Home Blog Page 107

आईपीसी की धारा 354E (धारा 354, 354A, 354B, 354C, 354D के अंतर्गत अपराध कारित होने से रोकने में विफल रहने वाले व्यक्ति का दायित्व) | IPC 354E in Hindi (Liability of person present who fails to prevent the commission of offence under Section 354, 354A, 354B, 354C, 354D)

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए भारतीय दंड संहिता की धारा 354E के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है भारतीय दंड संहिता की धारा 354E के अंतर्गत कैसे क्या सजा मिलती है और जमानत कैसे मिलती है, और यह अपराध किस श्रेणी में आता है, इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

धारा 354E का विवरण

भारतीय दण्ड संहिता (IPC) में धारा 354E के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। जो कोई, धारा 354, धारा 354A, धारा 354B, धारा 354C या धारा 354D इसमे से किसी भी अपराध का दोषी होते हुये भी उपस्थित रहता है और ऐसे अपराध को कारित होने से रोकने की स्थिति में होते हुए भी ऐसे अपराध को कारित होने से रोकने में विफल रहता है, तो कारावास से दंडित किया जाएगा, साथ ही जुर्माने से, या दोनों से दंडित किया जाएगा।

आईपीसी की धारा 354E के अनुसार

धारा 354, 354A, 354B, 354C, 354D के अंतर्गत अपराध कारित होने से रोकने में विफल रहने वाले व्यक्ति का दायित्व-

जो कोई, धारा 354, धारा 354A, धारा 354B, धारा 354C या धारा 354D का अपराध कारित होते समय उपस्थित रहता है और ऐसे अपराध को कारित होने से रोकने की स्थिति में होते हुए भी ऐसे अपराध को कारित होने से रोकने में विफल रहता है या यदि वह अपराध को कारित होने से रोकने की स्थिति में नहीं है अपराधी को वैध दण्ड से बचाने के आशय से ऐसे किसी अपराध के कारित होने की सूचना किसी भी तरीके से निकटस्थ मजिस्ट्रेट या पुलिस अधिकारी को देने में विफल रहता है तो वह ऐसे अपराध के दुष्प्रेरण के लिए दांयी होते हुए दोनों में से किसी भांति के कारावास जिसकी अवधि तीन वर्ष तक की सकेगी या जुर्माने से या दोनों से दण्डित किया जाएगा।

Liability of person present who fails to prevent the commission of offence under Section 354, 354A, 354B, 354C, 354D-
Whoever, being present at the time of commission of an offence under Section 354, Section 354A, Section 354B, Section 354C or Section 354-D and being able to prevent such offence, fails to prevent the commission of such offence or not being in position to prevent the commission of such offence, fails to give information of the commission of such offence to the nearest magistrate or police officer, by any mode, with the intention of screening the offender from legal punishment, shall be liable for abetment of such offence and shall be punished with imprisonment of either description which may extend to three years or with fine or with both.

लागू अपराध

धारा 354, 354A, 354B, 354C, 354D के अंतर्गत अपराध कारित होने से रोकने में विफल रहने वाले व्यक्ति का दायित्व
सजा-
कारावास, जो 3 वर्ष तक का हो सकेगा और जुर्माना।
यह अपराध अनुसार ही जमानतीय/गैर-जमानतीय और संज्ञेय/गैर-संज्ञेय अपराध ।
किसी भी श्रेणी के मजिस्ट्रेट द्वारा विचारणीय है।

जुर्माना/सजा (Fine/Punishment) का प्रावधान

भारतीय दंड संहिता की धारा 354E के अंतर्गत जो कोई, धारा 354, धारा 354A, धारा 354B, धारा 354C या धारा 354D इसमे से किसी भी अपराध का दोषी होते हुये भी उपस्थित रहता है और ऐसे अपराध को कारित होने से रोकने की स्थिति में होते हुए भी ऐसे अपराध को कारित होने से रोकने में विफल रहता है , तो वह तीन वर्ष के कारावास से दण्डित होगा और जुर्माने के साथ भी दायी होगा।

जमानत (Bail) का प्रावधान

भारतीय दंड संहिता की धारा 354E अंतर्गत जो अपराध कारित किए जाते है यह अपराधनुसार ही दंड प्रक्रिया संहिता में जमानतीय/गैर-जमानतीय (Baileble/Non-Baileble) अपराध की गणना होगी, इसलिए इस धारा के अंतर्गत किए गए अपराध में अपराधनुसार ही जमानत मिल सकेगी या नही।

अपराधदंडअपराध श्रेणीजमानतीय/गैर-जमानतीयविचारणीय
धारा 354, धारा 354A, धारा 354B, धारा 354C या धारा 354D अपराधनुसार3 वर्ष का कारावास+जुर्मानाअपराधनुसारअपराधनुसारकिसी भी श्रेणी के मजिस्ट्रेट व्दारा

हमारा प्रयास आईपीसी की धारा 354E की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

आईपीसी की धारा 354D (पीछा करना) | IPC 354D in Hindi (Stalking)

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए भारतीय दंड संहिता की धारा 354D के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है भारतीय दंड संहिता की धारा 354D के अंतर्गत कैसे क्या सजा मिलती है और जमानत कैसे मिलती है, और यह अपराध किस श्रेणी में आता है, इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

धारा 354D का विवरण

भारतीय दण्ड संहिता (IPC) में धारा 354D के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। जो कोई पुरूष किसी स्त्री का पीछा किसी गलत इरादे से करता है या किसी के लिये करता है अथवा इण्टनेट, इमेल या इलेक्ट्रानिक संसूचना के माध्यम निगरानी करता है तो वह इस धारा के अन्तर्गत कारावास से दंडित किया जाएगा, साथ ही जुर्माने से भी दंडित किया जाएगा।

आईपीसी की धारा 354D के अनुसार

पीछा करना-

(1) कोई पुरुष, जो
(i) किसी स्त्री का पीछा करेगा या ऐसी स्त्री द्वारा अनिच्छा के स्पष्ट उपदर्शन के बावजूद व्यक्तिगत अन्योन्यकिया को आगे बढ़ाने के लिए बार-बार ऐसी स्त्री से सम्पर्क करेगा या सम्पर्क करने का प्रयत्न करेगा, या
(ii) स्त्री द्वारा इण्टरनेट, ई-मेल या इलेक्ट्रानिक संसूचना के किसी अन्य प्रकार के प्रयोग का अनुवीक्षण करेगा,
पीछा करने का अपराध करेगा :
परन्तु यह कि ऐसा आचरण पीछा करने की कोटि में नहीं आयेगा, यदि वह पुरुष, जिसने पीछा किया, यह साबित करता है कि
(i) उसे अपराध को निवारित करने या उसका पता लगाने के प्रयोजन से किया गया था और पीछा करने वाले अभियुक्त पुरुष को राज्य द्वारा अपराध का निवारण करने और उसका पता लगाने का उत्तरदायित्व सौंपा गया था; या
(ii) पीछा किसी विधि के अधीन या किसी विधि के अधीन किसी व्यक्ति द्वारा अधिरोपित किसी शर्त या अपेक्षा का अनुपालन करने के लिए किया गया था; या
(iii) विशिष्ट परिस्थितियों में ऐसा आचरण के युक्तियुक्त और न्यायोचित था।
(2) जो कोई पीछा करने का अपराध कारित करेगा, वह प्रथम दोषसिद्धि पर दोनों में से किसी भाँति के कारावास से, जिसकी अवधि तीन वर्ष तक की हो सकेगी, दण्डित किया जायेगा और जुर्माने से भी दण्डनीय होगा और दूसरी या पश्चात्वर्ती दोषसिद्धि पर दोनों में से किसी भाँति के कारावास से, जिसकी अवधि पाँच वर्ष तक हो सकेगी, दण्डित किया जाएगा और जुर्माने से भी दण्डनीय होगा।

