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मोटर वाहन अधिनियम की धारा 37 | व्यावृत्तियाँ | MV Act, Section- 37 in hindi | Savings.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए मोटर वाहन अधिनियम की धारा 37 के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है मोटर वाहन अधिनियम की धारा- 37, साथ ही इस धारा के अंतर्गत क्या परिभाषित किया गया है, यह सभी जानकारी इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

मोटर वाहन अधिनियम की धारा- 37 का विवरण

मोटर वाहन अधिनियम (Motor Vehicles Act) की धारा -37 के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। इस अधिनियम के आधीन यदि मंजिली गाड़ी के (चाहे वह किसी भी नाम से ज्ञात हो) कंडक्टर के रूप में कार्य करने के लिए कोई अनुज्ञप्ति किसी राज्य में दी जाती है और वह इस अधिनियम के प्रारंभ से तुरंत पूर्व प्रभावी है, तो ऐसे प्रारंभ के होते हुए भी वह उस अवधि के लिए प्रभावी बनी रहेगी, जिसके लिए वह उस दशा में प्रभावी होती जब यह अधिनियम पारित न किया गया होता और ऐसी प्रत्येक अनुज्ञप्ति की बाबत यह समझा जाएगा।

मोटर वाहन अधिनियम की धारा- 37 के अनुसार

व्यावृत्तियाँ-

यदि मंजिली गाड़ी के (चाहे वह किसी भी नाम से ज्ञात हो) कंडक्टर के रूप में कार्य करने के लिए कोई अनुज्ञप्ति किसी राज्य में दी जाती है और वह इस अधिनियम के प्रारंभ से तुरंत पूर्व प्रभावी है, तो ऐसे प्रारंभ के होते हुए भी वह उस अवधि के लिए प्रभावी बनी रहेगी, जिसके लिए वह उस दशा में प्रभावी होती जब यह अधिनियम पारित न किया गया होता और ऐसी प्रत्येक अनुज्ञप्ति की बाबत यह समझा जाएगा कि वह इस अध्याय के अधीन ऐसे दी गई अनुज्ञप्ति है मानो यह अध्याय उस तारीख को प्रवृत्त था, जिस तारीख को वह अनुज्ञप्ति दी गई थी।

Savings-
If any licence to act as a conductor of a stage carriage (by whatever name called) has been issued in any State and is effective immediately before the commencement of this Act, it shall continue to be effective, notwithstanding such commencement, for the period for which it would have been effective, if this Act had not been passed, and every such licence shall be deemed to be a licence issued under this Chapter as if this Chapter had been in force on the date on which that licence was granted.

हमारा प्रयास मोटर वाहन अधिनियम (MV Act) की धारा 37 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

मोटर वाहन अधिनियम की धारा 36 | अध्याय 2 के कुछ उपबंधों का कंडक्टर अनुज्ञप्ति को लागू होना | MV Act, Section- 36 in hindi | Certain provisions of Chapter II to apply to conductor’s licence.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए मोटर वाहन अधिनियम की धारा 36 के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है मोटर वाहन अधिनियम की धारा- 36, साथ ही इस धारा के अंतर्गत क्या परिभाषित किया गया है, यह सभी जानकारी इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

मोटर वाहन अधिनियम की धारा- 36 का विवरण

मोटर वाहन अधिनियम (Motor Vehicles Act) की धारा -36 के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। इस अधिनियम के आधीन अध्याय 2 के कुछ उपबंधों का कंडक्टर अनुज्ञप्ति को लागू होना को परिभाषित किया गया है।

मोटर वाहन अधिनियम की धारा- 36 के अनुसार

अध्याय 2 के कुछ उपबंधों का कंडक्टर अनुज्ञप्ति को लागू होना-

धारा 6 की उपधारा (2), धारा 14, धारा 15 और धारा 23, धारा 24 की उपधारा (1), और धारा 25 के उपबंध कंडक्टर अनुज्ञप्ति के संबंध में यथासंभव वैसे ही लागू होंगे जैसे वे चालन-अनुज्ञप्ति के संबंध में लागू होते है।

Certain provisions of Chapter II to apply to conductor’s licence-
The provisions of sub-section (2) of section 6, sections 14, 15 and 23, sub-section (1) of section 24 and section 25 shall, so far as may be, apply in relation to a conductor’s licence, as they apply in relation to a driving licence.

