Home Blog Page 216

सीआरपीसी की धारा 118 | उस व्यक्ति का उन्मोचन जिसके विरुद्ध इत्तिला दी गई है | CrPC Section- 118 in hindi| Discharge of person informed against.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 118 के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 118 कब लागू होती है, यह भी इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

धारा 118 का विवरण

दण्ड प्रक्रिया संहिता (CrPC) में धारा 118 के अन्तर्गत जब किसी मामले में किसी व्यक्ति को धारा 116 के अधीन जांच पर यह साबित नहीं होता है कि, यथास्थिति, परिशान्ति कायम रखने के लिए या सदाचार बनाए रखने के लिए यह आवश्यक है कि वह व्यक्ति, जिसके बारे में जांच की गई है, बन्धपत्र निष्पादित करे तो मजिस्ट्रेट उस अभिलेख में उस भाव की प्रविष्टि करेगा, तो यह धारा 118 के अंतर्गत ऐसा व्यक्ति केवल उस जांच के प्रयोजनों के लिए ही अभिरक्षा में है तो उसे छोड़ देगा अथवा यदि ऐसा व्यक्ति अभिरक्षा में नहीं है तो उसे उन्मोचित कर देगा।

जब किसी मामले में किसी व्यक्ति पर धारा 116 के अधीन जांच पर यह साबित नहीं होती है कि, यथास्थिति, परिशान्ति कायम रखने के लिए या सदाचार बनाए रखने के लिए यह आवश्यक है कि वह व्यक्ति, जिसके बारे में जांच की गई है, बन्धपत्र निष्पादित करे तो मजिस्ट्रेट उस अभिलेख में उस भाव की प्रविष्टि करेगा, तो CrPC की धारा 118 के अंतर्गत ऐसा व्यक्ति केवल उस जांच के प्रयोजनों के लिए ही अभिरक्षा में है तो उसे छोड़ देगा अथवा यदि ऐसा व्यक्ति अभिरक्षा में नहीं है तो उसे उन्मोचित कर देगा।

सीआरपीसी की धारा 118 के अनुसार

उस व्यक्ति का उन्मोचन जिसके विरुद्ध इत्तिला दी गई है-

यदि धारा 116 के अधीन जांच पर यह साबित नहीं होता है कि, यथास्थिति, परिशान्ति कायम रखने के लिए या सदाचार बनाए रखने के लिए यह आवश्यक है कि वह व्यक्ति, जिसके बारे में जांच की गई है, बन्धपत्र निष्पादित करे तो मजिस्ट्रेट उस अभिलेख में उस भाव की प्रविष्टि करेगा और यदि ऐसा व्यक्ति केवल उस जांच के प्रयोजनों के लिए ही अभिरक्षा में है तो उसे छोड़ देगा अथवा यदि ऐसा व्यक्ति अभिरक्षा में नहीं है तो उसे उन्मोचित कर देगा।

Discharge of person informed against-
If, on an inquiry under Section 116, it is not proved that it is necessary for keeping the peace or maintaining good behavior, as the case may be, that the person in respect of whom the inquiry is made, should execute a bond, the Magistrate shall make an entry on the record to that effect, and if such person is in custody only for the purposes of the inquiry, shall release him, or, if such person is not in custody, shall discharge him.

हमारा प्रयास सीआरपीसी की धारा 118 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

सीआरपीसी की धारा 114 | समन या वारण्ट के साथ आदेश की प्रति होगी | CrPC Section- 114 in hindi| Copy of order to accompany summons or warrant.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 114 के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 114 कब लागू होती है, यह भी इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

