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सीआरपीसी की धारा 104 | पेश की गई दस्तावेज आदि को परिबद्ध करने की शक्ति | CrPC Section- 104 in hindi| Power to impound document, etc, produced.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 104 के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 104 कब लागू होती है, यह भी इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

धारा 104 का विवरण

दण्ड प्रक्रिया संहिता (CrPC) में धारा 104 के अन्तर्गत जब कोई वस्तु या दस्तावेज न्यायालय में जांच हेतु पेश किए जाते है, तो वह धारा 104 के अंतर्गत उस न्यायालय के अधिकारी को यह शक्ति होती है कि मजिस्ट्रेट अगर चाहे तो, किसी मामले में जांच हेतु है वादी अथवा प्रतिवादी व्यक्ति के दस्तावेज अथवा कोई वस्तु, जब्त कर सकते है।

किसी न्यायालय के मजिस्ट्रेट, उपखण्ड मजिस्ट्रेट अथवा प्रथम वर्ग के मजिस्ट्रेट द्वारा किसी मामले में जांच के समय अथवा संदेह के आधार पर जांच हेतु न्यायालय को यह शक्ति मिली है कि यदि वह चाहे तो किसी व्यक्ति के दस्तावेज अथवा किसी वस्तु को जांच हेतु जब्त भी कर सकते है। CrPC की धारा 104 के अंतर्गत न्यायालय में पेश किए गए दस्तावेज आदि को परिबद्ध करने की शक्ति को परिभाषित करती है।

सीआरपीसी की धारा 104 के अनुसार

पेश की गई दस्तावेज आदि को परिबद्ध करने की शक्ति- यदि कोई न्यायालय ठीक समझता है, तो यह किसी दस्तावेज या चीज को, जो इस संहिता के अधीन उसके समक्ष पेश की गई है, परिबद्ध कर सकता है।

Power to impound document, etc, produced-
Any Court may, if it thinks fit, impound any document or thing produced before it under this Code.

हमारा प्रयास सीआरपीसी की धारा 104 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

सीआरपीसी की धारा 103 | मजिस्ट्रेट अपनी उपस्थिति में तलाशी ली जाने का निदेश दे सकता है | CrPC Section- 103 in hindi| Magistrate may direct search in his presence.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 103 के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 103 कब लागू होती है, यह भी इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

धारा 103 का विवरण

दण्ड प्रक्रिया संहिता (CrPC) में धारा 103 के अन्तर्गत कोई भी मजिस्ट्रेट किसी स्थान की, जिसकी तलाशी के लिए वह तलाशी-वारण्ट जारी करने के लिए सक्षम है, अपनी उपस्थिति में तलाशी किए जाने का निर्देश दे सकता है, यह धारा 103 के ऐसे मामलो में मजिस्ट्रेट तलाशी वारंट के लिए सक्षम है, अपनी उपस्थिति में तलाशी कर सकता है अथवा निर्देश दे सकते है ।

जब कोई मजिस्ट्रेट किसी मामले में जांच हेतु किसी भी स्थान की किसी भी समय तलाशी-वारण्ट जारी करने के लिए सक्षम है, यह CrPC की धारा 103 के अंतर्गत ऐसे मजिस्ट्रेट को किसी भी मामले में जिसे जांच हेतु आवश्यकता है, उस स्थान का तलाशी वारंट अपनी उपस्थिति में तलाशी कर सकते है अथवा अपनी उपस्थिति में भी निर्देश भी दे सकते है।

सीआरपीसी की धारा 103 के अनुसार

मजिस्ट्रेट अपनी उपस्थिति में तलाशी ली जाने का निदेश दे सकता है-

कोई मजिस्ट्रेट किसी स्थान की, जिसकी तलाशी के लिए वह तलाशी-वारण्ट जारी करने के लिए सक्षम है, अपनी उपस्थिति में तलाशी ली जाने का निदेश दे सकता है।

Magistrate may direct search in his presence-
Any Magistrate may direct a search to be made in his presence of any place for the search of which he is competent to issue a search-warrant.

हमारा प्रयास सीआरपीसी की धारा 103 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

जीएसटी में डेबिट नोट एवं क्रेडिट नोट में क्या जानकारी देनी होती है। (What information has to be given in the debit note and credit note in GST.)

