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मोटर वाहन अधिनियम की धारा 97 | परिभाषा | MV Act, Section- 97 in hindi | Definition.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए मोटर वाहन अधिनियम की धारा 97 के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है मोटर वाहन अधिनियम की धारा- 97, साथ ही इस धारा के अंतर्गत क्या परिभाषित किया गया है, यह सभी जानकारी इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

मोटर वाहन अधिनियम की धारा- 97 का विवरण

मोटर वाहन अधिनियम (Motor Vehicles Act) की धारा -97 के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। सड़क परिवहन सेवा” से भाड़े या पारिश्रमिक पर सड़क से यात्री या माल अथवा दोनों का वहन करने वाले मोटर यानों द्वारा सेवा अभिप्रेत है। इस अध्याय के अन्तर्गत मोटर वाहन को परिभाषित किया गया है।

मोटर वाहन अधिनियम की धारा- 97 के अनुसार

परिभाषा-

इस अध्याय में, जब तक कि संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो, “सड़क परिवहन सेवा” से भाड़े या पारिश्रमिक पर सड़क से यात्री या माल अथवा दोनों का वहन करने वाले मोटर यानों द्वारा सेवा अभिप्रेत है।
Definition-
In this Chapter, unless the context otherwise requires, “road transport service” means a service of motor vehicles carrying passengers or goods or both by road for hire or reward.

हमारा प्रयास मोटर वाहन अधिनियम (MV Act) की धारा 97 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

मोटर वाहन अधिनियम की धारा 96 | इस अध्याय के प्रयोजनों के लिए राज्य सरकार की नियम बनाने की शक्ति | MV Act, Section- 96 in hindi | Power of State Government to make rules for the purposes of this Chapter.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए मोटर वाहन अधिनियम की धारा 96 के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है मोटर वाहन अधिनियम की धारा- 96, साथ ही इस धारा के अंतर्गत क्या परिभाषित किया गया है, यह सभी जानकारी इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

मोटर वाहन अधिनियम की धारा- 96 का विवरण

मोटर वाहन अधिनियम (Motor Vehicles Act) की धारा -96 के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। राज्य सरकार इस अध्याय के उपबंधों को कार्यान्वित करने के प्रयोजन के लिए नियम बना सकेगी।