धारा 114 का विवरण

दण्ड प्रक्रिया संहिता (CrPC) में धारा 114 के अन्तर्गत यदि किसी मामले में धारा 113 के अधीन जारी किये गये प्रत्येक समन या वारण्ट के साथ धारा 111 के अधीन दिए गए आदेश की प्रति होगी और उस समन या वारण्ट की तामील या निष्पादन करने वाला अधिकारी वह प्रति उस व्यक्ति को परिदत्त करेगा जिस पर उसकी तामील की गई है या जो उसके अधीन गिरफ्तार किया गया है तो यह धारा 114 के अंतर्गत समन या वारण्ट की तामील या निष्पादन करने वाला अधिकारी को यह शक्ति होती है कि वह उस व्यक्ति को परिदत्त करेगा जिस पर उसकी तामील की गई है या जो उसके अधीन गिरफ्तार किया गया है

जब समन या वारण्ट की तामील या निष्पादन करने वाला अधिकारी किसी मामले में समन या वारण्ट जारी करता है तो CrPC की धारा 114 उस अधिकारी द्वारा समन या वारण्ट के साथ एक आदेश की प्रति लगाना भी आवश्यक है, तभी समन या वारण्ट को पूर्ण माना जाएगा।

सीआरपीसी की धारा 114 के अनुसार

समन या वारण्ट के साथ आदेश की प्रति होगी-

धारा 113 के अधीन जारी किये गये प्रत्येक समन या वारण्ट के साथ धारा 111 के अधीन दिए गए आदेश की प्रति होगी और उस समन या वारण्ट की तामील या निष्पादन करने वाला अधिकारी वह प्रति उस व्यक्ति को परिदत्त करेगा जिस पर उसकी तामील की गई है या जो उसके अधीन गिरफ्तार किया गया है।

Copy of order to accompany summons or warrant-
Every summons or warrant issued under Section 113 shall be accompanied by a copy of the order made under Section 111, and such copy shall be delivered by the officer serving or executing such summons or warrant to the person served with, or arrested under, the same.

हमारा प्रयास सीआरपीसी की धारा 114 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

सीआरपीसी की धारा 115 | वैयक्तिक हाजिरी से अभिमुक्ति देने की शक्ति | CrPC Section- 115 in hindi| Power to dispense with personal attendance.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 115 के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 115 कब लागू होती है, यह भी इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

धारा 115 का विवरण

दण्ड प्रक्रिया संहिता (CrPC) में धारा 115 के अन्तर्गत यदि किसी मामले में मजिस्ट्रेट को पर्याप्त कारण दिखाई देता है कि वह ऐसे किसी व्यक्ति को, जिससे इस बात का कारण दर्शित करने की अपेक्षा की गई है कि उसे परिशान्ति कायम रखने या सदाचार के लिए बन्धपत्र निष्पादित करने के लिये आदेश क्यों न दिया जाए, तो यह धारा 115 के अंतर्गत उस मजिस्ट्रेट को यह शक्ति होती है कि वह किसी व्यक्ति को वैयक्तिक हाजिरी से अभिमुक्ति दे सकता है और प्लीडर द्वारा हाजिर होने की अनुज्ञा दे सकता है।

जब मजिस्ट्रेट को पर्याप्त कारण ज्ञात हो कि वह किसी ऐसे व्यक्ति को न्यायालय में प्रत्येक समय न्यायालय में उपस्थित होना संभव नही है, तो CrPC की धारा 115 न्यायालय के मजिस्ट्रेट को यह शक्ति होती है कि वह किसी व्यक्ति को वैयक्तिक हाजिरी से अभिमुक्ति दे सकता है और प्लीडर द्वारा हाजिर होने की अनुज्ञा दे सकता है।

सीआरपीसी की धारा 115 के अनुसार

वैयक्तिक हाजिरी से अभिमुक्ति देने की शक्ति–

यदि मजिस्ट्रेट को पर्याप्त कारण दिखाई देता है तो वह ऐसे किसी व्यक्ति को, जिससे इस बात का कारण दर्शित करने की अपेक्षा की गई है कि उसे परिशान्ति कायम रखने या सदाचार के लिए बन्धपत्र निष्पादित करने के लिये आदेश क्यों न दिया जाए, वैयक्तिक हाजिरी से अभिमुक्ति दे सकता है और प्लीडर द्वारा हाजिर होने की अनुज्ञा दे सकता है।

Power to dispense with personal attendance-
The Magistrate may, if he sees sufficient cause, dispense with the personal attendance of any person called upon to show cause why he should not be ordered to execute a bond for keeping the peace or for good behavior and may permit him to appear by a pleader.