Stalking-
(1) Any man who
(i) follows a woman and contacts, or attempts to contact such woman to foster personal interaction repeatedly, despite a clear indication of disinterest by such woman; or
(ii) monitors the use by a woman of the internet, email or any other form of
electronic communication,
commits the offence of stalking:
Provided that such conduct shall not amount to stalking if the man who pursued it proves that-
(i) it was pursued for the purpose of preventing or detecting crime and the man accused of stalking had been entrusted with the responsibility of prevention and detection of crime by the State; or
(ii) it was pursued under any law or to comply with any condition or requirement imposed by any person under any law; or (iii) in the particular circumstances such conduct was reasonable and justified.
(2) Whoever commits the offence of stalking shall be punished on first conviction with imprisonment of either description for a term which may extend to three years, and shall also be liable to fine; and be punished on a second or subsequent conviction, with imprisonment of either description for a term which may extend to five years. and shall also be liable to fine.

लागू अपराध

पीछा करना।
सजा
-प्रथम दोषसिद्धि के लिये 3 वर्ष तक का कारावास और जुर्माने से भी।
यह अपराध एक जमानतीय और संज्ञेय अपराध की श्रेणी में आता है।
सजा- व्दितीय या पश्चात्वर्ती दोषसिद्ध के लिये 5 वर्ष तक का कारावास और जुर्माने से भी।
यह अपराध एक गैर-जमानतीय और संज्ञेय अपराध की श्रेणी में आता है।
किसी भी श्रेणी के मजिस्ट्रेट द्वारा विचारणीय है।

जुर्माना/सजा (Fine/Punishment) का प्रावधान

भारतीय दंड संहिता की धारा 354D के अंतर्गत जो कोई, किसी स्त्री का किसी गलत इरादे से पीछा करता है या इण्टरनेट के माध्यक से किसी पर निगरानी रखता है, तो प्रथम दोष सिद्ध होने पर 3 वर्ष तक कारावास से और जुर्माने से भी दण्डित होगा एवंम् व्दितीय या पश्चात्वर्ती दोषसिद्ध होने पर 5 वर्ष तक का हो सकेगा और जुर्माने से भी दायी होगा।

जमानत (Bail) का प्रावधान

भारतीय दंड संहिता की धारा 354D अंतर्गत जो अपराध कारित किए जाते है यह अपराध दंड प्रक्रिया संहिता में जमानतीय (Baileble) अपराध की श्रेणी में आते है, इसलिए इस धारा के अंतर्गत किए गए अपराध में जमानत मिल सकेगी, लेकिन व्दितीय या पश्चात्वर्ती दोषसिद्ध होने पर अपराध दंड प्रक्रिया संहिता में गैर-जमानतीय (Non-Baileble) अपराध की श्रेणी में आ जाता है, इसलिये असानी से जमानत नही मिल सकेगी।

अपराधदंडअपराध श्रेणीजमानतीय/गैर-जमानतीयविचारणीय
पीछा करना प्रथम दोष सिद्धिप्रथम दोषसिद्धि के लिये 3 वर्ष का कारावास और जुर्मानासंज्ञेयजमानतीयकिसी भी श्रेणी के मजिस्ट्रेट
पीछा करना व्दितीय दोषसिद्धव्दितीय या पश्चात्वर्ती दोषसिद्ध के लिये 5 वर्ष का कारावास और जुर्मानासंज्ञेयगैर-जमानतीयकिसी भी श्रेणी के मजिस्ट्रेट

हमारा प्रयास आईपीसी की धारा 354D की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

आईपीसी की धारा 354C (दृश्यरतिकता) | IPC 354C in Hindi (Voyeurism)

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए भारतीय दंड संहिता की धारा 354C के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है भारतीय दंड संहिता की धारा 354C के अंतर्गत कैसे क्या सजा मिलती है और जमानत कैसे मिलती है, और यह अपराध किस श्रेणी में आता है, इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

धारा 354C का विवरण

भारतीय दण्ड संहिता (IPC) में धारा 354C के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। जो कोई पुरुष किसी स्त्री को प्राइवेट परिस्थितियों मे देखता है या फोटो खीचेंगा अथवा अन्य व्यक्ति को दिखाता है, दिखायेगा या ऐसी फोटो को वायरल करता है, तो वह कारावास से दंडित किया जाएगा, साथ ही जुर्माने से, या दोनों से दंडित किया जाएगा।

दृश्यरतिकता

दृश्यरतिकता का अभिप्राय- जो कोई पुरूष किसी महिला को प्राइवेट अवस्था मे देखता है या किसी को दिखाता है, साधारण भाषा मे उसके प्राइवेट कार्यो पर ताक-झाक करता है अथवा ऐसी अवस्था मे फोटो खीच लेता है और वायरल कर देता है, तो वह इस धारा के अन्तर्गत अपराध का दोषी होगा।

आईपीसी की धारा 354C के अनुसार

दृश्यरतिकता-

कोई पुरुष, जो प्राइवेट कार्य में संलग्न स्त्री को उन परिस्थितियों में देखेगा या का चित्र खींचेगा, जहाँ उसे सामान्यतया या तो अपराधी द्वारा या अपराधी की पहल पर किसी अन्य व्यक्ति द्वारा देखे न जाने की प्रत्याशा होगी, या ऐसे चित्र को प्रसारित करेगा, प्रथम दोषसिद्धि पर दोनों में से किसी भाँति के कारावास से, जिसकी अवधि एक वर्ष से न्यून न होगी, किन्तु जो तीन वर्ष तक की हो सकेगी, दण्डित किया जायेगा एवं जुर्माने से भी दण्डनीय होगा और द्वितीय या पश्चात्वर्ती दोषसिद्धि पर दोनों में से किसी भाँति के कारावास से, जिसकी अवधि तीन वर्ष से न्यून नहीं होगी, किन्तु जो सात वर्ष तक की हो सकेगी, दण्डित किया जाएगा और जुर्माने से भी दण्डनीय होगा।

Voyeurism-
Any man who watches, or captures the image of a woman engaging in a private act in circumstances where she would usually have the expectation of not being observed either by the perpetrator or by any other person at the behest of the perpetrator or disseminates such image shall be punished on first conviction with imprisonment of either description for a term which shall not be less than one year, but which may extend to three years, and shall also be liable to fine, and be punished on a second or subsequent conviction, with imprisonment of either description for a term which shall not be less than three years, but which may extend to seven years, and shall also be liable to fine.