मोटर वाहन अधिनियम की धारा- 96 के अनुसार

इस अध्याय के प्रयोजनों के लिए राज्य सरकार की नियम बनाने की शक्ति-

(1) राज्य सरकार इस अध्याय के उपबंधों को कार्यान्वित करने के प्रयोजन के लिए नियम बना सकेगी।
(2) पूर्वगामी शक्ति की व्यापकता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना इस धारा के अधीन निम्नलिखित सब बातों या उनमें से किसी की बाबत नियम बनाए जा सकेंगे, अर्थात्-
(i) प्रादेशिक और राज्य परिवहन प्राधिकरणों की नियुक्ति की अवधि और उनकी नियुक्ति के निबंधन तथा उनके द्वारा कारबार का संचालन और उनके द्वारा दी जाने वाली रिपोर्टे;
(ii) किसी ऐसे प्राधिकरण द्वारा उसके किसी सदस्य की (जिसके अन्तर्गत अध्यक्ष भी हैं) अनुपस्थिति में कारबार का संचालन तथा उस कारबार का स्वरूप, वे परिस्थितियां जिनमें और वह रीति जिससे कारबार ऐसे संचालित किया जा सकता है;
(iii) उन अपीलों का संचालन और सुनवाई जो इस अध्याय के अधीन की जाएं, ऐसी अपीलों की बाबत दी जाने वाली फीसें तथा ऐसी फीसों का प्रतिदाय;
(iv) वे प्ररूप जिनका इस अध्याय के प्रयोजनों के लिए प्रयोग किया जाना है, जिनके अन्तर्गत परमिटों के प्ररूप भी हैं;
(v) खोए, नष्ट हुए या कटे-फटे परमिटों के बदले में परमिटों की प्रतिलिपियों का दिया जाना;
(vi) वे दस्तावेजें, प्लेटें और चिह्न जो परिवहन यानों द्वारा अपने साथ ले जाए जाने हैं, वह रीति जिससे वे ले जाए जाने हैं तथा वे भाषाएं जिनमें कोई ऐसी दस्तावेजें अभिव्यक्त की जानी हैं:
(vii) परमिटों, परमिटों की दूसरी प्रतियों और प्लेटों के लिए आवेदनों के संबंध में दी जाने वाली फीसें;
(viii) इस अध्याय के अधीन दी जाने वाली सभी या किन्हीं फीसों या उनके किन्हीं भागों को देने से विहित व्यक्तियों या विहित वर्गों के व्यक्तियों को छूट;
(ix) परमिटों की अभिरक्षा, उनका प्रस्तुत किया जाना तथा उनके प्रतिसंहरण या उनकी समाप्ति पर उनका रद्द किया जाना, तथा जो परमिट रद्द कर दिए गए हैं, उनका लौटाया जाना;
(x) वे शर्ते जिन पर और वह विस्तार जिस तक अन्य राज्य में दिया गया परमिट प्रतिहस्ताक्षर के बिना राज्य में विधिमान्य होगा;
(xi) वे शर्ते जिन पर और वह विस्तार जिस तक एक प्रदेश में दिया गया परमिट प्रतिहस्ताक्षर के बिना राज्य के अन्य प्रदेश में विधिमान्य होगा;
(xii) वे शर्ते, जो धारा 67 की उपधारा (1) के खंड में निर्दिष्ट प्रकार के किसी करार को प्रभावी करने के प्रयोजन से परमिट पर लगाई जानी हैं;
(xiii) वे प्राधिकरण जिनको, वह समय जिसके अन्दर और वह रीति जिससे अपीलें की जा सकेंगी;
(xiv) चाहे साधारणतया या विनिर्दिष्ट क्षेत्रों में मंजिली गाड़ियों और ठेका गाड़ियों की संरचना और उनके फिटिंग तथा उनके द्वारा ले जाए जाने वाले उपस्कर;
(xv) मंजिली गाड़ी या ठेका गाड़ी जितने यात्रियों का वहन करने के लिए अनुकूलित है उनकी संख्या का अवधारण और उतने यात्रियों की संख्या का अवधारण जिनका वहन किया जा सकेगा;
(xvi) वे शर्ते जिन पर मंजिली गाड़ियों तथा ठेका गाड़ियों द्वारा यात्रियों के बदले में भागतः या पूर्णतः माल का वहन किया जा सकेगा;
(xvii) मंजिली गाड़ी या ठेका गाड़ी में छोड़ी गई संपत्ति की निरापद अभिरक्षा और उसका व्ययन;
(xviii) परिवहन यानों की रंगाई और चिह्नांकन का विनियमन तथा किसी विज्ञापन का उन पर संप्रदर्शन और विशिष्टतया परिवहन यानों को ऐसे रंग में या ऐसी रीति से रंगने या चिह्नित करने का प्रतिषेध जिससे कोई व्यक्ति यह विश्वास करने के लिए उत्प्रेरित हो जाए कि उस यान का डाक परिवहन के लिए उपयोग किया जाता है;
(xix) मंजिली गाड़ियों या ठेका गाड़ियों में शवों का अथवा संक्रामक या सांसर्गिक रोग से पीड़ित व्यक्तियों का अथवा यात्रियों को असुविधा या क्षति कर सकने वाले माल का प्रवहण तथा ऐसे वाहनों का उस दशा में निरीक्षण और विसंक्रामण जब उनका उपयोग इन प्रयोजनों के लिए किया जाता है;
(xx) मोटर टैक्सियों पर ऐसे टैक्सी मीटरों का लगाया जाना जिसके लिए अनुमोदन अपेक्षित है, अथवा मानक प्रकार के टैक्सी मीटरों का उपयोग किया जाना और टैक्सी मीटरों की जांच और परीक्षा और उनको मुद्राबन्द करना;
(xxi) विनिर्दिष्ट स्थानों या विनिर्दिष्ट क्षेत्रों पर अथवा सम्यक् रूप से अधिसूचित अड्डों या विराम स्थलों से भिन्न स्थानों पर मंजिली गाड़ियों अथवा ठेका गाड़ियों द्वारा यात्रियों को चढ़ाए जाने या उतारे जाने का प्रतिषेध तथा मंजिली गाड़ी के ड्राइवर से यह अपेक्षा करना कि वह, जब कोई यात्री अधिसूचित विराम स्थान पर यान में चढ़ना या यान से उतरना चाहता है, तब उसके द्वारा अपेक्षा की जाने पर वाहन को रोके और उचित समय तक खड़ा रखे;
(xxii) वे अपेक्षाएं जिनकी पूर्ति सम्यक् रूप से अधिसूचित किसी अड्डे या विराम स्थान के सन्निर्माण या उपयोग में की जाएगी, जिनके अंतर्गत उनका उपयोग करने वाले सभी की सुविधा के लिए यथेष्ट उपस्कर और सुविधाओं की व्यवस्था करना; वह फीस यदि कोई हो, जो ऐसी सुविधाओं के उपयोग के लिए प्रभारित की जा सकेगी, वे अभिलेख जो ऐसे अड्डों और स्थानों पर रखे जाएंगे, वे कर्मचारिवृन्द जो वहां नियोजित किए जाएंगे तथा ऐसे कर्मचारिवृन्द के कर्तव्य और आचरण तथा साधारणतया ऐसे अड्डों और स्थानों को उपयोग के योग्य और स्वच्छ दशा में बनाए रखना भी है;
(xxiii) मोटर टैक्सी रैंकों का विनियमन;
(xxiv) परिवहन यानों के स्वामियों से यह अपेक्षा करना कि वे अपने पतों में किसी तब्दीली की सूचना दे अथवा भाड़े या पारिश्रमिक पर यात्रियों का वहन करने के लिए उपयोग किए जाने वाले किसी यान के काम न करने या उसे कोई नुकसान हो जाने की रिपोर्ट दे;
(xxv) विनिर्दिष्ट व्यक्तियों को ऐसे सब परिसरों में, जो परमिटों के धारकों द्वारा अपने कारबार के प्रयोजनों के लिए काम में लाए जाते हैं, किसी भी उचित समय पर प्रवेश करने और उनका निरीक्षण करने के लिए प्राधिकृत करना;
(xxvi) मंजिली गाड़ी के भारसाधक व्यक्ति से यह अपेक्षा करना कि वह वैध या आमतौर पर लिया जाने वाला किराया देने वाले किसी भी व्यक्ति को ले जाए;
(xxvii) वे शर्ते जिन पर और उस किस्म के आधान या यान जिनमें पशु या पक्षी ले जाए जा सकेंगे, और वे मौसम जिनके दौरान पशु या पक्षी ले जाए जा सकेंगे या नहीं ले जाए जा सकेंगे;
(xxviii) उन अभिकर्ताओं या प्रचारकों का अनुज्ञापन तथा उनके आचरण का विनियमन जो सार्वजनिक सेवा यानों द्वारा यात्रा करने के टिकटों के विक्रय में या ऐसे यानों के लिए अन्यथा ग्राहकी की याचना करने के काम में लगे हुए हैं;
(xxix) माल वाहनों द्वारा वहन किए जाने वाले माल के अग्रेषण और वितरण के लिए संग्रहण के कारबार में लगे अभिकर्ताओं का अनुज्ञापन;
(xxx) परिवहन यानों और उनकी अंतर्वस्तुओं तथा उनसे संबंधित परमिटों का निरीक्षण;
(xxxi) माल वाहनों में ड्राइवर से भिन्न व्यक्तियों को ले जाना;
(xxxii) परिवहन यानों के स्वामियों द्वारा रखे जाने वाले अभिलेख और दी जाने वाली विवरणियां;
(xxxiiक)धारा 67 की उपधारा (3) के अधीन स्कीमों की विरचना;
(xxxiiख) प्रभावी प्रतिस्पर्धा, यात्री सुविधा और सुरक्षा, प्रतिस्पर्धी किराये का संवर्धन तथा भीड़भाड़ को निवारित करना; और
(xxxiii) कोई अन्य बात जो विहित की जानी है या की जाए।