हमारा प्रयास सीआरपीसी की धारा 115 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

सैकण्ड हैंड माल के व्यापार मे जीएसटी की क्या स्थिति होगी (What will be the status of GST in the trade of second hand goods)?

नमस्कार दोस्तों आज मैं आपके लिए (Second Hand GST Goods) सैकण्ड हैंड माल के व्यापार से संबंधित समस्त जानकारियां आपको देंगे, जीएसटी में सैकण्ड हैंड गुड्स पर क्या करदेयता है, साथ ही सैकण्ड हैंड गुड्स के व्यापार में क्या जीएसटी के नियम व प्रावधान आते है यह भी इस लेख के माध्यम से जानेंगे।

वैसे कई व्यवहारी पुरानी एवं उपयोग में ली गई वस्तुओं का व्यापार करते है। ऐसे में वे माल की खरीद सामान्यतयः अपंजीकृत व्यवहारियों से करते है जिस पर टैक्स का कोई दायित्व नहीं होता है। यह माना जाता है कि चूकि इन वस्तुओं पर एक बार जब यह नई बेची गई होगी जीएसटी का भुगतान हो चुका है इसलिए इनकी पुनः खरीद बिक्री करने पर जब तक टैक्स नहीं लगना चाहिए जब तक उन्हे खरीद कर ज्यादा मूल्य पर ना बेचा जाये। इस अंतर को मार्जिन माना गया तथा इसे मार्जिन स्कीम कहा गया। जीएसटी के तहत ऐसी वस्तुओं का व्यापार करने के लिए सैन्ट्रल गुड्स एण्ड सर्विसेज टैक्स रूल्स, 2017 के रूल 32(5) में प्रावधान किया गया है।

क्या कहता है, GST रूल 32(5)?

Where a taxable supply is provided by a person dealing in buying and selling of second hand goods i.e., used goods as such or after such minor processing which does not change the nature of the goods and where no input tax credit has been availed on the purchase of such goods, the value of supply shall be the difference between the selling price and I the purchase price and where the value of such supply is negative, it shall be ignored:

Provided that the purchase value of goods repossessed from a defaulting bor rower, who is not registered, for the purpose of recovery of a loan or debt shall be deemed to be the purchase price of such goods by the defaulting borrower reduced by five percent age points for every quarter or part thereof, between the date of purchase and the date of disposal by the person making such repossession.

इस नियम के अनुसार- यदि किसी पुराने एवं उपयोग में लिये गये सामान का व्यापार करने वाला डीलर उस वस्तु में ज्यादा बदलाव न करके सिर्फ छोटी-मोटी प्रोसेसिंग करके जिससे उसके स्वरूप में कोई परिवर्तन न हो तथा जिसकी खरीद पर उसने इनपुट टैक्स क्रेडिट का लाभ न लिया हो तो उस माल की सप्लाई का मूल्य उसके विक्रय मूल्य एवं खरीद मूल्य का अंतर होगा।

यदि ऐसी सप्लाई का मूल्य या कहे कि विक्रय मूल्य एवं खरीद का अंतर नेगेटिव हो तो उस पर कोई जीएसटी देय नहीं होगा।

इस रूल के तहत उस स्थिति को भी शामिल किया गया है जिसमें किसी डिफाल्टिग उधार लेने वाले की वस्तु का किश्त न चुकाने के कारण पजेशन प्राप्त किया गया हो। यदि ऐसे व्यक्ति को जो जीएसटी में रजिस्टर्ड नहीं है कोई  राशि लोन के रूप में दी गई है तथा लोन का भुगतान न करने के कारण उसकी वस्तु का अधिग्रहण कर लिया जाता है तो उस अधिग्रहित वस्तु का खरीद मूल्य ज्ञात करने के लिए उस वस्तु की खरीद की तिथी से पजेशन लेने की तिथी तक प्रत्येक तिमाही के लिए 5 प्रतिशत मूल्य घटा कर उसे ज्ञात किया जायेगा। ।

