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कंपनी अधिनियम की धारा 79| Companies Act Section 79

कंपनी अधिनियम Companies Act (Companies Act Section-79 in Hindi) के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। कंपनी अधिनियम की धारा 79 के अनुसार इस धारा के अधीन रजिस्ट्रीकृत किसी भार के निबंधन या शर्तों या विस्तार या प्रवर्तन में किसी उपांतरण, को लागू होंगे, जिसे Companies Act Section-79 के अन्तर्गत परिभाषित किया गया है।

कंपनी अधिनियम की धारा 79 (Companies Act Section-79) का विवरण

कंपनी अधिनियम की धारा 79 Companies Act Section-79 के अनुसार इस धारा के अधीन रजिस्ट्रीकृत किसी भार के निबंधन या शर्तों या विस्तार या प्रवर्तन में किसी उपांतरण, को लागू होंगे।

कंपनी अधिनियम की धारा 79 (Companies Act Section-79 in Hindi)

कतिपय मामलों में धारा 77 का लागू होना

भारों के रजिस्ट्रीकरण से संबंधित धारा 77 के उपबंध, जहां तक हो सके, –

(क) उस धारा के अर्थ के भीतर भार के अधीन रहते हुए किसी संपत्ति का अर्जन करने वाली कंपनी; या

(ख) उस धारा के अधीन रजिस्ट्रीकृत किसी भार के निबंधन या शर्तों या विस्तार या प्रवर्तन में किसी उपांतरण, को लागू होंगे।

Companies Act Section-79 (Company Act Section-79 in English)

Section 77 to apply in certain matters

The provisions of section 77 relating to registration of charges shall, so far as may be, apply to-

(a) a company acquiring any property subject to a charge within the meaning of that section; or
(b) any modification in the terms or conditions or the extent or operation of any charge registered under that section.

हमारा प्रयास कंपनी अधिनियम (Companies Act Section) की धारा 79 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स मे कमेंट करके पूछ सकते है।

कंपनी अधिनियम की धारा 78| Companies Act Section 78

कंपनी अधिनियम Companies Act (Companies Act Section-78 in Hindi) के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। कंपनी अधिनियम की धारा 78 के अनुसार जहां कंपनी, इस अध्याय के अधीन किसी अपराध के संबंध में अपने दायित्व पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, धारा 77 में विनिर्दिष्ट अवधि के भीतर भार को रजिस्टर करने में असफल रहती है, वहां ऐसा व्यक्ति, जिसके पक्ष में भार सृजित किया जाता है, ऐसे समय के भीतर और ऐसे प्ररूप और रीति में, जो विहित की जाए, रजिस्ट्रार को भार के लिए सृजित लिखत के साथ भार के रजिस्ट्रीकरण के लिए आवेदन कर सकेगा, जिसे Companies Act Section-78 के अन्तर्गत परिभाषित किया गया है।

कंपनी अधिनियम की धारा 78 (Companies Act Section-78) का विवरण

कंपनी अधिनियम की धारा 78 Companies Act Section-78 के अनुसार जहां कंपनी, इस अध्याय के अधीन किसी अपराध के संबंध में अपने दायित्व पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, धारा 77 में विनिर्दिष्ट अवधि के भीतर भार को रजिस्टर करने में असफल रहती है, वहां ऐसा व्यक्ति, जिसके पक्ष में भार सृजित किया जाता है, ऐसे समय के भीतर और ऐसे प्ररूप और रीति में, जो विहित की जाए, रजिस्ट्रार को भार के लिए सृजित लिखत के साथ भार के रजिस्ट्रीकरण के लिए आवेदन कर सकेगा।

कंपनी अधिनियम की धारा 78 (Companies Act Section-78 in Hindi)