नमस्कार दोस्तों आज हम आपको GST Returns में डेबिट नोट एवं क्रेडिट नोट भरते समय क्या-क्या सावधानियां रखनी चाहिए और जीएसटी रिटर्न के किस कॉलम में भरेंगे, यह भी समझना बहुत जरूरी है, क्योंकि अधिकतर् कराधेय व्यक्ति द्वारा यह गलती की जा रही है, तो आज लेख के माध्यम से डेबिट नोट एवं क्रेडिट नोट कैसे और कहा भरा जाना चाहिए, जानेंगे।

क्रेडिट नोट एवं डेबिट नोट जारी करते समय हमे सावधानियां बरतने की आवश्यकता है, अधिकांशतः कराधेय व्यक्ति द्वारा Credit Note और Debit Note सही ढंग से बनाते ही नहीं है, इसके अलावा जीएसटी रिटर्न्स में भी छोड़ देते है अथवा गलत ढंग से प्रदर्शित करते है।

क्रेडिट नोट एवं डेबिट नोट जारी करते समय सप्लायर एवं प्राप्तकर्ता के नाम, पते, जीएसटी नम्बर आदि के अतिरिक्त उस इनवाइस की जानकारी देनी होती है जिसके संबंध में इसे जारी किया जा रहा है। इसके साथ ही टैक्सबल सप्लाई का मूल्य, रेट ऑफ टैक्स, टैक्स की राशि जिसे डेबिट या क्रेडिट किया जाना है इसमें दिखानी होती है। इसका प्रावधान रूल 53(1ए) में किया गया है।

डेबिट नोट के आधार पर प्राप्तकर्ता इनपुट टैक्स क्रेडिट क्लेम कर सकता है लेकिन रूल 53(3) के अनुसार यदि धारा 74, धारा 129 या धारा 130 के तहत डेबिट नोट जारी किया गया है तो उस पर यह लिखा जाना चाहिए कि इस पर इनपुट टैक्स क्रेडिट का लाभ प्राप्त होगा या नहीं होगा।

रिटर्न में इसे कहां दिखाये?

जीएसटी रिटर्न जीएसटीआर-3बी में इसे एडजस्ट करना होगा। यदि क्रेडिट नोट जारी किया गया है तो आऊटपुट टैक्स से उसे कम करना होगा तथा डेबिट नोट की स्थिति में इसे आऊटपुट टैक्स जोड़ना होगा।

इसी प्रकार जीएसटीआर-1 में इसे टेबिल नम्बर 9 में दिखाना होगा। ध्यान रहे इसे विक्रेता को ही दिखाना होगा क्रेता को इसे दिखाने की आवश्यकता नहीं है। जीएसटीआर-1 में क्रेडिट नोट दिखाने पर क्रेता का इनपुट टैक्स क्रेडिट स्वतः ही कम हो जायेगा। डेबिट नोट के मामले में क्रेता को इनपुट टैक्स क्रेडिट का लाभ प्राप्त हो जायेगा ।

GSTR-1 collom 9

प्राप्तकर्ता को क्रेडिट नोट को स्वीकार कर उसकी जानकारी रुल 74 के तहत देनी होगी तभी सप्लायर के आऊटपुट टैक्स का दायित्व कम होगा। इसकी जानकारी MIS-1 में धारा 43(2) के तहत भेजनी होगी। यदि प्राप्तकर्ता क्रेडिट नोट को स्वीकार नहीं करता है तो इसकी जानकारी सप्लायर को MIS-2 में भेजी जायेगी। यह प्रावधान धारा 43(3) एवं रूल 75 में किया गया है।

धारा 43(5) के प्रावधान के तहत यदि प्राप्तकर्ता उसे स्वीकार नहीं करता है, तो सप्लायर के आऊटपुट टैक्स दायित्व को वापस बढ़ा दिया जायेगा। धारा 43(7) के अनुसार यदि प्राप्तकर्ता धारा 39(9) के तहत उसे ठीक कर देता है तो सप्लायर का आऊटपुट टैक्स दायित्व पुनः कम कर दिया जायेगा।

सीआरपीसी की धारा 94 | दस्तावेज या अन्य चीज पेश करने के लिए समन | CrPC Section- 94 in hindi| Search of place suspected to contain stolen property, forged documents, etc.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 94 के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 94 कब लागू होती है, यह भी इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

