Home Blog Page 193

सीआरपीसी की धारा 287 | पक्षकार साक्षियों की परीक्षा कर सकेंगे | CrPC Section- 287 in hindi| Parties may examine witnesses.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 287 के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 287 कब लागू होती है, यह भी इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

धारा 287 का विवरण

दण्ड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 287 के अन्तर्गत इस संहिता के अधीन किसी ऐसी कार्यवाही के पक्षकार, जिसमें कमीशन जारी किया गया है, अपने-अपने ऐसे लिखित परिप्रश्न भेज सकते हैं जिन्हें कमीशन का निदेश देने वाला न्यायालय या मजिस्ट्रेट विवाद्यक से सुसंगत समझता है और उस मजिस्ट्रेट, न्यायालय या अधिकारी के लिए, जिसे कमीशन निर्दिष्ट किया जाता है या जिसे उसके निष्पादन का कर्तव्य प्रत्यायोजित किया जाता है, यह विधिपूर्ण होगा कि वह ऐसे परिप्रश्नों के आधार पर साक्षी की परीक्षा करे यदि कोई ऐसा पक्षकार ऐसे मजिस्ट्रेट, न्यायालय या अधिकारी के समक्ष प्लीडर द्वारा, या यदि अभिरक्षा में नहीं है तो स्वयं हाजिर हो सकता है और उक्त साक्षी की (यथास्थिति) परीक्षा, प्रतिपरीक्षा और पुनः परीक्षा कर सकता है, अर्थात् स्वयं कोई पक्षकार हाजिर होकर साक्षियों की परीक्षा कर सकेगा।

सीआरपीसी की धारा 287 के अनुसार

पक्षकार साक्षियों की परीक्षा कर सकेंगे-

(1) इस संहिता के अधीन किसी ऐसी कार्यवाही के पक्षकार, जिसमें कमीशन जारी किया गया है, अपने-अपने ऐसे लिखित परिप्रश्न भेज सकते हैं जिन्हें कमीशन का निदेश देने वाला न्यायालय या मजिस्ट्रेट विवाद्यक से सुसंगत समझता है और उस मजिस्ट्रेट, न्यायालय या अधिकारी के लिए, जिसे कमीशन निर्दिष्ट किया जाता है या जिसे उसके निष्पादन का कर्तव्य प्रत्यायोजित किया जाता है, यह विधिपूर्ण होगा कि वह ऐसे परिप्रश्नों के आधार पर साक्षी की परीक्षा करे।
(2) कोई ऐसा पक्षकार ऐसे मजिस्ट्रेट, न्यायालय या अधिकारी के समक्ष प्लीडर द्वारा, या यदि अभिरक्षा में नहीं है तो स्वयं हाजिर हो सकता है और उक्त साक्षी की (यथास्थिति) परीक्षा, प्रतिपरीक्षा और पुनः परीक्षा कर सकता है।

Parties may examine witnesses-
(1) The parties to any proceeding under this Code in which a commission is issued may respectively forward any interrogatories in writing which the Court or Magistrate directing the commission may think relevant to the issue, and it shall be lawful for the Magistrate, Court or officer to whom the commission is directed, or to whom the duty of executing it is delegated, to examine the witness upon such interrogatories.
(2) Any such party may appear before such Magistrate, Court or officer by pleader, or if not in custody, in person, and may examine, cross-examine and re examine (as the case may be) the said witness.

हमारा प्रयास सीआरपीसी की धारा 287 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

सीआरपीसी की धारा 286 | कमीशनों का निष्पादन | CrPC Section- 286 in hindi| Execution of commissions.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 286 के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 286 कब लागू होती है, यह भी इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

धारा 286 का विवरण

दण्ड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 286 के अन्तर्गत कमीशन प्राप्त होने पर मुख्य महानगर मजिस्ट्रेट या मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, अथवा ऐसा महानगर मजिस्ट्रेट या न्यायिक मजिस्ट्रेट जिसे वह इस निमित्त नियुक्त करे, साक्षी को अपने समक्ष आने के लिए समन करेगा अथवा उस स्थान को जाएगा जहां साक्षी है और उसका साक्ष्य उस रीति से लिखेगा और इस प्रयोजन के लिए उन्हीं शक्तियों का प्रयोग कर सकेगा जो इस संहिता के अधीन वारण्ट-मामलों के विचारण के लिए हैं।