लागू अपराध

दृश्यरतिकता ।
सजा
-प्रथम दोषसिद्धि के लिये 1 वर्ष के कारावास से कम नही, किन्तु जो 3 वर्ष तक का हो सकेगा और जुर्माने से भी।
यह अपराध एक जमानतीय और संज्ञेय अपराध की श्रेणी में आता है।
सजा- व्दितीय या पश्चात्वर्ती दोषसिद्ध के लिये 3 वर्ष के कारावास से कम नही, जो 7 वर्ष तक का हो सकेगा और जुर्माने से भी।
यह अपराध एक गैर-जमानतीय और संज्ञेय अपराध की श्रेणी में आता है।
किसी भी श्रेणी के मजिस्ट्रेट द्वारा विचारणीय है।

जुर्माना/सजा (Fine/Punishment) का प्रावधान

भारतीय दंड संहिता की धारा 354B के अंतर्गत जो कोई, किसी स्त्री को प्राइवेट अवस्था मे देखता या उसकी प्राइवेट जीवन मे ताक-झाक करता है, तो प्रथम दोष सिद्ध होने पर 1 वर्ष से कम नही, जो 3 वर्ष तक कारावास से और जुर्माने से भी दण्डित होगा एवंम् व्दितीय या पश्चात्वर्ती दोषसिद्ध के लिये 3 वर्ष के कारावास से कम नही, जो 7 वर्ष तक का हो सकेगा और जुर्माने से भी दायी होगा।

जमानत (Bail) का प्रावधान

भारतीय दंड संहिता की धारा 354C अंतर्गत जो अपराध कारित किए जाते है यह अपराध दंड प्रक्रिया संहिता में जमानतीय (Baileble) अपराध की श्रेणी में आते है, इसलिए इस धारा के अंतर्गत किए गए अपराध में जमानत मिल सकेगी, लेकिन व्दितीय या पश्चात्वर्ती दोषसिद्ध होने पर अपराध दंड प्रक्रिया संहिता में गैर-जमानतीय (Non-Baileble) अपराध की श्रेणी में आ जाता है, इसलिये असानी से जमानत नही मिल सकेगी।

अपराधदंडअपराध श्रेणीजमानतीय/गैर-जमानतीयविचारणीय
दृश्यरतिकता प्रथम दोषसिद्दिप्रथम दोषसिद्धि के लिये कारावास, जो 1 वर्ष से कम नही, 3 वर्ष तक+जुर्मानासंज्ञेयजमानतीयकिसी भी श्रेणी के मजिस्ट्रेट
दृश्यरतिकता व्दितीय दोषसिद्दिव्दितीय या पश्चात्वर्ती दोषसिद्ध पर कारावास, जो 3 वर्ष से कम नही, 7 वर्ष तक+जुर्मानासंज्ञेयगैर-जमानतीयकिसी भी श्रेणी के मजिस्ट्रेट

हमारा प्रयास आईपीसी की धारा 354C की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

आईपीसी की धारा 354B (विवस्त्र करने के आशय से स्त्री पर हमला या आपराधिक बल का प्रयोग) | IPC 354B in Hindi (Assault or use of criminal force to woman with intent to disrobe)

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए भारतीय दंड संहिता की धारा 354B के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है भारतीय दंड संहिता की धारा 354B के अंतर्गत कैसे क्या सजा मिलती है और जमानत कैसे मिलती है, और यह अपराध किस श्रेणी में आता है, इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

धारा 354B का विवरण

भारतीय दण्ड संहिता (IPC) में धारा 354B के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। जो कोई किसी महिला को विवस्त्र करने या निर्वस्त्र होने के लिये विवश करने के आशय से उस हमला करता है या ऐसा कार्य करने का दुष्प्रेरण करेगा, तो वह 3 वर्ष के कारावास से न्यून नही होगी, किन्तु जो सात वर्ष तक की हो सकेगी, दंडित किया जाएगा, साथ ही जुर्माने से, दंडित किया जाएगा।

आईपीसी की धारा 354B के अनुसार

विवस्त्र करने के आशय से स्त्री पर हमला या आपराधिक बल का प्रयोग-

कोई पुरुष, जो किसी स्त्री को विवस्त्र करने या निर्वस्त्र होने के लिए विवश करने के आशय से उस पर हमला करेगा या आपराधिक बल का प्रयोग करेगा या ऐसे कार्य का दुष्प्रेरण करेगा, दोनों में से किसी भाँति के कारावास से, जिसकी अवधि तीन वर्ष से न्यून नहीं होगी, किन्तु जो सात वर्ष तक की हो सकेगी, से दण्डित किया जाएगा और जुर्माने से भी दण्डनीय होगा।

Assault or use of criminal force to woman with intent to disrobe-
Any man who assaults or uses criminal force to any woman or abets such act with the intention of disrobing or compelling her to be naked shall be punished with imprisonment of either description for a term which shall not be less than three years but which may extend to seven years, and shall also be liable to fine.

लागू अपराध

स्त्री को विवस्त्र करने के आशय से उस पर हमला या अपराधिक बल का प्रयोग।
सजा-
कारावास, जो 3 वर्ष से कम नही, किन्तु जो 7 वर्ष तक का हो सकेगा और जुर्माना।
यह अपराध एक गैर-जमानतीय और संज्ञेय अपराध की श्रेणी में आता है।
किसी भी श्रेणी के मजिस्ट्रेट द्वारा विचारणीय है।

जुर्माना/सजा (Fine/Punishment) का प्रावधान

भारतीय दंड संहिता की धारा 354B के अंतर्गत जो कोई, किसी स्त्री को विवस्त्र करने के आशय से उस पर हमला या अपराधिक बल का प्रयोग करेगा, तो वह तीन वर्ष के कारावास कम नही, किन्तु जो सात वर्ष तक का हो सकेगा, दण्डित किया जायेगा और जुर्माने से भी दण्डित किया जायेगा।

जमानत (Bail) का प्रावधान

भारतीय दंड संहिता की धारा 354B अंतर्गत जो अपराध कारित किए जाते है यह अपराध दंड प्रक्रिया संहिता में गैर-जमानतीय (Non-Baileble) अपराध की श्रेणी में आते है, इसलिए इस धारा के अंतर्गत किए गए अपराध में जमानत नही मिल सकेगी, और यह अपराध समझौता योग्य नहीं है।