धारा 94 का विवरण

दण्ड प्रक्रिया संहिता (CrPC) में धारा 94 के अन्तर्गत जब कोई न्यायालय अथवा पुलिस अधिकारी किसी मामले मे संदेह है कि व्यक्ति व्दारा कूटरचित दस्तावेज, चुराई हुयी सम्पत्ति, आपत्तिजनक वस्तु, कूटकृत सिक्का अथवा नकली मुद्राओ का निर्माण किया जा रहा है है जिला मजिस्ट्रेट, उपखण्ड मजिस्ट्रेट अथवा प्रथम वर्ग के मजिस्ट्रेट को इत्तिला मिलने के पश्चात् न्यायालय को यह शक्ति है कि वह आवश्यक चाहे, तो वह धारा 94 के अंतर्गत उस न्यायालय के अधिकारी उस स्थान का तलाशी, जिसमें चुराई हुई सम्पत्ति, कूटरचित दस्तावेज आदि होने का संदेह है।

जब जिला मजिस्ट्रेट, उपखण्ड मजिस्ट्रेट अथवा प्रथम वर्ग के मजिस्ट्रेट द्वारा किसी मामले में जांच के समय अथवा संदेह के आधार पर दोषी व्यक्ति की जांच हेतु न्यायालय को यह शक्ति मिली है कि यदि वह चाहे तो उस स्थान का तलाशी, जिसमें चुराई हुई सम्पत्ति, कूटरचित दस्तावेज आदि होने का संदेह है तो CrPC की धारा 94 के अंतर्गत जिला मजिस्ट्रेट, उपखण्ड मजिस्ट्रेट अथवा प्रथम वर्ग के मजिस्ट्रेट द्वारा उस स्थान का तलाशी वारंट जारी कर सकती है।

सीआरपीसी की धारा 94 के अनुसार

उस स्थान का तलाशी, जिसमें चुराई हुई सम्पत्ति, कूटरचित दस्तावेज आदि होने का संदेह है-

(1) यदि जिला मजिस्ट्रेट, उपखण्ड मजिस्ट्रेट या प्रथम वर्ग मजिस्ट्रेट को इत्तिला मिलने पर और ऐसी जांच के पश्चात् जैसी यह आवश्यक समझे यह विश्वास करने का कारण है कि कोई स्थान चुराई हुई संपत्ति के निक्षेप या विक्रय के लिए या किसी ऐसी आपत्तिजनक वस्तु के, जिसको यह धारा लागू होती है, निक्षेप विक्रय या उत्पादन के लिए उपयोग में लाया जाता है, या कोई ऐसी आपत्तिजनक वस्तु किसी स्थान में निक्षिप्त है, तो वह कांस्टेबल की पंक्ति के ऊपर के किसी पुलिस अधिकारी को वारण्ट द्वारा यह प्राधिकार दे सकता है कि वह-
(क) उस स्थान में ऐसी सहायता के साथ, जैसी आवश्यक हो, प्रवेश करे;
(ख) वारण्ट में विनिर्दिष्ट रीति से उसकी तलाशी ले;
(ग) यहां पाई गई किसी भी सम्पत्ति या वस्तु को, जिसके चुराई हुई सम्पति या ऐसी आपत्तिजनक वस्तु जिसको यह धारा लागू होती है, होने का उसे उचित संदेह है, कब्जे में ले;
(घ) ऐसी सम्पत्ति या वस्तु को मजिस्ट्रेट के पास ले जाए या अपराधी को मजिस्ट्रेट के समक्ष ले जाने तक उसको उसी स्थान पर पहरे में रखे या अन्यथा उसे किसी सुरक्षित स्थान में रखे;
(ङ) ऐसे स्थान में पाए गए ऐसे प्रत्येक व्यक्ति को अभिरक्षा में ले और मजिस्ट्रेट के समक्ष ले जाए जिसके बारे में प्रतीत हो कि वह किसी ऐसी सम्पत्ति या वस्तु के निक्षेप, विक्रय या उत्पादन में यह जानते हुए या संदेह करने का उचित कारण रखते हुए संसग रहा है कि, यथास्थिति, वह चुराई हुई सम्पत्ति है या ऐसी आपत्तिजनक वस्तु है, जिसको यह धारा लागू होती है।
(2) वे आपत्तिजनक वस्तुएं जिनको यह धारा लागू होती है, निम्नलिखित हैं :–
(क) कूटकृत सिक्का
(ख) धातु टोकन अधिनियम, 1889 (1889 का 1) के उल्लंघन में बनाए गए अथवा सीमा शुल्क अधिनियम, 1962 (1962 का 52) को धारा 11 के अधीन तत्समय प्रवृत्त किसी अधिसूचना के उल्लंघन में भारत में लाए गए धातुखण्ड;
(ग) कूटकृत करेन्सी नोट; कूटकृत स्टाम्प;
(घ) कूटरचित दस्तावेज;
(ङ) नकली मुद्राएं;
(च) भारतीय दण्ड संहिता (1860 का 45) की धारा 292 में निर्दिष्ट अश्लील वस्तुएं;
(छ) खण्ड (फ) से (च) तक के खण्डों में उल्लिखित वस्तुओं में से किसी के उत्पादन के लिए प्रयुक्त उपकरण या सामग्री।

