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मोटर वाहन अधिनियम की धारा 43 | अस्थायी रजिस्ट्रीकरण | MV Act, Section- 43 in hindi | Temporary Registration.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए मोटर वाहन अधिनियम की धारा 43 के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है मोटर वाहन अधिनियम की धारा- 43, साथ ही इस धारा के अंतर्गत क्या परिभाषित किया गया है, यह सभी जानकारी इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

मोटर वाहन अधिनियम की धारा- 43 का विवरण

मोटर वाहन अधिनियम (Motor Vehicles Act) की धारा -43 के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। इस अधिनियम के आधीन धारा 40 में अंतर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी किसी मोटर यान का स्वामी रजिस्ट्रीकर्ता प्राधिकारी या अन्य प्राधिकारी जैसा राज्य सरकार द्वारा विहित किया जाए, को मोटर यान को अस्थायी रूप से रजिस्टर करने के लिए आवेदन कर सकेगा।

मोटर वाहन अधिनियम की धारा- 43 के अनुसार

अस्थायी रजिस्ट्रीकरण-

धारा 40 में अंतर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी किसी मोटर यान का स्वामी रजिस्ट्रीकर्ता प्राधिकारी या अन्य प्राधिकारी जैसा राज्य सरकार द्वारा विहित किया जाए, को मोटर यान को अस्थायी रूप से रजिस्टर करने के लिए आवेदन कर सकेगा और प्राधिकारी रजिस्ट्रीकरण का अस्थायी प्रमाणपत्र और अस्थायी रजिस्ट्रीकरण चिह्न ऐसे नियमों के अनुसार, जो केन्द्रीय सरकार द्वारा बनाए जाएं, जारी करेगा:
परंतु राज्य सरकार ऐसे किसी मोटर यान को, जो अस्थाई रूप से राज्य के भीतर चलता है, रजिस्टर कर सकेगी और ऐसी रीति में, जो राज्य सरकार द्वारा विहित की जाए, एक मास की अवधि के लिए रजिस्ट्रीकरण प्रमाणपत्र और रजिस्ट्रीकरण चिह्न जारी कर सकेगी।

Temporary Registration-
Notwithstanding anything contained in section 40, the owner of a motor vehicle may apply to any registering authority or other authority as may be prescribed by the State Government to have the motor vehicle temporarily registered and such authority shall issue a temporary certificate of registration and temporary registration mark in accordance with such rules as may be made by the Central Government:
Provided that the State Government may register a motor vehicle that plies, temporarily, within the State and issue a certificate of registration and registration mark for a period of one month in such manner as may be prescribed by the State Government.

हमारा प्रयास मोटर वाहन अधिनियम (MV Act) की धारा 43 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

मोटर वाहन अधिनियम की धारा 42 | राजनयिक अधिकारियों आदि के मोटर यानों के रजिस्ट्रीकरण के लिए विशेष उपबंध | MV Act, Section- 42 in hindi | Special provision for registration of motor vehicles of diplomatic officers, etc.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए मोटर वाहन अधिनियम की धारा 42 के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है मोटर वाहन अधिनियम की धारा- 42, साथ ही इस धारा के अंतर्गत क्या परिभाषित किया गया है, यह सभी जानकारी इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

मोटर वाहन अधिनियम की धारा- 42 का विवरण

मोटर वाहन अधिनियम (Motor Vehicles Act) की धारा -42 के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। इस अधिनियम के आधीन राजनयिक अधिकारियों आदि के मोटर यानों के रजिस्ट्रीकरण के लिए विशेष उपबंध कैसे करनी होगी बताया गया है।