अपराधदंडअपराध की श्रेणीजमानतीय/गैर-जमानतीयविचारण
स्त्री को विवस्त्र करने के आशय से उस पर हमला या अपराधिक बल का प्रयोग।कारावास जो 3 वर्ष से कम नही, जो 7 वर्ष तक का हो सकेगा+जुर्मानासंज्ञेयगैर-जमानतीयकोई भी मजिस्ट्रेट

हमारा प्रयास आईपीसी की धारा 354B की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

आईपीसी की धारा-354A (यौन उत्पीड़न और यौन उत्पीड़न के लिए सजा) | IPC 354A in Hindi (Sexual harassment and punishment for sexual harassment)

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए भारतीय दंड संहिता की धारा 354A के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है भारतीय दंड संहिता की धारा 354A के अंतर्गत कैसे क्या सजा मिलती है और जमानत कैसे मिलती है, और यह अपराध किस श्रेणी में आता है, इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

धारा 354A का विवरण

भारतीय दण्ड संहिता (IPC) में धारा 354A के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। जो कोई किसी महिला का यौन उत्पीड़न करता है, तो वह यौन उत्पीड़न के लिये कठोर कारावास से दंडित किया जाएगा, साथ ही जुर्माने से, या दोनों से दंडित किया जाएगा।

यौन उत्पीड़न

यौन उत्पीड़न का अभिप्राय जब कोई व्यक्ति किसी महिला की लंजा भंग करने के उद्देश्य से उस पर षणयंत्र करता है, जैसे किसी स्त्री को उसकी लंजा भंग करने के लिये नंग्न करना या लंजा भंग करने के लिये अपराराधिक हमला करना या बल का प्रयोग करना, अथवा उसके साथ षणयंत्र या दुष्प्रेरण किया गया है, तो उसे यौन उत्पीड़न की श्रेणी मे आता है।
इसके अलावा किसी स्त्री को उसकी अनुमति के बगैर छूना, अंगक्रियाये करना या उसके साथ शरीरिक सम्बन्ध बनाने के लिये दबाव बनाता है या शारीरिक सम्बन्ध बनाने के लिये अश्लील साहित्यिक दिखाता है अथवा यौन टिप्पड़ी करता है, तो वह भी यौन उत्पीड़न की श्रेणी मे आता है।

आईपीसी की धारा 354A के अनुसार

यौन उत्पीड़न और यौन उत्पीड़न के लिए सजा-

(1) निम्नलिखित में से कोई भी कार्य करने वाला व्यक्ति-
(i) अवांछित और स्पष्ट यौन संबंधों से जुड़े शारीरिक संपर्क एवंम् अंगक्रियाये, या
(ii) शारीरिक सम्बन्ध बनाने की मांग या अनुरोध: या
(iii) किसी महिला की इच्छा के विरुद्ध अश्लील साहित्य दिखाना, या
(iv) यौन रंगीन टिप्पणी करना।
यौन उत्पीड़न के अपराध का दोषी होगा।
(2) कोई भी व्यक्ति जो उप-धारा (1) के खंड (i) या खंड (ii) या खंड (iii) में निर्दिष्ट अपराध करता है, उसे कठोर कारावास से दंडित किया जाएगा, जिसे तीन साल तक बढ़ाया जा सकता है, या ठीक है, या दोनों के साथ।
(3) कोई भी व्यक्ति जो उप-धारा (1) के खंड (iv) में निर्दिष्ट अपराध करता है, उसे किसी एक अवधि के लिए कारावास, जिसे एक वर्ष तक बढ़ाया जा सकता है, या जुर्माना, या दोनों के साथ दंडित किया जाएगा।

Sexual harassment and punishment for sexual harassment-

(1) A man committing any of the following acts-
(i) physical contact and advances involving unwelcome and explicit sexual overtures, or
(ii) a demand or request for sexual favours: or
(iii) showing pornography against the will of a woman, or
(iv) making sexually coloured remarks.
shall be guilty of the offence of sexual harassement.
(2) Any man who commits the offence specified in clause (i) or clause (ii) or clause (iii) of sub-section (1) shall be punished with rigorous imprisonment for a term which may extend to three years, or with fine, or with both.
(3) Any man who commits the offence specified in clause (iv) of sub-section (1) shall be punished with imprisonment of either description for a term which may extend to one year, or with fine, or with both.

लागू अपराध

अवांछनीय शारीरिक सम्पर्क और अंगक्रियाओं की प्रकृति का लैंगिक उत्पीड़न या अश्लील चित्र दर्शित करते हुए यौन स्वीकृति की मांग या अनुरोध ।
सजा-
कारावास, जो 3 वर्ष तक का हो सकेगा या जुर्माना, या दोनो।
यह अपराध एक जमानतीय और संज्ञेय अपराध की श्रेणी में आता है।
लैंगिक रूप से आभासी टिप्पणी करने की प्रकृति का यौन उत्पीड़न
सजा- कारावास, जो 1 वर्ष तक का हो सकेगा या जुर्माना, या दोनो।
यह अपराध एक जमानतीय और गैर-संज्ञेय अपराध की श्रेणी में आता है।
किसी भी श्रेणी के मजिस्ट्रेट द्वारा विचारणीय है।

जुर्माना/सजा (Fine/Punishment) का प्रावधान

भारतीय दंड संहिता की धारा 354A के अंतर्गत जो कोई, किसी स्त्री के साथ अवांछनीय शारीरिक सम्पर्क और अंगक्रियाओं की प्रकृति का लैंगिक उत्पीड़न या अश्लील चित्र दर्शित करते हुए यौन स्वीकृति की मांग या अनुरोध करता है, तो वह तीन वर्ष के कारावास से दण्डित होगा या जुर्माने के लिए अथवा दोनो के साथ भी दायी होगा। इसके अलावा यदि कोई लैंगिक रूप से आभासी टिप्पणी करने की प्रकृति का यौन उत्पीड़न करता है, तो वह एक वर्ष के कारावास से दण्डित होगा या जुर्माने के लिए अथवा दोनो के साथ भी दायी होगा।

इसे भी पढ़े- आईपीसी की धारा 354

जमानत (Bail) का प्रावधान

भारतीय दंड संहिता की धारा 354A अंतर्गत जो अपराध कारित किए जाते है वह अपराध दंड प्रक्रिया संहिता में जमानतीय (Baileble) अपराध की श्रेणी में आते है, इसलिए इस धारा के अंतर्गत किए गए अपराध में जमानत मिल सकेगी, लेकिन यह अपराध समझौता योग्य नहीं है।

अपराधदंडअपराध की श्रेणीजमानतीय/गैर-जमानतीयविचारण
अवांछनीय शारीरिक सम्पर्क और अंगक्रियाओं की प्रकृति का लैंगिक उत्पीड़न या अश्लील चित्र दर्शित करते हुए यौन स्वीकृति की मांग या अनुरोधकारावास, जो 3 वर्ष तक का हो सकेगा या जुर्माना, या दोनो।संज्ञेयजमानतीयकोई मजिस्ट्रेट
लैंगिक रूप से आभासी टिप्पणी करने की प्रकृति का यौन उत्पीड़न
कारावास, जो 1 वर्ष तक का हो सकेगा या जुर्माना, या दोनो।गैर-संज्ञयजमानतीयकोई मजिस्ट्रेट

