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सीआरपीसी की धारा 295 | लोक सेवकों के आचरण के सबूत के बारे में शपथ-पत्र | CrPC Section- 295 in hindi| Affidavit in proof of conduct of public servants.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 295 के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 295 कब लागू होती है, यह भी इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

धारा 295 का विवरण

दण्ड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 295 के अन्तर्गत जब किसी न्यायालय में इस संहिता के अधीन किसी जांच, विचारण या अन्य कार्यवाही के दौरान कोई आवेदन किया जाता है और उसमें किसी लोक सेवक के बारे में अभिकथन किए जाते हैं तब आवेदक आवेदन में अभिकथित तथ्यों का शपथपत्र द्वारा साक्ष्य दे सकता है और यदि न्यायालय ठीक समझे तो वह आदेश दे सकता है कि ऐसे तथ्यों से संबंधित साक्ष्य इस प्रकार दिया जाए।

सीआरपीसी की धारा 295 के अनुसार

लोक सेवकों के आचरण के सबूत के बारे में शपथ-पत्र-

जब किसी न्यायालय में इस संहिता के अधीन किसी जांच, विचारण या अन्य कार्यवाही के दौरान कोई आवेदन किया जाता है और उसमें किसी लोक सेवक के बारे में अभिकथन किए जाते हैं तब आवेदक आवेदन में अभिकथित तथ्यों का शपथपत्र द्वारा साक्ष्य दे सकता है और यदि न्यायालय ठीक समझे तो वह आदेश दे सकता है कि ऐसे तथ्यों से संबंधित साक्ष्य इस प्रकार दिया जाए।

Affidavit in proof of conduct of public servants
When any application is made to any Court in the course of any inquiry, trial or other proceeding under this Code, and allegations are made therein respecting any public servant, the applicant may give evidence of the facts alleged in the application by affidavit, and the Court may, if it thinks fit, order that evidence relating to such facts be so given.

हमारा प्रयास सीआरपीसी की धारा 295 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

सीआरपीसी की धारा 294 | कुछ दस्तावेजों का औपचारिक सबूत आवश्यक न होना | CrPC Section- 294 in hindi| No formal proof of certain documents.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 294 के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 294 कब लागू होती है, यह भी इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

धारा 294 का विवरण

दण्ड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 294 के अन्तर्गत जहां अभियोजन या अभियुक्त द्वारा किसी न्यायालय के समक्ष कोई दस्तावेज फाइल की गई है वहां ऐसी प्रत्येक दस्तावेज की विशिष्टियाँ एक सूची में सम्मिलित की जाएंगी और यथास्थिति, अभियोजन या अभियुक्त अथवा अभियोजन या अभियुक्त के प्लीडर से, यदि कोई हों, ऐसी प्रत्येक दस्तावेज का असली होना स्वीकार या इंकार करने की अपेक्षा की जाएगी। दस्तावेजों की सूची ऐसे प्ररूप में होगी जो राज्य सरकार द्वारा विहित किया जाए। जहाँ किसी दस्तावेज का असली होना विवादग्रस्त नहीं है वहाँ ऐसी दस्तावेज उस व्यक्ति के जिसके द्वारा उसका हस्ताक्षरित होना तात्पर्यित है, हस्ताक्षर के सबूत के बिना इस संहिता के अधीन किसी जाँच, विचारण या अन्य कार्यवाही में साक्ष्य में पढ़ी जा सकेगी, परन्तु न्यायालय, स्वविवेकानुसार, यह अपेक्षा कर सकता है कि ऐसे हस्ताक्षर साबित किए जाएं।