Search of place suspected to contain stolen property, forged documents, etc-
(1) If a District Magistrate, Sub-divisional Magistrate or Magistrate of the first class, upon information and after such inquiry as he thinks necessary, has reason to believe that any place is used for the deposit or sale of stolen property, or for the deposit, sale or production of any objectionable article to which this section applies, or that any such objectionable article is deposited in any place, he may by warrant authorise any police officer above the rank of a constable
(a) to enter, with such assistance as may be required, such place,
(b) to search the same in the manner specified in the warrant,
(c) to take possession of any property or article therein found which he reasonably suspects to be stolen property or objectionable article to which this section applies,
(d) to convey such property or article before a Magistrate, or to guard the same on the spot until the offender is taken before a Magistrate, or otherwise to dispose of it in some place of safety,
(e) to take into custody and carry before a Magistrate every person found in such place who appears to have been privy to the deposit, sale or production of any such property or article knowing or having reasonable cause to suspect it to be stolen property or, as the case may be, objectionable article to which this section applies.
(2) The objectionable articles to which this section applies are-
(a) counterfeit coin ;
(b) pieces of metal made in contravention of the Metal Tokens Act, 1889 (1 of 1889), or brought into India in contravention of any notification for the time being in force under Section 11 of the Customs Act, 1962 (52 of 1962);
(c) counterfeit currency note; counterfeit stamps ;
(d) forged documents ;
(e) false seals ;
(f) obscene objects referred to in Section 292 of the Indian Penal Code (45 of 1860);
(g) instruments or materials used for the production of any of the articles mentioned in clauses (a) to (f).

हमारा प्रयास सीआरपीसी की धारा 94 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

सीआरपीसी की धारा 93 | तलाशी-वारण्ट कब जारी किया जा सकता है | CrPC Section- 93 in hindi| When search-warrant may be issued.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 93 के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 93 कब लागू होती है, यह भी इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

धारा 93 का विवरण

दण्ड प्रक्रिया संहिता (CrPC) में धारा 93 के अन्तर्गत जब कोई न्यायालय अथवा पुलिस अधिकारी किसी मामले की जांच के हेतु किसी दस्तावेज अथवा किसी वस्तु को प्रस्तुत करने का निर्देश देते है, लेकिन व्यक्ति व्दारा निर्देश का पालन नही किया जाता है, तो न्यायालय अथवा पुलिस अधिकारी व्यक्ति को तलाशी वारंट जारी भी जारी कर सकता है, यह धारा 93 के अंतर्गत उस न्यायालय के अधिकारी अथवा पुलिस अधिकारी द्वारा उस व्यक्ति को साक्ष्य, दस्तावेज अथवा कोई वस्तु नियत तिथि को प्रस्तुत न करने पर तलाशी-वारण्ट कब जारी किया जा सकता है यह बतलाती है।