हमारा प्रयास आईपीसी की धारा 354A की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

The Juvenile Justice (Care and Protection of Children) Act | किशोर न्याय (देखभाल एवंम् सुरक्षा) कानून सम्पूर्ण जानकारी हिन्दी मे

नमस्कार दोस्तो, आज हम किशोर अपराध (Juvenile Crime) पर विस्तृत चर्चा करेंगे। बाल न्याय/किशोर न्याय (Juvenile Justice) कानून, 8 वर्ष से अधिक तथा 18 वर्ष से कम आयु के बालकों व्दारा समाज विरोधी या कानून विरोधी कार्य करने पर सजा का प्रावधान है। किशोर व्दारा किये गये अपराधो को वयस्क की भांति न आंका जाये, अपितु वह किशोर है, तो सजा भी किशोर की भांति ही मिलना चाहिये, इसका ध्यान रखते हुये, किशोर न्याय (Juvenile Justice) कानून 1986 बना। जिसका उद्देश्य किशोरों के अधिकारों एवंम् मिलने वाली सजा कैसे और कितने समय तक दिया जाना है, कानून मे स्पष्ट गया है।

किशोर न्याय कानून के अन्तर्गत किसी किशोर बालक व्दारा किये गये समाजविरोधी कार्य को न्यायिक दृष्टिकोण से परखा जाये, इसके अलावा यदि किशोर किसी अपराध मे लिप्त होता है, तो उसे अधिकतम् 7 वर्ष तक किशोर सुधार गृह मे रखा जा सकता है, जहां उसकी देखभाल एवंम् सुरक्षा का दायित्व किशोर सुधार गृह को होता है। किशोर व्दारा किये गये अपराधो की सुनवाई हेतु किशोर न्यायालय (Juvenile Court) का गठन किया गया, जहां किशोर व्दारा किये गये अपराध की ही सुनवाई होती है।

वैसे हमारे भारत देश मे भी किशोर अपराध धीरे-धीरे बढ़ रहा है, आये दिन न्यूजपेपर, टीवी इत्यादि मे नाबालिक बच्चे व्दारा यह अपराध किया गया, ऐसी-ऐसी सूचनाये सामने आ रही है। आज हम इस पोस्ट मे इसी विषय पर गम्भीरता से चर्चा करने वाले है।

भारत में बाल अपराध को किशोर अपराध (Juvenile Crime) की श्रेणी में रखा गया है अर्थात्, एक निर्दिष्ट आयु से कम उम्र के बच्चों द्वारा किए गए अपराधी कृत्यों को बाल अपराधों के रूप में वर्गीकृत किया जाता है। हालांकि, यह सवाल उठता है कि किसे किस बच्चे के रूप में संदर्भित किया जाना चाहिए, क्योकि न्यूनतम या अधिकतम आयु की आवश्यकता होती है, किशोर के लिये? भारत में विभिन्न उम्र के बच्चों को बाल अपराधी करार दिया जाता है। भारत में, उदाहरण के लिए, एक बच्चे को अपराधी घोषित करने के लिए 14 वर्ष का होना चाहिए, जिसकी अधिकतम आयु 18 वर्ष है। किशोर अपराध के मामलो मे कानून व्दारा किशोर अपराधियों की न्यूनतम और अधिकतम उम्र के बारे में कोई सामान्य धारणा मौजूद नहीं है।

भारत में किशोर अपराध एक गंभीर समस्या का विषय है। एक किशोर बच्चा, जो उस उम्र तक नहीं पहुंचा है फिर भी कोई आपराधिक गतिविधियों के लिए उसी तरह जिम्मेदार ठहराया जा सकता है जैसे एक वयस्क व्यक्ति कर सकता है। एक युवा आपराधिक अपराधी का जिक्र करते समय, किशोर शब्द का प्रयोग किया जाता है। परिणामस्वरूप, एक किशोर वह बच्चा होता है जिस पर कुछ ऐसे कार्य या चूक करने का आरोप लगाया जाता है जो अवैध हैं और जिन्हें दंड कानूनों द्वारा इस रूप में वर्गीकृत किया गया है। सरकारी आंकड़ो के अनुसार किशोर हत्या और सामूहिक बलात्कार जैसे सबसे भयानक अपराधों में लिप्त होने की संख्या प्रतिवर्ष अत्यधिक बढ़ रही हैं। यह भी एक गम्भीर विषय है, यद्यपि बच्चों में आपराधिक आचरण के कारण जटिल हैं, फिर भी कुछ युवाओं के जीवन में अपराध का काफी हद तक पूर्वाभास हो जाता है। कई विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा कानून समस्या से निपटने के लिए अपर्याप्त है और इसे बदलना होगा ताकि नाबालिगों पर गंभीर अपराधों के लिए वयस्कों के रूप में मुकदमा चलाया जा सके और सजा दी जा सके। हालांकि, ऐसे विरोधी दृष्टिकोण हैं जो इस विचार को साझा नहीं करते हैं।

किशोर अपराध के कारण की बात करे, तो सबसे पहले इण्टरनेट और यह मोबाइल भी काफी जिम्मेदार है, क्योकि किशोर सबसे अधिक इन्ही की वजह से अपना मानसिक संतुलन खो रहे है, जिनका खामीयाजा देखने को मिल रहा है, आज के युग के प्रत्येक किशोर के पास इण्टरनेट चलाने के बड़ा फोन है, जिसका अधिकांशतः यदि घर-परिवार ध्यान नही दे पाते है, और इनका गलत उपयोग कर रहे है। यह भी मुख्य कारण है।

किशोर अपराध (Juvenile Crime)

किशोर अपराध किसी किशोर (अधिकतम् आयु-18 वर्ष) द्वारा कोई कानून-विरोधी या समाज विरोधी कार्य किया जाता है तो उसे किशोर अपराध या बाल अपराध कहते हैं। कानूनी दृष्टिकोण से बाल अपराध 8 वर्ष से अधिक तथा 16 वर्ष से कम आयु के बालक द्वारा किया गया कानूनी विरोधी कार्य है जिसे कानूनी कार्यवाही के लिये किशोर न्यायालय के समक्ष उपस्थित किया जाता है। भारत में किशोर न्याय अधिनियम 1986 (संशोधित 2000) के अनुसर 16 वर्ष तक की आयु के लड़कों एवं 18 वर्ष तक की आयु की लड़कियों के अपराध करने पर किशोर अपराधी की श्रेणी में सम्मिलित किया गया है। किशोर अपराध की अधिकतम आयु सीमा अलग-अलग राज्यों मे अलग-अलग है। इस आधार पर किसी भी राज्य द्वारा निर्धारित आयु सीमा के अन्तर्गत बालक द्वारा किया गया कानूनी विरोधी कार्य किशोर अपराध है।