मोटर वाहन अधिनियम की धारा- 42 के अनुसार

राजनयिक अधिकारियों आदि के मोटर यानों के रजिस्ट्रीकरण के लिए विशेष उपबंध-

(1) जहां किसी मोटर यान के रजिस्ट्रीकरण के लिए किसी राजनयिक अधिकारी अथवा कौंसलीय अधिकारी द्वारा अथवा उसकी ओर से धारा 41 की उपधारा (1) के अधीन आवेदन किया गया है वहां उस धारा की उपधारा (3) या उपधारा (6) में किसी बात के होते हुए भी रजिस्ट्रीकर्ता प्राधिकारी उस यान को ऐसी रीति से और ऐसी प्रक्रिया के अनुसार रजिस्टर करेगा जो केन्द्रीय सरकार द्वारा उपधारा (3) के अधीन इस निमित्त बनाए गए नियमों द्वारा उपबंधित की जाए तथा उन नियमों में अंतर्विष्ट उपबंधों के अनुसार उस यान पर प्रदर्शित करने के लिए उसे एक विशेष रजिस्ट्रीकरण चिन्ह देगा तथा इस बात का प्रमाण-पत्र (जिसे इस धारा में इसके पश्चात् रजिस्ट्रीकरण प्रमाण-पत्र कहा गया है) देगा कि वह यान इस धारा के अधीन रजिस्टर कर दिया गया है; और इस प्रकार रजिस्ट्रीकृत कोई यान जब तक किसी राजनयिक अधिकारी अथवा कौंसलीय अधिकारी की संपत्ति बना रहता है, इस अधिनियम के अधीन अन्यथा रजिस्टर किए जाने के लिए अपेक्षित नहीं होगा।
(2) यदि इस धारा के अधीन रजिस्ट्रीकृत कोई यान किसी राजनयिक अधिकारी अथवा कौंसलीय अधिकारी की संपत्ति नहीं रहता है तो इस धारा के अधीन दिया गया रजिस्ट्रीकरण प्रमाणपत्र भी प्रभावी नहीं रहेगा, और तब धारा 39 और धारा 40 के उपबंध लागू होंगे।
(3) केन्द्रीय सरकार, राजनयिक अधिकारियों और कौंसलीय अधिकारियों के मोटर यानों के रजिस्ट्रीकरण के लिए रजिस्ट्रीकर्ता प्राधिकारी द्वारा ऐसे यानों को रजिस्टर करने में अनुसरण की जाने वाली प्रक्रिया के बारे में, उस प्ररूप के बारे में जिसमें ऐसे यानों के रजिस्ट्रीकरण के प्रमाण-पत्र दिए जाने हैं, उस रीति के बारे में जिससे ऐसे रजिस्ट्रीकरण प्रमाण-पत्र उन यानों के स्वामियों को भेजे जाने हैं और ऐसे यानों के लिए विशेष रजिस्ट्रीकरण चिन्ह देने के बारे में नियम बना सकेगी।
(4) इस धारा के प्रयोजनों के लिए, “राजनयिक अधिकारी” या “कौंसलीय अधिकारी” से ऐसा कोई व्यक्ति अभिप्रेत है जिसे केन्द्रीय सरकार ने उस रूप में मान्यता प्रदान की है और यदि ऐसा प्रश्न उठता है कि वह व्यक्ति ऐसा अधिकारी है या नहीं तो उस प्रश्न पर केन्द्रीय सरकार का विनिश्चय अंतिम होगा।

Special provision for registration of motor vehicles of diplomatic officers, etc.-
(1) Where an application for registration of a motor vehicle is made under sub-section (1) of section 41 by or on behalf of any diplomatic officer or consular officer, then, notwithstanding anything contained in sub-section (3) or sub-section (6) of that section, the registering authority shall register the vehicle in such manner and in accordance with such procedure as may be provided by rules made in this behalf by the Central Government under sub-section (3) and shall assign to the vehicle for display thereon a special registration mark in accordance with the provisions contained in those rules and shall issue a certificate (hereafter in this section referred to as the certificate of registration) that the vehicle has been registered under this section; and any vehicle so registered shall not, so long as it remains the property of any diplomatic officer or consular officer, require to be registered otherwise under this Act.
(2) If any vehicle registered under this section ceases to be the property of any diplomatic officer or consular officer, the certificate of registration issued under this section shall also cease to be effective, and the provisions of sections 39 and 40 shall thereupon apply.
(3) The Central Government may make rules for the registration of motor vehicles belonging to diplomatic officers and consular officers regarding the procedure to be followed by the registering authority for registering such vehicles, the form in which the certificates of registration of such vehicles are to be issued, the manner in which such certificates of registration are to be sent to the owners of the vehicles and the special registration marks to be assigned to such vehicles.
(4) For the purposes of this section, “diplomatic officer” or “consular officer” means any person who is recognised as such by the Central Government and if any question arises as to whether a person is or is not such an officer, the decision of the Central Government thereon shall be final.