Power of State Government to make rules for the purposes of this Chapter-
(1) A State Government may make rules for the purpose of carrying into effect the provisions of this Chapter.
(2) Without prejudice to the generality of the foregoing power, rules under this section may be made with respect to all or any of the following matters, namely:-
(i) the period of appointment and the terms of appointment of and the conduct of business by Regional and State Transport Authorities and the reports to be furnished by them;
(ii) the conduct of business by any such authority in the absence of any member (including the Chairman) thereof and the nature of business which, the circumstances under which and the manner in which, business, could be so conducted;
(iii) the conduct and hearing of appeals that may be preferred under this Chapter, the fees to be paid in respect of such appeals and the refund of such fees;
(iv) the forms to be used for the purposes of this Chapter, including the forms of permits;
(v) the issue of copies of permits in place of permits lost, destroyed or mutilated;
(vi) the documents, plates and marks to be carried by transport vehicles, the manner in which they are to be carried and the languages in which any such documents are to be expressed;
(vii) the fees to be paid in respect of applications for permits, duplicate permits and plates;
(viii) the exemption of prescribed persons or prescribed classes of persons from payment of all or any or any portion of the fees payable under this Chapter;
(ix) the custody, production and cancellation on revocation or expiration of permits, and the return of permits which have been cancelled;
(x) the conditions subject to which, and the extend to which, a permit granted in another State shall be valid in the State without countersignature;
(xi) the conditions subject to which, and the extent to which, a permit granted in one region shall be valid in another region within the State without countersignature;
(xii) the conditions to be attached to permits for the purpose of giving effect to any agreement such as is referred to in clause (iii) of sub-section (1) of section 67;
(xiii) the authorities to whom, the time within which and the manner in which appeals may be made; (xiv) the construction and fittings of, and the equipment to be carried by, stage and contract carriages, whether generally or in specified areas;
(xv) the determination of the number of passengers a stage or contract carriage is adapted to carry and the number which may be carried;
(xvi) the conditions subject to which goods may be carried on stage and contract carriages partly or wholly in lieu of passengers;
(xvii) the safe custody and disposal of property left in a stage or contract carriage;
(xviii) regulating the painting or marking of transport vehicles and the display of advertising matter thereon, and in particular prohibiting the painting or marking of transport vehicles in such colour or manner as to induce any person to believe that the vehicle is used for the transport of mails;
(xix) the conveyance in stage or contract carriages of corpses or person suffering from any infectious or contagious disease or goods likely to cause discomfort or injury to passengers and the inspection and disinfection of such carriages; if used for such purposes;
(xx) the provision of taxi meters on motor cabs requiring approval or standard types of taxi meters to be used and examining testing and sealing taxi meters;
(xxi) prohibiting the picking up or setting down of passengers by stage or contract carriages at specified places or in specified areas or at places other than duly notified stands or halting places and requiring the driver of a stage carriage to stop and remain stationary for, a reasonable time when so required by a passenger desiring to board or alight from the vehicle at a notified halting-place;
(xxii) the requirements which shall be complied within the construction or use of any duly notified stand or halting-place, including the provision of adequate equipment and facilities for the convenience of all users thereof; the fees, if any, which may be charged for the use of such facilities, the records which shall be maintained at such stands or places, the staff to be employed thereat, and the duties and conduct of such staff, and generally for maintaining such stands and places in a serviceable and clean condition;
(xxiii) the regulation of motor cab ranks;
(xxiv) requiring the owners of transport vehicles to notify any change of address or to report the failure of or damage to any vehicle used, for the conveyance of passengers for hire or reward;
(xxv) authorising specified persons to enter at all reasonable times and inspect all premises used by permit holders for the purposes of their business;
(xxvi) requiring the person in charge of a stage carriage to carry any person tendering the legal or customary fare;
(xxvii) the conditions under which and the types of containers or vehicles in which animals or birds may be carried and the seasons during which animals or birds may or may not be carried
(xxviii) the licensing of and the regulation of the conduct of agents or canvassers who engage in the sale of tickets for travel by public service vehicles or otherwise solicit custom for such vehicles;
(xxix) the licensing of agents engaged in the business of collecting for forwarding and distributing goods carried by goods carriages;
(xxx) the inspection of transport vehicles and their contents and of the permits relating to them;
(xxxi) the carriage of persons other than the driver in goods carriages;
(xxxii) the records to be maintained and the returns to be furnished by the owners of transport vehicles;
(xxxiia) framing of schemes under sub-section (3) of section 67;
(xxxiib) the promotion of effective competition, passenger convenience and safety, competitive fares and prevention of overcrowding; and
(xxxiii) any other matter which is to be or may be prescribed.