मार्जिन स्कीम में सप्लाई का मूल्य

जीएसटी कानून में सप्लाई के मूल्य की गणना धारा 15 के तहत की जाती है। धारा 15 के अनुसार सामान्य अवस्था में सप्लाई का मूल्य ट्रांजक्शन मूल्य को माना जाता है। लेकिन दोहरे कर को समाप्त करने के उद्देश्य से पुरानी वस्तुओं के व्यापार पर बिक्री एवं खरीद के अंतर जिसे मार्जिन कहा जाता है, पर टैक्स लगाये जाने का प्रावधान किया गया है।

स्कीम की विशेषताएं

इस स्कीम की निम्न विशेषताएं हैं-

i) यह स्कीम सैकन्ड हैन्ड माल की खरीद बिक्री करने वाले व्यवहारियों पर ही लागू होती है। केवल पुरानी वस्तुएं बेचने पर यह स्कीम लागू नहीं होती है। पुरानी वस्तुएं बेचने पर ट्रांजक्शन मूल्य पर टैक्स चुकाना होता है।

ii) इस स्कीम में जिस वस्तु को बेचा जाता है उसमें मामूली सुधार किया जा सकता है। उसके स्वरूप को नहीं बदला जा सकता है। जैसे किसी मशीन को काम में लेने योग्य बनाने के लिए उसके पार्टस को बदला जा सकता है।

iii) इस स्कीम का लाभ लेने वाले व्यवहारियों को धारा 9(4) के तहत रिवर्स चार्ज में टैक्स का कोई भुगतान नहीं करना होता है।

iv) इस स्कीम का लाभ लेने वाले व्यवहारी उस माल की खरीद पर इनपुट टैक्स क्रेडिट का लाभ नहीं ले सकते है।

v) इस स्कीम का लाभ लेने वाले व्यवहारी टैक्स इनवाइस जारी नहीं कर सकते है वे केवल बिल आफ सप्लाई ही जारी करेंगे।

vi) इस स्कीम के तहत आने वाले व्यवहारी से माल खरीदने वाला व्यवहारी उस पर इनपुट टैक्स क्रेडिट क्लेम नहीं कर सकता है।

सैकेण्ड हैण्ड माल पर कर की दर (Second Hand GST Goods Tax Rate)

सैकेण्ड हैण्ड माल Second Hand GST Goods Tax Rate पर कर की दर वहीं होती है जो नये माल पर होती है। रूल 32(5) के तहत वैल्यू आफ सप्लाई खरीद-बिक्री का अंतर होती है जिस पर उस माल पर लागू टैक्स की दर से टैक्स आरोपित किया जाता है।

रिपेयर या प्रोसेसिंग के लिए खरीदे माल पर इनपुट टैक्स क्रेडिट की स्थिति

Repairing or Processing For GST Goods के अंतर्गत किसी माल में यदि रिपेयर या प्रोसेसिंग की गई है, तो कैसे क्या स्थिति रहेगी।
जो सैकण्ड हैण्ड माल खरीदा जाता है उस पर तो इनपुट टैक्स क्रेडिट का लाभ प्राप्त नहीं होता है लेकिन बिक्री से पूर्व उसकी जो माइनर प्रोसेसिंग की जाती है या रिपेयर आदि की जाती है तो उस पर चुकाये जीएसटी के इनपुट टैक्स क्रेडिट का लाभ व्यवहारी को प्राप्त होगा या नहीं । यह एक विवादित प्रश्न है। रूल 32(5) में केवल उस माल की खरीद पर ही इनपुट टैक्स क्रेडिट क्लेम न करने का प्रावधान किया गया है उसके आगे की जाने वाली प्रोसेसिंग पर खर्च की जाने वाली राशि पर इनपुट टैक्स क्रेडिट क्लेम करने से कोई रोक नहीं लगाई गई है। रूल 32(5) का
संबंधित प्रावधान इस प्रकार है-

........and where no input tax credit has been availed on the purchase of such goods.........