हमारा प्रयास मोटर वाहन अधिनियम (MV Act) की धारा 36 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

मोटर वाहन अधिनियम की धारा 35 | न्यायालय की निरर्हित करने की शक्ति | MV Act, Section- 35 in hindi | Power of Court to disqualify.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए मोटर वाहन अधिनियम की धारा 35 के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है मोटर वाहन अधिनियम की धारा- 35, साथ ही इस धारा के अंतर्गत क्या परिभाषित किया गया है, यह सभी जानकारी इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

मोटर वाहन अधिनियम की धारा- 35 का विवरण

मोटर वाहन अधिनियम (Motor Vehicles Act) की धारा -35 के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। इस अधिनियम के आधीन न्यायालय की निरर्हित करने की शक्ति को परिभाषित किया गया है।

मोटर वाहन अधिनियम की धारा- 35 के अनुसार

न्यायालय की निरर्हित करने की शक्ति-

(1) जब कंडक्टर अनुज्ञप्ति को धारण करने वाला कोई व्यक्ति इस अधिनियम के अधीन किसी अपराध के लिए दोषसिद्ध किया गया है, तब वह न्यायालय, जिसने उसे दोषसिद्ध किया है, विधि द्वारा प्राधिकृत कोई अन्य दंड अधिरोपित करने के अतिरिक्त, उस व्यक्ति को, जो इस प्रकार दोषसिद्ध किया गया है, कोई कंडक्टर अनुज्ञप्ति धारण करने से उतनी अवधि के लिए, जितनी वह न्यायालय विनिर्दिष्ट करे, निरर्ह घोषित कर सकेगा।
(2) वह न्यायालय जिसमें इस अधिनियम के अधीन अपराध के लिए हुई किसी दोषसिद्धि की अपील होती है, निचले न्यायालय द्वारा दिए गए निरर्हता के किसी आदेश को अपास्त कर सकेगा या उसमें परिवर्तन कर सकेगा, और वह न्यायालय, जिसमें मामूली तौर पर ऐसे न्यायालय से अपीलें होती हैं, उस न्यायालय द्वारा दिए गए निरर्हता के किसी आदेश को इस बात के होते हुए भी अपास्त कर सकेगा या उसमें परिवर्तन कर सकेगा कि उस दोषसिद्धि के विरुद्ध कोई अपील नहीं होती जिसके संबंध में वह आदेश दिया गया था।

Power of Court to disqualify-
(1) Where any person holding a conductor’s licence is convicted of an offence under this Act, the Court by which such person is convicted may, in addition to imposing any other punishment authorised by law, declare the person so convicted to be disqualified for such period as the Court may specify for holding a conductor’s licence.
(2) The Court to which an appeal lies from any conviction of an offence under this Act may set aside or vary any order of disqualification made by the Court below, and the Court to which appeals ordinarily lie from such Court, may set aside or vary any order of disqualification made by that Court, notwithstanding that no appeal lies against the conviction in connection with which such order was made.

हमारा प्रयास मोटर वाहन अधिनियम (MV Act) की धारा 35 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

मोटर वाहन अधिनियम की धारा 34 | अनुज्ञापन प्राधिकारी की निरर्हित करने की शक्ति | MV Act, Section- 34 in hindi | Power of licensing authority to disqualify.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए मोटर वाहन अधिनियम की धारा 34 के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है मोटर वाहन अधिनियम की धारा- 34, साथ ही इस धारा के अंतर्गत क्या परिभाषित किया गया है, यह सभी जानकारी इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

मोटर वाहन अधिनियम की धारा- 34 का विवरण

मोटर वाहन अधिनियम (Motor Vehicles Act) की धारा -34 के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। इस अधिनियम के आधीन अनुज्ञापन प्राधिकारी की निरर्हित करने की शक्ति को परिभाषित किया गया है।