जब न्यायालय अथवा पुलिस अधिकारी द्वारा किसी मामले में जांच के समय किसी वस्तु अथवा दस्तावेज को प्रस्तुत करने के निर्देश देती है, लेकिन व्यक्ति व्दारा निर्देश का पालन नही किया जाता है, तो न्यायालय अथवा पुलिस अधिकारी को यह शक्ति होती है कि वह वस्तु अथवा दस्तावेज जांच हेतु न्यायालय मे प्रस्तुत करायेे अन्यथा न्यायालय तलाशी-वारण्ट जारी कर सकती है।

सीआरपीसी की धारा 93 के अनुसार

तलाशी-वारण्ट कब जारी किया जा सकता है-

(1) (क) जहां किसी न्यायालय को यह विश्वास करने का कारण है कि वह व्यक्ति, जिसको धारा 91 के अधीन समन या आदेश या धारा 92 की उपधारा (1) के अधीन अपेक्षा सम्बोधित की गई या की जाती है, आदेश ऐसे समन या अपेक्षा द्वारा यथा अपेक्षित दस्तावेज या चीज पेश नहीं करेगा या हो सकता है कि पेश न करे; अथवा
(ख) जहां ऐसी दस्तावेज या चीज के बारे में न्यायालय को यह ज्ञात नहीं है कि वह किसी व्यक्ति के कब्जे में है; अथवा
(ग) जहां न्यायालय यह समझता है कि इस संहिता के अधीन किसी जांच, विचारण या अन्य कार्यवाही के प्रयोजनों की पूर्ति साधारण तलाशी या निरीक्षण से होगी;
वहां वह तलाशी-वारण्ट जारी कर सकता है; और वह व्यक्ति जिसे ऐसा वारण्ट निदिष्ट है, उसके अनुसार और इसमें इसके पश्चात् अन्तर्विष्ट उपबन्धों के अनुसार तलाशी ले सकता है या निरीक्षण कर सकता है।
(2) यदि, न्यायालय ठीक समझता है, तो वह वारण्ट में उस विशिष्ट स्थान या उसके भाग को विनिर्दिष्ट कर सकता है और केवल उसी स्थान या भाग की तलाशी या निरीक्षण होगा; तथा वह व्यक्ति जिसको ऐसे वारण्ट के निष्पादन का भार सौंपा जाता है, केवल उसी स्थान या भाग की तलाशी लेगा या निरीक्षण करेगा जो ऐसे विनिर्दिष्ट है।
(3) इस धारा की कोई बात जिला मजिस्ट्रेट या मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट से भिन्न मजिस्ट्रेट को डाक या तार प्राधिकारी की अभिरक्षा में किसी दस्तावेज, पार्सल या अन्य चीज की तलाशी के लिए वारण्ट जारी करने के लिए प्राधिकृत नहीं करेगी।

When search-warrant may be issued-
(1) (a) Where any Court has reason to believe that a person to whom a summons or order under Section 91 or a requisition under sub-section (1) of Section 92 has been, or might be, addressed, will not or would not produce the document or thing as required by such summons or requisition, or
(b) where such document or thing is not known to the Court to be in the possession of any person, or
(c) where the Court considers that the purposes of any inquiry, trial or other proceeding under this Code will be served by a general search or inspection,
it may issue a search-warrant; and the person to whom such warrant is directed, may search or inspect in accordance therewith and the provisions hereinafter contained.
(2) The Court may, if it thinks fit, specify in the warrant the particular place or part thereof to which only the search or inspection shall extend; and the person charged with the execution of such warrant shall then search or inspect only the place or part so specified.
(3) Nothing contained in this section shall authorise any Magistrate other than District Magistrate or Chief Judicial Magistrate to grant a warrant to search for a document, parcel or other thing in the custody of the postal or telegraph authority.

हमारा प्रयास सीआरपीसी की धारा 93 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

सीआरपीसी की धारा 92 | पत्रों और तारों के सम्बन्ध में प्रक्रिया | CrPC Section- 92 in hindi| Procedure as to letters and telegrams.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 92 के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 92 कब लागू होती है, यह भी इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