केवल उसके खरीद पर इनपुट टैक्स क्रेडिट क्लेम न करने के लिए कहा गया है। उसके रिपेयर या प्रोसेसिंग पर इनपुट टैक्स क्रेडिट क्लेम करने से कोई रोक नहीं लगाई गई है। चूंकि वैल्यू एडिशन पर आऊटपुट टैक्स चुकाया जा रहा है। इसलिए उस पर इनपुट टैक्स क्रेडिट मना करने का कोई औचित्य भी नहीं है।

हम इसे एक उदाहरण के द्वारा समझते है-

उदाहरण- मैसर्स राज ट्रेडिंग कम्पनी पुरानी मशीनों को खरीदने-बेचने का व्यापार करता है। उसने एक मशीन 2 लाख रु की खरीदी तथा उसके रिपेयर पर 50,000/- रु एवं 6000/- रु जीएसटी कुल 56,000/- रु खर्च किये। उसने इस मशीन को ठीक करवा कर 3 लाख रु की बेच दी। उस पर जीएसटी का कितना दायित्व होगा?

विक्रय मूल्य3,00,000/-
खरीद मूल्य2,00,000/-
मार्जिन1,00,000/-
जीएसटी 12%12,000/-
इनपुट टैक्स क्रेडिट (रिपेयरिंग पर)6,000/-
देय राशि6,000/-

मार्जिन की राशि की गणना करने पर रिपेयर की राशि को नहीं जोड़ा जायेगा केवल खरीद मूल्य को ही मार्जिन की गणना करने के लिए घटाया जायेगा ।

जीएसटी रिटर्न में इस बिक्री को कैसे दिखाया जायेगा

जीएसटी रिटर्न GSTR-3B में इसे कहा भरना होगा।

GSTR-3B में टेबिल 3.1 में आऊटवर्ड सप्लाई की जानकारी देनी होती है। इसमें (a) में आऊटवर्ड टैक्सेबल सप्लाई में मार्जिन राशि जिस पर जीएसटी देय होगा वह दिखानी होगी तथा शेष राशि को (c) अन्य आऊटवर्ड सप्लाई (निल) रेटेड, एग्जैम्टेड) में दिखानी होगी।

जीएसटी रिटर्न GSTR-1 में इसे कहा भरना होगा।

इस सप्लाई को अपंजीकृत व्यवहारियों को की गई सप्लाई माना जायेगा क्योंकि क्रेताओं को इनपुट टैक्स क्रेडिट का कोई लाभ प्राप्त नहीं होगा। इसलिए यदि इन्टर स्टेट सप्लाई की गई। है जो कि 2.50 लाख रु से अधिक मूल्य की है तो उसे टेबिल 5 में दिखाना होगा तथा यदि 2.50 लाख रु से कम इनवाइस मूल्य की है या राज्य के भीतर की गई है तो उसे टेबिल 7 में दिखाना होगा। टेबिल 5 या 7 में वह राशि दिखाई जायेगी। जिस पर जीएसटी की गणना की गई है यानि मार्जिन राशि को यहां दिखाना होगा तथा शेष राशि जिस पर जीएसटी नहीं वसूला गया है तथा जिसे GSTR-3B में 3.1(C) में दिखाया गया है। उसे GSTR-1 की टेबिल 8 में दिखाया जायेगा।

जीएसटी रूल 32 (5) के तहत वैल्यू ऑफ सप्लाई मार्जिन को ही माना गया है लेकिन बुक्स में पूरी सप्लाई दिखाई जाती है। इसलिए केवल कर योग्य सप्लाई से ही रिटर्न प्रस्तुत करेंगे तो बुक्स की सप्लाई में एवं रिटर्न की सप्लाई में भारी अंतर आयेगा। इसलिए शेष सप्लाई राशि जो कि वास्तविक सप्लाई एवं मार्जिन का अंतर है उसे कर मुक्त सप्लाई में दिखाया जाना चाहिए ताकि बुक्स से अंतर ना रहे।