हमारा प्रयास मोटर वाहन अधिनियम (MV Act) की धारा 42 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

मोटर वाहन अधिनियम की धारा 41 | रजिस्ट्रीकरण कहां किया जाना है | MV Act, Section- 41 in hindi | Registration, where to be made.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए मोटर वाहन अधिनियम की धारा 41 के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है मोटर वाहन अधिनियम की धारा- 41, साथ ही इस धारा के अंतर्गत क्या परिभाषित किया गया है, यह सभी जानकारी इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

मोटर वाहन अधिनियम की धारा- 41 का विवरण

मोटर वाहन अधिनियम (Motor Vehicles Act) की धारा -41 के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। इस अधिनियम के आधीन रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया कैसे करनी होती है, बताया गया है।

मोटर वाहन अधिनियम की धारा- 41 के अनुसार

रजिस्ट्रीकरण कैसे होता है-

(1) मोटर यान के स्वामी द्वारा या उसकी ओर से रजिस्ट्रीकरण के लिए आवेदन ऐसे प्ररूप में होगा और उसके साथ ऐसी दस्तावेजों, विशिष्टियाँ और जानकारी दी हुई होंगी और वह ऐसी अवधि के भीतर किया जाएगा जो केन्द्रीय सरकार द्वारा विहित की जाएं:
परन्तु जहां मोटर यान संयुक्त रूप से एक से अधिक व्यक्तियों के स्वामित्वाधीन है, वहां आवेदन सभी स्वामियों की ओर से एक स्वामी द्वारा किया जाएगा और इस अधिनियम के प्रयोजनों के लिए ऐसे आवेदक को ऐसे मोटर यान का स्वामी समझा जाएगा:
परंतु यह और कि नए मोटर यान की दशा में राज्य में रजिस्ट्रीकरण के लिए आवेदन ऐसे मोटर 2 यान के डीलर द्वारा किया जाएगा, यदि नए मोटर यान को उसी राज्य में रजिस्ट्रीकृत किया जा रहा है जिसमें डीलर अवस्थित है।
(2) उपधारा (1) में निर्दिष्ट आवेदन के साथ ऐसी फीस होगी जो केन्द्रीय सरकार द्वारा विहित की जाए।
(3) रजिस्ट्रीकर्ता प्राधिकारी स्वामी के नाम से एक रजिस्ट्रीकरण प्रमाणपत्र ऐसे प्ररूप में देगा और उसमें ऐसी विशिष्टियाँ और जानकारी दी हुई होगी और वह ऐसी रीति में होगा जो केन्द्रीय सरकार द्वारा विहित की जाए।
(4) रजिस्ट्रीकरण के प्रमाण-पत्र में सम्मिलित की जाने के लिए अपेक्षित अन्य विशिष्टियों के अतिरिक्त, वह उस मोटर यान का प्रकार भी विनिर्दिष्ट करेगा जो ऐसे प्रकार का है जिसे केन्द्रीय सरकार, मोटर यान के डिजाइन, निर्माण और उपयोग को ध्यान में रखते हुए, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, विनिर्दिष्ट करे ।
(5) रजिस्ट्रीकर्ता प्राधिकारी उपधारा (3) में निर्दिष्ट प्रमाण-पत्र की विशिष्टियाँ एक रजिस्टर में प्रविष्ट करेगा जिसे ऐसे प्ररूप और रीति में रखा जाएगा जो केन्द्रीय सरकार द्वारा विहित की जाए।
(6) रजिस्ट्रीकर्ता प्राधिकारी उस यान में प्रदर्शित किए जाने के लिए उस यान को (इस अधिनियम में रजिस्ट्रीकरण चिन्ह के रूप में निर्दिष्ट) एक पहचान चिन्ह देगा जो ऐसे अक्षर समूहों में से किसी एक समूह से मिलकर बनेगा और उसके पश्चात् ऐसे अक्षर और अंक होंगे जो केन्द्रीय सरकार राजपत्र में अधिसूचना द्वारा उस राज्य को समय-समय पर आबंटित करती है, और उन्हें मोटर यान पर ऐसे प्ररूप और ऐसी रीति में प्रदर्शित किया जाएगा जो केन्द्रीय सरकार द्वारा विहित की जाए:
परंतु नए मोटर यान की दशा में, जिसके लिए रजिस्ट्रीकरण का आवेदन उपधारा (1) के दूसरे परंतुक के अधीन किया गया है, ऐसे मोटर यान का उसके स्वामी को तब तक परिदान नहीं किया जाएगा जब तक ऐसा रजिस्ट्रीकरण चिह्न मोटर यान पर ऐसे प्ररूप और ऐसी रीति में, जो केन्द्रीय सरकार द्वारा विहित किया जाए, प्रदर्शित नहीं कर दिया जाता है।
(7) इस अधिनियम के प्रारंभ के पूर्व या पश्चात् मोटर यान के बारे में उपधारा (3) के अधीन दिया गया रजिस्ट्रीकरण प्रमाण-पत्र, इस अधिनियम के उपबंधों के अधीन रहते हुए ऐसे प्रमाण-पत्र के दिए जाने की तारीख से केवल पंद्रह वर्ष की अवधि तक या ऐसी अवधि के लिए, जो केन्द्रीय सरकार द्वारा विहित की जाए विधिमान्य रहेगा और उसका नवीकरण किया जा सकेगा ।
(8) मोटर यान के स्वामी द्वारा या उसकी ओर से रजिस्ट्रीकरण प्रमाण-पत्र के नवीकरण के लिए आवेदन ऐसी अवधि के भीतर और ऐसे प्ररूप में किया जाएगा और उसमें ऐसी विशिष्टियाँ और जानकारी होगी जो केन्द्रीय सरकार द्वारा विहित की जाए।
(9) उपधारा (8) में निर्दिष्ट आवेदन के साथ ऐसी फीस होगी जो केन्द्रीय सरकार द्वारा विहित की जाए ।
(10) धारा 56 के उपबंधों के अधीन रहते हुए, रजिस्ट्रीकर्ता प्राधिकारी उपधारा (8) के अधीन आवेदन प्राप्त करने पर, रजिस्ट्रीकरण प्रमाण-पत्र का नवीकरण ऐसी अवधि के लिए, जो केन्द्रीय सरकार द्वारा विहित की जाए कर सकेगा और उस तथ्य की सूचना, यदि वह मूल रजिस्ट्रीकर्ता प्राधिकारी नहीं है तो मूल रजिस्ट्रीकर्ता प्राधिकारी को देगा :
परंतु केन्द्रीय सरकार विभिन्न किस्म के यानों के लिए नवीकरण की विभिन्न अवधि विहित कर सकेगी।
[मोटर यान (संशोधन) अधिनियम, 2019 (क्र. 32 सन् 2019) द्वारा उपधाराओं (11), (12) एवं (13) का लोप]
(14) रजिस्ट्रीकरण का दूसरा प्रमाण-पत्र दिए जाने के लिए आवेदन, अंतिम रजिस्ट्रीकर्ता प्राधिकारी को ऐसे प्ररूप में किया जाएगा और उसमें ऐसी विशिष्टियां और जानकारी होंगी और उसके साथ ऐसी फीस होगी जो केन्द्रीय सरकार द्वारा विहित की जाए।