भार के रजिस्ट्रीकरण के लिए आवेदन

जहां कंपनी, इस अध्याय के अधीन किसी अपराध के संबंध में अपने दायित्व पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, धारा 77 में विनिर्दिष्ट अवधि के भीतर भार को रजिस्टर करने में असफल रहती है, वहां ऐसा व्यक्ति, जिसके पक्ष में भार सृजित किया जाता है, ऐसे समय के भीतर और ऐसे प्ररूप और रीति में, जो विहित की जाए, रजिस्ट्रार को भार के लिए सृजित लिखत के साथ भार के रजिस्ट्रीकरण के लिए आवेदन कर सकेगा और रजिस्ट्रार ऐसे आवेदन पर कंपनी को सूचना देने के पश्चात् चौदह दिन की अवधि के भीतर, ऐसी फीस का, जो विहित की जाए, संदाय करने पर ऐसे रजिस्ट्रीकरण को तब तक अनुज्ञात नहीं कर सकेगा जब तक कि कंपनी भार को स्वयं रजिस्टर नहीं करती है या ऐसा पर्याप्त हेतुक नहीं दर्शाती है कि ऐसा भार क्यों रजिस्टर नहीं किया जाए :

परंतु जहां रजिस्ट्रीकरण उस व्यक्ति के आवेदन पर किया जाता है, जिसके पक्ष में भार सृजित किया गया है, वहां वह व्यक्ति भार के रजिस्ट्रीकरण के प्रयोजन के लिए रजिस्ट्रार को उसके द्वारा संदत्त किसी फीस या अतिरिक्त फीस की रकम कंपनी से वसूल करने का हकदार होगा।

Companies Act Section-78 (Company Act Section-78 in English)

Application for registration of charge

Where a company fails to register the charge within the period specified in section 77, without prejudice to its liability in respect of any offense under this Chapter, the person in whose favor the charge is created may apply to the Registrar for registration of the charge along with the instrument created for the charge, within such time and in such form and manner as may be prescribed and the Registrar may, on such application, within a period of fourteen days after giving notice to the company, unless the company itself registers the charge or shows sufficient cause why such charge should not be registered, allow such registration on payment of such fees, as may be prescribed:
Provided that where registration is effected on application of the person in whose favour the charge is created, that person shall be entitled to recover from the company the amount of any fees or additional fees paid by him to the Registrar for the purpose of registration of charge

हमारा प्रयास कंपनी अधिनियम (Companies Act Section) की धारा 78 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स मे कमेंट करके पूंछ सकते है।

कंपनी अधिनियम की धारा 77| Companies Act Section 77

कंपनी अधिनियम Companies Act (Companies Act Section-77 in Hindi) के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। कंपनी अधिनियम की धारा 77 के अनुसार भारत के भीतर या उसके बाहर अपनी सम्पत्ति या आस्तियों या अपने उपक्रमों में से किसी उपक्रम पर, चाहे मूर्त हों या अन्यथा और जो भारत में या उसके बाहर स्थित हैं, भार सृजित करने वाली प्रत्येक कंपनी का यह कर्तव्य होगा कि वह ऐसा भार सृजित करने वाली लिखतों, यदि कोई हों, कंपनी और भारधारक द्वारा हस्ताक्षरित भार की विशिष्टियां ऐसे प्ररूप में, ऐसी फीसों के संदाय पर और ऐसी रीति में, जो विहित की जाए, उसके सृजन के तीस दिन के भीतर रजिस्ट्रार के पास रजिस्टर करे, जिसे Companies Act Section-77 के अन्तर्गत परिभाषित किया गया है।

कंपनी अधिनियम की धारा 77 (Companies Act Section-77) का विवरण

कंपनी अधिनियम की धारा 77 Companies Act Section-77 के अनुसार भारत के भीतर या उसके बाहर अपनी सम्पत्ति या आस्तियों या अपने उपक्रमों में से किसी उपक्रम पर, चाहे मूर्त हों या अन्यथा और जो भारत में या उसके बाहर स्थित हैं, भार सृजित करने वाली प्रत्येक कंपनी का यह कर्तव्य होगा कि वह ऐसा भार सृजित करने वाली लिखतों, यदि कोई हों, कंपनी और भारधारक द्वारा हस्ताक्षरित भार की विशिष्टियां ऐसे प्ररूप में, ऐसी फीसों के संदाय पर और ऐसी रीति में, जो विहित की जाए, उसके सृजन के तीस दिन के भीतर रजिस्ट्रार के पास रजिस्टर करे।

