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भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 53A | शील या पूर्व लैगिंक अनुभव का साक्ष्य कतिपय मामलों में सुसंगत नहीं | Indian Evidence Act Section- 53A in hindi| Evidence of character or previous sexual experience not relevant in certain cases.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 53A के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 53A, साथ ही क्या बतलाती है, यह भी इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

धारा 53A का विवरण

भारतीय साक्ष्य अधिनियम (Indian Evidence Act) की धारा 53A के अन्तर्गत भारतीय दण्ड संहिता (1860 का 45) की धारा 354, धारा 354क, धारा 354ख, धारा 354ग, धारा 354-घ, धारा 376, 2[ धारा 376क, धारा 376 कख, धारा 376ख, धारा 376ग, धारा 376घ, धारा 376घक, धारा 376घख] या धारा 376ङ के अधीन अपराध के या किसी ऐसे अपराध को कारित करने के लिए प्रयत्न करने के अभियोजन में, जहाँ सम्मति का प्रश्न विवादग्रस्त है, पीड़िता के शील या किसी व्यक्ति के साथ ऐसे व्यक्ति के पूर्व लैंगिक अनुभव का साक्ष्य ऐसी सम्मति या सम्मति की गुणवत्ता के विवाद्यक पर सुसंगत नहीं होगा।

भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 53A के अनुसार

शील या पूर्व लैगिंक अनुभव का साक्ष्य कतिपय मामलों में सुसंगत नहीं-

भारतीय दण्ड संहिता (1860 का 45) की धारा 354, धारा 354क, धारा 354ख, धारा 354ग, धारा 354-घ, धारा 376, 2[ धारा 376क, धारा 376 कख, धारा 376ख, धारा 376ग, धारा 376घ, धारा 376घक, धारा 376घख] या धारा 376ङ के अधीन अपराध के या किसी ऐसे अपराध को कारित करने के लिए प्रयत्न करने के अभियोजन में, जहाँ सम्मति का प्रश्न विवादग्रस्त है, पीड़िता के शील या किसी व्यक्ति के साथ ऐसे व्यक्ति के पूर्व लैंगिक अनुभव का साक्ष्य ऐसी सम्मति या सम्मति की गुणवत्ता के विवाद्यक पर सुसंगत नहीं होगा।

Evidence of character or previous sexual experience not relevant in certain cases-
In a prosecution for an offence under Section 354, Section 354-A, Section 354-B, Section 354-C, Section 354-D, Section 376, 2[Section 376-A, Section 376-AB Section 376-B, Section 376-C, Section 376-D, Section 376-DA, Section 376 DB] or Section 376-E of the Indian Penal Code (45 of 1860) or for attempt to commit any such offence, where the question of consent is in issue, evidence of the character of the victim or of such person’s previous sexual experience with any person shall not be relevant on the issue of such consent or the quality of consent.

हमारा प्रयास भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 53A की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 53 | दाण्डिक मामलों में पूर्वतन अच्छा शील सुसंगत है | Indian Evidence Act Section- 53 in hindi| In criminal cases, previous good character relevant.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 53 के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 53, साथ ही क्या बतलाती है, यह भी इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

धारा 53 का विवरण

भारतीय साक्ष्य अधिनियम (Indian Evidence Act) की धारा 53 के अन्तर्गत जब दाण्डिक कार्यवाहियों में यह तथ्य सुसंगत है कि अभियुक्त व्यक्ति अच्छे शील का है।

भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 53 के अनुसार

दाण्डिक मामलों में पूर्वतन अच्छा शील सुसंगत है-

दाण्डिक कार्यवाहियों में यह तथ्य सुसंगत है कि अभियुक्त व्यक्ति अच्छे शील का है।

In criminal cases, previous good character relevant-
In criminal proceedings, the fact that the person accused is of a good character, is relevant.

हमारा प्रयास भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 53 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 52 | सिविल मामलों में अध्यारोपित आचरण साबित करने के लिए शील विसंगत है | Indian Evidence Act Section- 52 in hindi| In civil cases character to prove conduct imputed, irrelevant.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 52 के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 52, साथ ही क्या बतलाती है, यह भी इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

धारा 52 का विवरण

भारतीय साक्ष्य अधिनियम (Indian Evidence Act) की धारा 52 के अन्तर्गत सिविल मामलों में यह तथ्य कि किसी सम्पृक्त व्यक्ति का शील ऐसा है कि जो उस पर अध्यारोपित किसी आचरण को अधिसम्भाव्य या अनधिसम्भाव्य बना देता है, विसंगत है, वहाँ तक के सिवाय जहाँ तक कि ऐसा शील अन्यथा सुसंगत तथ्यों से प्रकट होता है।

भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 52 के अनुसार

सिविल मामलों में अध्यारोपित आचरण साबित करने के लिए शील विसंगत है-

सिविल मामलों में यह तथ्य कि किसी सम्पृक्त व्यक्ति का शील ऐसा है कि जो उस पर अध्यारोपित किसी आचरण को अधिसम्भाव्य या अनधिसम्भाव्य बना देता है, विसंगत है, वहाँ तक के सिवाय जहाँ तक कि ऐसा शील अन्यथा सुसंगत तथ्यों से प्रकट होता है।

In civil cases character to prove conduct imputed, irrelevant-
In civil cases, the fact that the character of any person concerned is such as to render probable or improbable any conduct imputed to him, is irrelevant, except in so far as such character appears from facts otherwise relevant.