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मोटर वाहन अधिनियम की धारा 95 | मंजिली गाड़ियों और ठेका गाड़ियों की बाबत राज्य सरकार की नियम बनाने की शक्ति | MV Act, Section- 95 in hindi | Power of State Government to make rules as to stage carriages and contract carriages.

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नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए मोटर वाहन अधिनियम की धारा 95 के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है मोटर वाहन अधिनियम की धारा- 95, साथ ही इस धारा के अंतर्गत क्या परिभाषित किया गया है, यह सभी जानकारी इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

मोटर वाहन अधिनियम की धारा- 95 का विवरण

मोटर वाहन अधिनियम (Motor Vehicles Act) की धारा -95 के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। राज्य सरकार मंजिली गाड़ियों और ठेका गाड़ियों की बाबत और ऐसे यानों में यात्रियों के आचरण का विनियमन करने के लिए नियम बना सकेगी।

मोटर वाहन अधिनियम की धारा- 95 के अनुसार

मंजिली गाड़ियों और ठेका गाड़ियों की बाबत राज्य सरकार की नियम बनाने की शक्ति-

(1) राज्य सरकार मंजिली गाड़ियों और ठेका गाड़ियों की बाबत और ऐसे यानों में यात्रियों के आचरण का विनियमन करने के लिए नियम बना सकेगी।
(2) पूर्वगामी उपबंध की व्यापकता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, ऐसे नियम–
(क) ऐसे यान से ऐसे व्यक्ति का, जो नियमों का अतिलंघन कर रहा है, उस यान के ड्राइवर या कंडक्टर द्वारा, अथवा ड्राइवर या कंडक्टर या किसी यात्री के अनुरोध पर किसी पुलिस अधिकारी द्वारा निकाल दिया जाना प्राधिकृत कर सकेंगे;
(ख) ऐसे यात्री से, जिसकी बाबत ड्राइवर या कंडक्टर को युक्तियुक्त रूप से यह संदेह है कि वह नियमों का उल्लंघन कर रहा है, यह अपेक्षा कर सकेंगे कि वह मांग किए जाने पर पुलिस अधिकारी को अथवा ड्राइवर या कंडक्टर को अपना नाम और पता बताए;
(ग) किसी यात्री से यह अपेक्षा कर सकेंगे कि यदि उससे ड्राइवर या कंडक्टर मांग करता है तो वह यह बताए कि यान में कितनी यात्रा करने का उसका विचार है या कितनी यात्रा उसने की है और ऐसी पूरी यात्रा के लिए किराया दे और उसके लिए जारी किया गया कोई टिकट ले;
(घ) यह अपेक्षा कर सकेंगे कि टिकट का धारक उस टिकट की जो उसे दिया गया है, ड्राइवर या कंडक्टर या अन्य व्यक्ति द्वारा, जिसे यान के स्वामी ने प्राधिकृत किया है इस प्रयोजन के लिए मांग किए जाने पर यात्रा के दौरान दिखाए और यात्रा की समाप्ति पर अभ्यर्पित कर दें:
(ङ) किसी यात्री से अपेक्षा कर सकेंगे कि यदि ड्राइवर या कंडक्टर उसे अनुरोध करे तो वह उस यात्रा की समाप्ति पर यान से उतर जाए जिसके लिए उसने किराया दिया है;
(च) यह अपेक्षा कर सकेंगे कि टिकट का धारक टिकट को उस अवधि के अवसान पर अभ्यर्पित कर दे जिसके लिए उसे टिकट दिया गया है;
(छ) किसी यात्री से अपेक्षा कर सकेंगे कि वह ऐसी कोई बात न करे जिससे यान के कार्यचालन में बाधा या अड़चन होने की संभावना है या यान के किसी भाग को या उसके किसी उपस्कर को नुकसान होने की संभावना है अथवा किसी अन्य यात्री को क्षति या कष्ट होने की संभावना है।
(ज) किसी यात्री से अपेक्षा कर सकेंगे कि वह किसी ऐसे यान में धूम्रपान न करे जिसमें धूम्रपान प्रतिषिद्ध करने की सूचना प्रदर्शित की गई है।
(झ) यह अपेक्षा कर सकेंगे कि मंजिली गाड़ियों में शिकायत पुस्तकें रखी जाएं और वे शर्ते विहित कर सकेंगे जिन पर यात्री उनमें कोई शिकायत दर्ज कर सकेंगे।

Power of State Government to make rules as to stage carriages and contract carriages-
(1) A State Government may make rules to regulate, in respect of stage carriages and contract carriages and the conduct of passengers in such vehicles.
(2) Without prejudice to the generality of the foregoing provision, such rules may-
(a) authorise the removal from such vehicle of any person contravening the rules by the driver or conductor of the vehicle, or, on the request of the driver or conductor, or any passenger, by any police officer;
(b) require a passenger who is reasonably suspected by the driver or conductor of contravening the rules to give his name and address to a police officer or to the driver or conductor on demand;
(c) require a passenger to declare, if so demanded by the driver or conductor, the journey he intends to take or has taken in the vehicle and to pay the fare for the whole of such journey and to accept any ticket issued therefor;
(d) require, on demand being made for the purpose by the driver or conductor or other person authorised by the owners of the vehicle production during the journey and surrender at the end of the journey by the holder thereof of any ticket issued to him;
(e) require a passenger, if so requested by the driver or conductor, to leave the vehicle on the completion of the journey the fare for which he has paid;
(f) require the surrender by the holder thereof on the expiry of the period for which it is issued of a ticket issued to him;
(g) require a passenger to abstain from doing anything which is likely to obstruct or interfere with the working of the vehicle or to cause damage to any part of the vehicle or its equipment or to cause injury or discomfort to any other passenger;
(h) require a passenger not to smoke in any vehicle in which a notice prohibiting smoking is exhibited;
(i) require the maintenance of complaint books in stage carriages and prescribe the conditions under which passengers can record any complaints in the same.