सीआरपीसी की धारा 294 के अनुसार

कुछ दस्तावेजों का औपचारिक सबूत आवश्यक न होना-

(1) जहां अभियोजन या अभियुक्त द्वारा किसी न्यायालय के समक्ष कोई दस्तावेज फाइल की गई है वहां ऐसी प्रत्येक दस्तावेज की विशिष्टियाँ एक सूची में सम्मिलित की जाएंगी और यथास्थिति, अभियोजन या अभियुक्त अथवा अभियोजन या अभियुक्त के प्लीडर से, यदि कोई हों, ऐसी प्रत्येक दस्तावेज का असली होना स्वीकार या इंकार करने की अपेक्षा की जाएगी।
(2) दस्तावेजों की सूची ऐसे प्ररूप में होगी जो राज्य सरकार द्वारा विहित किया जाए।
(3) जहाँ किसी दस्तावेज का असली होना विवादग्रस्त नहीं है वहाँ ऐसी दस्तावेज उस व्यक्ति के जिसके द्वारा उसका हस्ताक्षरित होना तात्पर्यित है, हस्ताक्षर के सबूत के बिना इस संहिता के अधीन किसी जाँच, विचारण या अन्य कार्यवाही में साक्ष्य में पढ़ी जा सकेगी :
परन्तु न्यायालय, स्वविवेकानुसार, यह अपेक्षा कर सकता है कि ऐसे हस्ताक्षर साबित किए जाएं।

No formal proof of certain documents-
(1) Where any document is filed before any Court by the prosecution or the accused, the particulars of every such document shall be included in a list and the prosecution or the accused, as the case may be, or the pleader for the prosecution or the accused, if any, shall be called upon to admit or deny the genuineness of each such document.
(2) The list of documents shall be in such form as may be prescribed by the State Government.
(3) Where the genuineness of any document is not disputed, such document may be read in evidence in any inquiry, trial or other proceeding under this Code without proof of the signature of the person to whom it purports to be signed:
Provided that the Court may, in its discretion, require such signature to be proved.

हमारा प्रयास सीआरपीसी की धारा 294 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

सीआरपीसी की धारा 291 | चिकित्सीय साक्षी का अभिसाक्ष्य | CrPC Section- 291 in hindi| Deposition of medical witness.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 291 के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 291 कब लागू होती है, यह भी इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

धारा 291 का विवरण

दण्ड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 291 के अन्तर्गत अभियुक्त की उपस्थिति में मजिस्ट्रेट द्वारा लिया गया और अनुप्रमाणित किया गया या इस अध्याय के अधीन कमीशन पर लिया गया, सिविल सर्जन या अन्य चिकित्सीय साक्षी का अभिसाक्ष्य इस संहिता के अधीन किसी जांच, विचारण या अन्य कार्यवाही में साक्ष्य में दिया जा सकेगा, यद्यपि अभिसाक्षी को साक्षी के तौर पर नहीं बुलाया गया है। यदि न्यायालय ठीक समझता है तो वह ऐसे किसी अभिसाक्षी को समन कर सकता है और उसके अभिसाक्ष्य की विषयवस्तु के बारे में उसकी परीक्षा कर सकता है और अभियोजन या अभियुक्त के आवेदन पर वैसा करेगा।

सीआरपीसी की धारा 291 के अनुसार

चिकित्सीय साक्षी का अभिसाक्ष्य–

(1) अभियुक्त की उपस्थिति में मजिस्ट्रेट द्वारा लिया गया और अनुप्रमाणित किया गया या इस अध्याय के अधीन कमीशन पर लिया गया, सिविल सर्जन या अन्य चिकित्सीय साक्षी का अभिसाक्ष्य इस संहिता के अधीन किसी जांच, विचारण या अन्य कार्यवाही में साक्ष्य में दिया जा सकेगा, यद्यपि अभिसाक्षी को साक्षी के तौर पर नहीं बुलाया गया है।
(2) यदि न्यायालय ठीक समझता है तो वह ऐसे किसी अभिसाक्षी को समन कर सकता है और उसके अभिसाक्ष्य की विषयवस्तु के बारे में उसकी परीक्षा कर सकता है और अभियोजन या अभियुक्त के आवेदन पर वैसा करेगा।

Deposition of medical witness-
(1) The deposition of a civil surgeon or other medical witness, taken and attested by a Magistrate in the presence of the accused, or taken on commission under this Chapter, may be given in evidence in any inquiry, trial or other proceeding under this Code, although the deponent is not called as a witness.
(2) The Court may, if it thinks fit, and shall, on the application of the prosecution or the accused, summon and examine any such deponent as to the subject-matter of his deposition.