कंपनी अधिनियम की धारा 77 (Companies Act Section-77 in Hindi)

भार आदि रजिस्टर करने का कर्तव्य

(1) भारत के भीतर या उसके बाहर अपनी सम्पत्ति या आस्तियों या अपने उपक्रमों में से किसी उपक्रम पर, चाहे मूर्त हों या अन्यथा और जो भारत में या उसके बाहर स्थित हैं, भार सृजित करने वाली प्रत्येक कंपनी का यह कर्तव्य होगा कि वह ऐसा भार सृजित करने वाली लिखतों, यदि कोई हों, कंपनी और भारधारक द्वारा हस्ताक्षरित भार की विशिष्टियां ऐसे प्ररूप में, ऐसी फीसों के संदाय पर और ऐसी रीति में, जो विहित की जाए, उसके सृजन के तीस दिन के भीतर रजिस्ट्रार के पास रजिस्टर करे :

परंतु रजिस्ट्रार, कंपनी द्वारा आवेदन किए जाने पर, ऐसी अतिरिक्त फीसों के संदाय परं जो विहित की जाए, ऐसे सृजन के तीन सौ दिन की अवधि के भीतर ऐसा रजिस्ट्रीकरण किए जाने को अनुज्ञात कर सकेगा :

परन्तु यह और कि यदि ऐसे सृजन के तीन सौ दिन की अवधि के भीतर रजिस्ट्रीकरण नहीं किया गया है तो कंपनी, धारा 87 के अनुसार समय के विस्तार की ईप्सा करेगी :

परंतु यह भी कि किसी भार का कोई पश्चात्वर्ती रजिस्ट्रीकरण, भार के वास्तविक रूप से रजिस्ट्रीकृत किए जाने से पूर्व किसी संपत्ति के संबंध में अर्जित किसी अधिकार के प्रतिकूल नहीं होगा।

(2) जहां उपधारा (1) के अधीन भार, रजिस्ट्रार के पास रजिस्ट्रीकृत किया जाता है, वहां वह, ऐसे प्ररूप में और ऐसी रीति में, जो विहित की जाए, और यथास्थिति, ऐसी कम्पनी को और ऐसे व्यक्ति को, जिसके पक्ष में भार सृजित किया जाता है, ऐसे भार के रंजिस्ट्रीकरण का प्रमाणपत्र जारी करेगा।

( 3 ) तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि में अन्तर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी, कंपनी द्वारा सृजित किसी भार पर समापक या किसी अन्य लेनदार द्वारा तब तक विचार नहीं किया जाएगा जब तक उसे उपधारा (1) के अधीन सम्यक् रूप से रजिस्ट्रीकृत नहीं कर दिया जाता है और उपधारा (2) के अधीन रजिस्ट्रार द्वारा ऐसे भार के रजिस्ट्रीकरण का प्रमाणपत्र नहीं दे दिया जाता है।

(4) उपधारा ( 3 ) की कोई बात भार के अनुसार प्रतिभूत धनराशि के प्रतिसंदाय के लिए किसी संविदा या बाध्यता पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं डालेगी।

Companies Act Section-77 (Company Act Section-77 in English)

Duty to register charges, etc

(1) It shall be the duty of every company to create a charge within or outside India, on its property or assets, or any of its undertakings, whether tangible or otherwise, and situated in or outside India, to register the particulars of the charge signed by the company and the charge-holder together with the instruments, if any, creating such charge in such form, on payment of such fees and in such manner as may be prescribed, with the Registrar within thirty days of its creation: Provided that the Registrar may, on an application by the company, allow such registration to be made within a period of three hundred days of such creation on payment of such additional fees as may be prescribed: Provided further that if registration is not made within a period of three hundred days of such creation, the company shall seek an extension of time in accordance with section 87:
Provided also that any subsequent registration of a charge shall not prejudice any right acquired in respect of any property before the charge is actually registered.
(2) Where a charge is registered with the Registrar under sub-section (1), he shall issue a certificate of registration of such charge in such form and in such manner as may be prescribed to the company and, as the case may be, to the person in whose favor the charge is created.
(3) Notwithstanding anything contained in any other law for the time being in force, no charge created by a company shall be taken into account by the liquidator or any other creditor unless it is duly registered under sub-section (1) and a certificate of registration of such charge is given by the Registrar under sub-section (2).
(4) Nothing in sub-section (3) shall prejudice any contract or obligation for the repayment of the money secured by a charge.