किशोर अपराध हमारे भारत मे समुचित पालन पोषण मारपीट और अपमान बहुधा बालक को अपराध की राह पर ले जाता है। स्वस्थ, मनोरंजन का व्यक्ति के जीवन में बडा महत्वपूर्ण स्थान होता है स्वस्थ एवंम् मनोरंजन के अभाव में बालक की अपराधी प्रवृत्तियों को प्रोत्साहन मिलता है। यह भी किशोर अपराध बढ़ने का प्रमुख कारण है, सरकार व्दारा किशोर अपराधों को रोकने के किशोर सुधार गृह मे अनेकों तरह किशोर जागरूकता प्रोग्राम चलाये जा रहे है।

किशोर न्याय (Juvenile Justice)

किशोर व्दारा किये गये अपराधों को एक वयस्क व्यक्ति के रूप मे समझता गलत है, क्योकि एक वयस्क व्यक्ति एवंम् किसी किशोर बालक मे दोनो के मस्तिष्क मे काफी अंतर होता, किशोर बालक का मस्तिष्क का पूर्ण विकसित नही हुआ होता है, क्या करना सही होगा क्या गलत होगा यह अच्छे से विचार नही किया जा सकता है, इसीलिये भारत के संविधान मे किशोर न्याय कानून बनाया गया। जिसके तहत किशोरों पर वयस्यक की भांति कानूनी कार्यवाही को रोका जा सके। किसी किशोर को वयस्क की तरह दण्डित न किया जाये।

किशोर न्याय प्रणाली किशोर व्दारा किये गये अपराधों का बोध कराते हुये, उनके मानसिक विकारों को दूर करने के उद्देश्य एक स्पेशल किशोर न्यायालय का गठन किया गया, जिसमे ऐसे किशोरों को अधिकतम् 7 वर्षो तक ही किशोर पुर्नवास केन्द्र/बाल सुधार गृह मे रखा जा सकता है। किशोरों के मानसिक विकारों को दूर करने के लिये स्पेशल केयर मे रखा जाता है, जिसे अंग्रेजी भाषा मे Juvenile Rehabilitation Center कहते है। जिसमे किशोरों को स्पेशल ट्रेनिंग, शिक्षा एवंम् मानसिक विकास को बढावां देने के लिये बडें जागरूक प्रोग्राम संचालित किये जाते है।

किशोर न्यायालय (Juvenile Court)

किशोर व्दारा किये गये अपराधों की सुनवाई हेतु हर जिले मे किशोर न्यायालय बनाये गयेे, किशोर व्दारा किये गये अपराधिक मामलो की कानूनी सुनवाई की जाती है। किशोर न्यायालय का गठन किशोर व्दारा हो रहे समाज विरोधी कार्यो को रोकने के लिये बनाया गया। ऐसे अपराधों को वयस्क न्यायालय न लेकर जाकर एक स्पेशल कोर्ट बनाया, जिसके किशोर अपराधों की सुनवाई की जा सके।

बाल कल्याणबाल हितों के सन्तुलन को बनाये रखने में किशोर न्यायालय एक ऐसी वैधानिक प्रणाली है जो न्यायिक कार्यवाही में निहित, अभिभावक प्रेरणा तथा संरक्षण प्रवृत्ति द्वारा बालकों की रक्षा करने की विशेषताओं के आधार पर उन साधारण न्यायालयों से भिन्न है जिनमें न्यायाविधि की कठोरता तथा दण्ड देने की प्रक्रिया पर जोर दिया जाता है।

किशोर न्याय Juvenile Justice (बच्चों की देखभाल और संरक्षण) संशोधन 2015

किशोर न्याय (बच्चों की देखभाल और संरक्षण) संसोधन अधिनियम 2015 मे कई संसोधन किये गये है, जो निम्नप्रकार है-

  • संसद ने किशोर अपराध कानून और किशोर न्याय (बालकों की देखभाल और संरक्षण) अधिनियम, 2000 को बदलने के लिये किशोर न्याय (बालकों की देखभाल और संरक्षण) अधिनियम, 2015 को पारित किया था।
  • यह अधिनियम जघन्य अपराधों में संलिप्त 16-18 वर्ष की आयु के बीच के किशोरों (जुवेनाइल) के ऊपर बालिगों के समान मुकदमा चलाने की अनुमति देता है।
  • इस अधिनियम में गोद लेने के लिये माता-पिता की योग्यता और गोद लेने की पद्धति को शामिल किया गया है। अधिनियम ने हिंदू दत्तक ग्रहण व रखरखाव अधिनियम (1956) और वार्ड के संरक्षक अधिनियम (1890) को अधिक सार्वभौमिक रूप से सुलभ दत्तक कानून के साथ बदल दिया।
  • अधिनियम गोद लेने से संबंधित मामलों के लिये केंद्रीय दत्तक ग्रहण संसाधन प्राधिकरण (Central Adoption Resource Authority-CARA) को वैधानिक निकाय बनाता है, यह भारतीय अनाथ बच्चों के पालन-पोषण, देखभाल एवं उन्हें गोद देने के लिये एक नोडल एजेंसी के रूप में कार्य करता है।
  • सभी बाल देखभाल संस्थान, चाहे वे राज्य सरकार अथवा स्वैच्छिक या गैर-सरकारी संगठनों द्वारा संचालित हों, अधिनियम के लागू होने की तारीख से 6 महीने के भीतर अधिनियम के तहत अनिवार्य रूप से पंजीकृत होने चाहिये।

किशोर न्याय (बच्चों की देखभाल और संरक्षण) संशोधन विधेयक, 2021 के प्रावधान:

गैर-संज्ञेय अपराध:

किशोर के खिलाफ अपराध जो किशोर न्याय अधिनियम, 2015 के अध्याय “बच्चों के खिलाफ अन्य अपराध” में वर्णित हैं, जिस अपराध के लिये तीन से सात वर्ष की जेल की सज़ा हो, वह ”गैर-संज्ञेय” होगा।

संज्ञेय अपराध:

नये संसोधन अधिनियम के अन्तर्गत जो कोई किशोर जघन्य अपराध जैसा कार्य करता है, तो उन किशोरों पर (Juvenile Justice) के अन्तर्गत व्यस्क के समान मुकदमा चलाने की अनुमति देता है।

गोद लेना/एडॉप्शन:

संशोधन अधिनियम बच्चों के संरक्षण और गोद लेने के प्रावधान को संरक्षण प्रदान करता है। न्यायालय के समक्ष गोद लेने के कई मामले लंबित हैं तथा न्यायालय की कार्यवाही को तीव्र करने के लिये शक्ति ज़िला मजिस्ट्रेट को हस्तांतरित कर दी गई है। संशोधन में प्रावधान है कि ऐसे गोद लेने के आदेश जारी करने का अधिकार ज़िला मजिस्ट्रेट के पास है।