मोटर वाहन अधिनियम की धारा- 34 के अनुसार

अनुज्ञापन प्राधिकारी की निरर्हित करने की शक्ति-

(1) यदि किसी अनुज्ञापन प्राधिकारी की यह राय है कि कंडक्टर के रूप में किसी कंडक्टर अनुज्ञप्ति के धारक के पूर्वाचरण के कारण यह आवश्यक है कि उसे कंडक्टर अनुज्ञप्ति धारण करने अथवा अभिप्राप्त करने से निरर्हित कर दिया जाए तो वह ऐसे कारणों से, जो लेखबद्ध किए जाएंगे, उस व्यक्ति को कंडक्टर अनुज्ञप्ति धारण करने या अभिप्राप्त करने से किसी विनिर्दिष्ट अवधि के लिए, जो एक वर्ष से अधिक न होगी, निरर्हित करने का आदेश दे सकेगा:
परन्तु अनुज्ञप्ति के धारक को निरहित करने के पूर्व, अनुज्ञापन प्राधिकारी ऐसी अनुज्ञप्ति धारण करने वाले व्यक्ति को सुनवाई का युक्तियुक्त अवसर देगा ।
(2) ऐसे किसी आदेश के दिए जाने पर, यदि कंडक्टर अनुज्ञप्ति के धारक द्वारा उस कंडक्टर अनुज्ञप्ति का पहले ही अभ्यर्पण नहीं कर दिया गया है तो वह उसे उस अनुज्ञापन प्राधिकारी को तुरंत अभ्यर्पित कर देगा, जिसने वह आदेश दिया है और वह प्राधिकारी उस अनुज्ञप्ति को तब तक अपने पास रखे रहेगा जब तक निरर्हता समाप्त नहीं हो जाती या हटा नहीं दी जाती ।
(3) जब कंडक्टर अनुज्ञप्ति के धारक को इस धारा के अधीन निरहित करने वाला प्राधिकारी वह प्राधिकारी नहीं है जिसने अनुज्ञप्ति दी थी, तब वह कंडक्टर अनुज्ञप्ति देने वाले प्राधिकारी को ऐसी निरर्हता के तथ्य की सूचना देगा।
(4) उपधारा (1) के अधीन दिए गए आदेश से व्यथित कोई व्यक्ति, अपने पर आदेश की तामील होने के तीस दिन के भीतर, विहित प्राधिकारी को अपील कर सकेगा, जो ऐसे व्यक्ति और उस प्राधिकारी को, जिसने आदेश दिया है, सुनवाई का अवसर देने के पश्चात् अपील का विनिश्चय करेगा और अपील प्राधिकारी का विनिश्चय, उस प्राधिकारी पर आबद्धकर होगा, जिसने वह आदेश दिया था।

Power of licensing authority to disqualify-
(1) If any licensing authority is of opinion that it is necessary to disqualify the holder, of a conductor’s licence for holding or obtaining such a licence on account of his previous conduct as a conductor, it may, for reasons to be recorded, make an order disqualifying that person for a specified period, not exceeding one year, for holding or obtaining a conductor’s licence :
Provided that before disqualifying the holder of a licence, the licensing authority shall give the person holding such licence a reasonable opportunity of being heard.
(2) Upon the issue of any such order, the holder of the conductor’s licence shall forthwith surrender the licence to the authority making the order, if the licence has not already been surrendered, and the authority shall keep the licence until the disqualification has expired or has been removed.
(3) Where the authority disqualifying the holder of a conductor’s licence under this section is not the authority which issued the licence, it shall intimate the fact of such disqualification to the authority which issued the same.
(4) Any person aggrieved by an order made under sub-section (1) may, within thirty days of the service on him of the order, appeal to the prescribed authority which shall decide the appeal after giving such person and the authority which made the order an opportunity of being heard and the decision of the appellate authority shall be binding on the authority which made the order.

हमारा प्रयास मोटर वाहन अधिनियम (MV Act) की धारा 34 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

मोटर वाहन अधिनियम की धारा 33 | कंडक्टर अनुज्ञप्तियों से इंकार आदि करने वाले आदेश तथा उनसे अपीलें | MV Act, Section- 33 in hindi | Orders refusing, etc., conductor’s licences and appeals therefrom.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए मोटर वाहन अधिनियम की धारा 33 के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है मोटर वाहन अधिनियम की धारा- 33, साथ ही इस धारा के अंतर्गत क्या परिभाषित किया गया है, यह सभी जानकारी इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

मोटर वाहन अधिनियम की धारा- 33 का विवरण

मोटर वाहन अधिनियम (Motor Vehicles Act) की धारा -33 के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। इस अधिनियम के आधीन कंडक्टर अनुज्ञप्तियों से इंकार आदि करने वाले आदेश तथा उनसे अपील करने को परिभाषित किया गया है।

