

जुर्माना/सजा (Fine/Punishment) का प्रावधान

भारतीय दंड संहिता की धारा 304B के अंतर्गत जहाँ किसी स्त्री की मृत्यु किसी दाह या शारीरिक क्षति द्वारा कारित की जाती है या उसके विवाह के सात वर्ष के भीतर सामान्य परिस्थितियों में दहेज मांग को लेकर क्रूरता किया, जिससे स्त्री की मृत्यु हो जाती है, तो वह कम से कम सात वर्ष के लिए कारावास, किंतु जो आजीवन कारावास तक का हो सकेगा।

जमानत (Bail) का प्रावधान

भारतीय दंड संहिता की धारा 304B अंतर्गत जो अपराध कारित किए जाते है यह अपराध दंड प्रक्रिया संहिता में गैर-जमानतीय (Non-Baileble) अपराध की श्रेणी में आते है, इसलिए इस धारा के अंतर्गत किए गए अपराध में जमानत नही मिल सकेगी।

अपराधदंडअपराध की श्रेणीजमानतीय/गैर-जमानतीयविचारण
दहेज मृत्युकम से कम 7 वर्ष के लिये कारावास, किन्तु जो आजीवन कारावास तक हो सकेगा।संज्ञेयगैर-जमानतीयप्रथम वर्ग के मजिस्ट्रेट

हमारा प्रयास आईपीसी की धारा 304B की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

आईपीसी की धारा 304A (उपेक्षा द्वारा मृत्यु कारित करना) | IPC 304A in Hindi (Causing death by negligence)

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए भारतीय दंड संहिता की धारा 304A के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है भारतीय दंड संहिता की धारा 304A के अंतर्गत कैसे क्या सजा मिलती है और जमानत कैसे मिलती है, और यह अपराध किस श्रेणी में आता है, इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

धारा 304A का विवरण

भारतीय दण्ड संहिता (IPC) में धारा 304A के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। जो कोई उतावलेपन से या उपेक्षापूर्ण किसी ऐसे कार्य से किसी व्यक्ति की मृत्यु कारित करेगा, तो वह इस धारा के अन्तर्गत कारावास से दंडित किया जाएगा, अथवा जुर्माने से भी दंडित किया जाएगा।

आईपीसी की धारा 304A के अनुसार

उपेक्षा द्वारा मृत्यु कारित करना-

जो कोई उतावलेपन से या उपेक्षापूर्ण किसी ऐसे कार्य से किसी व्यक्ति की मृत्यु कारित करेगा, जो आपराधिक मानव-वध की कोटि में नहीं आता, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि दो वर्ष तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, या दोनों से, दण्डित किया जाएगा।

Causing death by negligence-
Whoever causes the death of any person by doing any rash or negligent act not amounting to culpable homicide, shall be punished with imprisonment of either description for a term which may extend to two years, or with fine, or with both.

लागू अपराध

उतावलेपन के या उपेक्षापूर्ण कार्य से मृत्यु कारित करना।
सजा-
2 वर्ष के लिये कारावास या जुर्माना या दोनो।
यह अपराध एक जमानतीय और संज्ञेय अपराध की श्रेणी में आता है।
प्रथम श्रेणी के मजिस्ट्रेट द्वारा विचारणीय है।

जुर्माना/सजा (Fine/Punishment) का प्रावधान

भारतीय दंड संहिता की धारा 304A के अंतर्गत जो कोई, उतावलेपन के या उपेक्षापूर्ण कार्य से मृत्यु कारित करता है, तो 3 वर्ष के लिए कारावास या जुर्माना या दोनो से दण्डित।

जमानत (Bail) का प्रावधान

भारतीय दंड संहिता की धारा 304A अंतर्गत जो अपराध कारित किए जाते है यह अपराध दंड प्रक्रिया संहिता में जमानतीय (Baileble) अपराध की श्रेणी में आते है, इसलिए इस धारा के अंतर्गत किए गए अपराध में जमानत मिल सकेगी।

अपराधदंडअपराध की श्रेणीजमानतीय/गैर-जमानतीयविचारण
उतावलेपन के या उपेक्षापूर्ण कार्य से मृत्यु कारित करना।दो वर्ष के कारावास या जुर्माना या दोनो।संज्ञेयजमानतीयप्रथम वर्ग के मजिस्ट्रेट

हमारा प्रयास आईपीसी की धारा 304A की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।