Registration, how to be made-
(1) An application by or on behalf of the owner of a motor vehicle for registration shall be in such form and shall be accompanied by such documents, particulars and information and shall be made within such period as may be prescribed by the Central Government:
Provided that where a motor vehicle is jointly owned by more persons than one, the application shall be made by one of them on behalf of all the owners and such applicant shall be deemed to be the owner of the motor vehicle for the purposes of this Act:
Provided further that in the case of a new motor vehicle, the application for registration in the State shall be made by the dealer of such motor vehicle, if the new motor vehicle is being registered in the same State in which the dealer is situated.
(2) An application referred to in sub-section (1) shall be accompanied by such fee as may be prescribed by the Central Government.
(3) The registering authority shall issue [a certificate of registration in the name of the owner] in such form and containing such particulars and information and in such manner as may be prescribed by the Central Government.
(4) In addition to the other particulars required to be included in the certificate of registration, it shall also specify the type of the motor vehicle, being a type as the Central Government may, having regard to the design, construction and use of the motor vehicle, by notification in the Official Gazette, specify.
(5) The registering authority shall enter the particulars of the certificate referred to in sub-section (3) in a register to be maintained in such form and manner as may be prescribed by the Central Government.
(6) The registering authority shall assign to the vehicle, for display thereon, a distinguishing mark (in this Act referred to as the registration mark) consisting of one of the groups of such of those letters and followed by such letters and figures as are allotted to the State by the Central Government from time to time by notification in the Official Gazette, and displayed and shown on the motor vehicle in such form and in such manner as may be prescribed by the Central Government:
Provided that in case of a new motor vehicle, the application for the registration of which is made under the second proviso to sub-section (1), such motor vehicle shall not be delivered to the owner until such registration mark is displayed on the motor vehicle in such form and manner as may prescribed by the Central Government.
(7) A certificate of registration issued under sub-section (3), whether before or after the commencement of this Act, in respect of a motor vehicle, shall subject to the provisions contained in this Act, be valid only for a period of fifteen years from the date of issue of such certificate [or for such period as may be prescribed by the Central Government] and shall be renewable.
(8) An application by or on behalf of the owner of a motor vehicle, for the renewal of a certificate of registration shall be made within such period and in such form, containing such particulars and information as may be prescribed by the Central Government.
(9) An application referred to in sub-section (8) shall be accompanied by such fee as may be prescribed by the Central Government.
(10) Subject to the provisions of section 56, the registering authority may, on receipt of an application under sub-section (8), renew the certificate of registration [for such period, as may be prescribed by the Central Government] and intimate the fact to the original registering authority, if it is not the original registering authority :
Provided that the Central Government may prescribe different period of renewal for different types of motor vehicles.
[Sub-sections (11), (12) and (13) omitted by the Motor Vehicles (Amendment) Act, 2019]
(14) An application for the issue of a duplicate certificate of registration shall be made to the [last registering authority] in such form, containing such particulars and information along with such fee as may be prescribed by the Central Government.