हमारा प्रयास कंपनी अधिनियम (Companies Act Section) की धारा 77 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स मे कमेंट करके पूछ सकते है।

कंपनी अधिनियम की धारा 76| Companies Act Section 76

कंपनी अधिनियम Companies Act (Companies Act Section-76 in Hindi) के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। कंपनी अधिनियम की धारा 76 के अनुसार धारा 73 में किसी बात के होते हुए भी, कोई पब्लिक कंपनी, जो ऐसा शुद्ध मूल्य या आवर्त रखती है जैसा विहित किया जाए, धारा 73 की उपधारा (2) में उपबंधित अपेक्षाओं के अनुसरण के अधीन रहते हुए और ऐसे नियमों के अधीन रहते हुए, जो केन्द्रीय सरकार, भारतीय रिजर्व बैंक के परामर्श से विहित करे, उसके सदस्यों से भिन्न व्यक्तियों से निक्षेपों को स्वीकार कर सकेगी, जिसे Companies Act Section-76 के अन्तर्गत परिभाषित किया गया है।

कंपनी अधिनियम की धारा 76 (Companies Act Section-76) का विवरण

कंपनी अधिनियम की धारा 76 Companies Act Section-76 के अनुसार धारा 73 में किसी बात के होते हुए भी, कोई पब्लिक कंपनी, जो ऐसा शुद्ध मूल्य या आवर्त रखती है जैसा विहित किया जाए, धारा 73 की उपधारा (2) में उपबंधित अपेक्षाओं के अनुसरण के अधीन रहते हुए और ऐसे नियमों के अधीन रहते हुए, जो केन्द्रीय सरकार, भारतीय रिजर्व बैंक के परामर्श से विहित करे, उसके सदस्यों से भिन्न व्यक्तियों से निक्षेपों को स्वीकार कर सकेगी।

कंपनी अधिनियम की धारा 76 (Companies Act Section-76 in Hindi)

कतिपय कंपनियों द्वारा जनता से निक्षेपों का स्वीकार किया जाना

(1) धारा 73 में किसी बात के होते हुए भी, कोई पब्लिक कंपनी, जो ऐसा शुद्ध मूल्य या आवर्त रखती है जैसा विहित किया जाए, धारा 73 की उपधारा (2) में उपबंधित अपेक्षाओं के अनुसरण के अधीन रहते हुए और ऐसे नियमों के अधीन रहते हुए, जो केन्द्रीय सरकार, भारतीय रिजर्व बैंक के परामर्श से विहित करे, उसके सदस्यों से भिन्न व्यक्तियों से निक्षेपों को स्वीकार कर सकेगी :

परंतु ऐसी किसी कंपनी से, जनता से निक्षेपों को आमंत्रित करते समय किसी ऐसे मान्यताप्राप्त प्रत्यय रेटिंग अभिकरण से, जो पर्याप्त सुरक्षा सुनिश्चित करता है, रेटिंग (जिसमें देय तारीख को उसके निक्षेपों को संदाय करने के लिए उसके शुद्ध मूल्य, अपाकरण और उसकी योग्यता सम्मिलित है) अभिप्राप्त करने की अपेक्षा की जाएगी और रेटिंग, निक्षेपों की अवधि के दौरान प्रत्येक वर्ष के लिए अभिप्राप्त की जाएगी :

परंतु यह और कि जनता से प्रतिभूत निक्षेपों को स्वीकार करने वाली प्रत्येक कंपनी, ऐसी स्वीकृति के तीस दिन के भीतर ऐसे नियमों के अनुसार जो विहित किए जाएं, निक्षेप धारकों के पक्ष में स्वीकृत निक्षेपों की रकम से अन्यून किसी रकम की उसकी आस्तियों पर प्रभार सृजित करेगी ।