सीआरपीसी की धारा 286 के अनुसार

कमीशनों का निष्पादन-

कमीशन प्राप्त होने पर मुख्य महानगर मजिस्ट्रेट या मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, अथवा ऐसा महानगर मजिस्ट्रेट या न्यायिक मजिस्ट्रेट जिसे वह इस निमित्त नियुक्त करे, साक्षी को अपने समक्ष आने के लिए समन करेगा अथवा उस स्थान को जाएगा जहां साक्षी है और उसका साक्ष्य उस रीति से लिखेगा और इस प्रयोजन के लिए उन्हीं शक्तियों का प्रयोग कर सकेगा जो इस संहिता के अधीन वारण्ट-मामलों के विचारण के लिए हैं।

Execution of commissions-
Upon receipt of the commission, the Chief Metropolitan Magistrate or Chief Judicial Magistrate, or such Metropolitan or Judicial Magistrate as he may appoint in this behalf, shall summon the witness before him or proceed to the place where the witness is, and shall take down his evidence in the same manner, and may for this purpose exercise the same powers, as in trials of warrant-cases under this Code.

हमारा प्रयास सीआरपीसी की धारा 286 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

सीआरपीसी की धारा 285 | कमीशन जिसको जारी किया जाएगा | CrPC Section- 285 in hindi| Commission to whom to be issued.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 285 के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 285 कब लागू होती है, यह भी इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

धारा 285 का विवरण

दण्ड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 285 के अन्तर्गत यदि साक्षी उन राज्यक्षेत्रों के अन्दर है, जिन पर इस संहिता का विस्तार है, तो कमीशन, यथास्थिति, उस महानगर मजिस्ट्रेट या मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट को निर्दिष्ट होगा जिसकी स्थानीय अधिकारिता के अन्दर ऐसा साक्षी मिल सकता है। इसी तरह से यदि साक्षी भारत में है किन्तु ऐसे राज्य या ऐसे किसी क्षेत्र में है जिस पर इस संहिता का विस्तार नहीं है तो कमीशन ऐसे न्यायालय या अधिकारी को निर्दिष्ट होगा जिसे केन्द्रीय सरकार अधिसूचना द्वारा इस निमित्त विनिर्दिष्ट करे और यदि साक्षी भारत से बाहर के देश या स्थान में है और ऐसे देश या स्थान की सरकार से केन्द्रीय सरकार ने आपराधिक मामलों के सम्बन्ध में साक्षियों का साक्ष्य लेने के लिए ठहराव कर रखे हैं तो कमीशन ऐसे प्ररूप में जारी किया जाएगा, ऐसे न्यायालय या अधिकारी को निर्दिष्ट होगा और पारेषित किए जाने के लिए ऐसे प्राधिकारी को भेजा जाएगा जो केन्द्रीय सरकार, अधिसूचना द्वारा, इस निमित्त विहित करे।

सीआरपीसी की धारा 285 के अनुसार

कमीशन जिसको जारी किया जाएगा-

(1) यदि साक्षी उन राज्यक्षेत्रों के अन्दर है, जिन पर इस संहिता का विस्तार है, तो कमीशन, यथास्थिति, उस महानगर मजिस्ट्रेट या मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट को निर्दिष्ट होगा जिसकी स्थानीय अधिकारिता के अन्दर ऐसा साक्षी मिल सकता है।
(2) यदि साक्षी भारत में है किन्तु ऐसे राज्य या ऐसे किसी क्षेत्र में है जिस पर इस संहिता का विस्तार नहीं है तो कमीशन ऐसे न्यायालय या अधिकारी को निर्दिष्ट होगा जिसे केन्द्रीय सरकार अधिसूचना द्वारा इस निमित्त विनिर्दिष्ट करे।
(3) यदि साक्षी भारत से बाहर के देश या स्थान में है और ऐसे देश या स्थान की सरकार से केन्द्रीय सरकार ने आपराधिक मामलों के सम्बन्ध में साक्षियों का साक्ष्य लेने के लिए ठहराव कर रखे हैं तो कमीशन ऐसे प्ररूप में जारी किया जाएगा, ऐसे न्यायालय या अधिकारी को निर्दिष्ट होगा और पारेषित किए जाने के लिए ऐसे प्राधिकारी को भेजा जाएगा जो केन्द्रीय सरकार, अधिसूचना द्वारा, इस निमित्त विहित करे।