मोटर वाहन अधिनियम की धारा- 33 के अनुसार

कंडक्टर अनुज्ञप्तियों से इंकार आदि करने वाले आदेश तथा उनसे अपीलें-

(1) जब अनुज्ञापन प्राधिकारी कंडक्टर अनुज्ञप्ति देने से या उसका नवीकरण करने से इंकार करता है या उसे प्रतिसंहृत करता है तब वह आदेश द्वारा ऐसा करेगा जिसकी संसूचना, यथास्थिति, आवेदक या धारक को दी जाएगी और जिसमें ऐसे इंकार या प्रतिसंहरण के कारण लिखित रूप में दिए जाएंगे।
(2) उपधारा (1) के अधीन दिए गए आदेश से व्यथित कोई व्यक्ति अपने पर आदेश की तामील होने के तीस दिन के भीतर विहित प्राधिकारी को अपील कर सकेगा, जो ऐसे व्यक्ति और उस प्राधिकारी को, जिसने आदेश दिया है, सुनवाई का अवसर देने के पश्चात् अपील का विनिश्चय करेगा और अपील प्राधिकारी का विनिश्चय, उस प्राधिकारी पर आबद्धकर होगा, जिसने वह आदेश दिया था।

Orders refusing, etc., conductor’s licences and appeals therefrom-
(1) Where a licensing authority refuses to issue or renew, or revokes any conductor’s licence, it shall do so by an order communicated to the applicant or the holder, as the case may be, giving the reasons in writing for such refusal or revocation.
(2) Any person aggrieved by an order made under sub-section (1) may, within thirty days of the service on him of the order, appeal to the prescribed authority which shall decide the appeal after giving, such person and the authority which made the order an opportunity of being heard and the decision of the appellate authority shall be binding on the authority which made the order.

हमारा प्रयास मोटर वाहन अधिनियम (MV Act) की धारा 33 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

मोटर वाहन अधिनियम की धारा 32 | कंडक्टर अनुज्ञप्ति का रोग या निःशक्तता के आधारों पर प्रतिसंहरण | MV Act, Section- 32 in hindi | Revocation of a conductor’s licence on grounds of disease or disability.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए मोटर वाहन अधिनियम की धारा 32 के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है मोटर वाहन अधिनियम की धारा- 32, साथ ही इस धारा के अंतर्गत क्या परिभाषित किया गया है, यह सभी जानकारी इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

मोटर वाहन अधिनियम की धारा- 32 का विवरण

मोटर वाहन अधिनियम (Motor Vehicles Act) की धारा -32 के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। इस अधिनियम के आधीन कंडक्टर अनुज्ञप्ति का रोग या निःशक्तता के आधारों पर प्रतिसंहरण को परिभाषित किया गया है।

मोटर वाहन अधिनियम की धारा- 32 के अनुसार

कंडक्टर अनुज्ञप्ति का रोग या निःशक्तता के आधारों पर प्रतिसंहरण-

यदि किसी अनुज्ञापन प्राधिकारी के पास यह विश्वास करने के युक्तियुक्त आधार हैं कि किसी कंडक्टर अनुज्ञप्ति का धारक किसी ऐसे रोग या निःशक्तता से ग्रस्त है जिससे कि उसके ऐसी अनुज्ञप्ति धारण करने के लिए स्थाई रूप से अयोग्य हो जाने की संभावना है तो कंडक्टर अनुज्ञप्ति किसी भी समय किसी अनुज्ञापन प्राधिकारी द्वारा प्रतिसंहृत की जा सकेगी और जब किसी कंडक्टर अनुज्ञप्ति को प्रतिसंहृत करने वाला प्राधिकारी वह प्राधिकारी नहीं है जिसने कंडक्टर अनुज्ञप्ति दी थी तब वह कंडक्टर अनुज्ञप्ति देने वाले प्राधिकारी को अनुज्ञप्ति के ऐसे प्रतिसंहृत करने की संसूचना देगा:
परन्तु किसी अनुज्ञप्ति को प्रतिसंहृत करने के पूर्व, अनुज्ञापन प्राधिकारी ऐसी अनुज्ञप्ति धारण करने वाले व्यक्ति को सुनवाई का युक्तियुक्त अवसर देगा।

Revocation of a conductor’s licence on grounds of disease or disability-
A conductor’s licence may at any time be revoked by any licensing authority if that authority has reasonable grounds to believe that the holder of the licence is suffering from any disease or disability which is likely to render him permanently unfit to hold such a licence and where the authority revoking a conductor’s licence is not the authority which issued the same, it shall intimate the fact of such revocation to the authority which issued that licence:
Provided that before revoking any licence, the licensing authority shall give the person holding such licence a reasonable opportunity of being heard.

हमारा प्रयास मोटर वाहन अधिनियम (MV Act) की धारा 32 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।