(2) इस अध्याय के उपबंध, इस धारा के अधीन जनता से निक्षेपों को स्वीकार करने के लिए यथा आवश्यक परिवर्तन सहित लागू होंगे।

Companies Act Section-76 (Company Act Section-76 in English)

Acceptance of deposits from public by certain companies

(1) Notwithstanding anything contained in section 73, a public company, having such net worth or turnover as may be prescribed, may accept deposits from persons other than its members subject to compliance with the requirements provided in sub-section (2) of section 73 and subject to such rules as the Central Government may, in consultation with the Reserve Bank of India, prescribe:

Provided that such a company shall be required to obtain the rating (including its net worth, liquidity, and ability to pay its deposits on the due date) from a recognized credit rating agency for informing the public the rating is given to the company at the time of invitation of deposits from the public which ensures
adequate safety and the rating shall be obtained for every year during the tenure of deposits: Provided further that every company accepting secured deposits from the public shall within thirty days of such acceptance, create a charge on its assets of an amount not less than the amount of deposits accepted in favor of the deposit holders in accordance with such rules as may be prescribed.
(2) The provisions of this Chapter shall, mutatis mutandis, apply to the acceptance of deposits from public under this section.

हमारा प्रयास कंपनी अधिनियम (Companies Act Section) की धारा 76 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स मे कमेंट करके पूछ सकते है।

कंपनी अधिनियम की धारा 75| Companies Act Section 75

कंपनी अधिनियम Companies Act (Companies Act Section-75 in Hindi) के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। कंपनी अधिनियम की धारा 75 के अनुसार जहां कोई कंपनी धारा 74 में निर्दिष्ट निक्षेप या उसके भाग या उस पर किसी ब्याज का, उस धारा की उपधारा (1) में विनिर्दिष्ट समय के भीतर या ऐसे अतिरिक्त समय के भीतर, जो उस धारा की उपधारा (2) के अधीन अधिकरण द्वारा अनुज्ञात किया जाए, प्रतिसंदाय करने में असफल रहती है और यह साबित हो जाता है कि निक्षेप, निक्षेपकर्ताओं को कपटवंचित करने के आशय से या किसी कपटपूर्ण प्रयोजन के लिए स्वीकार किए गए थे, जिसे Companies Act Section-75 के अन्तर्गत परिभाषित किया गया है।

कंपनी अधिनियम की धारा 75 (Companies Act Section-75) का विवरण

कंपनी अधिनियम की धारा 75 Companies Act Section-75 के अनुसार जहां कोई कंपनी धारा 74 में निर्दिष्ट निक्षेप या उसके भाग या उस पर किसी ब्याज का, उस धारा की उपधारा (1) में विनिर्दिष्ट समय के भीतर या ऐसे अतिरिक्त समय के भीतर, जो उस धारा की उपधारा (2) के अधीन अधिकरण द्वारा अनुज्ञात किया जाए, प्रतिसंदाय करने में असफल रहती है और यह साबित हो जाता है कि निक्षेप, निक्षेपकर्ताओं को कपटवंचित करने के आशय से या किसी कपटपूर्ण प्रयोजन के लिए स्वीकार किए गए थे।

कंपनी अधिनियम की धारा 75 (Companies Act Section-75 in Hindi)

कपट के लिए नुकसानी

(1) जहां कोई कंपनी धारा 74 में निर्दिष्ट निक्षेप या उसके भाग या उस पर किसी ब्याज का, उस धारा की उपधारा (1) में विनिर्दिष्ट समय के भीतर या ऐसे अतिरिक्त समय के भीतर, जो उस धारा की उपधारा (2) के अधीन अधिकरण द्वारा अनुज्ञात किया जाए, प्रतिसंदाय करने में असफल रहती है और यह साबित हो जाता है कि निक्षेप, निक्षेपकर्ताओं को कपटवंचित करने के आशय से या किसी कपटपूर्ण प्रयोजन के लिए स्वीकार किए गए थे, वहां कंपनी का प्रत्येक अधिकारी, जो ऐसे निक्षेप की स्वीकृति के लिए जिम्मेदार था, उस धारा की उपधारा (3) में अन्तर्विष्ट उपबंधों और धारा 447 के अधीन दायित्व पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, दायित्व की किसी परिसीमा के बिना, ऐसी सभी या किन्हीं हानियों या नुकसानियों के लिए, जो निक्षेपकर्ताओं द्वारा उपगत की गई हों, व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार होगा।