किशोर न्याय संसोधन अधिनियम 2015 के अन्तर्गत धाराये

किशोर न्याय संसोधन अधिनियम 2015 के अन्तर्गत 10 अध्यायों मे कुल 112 धारायें है, जो निम्नप्रकार है-

1- संक्षिप्त शीर्षक, विस्तार, प्रारंभ और आवेदन (Short title, extent, commencement and application)

2- परिभाषाएं (Definitions)

3- अधिनियम के प्रशासन में पालन किए जाने वाले सामान्य सिद्धांत (General principles to be followed in administration of Act)

4- किशोर न्याय बोर्ड (Juvenile Justice Board)

5- उस व्यक्ति की नियुक्ति, जो पूछताछ की प्रक्रिया के दौरान बच्चा नहीं रह जाता है (Placement of person, who cease to be a child during process of inquiry)

6- व्यक्तियों की नियुक्ति, जिन्होंने अपराध किया है, जब व्यक्ति अठारह वर्ष से कम आयु का था (Placement of persons, who committed an offence, when person was below the age of eighteen years)

7- बोर्ड के संबंध में प्रक्रिया (Procedure in relation to Board)

8- बोर्ड की शक्तियां, कार्य और जिम्मेदारियां (Powers, functions and responsibilities of the Board)

9- एक मजिस्ट्रेट द्वारा पालन की जाने वाली प्रक्रिया जिसे इस अधिनियम के तहत सशक्त नहीं किया गया है (Procedure to be followed by a Magistrate who has not been empowered under this Act)

10- कानून के उल्लंघन के आरोप में बच्चे की आशंका (Apprehension of child alleged to be in conflict with law)

11- उस व्यक्ति की भूमिका जिसके आरोप में कानून का उल्लंघन करने वाले बच्चे को रखा गया है (Role of person in whose charge child in conflict with law is placed)

12- ऐसे व्यक्ति को जमानत जो जाहिर तौर पर कानून का उल्लंघन करने वाला कथित रूप से एक बच्चा है (Bail to a person who is apparently a child alleged to be in conflict with law)

13- माता-पिता, अभिभावक या परिवीक्षा अधिकारी को सूचना (Information to parents, guardian or probation officer)

14- कानून का उल्लंघन करने वाले बच्चे के संबंध में बोर्ड द्वारा जांच (Inquiry by Board regarding child in conflict with law)

15- बोर्ड द्वारा जघन्य अपराधों में प्रारंभिक मूल्यांकन (Preliminary assessment into heinous offences by Board)

16- जांच के लम्बित होने की समीक्षा (Review of pendency of inquiry)

17- कानून के उल्लंघन में नहीं पाए जाने वाले बच्चे के संबंध में आदेश (Orders regarding a child not found to be in conflict with law)

18- कानून का उल्लंघन करने वाले बच्चे के संबंध में आदेश (Orders regarding child found to be in conflict with law)

19- किशोर न्यायालय की शक्तियां (Powers of Children’s Court)

20- बच्चे ने इक्कीस वर्ष की आयु प्राप्त कर ली है और अभी तक सुरक्षा के स्थान पर ठहरने की निर्धारित अवधि को पूरा नहीं किया है (Child attained age of twenty-one years and yet to complete prescribed term of stay in place of safety)

21- आदेश जो कानून का उल्लंघन करने वाले बच्चे के खिलाफ पारित नहीं किया जा सकता है (Order that may not be passed against a child in conflict with law)

22- दंड प्रक्रिया संहिता के अध्याय आठ के तहत कार्यवाही बच्चे के खिलाफ आवेदन नहीं करने के लिए (Proceeding under Chapter VIII of the Code of Criminal Procedure not to apply against child)

23- कानून का उल्लंघन करने वाले बच्चे की कोई संयुक्त कार्यवाही नहीं और व्यक्ति जो बच्चा नहीं है (No joint proceedings of child in conflict with law and person not a child)

24- एक अपराध के निष्कर्षों पर अयोग्यता को हटाना (Removal of disqualification on the findings of an offence)

25- लंबित मामलों के संबंध में विशेष प्रावधान (Special provision in respect of pending cases)

26- कानून के उल्लंघन में भागे हुए बच्चे के संबंध में प्रावधान (Provision with respect of run away child in conflict with law)

27- बाल कल्याण समिति (Child Welfare Committee)

28- समिति के संबंध में प्रक्रिया (Procedure in relation to Committee)

29- समिति की शक्तियां (Powers of Committee)

30- समिति के कार्य और जिम्मेदारियां (Functions and responsibilities of Committee)

31- समिति के समक्ष उत्पादन (Production before Committee)

32- अभिभावक से अलग पाए गए बच्चे के संबंध में अनिवार्य रिपोर्टिंग (Mandatory reporting regarding a child found separated from guardian)

33- गैर-रिपोर्टिंग का अपराध (Offence of non-reporting)

34- गैर-रिपोर्टिंग के लिए जुर्माना (Penalty for non-reporting)

35- बच्चों का समर्पण (Surrender of children)

36- जाँच करना (Inquiry)

37- देखभाल और सुरक्षा की आवश्यकता वाले बच्चे के संबंध में आदेश पारित (Orders passed regarding a child in need of care and protection)

38- बच्चे को गोद लेने के लिए कानूनी रूप से मुक्त घोषित करने की प्रक्रिया (Procedure for declaring a child legally free for adoption)

39- पुनर्वास और सामाजिक पुन: एकीकरण की प्रक्रिया (Process of rehabilitation and social re-integration)

40- देखभाल और सुरक्षा की आवश्यकता वाले बच्चे की बहाली (Restoration of child in need of care and protection)

41- किशोर देखभाल संस्थानों का पंजीकरण (Registration of child care institutions)

42- किशोर देखभाल संस्थानों का पंजीकरण न करने पर जुर्माना (Penalty for non-registration of child care institutions)

43- खुला आश्रय (open shelter)

44- पालन ​​पोषण संबंधी देखभाल (foster care)

45- प्रायोजन (sponsorship)

46- चाइल्ड केयर संस्थान छोड़ने वाले बच्चों की देखभाल के बाद (After care of children leaving the child care institution)

47- प्रेक्षण गृह (observation house)

48- विशेष घर (special house)

49- सुरक्षा की जगह (place of safety)

50- शिशु सदन (Children’s Home)

51- फिट सुविधा (Fit facility)

52- फिट व्यक्ति (Fit person)

53- इस अधिनियम और उसके प्रबंधन के तहत पंजीकृत संस्थानों में पुनर्वास और पुन: एकीकरण सेवाएं (Rehabilitation and re-integration services in institutions registered under this Act and management thereof)

54- इस अधिनियम के तहत पंजीकृत संस्थाओं का निरीक्षण (Inspection of institutions registered under this Act)