Commission to whom to be issued-
(1) If the witness is within the territories to which this Code extends, the commission shall be directed to the Chief Metropolitan Magistrate or Chief Judicial Magistrate, as the case may be, within whose local jurisdiction the witness is to be found.
(2) If the witness is in India, but in a State or an area to which this Code does not extend, the commission shall be directed to such Court or officer as the Central Government may, by notification, specify in this behalf.
(3) If the witness is in a country or place outside India and arrangements have been made by the Central Government with the Government of such country or place for taking the evidence of witnesses in relation to criminal matters, the commission shall be issued in such form, directed to such Court or officer, and sent to such authority for transmission, as the Central Government may, by notification, prescribe in this behalf.

हमारा प्रयास सीआरपीसी की धारा 285 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

सीआरपीसी की धारा 284 | कब साक्षियों को हाजिर होने से अभिमुक्ति दी जाए और कमीशन जारी किया जाए | CrPC Section- 284 in hindi| When attendance of witness may be dispensed with and commission issued.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 284 के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 284 कब लागू होती है, यह भी इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

धारा 284 का विवरण

दण्ड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 284 के अन्तर्गत जब कभी इस संहिता के अधीन किसी जांच, विचारण या अन्य कार्यवाही के अनुक्रम में, न्यायालय या मजिस्ट्रेट को प्रतीत होता है कि न्याय के उद्देश्यों के लिए यह आवश्यक है कि किसी साक्षी की परीक्षा की जाए और ऐसे साक्षी की हाजिरी इतने विलम्ब, व्यय या असुविधा के बिना, जितनी मामले की परिस्थितियों में अनुचित होगी, नहीं कराई जा सकती है तब न्यायालय या मजिस्ट्रेट ऐसी हाजिरी से अभिमुक्ति दे सकता है और साक्षी की परीक्षा की जाने के लिए इस अध्याय के उपबन्धों के अनुसार कमीशन जारी कर सकता है, परन्तु जहां न्याय के उद्देश्यों के लिए भारत के राष्ट्रपति या उपराष्ट्रपति या किसी राज्य के राज्यपाल या किसी संघ राज्यक्षेत्र के प्रशासक की साक्षी के रूप में परीक्षा करना आवश्यक है वहां ऐसे साक्षी की परीक्षा करने के लिए कमीशन जारी किया जाएगा। न्यायालय अभियोजन के किसी साक्षी की परीक्षा के लिए कमीशन जारी करते समय यह निदेश दे सकता है कि प्लीडर की फीस सहित ऐसी रकम जो न्यायालय अभियुक्त के व्ययों की पूर्ति के लिए उचित समझे, अभियोजन द्वारा दी जाए।

सीआरपीसी की धारा 284 के अनुसार

कब साक्षियों को हाजिर होने से अभिमुक्ति दी जाए और कमीशन जारी किया जाए-

(1) जब कभी इस संहिता के अधीन किसी जांच, विचारण या अन्य कार्यवाही के अनुक्रम में, न्यायालय या मजिस्ट्रेट को प्रतीत होता है कि न्याय के उद्देश्यों के लिए यह आवश्यक है कि किसी साक्षी की परीक्षा की जाए और ऐसे साक्षी की हाजिरी इतने विलम्ब, व्यय या असुविधा के बिना, जितनी मामले की परिस्थितियों में अनुचित होगी, नहीं कराई जा सकती है तब न्यायालय या मजिस्ट्रेट ऐसी हाजिरी से अभिमुक्ति दे सकता है और साक्षी की परीक्षा की जाने के लिए इस अध्याय के उपबन्धों के अनुसार कमीशन जारी कर सकता है :
परन्तु जहां न्याय के उद्देश्यों के लिए भारत के राष्ट्रपति या उपराष्ट्रपति या किसी राज्य के राज्यपाल या किसी संघ राज्यक्षेत्र के प्रशासक की साक्षी के रूप में परीक्षा करना आवश्यक है वहां ऐसे साक्षी की परीक्षा करने के लिए कमीशन जारी किया जाएगा।
(2) न्यायालय अभियोजन के किसी साक्षी की परीक्षा के लिए कमीशन जारी करते समय यह निदेश दे सकता है कि प्लीडर की फीस सहित ऐसी रकम जो न्यायालय अभियुक्त के व्ययों की पूर्ति के लिए उचित समझे, अभियोजन द्वारा दी जाए।