हमारा प्रयास मोटर वाहन अधिनियम (MV Act) की धारा 95 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

मोटर वाहन अधिनियम की धारा 94 | सिविल न्यायालयों की अधिकारिता का वर्जन | MV Act, Section- 94 in hindi | Bar on jurisdiction of Civil Courts.

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नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए मोटर वाहन अधिनियम की धारा 94 के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है मोटर वाहन अधिनियम की धारा- 94, साथ ही इस धारा के अंतर्गत क्या परिभाषित किया गया है, यह सभी जानकारी इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

मोटर वाहन अधिनियम की धारा- 94 का विवरण

मोटर वाहन अधिनियम (Motor Vehicles Act) की धारा -94 के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। किसी भी सिविल न्यायालय को इस अधिनियम के अधीन परमिट या किसी स्कीम के अधीन जारी अनुज्ञप्ति दिए जाने से संबंधित किसी प्रश्न के ग्रहण करने की अधिकारिता नहीं होगी, और इस अधिनियम के अधीन परमिट या किसी स्कीम के अधीन जारी अनुज्ञप्ति दिए जाने के संबंध में सम्यक् रूप से गठित प्राधिकरणों द्वारा की गई या की जाने वाली किसी कार्रवाई की बाबत कोई व्यादेश किसी सिविल न्यायालय द्वारा ग्रहण नहीं किया जाएगा।

मोटर वाहन अधिनियम की धारा- 94 के अनुसार

सिविल न्यायालयों की अधिकारिता का वर्जन-

किसी भी सिविल न्यायालय को इस अधिनियम के अधीन परमिट या किसी स्कीम के अधीन जारी अनुज्ञप्ति दिए जाने से संबंधित किसी प्रश्न के ग्रहण करने की अधिकारिता नहीं होगी, और इस अधिनियम के अधीन परमिट या किसी स्कीम के अधीन जारी अनुज्ञप्ति दिए जाने के संबंध में सम्यक् रूप से गठित प्राधिकरणों द्वारा की गई या की जाने वाली किसी कार्रवाई की बाबत कोई व्यादेश किसी सिविल न्यायालय द्वारा ग्रहण नहीं किया जाएगा।

Bar on jurisdiction of Civil Courts-
No Civil Court shall have jurisdiction to entertain any question relating to the grant of a permit or licence issued under any scheme under this Act, and no injunction in respect of any action taken or to be taken by the duly constituted authorities under this Act with regard to the grant of a permit or licence issued under any scheme, shall be entertained by any Civil Court.

हमारा प्रयास मोटर वाहन अधिनियम (MV Act) की धारा 94 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

भारत के संविधान का अनुच्छेद-22 | Article-22 | गिरफ्तारी के खिलाफ संरक्षण | Protection Against Arrest

आज हम किसी अभियुक्त को उसकी गिरफ्तारी के खिलाफ संरक्षण (Protection Against Arrest) के बारे मे सम्पूर्ण जानकारी आपके साथ साझा करेेंगे। गिरफ्तारी के खिलाफ संरक्षण किसी अभियुक्त को गिरफ्तार करने के पश्चात्/गिरफ्तारी से पहले पुलिस अधिकारी को उसकी गिरफ्तारी के प्रति कुछ कर्तव्य होते है। जिन्हे अनुच्छेद-22 (Article-22) मे परिभाषित किया गया है।

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भारत के संविधान का अनुच्छेद 22 गिरफ्तार व्यक्ति को संरक्षण उपलब्ध करता है। अनुच्छेद 22 उन प्रक्रियात्मक शर्तों को विहित करता है जिसका विधान मंडल द्वारा विहित किसी प्रक्रिया में होना आवश्यक है। यदि इन प्रक्रियात्मक शर्तों का समुचित रूप से पालन नहीं किया गया है तो किसी व्यक्ति को उसके दैहिक स्वतंत्रता से वंचित करना विधि द्वारा विहित प्रक्रिया के अनुसार नहीं माना जाएगा और उसे अवैध घोषित कर दिया जाएगा। विधि और प्रक्रिया युक्तियुक्त उचित और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के अनुसार होनी चाहिए।

अनुच्छेद 22 के खंड 1 और खंड 2 के अंतर्गत सामान्य विधि के अधीन गिरफ्तारी से संबंधित उल्लेख है और उस प्रक्रिया को विहित किया गया है जिसका पालन किसी व्यक्ति को गिरफ्तारी करते समय किया जाना चाहिए। इस अनुच्छेद के खंड 3 खंड 4 खंड 5 खंड 6 और खंड 7 निवारक निरोध विधि के अधीन गिरफ्तारी से संबंधित है और उस प्रक्रिया को विहित करते हैं जिसका पालन किया जाना आवश्यक है।

पहला प्रकार है सामान्य दंड विधि के अधीन गिरफ्तारी।
दूसरा प्रकार है निवारक निरोध विधि के अधीन गिरफ्तारी।