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सीआरपीसी की धारा 290 | विदेशी कमीशनों का निष्पादन | CrPC Section- 290 in hindi| Execution of foreign commissions.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 290 के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 290 कब लागू होती है, यह भी इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

धारा 290 का विवरण

दण्ड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 290 के अन्तर्गत धारा 286 के उपबन्ध और धारा 287 और धारा 288 के उतने भाग के उपबन्ध, जितना कमीशन का निष्पादन किए जाने और उसके लौटाए जाने से संबंधित है, इसमें इसके पश्चात् वर्णित किन्हीं न्यायालयों, न्यायाधीशों या मजिस्ट्रेट द्वारा जारी किए गए कमीशनों के बारे में वैसे ही लागू होंगे जैसे वे धारा 284 के अधीन जारी किए गए कमीशनों को लागू होते हैं।

सीआरपीसी की धारा 290 के अनुसार

विदेशी कमीशनों का निष्पादन–

(1) धारा 286 के उपबन्ध और धारा 287 और धारा 288 के उतने भाग के उपबन्ध, जितना कमीशन का निष्पादन किए जाने और उसके लौटाए जाने से संबंधित है, इसमें इसके पश्चात् वर्णित किन्हीं न्यायालयों, न्यायाधीशों या मजिस्ट्रेट द्वारा जारी किए गए कमीशनों के बारे में वैसे ही लागू होंगे जैसे वे धारा 284 के अधीन जारी किए गए कमीशनों को लागू होते हैं।
(2) उपधारा (1) में निर्दिष्ट न्यायालय, न्यायाधीश और मजिस्ट्रेट निम्नलिखित हैं-
(क) भारत के ऐसे क्षेत्र के अन्दर, जिस पर इस संहिता का विस्तार नहीं है, अधिकारिता का प्रयोग करने वाला ऐसा न्यायालय, न्यायाधीश या मजिस्ट्रेट जिसे केन्द्रीय सरकार, अधिसूचना द्वारा, इस निमित्त विनिर्दिष्ट करे;
(ख) भारत से बाहर के किसी ऐसे देश या स्थान में, जिसे केन्द्रीय सरकार, अधिसूचना द्वारा, इस निमित्त विनिर्दिष्ट करे, अधिकारिता का प्रयोग करने वाला और उस देश या स्थान में प्रवृत्त विधि के अधीन आपराधिक मामलों के सम्बन्ध में साक्षियों की परीक्षा के लिए कमीशन जारी करने का प्राधिकार रखने वाला न्यायालय, न्यायाधीश या मजिस्ट्रेट।

Execution of foreign commissions-
(1) The provisions of Section 286 and so much of Section 287 and Section 288 as relate to the execution of a commission and its return shall apply in respect of commissions issued by any of the Courts, Judges or Magistrates hereinafter mentioned as they apply to commissions issued under Section 284.
(2) The Courts, Judges and Magistrates referred to in sub-section (1) are-
(a) any such Court, Judge or Magistrate exercising jurisdiction within an area in India to which this Code does not extend, as the Central Government may by notification, specify in this behalf;
(b) any Court, Judge or Magistrate exercising jurisdiction in any such country or place outside India, as the Central Government may, by notification, specify in this behalf, and having authority, under the law in force in that country or place, to issue commissions for the examination of witnesses in relation to criminal matters.