When attendance of witness may be dispensed with and commission issued-
(1) Whenever, in the course of any inquiry, trial or other proceeding under this Code, it appears to a Court or Magistrate that the examination of a witness is necessary for the ends of justice, and that the attendance of such witness cannot be procured without an amount of delay, expense or inconvenience which, under the circumstances of the case, would be unreasonable, the Court or Magistrate may dispense with such attendance and may issue a commission for the examination of the witness in accordance with the provisions of this Chapter :
Provided that where the examination of the President or the Vice-President of India or the Governor of a State or the Administrator of a Union territory as a witness is necessary for the ends of justice, a commission shall be issued for the examination of such a witness.
(2) The Court may, when issuing a commission for the examination of a witness for the prosecution, direct that such amount as the Court considers reasonable to meet the expenses of the accused, including the pleader’s fees, be paid by the prosecution.

हमारा प्रयास सीआरपीसी की धारा 284 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

सीआरपीसी की धारा 283 | उच्च न्यायालय में अभिलेख | CrPC Section- 283 in hindi| Record in High Court.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 283 के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 283 कब लागू होती है, यह भी इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

धारा 283 का विवरण

दण्ड प्रक्रिया संहिता (CrPC) में धारा 283 के अन्तर्गत प्रत्येक उच्च न्यायालय, साधारण नियम द्वारा ऐसी रीति विहित कर सकता है जिससे उन मामलों में साक्षियों के साक्ष्य को और अभियुक्त की परीक्षा को लिखा जाएगा जो उसके समक्ष आते हैं, और ऐसे साक्ष्य और परीक्षा को ऐसे नियम के अनुसार लिखा जाएगा।

सीआरपीसी की धारा 283 के अनुसार

उच्च न्यायालय में अभिलेख-

प्रत्येक उच्च न्यायालय, साधारण नियम द्वारा ऐसी रीति विहित कर सकता है जिससे उन मामलों में साक्षियों के साक्ष्य को और अभियुक्त की परीक्षा को लिखा जाएगा जो उसके समक्ष आते हैं, और ऐसे साक्ष्य और परीक्षा को ऐसे नियम के अनुसार लिखा जाएगा।

Record in High Court-
Every High Court may, by general rule, prescribe the manner in which the evidence of witnesses and the examination of the accused shall be taken down in cases coming before it; and such evidence and examination shall be taken down in accordance with such rule.

हमारा प्रयास सीआरपीसी की धारा 283 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

सीआरपीसी की धारा 282 | दुभाषिया ठीक-ठीक भाषान्तर करने के लिए आबद्ध होगा | CrPC Section- 282 in hindi| Interpreter to be bound to interpret truthfully.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 282 के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 282 कब लागू होती है, यह भी इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

धारा 282 का विवरण

दण्ड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 282 के अन्तर्गत जब किसी साक्ष्य या कथन के भाषान्तर के लिए दुभाषिये की सेवा की किसी दण्ड न्यायालय द्वारा अपेक्षा की जाती है तब वह दुभाषिया ऐसे साक्ष्य या कथन का ठीक भाषान्तर करने के लिए आबद्ध होगा।

सीआरपीसी की धारा 282 के अनुसार

दुभाषिया ठीक-ठीक भाषान्तर करने के लिए आबद्ध होगा-

जब किसी साक्ष्य या कथन के भाषान्तर के लिए दुभाषिये की सेवा की किसी दण्ड न्यायालय द्वारा अपेक्षा की जाती है तब वह दुभाषिया ऐसे साक्ष्य या कथन का ठीक भाषान्तर करने के लिए आबद्ध होगा।

Interpreter to be bound to interpret truthfully-
When the services of an interpreter are required by any Criminal Court for the interpretation of any evidence or statement, he shall be bound to state the true interpretation of such evidence or statement.

हमारा प्रयास सीआरपीसी की धारा 282 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।