सामान्य विधि के अधीन गिरफ्तारी-

संविधान के अनुच्छेद 22 के खंड 2 और खंड 1 के अनुसार किसी अपराध के संबंध में गिरफ्तार हुए व्यक्तियों को चार प्रकार के अधिकार उपलब्ध हैं उनका उल्लेख यहां किया जा रहा है-
1)- गिरफ्तारी के कारणों को ठीक शीघ्र बताए जाने का अधिकार।
2)- अपनी पसंद के वकील से परामर्श करने और अपना बचाव करने का अधिकार।
3)- गिरफ्तारी के 24 घंटे के भीतर किसी मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश किए जाने का अधिकार।
4)- 24 घंटे से अधिक मजिस्ट्रेट के आदेश के बिना निरोध से स्वतंत्रता।

यह अधिकार किसी भी आरोप में गिरफ्तार किए गए व्यक्ति को भारत के संविधान के अनुच्छेद 22 के खंड 1 और खंड 2 के अधीन उपलब्ध किए गए हैं। यदि किसी व्यक्ति के संदर्भ में जिसे किसी अपराध के आरोप में गिरफ्तार किया गया है भारत के संविधान के अनुच्छेद 22 के अधीन इन अधिकारों को उस व्यक्ति को उपलब्ध नहीं किया जाता है तो ऐसी परिस्थिति में गिरफ्तारी अवैध हो जाती है तथा उस व्यक्ति का बन्दीकरण अवैध हो जाता है। इस प्रकार के अवैध बन्दीकरण के संदर्भ में उस व्यक्ति को रिट याचिका के माध्यम से न्यायालय को अवगत कराने का अधिकार उपलब्ध है।

निवारक निरोध विधि के अधीन गिरफ्तारी-

इस आलेख में ऊपर जो उल्लेख किया गया है उसका संबंध सामान्य विधि से है अर्थात जैसे कि किसी व्यक्ति को भारतीय दंड संहिता के अंतर्गत वर्णित किए गए किसी अपराध से संबंधित गिरफ्तार किया गया है तो उस व्यक्ति पर ऊपर बतलाए गए अधिकारों के संबंध में सभी नियमों का पालन किया जाएगा और यह अधिकार उस व्यक्ति के मौलिक अधिकार हैं जो भारत के संविधान द्वारा गारंटी के रूप में व्यक्तियों को उपलब्ध किए गए हैं जिनमें नागरिकों तथा व्यक्तियों के बीच में कोई असमानता नहीं है, सभी व्यक्तियों को यह अधिकार समान रूप से उपलब्ध है। अब प्रश्न आता है कि निवारक निरोध विधियां क्या है और निवारक निरोध विधियों के अधीन गिरफ्तार किए गए व्यक्तियों को यह अधिकार उपलब्ध नहीं है
संविधान में निर्णायक निवारक निरोध विधियों की आवश्यकता को स्वीकार कर लिया गया इसके साथ ही इस की कठोरता को कम करने के लिए कुछ संवैधानिक संरक्षण भी प्रदान किए गए हैं और विधान मंडल द्वारा इसके अनावश्यक दुरुपयोग को रोकने के लिए उसकी विधिमान्य बनाने की शक्ति पर प्रतिबंध भी लगाया गया। अनुच्छेद 22 खंड 4 से लेकर खंड 7 तक निवारक निरोध कानून के अंतर्गत निरुद्ध किए गए व्यक्ति को कुछ संरक्षण प्राप्त है।

1)- सलाहकार बोर्ड द्वारा पुनर्विलोकन।
2)- गिरफ्तारी के कारण जानने और अभ्यावेदन प्रस्तुत करने का अधिकार।
3)- सलाहकार बोर्ड की प्रक्रिया।