इनवाइस में जीएसटी दिखाये या नहीं

चूंकि इस स्कीम के तहत मार्जिन पर जीएसटी वसूल किया जाता है इसलिए बिल ऑफ सप्लाई जारी किया जायेगा अतः जीएसटी इनवाइस में नहीं दिखाया जायेगा। इसलिए इनवाइस में केवल यह लिखा जाना चाहिए कि जीएसटी का भुगतान रूल 32(5) के तहत मार्जिन राशि पर किया गया है।

पुराने मोटर व्हीकल्स पर लागू स्कीम मार्जिन यदि किसी सप्लायर ने चाहे वह सैकण्ड हैण्ड व्हीकल का व्यापार करता हो या नहीं कोई पुराना व्हीकल बेचा है जिस पर इनपुट टैक्स क्रेडिट या सैनवैट क्रेडिट या इनपुट वैट क्रेडिट का कोई लाभ नहीं लिया है तो वह मार्जिन की गणना करके उस पर जीएसटी का भुगतान अधिसूचना स. 8/ 2018-सीटी (रेट) दिनांक 25.1.2018 या अधिसूचना स. 9/2018-आईटी (रेट) दिनांक 25.1.2018 के तहत कन्सेशनल दर पर कर सकता है।

यदि ऐसे पुराने व्हीकल पर आयकर अधिनियम की धारा 32 के तहत डैपरीसिएशन क्लेम किया गया है तो ऐसे मामले में विक्रय मूल्य एवं डैपरीसिएटेड वैल्यू का अंतर मार्जिन माना जायेगा तथा यदि डैपरीसिएशन क्लेम नहीं किया गया है तो विक्रय मूल्य एवं क्रय मूल्य का अंतर मार्जिन माना जायेगा।

व्हीकल्स पर इंजन कैपेसिटी के आधार पर जीएसटी दर का निर्धारण किया गया है जो कि 18 प्रतिशत या 12 प्रतिशत हो सकती है। अधिसूचना के अनुसार रेट से संबंधित टेबिल निम्न प्रकार है-

 

new Goods rate wise

Article Sources By- गुड्स एण्ड सर्विस टैक्स अपडेट मैगजीन

सीआरपीसी की धारा 113 | ऐसे व्यक्ति के बारे में समन या वारण्ट जो उपस्थित नहीं है | CrPC Section- 113 in hindi| Summons or warrant in case of person not so present.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 113 के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 113 कब लागू होती है, यह भी इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

धारा 113 का विवरण

दण्ड प्रक्रिया संहिता (CrPC) में धारा 113 के अन्तर्गत यदि किसी व्यक्ति न्यायालय में नियत समय एवं तिथि को उपस्थित होना था, उपस्थित नहीं होता है तो मजिस्ट्रेट उससे हाजिर होने की अपेक्षा करते हुये समन, या जब ऐसा व्यक्ति अभिरक्षा में है तब जिस अधिकारी की अभिरक्षा में वह है उस अधिकारी को उसे न्यायालय के समक्ष लाने का निर्देश देते हुये वारण्ट, जारी करेगा तो यह धारा 113 के अंतर्गत उस न्यायालय के अधिकारी को यह शक्ति होती है कि राजद्रोहात्मक बातों को फैलाने वाले व्यक्तियों से सदाचार के लिए प्रतिभूति ले सकता है।

जब मजिस्ट्रेट को इत्तिला मिलती है, कि उसकी स्थानीय अधिकारिता के अन्दर कोई ऐसा व्यक्ति है जो ऐसी अधिकारिता के अन्दर या बाहर राजद्रोहात्मक बातों को फैला रहा है, फैलाने का प्रयास कर रहा है या मौखिक रूप से या लिखित रूप या किसी अन्य रूप से निम्नलिखित बातें साशय फैलाता है या फैलाने का प्रयत्न करता है या फैलाने का दुष्प्रेरण करता है। CrPC की धारा 113 न्यायालय के मजिस्ट्रेट को यह शक्ति होती है कि उसकी गिरफ्तारी के लिए किसी समय वारण्ट जारी कर सकेगा।