राज्य संशोधन
राजस्थान :
राजस्थान राज्य को इसके लागू होने में, धारा 41 में —
(क) उपधाराओं (7) और (8) में, अभिव्यक्ति, “परिवहन यान से भिन्न” को विलोपित किया जाए।
(ख) इस प्रकार संशोधित उपधारा (7) के पश्चात्, निम्नलिखित परंतुक अन्तःस्थापित किया जाए, अर्थात् :-
“परंतु यह कि परिवहन यानों की दशा में, राज्य सरकार, अधिनियम की धारा 59 के अधीन विहित, आयु सीमा के अध्यधीन, यदि कोई हो, विहित रीति में परिवहन यानों के पुनः रजिस्ट्रीकरण किये जाने की अपेक्षा कर सकेगी ।”; और
(ग) उपधारा (10) में, शब्दों “पांच वर्षों की अवधि के लिये” के पश्चात् एवं शब्दों “और सूचना देगा” के पूर्व, अभिव्यक्ति “राज्य सरकार द्वारा उद्ग्रहीत, समस्त करों, शास्तियों और ब्याज, तो यदि कोई हो, का भुगतान होने पर” अन्तःस्थापित की जाए।
[2002 का राजस्थान अधिनियम 1, धारा 2 (13-3-2002 से प्रभावशील)]

हमारा प्रयास मोटर वाहन अधिनियम (MV Act) की धारा 41 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

मोटर वाहन अधिनियम की धारा 40 | रजिस्ट्रीकरण कहां किया जाना है | MV Act, Section- 40 in hindi | Registration, where to be made.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए मोटर वाहन अधिनियम की धारा 40 के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है मोटर वाहन अधिनियम की धारा- 40, साथ ही इस धारा के अंतर्गत क्या परिभाषित किया गया है, यह सभी जानकारी इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

मोटर वाहन अधिनियम की धारा- 40 का विवरण

मोटर वाहन अधिनियम (Motor Vehicles Act) की धारा -40 के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। इस अधिनियम के आधीन धारा 42, धारा 43 और धारा 60 के उपबंधों के अधीन रहते हुए, प्रत्येक मोटर यान का स्वामी यान को उस राज्य में कोई रजिस्ट्रीकर्ता प्राधिकारी से रजिस्टर करवाएगा जिसकी अधिकारिता में उसका निवास स्थान या कारबार का स्थान है जहां कि यान आमतौर पर रखा जाता है।