हमारा प्रयास भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 52 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 51 | राय के आधार कब सुसंगत हैं | Indian Evidence Act Section- 51 in hindi| Grounds of opinion, when relevant.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 51 के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 51, साथ ही क्या बतलाती है, यह भी इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

धारा 51 का विवरण

भारतीय साक्ष्य अधिनियम (Indian Evidence Act) की धारा 51 के अन्तर्गत जब कभी किसी जीवित व्यक्ति की राय सुसंगत है, तब वे आधार भी, जिन पर यह आधारित है, सुसंगत हैं।

भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 51 के अनुसार

राय के आधार कब सुसंगत हैं-

जब कभी किसी जीवित व्यक्ति की राय सुसंगत है, तब वे आधार भी, जिन पर यह आधारित है, सुसंगत हैं।

Grounds of opinion, when relevant-
Whether the opinion of any living person is relevant, the grounds on which such opinion is based are also relevant.

दृष्टांत
कोई विशेषज्ञ अपनी राय बनाने के प्रयोजनार्थ किये हुए प्रयोगों का विवरण दे सकता है।

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भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 50 | नातेदारी के बारे में राय कब सुसंगत है | Indian Evidence Act Section- 50 in hindi| Opinion on relationship, when relevant.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 50 के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 50, साथ ही क्या बतलाती है, यह भी इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

धारा 50 का विवरण

भारतीय साक्ष्य अधिनियम (Indian Evidence Act) की धारा 50 के अन्तर्गत जब न्यायालय को एक व्यक्ति की किसी अन्य के साथ नातेदारी के बारे में राय बनानी हो, तब ऐसी नातेदारी के अस्तित्व के बारे में ऐसे किसी व्यक्ति के आचरण द्वारा अभिव्यक्त राय, जिसके पास कुटुम्ब के सदस्य के रूप में या अन्यथा उस विषय के सम्बन्ध में ज्ञान के विशेष साधन हैं, सुसंगत तथ्य हैं।

भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 50 के अनुसार

नातेदारी के बारे में राय कब सुसंगत है-

जबकि न्यायालय को एक व्यक्ति की किसी अन्य के साथ नातेदारी के बारे में राय बनानी हो, तब ऐसी नातेदारी के अस्तित्व के बारे में ऐसे किसी व्यक्ति के आचरण द्वारा अभिव्यक्त राय, जिसके पास कुटुम्ब के सदस्य के रूप में या अन्यथा उस विषय के सम्बन्ध में ज्ञान के विशेष साधन हैं, सुसंगत तथ्य हैं:
परन्तु भारतीय विवाह-विच्छेद अधिनियम, 1869 (1869 का 4) के अधीन कार्यवाहियों में या भारतीय दण्ड संहिता, (1860 का 45) की धारा 494, 495, 497 या 498 के अधीन अभियोजनों में ऐसी राय विवाह साबित करने के लिए पर्याप्त नहीं होगी।

Opinion on relationship, when relevant-
When the Court has to form an opinion as to the relationship of one person to another, the opinion, expressed by conduct, as to the existence of such relationship, of any person who, as a member of the family or otherwise, has special means of knowledge on the subject, is a relevant fact :
Provided that such opinion shall not be sufficient to prove a marriage in proceedings under the Indian Divorce Act, 1869 (4 of 1869), or in prosecutions under Sections 494, 495, 497 or 498 of the Indian Penal Code (45 of 1860).

दृष्टान्त
(क) प्रश्न यह है कि क्या क और ख विवाहित थे।
यह तथ्य कि वे अपने मित्रों द्वारा पति और पत्नी के रूप में प्राय: स्वीकृत किये जाते थे और उनसे वैसा बर्ताव किया जाता था, सुसंगत है।
(ख) प्रश्न यह है कि क्या क, ख का धर्मज पुत्र है। यह तथ्य कि कुटुम्ब के सदस्यों द्वारा क से सदा उस रूप में बर्ताव किया जाता था, सुसंगत है।

हमारा प्रयास भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 50 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 49 | प्रथाओं, सिद्धान्तों आदि के बारे में रायें कब सुसंगत हैं | Indian Evidence Act Section- 49 in hindi| Opinions as to usages, tenets, etc, when relevant.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 49 के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 49, साथ ही क्या बतलाती है, यह भी इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

धारा 49 का विवरण

भारतीय साक्ष्य अधिनियम (Indian Evidence Act) की धारा 49 के अन्तर्गत जब न्यायालय मनुष्यों के किसी निकाय या कुटुम्ब की प्रथाओं या सिद्धान्तों के, किसी धार्मिक या खैराती प्रतिष्ठान के संविधान और शासन के, अथवा विशिष्ट जिले में या विशिष्ट वर्गों के लोगों द्वारा प्रयोग में लाये जाने वाले शब्दों या पदों के अर्थों के, बारे में राय बनानी हो, तब उनके सम्बन्ध में ज्ञान के विशेष साधन रखने वाले व्यक्तियों की रायें सुसंगत तथ्य हैं।

भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 49 के अनुसार

प्रथाओं, सिद्धान्तों आदि के बारे में रायें कब सुसंगत हैं—

जबकि न्यायालय को मनुष्यों के किसी निकाय या कुटुम्ब की प्रथाओं या सिद्धान्तों के, किसी धार्मिक या खैराती प्रतिष्ठान के संविधान और शासन के, अथवा विशिष्ट जिले में या विशिष्ट वर्गों के लोगों द्वारा प्रयोग में लाये जाने वाले शब्दों या पदों के अर्थों के, बारे में राय बनानी हो, तब उनके सम्बन्ध में ज्ञान के विशेष साधन रखने वाले व्यक्तियों की रायें सुसंगत तथ्य हैं।

Opinions as to usages, tenets, etc, when relevant-
When the Court has to form an opinion as to the usages and tenets of any body of men or family. the constitution and government of any religious or charitable foundation, or the meaning of words or terms used in particular districts or by particular classes of people,
the opinions of persons having special means of knowledge thereon, are relevant facts.

हमारा प्रयास भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 49 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।