सीआरपीसी की धारा 113 के अनुसार

ऐसे व्यक्ति के बारे में समन या वारण्ट जो उपस्थित नहीं है-

यदि ऐसा व्यक्ति न्यायालय में उपस्थित नहीं है तो मजिस्ट्रेट उससे हाजिर होने की अपेक्षा करते हुये समन, या जब ऐसा व्यक्ति अभिरक्षा में है तब जिस अधिकारी की अभिरक्षा में वह है उस अधिकारी को उसे न्यायालय के समक्ष लाने का निर्देश देते हुये वारण्ट, जारी करेगा :
परन्तु जब कभी ऐसे मजिस्ट्रेट को पुलिस अधिकारी की रिपोर्ट पर या अन्य इत्तिला पर (जिस रिपोर्ट या इत्तिला का सार मजिस्ट्रेट द्वारा अभिलिखित किया जाएगा), यह प्रतीत होता है कि परिशान्ति भंग होने के डर के लिए कारण है और ऐसे व्यक्ति की तुरन्त गिरफ्तारी के बिना ऐसे परिशान्ति भंग करने का निवारण नहीं किया जा सकता है तब वह मजिस्ट्रेट उसकी गिरफ्तारी के लिए किसी समय वारण्ट जारी कर सकेगा।

Summons or warrant in case of person not so present-
If such person is not present in Court, the Magistrate shall issue a summons requiring him to appear, or, when such person is in custody, a warrant directing the officer in whose custody he is to bring him before the Court:
Provided that whenever it appears to such Magistrate, upon the report of a police officer or upon other information (the substance of which report or information shall be recorded by the Magistrate), that there is reason to fear the commission of a breach of the peace, and that such breach of the peace cannot be prevented otherwise than by the immediate arrest of such person, the Magistrate may at any time issue a warrant for his arrest.

हमारा प्रयास सीआरपीसी की धारा 113 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

सीआरपीसी की धारा 112 | न्यायालय में उपस्थित व्यक्ति के बारे में प्रक्रिया | CrPC Section- 112 in hindi| Procedure in respect of person present in Court.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 112 के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 112 कब लागू होती है, यह भी इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

धारा 112 का विवरण

दण्ड प्रक्रिया संहिता (CrPC) में धारा 112 के अन्तर्गत जब किसी मामले में किसी अपराधी व्यक्ति के बारे में कोई आदेश दिया जाता है, तो वह धारा 112 के अंतर्गत उस न्यायालय के अधिकारी द्वारा उस निर्णय को पढ़कर सुनाया जाएगा या यदि वह ऐसा चाहे तो उसका सार उसे समझाया जाएगा।

किसी कार्यपालक मजिस्ट्रेट अथवा किसी भी श्रेणी के मजिस्ट्रेट द्वारा किसी अपराधी व्यक्ति के बारे में कोई निर्णय दिया जाता है तो CrPC की धारा 112 न्यायालय के अधिकारी द्वारा उस निर्णय को पढ़कर सुनाया जाएगा या यदि वह ऐसा चाहे तो उसका सार उसे समझाया जाएगा।

सीआरपीसी की धारा 112 के अनुसार

न्यायालय में उपस्थित व्यक्ति के बारे में प्रक्रिया-

यदि वह व्यक्ति जिसके बारे में ऐसा आदेश दिया जाता है, न्यायालय में उपस्थित है तो वह उसे पढ़कर सुनाया जाएगा या यदि वह ऐसा चाहे तो उसका सार उसे समझाया जाएगा।

Procedure in respect of person present in Court-
If the person in respect of whom such order is made is present in Court, it shall be read over to him, or, if he so desires, the substance thereof shall be explained to him.

हमारा प्रयास सीआरपीसी की धारा 112 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।