55- संरचनाओं के कामकाज का मूल्यांकन (Evaluation of functioning of structures)

56- दत्तक ग्रहण (Adoption)

57- भावी दत्तक माता-पिता की पात्रता (Eligibility of prospective adoptive parents)

58- भारत में रहने वाले भारतीय भावी दत्तक माता-पिता द्वारा गोद लेने की प्रक्रिया (Procedure for adoption by Indian prospective adoptive parents living in India)

59- एक अनाथ या परित्यक्त या अभ्यर्पित बच्चे को अंतर्देशीय गोद लेने की प्रक्रिया (Procedure for inter-country adoption of an orphan or abandoned or surrendered child)

60- अंतर-देशीय रिश्तेदार गोद लेने की प्रक्रिया (Procedure for inter-country relative adoption)

61- गोद लेने के विचार में भुगतान के खिलाफ अदालती प्रक्रिया और जुर्माना (Court procedure and penalty against payment in consideration of adoption)

62- अतिरिक्त प्रक्रियात्मक आवश्यकताएं और दस्तावेज़ीकरण (Additional procedural requirements and documentation)

63- गोद लेने का प्रभाव (Effect of adoption)

64- गोद लेने की रिपोर्टिंग (Reporting of adoption)

65- विशिष्ट दत्तक ग्रहण एजेंसियां (Specialised Adoption Agencies)

66- गोद लेने वाली एजेंसियों के रूप में पंजीकृत नहीं संस्थानों में रहने वाले बच्चों को गोद लेना (Adoption of children residing in institutions not registered as adoption agencies)

67- राज्य दत्तक ग्रहण संसाधन एजेंसी (State Adoption Resource Agency)

68- केंद्रीय दत्तक ग्रहण संसाधन प्राधिकरण (Central Adoption Resource Authority)

69- प्राधिकरण की संचालन समिति (Steering Committee of Authority)

70- प्राधिकरण की शक्तियां (Powers of Authority)

71- प्राधिकरण की वार्षिक रिपोर्ट (Annual Report of Authority)

72- केंद्र सरकार द्वारा अनुदान (Grants by Central Government)

73- प्राधिकरण के खाते और लेखा परीक्षा (Accounts and audit of Authority)

74- बच्चों की पहचान उजागर करने पर रोक (Prohibition on disclosure of identity of children)

75- बच्चे के साथ क्रूरता के लिए सजा (Punishment for cruelty to child)

76- भीख मांगने के लिए बच्चे को रोजगार (Employment of child for begging)

77- किसी बच्चे को नशीला शराब या स्वापक औषधि या मन:प्रभावी पदार्थ देने के लिए दंड (Penalty for giving intoxicating liquor or narcotic drug or psychotropic substance to a child)

78- किसी नशीले शराब, नशीले पदार्थ या मनोदैहिक पदार्थ को बेचने, बेचने, ले जाने, आपूर्ति करने या तस्करी के लिए एक बच्चे का उपयोग करना (Using a child for vending, peddling, carrying, supplying or smuggling any intoxicating liquor, narcotic drug or psychotropic substance)

79- किशोर कर्मचारी का शोषण (Exploitation of a child employee)

80- निर्धारित प्रक्रियाओं का पालन किए बिना गोद लेने के लिए दंडात्मक उपाय (Punitive measures for adoption without following prescribed procedures)

81- किसी भी उद्देश्य के लिए बच्चों की बिक्री और खरीद (Sale and procurement of children for any purpose)

82- शारीरिक दंड (Corporal punishment)

83- उग्रवादी समूहों या अन्य वयस्कों द्वारा बच्चे का उपयोग (Use of child by militant groups or other adults)

84- बच्चे का अपहरण और अपहरण (Kidnapping and abduction of child)

85- विकलांग बच्चों पर किए गए अपराध (Offences committed on disabled children)

86- अपराधों का वर्गीकरण और नामित न्यायालय (Classification of offences and designated court)

87- बहकाव (Abetment)

88- वैकल्पिक सजा (Alternative punishment)

89- इस अध्याय के तहत बच्चे द्वारा किया गया अपराध (Offence committed by child under this Chapter)

90- बच्चे के माता-पिता या अभिभावक की उपस्थिति (Attendance of parent or guardian of child)

91- बच्चे की उपस्थिति से मुक्ति (Dispensing with attendance of child)

92- एक अनुमोदित स्थान पर लंबे समय तक चिकित्सा उपचार की आवश्यकता वाले रोग से पीड़ित बच्चे की नियुक्ति (Placement of a child suffering from disease requiring prolonged medical treatment in an approved place)

93- मानसिक रूप से बीमार या शराब या अन्य नशीले पदार्थों के आदी बच्चे का स्थानांतरण (Transfer of a child who is mentally ill or addicted to alcohol or other drugs)

94- अनुमान और आयु का निर्धारण (Presumption and determination of age)

95- एक बच्चे का निवास स्थान पर स्थानांतरण (Transfer of a child to place of residence)

96- भारत के विभिन्न भागों में उपयुक्त सुविधा या उपयुक्त व्यक्ति के लिए बाल गृहों और विशेष गृहों के बीच बच्चे का स्थानांतरण (Transfer of child between Children’s Homes, or special homes or fit facility or fit person in different parts of India)

97- एक संस्था से एक बच्चे की रिहाई (Release of a child from an institution)

98- किसी संस्था में रखे गए बच्चे को अनुपस्थिति की छुट्टी (Leave of absence to a child placed in an institution)

99- रिपोर्ट को गोपनीय माना जाएगा (Reports to be treated as confidential)

100- सद्भावपूर्वक की गई कार्रवाई का संरक्षण (Protection of action taken in good faith)

101- अपील (Appeals)

102- संशोधन (Revision)

103- पूछताछ, अपील और पुनरीक्षण कार्यवाही में प्रक्रिया (Procedure in inquiries, appeals and revision proceedings)

104- समिति या बोर्ड की अपने स्वयं के आदेशों में संशोधन करने की शक्ति (Power of the Committee or the Board to amend its own orders)

105- किशोर न्याय कोष (Juvenile justice fund)

106- राज्य बाल संरक्षण समिति एवं जिला बाल संरक्षण इकाई (State Child Protection Society and District Child Protection Unit)

107- बाल कल्याण पुलिस अधिकारी एवं विशेष किशोर पुलिस इकाई (Child Welfare Police Officer and Special Juvenile Police Unit)

108- अधिनियम के प्रावधानों पर जन जागरूकता (Public awareness on provisions of Act)

109- अधिनियम के कार्यान्वयन की निगरानी (Monitoring of implementation of Act)

110- नियम बनाने की शक्ति (Power to make rules)

111- निरसन और बचत (Repeal and savings)

112- कठिनाइयों को दूर करने की शक्ति (Power to remove difficulties)

हमारा प्रयास किशोर न्याय अधिनियम (Juvenile Justice (Care and Protection of Children) Act की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।