मोटर वाहन अधिनियम की धारा- 40 के अनुसार

रजिस्ट्रीकरण कहां किया जाना है-

धारा 42, धारा 43 और धारा 60 के उपबंधों के अधीन रहते हुए, प्रत्येक मोटर यान का स्वामी यान को उस राज्य में कोई रजिस्ट्रीकर्ता प्राधिकारी से रजिस्टर करवाएगा जिसकी अधिकारिता में उसका निवास स्थान या कारबार का स्थान है जहां कि यान आमतौर पर रखा जाता है।

Registration, where to be made-
Subject to the provisions of section 42, section 43 and section 60, every owner of a motor vehicle shall cause the vehicle to be registered by [any registering authority in the State] in whose jurisdiction he has the residence or place of business where the vehicle is normally kept.

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मोटर वाहन अधिनियम की धारा 39 | रजिस्ट्रीकरण की आवश्यकता | MV Act, Section- 39 in hindi | Necessity for registration.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए मोटर वाहन अधिनियम की धारा 39 के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है मोटर वाहन अधिनियम की धारा- 39, साथ ही इस धारा के अंतर्गत क्या परिभाषित किया गया है, यह सभी जानकारी इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

मोटर वाहन अधिनियम की धारा- 39 का विवरण

मोटर वाहन अधिनियम (Motor Vehicles Act) की धारा -39 के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। इस अधिनियम के आधीन रजिस्ट्रीकरण की आवश्यकता को परिभाषित किया गया है।

मोटर वाहन अधिनियम की धारा- 39 के अनुसार

रजिस्ट्रीकरण की आवश्यकता-

किसी सार्वजनिक स्थान में अथवा किसी अन्य स्थान में किसी मोटर यान को कोई व्यक्ति तभी चलाएगा और कोई मोटर यान का स्वामी तभी चलवाएगा या चलाने की अनुज्ञा देगा जब वह यान इस अध्याय के अनुसार रजिस्ट्रीकृत हो तथा यान का रजिस्ट्रीकरण प्रमाण-पत्र निलंबित या रद्द न किया गया हो और यान पर रजिस्ट्रीकरण चिन्ह विहित रीति से प्रदर्शित हो:
परन्तु इस धारा की कोई बात ऐसी शर्तों के अधीन रहते हुए जो केन्द्रीय सरकार द्वारा विहित की जाएं किसी व्यवहारी के कब्जे में के मोटर यान को लागू नहीं होगी।

Necessity for registration-
No person shall drive any motor vehicle and no owner of a motor vehicle shall cause or permit the vehicle to be driven in any public place or in any other place unless the vehicle is registered in accordance with this Chapter and the certificate of registration of the vehicle has not been suspended or canceled and the vehicle carries a registration mark displayed in the prescribed manner:
Provided that nothing in this section shall apply to a motor vehicle in possession of a dealer subject to such conditions as may be prescribed by the Central Government.

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मोटर वाहन अधिनियम की धारा 38 | राज्य सरकार की नियम बनाने की शक्ति | MV Act, Section- 38 in hindi | Power of State Government to make rules.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए मोटर वाहन अधिनियम की धारा 38 के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है मोटर वाहन अधिनियम की धारा- 38, साथ ही इस धारा के अंतर्गत क्या परिभाषित किया गया है, यह सभी जानकारी इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

मोटर वाहन अधिनियम की धारा- 38 का विवरण

मोटर वाहन अधिनियम (Motor Vehicles Act) की धारा -38 के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। इस अधिनियम के आधीन राज्य सरकार की नियम बनाने की शक्ति को परिभाषित किया गया है।