(2) कोई वाद, कार्यवाहियां या अन्य कार्रवाई ऐसे किसी व्यक्ति, व्यक्तियों के किसी ऐसे समूह या व्यक्तियों के किसी ऐसे संगम द्वारा की जा सकेंगी, जिन्होंने निक्षेपों या उनके भाग या उस पर किसी ब्याज का प्रतिसंदाय करने में कंपनी की असफलता के परिणामस्वरूप कोई हानि उपगत की थी।

Companies Act Section-75 (Company Act Section-75 in English)

Damages for fraud

(1) Where a company fails to repay the deposit or part thereof or any interest thereon referred to in section 74 within the time specified in sub-section (1) of that section or such further time as may be allowed by the Tribunal under sub-section (2) of that section, and it is proved that the deposits had been accepted with intent to defraud the depositors or for any fraudulent purpose, every officer of the company who was responsible for the acceptance of such deposit shall, without prejudice to the provisions contained in subsection (3) of that section and liability under section 447, be personally responsible, without any limitation of liability, for all or any of the losses or damages that may have been incurred by the depositors.
(2) Any suit, proceedings or other action may be taken by any person, group of persons or any association of persons who had incurred any loss as a result of the failure of the company to repay the deposits or part thereof or any interest thereon.

हमारा प्रयास कंपनी अधिनियम (Companies Act Section) की धारा 75 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स मे कमेंट करके पूछ सकते है।

कंपनी अधिनियम की धारा 74| Companies Act Section 74

कंपनी अधिनियम Companies Act (Companies Act Section-74 in Hindi) के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। कंपनी अधिनियम की धारा 74 के अनुसार कम्पनी द्वारा स्वीकार किए गए सभी निक्षेपों और तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि में अन्तर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी या ऐसे निबंधनों और शर्तों के अधीन रहते हुए, जिनके अधीन निक्षेप स्वीकार किया गया था या किसी विधि के अधीन विरचित किसी स्कीम के अधीन ऐसे प्रतिसंदाय के लिए किए गए ठहरावों के साथ उस पर संदेय ब्याज सहित ऐसी रकम पर असंदत्त रही राशियों का एक विवरण ऐसे प्रारंभ से या ऐसी तारीख से जिसको ऐसे संदाय शोध्य होते हैं, जिसे Companies Act Section-74 के अन्तर्गत परिभाषित किया गया है।

कंपनी अधिनियम की धारा 74 (Companies Act Section-74) का विवरण

कंपनी अधिनियम की धारा 74 Companies Act Section-74 के अनुसार कम्पनी द्वारा स्वीकार किए गए सभी निक्षेपों और तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि में अन्तर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी या ऐसे निबंधनों और शर्तों के अधीन रहते हुए, जिनके अधीन निक्षेप स्वीकार किया गया था या किसी विधि के अधीन विरचित किसी स्कीम के अधीन ऐसे प्रतिसंदाय के लिए किए गए ठहरावों के साथ उस पर संदेय ब्याज सहित ऐसी रकम पर असंदत्त रही राशियों का एक विवरण ऐसे प्रारंभ से या ऐसी तारीख से जिसको ऐसे संदाय शोध्य होते हैं।

कंपनी अधिनियम की धारा 74 (Companies Act Section-74 in Hindi)

इस अधिनियम के प्रारंभ से पूर्व स्वीकृत निक्षेपों, आदि का प्रतिसंदाय

(1) जहां इस अधिनियम के प्रारंभ से पूर्व किसी कंपनी द्वारा स्वीकार किए गए किसी निक्षेप के संबंध में ऐसे प्रारंभ पर ऐसे निक्षेप की रकम या उसका भाग या उस पर शोध्य कोई ब्याज असंदत्त रहता है या तत्पश्चात् किसी समय शोध्य हो जाता है, वहां कंपनी-