धारा 92 का विवरण

दण्ड प्रक्रिया संहिता (CrPC) में धारा 92 के अन्तर्गत यदि किसी जिला मजिस्ट्रेट, मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, सेशन न्यायालय या उच्च न्यायालय की राय में किसी डाक या तार प्राधिकारी की अभिरक्षा की कोई दस्तावेज, पार्सल या चीज, जो जांच, विचारण या अन्य कार्यवाही के प्रयोजन के लिए करना चाहिये, तो वह मजिस्ट्रेट या न्यायालय, यथास्थिति, डाक या तार प्राधिकारी से यह अपेक्षा कर सकता है कि उस दस्तावेज, पार्सल या चीज का परिदान उस व्यक्ति को, जिसका वह मजिस्ट्रेट या न्यायालय निर्देश दे, कर दिया जाए। तो वह धारा 92 के अंतर्गत उस न्यायालय के अधिकारी अथवा पुलिस अधिकारी द्वारा उस व्यक्ति को साक्ष्य, दस्तावेज अथवा कोई वस्तु नियत तिथि को प्रस्तुत करने को बतलाती है साथ ही अन्य मजिस्ट्रेट की, चाहे वह कार्यपालक हो या न्यायिक, या किसी पुलिस आयुक्त या जिला पुलिस अधीक्षक की राय में ऐसी कोई दस्तावेज, पार्सल या चीज ऐसे किसी प्रयोजन के लिए चाहिए तो वह, यथास्थिति, डाक या तार प्राधिकारी से अपेक्षा कर सकता है

जब न्यायालय अथवा पुलिस अधिकारी द्वारा किसी मामले में जांच के समय यदि , तो न्यायालय की राय में किसी डाक या तार प्राधिकारी की अभिरक्षा की कोई दस्तावेज, पार्सल या चीज इस संहिता के अधीन किसी अन्वेषण, जांच, विचारण या अन्य कार्यवाही के लिये तत्पर हो सकते है तो CrPC की धारा 92 के अंतर्गत न्यायालय अथवा पुलिस अधिकारी, दस्तावेज या अन्य चीज पेश करने के उद्देश्य से पत्रों और तारों के माध्यम से सूचित कर सकती है।

सीआरपीसी की धारा 92 के अनुसार

पत्रों और तारों के सम्बन्ध में प्रक्रिया-

(1) यदि किसी जिला मजिस्ट्रेट, मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, सेशन न्यायालय या उच्च न्यायालय की राय में किसी डाक या तार प्राधिकारी की अभिरक्षा की कोई दस्तावेज, पार्सल या चीज इस संहिता के अधीन किसी अन्वेषण, जांच, विचारण या अन्य कार्यवाही के प्रयोजन के लिए चाहिए तो वह मजिस्ट्रेट या न्यायालय, यथास्थिति, डाक या तार प्राधिकारी से यह अपेक्षा कर सकता है कि उस दस्तावेज, पार्सल या चीज का परिदान उस व्यक्ति को, जिसका वह मजिस्ट्रेट या न्यायालय निर्देश दे, कर दिया जाए।
(2) यदि किसी अन्य मजिस्ट्रेट की, चाहे वह कार्यपालक हो या न्यायिक, या किसी पुलिस आयुक्त या जिला पुलिस अधीक्षक की राय में ऐसी कोई दस्तावेज, पार्सल या चीज ऐसे किसी प्रयोजन के लिए चाहिए तो वह, यथास्थिति, डाक या तार प्राधिकारी से अपेक्षा कर सकता है कि वह ऐसी दस्तावेज, पार्सल या चीज के लिए तलाशी कराए और उसे उपधारा (1) के अधीन जिला मजिस्ट्रेट, मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, या न्यायालय के आदेशों के मिलने तक निरुद्ध रखे।

Procedure as to letters and telegrams-
(1) If any document, parcel or thing in the custody of a postal or telegraph authority is, in the opinion of the District Magistrate, Chief Judicial Magistrate, Court of Session or High Court wanted for the purpose of any investigation, inquiry, trial or other proceeding under this Code, such Magistrate or Court may require the postal or telegraph authority, as the case may be. to deliver the document, parcel or thing to such person as the Magistrate or Court directs.
(2) If any such document, parcel or thing is, in the opinion of any other Magistrate, whether Executive or Judicial, or of any Commissioner of Police or District Superintendent of Police, wanted for any such purpose, he may require the postal or telegraph authority, as the case may be, to cause search to be made for and to detain such document, parcel or thing pending the order of a District Magistrate, Chief Judicial Magistrate or Court under sub-section (1).

हमारा प्रयास सीआरपीसी की धारा 92 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।