मोटर वाहन अधिनियम की धारा- 38 के अनुसार

राज्य सरकार की नियम बनाने की शक्ति-

(1) राज्य सरकार इस अध्याय के उपबंधों को कार्यान्वित करने के प्रयोजन के लिए नियम बना सकेगी।
(2) पूर्वगामी शक्ति की व्यापकता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, ऐसे नियमों में निम्नलिखित के लिए उपबंध हो सकेगा :-
(क) इस अध्याय के अधीन अनुज्ञापन प्राधिकारियों और अन्य विहित प्राधिकारियों की नियुक्ति, अधिकारिता, नियंत्रण और कृत्य;
(ख) वे शर्ते जिनके अधीन रहते हुए कंडक्टर के कृत्यों का पालन करने वाले मंजिली गाड़ियों के ड्राइवरों को और कंडक्टरों के रूप में कार्य करने के लिए अस्थाई रूप से नियोजित व्यक्तियों को धारा 29 की उपधारा (1) के उपबंधों से छूट दी जा सकेगी;
(ग) कंडक्टरों की न्यूनतम शैक्षिक अर्हताएं, उनके कर्त्तव्य और कृत्य और उन व्यक्तियों के आचरण, जिनको कंडक्टर अनुज्ञप्तियाँ दी गई हैं;
(घ) कंडक्टर अनुज्ञप्तियों के लिए अथवा ऐसी अनुज्ञप्तियों के नवीकरण के लिए आवेदन के प्ररूप और वे विशिष्टियाँ, जो उसमें हो सकेंगी;
(ङ) वह प्ररूप, जिसमें कंडक्टर अनुज्ञप्तियाँ दी जा सकेंगी या उनका नवीकरण किया जा सकेगा और वे विशिष्टियां, जो उसमें हो सकेंगी;
(च) किन्हीं खोई, नष्ट या कटी-फटी अनुज्ञप्तियों के बदले में दूसरी अनुज्ञप्तियों का दिया जाना; ऐसी फोटो के बदले में, जो पुरानी पड़ गई है, नई फोटो रखना और उनके लिए प्रभारित की जाने वाली फीसें;
(छ) इस अध्याय के अधीन की जाने वाली अपीलों का संचालन और उनकी सुनवाई, ऐसी अपीलों की बाबत देय फीसें और ऐसी फीसों का वापस दिया जाना:
परन्तु इस प्रकार नियत की जाने वाली कोई फीस पच्चीस रुपए से अधिक नहीं होगी |
(ज) मंजिली गाड़ियों के कंडक्टरों द्वारा पहनी जाने वाली वर्दी और लगाए जाने वाले बैज, और ऐसे बैजों के लिए दी जाने वाली फीसें;
(झ) रजिस्ट्रीकृत चिकित्सा व्यवसायियों द्वारा धारा 30 की उपधारा (3) में निर्दिष्ट प्रमाण-पत्रों का दिया जाना, और ऐसे प्रमाण-पत्रों के प्ररूप;
(ञ) वे शर्ते जिनके अधीन रहते हए और वह विस्तार जिस तक अन्य राज्य में दी गई या कंडक्टर अनुज्ञप्ति राज्य में प्रभावी होगी:
(ट) कंडक्टर अनुज्ञप्तियों की विशिष्टियों की एक प्राधिकारी से अन्य प्राधिकारियों को संसूचना; और
(ठ) कोई अन्य विषय जो विहित किया जाना है या किया जाए।

Power of State Government to make rules-
(1) A State Government may make rules for the purpose of carrying into effect the provisions of this Chapter.
(2) Without prejudice to the generality of the foregoing power, such rules may provide for-
(a) the appointment, jurisdiction, control and function of licensing authorities and other prescribed authorities under this Chapter;
(b) the conditions subject to which drivers of stage carriages performing the functions of a conductor and persons temporarily employed to act as conductors may be exempted from the provisions of subsection (1) of section 29;
(c) the minimum educational qualifications of conductors; their duties and functions and the conduct of persons to whom conductor’s licences are issued;
(d) the form of application for conductor’s licences or for renewal of such licences and the particulars it may contain;
(e) the form in which conductor’s licences may be issued or renewed and the particulars it may contain;
(f) the issue of duplicate licences to replace licences lost, destroyed or mutilated, the replacement of photographs which have become obsolete and the fees to be charged therefor,
(g) the conduct and hearing of appeals that may be preferred under this Chapter, the fees to be paid in respect of such appeals and the refund of such fees :
Provided that no fee so fixed shall exceed twenty-five rupees;
(h) the badges and uniform to be worn by conductors of stage carriages and the fees to be paid in respect of such badges;
(i) the grant of the certificates referred to in sub-section (3) of section 30 by registered medical practitioners and the form of such certificate;
(j) the conditions subject to which, and the extent to which, a conductor’s licence issued in another State shall be effective in the State;
(k) the communication of particulars of conductor’s licences from one authority to other authorities; and
(l) any other matter which is to be, or maybe, prescribed.

हमारा प्रयास मोटर वाहन अधिनियम (MV Act) की धारा 38 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।