अनुच्छेद-22 (Article-22) in Hindi and English

अनुच्छेद-22

अनुच्छेद-22(1) किसी व्यक्ति को जो गिरपतार किया गया है, ऐसी गिरफ्‍तारी के कारणों से यथाशीघ्र अवगत कराए बिना अभिरक्षा में निरुद्ध नहीं रखा जाएगा या अपनी रुचि के विधि व्यवसायी से परामर्श करने और प्रतिरक्षा कराने के अधिकार से वंचित नहीं रखा जाएगा।
अनुच्छेद-22(2) प्रत्येक व्यक्ति को, जो गिरफ्तार किया गया है और अभिरक्षा में निरुद्ध रखा गया है, गिरफ्तारी के स्थान से मजिस्ट्रेट के न्यायालय तक यात्रा के लिए आवश्यक समय को छोड़कर ऐसी गिरफ्‍तारी से चौबीस घंटे की अवधि में निकटतम मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश किया जाएगा और ऐसे किसी व्यक्ति को मजिस्ट्रेट के प्राधिकार के बिना उक्त अवधि से अधिक अवधि के लिए अभिरक्षा में निरुद्ध नहीं रखा जाएगा।
अनुच्छेद-22(3) खंड (1) और खंड (2) की कोई बात किसी ऐसे व्यक्ति को लागू नहीं होगी जो–
(क) तत्समय शत्रु अन्यदेशीय है या
(ख) निवारक निरोध का उपबंध करने वाली किसी विधि के अधीन गिरपतार या निरुद्ध किया गया है।
अनुच्छेद-22(4) निवारक निरोध का उपबंध करने वाली कोई विधि किसी व्यक्ति का तीन मास से अधिक अवधि के लिए तब तक निरुद्ध किया जाना प्राधिकृत नहीं करेगी जब तक कि–
(क) ऐसे व्यक्तियों से, जो उच्च न्यायालय के न्यायाधीश हैं या न्यायाधीश रहे हैं या न्यायाधीश नियुक्त होने के लिए अर्हित हैं, मिलकर बने सलाहकार बोर्ड ने तीन मास की उक्त अवधि की समाप्ति से पहले यह प्रतिवेदन नहीं दिया है कि उसकी राय में ऐसे निरोध के लिए पर्याप्त कारण हैं :
परंतु इस उपखंड की कोई बात किसी व्यक्ति का उस अधिकतम अवधि से अधिक अवधि के लिए निरुद्ध किया जाना प्राधिकृत नहीं करेगी जो खंड (7) के उपखंड (ख) के अधीन संसद द्वारा बनाई गई विधि द्वारा विहित की गई है ; या
(ख) ऐसे व्यक्ति को खंड (7) के उपखंड (क) और उपखंड (ख) के अधीन संसद द्वारा बनाई गई विधि के उपबंधों के अनुसार निरुद्ध नहीं किया जाता है।
अनुच्छेद-22(5) निवारक निरोध का उपबंध करने वाली किसी विधि के अधीन किए गए आदेश के अनुसरण में जब किसी व्यक्ति को निरुद्ध किया जाता है तब आदेश करने वाला प्राधिकारी यथाशक्य शीघ्र उस व्यक्ति को यह संसूचित करेगा कि वह आदेश किन आधारों पर किया गया है और उस आदेश के विरुद्ध अभ्यावेदन करने के लिए उसे शीघ्रातिशीघ्र अवसर देगा।
अनुच्छेद-22(6) खंड (5) की किसी बात से ऐसा आदेश, जो उस खंड में निर्दिष्ट है, करने वाले प्राधिकारी के लिए ऐसे तनयों को प्रकट करना आवश्यक नहीं होगा जिन्हें प्रकट करना ऐसा प्राधिकारी लोकहित के विरुद्ध समझता है।
अनुच्छेद-22(7) संसद विधि द्वारा विहित कर सकेगी कि–
(क) किन परिस्थितियों के अधीन और किस वर्ग या वर्गों के मामलों में किसी व्यक्ति को निवारक निरोध का उपबंध करने वाली किसी विधि के अधीन तीन मास से अधिक अवधि के लिए खंड (4) के उपखंड (क) के उपबंधों के अनुसार सलाहकार बोर्ड की राय प्राप्त किए बिना निरुद्ध किया जा सकेगा ;
(ख) किसी वर्ग या वर्गों के मामलों में कितनी अधिकतम अवधि के लिए किसी व्यक्ति को निवारक निरोध का उपबंध करने वाली किसी विधि के अधीन निरुद्ध किया जा सकेगा ; और
(ग) खंड (4) के उपखंड (क) के अधीन की जाने वाली जांच में सलाहकार बोर्ड द्वारा अनुसरण की जाने वाली प्रक्रिया क्या होगी।

Article-22
Article 22(1)
No person who has been arrested shall be detained in custody or deprived of the right to be consulted and to be defended by a legal practitioner of his interest without being informed, as soon as may be, of the reasons for such arrest.
Article 22(2) Every person who is arrested and kept in custody shall be produced before the nearest Magistrate within a period of twenty-four hours from such arrest, excluding the time required for the journey from the place of arrest to the Magistrate’s Court and No person shall be detained in custody for a period exceeding the said period except by the authority of the Magistrate.
Article 22(3) Nothing in clauses (1) and (2) shall apply to any person who—
(a) the enemy for the time being is a foreigner, or
(b) has been arrested or detained under any law providing for preventive detention.
Article 22(4) No law providing for preventive detention shall authorize the detention of any person for a period exceeding three months unless-
(a) the Advisory Board consisting of persons who are or have been Judges or are qualified to be appointed as Judges of a High Court has not, before the expiry of the said period of three months, made a report that in its opinion such There are sufficient reasons for detention:
Provided that nothing in this sub-clause shall authorize the detention of any person for a period exceeding such maximum period as may be prescribed by law made by Parliament under sub-section (b) of clause (7) ; either
(b) such person is not detained in accordance with the provisions of any law made by Parliament under sub-clauses (a) and (b) of clause (7).
Article 22(5) When any person is detained in pursuance of an order made under any law providing for preventive detention, the authority making the order shall, as soon as may be, communicate to that person the grounds on which the order has been made and the reasons for such order. give him an opportunity at the earliest opportunity to make a representation against him.
Article 22(6) Nothing in clause (5) shall make it necessary for the authority making such order as is referred to in that clause to disclose such factors which such authority considers to be against the public interest to disclose.
Article 22(7) Parliament may by law prescribe that-
(a) in accordance with the provisions of sub-clause (a) of clause (4) under any law providing for preventive detention of any person under the circumstances and in what class or classes of cases, for a period exceeding three months; may be detained without obtaining the opinion of;
(b) the maximum period for which any person may be detained under any law providing for preventive detention in any class or classes of cases; And
(c) the procedure to be followed by the Advisory Board in the inquiry conducted under sub-section (a) of clause (4).

हमारा प्रयास भारतीय के संविधान का अनुच्छेद-22 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

मोटर वाहन अधिनियम की धारा 93 | अभिकर्ता या प्रचारक या समूहक द्वारा अनुज्ञप्ति अभिप्राप्त करना | MV Act, Section- 93 in hindi | Agent or canvasser or aggregator to obtain licence.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए मोटर वाहन अधिनियम की धारा 93 के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है मोटर वाहन अधिनियम की धारा- 93, साथ ही इस धारा के अंतर्गत क्या परिभाषित किया गया है, यह सभी जानकारी इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

मोटर वाहन अधिनियम की धारा- 93 का विवरण

मोटर वाहन अधिनियम (Motor Vehicles Act) की धारा -93 के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। इस अधिनियम के आधीन कोई भी व्यक्ति सार्वजनिक सेवा यानों द्वारा यात्री के लिए टिकटों के विक्रय में अभिकर्ता या प्रचारक के रूप में अथवा ऐसे यानों के लिए ग्राहकों की अन्य रूप में याचना करने में; या माल वाहनों द्वारा वहन किए जाने वाले माल को संग्रहित, अग्रेषित या वितरित करने के कारबार में अभिकर्ता के रूप में अभिकर्ता या प्रचारक या समूहक द्वारा अनुज्ञप्ति अभिप्राप्त करना।