(क) कम्पनी द्वारा स्वीकार किए गए सभी निक्षेपों और तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि में अन्तर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी या ऐसे निबंधनों और शर्तों के अधीन रहते हुए, जिनके अधीन निक्षेप स्वीकार किया गया था या किसी विधि के अधीन विरचित किसी स्कीम के अधीन ऐसे प्रतिसंदाय के लिए किए गए ठहरावों के साथ उस पर संदेय ब्याज सहित ऐसी रकम पर असंदत्त रही राशियों का एक विवरण ऐसे प्रारंभ से या ऐसी तारीख से जिसको ऐसे संदाय शोध्य होते हैं, तीन मास की अवधि के भीतर रजिस्ट्रार के पास फाइल करेगी; और

(ख) ऐसे प्रारंभ से एक वर्ष के भीतर या उस तारीख से, जिसको ऐसे संदाय देय हैं, इनमें जो भी पहले हो, उनका प्रतिसंदाय करेगी ।

(2) अधिकरण, कंपनी द्वारा किए गए आवेदन पर कंपनी की वित्तीय स्थिति, निक्षेप की रकम या उसका भाग, और उस पर संदेय ब्याज और ऐसे अन्य विषयों पर विचार करने

के पश्चात्, कंपनी को निक्षेप का प्रतिसंदाय करने के लिए ऐसा अतिरिक्त समय अनुज्ञात करेगा, जो युक्तियुक्त समझा जाए ।

(3) यदि कंपनी उपधारा ( 1 ) में विनिर्दिष्ट समय के भीतर या ऐसे अतिरिक्त समय के भीतर, जो उपधारा (2) के अधीन अधिकरण द्वारा अनुज्ञात किया जाए, निक्षेप या उसके किसी भाग या उस पर किसी ब्याज का प्रतिसंदाय करने में असफल रहती है, तो कंपनी, निक्षेप की रकम या उसके भाग और शोध्य ब्याज का संदाय करने के अतिरिक्त ऐसे जुर्माने से, जो एक करोड़ रुपए से कम का न होगा; किन्तु जो दस करोड़ रुपए तक का हो सकेगा, दण्डनीय होगी और कंपनी का ऐसा प्रत्येक अधिकारी, जो व्यतिक्रम करता है, ऐसे कारावास से, जो सात वर्ष तक का हो सकेगा या जुर्माने से, जो पच्चीस लाख रुपए से कम का नहीं होगा, किन्तु जो दो करोड़ रुपए तक का हो सकेगा, या दोनों से, दण्डनीय होगा।

Companies Act Section-74 (Company Act Section-74 in English)

Repayment of deposits, etc., accepted before commencement of this Act

(1) Where in respect of any deposit accepted by a company before the commencement of this Act, the amount of such deposit or part thereof or any interest due thereon remains unpaid on such commencement or becomes due at any time thereafter, the company shall-
(a) file, within a period of three months from such commencement or from the date on which such payments, are due, with the Registrar a statement of all the deposits accepted by the company and sums remaining unpaid on such amount with the interest payable thereon along with the arrangements made for such repayment, notwithstanding anything contained in any other law for the time being in force or under the terms and conditions subject to which the deposit was accepted or any scheme framed under any law; and
(b) repay within one year from such commencement or from the date on which such payments are due, whichever is earlier.
(2) The Tribunal may on an application made by the company, after considering the financial condition of the company, the amount of deposit or part thereof, and the interest payable thereon and such other matters, allow further time as considered reasonable to the company to repay the deposit.
(3) If a company fails to repay the deposit or part thereof or any interest thereon within the time specified in sub-section (1) or such further time as may be allowed by the Tribunal under sub-section (2), the company shall, in addition to the payment of the amount of deposit or part thereof and the interest due, be punishable with a fine which shall not be less than one crore rupees but which may extend to ten crore rupees and every officer of the company who is in default shall be punishable with imprisonment which may extend to seven years or with a fine which shall not be less than twenty-five lakh rupees but which may extend to two crore rupees, or with both.

हमारा प्रयास कंपनी अधिनियम (Companies Act Section) की धारा 74 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स मे कमेंट करके पूछ सकते है।