हमारा प्रयास सीआरपीसी की धारा 290 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

सीआरपीसी की धारा 289 | कार्यवाही का स्थगन | CrPC Section- 289 in hindi| Adjournment of proceeding.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 289 के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 289 कब लागू होती है, यह भी इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

धारा 289 का विवरण

दण्ड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 289 के अन्तर्गत प्रत्येक मामले में, जिसमें धारा 284 के अधीन कमीशन जारी किया गया है, जाँच, विचारण या अन्य कार्यवाही ऐसे विनिर्दिष्ट समय तक के लिए, जो कमीशन के निष्पादन और लौटाए जाने के लिए उचित रूप से पर्याप्त है, स्थगित की जा सकती है।

सीआरपीसी की धारा 289 के अनुसार

कार्यवाही का स्थगन-

प्रत्येक मामले में, जिसमें धारा 284 के अधीन कमीशन जारी किया गया है, जाँच, विचारण या अन्य कार्यवाही ऐसे विनिर्दिष्ट समय तक के लिए, जो कमीशन के निष्पादन और लौटाए जाने के लिए उचित रूप से पर्याप्त है, स्थगित की जा सकती है।

Adjournment of proceeding-
In every case in which a commission is issued under Section 284, the inquiry, trial or other proceeding may be adjourned for a specified time reasonably sufficient for the execution and return of the commission.

हमारा प्रयास सीआरपीसी की धारा 289 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

सीआरपीसी की धारा 288 | कमीशन का लौटाया जाना | CrPC Section- 288 in hindi| Return of commission.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 288 के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 288 कब लागू होती है, यह भी इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

धारा 288 का विवरण

दण्ड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 288 के अन्तर्गत धारा 284 के अधीन जारी किए गए किसी कमीशन के सम्यक् रूप से निष्पादित किए जाने के पश्चात् वह उसके अधीन परीक्षित साक्षियों के अभिसाक्ष्य सहित उस न्यायालय या मजिस्ट्रेट को, जिसने कमीशन जारी किया था, लौटाया जाएगा; और वह कमीशन, उससे संबद्ध विवरणी और अभिसाक्ष्य सब उचित समयों पर पक्षकारों के निरीक्षण के लिए प्राप्य होंगे, और सब न्यायसंगत अपवादों के अधीन रहते हुए, किसी पक्षकार द्वारा मामले में साक्ष्य पढ़े जा सकेंगे और अभिलेख का भाग होंगे।

सीआरपीसी की धारा 288 के अनुसार

कमीशन का लौटाया जाना—

(1) धारा 284 के अधीन जारी किए गए किसी कमीशन के सम्यक् रूप से निष्पादित किए जाने के पश्चात् वह उसके अधीन परीक्षित साक्षियों के अभिसाक्ष्य सहित उस न्यायालय या मजिस्ट्रेट को, जिसने कमीशन जारी किया था, लौटाया जाएगा; और वह कमीशन, उससे संबद्ध विवरणी और अभिसाक्ष्य सब उचित समयों पर पक्षकारों के निरीक्षण के लिए प्राप्य होंगे, और सब न्यायसंगत अपवादों के अधीन रहते हुए, किसी पक्षकार द्वारा मामले में साक्ष्य पढ़े जा सकेंगे और अभिलेख का भाग होंगे।
(2) यदि ऐसे लिया गया कोई अभिसाक्ष्य, भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 1872 (1872 का 1) की धारा 33 द्वारा विहित शर्तों को पूरा करता है, तो वह किसी अन्य न्यायालय के समक्ष भी मामले के किसी पश्चात्वर्ती प्रक्रम में साक्ष्य में लिया जा सकेगा।

Return of commission-
(1) After any commission issued under Section 284 has been duly executed, it shall be returned, together with the deposition of the witness examined thereunder, to the Court or Magistrate issuing the commission; and the commission, the return thereto and the deposition shall be open at all reasonable times to inspection of the parties, and may, subject to all just exceptions, be read in evidence in the case by either party, and shall form part of the record.
(2) Any deposition so taken, if it satisfies the condition prescribed by Section 33 of the Indian Evidence Act, 1872 (1 of 1872), may also be received in evidence at any subsequent stage of the case before another Court.

हमारा प्रयास सीआरपीसी की धारा 288 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।