मोटर वाहन अधिनियम की धारा- 93 के अनुसार

अभिकर्ता या प्रचारक या समूहक द्वारा अनुज्ञप्ति अभिप्राप्त करना-

(1) कोई भी व्यक्ति-
(i) सार्वजनिक सेवा यानों द्वारा यात्री के लिए टिकटों के विक्रय में अभिकर्ता या प्रचारक के रूप में अथवा ऐसे यानों के लिए ग्राहकों की अन्य रूप में याचना करने में; या
(ii) माल वाहनों द्वारा वहन किए जाने वाले माल को संग्रहित, अग्रेषित या वितरित करने के कारबार में अभिकर्ता के रूप में;
(iii) एक समूहक के रूप में,
अपने को तभी लगाएगा, जब उसने ऐसे प्राधिकरण से अनुज्ञप्ति अभिप्राप्त कर ली है और ऐसी शर्तों पर ही लगाएगा जो राज्य सरकार द्वारा विहित की जाएं; अन्यथा नहीं ।
परंतु किसी समूहक को अनुज्ञप्ति जारी करते समय राज्य सरकार ऐसे मार्गदर्शक सिद्धांतों का अनुपालन कर सकेगी, जो केन्द्रीय सरकार द्वारा जारी किए जाएं :
परंतु यह और कि प्रत्येक समूहक सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 (2000 का 21) और तद्धीन बनाए गए नियमों और विनियमों का अनुपालन करेगा ।
(2) उपधारा (1) में निर्दिष्ट शर्तों में निम्नलिखित सब बातें या उनमें से कोई हो सकेगी, अर्थात् :-
(क) वह अवधि जिसके लिए अनुज्ञप्ति दी जा सकेगी या उसका नवीकरण हो सकेगा;
(ख) अनुज्ञप्ति दी जाने या उसके नवीकरण के लिए देय फीस;
(ग) (i) माल वाहनों द्वारा वहन किए जाने वाले माल के संग्रहण, अग्रेषण या वितरण के कारबार में लगे अभिकर्ता की दशा में अधिक से अधिक पचास हजार रुपए तक की राशि की;
(ii) किसी अन्य अभिकर्ता या प्रचारक की दशा में अधिक से अधिक पांच हजार रुपए तक की राशि की, प्रतिभूति जमा करना:
और वे परिस्थितियां जिनमें वह प्रतिभूति समपहृत की जा सकेगी;
(घ) अभिकर्ता द्वारा अभिवहन में माल का बीमा कराने की व्यवस्था;
(ङ) वह प्राधिकारी जिसके द्वारा और वे परिस्थितियां जिनमें अनुज्ञप्ति निलंबित की जा सकेगी या प्रतिसंहृत की जा सकेगी;
(च) ऐसी अन्य शर्ते जो राज्य सरकार द्वारा विहित की जाएं ।
(3) प्रत्येक अनुज्ञप्ति की यह शर्त होगी कि कोई भी ऐसा अभिकर्ता या प्रचारक, जिसे अनुज्ञप्ति दी गई है, किसी समाचार-पत्र, पुस्तक, सूची, वर्गीकृत निदेशिका या अन्य प्रकाशन में तब तक विज्ञापित नहीं करेगा जब तक कि ऐसे समाचार-पत्र, पुस्तक, सूची, वर्गीकृत निदेशिका या अन्य प्रकाशन में आने वाले ऐसे विज्ञापन में अनुज्ञप्ति संख्यांक, अनुज्ञप्ति के अवसान की तारीख और अनुज्ञप्ति देने वाले प्राधिकारी की विशिष्टियां न दी गई हों।

Agent or canvasser or aggregator to obtain licence-
(1) No person shall engage himself-
(i) as an agent or a canvasser, in the sale of tickets for travel by public service vehicles or in otherwise soliciting custom for such vehicles, or
(ii) as an agent in the business of collecting, forwarding or distributing goods carried by goods carriages;
(iii) as an aggregator,
unless he has obtained a licence from such authority and subject to such conditions as may be prescribed by the State Government.
Provided that while issuing the licence to an aggregator the State Government may follow such guidelines as may be issued by the Central Government :
Provided further that every aggregator shall comply with the provisions of the Information Technology Act, 2000 (21 of 2000) and the rules and regulations made thereunder.
(2) The conditions referred to in sub-section (1) may include all or any of the following matters, namely:-
(a) the period for which a licence may be granted or renewed;
(b) the fee payable for the issue or renewal of the licence;
(c) the deposit of security-
(i) of a sum not exceeding rupees fifty thousand in the case of an agent in the business of collecting, forwarding or distributing goods carried by goods carriages;
(ii) of a sum not exceeding rupees five thousand in the case of any other agent or canvasser;
and the circumstances under which the security may be forfeited;
(d) the provision by the agent of insurance of goods in transit;
(e) the authority by which and the circumstances under which the licence may be suspended or revoked;
(f) such other conditions as may be prescribed by the State Government.
(3) It shall be a condition of every licence that no agent or canvasser to whom the licence is granted shall advertise in any newspaper, book, list, classified directory or other publication unless there is contained in such advertisement appearing in such newspaper, book, list, classified directory or other publication the licence number, the date of expiry of licence and the particulars of the authority which granted the licence.

हमारा प्रयास मोटर वाहन अधिनियम (MV Act) की धारा 93 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।